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शनि की चाल बदलेगी भाग्य, मेष समेत इन राशियों को रहना होगा सावधान

 ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है. कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार परिणाम देते हैं. इसलिए शनि का राशि या नक्षत्र बदलना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और इसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है. इस बार 17 अप्रैल 2026 को शनि अपनी स्थिति में बदलाव करने जा रहे हैं. दरअसल, शनि उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे और लगभग 17 मई तक इसी स्थिति में रहेंगे. इसी दिन वैशाख अमावस्या भी है, जिसे स्नान और दान के लिए बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, यह समय कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. खासतौर पर 4 राशियों को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. मेष राशि मेष राशि पर पहले से ही शनि साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है, ऐसे में शनि की चाल में बदलाव आपको और सतर्क रहने का संकेत दे रहा है. करियर में अचानक बदलाव या बाधाएं आ सकती हैं. क्या करें: कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें और पैसों के मामले में सोच-समझकर कदम उठाएं. कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. नौकरी या काम में स्थिरता कम हो सकती है और परिवार के साथ मतभेद बढ़ने की संभावना है. क्या करें: शांत रहें, छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करें और मानसिक संतुलन बनाए रखें. तुला राशि तुला राशि वालों के आत्मविश्वास में थोड़ी कमी महसूस हो सकती है. काम में देरी हो सकती है और मेहनत का फल तुरंत नहीं मिलेगा. क्या करें: धैर्य रखें और लगातार प्रयास करते रहें, जल्द ही स्थिति सुधरेगी. मकर राशि मकर राशि के लिए शनि का यह बदलाव खर्चों में अचानक बढ़ोतरी ला सकता है. सेहत को लेकर भी थोड़ी परेशानी हो सकती है. क्या करें: खर्चों को नियंत्रित रखें और अपनी दिनचर्या और खान-पान का खास ध्यान रखें.

अक्षय तृतीया 2026: 19 अप्रैल को खरीदारी का शुभ मुहूर्त, जानें सस्ती शुभ चीजें

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी  काम किया जाता है, उसका फल कभी खत्म नहीं होता और बढ़ता ही रहता है. इसी वजह से लोग इस दिन सोना खरीदते हैं, लेकिन हर किसी के लिए सोना लेना आसान नहीं होता है. ऐसे में आप बिना ज्यादा खर्च किए भी इस दिन को खास बना सकते हैं. कुछ सस्ती और रोजमर्रा की चीजें खरीदना भी उतना ही शुभ माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन कौन सी सस्ती चीजें खरीदनी चाहिए. मिट्टी की चीजें खरीदें अक्षय तृतीया पर मिट्टी का घड़ा, दीया या गमला खरीदना अच्छा माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और शांति बनी रहती है. तांबे के बर्तन लें तांबा भी शुभ धातु माना जाता है. इस दिन तांबे का लोटा या बर्तन खरीदना घर के लिए अच्छा होता है. हल्दी और चावल खरीदें हल्दी और चावल पूजा में काम आते हैं और इन्हें शुभता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन इन्हें खरीदना और घर लाना अच्छा होता है. साबुत धनिया लें अक्षय तृतीया पर साबुत धनिया खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है. इसे धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. लाल कपड़ा या रूई लाल कपड़ा और रूई भी पूजा में उपयोगी होती है. इन्हें खरीदना भी शुभ फल देने वाला माना जाता है. दान-पुण्य भी करें अगर आप कुछ खरीद नहीं पा रहे हैं, तो इस दिन जरूरतमंदों को दान करना भी उतना ही अच्छा माना जाता है. इससे मन को सुकून मिलता है और घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है. सोने-चांदी की खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह (चर, लाभ, अमृत): सुबह 10:49 से लेकर दोपहर 12:21 दोपहर (शुभ): 01:58 पीएम से लेकर 03:35 पीएम शाम (शुभ, अमृत, चर): 06:50 पीएम से लेकर 10:58 पीएम रात (लाभ): 01:43 एम से लेकर 03:06 एम (20 अप्रैल) सुबह जल्दी (शुभ): 04:29 एम से लेकर 05:52 एम AM (20 अप्रैल)

16 अप्रैल राशिफल: शुभ दिन रहेगा कुछ राशियों के लिए, बाकी को होगी चुनौतियों का सामना

