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चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! 4% से ज्यादा टूटी कीमत, चीन से जुड़े फैसले का बड़ा असर

नई दिल्ली भारत के बाजार जहां मुहर्रम की वजह से बंद हैं वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी के भाव में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। आज यानी शुक्रवार (26 जून) को कॉमेक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कॉमेक्स सिल्वर में और भी तेज बिकवाली देखी गई और यह 4.44 प्रतिशत गिरकर 55.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव 58.025 डॉलर प्रति औंस था। वहीं, कॉमेक्स गोल्ड 44.80 डॉलर यानी 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,002.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान इसने 4,001.20 डॉलर प्रति औंस का निचला स्तर भी छुआ। यह गिरावट सोने के लिए लगातार चौथे साप्ताहिक नुकसान की ओर इशारा करती है। हाल के अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कीमतों में दबाव अभी भी बना हुआ है, जिससे निवेशकों का ध्यान फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर केंद्रित हो गया है। क्यों गिर रहे सोने-चांदी के दाम चीन से आई सुस्त मांग की खबर: रॉयटर्स की खबर के मुताबिक चीन के हांगकांग के माध्यम से सोने के शुद्ध आयात में मई के दौरान लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक से भौतिक मांग के कमजोर पड़ने का संकेत है। चीन से कम मांग की खबर ने भी वैश्विक सोने के बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। महंगाई ने बढ़ाई फेड की चिंता: गुरुवार (25 जून) को जारी आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में मई के दौरान महंगाई तीन वर्षों में पहली बार 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव के चलते बढ़ती ऊर्जा कीमतें रहीं। मुद्रास्फीति में यह तेज वृद्धि उन उम्मीदों को मजबूत करती है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करना जारी रख सकता है। फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: फेड अधिकारियों ने भी सतर्क रुख अपनाया है। शिकागो फेड प्रेसिडेंट ऑस्टेन गूल्सबी ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में कुछ सुधार के बावजूद, मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी ऊंचा बना हुआ है। वहीं, न्यूयॉर्क फेड प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर है। CME FedWatch के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर्स अब इस वर्ष तीन ब्याज दर वृद्धि की संभावना जता रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में सितंबर में दर वृद्धि की उम्मीदें तेजी से बढ़ी हैं। ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर पड़ता है, क्योंकि निवेशक उनकी बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। मजबूत डॉलर ने बढ़ाई कीमतों पर मुश्किल: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त की ओर बढ़ रहा है, जो सोने-चांदी के लिए एक और नकारात्मक संकेत है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है और कीमतों में गिरावट आती है। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती वैश्विक बाजारों में निवेशकों के जोखिम उठाने के रुख को भी प्रभावित करती है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन का बाजार पर असर: जियो-पॉलिटिकल टेंशन भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने एक जहाज पर हमले की रिपोर्ट के बाद होर्मुज के माध्यम से जहाजों के संरक्षण अभियानों को रोक दिया है। इस घटना ने अमेरिका-ईरान के नाजुक शांति समझौते को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं। इस तरह की घटनाओं से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बना रहता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। अमेरिकी PCE डेटा पर टिकी निगाहें: बाजार सहभागी अब आगामी अमेरिकी PCE (व्यक्तिगत उपभोग व्यय) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह डेटा ब्याज दरों की उम्मीदों और कीमती धातुओं की दिशा के लिए अतिरिक्त संकेत प्रदान कर सकता है। PCE, फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति मापक माना जाता है, इसलिए इसके आंकड़ों का बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

आज से बदल गए LPG के नियम! कच्चे तेल की कीमत घटते ही सरकार का बड़ा ऐलान, जानिए क्या बदला

