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माता-वध का कठिन आदेश: किस परिस्थिति में परशुराम ने उठाया था यह कदम और क्या थे तीन वरदान

जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के दस अवतार हैं. इन अवतारों में से ही एक है भगवान परशुराम. भगवान परशुराम विष्णु जी के छठवें अवतार हैं. माना जाता है कि भगवान परशुराम आज भी धरती पर वास कर रहे हैं. परशुराम भगवान का नाम राम था, लेकिन जब भगवान शिव ने उनको एक दिव्य फरसा दिया तो उनका नाम परशुराम पड़ गया. भगवान परशुराम के पिता का नाम महर्षि जमदग्नि और उनकी माता का नाम रेणुका था. श्री हरुि विष्णु ने माता रेणुका के गर्भ से शुक्र की आंशिक उर्जा से परशुराम के रूप में जन्म लिया था. उनका कुल ब्राह्मण था, लेकिन वो स्वभाव और कर्म से क्षत्रिय के रूप में जाने जाते हैं. परशुराम जी को बहुत बड़े पितृ भक्त के रूप में भी जाना जाता है. उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी मां का सिर काट दिया था. फिर उन्होंने पिता से तीन वरदान मांगे थे. आइए इस कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं. पतिव्रता नारी थीं माता रेणुका एक कथा के अनुसार, रेणुका माता का पतिव्रत धर्म बहुत ऊंचा था. रेणुका माता कभी भी पके हुए मिट्टी के घड़े में पानी नहीं लाती थीं, बल्कि वो अपने पतिव्रत धर्म से कच्ची मिट्टी के घड़े में ही मेंं पानी लाया करती थीं. घड़े से एक बूंद भी पानी नहीं गिरता था. एक दिन वो आश्रम से नदी में पानी लेने गईं. इस दौरान जल भरते समय उनकी नजर चित्रांगद नाम के एक गंधर्व पर पड़ी, जो अपनी अप्सराओं के साथ विलास में डुबा हुआ था. ये सब देकखर माता रेणुका का मन एक छण के लिए मचल गया. फिर उसी समय उनका पतिव्रत धर्म नष्ट या कहें कि खंडित हो गया. इसके बाद जिस कच्ची मिट्टी के घड़े वो जल लेकर जाया करती थीं, उसमें पानी रुका ही नहीं. ये देखकर माता रोने लगीं और आश्रम वापस लौट आईं. इसके बाद महर्षि जमदग्नि आए और उन्होंने अपने तप के प्रभाव से सब कुछ जान लिया. महर्षि जमदग्नि सबकुछ जानकर बहुत क्रोधित हुए. महर्षि जमदग्नि ने बेटों को दिया श्राप महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पांच बेटे थे. उन्होंने सबको बुलाया. सबसे पहले उन्होंने अपने सबसे बड़े बेटे को आदेश दिया कि अपनी मां का सिर काट दो. बेटे ने कहा कि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपने प्राण दे सकता हूं, लेकिन मां के प्राण नहीं ले सकता. फिर उन्होंने क्रोध में बेटे को विवेकहीन हो जाने का श्राप दे दिया. इसी तरह तीनों बेटों ने मना कर दिया और सभी को महर्षि जमदग्नि ने विवेकहीन हो जाने का श्राप दे दिया. परशुराम जी ने काटा मां सिर और मांगे वरदान अंत में उन्होंने परशुराम जी को बुलाया और बाकी सब की तरह उन्हें भी मां का सिर काट देने के लिए कहा. परशुराम जी ने बिना एक पल विचार किए पिता की आज्ञा का पालन करते हुए माता रेणुका का सिर काट दिया. ये देखकर महर्षि जमदग्नि बहुत प्रसन्न हुए और बेटे से वरदान मांगने के लिए कहा. तब परशुराम जी ने तीन वरदान मांगे. परशुराम जी ने पहले वरदान के रूप में माता रेणुका का जीवन मांगा. दूसरे वरदान के रूप में परशुराम ने ये मांगा की मां को कभी याद न रहे कि मैंने उनका सिर काट दिया था. तीसरे और अंतिम वरादन के रूप में उन्होंने पिता से अपने भाइयों की चेतना मांगी. महर्षि जमदग्नि ने तीनों वरदान अपने पुत्र को दे दिए. एक कथा ये भी है कि माता रेणुका को सब कुछ याद था. उन्होंने एक दिन अपने पुत्र परशुराम को बुलाकर कहा था कि जिस तरह तुमने मुझे कष्ट दिया, उसी प्रकार एक दिन तुमको भी कष्ट होगा. कहा जाता है कि रामायण काल में माता रेणुका कैकेयी के रूप में आई थीं. उन्होंने विष्णु जी के एक अन्य अवतार भगवान राम के लिए वनवास मांगा था.

