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पिता के लिए चाणक्य नीति: ये 5 गलतियां बेटे का भविष्य कर सकती हैं बर्बाद

आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के एक महान शिक्षक, दार्शनिक, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे। उनकी बताई गई नीतियां आज भी लोगों के लिए मोटिवेशन, लाइफ मैनेजमेंट, लीडरशिप , रिलेशनशिप पेरेंटिंग से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में पालन-पोषण से जुड़े कई सुझाव भी दिए हैं। जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर सकते हैं। आचार्य चाणक्य की नीतियों में से आज बात करेंगे उन सुझावों की, जो आचार्य चाणक्य ने एक बेटे के पिता को दी हैं। आइए जानते हैं एक बेटे के पिता को भूलकर भी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए। चाणक्य नीति के अनुसार, बेटे के पिता को अपने बेटे को जरूरत से ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बेटा जिद्दी और गैरजिम्मेदार बन सकता है। बेटे को सफलता और अनुशासन का स्वाद चखाने के लिए कड़ी मेहनत और अनुशासन का महत्व समझाएं। बेटे के फैसलों में ना करें दखलअंदाजी आचार्य चाणक्य के अनुसार बेटा जब बड़ा हो जाए तो उसके हर फैसले में दखलअंदाजी ना करें। इसके विपरित, बेटे को अपने फैसले खुद करने की आजादी देनी चाहिए। अगर पिता होने के नाते बेटे के सभी फैसले आप ही लेंगे तो भविष्य में आपका बेटा अपना कोई भी फैसला खुद अकेले करने में डर महसूस करेगा। अच्छे संस्कार नहीं देना कई बार पेरेंट्स बेटों को बड़ा करते समय उन्हें पैसे की अहमियत तो सीखा देते हैं लेकिन उनमें अच्छे संस्कार नहीं डाल पाते हैं। ऐसे लड़के बड़े होकर लालची और स्वार्थी हो सकते हैं। बेटे को अनुभवहीन समझना कुछ पिता अपने बेटे को कमजोर या अनुभवहीन समझकर उसकी बातों पर विश्वास नहीं करते हैं। उनके ऐसा करने से बेटा निराश और खुद को कमजोर समझने लगता है। जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। गुणों का बखान जरूरी नहीं आचार्य चाणक्य के अनुसार अगर आपका बेटा गुणी और श्रेष्ठ है, तो उसकी तारीफ करके आपको सबको यह बताने की जरूरत नहीं है कि उसने जीवन में क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। उसके गुण और कर्तव्य खुद ही उसे समाज में पहचान दिला देंगे। हर किसी के सामने बेटे की तारीफ करने से उसके दोस्तों के मन में जलन की भावना आ सकती है। जिससे दोस्तों के साथ उसके संबंधों पर नेगेटिव असर पड़ सकता है।

चंद्र ग्रहण के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान, भूलकर भी न करें ये काम

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण को बहुत महत्वपूर्ण समय माना गया है. हर साल सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है. ग्रहण का समय अशुभ माना गया है. सूर्य ग्रहण अमावस्या तो चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि को लगता है. इस साल फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि पर सूर्य को ग्रहण लगा था. ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आया था. ऐसे में सूर्य ग्रहण का सूतक काल भी देश में नहीं माना गया था. अब फाल्गुन माह में ही चंद्र ग्रहण लगले जा रहा है. इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा 03 मार्च को है. इसी दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. ये साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण की अवधि 03 घंटे 27 मिनट होगी. ये ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा. ऐसे में इसका सूतक काल भी माना जााएगा. चंद्र ग्रहण के विशेष नियम धर्म शास्त्रों में बताए गए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए? चंद्र ग्रहण 2026 का समय     चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर में 03 बजकर 20 मिनट पर होगी.     ये चंद्र ग्रहण शाम को 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण का सूतक काल चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण लगने से 09 घंटे पहले लग जाता है. ऐसे में साल के पहले चंद्र ग्रहण का सूतक भारत में सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा. फिर शाम को ग्रहण खत्म होने के साथ ही 06 बजकर 47 मिनट पर सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा. चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें? चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले भगवान के मंदिर को परदे से ढंक दें. सूतक के दौरान अपने ईष्टदेव के मंत्रों का जाप करते रहें. सूतक शुरू होने से पहले खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें, जिससे भोजन बाद में खा सकें. ग्रहण के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन विशेष रूप से करें. चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें? ग्रहण के सूतक काल के दौरान किसी भी तरह की पूजा-पाठ न करें. चंद्र ग्रहण के समय में घर से बाहर नहीं निकलें. न नंगी आंखों से ग्रहण को देखें. सूतक काल के दौरान भोजन न बनाएं और खाएं. चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं भूलकर भी घर से न निकलें. सूतक काल में बिस्तर पर न लेटें और सोएं.