 नई दिल्‍ली एलपीजी को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. अभी तक जो भी नियम कायदे और पाबंदियां लागू थीं, उसे अब खत्‍म कर दिया गया है. लेकिन यह सिर्फ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल LPG ग्राहकों के लिए ही है. सरकार ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं और सप्लाई को वेस्ट एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है।  पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि संकट की शुरुआत में रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है. इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है, जिससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्‍टमर्स को काफी राहत मिली है. यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है.  सरल शब्‍दों में कहें तो 50 फीसदी एलपीजी की सप्‍लाई अब कमर्शियल और इंडस्‍ट्री कस्‍टमर्स को की जाएंगी।  वेस्ट एशिया संकट के दौरान, घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत आदेश जारी किए थे. इन आदेशों के तहत C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ़ LPG उत्पादन के लिए करना जरूरी कर दिया गया था और उन्हें पेट्रोकेमिकल व अन्य डाउनस्ट्रीम इस्तेमाल से हटाकर LPG उत्पादन में लगाया गया था।  C3-C4 स्ट्रीम्स को लेकर बदलाव पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन में सुधार और इम्पोर्टेड LPG कार्गो की अनुमानित उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने LPG पूल में C3/C4 स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का भी फैसला किया है. नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम्स का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू LPG की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े।  घरेलू एलपीजी पर कोई असर नहीं सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए C3-C4 गैसों का आवंटन बढ़ाने के बावजूद आम जनता के लिए घरेलू एलपीजी की उपलब्‍धता को कम नहीं किया जाएगा. सरकार यह तय करेगी कि घरेलू एलपीजी का उत्‍पादन कम से कम 40 टीएमटी हर दिन बना रहे. इसका मतलब है कि रसोई एलपीजी गैस की सप्‍लाई बनी रहेगी। कच्‍चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट  जंग शुरू होने से पहले कच्‍चा तेल जिस लेवल पर पहुंचा था, अब उससे भी नीचे आ चुका है. ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है. तेल की कीमतों में यह गिरावट तब आई है, जब होर्मुज को फिर से खोल दिया गया है और जहाज तेजी से होर्मुज पार कर रहे हैं। 

पर्सनल से लेकर फाइनेंशियल डेटा तक, CRED यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ी चिंता?

