samacharsecretary.com

BYD की सबसे छोटी कार: 4.9 सेकंड में तेज़ी, 380Km की रेंज के साथ

 नई दिल्ली BYD ने अपनी सबसे छोटी कार को लॉन्च कर दिया है. हम बात कर रहे हैं बीवाईडी एटो 1 (BYD Atto 1) की, जिसे कंपनी ने बैंकॉक मोटर शो के दौरान थाईलैंड में लॉन्च किया है. वैसे तो ये कार ग्लोबल मार्केट में पहले से मौजूद थी. कुछ मार्केट में कंपनी इसे सीगल (Seagull) या डॉल्फिन सर्फ के नाम से बेचती है।   ये कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार है, जिसका फोकस शहरों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक साधन ऑफर करता है. कंपनी ने इसे चार कलर ऑप्शन- शेल वॉइट, क्वांटम ब्लैक, पॉप ग्रीन और वेलोसिटी ब्लू में लॉन्च किया है. आइए जानते हैं इस कार की कीमतें और दूसरी खास बातें.  कितनी है कीमत?  कंपनी ने इस कार को थाईलैंड में लॉन्च किया है. जहां इसकी कीमत 4,29,900 बात (थाईलैंड की करेंसी) से शुरू होती है. भारतीय रुपयों में ये कीमत लगभग 12.32 लाख रुपये हो जाती है. वहीं टॉप वेरिएंट की कीमत 4,59,900 बात (लगभग 13.18 लाख रुपये) है।  कार चार एक्सटीरियर कलर में उपलब्ध है. इसमें ब्लैक और ग्रे कलर का इंटीरियर मिलता है. ग्लोबल लाइनअप में ये कार बीवाईडी डॉल्फिन से नीचे है और ब्रांड की थाईलैंड में सबसे छोटी कार है. इसकी लंबाई 3925 एमएम, चौड़ाई 1720 एमएम और ऊंचाई 1590 एमएम है. इसका व्हीलबेस 2500 एमएम का है।  थाईलैंड में कंपनी ने इस कार को दो वेरिएंट- डायनैमिक और प्रीमियम में लॉन्च किया है. कार में एलईडी हेडलैम्प्स, एलईडी डीआरएलएस और टेल लैम्प्स दिए गए हैं. साथ ही कार में स्पोर्टी रियर स्पॉयलर, फ्लोटिंग रूफ डिजाइन, रेन सेंसिंग वाइपर और 15-इंच के एलॉय व्हील्स हैं।  इंटीरियर की बात करें, तो इसमें 7-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंटल क्ल्सटर और 10.1 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है. ये सिस्टम एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कारप्ले के साथ आता है. कार में ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, लेदर सीट्स, रियर व्यू कैमरा और कई दूसरे फीचर्स मिलते हैं।  बीवाईडी एटो 1 को शहरों के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है. इसमें फ्रंट माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दिया गया है, जो 74 एचपी की पावर और 135 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. ये कार 4.9 सेकंड में 0 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. इसमें तीन ड्राइविंग मोड्स- ईको, नॉर्मल और स्पोर्ट मिलते हैं।  कार में 30.08kWh की बैटरी दी गई है, जो 300 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती है. इसमें 6.6kW की एसी चार्जिंग और 30kW तक की फास्ट डीसी चार्जिंग मिलती है. इसके प्रीमियम वेरिएंट में 38.88kWh की बैटरी दी गई है, जो 380 किलोमीटर की रेंज ऑफर करती है। 

