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1 जनवरी को खास योग का निर्माण, इन शुभ कार्यों से पूरे साल चमकेगा भाग्य

नया साल 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास शुरुआत के साथ आने वाला है। 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन कई अत्यंत शुभ योग और ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग बन रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, यदि वर्ष के पहले दिन शुभ कर्म और पूजा-पाठ किए जाएं तो उसका प्रभाव पूरे साल तक बना रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि नए साल 2026 के पहले दिन कौन-से शुभ संयोग बन रहे हैं और किन कार्यों को करने से सौभाग्य, सुख और समृद्धि की वर्षा होगी। 1 जनवरी 2026 को बन रहे हैं ये शुभ ज्योतिषीय संयोग ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को कई दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो इसे विशेष रूप से फलदायी बनाते हैं। गुरुवार का दिन: देवगुरु बृहस्पति का वार होने के कारण यह दिन ज्ञान, धन और धर्म के लिए शुभ माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत: नए साल का पहला दिन होने के साथ-साथ इस दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष फलदायी होता है। रोहिणी नक्षत्र: यह नक्षत्र वृद्धि, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। रवि योग: यह योग हर कार्य में सफलता और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करता है। ग्रहों की विशेष स्थिति: सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र का धनु राशि में गोचर नए अवसर, धन लाभ और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इन सभी संयोगों के कारण नए साल 2026 की शुरुआत अत्यंत शुभ और मंगलकारी मानी जा रही है। नए साल 2026 के पहले दिन करें ये शुभ कार्य यदि आप चाहते हैं कि साल 2026 आपके लिए सुख, सौभाग्य और सफलता लेकर आए, तो 1 जनवरी को इन कार्यों को अवश्य करें— दान-पुण्य करें नए साल के पहले दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन या आवश्यक सामग्री का दान करें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। पूजा-पाठ से करें नए साल की शुरुआत घर में देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करें। संभव हो तो मंदिर जाकर दर्शन करें। धार्मिक कार्यों से साल की शुरुआत करने से पूरा वर्ष सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। प्रदोष व्रत में करें भगवान शिव की आराधना 1 जनवरी 2026 को गुरु प्रदोष व्रत होने के कारण भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष फल देती है। शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं। बेलपत्र, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। लक्ष्मी-गणेश और विष्णु जी की पूजा नए साल के दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना अवश्य करें। इससे घर में धन, वैभव, शांति और स्थिरता बनी रहती है। 1 जनवरी 2026 को बनने वाले शुभ योग नए साल को भाग्यवर्धक और मंगलमय बना रहे हैं। यदि इस दिन श्रद्धा और विधि से शुभ कार्य किए जाएं, तो पूरे वर्ष जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता बनी रहती है।

25 दिसंबर का राशिफल: नौकरी, व्यापार और स्वास्थ्य पर क्या पड़ेगा असर, जानें 12 राशियों का हाल

मेष: आज मेष राशि वालों की लाइफ में आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आज आपको संतान सुख में वृद्धि मिल सकती है। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं, इसके कारण आपको पैसा खर्च करना पड़ सकता है। वृषभ: वृषभ राशि वालों की पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। जीवन साथी की सेहत का ध्यान रखें। आज आपको बिजनेस में माता-पिता का साथ मिलेगा। कारोबार के लिए कहीं बाह पर जाना पड़ सकता है। मिथुन : आज मिथुन राशि वालों को आत्म संयत रहना होगा। धैर्यशीलता बनाए रखें। आपको लिए समय उत्तम है। आज किसी दोस्त से मिलना हो सकता है। कारेाबार में भागदौड़ रहेगी। कर्क: कर्क राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। इस समय कारोबार चल निकलेगा और लाभ के अवसर भी मिलेंगे। मित्रों व परिवार का साथ मिलेगा, इससे आपको लाभ होगा। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। सिंह: परिवार की सेहत का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा। आज सिंह राशि वालों को मन परेशान हो सकता है। कोशिश करें कि बातचीत में संतुलन बनाए रखें। लाइफ पार्टनर के लिए धन आगम के योग। तुला: आपके लिए इस रिलेशनशिप मैटर करते हैं, आपको इन पर ध्यान देना चाहिए। ऑफिस में आपके साथ काम करने वाले आपको हर तरह से सपोर्ट करेंगे। आपका बिजनेस आपके लिए अच्छी खबर लाएगा। कन्या : इस समय कन्या राशि वालों को शांत रहना होगा। फाइनेंस में जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। भागदौड़ अधिक रहेगी। आपके लिए करियर में आगे बढ़ने के योग भी बन रहे हैं। वृश्चिक: वृश्चिक राशि वालों का मन आज खुश रहेगा। बिजनेस इस समय बढ़ सकता है। आपकी प्रोपर्टी में भी वृद्धि हो सकती है। कारोबार में लाभ के मौके मिलेंगे। शैक्षिक कार्यों में सफलता हासिल हो सकती है। धनु : धनु राशि वालों के लिए शैक्षिक कार्यों में सम्मान और ट्रांसफर के योग बन रहे हैं। सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। लाभ के अवसर भी मिलेंगे। मकर : इस समय मकर राशि वालों को आत्म संयत रहना होगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का कोशिश करें, खासकर लवलाइफ में धैर्य रखना होगा। परिवार में किसी मंगलकार्य में पैसा खर्च करना पड़ सकता है। कुंभ: किसी दोस्त के सहयोग से किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। लेकिन कारोबार के लिए किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। आपके लिए जीवन में खुशियां आने वाली हैं। मीन: आज मीन राशि वालों का मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। भवन के रख-रखाव तथा साज-सज्जा के कार्यों पर खर्च बढ़ सकते हैं।