 नई दिल्ली अगर आप पुराने फेसबुक यूजर हैं तो आपको ये बात पता होगी. फेसबुक के लॉगइन पेज पर एक टैगलाइन लिखी होती थी. 'फेसबुक फ्री है और हमेशा फ्री रहेगा'. लेकिन ऐसा नहीं है फेसबुक अब दर्जनों पेड सर्विस चलाता है और डेटा बेचता है।  दिलचस्प ये है कि कई साल पहले ही वो टैगलाइन भी कंपनी ने लॉगइन पेज से हटा ली. एक वादा टूटा. फिर जब वॉट्सऐप को जकरबर्ग ने खरीदा तो एक और वादा किया गया. वादा ये था कि वॉट्सऐप को अलग रखा जाएगा और इसका डेटा नहीं बेचा जाएगा ना वॉट्सऐप से कमाई की जाएगी. ये वादा भी काफी पहले टूट चूका।  हर बार जकरबर्ग ने तोड़ा है वादा, क्या कुणाल शाह भी ऐसा करेंगे? अब एक और वादा देखने को मिला है. भारतीय ऐप क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह वॉट्सऐप के ग्लोबल सीईओ बन गए हैं और क्रेड में मेटा ने 900 मिलियन डॉलर्स निवेश कर दिया है. लोगों को तुरंत लगा कि अब क्रेड का डेटा भी फेसबुक का हो जाएगा, लेकिन जैसे फेसबुक और वॉट्सऐप के शुरुआती समय में वादा किया गया था, यहां भी एक वादा दिखा।  कंपनी का स्टैंड है कि वो क्रेड का डेटा नहीं देगी. लेकिन क्या आप इस बात को मानेंगे कि मेटा, मार्क जकरबर्ग और क्रेड के कुणाल शाह अपने इस वादे पर कायम रहेंगे? कब तक?  वॉट्सऐप दो लोगों ने मिलकर बनाया था. ब्रायन ऐक्टन और जेन कूम. दोनों ही प्राइवेसी के बड़े एडवोकेट थे और डेटा नहीं बेचना चाहते थे. उन्होंने तय किया था कि वो कुछ भी हो जाए, लेकिन यूजर डेटा नहीं बेचेंगे।  ऐप ने खूब तरक्की की और बाद में फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीद लिया. मार्क जकरबर्ग का वादा था कि वो वॉट्सऐप से कभी पैसे नहीं कमाएंगे और ना ही वॉट्सऐप का यूजर डेटा बेचेंगे।  कुछ साल सबकुछ ठीक चला, लेकिन मार्क जकरबर्ग अपनी आदत के मुताबिक पूराना वादा भूल गए और वॉट्सऐप का यूजर डेटा पेरेंट कंपनी यानी फेसबुक सर्विसेज के साथ शेयर होने लगा. आलम ये है कि अब वॉट्सऐप पर ऐड्स आ रहे हैं और पेड प्लान लॉन्च हो गए हैं।  वॉट्सऐप के फाउंडर का मैने इंटरव्यू किया तो उन्होंने बाताया था कि वॉट्सऐप की असली ताकत काफी पहले खत्म हो चुकी है. शुरुआत में वॉट्सऐप के दोनों फाउंडर्स ऐप बिकने के बाद भी कंपनी में काम करते रहे, लेकिन धीरे धीरे डेटा शेयरिंग को लेकर मार्क जकरबर्ग से उनकी तकरार बढ़ी और दोनों ने ही वॉट्सऐप को छोड़ दिया।  क्रेड और कुणाल शाह के पास भारतीय यूजर्स का संवेदनशील डेटा असल में क्रेड एक डेटा प्लेटफॉर्म है, जो भारत के सबसे प्रीमियम यूजर्स का बेहद गहरा और संवेदनशील डेटा अपने पास रखता है. यह डेटा सिर्फ नाम और नंबर तक सीमित नहीं है. इसमें यूजर का खर्च करने का तरीका, उसकी फाइनेंशियल आदतें, उसकी क्रेडिट हिस्ट्री, यहां तक कि उसकी लाइफस्टाइल तक शामिल है।  अगर कोई यूजर अपने ईमेल को क्रेड से लिंक करता है, तो ऐप को उसके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, बिल, इंश्योरेंस, निवेश और लोन से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिल जाती है. यानी यूजर की पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल एक ही जगह तैयार हो जाती है।  