रंगों और भक्ति का महीना मार्च: होलिका दहन से चैत्र नवरात्र तक छुट्टियों की भरमार

नई दिल्ली साल 2026 का मार्च महीना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों से सराबोर रहने वाला है। इस महीने में न केवल रंगों का महापर्व होली मनाया जाएगा, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत और चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी आएगा। मार्च के पहले ही सप्ताह में होलाष्टक समाप्त होंगे, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत (March 2026 Festivals List) हो जाएगी। होली और चंद्र ग्रहण का संयोग इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06:48 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगवाली होली खेली जाएगी और इसी दिन से चैत्र माह का प्रारंभ होगा।  8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ मार्च में छुट्टियों की भी लंबी लिस्ट (March Holidays List) है। इसे जानकर आप अपना धूमने या सेलिब्रेट करने प्लान भी बना सकते हैं।   चैत्र नवरात्रि और घटस्थापना वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा 19 मार्च से शुरू होंगे। कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला सामान्य मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:46 तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:52 तक रहेगा। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद 26 मार्च को राम नवमी का महापर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

24 फरवरी का राशिफल: इन राशियों के जीवन में हो सकते हैं अहम परिवर्तन

मेष राशि आज आपका पूरा ध्यान धन के प्रबंधन और व्यावहारिक सोच पर बना रहेगा। चंद्रदेव आपके द्वितीय भाव (धन और वाणी का क्षेत्र) में गोचर कर रहे हैं, जो वेतन वृद्धि या व्यवसाय में लाभ पर चर्चा करने के लिए सही समय है। करियर के मोर्चे पर आप धन के प्रबंधन और बजट बनाने में बहुत निपुण रहेंगे। प्रेम संबंधों में आज आप स्थिरता की तलाश करेंगे। पार्टनर के साथ भविष्य की सुरक्षा पर की गई बातें रिश्तों को मजबूत बनाएंगी। करियर में तरक्की आज आपके व्यावहारिक दृष्टिकोण और सही सलाह से मिलेगी। मंगलदेव आपके एकादश भाव (लाभ का क्षेत्र) में विराजमान हैं, जिससे आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। हालांकि, इसी भाव में राहुदेव की मौजूदगी के कारण दिखावे वाली खरीदारी से बचें। शाम को परिवार के साथ बिताया गया समय आपको मानसिक सुकून देगा। सेहत के लिए गले का विशेष ध्यान रखें और खूब पानी पिएं। शुभ रंग: आइवरी या गहरा लाल | शुभ अंक: 9 उपाय: किसी कन्या को सफेद मिठाई या मिश्री दें और "ॐ अंगारकाय नमः" का जाप करें। वृषभ राशि आज का दिन आत्म-विश्वास, व्यक्तिगत निखार और शांत संकल्प का है। चंद्रमा आपकी ही राशि में उच्च के होकर विराजमान हैं, जो आपके व्यक्तित्व में एक विशेष आकर्षण और स्पष्ट निर्णय लेने की शक्ति पैदा करेंगे। करियर में दसवें भाव की पंचग्रही हलचल के बीच भी आपकी सौम्यता और धैर्य आपको कार्यक्षेत्र पर सफल बनाएगा। प्रेम संबंधों में पुराने विवादों को व्यवस्थित और संबंधों में गहराई लाने के लिए आज का दिन श्रेष्ठ है। लग्नेश शुक्र देव की कुंभ में उपस्थिति आपको प्रोफेशनल स्टेबिलिटी देगी। आर्थिक मामलों में भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान दें चंद्रमा की स्थिति आपको मजबूती को संजोने की प्रेरणा देगी। शाम को थकान से बचने के लिए सात्विक भोजन और थोड़ा विश्राम आपकी ऊर्जा बढ़ाएगा। चंद्रदेव की कृपा से आप खुद को फिर से तरोताजा महसूस करेंगे। आवेश में आकर करियर का कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचें। शुभ रंग: क्रीम | शुभ अंक: 6 उपाय: चांदी के रंग के वस्त्र पहनें और शिवलिंग पर इत्र मिश्रित जल अर्पण करें। मिथुन राशि,अचानक होने वाले खर्चों के प्रति सतर्क रहें मिथुन राशि आज का दिन पेशेवर पेशेवरों और आंतरिक शांति के बीच संतुलन बनाने का है। बारहवें भाव में उच्च के चंद्रमा रचनात्मक कल्पना और गहरी शोध के लिए दिन को बढ़िया बना रहे हैं। करियर में आप 'परदे के