नमक और हल्दी की सही जगह, ताकि खुशियाँ बनी रहें

रसोई घर का वह हिस्सा है जिसे हम अपने घर का ऊर्जा केंद्र मानते हैं। भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में रखी हर चीज़ का हमारे स्वास्थ्य और भाग्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अक्सर हम अपनी सुविधा के लिए नमक और हल्दी के डिब्बों को पास-पास रख देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपके जीवन में बड़ी परेशानियाँ खड़ी कर सकती है? आइए विस्तार से समझते हैं कि वास्तु और ज्योतिष की दृष्टि से नमक और हल्दी को एक साथ क्यों नहीं रखना चाहिए और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं।  ग्रहों का संतुलन और उनका प्रभाव ज्योतिष शास्त्र में हर मसाले का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है: नमक: नमक का संबंध राहु और केतु से माना जाता है। साथ ही, कुछ विद्वान इसे चंद्रमा का प्रतीक भी मानते हैं। हल्दी: हल्दी को साक्षात बृहस्पति का स्वरूप माना जाता है। बृहस्पति सुख, समृद्धि, ज्ञान और वैवाहिक जीवन के कारक हैं। जब हम नमक और हल्दी को एक साथ रखते हैं, तो यह ग्रहों के बीच एक प्रकार का द्वंद्व पैदा करता है। राहु का प्रभाव जब गुरु के साथ मिलता है, तो यह गुरु-चांडाल दोष जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है, जिससे घर की बरकत रुक जाती है और शुभ कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं।  नकारात्मक ऊर्जा का संचार वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होना अनिवार्य है। नमक और हल्दी दो विपरीत प्रकृति के तत्व हैं। हल्दी जहां पवित्रता और मांगलिक कार्यों का प्रतीक है, वहीं नमक का स्वभाव सोखना है। यदि इन्हें सटाकर रखा जाए, तो हल्दी की सकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है, जिसका सीधा असर घर के मुखिया की आय और बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है। स्वास्थ्य और स्वच्छता नमक बहुत जल्दी वातावरण से नमी सोख लेता है। यदि नमक और हल्दी पास रखे हैं और हल्दी के डिब्बे में नमक के कण गिर जाएं, तो हल्दी में गांठें पड़ सकती हैं या वह खराब हो सकती है। भोजन बनाते समय अक्सर हम जल्दबाजी में होते हैं। पास-पास रखे डिब्बों के कारण चम्मचों का आदान-प्रदान हो सकता है, जिससे मसालों की शुद्धता और स्वाद प्रभावित होता है। रसोई में नमक रखने के सही नियम नमक को हमेशा कांच के जार या डिब्बे में रखना चाहिए। प्लास्टिक या स्टील के बर्तन में नमक रखना वास्तु दोष पैदा करता है। कांच का संबंध राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने से है। नमक के डिब्बे को कभी भी खुला न रखें। ऐसा माना जाता है कि खुला नमक घर की शांति को सोख लेता है। यदि संभव हो, तो नमक के डिब्बे में 2-3 लौंग डाल दें। इससे घर में धन का आगमन बना रहता है और नकारात्मकता दूर होती है। हल्दी के रखरखाव से जुड़ी जरूरी बातें  हल्दी के डिब्बे को अपनी रसोई के उत्तर-पूर्वी कोने की ओर रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यह स्थान देवताओं और गुरु का है। हल्दी निकालने के लिए हमेशा सूखे और साफ चम्मच का उपयोग करें। जूठे हाथ या गंदे हाथ कभी भी हल्दी के डिब्बे में न लगाएं।