यही वजह है कि भले ही क्रेड सालों से घाटे में चल रही कंपनी रही हो, लेकिन उसकी वैल्यू कम नहीं हुई. क्योंकि टेक दुनिया में आज सबसे कीमती चीज प्रॉफिट नहीं, डेटा है. और वो भी ऐसा डेटा जो क्लीन हो, भरोसेमंद हो और हाई-वैल्यू यूजर्स का हो।  अब इसे वॉट्सऐप के साथ जोड़कर देखिए. भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा वॉट्सऐप बाजार है. लेकिन इतने बड़े यूजर बेस के बावजूद वॉट्सऐप की सबसे बड़ी समस्या रही है… कमाई।  मेटा पिछले कई सालों से वॉट्सऐप को मोनेटाइज करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे वैसी सफलता नहीं मिली जैसी गूगल पे, फोन पे या पेटीएम को मिली. यहीं पर CRED और कुनाल शाह का रोल अहम हो जाता है।  मेटा के लिए क्यों जरूरी हैं कुणाल शाह? कुणाल शाह ने FreeCharge से लेकर CRED तक एक चीज बार-बार साबित की है, वह टेक्नोलॉजी से ज्यादा लोगों के बिहेवियर को समझते हैं. वह जानते हैं कि यूजर कब खर्च करता है, क्यों करता है और उसे किस तरह के ऑफर से रोका या बढ़ाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात कुणाल शाह के ऐप के पास भारतीय यूजर्स के सेंसिटिव डेटा का भरमार है. ऐसा डेटा जो मेटा भारत में अब तक हासिल नहीं कर पाया है।  मेटा को अब ऐसे ही लीडर की जरूरत है. क्योंकि वॉट्सऐप का अगला फेज सिर्फ मैसेजिंग का नहीं, बल्कि पेमेंट, लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का होने वाला है. लेकिन इस पूरी कहानी का एक दूसरा और ज्यादा गंभीर पहलू भी है।  जब फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीदा था, तब यह कहा गया था कि वॉट्सऐप यूजर डेटा को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करेगा. लेकिन समय के साथ यह वादा कमजोर होता गया. आज वॉट्सऐप और मेटा के बीच डेटा शेयरिंग को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।  अब मेटा ने क्रेड में करीब 900 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. साथ ही क्रेड के फाउंडर को वॉट्सऐप की कमान सौंपी जा रही है. मेटा यह जरूर कहता है कि उसे क्रेड यूजर डेटा तक सीधी पहुंच नहीं मिलेगी. लेकिन टेक इंडस्ट्री के पैटर्न को देखें तो यह भरोसा पूरी तरह से सहज नहीं लगता।  इतिहास यही बताता है कि जब निवेश, लीडरशिप और प्लेटफॉर्म एक ही दिशा में जुड़ते हैं, तो डेटा का फ्लो भी धीरे-धीरे उसी डायरेक्शन में बढ़ता है. अगर फ्यूचर में क्रेड और वॉट्सऐप के बीच किसी भी तरह का डेटा इंटीग्रेशन होता है, तो इसके नतीजे बहुत बड़े हो सकते हैं. क्योंकि क्रेड के पास भारत के सबसे प्रीमियम और फाइनेंशियली एक्टिव यूजर्स का डेटा है, जबकि वॉट्सऐप के पास सबसे बड़ा यूजर बेस।  क्रेडिट कार्ड और तमाम फिनांशियल डिटेल्स इन दोनों के मेल से एक ऐसा सिस्टम बन सकता है जो यूजर के बिहेवियर को समझकर उसे टारगेटेड ऑफर दे, लोन दे, खरीदारी कराए और पूरी डिजिटल लाइफ को कंट्रोल करे. यह सुविधा के नाम पर एक सुपर ऐप होगा, लेकिन … Read more