Royal Enfield ने पेश की दमदार Guerrilla 450 बाइक, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड ने अपनी गुरिल्ला 450 (Guerrilla 450) का अपडेट लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस बाइक दो साल पहले लॉन्च किया था. नए अपडेट के साथ ही ब्रांड ने इसका नया वेरिएंट Guerrilla 450 Apex भी लॉन्च किया है. बाइक में कोई मैकेनिकल बदलाव नहीं किया गया है।  बाइक के एपेक्स वेरिएंट में हैंडलबार थोड़ा नीचे (56 एमएम) और आगे (57 एमएम) की ओर सेट किया गया है. इसका मतलब है कि बाइक चलाते हुए राइडर पहले के मुकाबले अब आगे की ओर ज्यादा झुका होगा. बाइक में नए टायर्स जोड़े गए हैं. बाइक का सीधा मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 से है. आइए जानते हैं इस बारे में क्या कुछ नया और अब इसकी कीमत कितनी है।  इंजन और परफॉर्मेंस  बाइक में वहीं पुराना 452 सीसी का लिक्विड कूल्ड इंजन दिया गया है, जो 40 पीएस की पावर और 40 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसमें 6 स्पीड गियरबॉक्स मिलता है, जो स्लिप एंड असिस्ट क्लच के साथ आता है. बाइक में कोई ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं।  इसमें 43 एमएम का टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन और लिंकेज टाइप मोनोशॉक रियर सस्पेंशन मिलता है. बाइक में फ्रंट और रियर डिस्क ब्रेक और डुअल चैनल एबीएस का फीचर दिया गया है. इसमें 4 इंच का टीएफटी डिस्प्ले दिया गया है, जो गूगल मैप्स के जरिए नेविगेशन में मदद करेगा।  इसके अलावा फोन कनेक्टिविटी, यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग और दो राइडिंग मोड्स मिलते हैं. बाइक का कर्ब वेट 185 किलोग्राम है. इसमें 11 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है, जो छोटा है. कंपनी अगर एक बड़ा फ्यूल टैंक देती तो ज्यादा बेहतर होता।  कितनी है कीमत?  Royal Enfield Guerrilla 450 की कीमत 2,49,194 रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. वहीं टॉप वेरिएंट की कीमत 2,72,479 रुपये एक्स शोरूम है. इसे आप कई कलर ऑप्शन में खरीद सकते हैं. एपेक्स वेरिएंट रेड, ब्लैक और ग्रीन कलर में आता है।  वेरिएंट्स की कीमत एपेक्स रेड     ₹ 2,49,194 एपेक्स ब्लैक     ₹ 2,56,387 एपेक्स ग्रीन     ₹ 2,56,387 डैश वेरिएंट ट्विलाइट ब्लू     ₹ 2,49,194 शैडो ऐश     ₹ 2,67,116 स्मोक सिल्वर     ₹ 2,67,116 पेइक्स ब्रॉन्ज     ₹ 2,67,116 वहीं डैश वेरिएंट को ट्विलाइट ब्लू, शैडो ऐश, स्मोक सिल्वर और ब्रॉन्ज में खरीद सकते हैं. बाइक का टॉप वेरिएंट फ्लैश सिर्फ एक कलर ब्रावा ब्लू में आता है। 

9 लाख करोड़ का नुकसान, आज फिर शेयर बाजार क्रैश, सेंसेक्स में 1700 अंक की गिरावट

मुंबई  दो दिनों की तेजी के बाद, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. लॉर्जकैप से लेकर मिड और स्‍मॉलकैप स्‍टॉक में हैवी फाल रहा. बीएसई SENSEX में 1690 अंक या 2.25% की गिरावट आई और यह 73,583 पर क्‍लोज हुआ. निफ्टी में 486 अंक या 2.09 फीसदी की गिरावट रही, जो 22,819 पर बंद हुआ. निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्‍लोज हुआ।  शेयर बाजार में यह बड़ी गिरावट ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्‍य नहीं होने के कारण आई है. हालांकि ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक कोई हमला नहीं करने का ऐलान किया है और होर्मुज को खोलने की डेडलाइन बढ़ाकर 6 अप्रैल तक कर दी है. फिर भी बाजार में गिरावट देखने को मिली है।  बीएसई टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयर तेजी से टूटे हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट रिलायंस इंडस्‍ट्री के शेयरों में हुई है, जो 4.60 फीसदी गिरकर 1347 रुपये पर आ चुका है. इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एसबीआई जैसे शेयरों में 4 फीसदी की गिरावट रही है. बाकी शेयर 2 फीसदी से ज्‍यादा गिरे हैं।  निवेशकों को तगड़ा नुकसान बुधवार को बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. इस हिसाब से देखा जाए तो निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।  क्‍यों आई शेयर बाजार में भारी गिरावट     प्रॉफिट बुकिंग: पिछले दो सत्रों में शेयरों में 3.5% की तेजी के बाद 27 मार्च को मुनाफावसूली देखने को मिली. आईटी को छोड़कर सभी सेक्‍टर बुरी तरह प्रभावित हुए. स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में 1.7% की गिरावट आई. बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के शेयरों में 1-3% की गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्‍यादा गिरावट में योगदान Reliance ने दिया, जो 4.60 फीसदी तक टूट गया।      जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होते हुए दिखाई नहीं दे रही है. हालांकि ट्रंप ने 6 अप्रैल तक डेडलाइन बढ़ा दी है और कहा है कि वे 10 दिनों तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर हमला नहीं करेंगे. इसके बावजूद, शेयर बाजार इसके निगेटिव ले रहा है. इसी कारण ग्‍लोबल मार्केट में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।      कच्‍चे तेल का भाव: शुक्रवार को कच्‍चे तेल के भाव में तेजी देखी जा रही है. भारतीय शेयर बाजार बंद होने तक कच्‍चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जिस कारण शेयर बाजार में गिरावट और भी हावी हो गई।      ऑल टाइम लो पर रुपया: शुक्रवार को भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया. यह रुपया का सबसे निचला स्‍तर है, क्‍योंकि इस बात की चिंता थी कि मिडिल ईस्‍ट वॉर के कारण पैदा एनर्जी आपूर्ति संकट लंबा खिंचेगा, जिससे एनर्जी आयात करने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर दबाव और गहरा जाएगा।      VIX में बड़ी उछाल: बाजार की अस्थिरता का सूचकांक इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो दर्शाता है कि बाजार को निकट भविष्य में बिकवाली के दबाव की उम्मीद है।   

