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एकादशी ही नहीं! अन्न न खाने के 5 बड़े नियम

 सनातन धर्म में व्रत, उपवास और नियमों का गहरा महत्व है. जब भी बिना अन्न खाए उपवास रखने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम एकादशी का आता है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल या भारी भोजन का त्याग करना अनिवार्य माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों और स्मृतियों में सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य ऐसे बेहद खास और संवेदनशील मौके बताए गए हैं, जब सामान्य व्यक्ति को अन्न ग्रहण करने से सख्त परहेज करना चाहिए? पौराणिक शास्त्रों के सूत्रों के अनुसार, इन विशेष अवसरों पर भोजन करने से पुण्य का नाश होता है और दोष लगता है. आइए जानते हैं एकादशी के अलावा वो कौन से 5 मौके हैं, जब रसोई में अन्न की जगह फलाहार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण (Eclipse) शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे भोजन दूषित हो जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे पका हुआ भोजन सही नहीं रहता है. कन्यादान: महादान के संकल्प से पहले का संयम हिंदू विवाह पद्धति में कन्यादान को संसार के सबसे बड़े और पवित्र पुण्यों में गिना गया है. माता-पिता अपनी लाडली को किसी अन्य कुल को सौंपते समय एक महान संकल्प लेते हैं. शास्त्रों का नियम है कि जिस दिन घर में यह महादान होना हो, उस दिन माता पिता को कन्यादान या फेरे पूरे होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस मांगलिक कार्य से पहले अन्न ग्रहण करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है. संकल्प की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है. हरिजन्मकाले: प्रभु के प्राकट्य और जन्मोत्सव का पावन दिन भगवान राम का जन्मोत्सव (रामनवमी), भगवान कृष्ण की जन्मतिथि (जन्माष्टमी), इसके साथ ही नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती और जानकी नवमी जैसे पावन अवसर 'हरिजन्मकाले' की श्रेणी में आते हैं. यह वो समय होता है जब साक्षात ईश्वर ने पृथ्वी पर अवतार लिया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन देवी-देवताओं के जन्मोत्सव के दिन दोपहर या मध्यरात्रि तक उपवास रखना चाहिए. इस दिन अन्न खाने के बजाय शुद्ध सात्विक फलाहार या दूध का सेवन करना अधिक शुभ माना जाता है. द्विजभोजने: संत और ब्राह्मण की थाली से पहले स्वयं का त्याग भारतीय संस्कृति में अतिथि और संतों को साक्षात नारायण का रूप माना गया है. धर्म शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि यदि आपके द्वार पर कोई साधु, संत, ब्राह्मण या अतिथि खाने के लिए आमंत्रित है, तो द्विजभोजने के नियम का पालन करें. इसका सीधा अर्थ है कि जब तक आए हुए अतिथि आदरपूर्वक भोजन न कर लें, तब तक घर के सदस्यों को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. उनके भोजन करने से पहले खुद पेट भर लेना मर्यादा के खिलाफ और दोषपूर्ण माना गया है. प्राणप्रयाणे: शोक और सूतक का समय मानव जीवन का सबसे अंतिम और कड़वा सच मृत्यु है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब परिवार में या किसी करीबी के यहां किसी के प्राण चले जाए तो वह समय बेहद शोक और संयम का होता है. किसी की मृत्यु होने पर या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक घर में चूल्हा जलाना या अन्न ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है. यह समय सूतक का होता है और मानसिक रूप से गहरे शोक का, इसलिए इस दौरान भोजन से दूरी बनाकर मृतक के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करनी चाहिए.  