मेष मेष राशियों के लिए दिन अच्छा रहेगा, खासकर बिजनेस वालों के लिए। आपकी योजनाएं आगे बढ़ेंगी और धन लाभ के संकेत हैं। परिवार में थोड़ा मनमुटाव हो सकता है, जिससे मन परेशान रहेगा। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। काम को लेकर उत्साह रहेगा, लेकिन कुछ रुकावट भी आ सकती है। वृषभ निवेश के लिए दिन ठीक है, लेकिन उधार लेने या दिखावे में पैसा खर्च करने से बचें। धैर्य बनाए रखें, खासकर मुश्किल समय में। किसी की सलाह पर बिना सोचे निवेश न करें। सही निर्णय लेने से फायदा होगा। मिथुन आज आपको कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। काम में आपकी मेहनत और टैलेंट दिखेगा। पैसे के मामले में दिन अच्छा रहेगा। दोस्तों या किसी योजना से फायदा मिल सकता है। प्रेम जीवन भी अच्छा रहेगा और रिश्ते मजबूत होंगे। कर्क आपको किसी जरूरी चर्चा में शामिल होना पड़ सकता है। नया वाहन लेने का योग है। बिजनेस में सुधार होगा और रुके काम पूरे होंगे। किसी की बातों में आकर झगड़ा करने से बचें। मेहनत करते रहें, सफलता मिलेगी। सिंह धार्मिक कार्यों में मन लगेगा और भाग्य आपका साथ देगा। नौकरी में तारीफ या प्रमोशन मिल सकता है। परिवार से जुड़े फैसले ले सकते हैं। किसी कार्यक्रम में अपनी बात जरूर रखें। माता की सेहत का ध्यान रखें। कन्या जल्दबाजी में कोई काम न करें। सेहत को लेकर सावधान रहें। अपने जरूरी कामों को नजरअंदाज न करें। कोई पुराना मामला सुलझ सकता है। आलस्य छोड़कर धीरे-धीरे काम पूरा करें। तुला दिन सामान्य रहेगा, लेकिन निजी जीवन की परेशानियां थोड़ा तनाव दे सकती हैं। पार्टनरशिप में सोच-समझकर काम करें। प्रॉपर्टी लेने का मौका मिल सकता है। दोस्तों से बात करते समय सावधानी रखें। वृश्चिक मेहनत से काम करने का दिन है। किसी बहस में पड़ने से बचें। भावनाओं में आकर फैसला न लें। आपकी आमदनी बढ़ सकती है, जिससे खुशी मिलेगी। माता-पिता के आशीर्वाद से रुका काम पूरा होगा। धनु नौकरी ढूंढ रहे लोगों के लिए अच्छा समय है। व्यापार में खुशखबरी मिल सकती है। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए संभलकर चलें। कोई बचत योजना शुरू कर सकते हैं। परिवार से खुशी मिलेगी। मकर पारिवारिक मामलों में सावधानी रखें। किसी लेनदेन में समस्या आ सकती है। धैर्य से काम लें और बड़ों की बात मानें। पढ़ाई या प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। कुंभ आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। सामाजिक कामों में हिस्सा लेंगे। रिश्तों को मजबूत बनाने की कोशिश करें। विदेश से जुड़े काम में फायदा हो सकता है। जीवनसाथी से बातें छुपाने से बचें। मीन नए लोगों से जुड़कर आपको फायदा मिलेगा। आपकी बातों और व्यवहार से लोग प्रभावित होंगे। मन की इच्छा पूरी हो सकती है। आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी और सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी।