रामनवमी पर सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, निवेशकों को हुआ बड़ा झटका

इंदौर  आज रावनवमी के मौके पर सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। चांदी तो अचानक 15000 रुपये टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में राम नवमी के दिन यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 26 मार्च को शेयर बाजार बंद रहा, लेकिन कमोडिटी मार्केट खुलते ही सोना और चांदी के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शाम के वक्त ट्रेडिंग शुरु होते ही कीमतें तेजी से टूट गईं, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। पीली धातु 3 हजार से ज्यादा टूटी एमसीएक्स (MCX) पर शाम करीब 7 बजे सोना 3000 रुपये से ज्यादा गिरकर करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह गिरावट तो  बुधवार के बंद भाव के मुकाबले 2 फीसदी से ज्यादा रही। चांदी में तो 15 हजार की भारी भरकम गिरावट कीमती धातु सोने के साथ ही चांदी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।  मई वायदा वाली चांदी करीब 15,000 रुपये टूटकर 2.20 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे आ गई। यह गिरावट करीब  6% दर्ज की गई। सोना और चांदी फिर क्यों हुए धड़ाम? दरअसल अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से  तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच, ईरान ने समुद्री रास्तों को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है और वो काफी गिर गए। वहीं जनवरी के मुकाबले देखें, तो सोना अपने रिकॉर्ड हाई 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से करीब 53,000 रुपये सस्ता हो चुका है जबकि चांदी भी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से गिरकर करीब 2.20 लाख रुपये पर आ गई है।

सेंसेक्स में 1009 अंकों की गिरावट, युद्ध और कमजोर रुपया प्रमुख कारण—गिरावट की 5 वजहें

मुंबई   शेयर बाजार में आज शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक शुरुआती कारोबार के दौरान लुढ़क गए। सेंसेक्स 1009 अंक की गिरावट के बाद 74624.78 अंक के इंट्रा-डे लो लेवल पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद 23,000.85 स्तर तक लुढ़क गया था। घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट की वजह से निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये आज डूब गए हैं। इस गिरावट की वजह एशिआई बाजारों की कमजोर स्थिति, रुपया का नए रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंचने को माना जा रहा है। आइए जानते हैं 5 बड़ी वजहें — 1-मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ईरान के साथ जारी सत्ता संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। जिसकी वजह से अनिश्चितता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अप्रैल तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर अटैक ना करने की बात कही है। एक्सपर्ट् का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं तब की स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकती है। इसका बुरा असर शेयर बाजारों पर दिख सकता है। 2-वैश्विक स्तर पर कमजोर स्थिति एशिया के कई धाकड़ शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को को मिली है। कोरिया Kospi और जापान Nikkei में आज 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है। S&P 500 और Nasdaq में भी दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 3- रुपया रिकॉर्ड लो लेवल पर है युद्ध शुरू होने के बाद से ही रुपया की स्थिति ठीक नहीं है। आज रुपया रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच गया। 1 डॉलर की कीमत 94.1575 के स्तर पर आ गया। इससे पहले डॉलर के मुकाबले रुपये का रिकॉर्ड लो लेवल 93.98 था। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से रुपया 3.5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। 4- कच्चे तेल की कीमतों में जारी उछाल ने बढ़ाई टेंशन सप्लाई प्रभावित होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। आज ब्रेंट क्रू़ड ऑयल का भाव 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। 5- FPI की निकासी घरेलू शेयर बाजारों से एफपीआई की निकासी जारी है। एफपीआई ने 123688 रुपये की निकासी की है। यह आंकड़ा 25 मार्च तक का है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