फ्रिज में ये गलती मत करो! वरना रुकेगी बरकत

अमूमन हम सब फ्रिज को सही दिशा में रखने के वास्तु नियमों के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज के अंदर की व्यवस्था भी आपके घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित करती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, फ्रिज के भीतर अलग-अलग शेल्फ पर चीजों को सही ढंग से न रखने पर ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है. चूंकि फ्रिज में जल और अग्नि दोनों के तत्व होते हैं, इसलिए इसके अंदर की आंतरिक दिशाओं और शेल्फ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार फ्रिज के किस शेल्फ पर क्या रखना सबसे शुभ माना जाता है. 1.  सबसे ऊपरी हिस्से में क्या रखें फ्रिज का सबसे ऊपरी हिस्सा (फ्रीजर के ठीक नीचे वाला शेल्फ) सबसे ठंडा और ऊंचाई पर होता है. वास्तु में ऊंचाई को गरिमा और पवित्रता से जोड़ा जाता है. क्या रखें: यहां दूध, दही, पनीर, मक्खन और शुद्ध घी (यदि फ्रिज में रखते हों) जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स रखने चाहिए. दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है, इसे हमेशा ऊंचे और साफ शेल्फ पर ही स्थान दें. वास्तु नियम: इस शेल्फ पर कभी भी बचा हुआ बासी खाना या मांसाहारी चीजें न रखें. 2. बीच के शेल्फ फ्रिज का बीच का हिस्सा घर के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) की तरह संतुलन का प्रतीक होता है. क्या रखें: यहाँ आप रात का बचा हुआ पका हुआ भोजन (ढककर), गूंथा हुआ आटा, दालें या बची हुई मिठाइयां रख सकते हैं. वास्तु नियम: ध्यान रखें कि पका हुआ भोजन कभी भी खुला न छूटे. वास्तु के अनुसार, भोजन को खुला छोड़ने से उसमें नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है, जो सेहत पर असर डालती है. साथ ही, बासी भोजन को 24 घंटे से ज्यादा फ्रिज में न रखें, क्योंकि यह राहु के प्रभाव को बढ़ाता है. 3. सबसे निचला शेल्फ या बास्केट फ्रिज का सबसे निचला हिस्सा जमीन यानी पृथ्वी तत्व से जुड़ा माना जाता है. क्या रखें: प्रकृति से मिलने वाली चीजें जैसे ताजी हरी सब्जियां, जड़ वाली सब्जियां (गाजर, मूली) और फल हमेशा इसी हिस्से में रखने चाहिए.  पृथ्वी तत्व इन चीजों की प्राकृतिक सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखता है. वास्तु नियम: इस बास्केट में कभी भी सड़ रहे फल या गल चुकी सब्जियां जमा न होने दें. सूखी हुई धनिया पत्ती या सड़े हुए नींबू तुरंत फेंक दें, वरना यह घर में बुध और राहु का दोष पैदा करता है, जिससे बरकत रुकती है. 4. फ्रिज का दरवाजा (Refrigerator Door): फ्रिज के दरवाजे में वेंटिलेशन और तापमान में थोड़ा बदलाव होता रहता है, इसलिए यहाँ केवल वही चीजें रखें जो जल्दी खराब नहीं होतीं. क्या रखें: पानी की बोतलें, जूस, नींबू, अदरक, सॉस और अचार जैसी चीजें दरवाजे की शेल्फ में रखें. वास्तु नियम: पानी की बोतलों को हमेशा साफ रखें. अगर आप फ्रिज में सॉस या अचार की बोतलें रख रहे हैं, तो ध्यान दें कि उनकी एक्सपायरी डेट न निकल चुकी हो. बंद या खराब हो चुकी चीजें दरवाजे पर रखने से घर के मुख्य सदस्यों के कामों में रुकावटें आती हैं. फ्रिज के अंदर की एनर्जी को पॉजिटिव रखने के नियम कांच के बर्तनों का इस्तेमाल: प्लास्टिक के डिब्बों की जगह फ्रिज के अंदर खाना रखने के लिए कांच (Glass) या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें. वास्तु में कांच को राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को सोखने वाला माना गया है. 80-20 का नियम: फ्रिज को कभी भी ऊपर तक खचाखच न भरें. अंदर कम से कम 20% जगह हवा के सर्कुलेशन और ऊर्जा के प्रवाह के लिए खाली छोड़नी चाहिए. ठूंस-ठूंस कर भरा फ्रिज मानसिक तनाव और भारीपन का कारण बनता