भारत पर Amazon का बड़ा दांव, PM मोदी से मुलाकात में CEO ने बताया ₹1220000000000 लाख करोड़ निवेश और विस्तार का प्लान

नई दिल्ली अमेजन ने भारत में एक और बड़े निवेश का एलान किया है। Amazon के CEO एंडी जेसी भारत दौरे पर हैं, और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से मुलाकात की। इस दौरान एंडी जेसी ने घोषणा की है कि कंपनी 2030 तक AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए देश में अतिरिक्त $13 बिलियन (1.22 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। यह अतिरिक्त निवेश Amazon द्वारा भारत में $35 बिलियन के नए निवेश की घोषणा के छह महीने के भीतर किया गया है। कंपनी के अनुसार, दिसंबर 2025 में घोषित $35 बिलियन और 25 जून को घोषित $13 बिलियन के निवेश को मिलाकर, 2010-2030 के बीच भारत में Amazon का कुल निवेश $88 बिलियन से ज़्यादा हो गया है। AI में भारी निवेश इस नए निवेश के साथ, Amazon भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली सबसे बड़ी ग्लोबल कंपनियों में से एक बन गई है। इसके अलावा, Amazon भारत में सबसे बड़ी विदेशी निवेशक, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी कंपनी और देश में सबसे ज़्यादा नौकरियां देने वाली कंपनियों में से एक है। अमेज़न के CEO एंडी जेसी ने कहा: "हम एक दशक से भी पहले भारत आए थे और तब से अपने अलग-अलग बिज़नेस के ज़रिए ग्राहकों, सेलर्स, डेवलपर्स, स्टार्ट-अप्स और कंपनियों को सेवा दे रहे हैं। हमें बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, खासकर हमारे ई-कॉमर्स, AI और क्लाउड बिज़नेस में ज़बरदस्त ग्रोथ हुई है।" 20 साल में 88 अरब डॉलर का निवेश अमेजन ने भले ही 6 महीने के भीतर 48 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर डाला है, लेकिन साल 2010 से 2030 तक के कुल निवेश को देखा जाए तो अमेजन ने भारत में करीब 88 अरब डॉलर का निवेश कर दिया है. हालिया निवेश घोषणा के बाद अमेजन भारत में ग्‍लोबल एआई और क्‍लाउड इन्‍फ्रा पैसे लगाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है. साथ ही यह सबसे बड़ी विदेशी निवेशक भी बन चुकी है. अमेजन भारत में सबसे बड़ी विदेशी निर्यात करने वाली ई-कॉमर्स कंपनी के साथ ही जॉब पैदा करने वाली विदेशी कंपनी भी है।  कई साल से भारत में दे रहे सेवाएं अमेजन के सीईओ ने बताया कि उनकी कंपनी दशकों पहले भारत आई थी और इसके बाद से ही यहां लगातार सेवाएं दे रही है. अमेजन आज अपने कस्‍टमर्स, सेलर, डेवलपर्स, स्‍टार्टअप और छोटी कंपनियों सहित तमाम कारोबार को सेवाएं दे रही है. अभी तक का प्रदर्शन काफी बेहत रहा है, खासकर ई-कॉमर्स, एआई और क्‍लाउड के बिजनेस में अमेजन काफी अच्‍छा काम कर रही है।  पीएम मोदी की जमकर तारीफ एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा क‍ि अमेजन भारत में अपने विकास के साथ यहां छोटे कारोबारियों की मदद करने और जॉब पैदा करने में भी सहयोग दे रही है. हमने अगले 5 साल में 48 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है, जो देश के हर क्षेत्र की डिमांड के हिसाब से किया जाएगा. हम पीएम मोदी के विजन से काफी प्रभावित हैं, जो विकसित और आत्‍मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के जरिये लॉन्‍ग टर्म में विकास का हिस्‍सा बनने के लिए प्रेरित करते हैं।  38 लाख नौकरियां पैदा करने में मदद एंडी जेसी ने कहा कि पीएम मोदी के इस विजन के साथ अमेजन ने करीब 38 लाख नौकरियां पैदा की हैं और 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात में भी मदद की है. इसके अलावा 1.5 करोड़ से ज्‍यादा छोटे कारोबारियों तक एआई का फायदा पहुंचाने के साथ साल 2030 तक 40 लाख सरकारी स्‍कूलों तक भी एआई की सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्‍य है. साल 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें से 21 अरब डॉलर का इस्‍तेमाल तो सिर्फ एआई और क्‍लाउड निवेश में किया जाएगा।  भारत को लेकर क्या हैं प्राथमिकताएं एंडी जेसी ने कहा, "जैसे-जैसे हम भारत में Amazon का विस्तार कर रहे हैं, हमारे बिज़नेस की प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताओं के साथ मेल खाती जा रही हैं – जैसे AI तक पहुंच को आसान बनाना, छोटे बिज़नेस को डिजिटल बनाना, रोज़गार पैदा करना और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना। भारत में अपने बिज़नेस की बढ़ती मांग को पूरा करने और देश को इन प्राथमिकताओं को हासिल करने में मदद करने के लिए हम अगले पाँच सालों में $48 बिलियन से ज़्यादा का निवेश कर रहे हैं।" एंडी जेसी ने यह भी कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत' के विज़न से प्रेरित हैं और भारत के साथ लंबे समय तक पार्टनर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  

सोने में बड़ी गिरावट! 3 महीने में सबसे सस्ता हुआ गोल्ड, रॉबर्ट कियोसाकी का बड़ा बयान