वैराग्य का अर्थ और मनुष्य की द्वंद्वात्मक भाषा का भ्रम

वैराग्य का अर्थ, जहां न राग रह गया, न विराग रह गया। जहां न किसी चीज का आकर्षण है, न विकर्षण है। न किसी चीज के प्रति खिंचाव है, न विपरीत भागना है। जहां न किसी चीज का बुलावा है, न विरोध है। जहां व्यक्ति थिर हुआ, सम हुआ, जहां पक्ष और विपक्ष एक से हो गए, वहां वैराग्य फलित होता है। लेकिन इसे विराग या वैराग्य क्यों कहते हैं? जहां वैराग्य भी नहीं है, वहां वैराग्य क्यों कहते हैं? क्योंकि कोई उपाय नहीं है। शब्द की मजबूरी है, और कोई बात नहीं है। आदमी के पास सभी शब्द द्वंद्वात्मक हैं, डायलेक्टिकल हैं। आदमी की भाषा में ऐसा शब्द नहीं है जो नॉन-डायलेक्टिकल हो, द्वंद्वात्मक न हो। मनुष्य ने जो भाषा बनाई है, वह मन से बनाई है। मन द्वंद्व है। इसलिए मनुष्य जो भी भाषा बनाता है, उसमें विपरीत शब्दों में भाषा को निर्मित करता है। मजे की बात है कि हमारी भाषा बन ही नहीं सकती विपरीत के बिना। क्योंकि बिना विपरीत के हम परिभाषा नहीं कर सकते। अगर कोई आपसे पूछे कि अंधेरा यानी क्या? तो आप कहते हैं, जो प्रकाश नहीं है। कोई पूछे, प्रकाश क्या? तो आप कहते हैं, जो अंधेरा नहीं है। न आपको अंधेरे का पता है कि क्या है, न प्रकाश का पता है कि क्या है? अंधेरे को जब पूछते हैं, तो कह देते हैं, प्रकाश नहीं है। जब पूछते हैं, प्रकाश क्या है? तो कह देते है, अंधेरा नहीं है। यह कोई परिभाषा हुई? परिभाषा तो तभी हो सकती है, जब कम से कम एक का तो पता हो! एक आदमी एक अजनबी गांव में गया। उसने पूछा कि 'अ' नाम का आदमी कहां रहता है? तो लोगों ने कहा, 'ब' नाम के आदमी के पड़ोस में। पर उसने कहा, मुझे 'ब' का भी कोई पता नहीं, 'ब' कहां रहता है? उन्होंने कहा, 'अ' के पड़ोस में। ऐसे ही आदमी से पूछो, चेतना क्या है? वह कहता है, जो पदार्थ नहीं है। उससे पूछो, पदार्थ क्या है? वह कहता है, जो चेतना नहीं। माइंड क्या है? मैटर नहीं। मैटर क्या है? माइंड नहीं। बड़े से बड़ा दार्शनिक भी इसको परिभाषा कहता है। यह डेफिनिशन हुई? यह तो धोखा हुआ, डिसेप्शन हुआ- परिभाषा न हुई। क्योंकि इसमें से एक का भी पता नहीं है। आदमी को कुछ भी पता नहीं है, लेकिन काम तो चलाना पड़ेगा। इसलिए आदमी बेईमान शब्दों को रखकर काम चलाता है। उसके सब शब्द डिसेप्टिव हैं। उसके किसी शब्द में कोई भी अर्थ नहीं है। क्योंकि अपने शब्द में वह जिस शब्द से अर्थ बताता है, उस शब्द में भी उसको कोई अर्थ पता नहीं है। उसकी सब परिभाषाएं सर्कुलर हैं, वर्तुलाकार हैं। वह कहता है, बाएं यानी क्या? वह कहता है, जो दाएं नहीं है। और दाएं? वह कहता है, जो बाएं नहीं है। लेकिन इनमें से किसी को पता है कि बायां क्या है? यह आदमी की भाषा डायलेक्टिकल है। डायलेक्टिकल का मतलब यह कि जब आप पूछें 'अ' क्या, तो वह 'ब' की बात करता है। जब पूछें 'ब' क्या, तो वह 'अ' की बात करने लगता है। इससे भ्रम पैदा होता है कि सब पता है। पता कुछ भी नहीं है, सिर्फ शब्द पता हैं। लेकिन बिना शब्दों के काम नहीं चल सकता। राग है तो विराग है। लेकिन तीसरा शब्द कहां से लाएं? और तीसरा शब्द ही सत्य है। वह कहां से लाएं?- ओशो

अक्षय तृतीया से पहले शनि का बड़ा बदलाव, करियर-धन में फायदा

19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है और ठीक 2 दिन पहले 17 अप्रैल को शनि नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं. इस दिन शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 17 मई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिषविदों का कहना है कि अक्षय तृतीया से पहले शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ राशियों के लिए बहुत ही लकी माना जा रहा है और शुभ परिणाम लेकर आने वाला है. आइए जानते हैं कि शनि पद नक्षत्र परिवर्तन किन राशियों के लिए लाभकारी रहने वाला है. वृषभ राशि शनि का पद नक्षत्र परिवर्तन सकारात्मक संकेत लेकर आ सकता है. करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. मेहनत का फल मिलने लगेगा. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. रुका हुआ धन भी वापस मिल सकता है. मिथुन राशि यह समय आपके लिए संतुलन और सफलता लेकर आ सकता है. साझेदारी में लाभ होगा. नए कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं. रिश्तों में सुधार देखने को मिलेगा. किसी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने के योग हैं. लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं. नौकरी और बिजनेस में अच्छे मौके मिलेंगे. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. कन्या राशि आपके लिए यह परिवर्तन राहत भरा रहेगा. मानसिक तनाव कम होगा. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा. खर्चें कंट्रोल में रहेंगे. धनु राशि धनु राशि के लोगों के लिए यह समय करियर ग्रोथ का हो सकता है. प्रमोशन या नई नौकरी के योग बन रहे हैं. यात्रा से भी लाभ मिल सकता है. शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल और तेल का दान करें, हनुमान जी की पूजा करें, शनिदेव के मंत्रों का जाप करें, कौओं को भोजन कराएं और अपने कर्मों में सुधार करें.