वास्तु शास्त्र की चेतावनी: इस दिशा में बैठकर भोजन करने से बढ़ सकती हैं परेशानियां

अन्न को हिंदू धर्म में 'ब्रह्म' माना गया है और भोजन करने की प्रक्रिया को एक 'यज्ञ' के समान पवित्र माना गया है। अक्सर हम इस बात पर तो ध्यान देते हैं कि हम क्या खा रहे हैं, लेकिन हम 'किधर' मुंह करके खा रहे हैं, इसे नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में बैठकर किया गया भोजन न केवल बीमारियों को बुलावा देता है, बल्कि घर की सुख-शांति भी छीन सकता है। यदि आप भी बार-बार बीमार पड़ते हैं या घर में बरकत नहीं रहती, तो एक बार अपने भोजन करने की दिशा जरूर बदलें। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार भोजन करने की सही और गलत दिशाएं। 1. पूर्व दिशा वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है। यदि आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करते हैं, तो इससे शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह दिशा मानसिक तनाव को दूर करती है और लंबी आयु प्रदान करती है। बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए इस दिशा में बैठकर खाना सबसे उत्तम माना गया है। 2. उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर और मां लक्ष्मी की दिशा माना जाता है। इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से शरीर निरोगी और स्वस्थ रहता है। जो लोग करियर में सफलता चाहते हैं या धन प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए भी यह दिशा श्रेष्ठ है। 3. पश्चिम दिशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करना वास्तु में मिला-जुला परिणाम देता है, लेकिन अक्सर इसे पाचन के लिए ठीक नहीं माना जाता। इस दिशा में बैठकर खाना खाने से पाचन तंत्र (Digestion) खराब हो सकता है और व्यक्ति के मन में भौतिक इच्छाएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, जो मानसिक अशांति का कारण बनती हैं। 4. दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना सबसे हानिकारक माना गया है। इस दिशा को यम की दिशा माना जाता है। दक्षिण दिशा में बैठकर खाना खाने से पेट संबंधी गंभीर रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, इससे मान-सम्मान में कमी और आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

भूलकर भी न करें इन 3 चीज़ों की शर्म, वरना पीछे रह सकते हैं आप

आमतौर पर शर्म को महिलाओं का गहना कहा जाता है। लेकिन बिना वजह की शर्म, महिला हो या पुरुष, दोनों के लिए ही गुण बनने की जगह कई बार असफलता की वजह बन जाती है। जीवन में कई बार व्यक्ति सिर्फ संकोच में आकर कुछ ऐसी चीजों को करने में शर्म महसूस करता है, जो उसकी सफलता की राह को और अधिक दूर कर देती है। आज सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी कुछ बातों को लेकर शर्म महसूस करते हैं। ऐसे में चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में मानव जीवन की सफलता के लिए कई बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया है कि पुरुषों और महिलाओं को किन 3 बातों के लिए बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। धन कमाने में आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धन के लेन-देन में शर्म महसूस करता है, तो उसे धन की हानि हो सकती है। व्यक्ति को धन कमाने के लिए किसी भी छोटे-बड़े कार्य को करने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। आचार्य चाणक्य का मानना था कि धन से जुड़े मामलों में संकोच करने से व्यक्ति को नुकसान हो सकता है, जैसे कि उधार दिए हुए पैसे वापस मांगने में संकोच करना या धन उधार लेने में शर्म करना, दोनों ही सूरतों में व्यक्ति को नुकसान हो सकता है। याद रखें, एक अच्छे, आरामदायक और समृद्ध जीवन के लिए हर व्यक्ति को धन की आवश्यक पड़ती है। व्यक्ति की हर जरूरत सीधे तौर पर धन से जुड़ी हुई होती है। शिक्षा लेने में शिक्षा प्राप्त करने में भी व्यक्ति को कभी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुछ नया सीखने में संकोच करता है, तो वह हमेशा अज्ञानी ही रह जाएगा। इसलिए, कभी भी अपने गुरु से प्रश्न पूछने में संकोच न करें। किसी भी तरह का संदेह मन में उठते ही उसे तुरंत समझने के लिए प्रश्न पूछें। भोजन कई लोग सार्वजनिक रूप से भोजन करने में शर्म महसूस करते हैं। लेकिन भूख मिटाना व्यक्ति का अधिकार और एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। आपको जब भूख लगे तभी खाएं और अपने बगल में बैठे लोगों की चिंता न करें। याद रखें, यदि आप भोजन करने में शर्म महसूस करेंगे, तो आप भूखे रह सकते हैं।