पीछे' रहकर शानदार काम करेंगे, जिसकी सराहना भविष्य में निश्चित है। नेटवर्किंग के लिए सुबह का समय अच्छा है, लेकिन शाम होते ही आप एकांत पसंद करेंगे। लव लाइफ में आज निजी और भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा। कपल्स के बीच गहरी और अर्थपूर्ण बातें होंगी। बुध आपके बौद्धिक विकास में सहायता करेंगे और मंगलदेव मुश्किल आर्थिक गुत्थियों को सुलझाने का अनुशासन देंगे। आज गुप्त धन लाभ की अच्छी संभावना है, लेकिन अचानक होने वाले खर्चों के प्रति सतर्क रहें। मानसिक चंचलता को शांत रखने के लिए डिजिटल स्क्रीन से दूरी और अच्छी नींद बहुत जरूरी है। शुभ रंग: लैवेंडर या चांदी सफेद | शुभ अंक: 5 उपाय: किसी धार्मिक स्थान पर पीले फल दान करें और शाम को उत्सव अगरबत्ती जलाएं। कर्क राशि आज का दिन आत्म-मंथन से बाहर निकलकर सामाजिक और आर्थिक लाभ प्राप्त करने का है। ग्यारहवें भाव में उच्च के चंद्रमा आय के नए स्रोत और प्रभावशाली मित्रों का भरपूर सहयोग दिलाएंगे। करियर में आपका प्रोफेशनल नेटवर्क ही आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित होगा और नई योजनाओं को गति मिलेगी। प्रेम संबंधों में भावनात्मक भरोसा और स्थिरता रहेगी। किसी मित्र के माध्यम से आपकी मुलाकात किसी गंभीर व्यक्ति से हो सकती है। मंगल देव आपको मुश्किल बातचीत के लिए हिम्मत देंगे, वहीं सूर्य देव और शुक्र देव आपके बदलाव के भाव को सक्रिय रूप से जोड़ेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और लंबी अवधि के निवेश के लिए दिन शुभ है। अष्टम भाव के मंगल-राहु के कारण अचानक होने वाली घबराहट से बचने के लिए योग का सहारा लें। शाम को दोस्तों के साथ बढ़ने का समय ताजगी देगा। शुभ रंग: मोती जैसा सफेद | शुभ अंक: 2 उपाय: पक्षी को चीनी युक्त चावल खिलाएं और सफेद वस्त्र धारण करें। सिंह राशि,आर्थिक स्थिति में सुधार होगा सिंह राशि आज का फोकस करियर में वर्चस्व और सकारात्मक आत्म-विश्वास पर है। चंद्रमा आपके दशम भाव में उच्च के हैं, जिससे आप नेतृत्व की कमान संभालते हैं और अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार होते हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारी आपको एक विशेषज्ञ के रूप में देखेंगे और आपकी राय को महत्व देंगे। प्रेम जीवन में मर्यादा और सम्मान का भाव प्रमुख रहेगा। शाम को किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना रिश्तों में नई ऊर्जा भरेगा। करियर में तरक्की के लिए आज आपके पास "मिडास टच" है, क्योंकि मंगलदेव आपको रोजाना के काम संभालने की ताकत दे रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय बढ़ने की प्रबल संभावना है। साझेदारी के कामों में साथियों के व्यवहार से थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है, इसलिए शांति बनाए रखें और हाइड्रेशन पर ध्यान दें। शुभ रंग: सुनहरा या रॉयल क्रीम | शुभ अंक: 1 उपाय: सूर्यदेव को लाल फूल अर्पण करें और माथे पर केसर का तिलक लगाएं।   कन्या राशि आज संबंधों के प्रति सहजता और भविष्य के बड़े लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने का दिन है। नवम भाव के चंद्रमा यात्रा, कानूनी कार्य और उच्च शिक्षा में सकारात्मक परिणाम दिलाएंगे। करियर में आप दूरगामी योजनाएं बनाने और जटिल कार्यों को व्यवस्थित करने में सफल रहेंगे। लव लाइफ में आज आप दिखावे के बजाय रिश्तों में गहराई और गंभीरता महसूस करेंगे। मंगलदेव आपको रचनात्मक शक्ति प्रदान कर रहे हैं, वहीं बुधदेव रोजाना के कामों को बारीकी से समझने और बेहतर ढंग से संभालने में मदद करेंगे। आर्थिक स्थिति में भाग्य का साथ मिलेगा और विदेशी निवेश से लाभ हो सकता है। छठे भाव के मंगल-राहु के कारण व्यवसायों पर दूसरों की छोटी गलतियों को नजरअंदाज करना ही आपके हित में होगा। अपने नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करने के लिए माइंडफुल रूटीन अपनाएं और शाम को विश्राम करें। शुभ रंग: पीला या पन्ना हरा | शुभ अंक: 5 उपाय: मंदिर में चने की दाल दान करें और "ॐ बृं … Read more

जब जीवन हो संकट में: ऋण, शत्रु और रोग पर विजय दिलाएंगी चाणक्य नीति की ये 10 बातें