 नई दिल्ली सोना सस्ता हो रहा है, चांदी भी दनादन क्रैश होती नजर आ रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX तक पर सोना-चांदी का भाव टूटा है. हाल ये है कि गोल्ड रेट अब 12 हफ्ते या तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है. इस बीच मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर एक पोस्ट किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. Gold Price Crash के बीच उन्होंने कहा है कि ये बहुत अच्छी खबर है, सोना सस्ता हो रहा है और मैं इसे खरीदने की तैयारी कर रहा हूं।  सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट बीते कुछ दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. बुधवार को टूटते हुए Gold-Silver Rate करीब तीन महीने के लो-लेवल पर आ गए. इसके पीछे की वजह का जिक्र करें, तो जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक हाई पर बने रहने का उम्मीद के बीच निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं. MCX Gold Rate की बात करें, तो 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1.41 लाख रुपये पर आ गया है. तो वहीं MCX Silver Price गिरते हुए 2.12 लाख रुपये तक टूट गई।   'मैं और खरीदूंगा सोना…' कीमती धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट के बीच 'Rich Dad Poor Dad' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने अपनी नई पोस्ट में सोना-चांदी में गिरावट को खरीदारी का बेहतरीन मौका बताया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट (Robert Kiyosaki X Post) में लिखा, 'बड़ी खुशखबरी: सोने की कीमत गिर रही है और मैं तकनीकी चार्ट में बदलाव का इंतजार कर रहा हूं, इसके साथ ही मैं सोना और खरीदूंगा।  कियोसाकी ने बताया अपना प्लान रॉबर्ट कियोसाकी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी खरीदारी के प्लान को एक उदाहरण के जरिए बताया. उन्होंन लिखा, 'ट्रेंड ही आपका दोस्त है! मैं पुराना सबक दोहरा रहा हूं. सोने का टूटना वैसा ही है, जैसे किसी घर की कीमत का गिरना. मैं यह जानना चाहता हू कि आस-पास के इलाके में क्या हो रहा है? अगर इलाके की कीमत बढ़ रही है, तो मैं कम कीमत वाला घर खरीद सकता हूं. वहीं अगर इलाके की कीमत गिर रही है, तो मैं कम कीमत वाला घर खरीदने का प्लान छोड़ सकता हूं।  कियोसाकी के मुताबिक, ठीक ऐसा ही सोने के साथ ही मैं Gold Rate Fall देख रहा हूं और मुझे जानना है कि ऐसा क्यों हो रहा है? इकोनॉमी में आखिर क्या चल रहा है. अगर ये गिर रही है, तो शायद मैं सोना न खरीदूं, लेकिन सोने की कीमत गिरने के साथ जिस पल मुझे लगेगा कि इकोनॉमी ऊपर जा रही है, मैं बहुत कम कीमत पर सोना खरीद सकता हूं. उन्होंने अपने गोल्ड एसेट्स के बारे में बताते हुए लिखा, 'आज मेरे पास जो सोना है, उसमें से ज्यादातर मैंने 300 डॉलर (उस समय लगभग 20,000 रुपये) के भाव में खरीदा था. अपना ख्याल रखें।  गौरतलब है कि रॉबर्ट कियोसाकी सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहते हैं और उनकी पोस्ट में अक्सर सोना-चांदी, बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की सलाह दी जाती है. डॉलर, स्टॉक, बॉन्ड को नकली करेंसी बताते हुए वे Gold-Silver-Bitcoin को अमीर बनने का जरिया बताते हैं।  26 मार्च के बाद सबसे सस्ता सोना साल 2026 की शुरुआत में सोना-चांदी की कीमतों में आग लगी हुई नजर आई थी. Gold Rate तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, तो वहीं चांदी की कीमत 100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई थी. लेकिन हालिया महीनों में इसकी कीमत तेजी से नीचे आई है. एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चला कि दोनों कीमती धातुओं ने 26 मार्च, 2026 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर को छू लिया है। 