आज आसमान में ‘ब्लू मून’ का जादू! चूक गए तो सालों इंतजार

 आज 31 मई 2026 की शाम आसमान में एक बहुत ही खास और दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखने वाला है, जिसे ब्लू मून कहा जा रहा है. यदि आप भी इस अनोखी घटना को देखने के लिए उत्साहित हैं, तो यहां इससे जुड़ी पूरी जानकारी जरूर जान लीजिए.. ब्लू मून क्या है? अक्सर लोगों को लगता है कि इस दिन चांद का रंग ब्लू दिखाई देगा, लेकिन यह केवल एक खगोलीय घटना है. जब एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है. चूंकि मई 2026 में 1 मई और 31 मई को दो पूर्णिमा पड़ी हैं, इसलिए आज की पूर्णिमा को ब्लू मून माना जा रहा है. इसे माइक्रो मून भी कहा जा रहा है क्योंकि यह अपनी कक्षा में पृथ्वी से दूर होने के कारण आकार में सामान्य से थोड़ा छोटा प्रतीत हो सकता है. आज का चांद लाल और विशाल क्यों दिखेगा? आज आपको चाँद का रंग नारंगी या हल्का लाल दिखाई दे सकता है, जिसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है: लाल रंग का रहस्य: जब चांद क्षितिज (horizon) के पास होता है, तो उसकी रोशनी को हम तक पहुंचने के लिए पृथ्वी के वायुमंडल की एक मोटी परत को पार करना पड़ता है. इस सफर में नीले रंग की छोटी तरंगें बिखर जाती हैं और केवल लाल व नारंगी रंग की लंबी तरंगें ही हमारी आंखों तक पहुंच पाती हैं. विशाल दिखने की वजह: चांद का बहुत बड़ा दिखना वास्तव में एक ऑप्टिकल इल्यूजन यानी आंखों का धोखा है. जब चांद पेड़ों, पहाड़ों या इमारतों जैसी वस्तुओं के पास होता है, तो हमारा दिमाग संदर्भ के कारण उसे बहुत बड़ा समझने लगता है. असल में, इसके आकार में कोई भौतिक बदलाव नहीं होता है. भारत में कब और कैसे देखें? भारत में आज शाम सूर्यास्त के बाद, लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच, इसे दक्षिण-पूर्वी आकाश में देखना सबसे अच्छा रहेगा. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए किसी महंगे टेलीस्कोप या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है. आप इसे अपनी खुली आँखों से घर की छत या किसी खुले स्थान से देख सकते हैं. आध्यात्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का दिन ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस दिन शांति और समृद्धि के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं: चंद्रमा को अर्घ्य देना और ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. मन की शांति के लिए ध्यान (मेडीटेशन) करना, दान करना और माता लक्ष्मी की पूजा कर उन्हें खीर का भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है.

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण: इन 4 राशियों पर टूटेगा असर!

 साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है. विज्ञान और ज्योतिष दोनों ही दृष्टिकोण से यह एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. जब ब्रह्मांड में चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है. इस स्थिति में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है, जिसे हम सूर्य ग्रहण कहते हैं. यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही घटित होती है. यह सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, आइसलैंड, ग्रीनलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में यह ग्रहण न दिखने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ब्रह्मांड में होने वाली इस बड़ी हलचल का असर सभी 12 राशियों पर जरूर पड़ेगा. किस राशि में लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से कर्क राशि में लगने जा रहा है. इस कारण चार विशेष राशियों मेष, कर्क, तुला और मकर के जातकों को इस अवधि में बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान मेष राशि (Aries) मेष राशि वाले जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक मोर्चे पर परेशानियां लेकर आ सकता है. घर में बेवजह की कलह या माताजी के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं काफी बढ़ सकती हैं. यदि आप संपत्ति या भूमि से जुड़े किसी विवाद में उलझे हैं, तो इस समय बहुत सावधानी से कदम बढ़ाएं. अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और किसी भी विकट परिस्थिति में धैर्य से काम लें. कर्क राशि (Cancer) चूंकि यह सूर्य ग्रहण इसी राशि में लगने जा रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों को सबसे अधिक संभलकर रहने की आवश्यकता है. इस दौरान आपको मानसिक तनाव, भ्रम और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है. सेहत के मामले में लापरवाही बिल्कुल न बरतें, अन्यथा गंभीर बीमारियाँ या दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहेगी. करियर और पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला बहुत सोच-समझकर और पूरे आत्मविश्वास के साथ लें. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में विशेष रूप से सतर्क रहना होगा. इस अवधि में नौकरी छूटने की प्रबल संभावना बन रही है या फिर ऑफिस में किसी बात को लेकर अपमान का सामना करना पड़ सकता है. पैसों के लेनदेन और किसी भी तरह के निवेश से अभी दूर रहें, अन्यथा भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि वाले जातकों के निजी और व्यावसायिक जीवन पर इस ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव और जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है. इसके साथ ही, यदि आप पार्टनरशिप (साझेदारी) में कोई व्यापार कर रहे हैं, तो इस दौरान बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. ऐसे में धैर्य और शांति बनाए रखना ही एकमात्र बचाव है. इन राशियों के लिए वरदान साबित होगा यह ग्रहण यह सूर्य ग्रहण हर राशि के लिए मुश्किलें खड़ी नहीं करेगा. ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण भाग्य के बंद दरवाजे खोलने वाला साबित हो सकता है. इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन सुनहरे अवसर, व्यापार में मनमुताबिक वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं.