लाइफ में सक्सेज के साथ जीना बहुत ही मुश्किल होता है। कई बार हमें असफलता, निराशा और लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। कुछ मौके ऐसे आते हैं जब लोग बिना अपने विवेक का इस्तेमाल किए बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं। उन सारी समस्याओं से निकलने के लिए बड़ों की बातों पर अमल करना जरूरी है। जैसे चाणक्य नीति में कही गई ये 10 बातें, जो आपको लाइफ में केवल सक्सेज नहीं देंगी बल्कि दुश्मनों से बचने और सही-गलत के पहचान का फर्क भी सिखाएगी। चाणक्य नीति की ये बात बहुत ही काम की है। अगर जीवन में सफलता और सुकून चाहिए तो कर्ज नहीं रखना चाहिए। शरीर के रोग को जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। नहीं तो ये बड़े दुख देते हैं। वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है इसका मतलब है कि अगर आप गलत और नीच प्रवृत्ति का इंसान किसी का भी बुरा कर सकता है। जैसे जंगल की आग चंदन की लकड़ी को भी नहीं छोड़ती। आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है मुसीबत के समय जो आपके साथ बना रहे वहीं सच्चा दोस्त होता है। ऐसे इंसान की परख जरूर करनी चाहिए। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य इंसान को धैर्य रखना जरूर आना चाहिए। तभी आप लाइफ में सक्सेजफुल बनेंगे। एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है कहने का मतलब है कि सौ चापलूसी करने वाले लोगों से भला एक विपरीत स्वभाव का हितैषी है। कल के मोर से आज का कबूतर भला चाणक्य की नीति उन लोगों के लिए है जो कल के बेहतर में अपने आज को गंवा देते हैं। मतलब संतोष सबसे बड़ा धन है। आज जो भी है उसमे संतोष करना सीखें। कल क्या होगा इसके चक्कर में आज के पल को खराब ना करें। आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है चाणक्य की ये नीति सिखाती है कि आप दुष्ट इंसान को कितना भी सम्मान देंगे वो आपका अहित ही करेगा। जैसे आग को सिर पर रखने पर भी वो जलाने का काम ही करेगी। भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है चाणक्य नीति की इस लाइन का मतलब है कि भूख से बेबस होकर इंसान बड़े से बड़ा पाप कर सकता है। भूखा इंसान खुद का और दूसरों का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। विद्या ही निर्धन का धन है अगर आप गरीब हैं और पैसे कमाना चाहते हैं तो आपकी जानकारी और ज्ञान ही इस काम में सबसे ज्यादा मदद करेगी। इसलिए खुद को काबिल बनाने के लिए पढ़ना जरूरी है। संकट में बुद्धि ही काम आती है चाणक्य नीति में लिखी ये बात सिखाती है कि मुसीबत के समय सबसे पहले अपनी बुद्धि और विवेक पर भरोसा करें। बुद्धि की मदद से ही आप मुसीबत से बाहर निकल सकते हैं।  

वास्तु दोष से सुरक्षा चाहिए? होलाष्टक की एंट्री से पहले घर में करें ये खास परिवर्तन

होलाष्टक का समय हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाले इस समय को 'होलाष्टक' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, जिसके कारण वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप होलाष्टक शुरू होने से पहले अपने घर और जीवन से जुड़ी कुछ खास तैयारियों को पूरा कर लेते हैं तो आप आने वाली परेशानियों और वास्तु दोषों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से कि वे कौन से काम हैं जिन्हें समय रहते निपटा लेना चाहिए। घर की गहरी सफाई और कबाड़ का निपटारा वास्तु में स्वच्छता का सीधा संबंध सकारात्मकता से है। होलाष्टक के दौरान नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, इसलिए घर के कोनों में जमा धूल-मिट्टी और मकड़ी के जाले वास्तु दोष को निमंत्रण देते हैं।  घर में पड़ी टूटी हुई क्रॉकरी, बंद घड़ियां या इलेक्ट्रॉनिक कचरा तुरंत बाहर करें। ये चीजें राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाती हैं। मुख्य द्वार के पास पुराने फटे जूते न रखें। होलाष्टक से पहले इन्हें हटा दें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुगम हो सके। ईशान कोण को दोषमुक्त करना घर का उत्तर-पूर्वी कोना यानी ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है। होलाष्टक शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करें कि इस दिशा में कोई भारी सामान या गंदगी न हो। यदि यहां कोई भारी अलमारी रखी है, तो उसे दक्षिण या पश्चिम दिशा में खिसका दें। इस कोने में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि ग्रहों की उग्रता का असर आपके घर की शांति पर न पड़े।  रसोई और नमक का उपाय वास्तु शास्त्र में रसोई को घर की समृद्धि का केंद्र माना गया है। होलाष्टक से पहले रसोई की सफाई अनिवार्य है। होलाष्टक शुरू होने से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले हुए पानी से पोंछा लगाएं। नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोखने का काम करता है। यह नियम बना लें कि होलाष्टक के दौरान रात को रसोई में जूठे बर्तन न रहें। इससे अन्नपूर्णा दोष लगता है। मुख्य द्वार का सौंदर्यीकरण वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार ही भाग्य का द्वार होता है। होलाष्टक में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। द्वार के दोनों ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं। यह चिन्ह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी शक्तियों को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। धन स्थान और तिजोरी की व्यवस्था होलाष्टक के दौरान आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान को व्यवस्थित करें। तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाएं और उसमें कुछ गोमती चक्र या कौड़ियां रखें। ध्यान रहे कि होलाष्टक शुरू होने के बाद निवेश या बड़े आर्थिक लेनदेन से बचना चाहिए, इसलिए जो भी निवेश संबंधी कागजी कार्यवाही है, उसे पहले ही पूरा कर लें। पूजा घर की शुद्धि होलाष्टक में भक्ति का विशेष महत्व है क्योंकि भक्त प्रहलाद को इसी दौरान प्रताड़ित किया गया था। अपने मंदिर की सफाई करें और भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं। खंडित मूर्तियों या तस्वीरों को विसर्जित कर दें। होलाष्टक शुरू होने से पहले शुद्ध घी का दीपक जलाने का संकल्प लें, ताकि घर का आभामंडल शुद्ध रहे।