सफलता और धन का रास्ता: नीम करोली बाबा की बताई 5 सीख जो बना सकती हैं आपको कामयाब

नीम करौली बाबा एक बहुत ही सरल लेकिन चमत्कारी संत थे। उनके पास जो भी गया, उसे जीवन का सही रास्ता मिला, सुकून मिला और उसके जीवन में बदलाव भी आया। बाबा ने सिखाया कि असली समृद्धि कैसे आती है। उनका मानना था कि अगर इंसान अपने मन, सोच और कर्म को सही दिशा में ले जाए, तो पैसा और सुख अपने आप जीवन में आने लगते हैं। बाबा ने हमेशा सच्चे जीवन और अच्छे कर्मों पर जोर दिया। उन्होंने कुछ ऐसे आसान नियम बताए, जो अगर हर इंसान अपनाए, तो ना सिर्फ वह अमीर बन सकता है, बल्कि मन से भी संतुष्ट रह सकता है। चलिए जानते हैं नीम करौली बाबा के अनुसार जीवन में अमीर बनने के लिए क्या करना चाहिए। सेवा भावना को अपनाएं नीम करौली बाबा का सबसे पहला और महत्वपूर्ण संदेश था- निःस्वार्थ सेवाभाव। उनका कहना था कि जब आप बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं, तो ईश्वर आपको इसके बदले में कई गुना ज्यादा लौटा कर वापस देता है। इसलिए नीम करोली बाबा का कहना मानकर जरूरतमंदो की हमेशा सहायता करनी चाहिए फिर वो चाहे आर्थिक रूप से हो या इमोशनली। जो लोग दूसरों की सहायता करते हैं, उनके जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है, जिससे धन की देवी लक्ष्मी उनकी तरफ आकर्षित होती है। हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से रहें नीम करौली बाबा हमेशा सत्य और ईमानदारी की राह पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका मानना था कि अगर इंसान सच्चे दिल से अपने कर्म करे और छल-कपट से दूर रहे, तो भगवान खुद उस व्यक्ति को जीवन के सही रास्ते पर ले जाते हैं। जो लोग सच्चाई और ईमानदारी से रहते हैं, उन्हें व्यापार और नौकरी हर जगह पर तरक्की मिलती है, साथ ही सामाजिक तौर पर भी उनकी इज्जत बढ़ती है। ध्यान और भक्ति से जुड़ें नीम करौली बाबा खुद भक्ति और साधना से जुड़े हुए थे। ऐसे में वे दूसरों को भी भक्ति की राह पर चलने की सलाह देते थे। उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति रोज थोड़ी देर के लिए ध्यान करता है और भगवान का नाम जपता है, तो उसके अंदर की सारी नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है और मन शांत होता है। ऐसे शांत मन के साथ जब कोई व्यक्ति कुछ भी काम करता है तो उसे अपने काम में सफलता जरूर मिलती है। जीवन में उदारता अपनाएं नीम करोली बाबा का कहना था कि धन को कभी भी बांधकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि अगर आपके पास धन है तो उससे जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और दान करना चाहिए। जब आप किसी भूखे को भोजन देते हैं या अनाथ बच्चों की पढ़ाई में सहायता करते हैं, तो इससे आपके जीवन में समृद्धि आती है। कर्म पर भरोसा करें, फल की चिंता ना करें नीम करौली बाबा ने जीवन से जुड़ी एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख दी है कि इंसान को अपना कर्म करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्मों में लगा रहता है, तो उसे जीवन में सफलता जरूर मिलती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी सुख और समृद्धि की कमी नहीं होती।

शिवलिंग को इस दिशा में रखकर करें अभिषेक, जीवन बन जाएगा खुशहाल और सिद्धियों से भरपूर