Horoscope Today: 30 मई को कैसा रहेगा आपका दिन? पढ़ें सभी 12 राशियों का हाल

मेष राशि- 31 मई का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा। कोई पुराना काम पूरा हो सकता है, जिससे राहत मिलेगी। नौकरी और कारोबार में मेहनत का फायदा मिलने के आसार हैं। पैसों के मामले में जल्दबाजी करने से बचें। घर-परिवार के लोगों के साथ समय अच्छा बीतेगा। सेहत भी सामान्य रहेगी। वृषभ राशि- 31 मई का दिन आपके लिए अच्छा रह सकता है। काम में मन लगेगा और कुछ रुके हुए काम भी आगे बढ़ सकते हैं। किसी करीबी से अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। खर्चों पर थोड़ा कंट्रोल रखना बेहतर रहेगा। रिश्तों में मिठास बनी रहेगी। सेहत भी ठीक रहेगी। मिथुन राशि- 31 मई को कामकाज थोड़ा ज्यादा रह सकता है। दिनभर भागदौड़ बनी रह सकती है। नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों से जुड़ा कोई फैसला सोच-समझकर लें। परिवार के लोगों का साथ मिलेगा। सेहत का ध्यान रखना जरूरी रहेगा। कर्क राशि- 31 मई का दिन मिला-जुला रह सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्यादा परेशान न हों। कामकाज में स्थिति ठीक रहेगी। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए पैसे संभालकर खर्च करें। रिश्तों में धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी। सिंह राशि- 31 मई आपके लिए अच्छा दिन साबित हो सकता है। नौकरी और कारोबार में कुछ अच्छे मौके मिल सकते हैं। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने की भी संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। कन्या राशि- 31 मई का दिन संभलकर चलने का है। किसी भी काम में जल्दबाजी न करें। पैसों से जुड़ा फैसला सोच-समझकर लें। परिवार का सहयोग मिलेगा। रिश्तों में चल रही गलतफहमियां दूर हो सकती हैं। सेहत ठीक रहेगी। तुला राशि- 31 मई का दिन सामान्य रहेगा। रोज के काम समय पर पूरे हो जाएंगे। किसी पुराने दोस्त से बात हो सकती है। पैसों के मामलों में लापरवाही न करें। परिवार का सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। वृश्चिक राशि- 31 मई का दिन अच्छा रह सकता है। नौकरी और कारोबार में नए मौके मिल सकते हैं। पैसों की स्थिति मजबूत बनी रहेगी। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत भी सामान्य रहेगी। धनु राशि- 31 मई का दिन राहत देने वाला रह सकता है। कोई रुका हुआ काम पूरा होने से मन खुश रहेगा। नौकरी और कारोबार में स्थिति ठीक रहेगी। नई योजना पर काम शुरू करने का विचार बना सकते हैं। रिश्तों में अपनापन बना रहेगा। सेहत भी साथ देगी। मकर राशि- 31 मई का दिन अच्छा रहने वाला है। मेहनत का फायदा मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को लाभ होने के आसार हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। किसी पुराने विवाद का हल निकल सकता है। सेहत ठीक रहेगी। कुंभ राशि- 31 मई आपके लिए कुछ नए मौके लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को फायदा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर रहेगी। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। कहीं आने-जाने की योजना भी बन सकती है। मीन राशि- 31 मई का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है। लंबे समय से रुका कोई काम पूरा हो सकता है। पैसों को लेकर चल रही चिंता कम हो सकती है। नौकरी और कारोबार में अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। परिवार का साथ मिलेगा और मन खुश रहेगा।