Aaj Ka Rashifal 23 February 2026: 12 राशियों का हाल, किस पर बरसेगी किस्मत

मेष: आज मन थोड़ा भटका हुआ रह सकता है। छोटे-छोटे कामों में मन नहीं लगेगा और बार-बार मूड बदल सकता है। खर्चे अचानक निकल सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचें। घर में किसी की बात बुरी लग सकती है, लेकिन बात को दिल पर न लें। लव लाइफ में सामने वाले की बात ध्यान से सुनेंगे तो झगड़ा टल सकता है। कामकाज में जल्दबाजी न करें, धीरे-धीरे करेंगे तो बेहतर नतीजे मिलेंगे। सेहत ठीक रहेगी, बस नींद पूरी लें। वृषभ: आज पैसों को लेकर सोच-विचार ज्यादा रहेगा। कहीं से उम्मीद के उलट पैसा आ सकता है, लेकिन टिकेगा नहीं। किसी दोस्त या रिश्तेदार की बात पर तुरंत भरोसा न करें, पहले सच्चाई जान लें। ऑफिस में काम सामान्य चलेगा, ज्यादा दबाव नहीं रहेगा। लव लाइफ में थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है, खुद पहल करेंगे तो बात सुधरेगी। जरूरी न हो तो लंबी यात्रा टाल दें। मिथुन: आज थकान ज्यादा महसूस हो सकती है। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन रह सकता है। घर में किसी बात को लेकर बहस हो सकती है, शब्दों का ध्यान रखें। लव लाइफ में गलतफहमी बढ़ सकती है, इसलिए साफ बात करें। नौकरी या काम में जो चल रहा है, उसी पर फोकस रखें। नया काम शुरू करने से अभी बचें। सेहत के लिए पानी ज्यादा पिएं। कर्क: आज मन थोड़ा हल्का रहेगा। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। कामकाज में स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन सीनियर से बात करते समय सोच-समझकर बोलें। किसी पुराने मामले पर सफाई देनी पड़ सकती है। लव लाइफ में अपनापन महसूस होगा। सेहत सामान्य रहेगी, बस खानपान में लापरवाही न करें। सिंह: आज शरीर में सुस्ती या कमजोरी लग सकती है। बाहर निकलते समय संभलकर रहें, फिसलने या हल्की चोट का खतरा है। काम के मामले में फैसले आपके पक्ष में जा सकते हैं। घर में माहौल ठीक रहेगा। लव लाइफ में अच्छा समय बीतेगा, साथ बैठकर बात करने से रिश्ता मजबूत होगा। पेट से जुड़ी दिक्कत से बचने के लिए हल्का खाना खाएं। कन्या: आज बच्चों या परिवार की किसी बात को लेकर चिंता रह सकती है। घर का माहौल थोड़ा भारी लग सकता है। काम से जुड़ी कोई बात बनते-बनते अटक सकती है। प्रॉपर्टी या गाड़ी से जुड़ा मामला आगे बढ़ेगा, लेकिन समय लगेगा। मां की सेहत पर ध्यान दें। खुद को शांत रखें, ज्यादा सोचेंगे तो मन भारी होगा। तुला: आज बोलचाल में सख्ती आ सकती है। गुस्से में कही बात रिश्तों में दूरी ला सकती है। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन बचत पर ध्यान देना जरूरी है। कोई नया निवेश करने का मन बनेगा, फिलहाल रुकना बेहतर रहेगा। काम में जिम्मेदारी बढ़ सकती है। सेहत को लेकर बीपी या मुंह से जुड़ी दिक्कत परेशान कर सकती है। वृश्चिक: आज गला, नाक या कान से जुड़ी परेशानी हो सकती है। मौसम से बचाव करें। भाई-बहन को लेकर मन परेशान रहेगा। काम में ज्यादा बदलाव नहीं दिखेगा। लव लाइफ ठीक रहेगी और बच्चों से जुड़ी कोई अच्छी बात सुनने को मिल सकती है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें। धनु: आज रिश्तों में गलतफहमी की वजह से दूरी बन सकती है। बिना वजह शक करने से बचें। ऑफिस में आपकी बातों को महत्व मिल सकता है। जो लोग पब्लिक डीलिंग या राजनीति से जुड़े हैं, उनके लिए दिन ठीक है। विपरीत लिंग के साथ बातचीत में लिमिट बनाए रखें। सेहत ठीक रहेगी, लेकिन मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। मकर: आज मन में बेचैनी रह सकती है। खर्चे उम्मीद से ज्यादा निकल सकते हैं, जिससे टेंशन होगी। उधार देने या जोखिम भरे काम से दूरी रखें। कामकाज में मन नहीं लगेगा, लेकिन दिन जैसे-तैसे निकल जाएगा। लव लाइफ में बात कम हो सकती है। खुद को शांत रखने की कोशिश करें, हालात धीरे-धीरे सुधरेंगे। कुंभ: आज गुस्से पर कंट्रोल रखना जरूरी है। पैरों में दर्द या मोच जैसी दिक्कत हो सकती है। पढ़ाई करने वालों के लिए दिन ठीक है, मन लगाकर पढ़ेंगे तो फायदा मिलेगा। लव लाइफ सामान्य रहेगी। कोई बड़ा फैसला लेने का मन बनेगा, लेकिन आज टालना बेहतर है। भावुक होकर कुछ न करें। मीन: आज खर्चों पर लगाम लगाना जरूरी है। सिरदर्द या आंखों में जलन परेशान कर सकती है। लव लाइफ में मनमुटाव हो सकता है, छोटी बात को बड़ा न बनाएं। मन में बेवजह डर या चिंता रह सकती है। आज खुद को थोड़ा आराम दें और फैसले सोच-समझकर लें। हालात धीरे-धीरे बेहतर होंगे।  