शुक्र गोचर 2026: बनेगा मालव्य और शुक्रादित्य राजयोग, इन राशियों को फायदा

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 की रात 10 बजकर 19 मिनट पर शुक्र भरणी नक्षत्र से निकलकर कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 19 अप्रैल को शुक्र वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग बनेगा. सूर्य के स्वामित्व वाले कृत्तिका नक्षत्र में शुक्र का प्रवेश 'शुक्रादित्य राजयोग' भी बना रहा है. यह खगोलीय बदलाव 27 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा और इस दौरान कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन क्यों है खास? ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शुक्र जब कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के साथ उनका विशेष संबंध बनता है. शुक्र और सूर्य की युति से बनने वाला शुक्रादित्य राजयोग व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, आकर्षण, आर्थिक लाभ और रिश्तों में सुधार लेकर आता है. वहीं, वृषभ राशि में शुक्र का प्रवेश मालव्य राजयोग बनाकर भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है. आइए जानते हैं किन राशियों को इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है. मेष राशि (Aries Zodiac) मेष राशि वालों के लिए शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. इस दौरान आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा. लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. बचत करने के भी मौके मिलेंगे. व्यापारियों को विशेष लाभ मिल सकता है, खासकर जो लोग आयात-निर्यात से जुड़े हैं. विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं. लव लाइफ भी बेहतर रहेगी. अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं. दांपत्य जीवन में भी मिठास बनी रहेगी. सिंह राशि (Leo Zodiac) सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय कई अच्छे संकेत लेकर आ सकता है. करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं. नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई नौकरी मिलने का मौका मिल सकता है. परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा. घर में शांति बनी रहेगी. धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर झुकाव बढ़ सकता है, जिससे यात्रा के योग भी बन सकते हैं. व्यापार करने वालों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है. जो लोग उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं, उनके लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा. घर में वाहन या प्रॉपर्टी लेने का सपना भी पूरा हो सकता है. धनु राशि (Sagittarius Zodiac) धनु राशि के लिए शुक्र का कृत्तिका नक्षत्र में जाना सकारात्मक परिणाम दे सकता है. इस दौरान आपकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी. नए विचार सामने आ सकते हैं. करियर में नए मौके मिल सकते हैं. आपके आइडियाज की वजह से सफलता मिलने के योग बनेंगे. बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय फायदेमंद रहेगा. प्रेम संबंधों में सुधार देखने को मिल सकता है. रिश्तों में नजदीकी बढ़ेगी. हालांकि शादीशुदा लोगों को छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस से बचने की सलाह दी जाती है. आर्थिक स्थिति मजबूत रह सकती है. जीवन में संतुलन बना रहेगा. कब तक रहेगा असर? द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 27 अप्रैल 2026 तक कृत्तिका नक्षत्र में रहेंगे और इसके बाद रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इस पूरे समय में बने राजयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम दे सकते हैं, खासकर प्रेम, करियर और आर्थिक मामलों में. क्या करें इस दौरान? – शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र पहनें. – माता लक्ष्मी की पूजा करें. – सुगंधित इत्र या सफेद फूल अर्पित करें. – जरूरतमंदों को मिठाई या सफेद वस्त्र दान करें.

छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार दफनाकर क्यों किया जाता है? जानें धार्मिक कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार जलाकर नहीं, बल्कि दफनाकर क्यों किया जाता है? हिंदू धर्म में आमतौर पर मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके बंधनों से मुक्त करती है. लेकिन जब बात छोटे बच्चों या अविवाहित बच्चों की आती है, तो यह परंपरा बदल जाती है. इसका मुख्य कारण बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, छोटे बच्चों ने अभी तक कोई ऐसे कर्म नहीं किए होते हैं, जिनके कारण उन्हें जन्म-मरण के बंधन में फंसना पड़े. उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त होती है. इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की जरूरत नहीं मानी जाती है. नहीं होता है बच्चों का अग्नि संस्कार गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटा हो, उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कई मान्यताओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा बताई गई है. ऐसा माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चे में 'मैं' और 'मेरा' का भाव विकसित नहीं होता है. आध्यात्मिक दृष्टि से भी कहा जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर. बड़े लोगों में ये तीनों आपस में मजबूत रूप से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है. लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का और सरल होता है, इसलिए उनकी आत्मा आसानी से शरीर छोड़ देती है. क्या है वैज्ञानिक कारण? वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो छोटे बच्चों का शरीर बहुत कोमल होता है. उनके सिर का ऊपरी हिस्सा (जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है) पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं. इसलिए कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती. प्रकृति से जुड़ा है रहस्य हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, से बना माना गया है. बड़े व्यक्ति के शरीर को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, लेकिन बच्चे का शरीर अभी प्रकृति के सबसे करीब माना जाता है. इसलिए, उसे सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है. एक और कारण भी है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए बहुत दुखद होती है. ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह एहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है.