चाणक्य नीति की 3 सीख जो कठिन समय में देती हैं सही दिशा और मानसिक मजबूती

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी जीवन को सही दिशा देने में बेहद उपयोगी मानी जाती हैं। उनके विचार कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का रास्ता दिखाते हैं। जब जीवन में चारों ओर संकट दिखाई दे, तब चाणक्य नीति की ये सीखें मानसिक मजबूती और सही निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। यहां जानिए चाणक्य नीति में बताई गई वो 3 जरूरी सीख, जो व्यक्ति को उसके मुश्किल समय में साहस देती है और उनका सामना करना सिखाती है। शत्रुओं से निपटने की सही रणनीति खलानां कण्टकानां च द्विविधैव प्रतिक्रिया। उपानन्मुखभंगो वा दूरतो वा विसर्जनम्॥ चाणक्य नीति में बताया गया है कि दुष्ट और शत्रु स्वभाव के लोगों से निपटने के केवल दो ही रास्ते हैं—या तो उन्हें पूरी तरह नियंत्रित कर लिया जाए या फिर उनसे दूरी बना ली जाए। अनावश्यक विवाद में पड़ने के बजाय समझदारी इसी में है कि ऐसे लोगों को नजरअंदाज किया जाए, ताकि वे आपके जीवन में बाधा न बन सकें। घर में सुख-समृद्धि का रहस्य मूर्खाः यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसंचितम् । दाम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्री स्वयमागता॥ चाणक्य नीति के अनुसार जहां घर में ज्ञान का सम्मान होता है, अन्न और धन का सही प्रबंधन किया जाता है और पति-पत्नी के बीच कलह नहीं होती, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे घरों में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और जीवन में स्थिरता व समृद्धि बढ़ती जाती है। गलत संगति से तुरंत दूरी दुराचारी च दुर्दृष्टिर्दुराऽऽवासी च दुर्जनः । यन्मैत्री क्रियते पुम्भिर्नरः शीघ्र विनश्यति ।। चाणक्य कहते हैं कि दुराचारी और गलत सोच वाले लोगों की संगति व्यक्ति के जीवन को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर ले जाती है। ऐसे लोगों के साथ संबंध रखने से मान-सम्मान और मानसिक शांति दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि बुरी संगति से तुरंत दूरी बना ली जाए।

घर में तुलसी और मनी प्लांट साथ रखना कितना सही? जानें वास्तु के नियम और सही दिशा

जब भी घर में शुभ पौधे लगाने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में दो नाम सबसे पहले आते हैं, तुलसी और मनी प्लांट.एक तरफ तुलसी घर में सुख-शांति लाती हैं, तो दूसरी तरफ मनी प्लांट है जो आर्थिक तरक्की से जुड़ा है.अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या इन दोनों को एक साथ रखा जा सकता है? इन दोनों को साथ रखने का नियम और सही तरीका क्या है, अगर आप वो तरीका जान गए, तो किस्मत चमक सकती है. क्या है वास्तु का नियम ज्योतिष और वास्तु के हिसाब से देखें तो मनी प्लांट का कनेक्शन बुध ग्रह से है, जो हमारे दिमाग और बिजनेस को संभालता है. तुलसी जी का कनेक्शन गुरु ग्रह और भगवान विष्णु से है, जो हमें सुख और अच्छी सोच देते हैं. अब आप ही सोचिए, बिना बुद्धि के पैसा टिकता नहीं और बिना पैसे के जिंदगी चलती नहीं. इसलिए जब ये दोनों पौधे आपके घर में सही तरीके से साथ होते हैं, तो आपको बुद्धि और पैसा दोनों एक साथ मिलते हैं. दूरी है जरूरी दोनों पौधों को साथ रखने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप दोनों को एक ही गमले में लगा दें. दोनों का स्वभाव अलग है, इसलिए इन्हें थोड़ी दूरी पर रखें. तुलसी को कहां रखें? इन्हें हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा (North or East) में रखें. यह दिशा भगवान की मानी जाती है. मनी प्लांट को कहां रखें? इन्हें घर के साउथ-ईस्ट कोने (South-East) में रखना सबसे अच्छा होता है, क्योंकि यह दिशा धन के देवता कुबेर जी की होती है. बालकनी में कैसे सेट करें? अगर आप इन्हें अपनी बालकनी या लिविंग रूम में रख रहे हैं, तो तुलसी को थोड़ा उत्तर की तरफ और मनी प्लांट को थोड़ा दक्षिण की तरफ रखें. दोनों के बीच कुछ फीट का गैप जरूर होना चाहिए. इन दो बातों का खास ख्याल रखें अगर आप इन दोनों पौधों को पास-पास रख रहे हैं, तो बस दो गलतियों से बचना है: मनी प्लांट को तुलसी पर न चढ़ने दें: मनी प्लांट एक बेल (creeper) है जो ऊपर की तरफ भागती है. ध्यान रखें कि मनी प्लांट की बेल बढ़ते-बढ़ते तुलसी के पौधे को ढक न ले. तुलसी का पौधा हमेशा साफ और खुला दिखना चाहिए. साफ-सफाई: तुलसी जी के पास हम सब पूजा करते हैं, इसलिए वहां चप्पल-जूते या कचरा न रखें. साथ ही, मनी प्लांट के जो पत्ते सूख जाएं, उन्हें तुरंत काट कर हटा दें.