होलिका को मिला था ब्रह्मा जी से वरदान, फिर भी वो क्यों जल गई और कैसे बचे प्रहलाद?

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस साल होलिका दहन 03 मार्च को मनाया जाएगा. उसके अगले दिन यानी 04 मार्च को रंगों के साथ होली खेली जाएगी. होली के आते ही होलिका दहन की कहानी सुनाई जाती है. इसमें बताया जाता है कि किस तरह से होलिका जली थी और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद बच गए थे, लेकिन आखिर प्रहलाद कैसे बच गए थे और होलिका वरदान के बाद भी क्यों जल गई थी? चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार… पौराणिक कथा के अनुसार, होलिका ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की थी. होलिका की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे एक चादर प्रदान की थी. ये चादर हमेशा उसे आग से सुरक्षित रखती थी. यही ब्रह्मा जी का वरदान था. उन्होंने होलिका से कहा था कि जब वो ये चादर ओढ़ेगी तो उसके ऊपर आग का प्रभाव नहीं होगा. होलिका का भाई हिरण्यकश्यप बहन को मिले इस वरदान के बारे जानता था. जब हिरण्यकश्यप के प्रहलाद को मारने के सारे प्रयास विफल हो गए तो उसने होलिका से अपने बेटे प्रहलाद को लेकर होली की अग्नि में बैठने के लिए कहा था. होलिका ने अपने भाई के कहे अनुसार ही काम किया वो प्रहलाद को लेकर होली की अग्नि में बैठी, लेकिन इस दौरान होलिका स्वयं जल गई और प्रहलाद बच गए. जब होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि पर बैठी तो वो उस दौरान भगवान विष्णु का नाम जपने लगे. इस वजह से अग्नि में जल गई होलिका भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका अग्नि में जल गई. होलिका इसलिए जली क्योंकि उसी मंशा छल, पाप व निर्दोष को नुकसान पहुंचाने की थी. होलिका जिस दिन आग में जली वो फाल्गुन मास की पूर्णिमा का दिन था. तभी से इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन मनाया जाने लगा.

24 फरवरी को फाल्गुन अष्टमी से शुरू हो रहे होलाष्टक?

होली से पहले आने वाले आठ दिन होलाष्टक के नाम से जाने जाते हैं, जिनका सनातन धर्म में विशेष महत्व है।साल 2026 में पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से मानी जा रही है। यह अवधि होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा तक चलती है और इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में नकारात्मक ऊर्जा प्रबल रहती है, इसलिए नई शुरुआत टाल दी जाती है।होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से भी जुड़ा है, जो अटूट भक्ति और आस्था का संदेश देती है। होलाष्टक 2026 कब से हो रहे हैं आरंभ? वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 24 फरवरी सुबह 7 बजकर 1 मिनट से होगी और यह तिथि 25 फरवरी शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि होलाष्टक का आरंभ अष्टमी तिथि से माना जाता है, इसलिए इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होंगे। क्या है होलाष्टक? होलाष्टक का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। पौराणिक कथा के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु में अटूट भक्ति से क्रोधित रहता था। उसने प्रह्लाद को आठ दिनों तक अनेक कष्ट दिए। यही आठ दिन होलाष्टक के रूप में माने जाते हैं।मान्यता है कि इन दिनों में वातावरण में उग्र और अस्थिर ऊर्जा रहती है, इसलिए शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यह समय आत्मचिंतन, साधना और संयम का माना गया है। होलाष्टक में क्या नहीं करें? शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दौरान 16 संस्कार जैसे नामकरण, जनेऊ, विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इन दिनों में हवन, यज्ञ या किसी नए कार्य की शुरुआत भी वर्जित मानी गई है।यह भी परंपरा है कि जिन कन्याओं का हाल ही में विवाह हुआ हो, वे इस अवधि में अपने मायके में रहें। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु लेने से भी बचना चाहिए। मान्यता है कि इस समय नकारात्मक प्रभाव अधिक सक्रिय रहते हैं। होलाष्टक में क्या करें? नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप करें। भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का ध्यान करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान दें। घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। श्रद्धा और नियमपूर्वक होलिका दहन की तैयारी करें। होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह समय बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मानव जीवन में संयम अनिवार्य