2026 में आएगा अधिकमास, जानें कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास

 कई सालों में एक बार हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. साल 2026 में भी ऐसा ही खास साल आने वाला है. इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह समय त्योहारों से ज्यादा पूजा, साधना और आत्मचिंतन के लिए माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा के हिसाब से चलता है, जो सूर्य के साल से करीब 11 दिन छोटा होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. 2026 में अधिकमास कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा. इस बार यह ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है, जिसकी वजह साल 2026 में 1 महीना ज्यादा बढ़ गया है. यानी यह साल 13 महीने को होगा. एक साल में दो ज्येष्ठ महीने विक्रम संवत 2083 में एक खास बात यह भी होगी कि दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे. एक होगा सामान्य ज्येष्ठ मास और दूसरा होगा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) मास. अधिकमास के कारण ज्येष्ठ महीना लगभग 58-59 दिनों तक चलेगा और दोनों महीने कुछ समय के लिए आपस में मिलेंगे. इस बार अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. वहीं, सामान्य ज्येष्ठ मास की शुरुआत 22 मई 2026 से होगी और समापन 29 जून 2026 को होगी. इसी वजह से यह साल पंचांग और खगोलीय दृष्टि से बहुत खास माना जा रहा है. अधिकमास में क्या करें? – दान-पुण्य करें- अधिकमास में गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की चीजें दान करना बहुत शुभ माना जाता है. – दीपदान करें- हर दिन या खास दिनों पर दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है. – मंत्र जाप करें- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ होता है. – धार्मिक ग्रंथ सुनें या पढ़ें- इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना जाता है. – पवित्र स्नान करें- गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. अधिकमास में क्या न करें? अधिकमास में किसी नए काम की शुरुआत न करें. शादी या सगाई जैसे मांगलिक कार्य टालें. गृह प्रवेश या जमीन-घर से जुड़े बड़े फैसले न लें. मुंडन या जनेऊ जैसे संस्कार न करें. बड़े निवेश या लेन-देन से बचें. व्रत की शुरुआत या उद्यापन न करें.

15 अप्रैल राशिफल: कुछ राशियों को मिलेगा शुभ लाभ, तो कुछ को झेलनी होंगी चुनौतियां

आज मेष राशि वालों के लिए आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आपको थोड़ा कंट्रोल भी रखना होगा रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें। आज वृषभ राशि वालों का ग्रहों के कारण मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी, इसलिए आपको कई अटक सकते हैं। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखें। सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए परिवार से धन मिल सकता है। मिथुन राशि वालों के लिए समय उत्तम है। आपको इस समय: आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे।कोशिश करें कि पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। बौद्धिक कार्यों से मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। किसी मित्र के सहयोग से आय बढ़ सकती है। कर्क राशि वालों के लिए आपका दांपत्य सुख अच्छा रहेगा, आपकी अपनी इनमक में बढ़ोतरी होगी। मन में उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। सिंह राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा, परंतु परिवार से दूर िकसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। कन्या राशि वालों को इस खुद पर थोड़ा कंट्रोल करना होगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। पिता की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में बदलाव हो सकता है। किसी मित्र का सहयोग मिलेगा। तुला राशि वालों के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में उतार-चढ़ाव भी रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर भी मिलेंगे, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें धनु राशि के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन भी परेशान हो सकता है, लेकिन इससे परेशान ना हों। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा, पर कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। वृश्चिक राशि वालों का मन परेशान हो सकता है। माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। खर्चों की अधिकता रहेगी। रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा। कुंभ राशि वाले आज आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। किसी मित्र के सपोर्ट से आय में वृद्धि के साथ बन सकते हैं। हेल्थ का ध्यान रखें। मकर राशि के लिए आज दिन अच्छा रहने वाला है। आपको लवलाइफ में अच्छे पल मिलेगें। आर्थिक तौर पर भी आज आगे बढ़ रहे हैं। हेल्थ को लेकर ध्यान रखें। मीन राशि के लिए समय उत्तम है। वाणी और अपनी फैसले लेने पर थोड़ा सोच समझकर फैसला लें। तभी आप सफल हो पाएंगे।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं। दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए 1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। 2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है। 3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है। 4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं। दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं 1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।