किचन में इन 3 चीजों को चूल्हे के पास न रखें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष

 शास्त्रों में रसोई को घर का सबसे खास हिस्सा माना गया है, क्योंकि यहीं से पूरे परिवार को अच्छी सेहत और ऊर्जा मिलती है. किचन में जो गैस चूल्हा होता है, उसे अग्नि देव का रूप माना जाता है.  चूल्हे का सीधा संबंध हमारी तरक्की और घर की तिजोरी से होता है. अक्सर हम अनजाने में चूल्हे के पास गलत चीजें रख देते हैं या गलत दिशा में मुंह करके खाना बनाते हैं, जिससे घर में वास्तु दोष लग जाता है.  आइए जानते हैं इससे जुड़े जरूरी नियम . इन 3 चीजों को चूल्हे के पास से तुरंत हटाएं 1. पानी का सिंक, मटका या बोतलें (आग और पानी की दुश्मनी)- गैस चूल्हे के बिल्कुल पास या उसके ठीक सामने कभी भी पानी की चीजें नहीं होनी चाहिए. जैसे बर्तन धोने का सिंक, पानी का मटका, वॉटर फिल्टर या पीने के पानी की बोतलें. क्या है नुकसान: गैस चूल्हा आग है वहीं सिंक पानी का जरिया है. आग और पानी एक-दूसरे के विरोधी तत्व हैं.  जब ये दोनों बिल्कुल पास होते हैं, तो घर में अशांति बढ़ती है. परिवार के लोगों में बिना बात के झगड़े होने लगते हैं, इससे कमाया हुआ पैसा बीमारियों में खर्च हो जाता है. उपाय: अगर किचन छोटा है, तो चूल्हे और सिंक के बीच में एक छोटा सा लकड़ी का बोर्ड या पार्टिशन रख दें. 2. डस्टबिन, झाड़ू या गंदे कपड़े – कई लोग आसानी के लिए गैस चूल्हे के ठीक नीचे या बगल में छोटा डस्टबिन (कूड़ेदान) रख देते हैं, या फिर सफाई के बाद झाड़ू- गंदा पोछा वहीं छोड़ देते हैं. क्या है नुकसान: चूल्हा वह जगह है जहाँ मां लक्ष्मी का वास होता है. वहीं डस्टबिन-झाड़ू गंदगी व नकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं.  चूल्हे के पास कचरा रखने से मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं , जिससे घर में बरकत (पैसों की बचत) खत्म हो जाती है. उपाय: डस्टबिन को हमेशा चूल्हे से दूर ढककर रखें. झाड़ू को भी ऐसी जगह छिपाकर रखें जहां किसी की सीधी नजर न पड़े. दिशाओं का रखें खास ध्यान (Kitchen Direction Rules)वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व होता है. गलत दिशा में बना किचन या गलत दिशा में रखा चूल्हा घर के मुखिया की तरक्की रोक सकता है. 3- मिक्सर ग्राइंडर – वास्तु के अनुसार मिक्सर ग्राइंडर को गैस चूल्हे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए.गैस चूल्हे और मिक्सर के बीच कम से कम 2 से 3 फीट की दूरी होनी चाहिए. पास रखने से घर में मानसिक तनाव बढ़ता है. मिक्सर, माइक्रोवेव या ओवन जैसे बिजली के सामानों को रसोई के दक्षिण (South) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखना सबसे शुभ होता है. किचन की सही दिशा: घर में रसोई हमेशा आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व (South-East) दिशा में होनी चाहिए. यह दिशा अग्नि देव की मानी जाती है.  अगर यहां संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है. भोजन बनाने वाले का मुंह: खाना बनाते समय खाना पकाने वाले का मुंह हमेशा पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए.  पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाने से सेहत अच्छी रहती है . इस दिशा में न रखें चूल्हा: गैस चूल्हे को कभी भी उत्तर (North) दिशा में नहीं रखना चाहिए.  उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की होती है.  इस दिशा में आग जलाने से पैसों की भारी तंगी का सामना करना पड़ सकता है. बरकत के लिए 3 आसान नियम:रात में जूठे बर्तन न छोड़ें: सोने से पहले सिंक के सारे बर्तन धो लें और चूल्हे को साफ करके सोएं.  साफ किचन में ही रात के समय मां लक्ष्मी आती हैं. तवे को छिपाकर रखें: खाना बनाने के बाद तवे या कढ़ाई को चूल्हे के ऊपर मत छोड़ें.  उसे धोकर अलमारी के अंदर रखें.  तवे को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए. पहली रोटी गाय की: सुबह जब भी पहली बार चूल्हा जलाएं, तो पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें.  इससे पितृ दोष दूर होते हैं और घर में खुशहाली आती है.