मनुष्य दोहरी प्रकृति का प्राणी है। एक पशु प्रवृत्ति है जो अपनी सहज प्रवृत्तियां, आवेगों इच्छाओं एवं स्वचालित प्रेरणाओं के अनुसार जीवन-यापन करती है, दूसरी एक अति जागरूक बौध्दिक नैतिक, सौन्दर्यात्मक, विवेकपूर्ण और गतिशील प्रकृति है। एक ओर ऐसा चिंतन-मनन है जो निम्न प्रकृति का परिशोधन चाहता है तो दूसरी ओर ऐसा संकल्प है जो देवत्व को जीवन में उतारने के लिए हुलसाता है। अच्छे-बुरे चिंतन और कर्म का परिणाम पाना अपने पर निर्भर करता है। व्यक्ति अनुपयुक्त विचारों को छोड़कर तथा विवेक और संयमशीलता को अपनाकर अपनी गतिविधियों में उत्कृष्टता का समावेश कर सकता है। विवेक का अभाव आज व्यक्ति ने अपना वर्तमान और भविष्य अंधकारमय बना रखा है। उसका एक ही कारण है विवेक का अभाव। मकड़ी अपना जाला स्वयं बनाती है, स्वयं ही उसमें फंसती है, परन्तु जब वह स्वतंत्र होना चाहती है तो जाले तो निगलकर स्वतंत्रता का अनुभव करने लगती है। व्यक्ति यह क्यों नहीं समझा पा रहा है कि यह जाल उसके चारों ओर उसका ही निर्मित किया हुआ है और स्वयं ही इससे छूट भी सकता है। कोई भी व्यक्ति साधना, पुरुषार्थ में प्रवृत्त होने पर सिध्द पुरुष, महामानव की स्थिति प्राप्त कर सकता है। मानव जीवन कई जन्मों के पुण्यों का प्रतिफल है। मनुष्य शरीर ही आत्मा का मंदिर है। शरीर में परमात्मा स्वयं ज्योतिस्वरूप में विराजमान हैं। ईश्वर का राजकुमार मनुष्य ही है, पर वह उस पिता को भूला हुआ है। मानव शरीर प्राप्त करने के लिए तो देवता भी लालायित रहते हैं। समस्त भारतीय साहित्य में अंतरात्मा को ब्रह्म कहकर इसके महत्व को प्रतिपादित किया है। दुर्भाग्यवश मनुष्य इस बात को भूल ही गया है। जीवन ही प्रत्यक्ष देखता है। इसकी ही सेवा उपासना सुसंस्कृत और सुदृढ़ बनाकर इसी जीवन में करनी चाहिए। आज व्यक्ति ने असंयमित जीवन अपनाकर अपना सब कुछ खो दिया है। मनुष्य ने नासमझी में सदैव अपनी मानसिक, शारीरिक शक्तियां एवं सम्पदाओं का अनावश्यक रूप से अपव्यय किया है। यदि व्यक्ति चाहे तो संयम अपनाकर परमात्मा के राजकुमार जैसी जीवन जी सकता है। संयमशीलता व कत्र्तव्य परायणता संयमशील होना तथा कत्र्तव्य परायण होना दोनों ही जीवन के अनिवार्य अंग हैं। व्यक्ति अपने आंतरिक अमृत को असंयम द्वारा निरंतर गंवाकर झूठ की भांति रह जाने पर अपने दुर्भाग्य का रोना रोता रहता है। असंयमी व्यक्ति निरंतर पतनोन्मुख होकर किस प्रकार दुर्गति को प्राप्त होता है। यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वह किस प्रकार उन्हें नियंत्रित करे। पूर्णरूपेण असंयम को तुरन्त छोड़ना संभव न हो तो भी अपने आप को हटाते अवश्य चलना चाहिए। आज की अपेक्षा कल वह असंयम घटे-बढ़े नहीं। संयम को सरलता के लिए चार भागों में बांटा गया है। 