गोल्ड-सिल्वर में बड़ी गिरावट, लगातार दूसरे दिन टूटे दाम; जानें नए रेट

इंदौर  सोने और चांदी का रेट आज 24 जून को लगातार दूसरे दिन फिसल गया है. सोने का भाव आज एमसीएक्स पर सुबह 9:40 बजे पर 2234 रुपये गिरकर 144295 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी का भाव भी 3407 रुपये फिसलकर 222427 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है. कॉमैक्स पर गोल्ड का दाम 1.59% गिरकर 4081 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. सिल्वर 1.55% फिसलकर 61.110 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।  सोने के अलावा अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. प्लैटिनम 0.9% की कमजोरी के साथ 1,637.34 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा. इसके अलावा, पैलेडियम की कीमत में 1.2% की गिरावट आई और यह 1,223.29 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।  अलग-अलग शहरों में कितना है सोने का रेट? मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सराफा बाजार की बात करें तो चेन्नई में 24 कैरेट सोना 14,792 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,559 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,339 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है. वहीं, दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 14,474 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट का 13,269 रुपये और 18 कैरेट का 10,859 रुपये प्रति ग्राम है।  मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में सोने की कीमतें लगभग समान रहीं. इन शहरों में 24 कैरेट सोना 14,459 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,254 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 10,844 रुपये प्रति ग्राम पर रहा।  क्या सोने में आएगी और गिरावट? जर्मनी के प्रमुख बैंक डच बैंक(Deutsche Bank) ने सोने की कीमतों को लेकर अपने अनुमान में 20% से अधिक की कटौती की है. बैंक का कहना है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 3 से 4 बार बढ़ोतरी की संभावना बाजार में मजबूत होती है, तो सोने की कीमत गिरकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक की दी गई जानकारी में बताया गया है कि एमपीसी को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने के लिए रिस्क का संतुलन नीचे की ओर कर दिया है।  डच बैंक के विश्लेषक माइकल शुएह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बैंक के बेस केस अनुमान के अनुसार, यदि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,800 डॉलर प्रति औंस तक रह सकती है. हालांकि, अगर मार्केट आने वाले समय में कई बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना को कीमतों में शामिल करता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है और इसकी कीमत 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर बदलती उम्मीदें सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह हैं. Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स मंगलवार को 1.6% गिरकर 4,135 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गए. ग्लोबल लेवल पर पिछले एक महीने में सोने की कीमतों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है. साथ ही एशियाई बाजारों में मांग कमजोर पड़ने के संकेत भी मिले हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर दबाव बढ़ा है। 

सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार वापसी, बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी से बाजार में उछाल

मुंबई  शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को सुस्ती के साथ शुरुआत हुई, लेकिन घंटेभर के कारोबार के बाद ही अचानक बाजी पलट गई. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ भागते हुए नजर आने लगे. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex 700 अंक से ज्यादा उछलकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty 24000 के पार निकल गया. इस दौरान बैंकिंग शेयर रफ्तार पकड़े हुए नजर आए. ICICI Bank से लेकर HDFC Bank तक के स्टॉक ग्रीन जोन में कारोबार कर रहे थे।  सेसेंक्स-निफ्टी की बदली चाल  शेयर मार्केट में कारोबार की ओपनिंग के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,200 की तुलना में मामूली बढ़त लेकर 76,229 के लेवल पर खुला और कुछ देर सुस्ती के साथ ही कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. करीब घंटेभर के कारोबार के बाद अचानक 30 शेयरों वाले इस इंडेक्स ने रफ्तार पकड़ी और 700 अंक से ज्यादा की उछाल के साथ 76,976 पर जा पहुंचा।  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty इंडेक्स की भी चाल बदली-बदली नजर आई. अपने पिछले बंद 23,824 की तुलना में गिरावट के साथ ये इंडेक्स 23,795 के साथ रेड जोन में ओपन हुआ. लेकिन जैसे ही सेंसेक्स ने रफ्तार पकड़ी ये भी अचानक ग्रीन जोन में आ पहुंचा और खबर लिखे जाने तक 180 अंक से ज्यादा की तेजी लेकर 24,013 पर ट्रेड करता दिखा।  बैंकिंग समेत इन स्टॉक्स ने दिखाया दम शेयर बाजार में लौटी इस तेजी के बीच बैंकिंग स्टॉक्स समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने अपना दम दिखा. बीएसई लार्जकैप में शामिल Trent Share (3.70%), IndiGo Share (2.80%), Bajaj Finance Share (2.40%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. वहीं बैंकिंग सेक्टर में ICICI Bank Share (2.70%), HDFC Bank Share (2.20%), SBI Share (1.90%), Axis Bank Share (1.30%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप में शामिल AU Bank Share (3.50%), तो Yes Bank Share (1.50%) की तेजी लिए नजर आया।  विदेशों से मिले ये संकेत  भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से मिले-जुले संकेत मिल रहे थे. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट की वजह से भी बाजार का सेंटीमेंट सुधरा है. अगर एशियाई बाजारों की बात करें, तो बुधवार को कोस्पी से लेकर हैंगसेंग तक में तेजी देखने को मिली, लेकिन शुरुआती कारोबार में धीमी रफ्तार से भागता हुआ Gift Nifty अचानक तेज रफ्तार से भागने लगा और करीब 200 अंक चढ़ गया।   