हिंदू धर्म में महादेव को देवों के देव कहा गया है। नए साल के पहले दिन यदि विधि-विधान से घर में शिवलिंग की स्थापना और अभिषेक किया जाए, तो यह न केवल मानसिक शांति लाता है बल्कि रुके हुए कार्यों को भी गति देता है। लेकिन, अक्सर लोग अनजाने में शिवलिंग को गलत दिशा में रख देते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। तो आइए जानते हैं साल के पहले दिन किस दिशा में शिवलिंग रखकर करें अभिषेक करें। किस दिशा में रखें शिवलिंग? वास्तु शास्त्र और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। उत्तर दिशा भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान मानी जाती है। शिवलिंग की जलाधारी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहता है। भूलकर भी न करें ये दिशा संबंधी गलती शिवलिंग को कभी भी पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए। यदि आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करते हैं, तो इसे भी शास्त्रों में वर्जित माना गया है। घर के मंदिर में शिवलिंग को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ से ऊर्जा का संचार चारों ओर हो सके। नए साल पर अभिषेक की विधि सिद्धियों की प्राप्ति के लिए साल के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें। यह जीवन के पांच दोषों को दूर करता है। महादेव को बेलपत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल या सिंदूर न चढ़ाएं। अंत में गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। घर में शिवलिंग का आकार शास्त्रों के अनुसार, घर में रखे जाने वाले शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए अंगूठे के ऊपर के पोर जितना बड़ा शिवलिंग ही सबसे शुभ माना जाता है। इससे अधिक बड़ा शिवलिंग मंदिरों के लिए उपयुक्त होता है। सिद्धि और सफलता के लिए विशेष मंत्र अभिषेक के दौरान यदि आप 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य और करियर के लिए 'रामबाण' सिद्ध हो सकता है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2024: 30 या 31 दिसंबर को व्रत? पढ़ें तिथि, मुहूर्त और महत्व

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व है। इस खास अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधिपूर्वक पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से साधक को  सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में। पौष पुत्रदा एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 50 मिनट पर शुरुआत होगी। वहीं, इसी तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 05 बजे होगा। ऐसे में 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाएगा। इस व्रत का पारण 31 दिसंबर को किया जाएगा। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 2025 पारण डेट और टाइम एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण करने का समय 31 दिसंबर को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक है। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय – सुबह 07 बजकर 13 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 34 मिनट पर चंद्रोदय का समय – दोपहर 01 बजकर 33 मिनट पर चन्द्रास्त का समय – 31 दिसम्बर को 03 बजकर 43 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 24 मिनट 06 बजकर 19 मिनट पर अभिजित मुहूर्त- 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट विजय मुहूर्त- 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट पर गोधूलि मुहूर्त- 05 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 59 मिनट पर करें इन चीजों का दान सनातन धर्म में एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी तिथि पर पीले फल, अन्न, धन और कपड़े समेत आदि चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।  

क्या एक गोत्र में शादी करने से जीवन में आती हैं परेशानियां? शास्त्र और मान्यताओं की पड़ताल

हिंदू धर्म में विवाह 16 संस्कारों में से एक माना जाता है. विवाह के बाद गृहस्थ जीवन की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में विवाह में कई परंपराएं होती है. विवाह के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है. इन्हीं महत्वपूर्ण बातों में शामिल है गोत्र. हिंदू धर्म में कभी भी एक ही गोत्र में विवाह नहीं किया जाता है, लेकिन ऐसा क्यों है? आइए विस्तार से जानते हैं. गोत्र का शाब्दिक अर्थ होता है वंश या कुल. प्राचीन समय में जो ऋषि-मुनियों के वंशज थे, उनको गोत्रों में बांटा गया था. हर गोत्र का एक मूल ऋषि होता है, जिसके नाम से उस गोत्र की पहचान होती है. उदाहरण के तौर पर कश्यप गोत्र, भारद्वाज गोत्र, गौतम गोत्र. एक गोत्र के लोगों को एक ही पूर्वज का वंशज माना जाता है, इसलिए कहा जाता है कि उनमें खून का रिश्ता यानी रक्त संबंध होता है. एक गोत्र में विवाह न करने का धार्मिक कारण एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे कारण हैं. हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक ही गोत्र के लोग भाई-बहन लगते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनको एक ही ऋषि का वंशज माना जाता है. ऐसे में एक गोत्र में विवाह ऋषि परंपरा का उल्लंघन माना जाता है. मान्यता है कि एक ही गोत्र में विवाह करने से विवाह दोष होता है, जिससे वर-वधू के जीवन में परेशानियां आती हैं. यही नहीं कहा जाता है कि समान गोत्र में विवाह करने के बाद जो संतान होती है, उसमें शारीरिक और मानसिक रोग होने की संभावना रहती है. ये है वैज्ञानिक कारण विज्ञान ने भी इस बात को माना है कि अगर एक गोत्र में विवाह किया जाता है, तो कई परेशानियां हो सकती हैं. विज्ञान के अनुसार, एक ही गोत्र या कुल में विवाह करने पर संतान में आनुवांशिक दोष हो सकते हैं. ऐसे दंपत्ति की जो संतान होती है, उसमें कुछ नयापन देखने को नहीं मिलता.