2 जून 2026 को गुरु का बड़ा गोचर, 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आता है. 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं.  गुरु के इस गोचर से सिंह राशि में पहले से मौजूद केतु के साथ उनका द्विद्वादश योग बनेगा. ज्योतिष में ज्ञान और अध्यात्म के कारक माने जाने वाले इन दोनों ग्रहों का यह दुर्लभ संयोग 4 राशियों के लिए शिक्षा, करियर और आर्थिक मोर्चे पर छप्परफाड़ खुशियां लेकर आने वाला है. मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह योग उनकी छिपी हुई क्षमताओं को बाहर लाएगा. कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन बेहतरीन रहेगा, जिससे उच्च पद या प्रमोशन की प्राप्ति हो सकती है. मेडिकल और बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की पढ़ाई कर रहे छात्रों को बड़ी सफलता मिलेगी. पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा. आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. कर्क राशि 2 जून को गुरु का गोचर आपकी ही राशि में होने जा रहा है, जबकि केतु आपके धन भाव में रहेंगे. यदि आप जनसंचार (Mass Comm), सेल्स या मार्केटिंग के छात्र हैं, तो आपको शानदार परिणाम मिलेंगे.  बेरोजगारों को मनचाही जगह पर नौकरी मिल सकती है. अध्यात्म की तरफ झुकाव बढ़ेगा, मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी. धनु राशि धनु राशि के स्वामी खुद देवगुरु बृहस्पति हैं.  इस गोचर से आपका आठवां और नौवां भाव सक्रिय होगा, जिससे गूढ़ व रहस्यमयी विषयों को जानने की उत्सुकता बढ़ेगी.  जो छात्र रिसर्च या अनुसंधान के कार्यों से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय सुनहरे अवसर लेकर आएगा. करियर में बड़ी उपलब्धियां मिलेंगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे. कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए द्विद्वादश योग करियर में बेहद सुखद अनुभव लेकर आएगा. आपका सुलझा हुआ स्वभाव लोगों को प्रभावित करेगा. आप अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल रहेंगे. विद्यार्थियों की एकाग्रता में सुधार होगा, जिससे पढ़ाई में मन लगेगा. इस दौरान किसी बड़े आध्यात्मिक गुरु से मुलाकात आपके जीवन की दिशा बदल सकती है.