सोना-चांदी के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव, खरीदारी से पहले देखें ये अहम जानकारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सर्राफा बाजार में गुरुवार, 26 मार्च 2026 को एक बार फिर सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिला है, जबकि चांदी के दाम आज भी स्थिर बने हुए हैं। भोपाल और इंदौर में जारी ताजा रेट्स के मुताबिक, खरीदारी से पहले बाजार की चाल समझना बेहद जरूरी हो गया है। सोना हुआ महंगा आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है: 24 कैरेट सोना 1 ग्राम: ₹14,191 8 ग्राम: ₹1,13,528 10 ग्राम: ₹1,41,910 22 कैरेट सोना 1 ग्राम: ₹13,515 8 ग्राम: ₹1,08,120 10 ग्राम: ₹1,35,150 कल के मुकाबले सोना महंगा हुआ है, जिससे निवेशकों और खरीदारों की चिंता बढ़ सकती है। चांदी के दाम स्थिर चांदी के रेट में आज कोई बदलाव नहीं हुआ: 1 ग्राम: ₹260 1 किलो: ₹2,60,000 लगातार उतार-चढ़ाव के बीच आज चांदी की कीमत स्थिर रहना खरीदारों के लिए राहत की खबर है। बाजार का ट्रेंड क्या कहता है? मार्च महीने में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। ऐसे में अगर आप खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो जल्दबाजी के बजाय सही समय का इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है। खरीदारी से पहले ध्यान रखें रोज बदलते रेट जरूर चेक करें एक बार में बड़ी खरीदारी करने से बचें निवेश के हिसाब से सही कैरेट चुनें, कुल मिलाकर, सोना फिर महंगा हो गया है, लेकिन चांदी स्थिर है ऐसे में समझदारी से फैसला लेना ही सही रहेगा।

X सर्विस फिर डाउन, अचानक ठप पड़ी और यूजर्स को नहीं मिल रही कोई जानकारी

नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों की वजह से चर्चा में है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में यूजर्स ने शिकायत की कि यह प्लेटफॉर्म ठीक से काम नहीं कर रहा। लोगों को फीड लोड करने में परेशानी हुई, नई पोस्ट दिखाई नहीं दीं और कई मामलों में वे ऐप और वेबसाइट दोनों ही ठीक से एक्सेस नहीं कर पा रहे थे। अचानक आई इस दिक्कत ने लाखों यूजर्स के डिजिटल एक्सपीरियंस को प्रभावित किया। आउटेज की पुष्टि आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector की ओर से भी की गई है। वहां पर कुछ ही समय में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हजारों यूजर्स ने एक साथ दिक्कत दर्ज की, और शिकायतों का ग्राफ अचानक ऊपर चला गया। आमतौर पर इस तरह का स्पाइक इस बात का संकेत होता है कि समस्या डिवाइस या नेटवर्क की नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के सर्वर या सिस्टम स्तर पर है। यूजर्स के सामने आईं ये दिक्कतें यूजर्स को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उनमें सबसे ज्यादा के लिए दिक्कत फीड का रिफ्रेश ना होना थी। कई लोगों ने बताया कि पोस्ट और कमेंट्स लोड नहीं हो रहे थे, जबकि कुछ को ‘Something went wrong’ जैसे एरर मेसेज दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ यूजर्स को पुरानी पोस्ट तो दिख रही थीं लेकिन नई अपडेट नहीं आ रही थीं, जिससे लग जा रहा है कि बैकएंड सिंकिंग या सर्वर रिस्पॉन्स में गड़बड़ी हुई। दुनियाभर में सामने आए मामले रिपोर्ट्स की मानें तो आउटेज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों से भी इसी तरह की रिपोर्ट्स सामने आईं, जिससे यह मामला ग्लोबल आउटेज का हो गया है। जब एक ही समय पर अलग-अलग देशों के यूजर्स एक जैसी समस्या रिपोर्ट करते हैं, तो यह संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ी दिक्कत आई है। अच्छी बात यह है कि सीमित संख्या में ही यूजर्स इससे प्रभावित हुए हैं। फिलहाल, X की ओर से इस बारे में तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह के आउटेज के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें सर्वर ओवरलोड, अचानक बढ़ा ट्रैफिक, बैकएंड अपडेट या फिर किसी तकनीकी फेलियर की संभावना ज्यादा होती है। पहले भी X को ऐसे आउटेज का सामना करना पड़ा है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो गए। अगर आप भी इससे प्रभावित हुए हैं तो परेशान ना हों और कुछ वक्त इंतजार करें।