24 दिसंबर का राशिफल: सभी राशियों के लिए आज का भविष्यफल, जानें क्या कहती है सितारे

मेष आज दिन की शुरुआत थोड़ी भारी लग सकती है। मन में कई बातें एक साथ चलेंगी, जिससे ध्यान भटक सकता है। कामकाज में जल्दबाज़ी नुकसान दे सकती है, इसलिए हर काम सोचकर करें। किसी करीबी से कहा-सुना हो सकता है, लेकिन बात को बढ़ाने से बचें। पैसों के मामले में आज जोखिम लेना ठीक नहीं। शाम के समय हालात संभलेंगे और मन हल्का होगा। वृषभ आज का दिन शांत और संतुलित रहने वाला है। रोजमर्रा के काम आराम से निपटेंगे। घर के किसी सदस्य से बातचीत मन को अच्छा करेगी। खर्च ज़रूरत के हिसाब से करें, दिखावे से दूर रहें। सेहत ठीक रहेगी, बस आलस हावी न होने दें। दिन के अंत में सुकून महसूस होगा। मिथुन आज बातचीत में सावधानी जरूरी है। आपकी बात का मतलब गलत निकाला जा सकता है। ऑफिस या कामकाज में व्यस्तता बनी रहेगी। फोन या मैसेज पर बहस से दूरी रखें। किसी पुराने काम को पूरा करने का मौका मिल सकता है। शाम को थोड़ी राहत मिलेगी और दिमाग शांत होगा। कर्क आज भावनाएं ज्यादा असर डाल सकती हैं। छोटी बात भी दिल पर लग सकती है। परिवार से जुड़ा कोई विषय मन में चलता रहेगा। काम में आपकी मेहनत साफ़ दिखेगी, लेकिन तारीफ थोड़ी देर से मिलेगी। किसी भरोसेमंद इंसान से बात करने से मन हल्का होगा। रात को नींद ठीक रहेगी। सिंह आज दिन थोड़ा व्यस्त हो सकता है। काम में रुकावटें आएंगी और मन दुखी हो सकता है। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें। दूसरों से ज़्यादा उम्मीद न रखें। धैर्य से काम लेंगे तो नुकसान नहीं होगा। शाम के बाद स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होने लगेगी। तुला आज का दिन आपके पक्ष में रहेगा। अटके हुए काम आगे बढ़ेंगे और दिमाग साफ़ रहेगा। पैसों से जुड़ा कोई छोटा फायदा मिल सकता है। काम में फोकस अच्छा रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन थकान महसूस हो तो आराम जरूर करें। दिन कुल मिलाकर संतोषजनक रहेगा। धनु आज मन दुविधा में रह सकता है। किसी फैसले को लेकर बार-बार सोचेंगे। रिश्तों में बात दबाने से बेहतर है साफ़ कह देना। काम में मन कम लग सकता है। खर्च बढ़ने के योग हैं, इसलिए हाथ थोड़ा रोककर रखें। शाम को स्थिति थोड़ी साफ होगी। मकर आज मेहनत और जिम्मेदारी दोनों ज़्यादा रहेंगी। काम का दबाव महसूस होगा, लेकिन आप संभाल लेंगे। किसी पुराने मुद्दे पर फिर से बात हो सकती है। गुस्से में बोले गए शब्द नुकसान कर सकते हैं, इसलिए संयम रखें। दिन के आखिर में राहत मिलेगी। कुम्भ आज कुछ नया सोचने या बदलने का मन करेगा। पुराने काम से ऊब महसूस हो सकती है। किसी दोस्त या जान-पहचान वाले से मदद मिल सकती है। बाहर जाने या छोटी यात्रा का योग बन सकता है। खर्च थोड़ा बढ़ेगा, लेकिन जरूरी काम पर होगा। कन्या आज काम और जिम्मेदारियां दोनों बढ़ी रहेंगी। टालमटोल करने से दबाव और बढ़ सकता है। परिवार में आपकी राय को महत्व मिलेगा। सेहत में हल्की थकान या शरीर भारी लग सकता है, खुद को आराम दें। दिन मेहनत भरा लेकिन संभलने वाला रहेगा। वृश्चिक आज ध्यान भटकने वाला दिन है। काम करते वक्त मन इधर-उधर जाएगा। किसी दोस्त या परिचित की परेशानी में साथ देना पड़ सकता है। पैसों के मामले में जोखिम से बचें। शाम को मन थोड़ा बेहतर होगा और तनाव कम होगा। मीन आज मन शांत और स्थिर रहेगा। चीजों को लेकर ज्यादा सोचने का मन नहीं करेगा। रिश्तों में अपनापन महसूस होगा। काम धीरे चलेगा, लेकिन तनाव नहीं रहेगा। कोई छोटी-सी खुशी या अच्छी खबर दिन बना सकती है।