काम में आ रही रुकावट खत्म! सिर्फ 24 घंटे में मिलेगा समाधान, जानें आसान उपाय

जीवन में कई बार ऐसी स्थिति आती है जब हमारी मेहनत के बावजूद काम अंतिम समय पर आकर अटक जाते हैं। चाहे वह नौकरी का प्रमोशन हो, व्यापार की कोई डील, रुका हुआ पैसा या घर का कोई शुभ कार्य जब राह में बार-बार बाधाएं आने लगें, तो इसका कारण आपके परिवेश की नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे आसपास की ऊर्जा हमारे भाग्य और कार्यसिद्धि को गहराई से प्रभावित करती है। यदि आपके काम भी लंबे समय से अटके हुए हैं, तो यह उपाय आपके लिए बेहद ही फायदेमंद साबित होंगे। मुख्य द्वार की शुद्धि वास्तु में घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहीं से सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है। एक लोटे पानी में थोड़ी पिसी हुई हल्दी मिलाएं और इसे मुख्य द्वार की दहलीज पर छिड़कें। हल्दी नकारात्मकता को सोख लेती है और शुभ ऊर्जा को आकर्षित करती है। शाम के समय प्रवेश द्वार पर थोड़ा सा गंगाजल छिड़कें। यदि कोई काम बहुत दिनों से अटका है, तो एक कटोरी में सेंधा नमक भरकर मुख्य द्वार के पीछे रख दें।  नमक का पोंछा: अगर आपको लगता है कि घर में भारीपन है और कोई भी योजना सफल नहीं हो रही, तो नमक का उपाय सबसे तेज काम करता है। घर में पोंछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक (Sea Salt) मिला दें। नमक वास्तु दोषों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता रखता है। इसे करने के कुछ ही घंटों भीतर आप घर के वातावरण में हल्कापन महसूस करेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी और अटके काम की नई राह खुलेगी। ईशान कोण को करें सक्रिय घर की उत्तर-पूर्व दिशा को 'देव स्थान' कहा जाता है। यदि यह दिशा गंदी है या यहां भारी सामान रखा है, तो प्रगति रुक जाती है। अगले 24 घंटों में सफलता के लिए ईशान कोण को बिल्कुल साफ कर दें। वहां एक सुंदर बर्तन में ताज़ा पानी भरें और उसमें कुछ गुलाब की पंखुड़ियां डाल दें। इसके साथ ही वहां एक घी का दीपक जलाएं। यह उपाय आपकी बुद्धि को सक्रिय करेगा और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाएगा। उत्तर दिशा: यदि आपका काम पैसे से जुड़ा है या व्यापार में रुकावट है, तो उत्तर दिशा पर ध्यान दें। उत्तर दिशा में एक नीले रंग के फूल का गमला या नीली बोतल में पानी रखें। यदि संभव हो, तो उत्तर दिशा में तांबे या चांदी का एक छोटा कछुआ पानी में डालकर रखें। वास्तु के अनुसार कछुआ धैर्य और निरंतर प्रगति का प्रतीक है, जो रुके हुए कार्यों को गति प्रदान करता है। पक्षियों को दाना और पानी अक्सर ग्रहों की चाल और ऊर्जा के असंतुलन से काम अटकते हैं। अपने घर की छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए सात तरह के अनाज और पानी की व्यवस्था करें। जब पक्षी आपके द्वारा दिया गया दाना चुगते हैं, तो आपकी कुंडली के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं और रुके हुए काम आश्चर्यजनक रूप से बनने लगते हैं। कपूर का धुआं अटके हुए कामों का एक बड़ा कारण घर में मौजूद स्टैग्नेंट एनर्जी  होती है।  शाम के समय एक पीतल के बर्तन या दीये में कपूर और दो लौंग जलाकर पूरे घर में घुमाएं। इसके धुएं से घर की सूक्ष्म नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और कार्यों में आ रही अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं।