ईरान युद्ध का प्रभाव: हल्दी के दाम ₹3,500 प्रति क्विंटल कम, किसान परेशान

 मराठवाड़ा महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध हल्दी का निर्यात ईरान के युद्ध की वजह से पूरी तरह ठप हो गया है. इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं. कुछ ही दिनों में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. यानी एक क्विंटल हल्दी पर किसानों को 3,500 रुपये का नुकसान हो रहा है।   शिवसेना नेता और विधान परिषद सदस्य हेमंत पाटील ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा की हल्दी मुख्य रूप से खाड़ी देशों (गल्फ) और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है. पिछले महीने शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है. निर्यात रुकने से माल घरेलू बाजार में ही सड़ रहा है, जिससे दाम तेजी से गिर रहे हैं।  बता दें कि मराठवाड़ा क्षेत्र पूरे देश के हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है. यहां की हल्दी गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है. हिंगोली जिले में ही लगभग 2 लाख एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती होती है. हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था. यह हल्दी अपनी खास खुशबू, रंग, स्वाद के लिए जानी जाती है. आयुर्वेद, दवा, खाने-पीने और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है।  टेंशन में किसान निर्यात बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो कीमतें और भी गिर सकती हैं.  किसान पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से परेशान हैं, अब हल्दी जैसी नकदी फसल पर यह झटका उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो रहा है।  मराठवाड़ा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्दी कोई राहत पैकेज या वैकल्पिक बाजार का इंतजाम करे, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो. फिलहाल युद्ध की वजह से न सिर्फ हल्दी बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। 

महंगाई का डबल झटका! LPG के बाद अब खाने के तेल की कीमतें बढ़ने के आसार

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारतीय घरों तक पहुंचने लगा है। इस बार मामला सिर्फ एलपीजी तक सीमित नहीं है, बल्कि किचन की सबसे जरूरी चीज (खाने का तेल) भी महंगा होने लगा है। भारत में पूड़ी, पराठा, समोसा, जलेबी से लेकर रोजमर्रा की सब्जियों तक, हर चीज में तेल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल रही है। क्या है डिटेल पिछले एक महीने में खाने के तेल की कीमतों में साफ उछाल देखने को मिला है। 24 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच सूरजमुखी तेल की कीमत 175 रुपये से बढ़कर 181 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं पाम ऑयल 5 रुपये महंगा होकर 141 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। सोयाबीन तेल में भी 4 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मूंगफली, वनस्पति और सरसों तेल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है। भारत में खाने के तेल का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण का भी अहम स्रोत है। यह शरीर को जरूरी फैट, ऊर्जा और विटामिन देता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कुपोषण का सामना करते हैं। लेकिन समस्या यह है कि देश में तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है और घरेलू उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है। अगर खपत की बात करें तो 2022-23 में शहरी भारत में एक व्यक्ति औसतन 12 किलो और ग्रामीण इलाकों में करीब 11 किलो तेल सालाना इस्तेमाल करता है। वहीं 2004-05 में यह खपत काफी कम थी। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत करीब 56 फीसदी तेल आयात करता है, जबकि सिर्फ 44 फीसदी घरेलू उत्पादन से आता है। आयात के आंकड़े भी इस निर्भरता को साफ दिखाते हैं। 2017 में भारत ने 11.8 अरब डॉलर का तेल आयात किया था, जो 2022 में बढ़कर 21.1 अरब डॉलर हो गया। 2025 में यह थोड़ा घटकर 18.6 अरब डॉलर रहा। इसमें पाम ऑयल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 41 फीसदी, सोयाबीन तेल 35 फीसदी और सूरजमुखी तेल 18 फीसदी रहा। सरकार ने क्या कहा हालांकि, सरकार का कहना है कि मौजूदा ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद भारत में तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा नहीं है। भारत मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे कई देशों से तेल आयात करता है, जिससे अगर किसी एक देश से सप्लाई प्रभावित होती है तो दूसरे विकल्प मौजूद रहते हैं। साथ ही सरकार ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स-ऑयलसीड्स’ भी शुरू किया है, जिसका मकसद आने वाले वर्षों में देश में तेल उत्पादन बढ़ाना है।