आज नहीं तो कभी नहीं! साल की अंतिम चतुर्थी पर गणेश पूजा में इन गलतियों से बचें

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या संकटों का निवारण, बप्पा का नाम सबसे पहले लिया जाता है. इस साल की आखिरी विनायक चतुर्थी कल यानी 24 दिसंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. चूंकि यह साल की अंतिम विनायक चतुर्थी है और बुधवार का दिन भगवान गणेश को ही समर्पित है, इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा के दौरान की गई छोटी सी चूक आपको शुभ फल से वंचित कर सकती है. विनायक चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 23 दिसंबर की दोपहर से हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि की मान्यता के कारण व्रत और मुख्य पूजा 24 दिसंबर को ही की जाएगी.     चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 23 दिसंबर 2025, दोपहर से     चतुर्थी तिथि समाप्त: 24 दिसंबर 2025, दोपहर तक     पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 11:19 AM से दोपहर 1:11 PM तक. गणेश पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां! तुलसी का प्रयोग वर्जित गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें. पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित किया है. इसकी जगह उन्हें ‘दुर्वा’ (दूब घास) अर्पित करें. चंद्रमा के दर्शन से बचें विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे कलंक लगने का भय रहता है. इसलिए शाम के समय सावधानी बरतें. खंडित मूर्ति की पूजा पूजा स्थान पर कभी भी ऐसी गणेश प्रतिमा न रखें जो कहीं से टूटी या चटक गई हो. खंडित मूर्ति की पूजा करने से घर में अशांति और दोष बढ़ता है. दिशा का ध्यान न रखना बप्पा की स्थापना करते समय ध्यान रखें कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो. पूजा के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना श्रेष्ठ माना जाता है. तामसिक भोजन और क्रोध विनायक चतुर्थी के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें. साथ ही, इस दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें, नहीं तो मानसिक शांति भंग हो सकती है. कैसे करें सही विधि से पूजा? सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. शुभ मुहूर्त में गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें. बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें. भगवान गणेश को 21 दुर्वा की गांठें और उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं. आखिर में गणेश चालीसा का पाठ करें और सपरिवार आरती उतारें.

खाने-सोने की गलत दिनचर्या डाल रही है सेहत पर असर, अभी करें सुधार

आपकी जीवनशैली पर वास्तु का गहरा असर पड़ता है। खाने से लेकर सोने तक वास्तु शास्त्र में हर चीज के लिए एक सही दिशा का वर्णन किया गया है, जिनका ध्यान रखने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसे में आपको भी इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। खाने के लिए सही दिशा वास्तु शास्त्र में खाना खाने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को सही माना गया है। अर्थात भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि ऐसा करने से पाचन में मदद मिलती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा में भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि वास्तु शास्त्र में इसे यम की दिशा माना गया है। ऐसे में इस दिशा में मुख करके भोजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य व मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर पश्चिम दिशा में भोजन किया जाए, तो इससे बीमारियों में वृद्धि होती है। सोने के लिए कौन सी दिशा है उचित वास्तु शास्त्र में माना गया है कि सोते समय आपका सिर दक्षिण या पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से आरामदायक नींद आती है, जिससे स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में सिर करके सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है और स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही वास्तु नियमों के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं सोना चाहिए और न ही दरवाजे की तरफ पैर करके सोना चाहिए। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र में पूजा आदि के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी (ईशान कोण) को सबसे उत्तम माना गया है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और घर में दिव्यता लाती है। ऐसे में आपका मंदिर इसी दिशा में होना चाहिए। वहीं अगर आपका बेडरूम घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो इससे रिश्तों में स्थिरता और मधुरता आती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में सोने से दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहता है।