गलती से भी इन लोगों के घर न खाएं अन्न, वरना लग सकता है पाप

गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में शामिल है. ये पुराण भगवान विष्णु और पक्षी राज गरुड़ के संवाद पर आधारित है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद घर में गरुड़ पुराण का पाठ अवश्य होता है. धार्मिक मान्यता है कि पाठ करने से व्यक्ति की आत्मा को सद्गति मिलती है और वो जन्म-मरण के इस चक्र से मुक्त हो जाती है. गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु, पाप-पुण्य के बारे में विस्तार से बताया गया है. साथ ही इसमें नीति, नियम, धर्म और मानव के बारे में उपयोगी बातें भी बताई गई हैं. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि कुछ लोगों के घर पर भूलकर भी खाना नहीं खाना चाहिए. अन्यथा धन, सेहत आदि कई तरह की परेशानियां होती हैं. साथ ही आपके पापों में वृद्धि होती है और कर्मों पर असर पड़ता है. ऐसे में आइए गरुड़ पुराण के अनुसार जानते हैं किन लोगों के घर पर भोजन नहीं करना चाहिए? चोर या अपराधी गरुड़ पुराण के अनुसार, चोर या किसी बड़े अपराध में लिप्त अपराधी के घर भोजन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से पापों में वृद्धि होती है और जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं. भगवान की निंदा करने वाले जो लोग ईश्वर की निंदा करतें हो उनके घर में भोजन करना गरुड़ पुराण में वर्जित माना गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग ईश्वर की निंदा करते हों या जिनका आचरण अधार्मिक हो उनके यहां भोजन करने से समाज में अपयश मिलता है. रोगी या ब्याज लेने वाले रोगी या दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए अनुचित ब्याज प्राप्त करने वालों के घर भी भोजन नहीं करना चाहिए. रोगी व्यक्ति के यहां भोजन करने से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है. चुगलखोर दूसरों की चुगली करने वालों के यहां भोजन कभी नहीं करना चाहिए. चुगली करने वाले दूसरों को परेशानियों में डालते हैं और स्वयं आनंद उठाते हैं. शास्त्रों में इस काम को भी पाप की श्रेणी में रखा गया है. नशीली चीजें बेचने वाले नशीली चीजों का व्यापार करने वालों के यहां कभी भोजन नहीं करना चाहिए. नशे के कारण कई घर बर्बाद हो जाते हैं और इसका दोष केवल नशा बेचने वालों को लगता है. नशा बेचने वालों के घर खाना खाने पर जीवन में अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता.