1. इन्द्रिय संयम 2. समय संयम, 3. विचार संयम, 4. साधन (अर्थ) संयम। जीवन देवता के माध्यम से ईश्वर ने मनुष्य को इन्द्रिय शक्ति, समय शक्ति एवं विचार शक्ति की अनुपम सम्पदा प्रदान की है। साधन (अर्थ) शक्ति इन तीनों के संयुक्त प्रयास से पुरुषार्थ द्वारा अर्जित की जा सकती है, जो व्यक्ति इनमें से किसी एक की भी अवहेलना करता है, वही आंसू बहाता है। इन्द्रिय संयम: इन्द्रियों का संयम ही मानव जीवन में सबसे अधिक आवश्यक है। इन्द्रियों पर यदि अंकुश नहीं है तो व्यक्ति का पतन और दुर्गति अवश्य होती है। विशेष रूप से जिव्हा तथा जननेन्द्रिय को वश में करना आवश्यक है। जिव्हा के दो कार्य हैं- एक रसास्वादन करना, दूसरा वार्तालाप करना। ये दोनों ही कार्य महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य का नष्ट होना, पारिवारिक कलह तथा झगड़ों का मूल कारण जिव्हा का असंयम होनी ही होता है। वाणी से व्यक्ति किसी को मित्र व शत्रु बना सकता है। कहते हैं तलवार का घाव तो भर जाता है, परन्तु कटु वाणी का घाव जीवन भर नहीं भरता। कटु वाणी का घाव जीवन भर नहीं भरता। कटु वचन असहनीय होते हैं। समय संयम: समय के संयम से ही मनुष्य महत्वपूर्ण सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। इसमें थोड़ी-सी शिथिलता भी व्यक्ति को प्रमादी बना डालती है। जीवन में सार्थकता इसी में है कि जीवन का एक क्षण भी व्यर्थ न जाए। विचार संयम: व्यक्ति विचारों को ही कार्यरूप में परिणित करता है। जो कुछ व्यक्ति सोचता है वैसा ही करता है और वैसी ही बन जाता है। विचारों की अस्वच्छता से उत्तेजना, असहिष्णुता, निष्ठुरता की पैशाचिक प्रवृत्तियां पनपती हैं, उन्हीं के कारण मनुष्य नर पिशाच तक बन जाता है। विचारों को संयमित करके व्यक्ति लौकिक और आंतरिक जगत में आनन्द और लाभ ले सकता है। विचारों के असंयम से ही मन, समय एवं धन का अपव्यय आरम्भ होता है। साधन (अर्थ) संयम: भौतिक जगत हो चाहे आत्मिक किसी भी क्षेत्र में मनुष्य को अपव्यय की छूट नहीं है। धन की सार्थकता नेकी की कमाई में है और दूसरों के हित में अपने साधन लगाने में है। धन का अपव्यय या दुरुपयोग करना लक्ष्मी का साक्षात् अपमान है। अत्यधिक संचय अपव्यय सिखाता है। इसी से आडम्बर युक्त प्रदर्शन, फैशनपरस्ती, विवाहों में अनावश्यक व्यय किया जाता है। जुआ, मदिरा जैसे व्यसन घरों में पनपते हैं। कत्र्तव्य परायणता: उच्च उद्देश्यों जुड़े कत्र्तव्य पालन का नाम ही कर्मयोग है। मनुष्य और पशु में ईश्वर ने यही अंतर किया कि कत्र्तव्य और्र अकत्तव्य में भेद करने की क्षमता मनुष्य को दी है पशु को नहीं, परन्तु अभागा मनुष्य अपने शरीर को निरोगी, मन संतुलित और चरित्र को उज्ज्वल रखने का दायित्व भी ठीक से नहीं निभा पाता। दुष्प्रवृत्तियों पर नियंत्रण संयमित और कत्र्तव्यपरायणता जीवन सुलभ और आनन्ददायक भी है। कत्र्तव्य पालन से पहले व्यक्ति को संयमी बनना पड़ता है। असंयमित जीवन-यापन करने वाले तिरस्कार और भर्त्सना के पात्र बनते हैं। कोई-कोई असफल होने पर ही श्रध्दा के पात्र होते हैं। केवल संयमशीलता एवं कत्र्तव्यपरायणता उन्हें यह स्थान दिलाती हैं। लक्ष्मीबाई, तात्याटोपे, शहीद भगत सिंह की जीवन गाथाएं इसके उदाहरण हैं। इसमें ऐसा कोई कारण नहीं कि मनुष्य अपनी दुष्प्रवृत्तियों पर नियंत्रण न कर सके। आईए, हम भी संयमशीलता एवं कत्र्तव्यपरायणता का स्वयं निर्वाह कर दूसरों को भी इस राजमार्ग पर चलने की सीख देकर मानव जीवन को सार्थक करें। यदि हमें अपनी और अपने समाज की आरोग्यता प्रिय है, यदि हम दीर्घजीवी होना चाहते हैं और अपने बच्चों को अकाल मृत्यु से ग्रस्त होने देना नहीं चाहते तो हमें संयम की प्रतिष्ठा करनी होगी। अपने निज … Read more