अब PNG है तो LPG नहीं: गैस संकट के बीच सरकार ने बदले नियम

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने रसोई गैस को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया निर्देश जारी किया है जिसके अनुसार जिन इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस यानी PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां अगर लोग LPG सिलेंडर से PNG पर शिफ्ट नहीं करते हैं, तो उनकी LPG सप्लाई बंद की जा सकती है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश में गैस नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने और एक ही ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण LPG सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे देश में इसकी कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में सरकार अब लोगों को PNG अपनाने के लिए कह रही है, जो पाइप के जरिए सीधे घर तक लगातार मिलती है और सिलेंडर बुक करने की झंझट भी खत्म कर देती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए नियम के मुताबिक, अगर किसी घर में PNG उपलब्ध होने के बावजूद तीन महीने के भीतर कनेक्शन नहीं लिया जाता है, तो LPG सप्लाई बंद की जा सकती है। सरकार का असली उद्देश्य क्या है? सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य गैस सप्लाई सिस्टम को ज्यादा संतुलित और मजबूत बनाना है। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा पहले से उपलब्ध है, वहां LPG के उपयोग को कम करके उस गैस को उन क्षेत्रों तक पहुंचाना है जहां अभी पाइपलाइन नेटवर्क नहीं है। इसके साथ ही सरकार “फ्यूल डाइवर्सिफिकेशन” को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि देश किसी एक ही सोर्स पर निर्भर न रहे, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल लेवल पर सप्लाई में रुकावटें आ रही हैं। पाइपलाइन गैस को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किए ये बड़े बदलाव सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क को तेजी से फैलाने के लिए नियमों को काफी आसान बना दिया है। अब पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी मंजूरियों को सरल कर दिया गया है और अलग-अलग जगहों पर लगने वाले चार्जेस को स्टैंडर्ड किया गया है, ताकि कंपनियों को अनावश्यक देरी या अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अगर तय समय के अंदर कोई सरकारी विभाग अनुमति नहीं देता, तो उसे अपने आप मंजूरी मान लिया जाएगा। इन स्थिति में बंद नहीं होगी LPG अगर किसी घर तक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन देना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, तो उस स्थिति में संबंधित अधिकृत कंपनी उपभोक्ता को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करेगी। ऐसे मामलों में उस घर की LPG सप्लाई जारी रहेगी और उसे बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, कंपनी को यह स्पष्ट रिकॉर्ड रखना होगा कि PNG कनेक्शन क्यों नहीं दिया जा सका। साथ ही, जैसे ही भविष्य में उस इलाके में PNG कनेक्शन देना संभव हो जाएगा, यह NOC वापस लिया जा सकता है और फिर उपभोक्ता को PNG पर स्विच करना पड़ सकता है। यानी जहां PNG लगाना संभव नहीं है, वहां लोगों को LPG से राहत मिलती रहेगी। PNG के फायदे सरकार PNG को बढ़ावा इसलिए दे रही है क्योंकि यह LPG के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है। PNG में गैस सीधे पाइप के जरिए घर तक पहुंचती है, जिससे सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, इसमें लीकेज का खतरा भी कम होता है और यह लगातार उपलब्ध रहती है। साथ ही, PNG का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है।