घर में पॉजिटिव एनर्जी और धन के लिए लगाएं ये फेंगशुई तस्वीरें

घर की दीवारें केवल छत को सहारा देने के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे आपके भविष्य और भाग्य का दर्पण भी हो सकती हैं। फेंगशुई के प्राचीन ज्ञान के अनुसार, हमारे आस-पास मौजूद हर वस्तु और तस्वीर एक विशिष्ट ऊर्जा या ची पैदा करती है। अक्सर हम घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कोई भी पेंटिंग लगा देते हैं, लेकिन अनजाने में वही तस्वीरें हमारे जीवन में सकारात्मकता को रोक सकती हैं या समृद्धि के मार्ग में बाधा बन सकती हैं। फेंगशुई शास्त्र यह मानता है कि सही तस्वीर को सही दिशा में लगाने से न केवल घर का वास्तु दोष दूर होता है, बल्कि यह धन, उत्तम स्वास्थ्य और आपसी प्रेम को चुंबकीय रूप से आकर्षित करने का काम करता है। चाहे वह सफलता की उड़ान भरते घोड़े हों या शांति का प्रतीक बहता झरना, हर चित्र का अपना एक गहरा मनोविज्ञान और आध्यात्मिक प्रभाव होता है। सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर यह तस्वीर फेंगशुई और वास्तु दोनों में बहुत प्रभावशाली मानी जाती है। यह गति, साहस और सफलता का प्रतीक है। इसे घर या ऑफिस की दक्षिण दीवार पर लगाएं। यह दिशा प्रसिद्धि और सफलता से जुड़ी है। यदि दक्षिण में जगह न हो, तो इसे उत्तर या पूर्व में भी लगाया जा सकता है। इससे करियर में तरक्की मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। घोड़ों का मुंह घर के अंदर की तरफ होना चाहिए। इसे कभी भी बेडरूम में न लगाएं। फीनिक्स पक्षी पौराणिक कथाओं के अनुसार, फीनिक्स वह पक्षी है जो अपनी ही राख से दोबारा जन्म लेता है। यह संघर्षों पर जीत और नई शुरुआत का प्रतीक है। इसे घर की दक्षिण दिशा में लगाना सबसे उत्तम होता है। यह जीवन में मान-सम्मान और नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। यदि आप किसी बुरे दौर से गुजर रहे हैं, तो यह तस्वीर आपको नई ऊर्जा प्रदान करती है। बहते हुए झरने या पानी की तस्वीर फेंगशुई में बहते पानी को धन के प्रवाह से जोड़ा जाता है। इसे घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है और घर में पैसे की बरकत लाती है। सुनिश्चित करें कि चित्र में पानी का बहाव घर के अंदर की तरफ हो, बाहर की ओर नहीं। ऊंचे पहाड़ों की तस्वीर पहाड़ स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक हैं। इसे अपने बैठने की जगह या ऑफिस की कुर्सी के ठीक पीछे वाली दीवार पर लगाना चाहिए। यह आपको 'बैक सपोर्ट' देता है, जिससे आपको कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों और परिवार का सहयोग मिलता है। यह आपके जीवन में स्थिरता लाता है। फैमिली फोटो परिवार के सदस्यों की हंसती हुई तस्वीरें घर में प्रेम बढ़ाती हैं। इन्हें घर की दक्षिण-पश्चिम दीवार पर लगाना चाहिए। यह रिश्तों में मजबूती लाता है और परिवार के सदस्यों के बीच कलह को खत्म कर आपसी तालमेल बढ़ाता है। इन तस्वीरों को लगाने से बचें डूबते हुए सूरज या जहाज की तस्वीर: यह निराशा और पतन का प्रतीक मानी जाती है। हिंसक जानवरों या युद्ध के दृश्य: ऐसी तस्वीरें घर में तनाव और झगड़े बढ़ाती हैं। सूखे हुए पेड़ या कांटों वाले पौधे: ये नकारात्मकता और विकास में रुकावट पैदा करते हैं।

भ्रम में हैं श्रद्धालु: माघ पूर्णिमा कब है—1 या 2 फरवरी, यहां जानें स्नान का शुभ समय

श्रद्धालुओं के लिए माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. हर साल माघ पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा 2026 में 1 फरवरी को है या 2 फरवरी को, साथ ही गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का धार्मिक महत्व कब है माघ पूर्णिमा? पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि और समय कुछ इस प्रकार है. पूर्णिमा तिथि शुरू: 01 फरवरी 2026 (रविवार) सुबह 05:52 बजे से. पूर्णिमा तिथि का समापन: 02 फरवरी 2026 (सोमवार) सुबह 03:38 बजे होगा. उदया तिथि का महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसी दिन व्रत और स्नान का महत्व होता है. चूंकि 01 फरवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी. गंगा स्नान और पूजा के शुभ मुहूर्त माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष समय बताए गए हैं. ब्रह्म मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): सुबह 05:24 से 06:17 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, इस समय स्नान करना अमृत के समान फलदायी माना गया है. अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 मिनट तक रहेगा. यदि आप सुबह जल्दी स्नान नहीं कर पाए हैं, तो इस शुभ समय में भी गंगा स्नान और दान-पुण्य किया जा सकता है. माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व माघ पूर्णिमा को लेकर मान्यता है कि इस दिन स्वयं भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं. इस दिन किए गए कुछ कार्यों का विशेष फल मिलता है. पुण्य की प्राप्ति: इस दिन दान (तिल, कंबल, घी और अन्न) करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है. पितृ तर्पण: माघ पूर्णिमा पर पितरों के निमित्त तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. कल्पवास का समापन: प्रयागराज में एक महीने से चल रहे कल्पवास की पूर्णाहुति भी इसी दिन होती है. कैसे करें पूजा? सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की धूप-दीप से पूजा करें. सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना इस दिन बहुत ही शुभ माना जाता है. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें.