केतु मघा नक्षत्र में प्रवेश, कुछ राशियों के लिए शुभ तो कुछ के लिए सावधानी

ज्योतिष शास्त्र में केतु को एक रहस्यमयी और छाया ग्रह माना गया है. जो अपनी चाल हमेशा उल्टी चाल जब भी केतु अपना नक्षत्र या पद बदलते हैं, तो इसका सीधा असर सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 31 मई को केतु देव नक्षत्र पद परिवर्तन करके मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं. केतु का यह सूक्ष्म गोचर कुछ राशियों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और अचानक धन लाभ लेकर आएगा, तो वहीं कुछ राशियों को इस दौरान थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होगी. आइए जानते हैं कि इस परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है. मेष राशि (Aries) मेष राशि वालों के लिए यह परिवर्तन मिले-जुले परिणाम देगा. आपको अपनी सेहत का खास ख्याल रखना होगा. कार्यक्षेत्र में कुछ गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए अपनी योजनाओं को किसी के साथ साझा न करें. हालांकि, आध्यात्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए केतु का तीसरे चरण में जाना आर्थिक दृष्टिकोण से उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है. निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें. प्रेम जीवन और वैवाहिक संबंधों में थोड़ी गलतफहमियां हो सकती हैं, वाणी पर नियंत्रण रखें. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि वालों के लिए यह समय करियर में बदलाव के संकेत दे रहा है. अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो सोच-समझकर फैसला लें. इस दौरान माता की सेहत को लेकर थोड़ी चिंता रह सकती है. जमीन-जायदाद के मामलों में जल्दबाजी न करें. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर साहस और पराक्रम में वृद्धि करेगा. छोटे भाई-बहनों के साथ थोड़े मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी. छोटी दूरी की यात्राओं के योग बनेंगे जो भविष्य में फायदेमंद साबित होंगी. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए यह समय संचित धन (सेविंग्स) को प्रभावित कर सकता है. अचानक कुछ बड़े खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है. परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करते समय मर्यादा का ध्यान रखें. खान-पान पर नियंत्रण रखें, पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है. कन्या राशि (Virgo) केतु का यह पद परिवर्तन आपकी ही राशि में हो रहा है, जिससे आपके स्वभाव में थोड़ा एकांतप्रिय होना या भ्रम की स्थिति बन सकती है. मानसिक तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें. वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए यह गोचर खर्चों में बढ़ोतरी कराने वाला रहेगा. विशेषकर विदेश यात्रा या कोर्ट-कचहरी के मामलों में धन खर्च हो सकता है. अनिद्रा या पैरों में दर्द की शिकायत रह सकती है. हालांकि, जो लोग आध्यात्मिक यात्रा पर जाना चाहते हैं, उनके लिए समय अनुकूल है. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह परिवर्तन बेहद शुभ रहने वाला है. आपको अचानक कहीं से अटका हुआ धन प्राप्त हो सकता है. बड़े भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा. सामाजिक दायरे में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपकी दबी हुई इच्छाएं पूरी होने के रास्ते खुलेंगे. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि वालों के लिए कार्यक्षेत्र में यह समय बेहद महत्वपूर्ण रहेगा. नौकरी में काम का दबाव बढ़ सकता है, जिससे आप थोड़ा तनाव महसूस कर सकते हैं. अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर चलें. पिता की सेहत का ध्यान रखें और उनके साथ विवाद से बचें. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए केतु का तीसरे चरण में प्रवेश भाग्य में थोड़ी रुकावटें ला सकता है. बनते हुए कामों में आखिरी वक्त पर देरी हो सकती है, लेकिन धैर्य न खोएं. लंबी दूरी की यात्राओं या तीर्थ यात्रा के योग बनेंगे. गुरु और गुरुतुल्य लोगों का आशीर्वाद आपको सही रास्ता दिखाएगा. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि वालों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है. वाहन चलाते समय सतर्क रहें और चोट-चपेट से बचें. ससुराल पक्ष से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. गुड विज्ञान, ज्योतिष या रिसर्च के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय बेहद शानदार रहेगा. मीन राशि (Pisees) मीन राशि के जातकों के वैवाहिक जीवन और व्यापार में इस गोचर का असर देखने को मिलेगा. साझेदारी के बिजनेस में पारदर्शिता रखें, अन्यथा विवाद हो सकता है. जीवनसाथी के स्वभाव में थोड़ी कड़वाहट आ सकती है, शांत रहकर स्थिति को संभालें.