घर में अन्न की कमी दूर करेगी ये एक चीज़, बस चावल के डिब्बे में रखें

भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। रसोई केवल भोजन पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह ऊर्जा केंद्र है जो पूरे परिवार के स्वास्थ्य और भाग्य को नियंत्रित करता है। वास्तु के अनुसार, रसोई में रखी हर वस्तु और अनाज का अपना एक विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से चावल, जिसे अक्षत कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। चावल का संबंध चंद्रमा और माता लक्ष्मी से है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे विशेष उपाय बताए गए हैं जिन्हें यदि चावल के डिब्बे के साथ किया जाए, तो घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती। आइए जानते हैं कि चावल के डिब्बे में वह कौन सी गुप्त चीज है जिसे रखने से आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और इसके पीछे के ज्योतिषीय व वास्तु कारण क्या हैं। चावल के डिब्बे में क्या रखें ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आप चाहते हैं कि आपके घर का भंडार हमेशा भरा रहे, तो अपने चावल रखने वाले कंटेनर या डिब्बे में 'लाल कपड़े में बंधे हुए 5 या 11 साबुत हल्दी की गांठें या चांदी का एक सिक्का रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। डिब्बे को कभी पूरी तरह खाली न होने दें वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि रसोई में चावल का डिब्बा कभी भी पूरी तरह खाली नहीं होना चाहिए। जैसे ही चावल खत्म होने वाले हों, उससे पहले ही नया स्टॉक भर दें। पूरी तरह खाली डिब्बा घर में कंगाली और अभाव का संकेत माना जाता है। यह परिवार की आर्थिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है। सही दिशा का चुनाव रसोई में चावल और अन्य अनाज रखने की सबसे उत्तम दिशा वायव्य कोण मानी गई है। यदि आप उत्तर-पश्चिम दिशा में अनाज रखते हैं, तो घर में अन्न की आवक बनी रहती है और बरकत होती है। सफाई और स्वच्छता चावल के डिब्बे को हमेशा साफ-सुथरा रखें। डिब्बे के आसपास गंदगी या जाले नहीं होने चाहिए। गंदे डिब्बे में रखा अनाज राहु के दुष्प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे घर में कलह और बीमारियां आती हैं। बरकत बढ़ाने के अन्य प्रभावी उपाय यदि संभव हो, तो चावल के डिब्बे में एक चांदी का सिक्का रखें। चांदी चंद्रमा को मजबूत करती है, जिससे धन का संचय बढ़ता है। 5 साबुत हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर चावल के डिब्बे में रखने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे सौभाग्य और समृद्धि आती है। यदि चांदी उपलब्ध न हो, तो तांबे का एक साफ सिक्का भी रखा जा सकता है। यह सूर्य की ऊर्जा प्रदान करता है।

स्कंद षष्ठी की रात दीपदान का चमत्कार, इन जगहों पर जलाने से पूरी होंगी मनोकामनाएं

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन शत्रुओं पर विजय, संतान सुख और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, स्कंद षष्ठी की रात को कुछ विशेष स्थानों पर दीपक प्रज्वलित करने से न केवल भगवान कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं, बल्कि भक्तों को चमत्कारी लाभ भी प्राप्त होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं दीप दान का महत्व। रात में इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक: घर के मुख्य द्वार पर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी या तेल का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। भगवान कार्तिकेय देव सेनापति हैं इसलिए द्वार पर दीप जलाने से वे आपके घर की शत्रुओं और बुरी नजर से रक्षा करते हैं। भगवान कार्तिकेय या शिव प्रतिमा के समक्ष अपने घर के मंदिर में भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा के सामने छह मुखी दीपक जलाएं। चूंकि कार्तिकेय जी के छह मुख हैं इसलिए छह बत्तियों का दीपक उनकी शक्ति का संचार करता है। इससे ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे स्कंद षष्ठी की शाम को किसी पुराने पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे दीपक जलाना अत्यंत फलदायी है। यह स्थान देवताओं का वास माना जाता है। यहाँ दीप दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं या कानूनी विवादों में फंसे हैं, तो रात के समय घर के दक्षिण भाग में एक सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा मंगल ग्रह और यम की दिशा मानी जाती है। भगवान कार्तिकेय मंगल के अधिपति देव हैं, अतः यहाँ दीप जलाने से साहस और विजय की प्राप्ति होती है।  तुलसी के पौधे के पास तुलसी के पास घी का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। स्कंद षष्ठी पर ऐसा करने से पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं और घर में सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ता है।

सावधान! प्रेमानंद महाराज ने बताए सुख-शांति छीनने वाले 7 कारण, पांचवीं आदत हर कोई करता है

रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर ऐसी गलतियां कर रहे होते हैं जो हमें नैतिक शिक्षा में भी सिखाया जाता है। अब प्रेमानंद महाराज ने इनका स्पिरिचुअल एंगल भी बताया है और कहा कि ये गलतियां करने से इंसान के पुण्य नष्ट होते हैं। ये आदतें नष्ट कर सकती हैं जीवन की शांति प्रेमानंद महाराज के सत्संग कई लोगों को जीने की राह देते हैं। वह लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं ताकि जीवन आसानी से पार हो जाए। उन्होंने अपने एक सत्संग में ऐसी कुछ गलतियां बताईं जो लोग रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। प्रेमानंदजी ने कहा कि ऐसा करने वालों की सुख-शांति नष्ट हो जाती है। लालच करना लालच नहीं होना चाहिए। जो चीजें धर्म के मार्ग से मिलें उन्हीं से जीवन चलाना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे और परिवार सुखी रहेंगे। सही तरह से आया पैसा लंबे समय तक चलता है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि लालच में आया पैसा हाइड्रोजन की तरह आएगा और फिर अंधेरा करके जाएगा। अपमान ना सहना प्रेमानंद महाराज ने बताया कि जो लोग छोटे से अपमान से क्रोधित होकर दूसरे का बुरा करने लगते हैं यह उनके पतन का कारण बन सकता है। सामने वाला बेइज्जत करे तो बर्दाश्त कर लेना चाहिए। ऐसा करने से आपके पाप नष्ट होते हैं और सामने वाला उन पापों को ले लेता है। ऐसा करने से आप टेंशन में रहेंगे और कामकाज भी प्रभावित रहेंगे। हमेशा द्वेष करने वालों के बारे में सोचना प्रेमानंदजी ने कहा कि जो आपका बुरा चाहते हैं उन्हें दिमाग में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करके अगर आप गुस्सा करते हैं तो आपकी ही हानि होगी। कभी-कभी गुस्सा किसी भी आ सकता है लेकिन उसका पछतावा कर लें। आश्रित की रक्षा करना अगर भागकर कोई पशु, पक्षी या मनुष्य आपके पास आए तो उसकी रक्षा जरूर करें। आप मारते हैं या मरवा देते हैं इससे दर्गति होती है। निडर होकर पाप करना प्रेमानंदजी ने बताया कि जो लोग पाप खुश और निडर होकर करते हैं उनके जीवन की शांति छिन जाती है। अपनी तारीफ करना प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इंसान को अपनी बड़ाई अपने मुंह से नहीं करनी चाहिए। बहुत से लोग ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से बुद्धि भ्रस्ट हो जाती है और इंसान सही फैसले नहीं ले पाता है। किसी के साथ गलत व्यवहार करना प्रेमानंद महाराज ने बताया कि बच्चा, स्त्री, पागल या असहाय के साथ जो खराब व्यवहार करता है उसके जीवन का सुख और शांति नष्ट होती है। अगर आपकी पत्नी ऐसी है जिससे आप परेशान हैं या पति ऐसा है तो आप समझें कि ईश्वर ने आपके कुछ पिछले कर्म बैलेंस करने के लिए उन्हें भेजा है। कोई असहाय या पागल है उसे भी प्रताड़ित न करें, अच्छे मन से मदद और देखभाल करें।