अब ₹32 लीटर में चलेगी गाड़ी! सस्ते ईंधन और 60 KM तक के एवरेज ने किया कमाल

 वडोदरा पेट्रोलियम उत्पादों के आयात से देश के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के लिए नए-नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इथेनॉल मिले हुए पेट्रोल के बाद अब एक नए तरीके का पेट्रोल-डीजल देश में तैयार किया गया है, जो ना सिर्फ बेहद सस्ता होगा बल्कि एवरेज भी सामान्य तेल जितना ही मिल रहा है। प्लास्टिक वेस्ट से तैयार किए गए इस पेट्रोल-डीजल से एक तरफ जहां ईंधन का एक नया और सस्ता विकल्प मिलेगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान भी होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वडोदरा में गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के वैज्ञानिकों ने यह कमाल किया है। उन्होंने सफलतापूर्वक मिक्स्ड प्लास्टिक वेस्ट को पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन में बदला है। ऐसा नहीं कि यह फॉर्मूला फाइलों या लैब तक सीमित है, बल्कि मोटसाइकिलों को दौड़ाकर देख लिया गया है। भारत के प्रमुख दोपहिया निर्माता कंपनी की तीन मोटसाइकिलों को इन पेस्ट्रो पेट्रोल से दौड़ाया गया। इसके लिए इसमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं हुई। प्लास्टिक वाले पेट्रोल से बाइक में 60 का मिला एवरेज एक और अच्छी बात यह है कि माइलेज भी लगभग सामान्य पेट्रोल जितना ही है। 100 सीसी की एक बाइक जिसने सामान्य पेट्रोल से 62 का एवरेज दिया वह प्लास्टिक से तैयार एक लीटर पेट्रोल से 60 किलोमीटर दौड़ी। जब आप इस नए पेट्रोल के फायदे जानकर खुश हो रहे हैं तो एक और खुशखबरी है। इस पेट्रोल से प्रदूषण भी मानक के भीतर ही हो रहा है। प्लास्टिक वाले पेट्रोल से चल रही मोटरसाइकिलों ने पलूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया। 100 KG प्लास्टिक से निकलेगा 50 KG ईंधन, 32 रुपये कीमत रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि 100 किलोग्राम प्लास्टिक को कचरे को प्रोसेस करके करीब 50 किलोग्राम ईंधन निकाला जा सकता है। कच्चा तेल जहां 24 रुपये लीटर की कीमत पर उत्पादित किया जा सकता है तो अपग्रेड करने के बाद इसकी कीमत 32 रुपये प्रति लीटर होगी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस टेक्नॉलजी से उत्पादित तेल 90 फीसदी तक सामान्य पेट्रोल-डीजल जैसा ही है। विमान भी उड़ सकेंगे प्लास्टिक वाले ईंधन से? पेस्ट्रो पेट्रोल में कितनी संभावना हो सकती है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एविएशन कंपनी एयरबस भी जीएसवी के साथ काम कर रही है। कोशिश की जा रही है कि प्लास्टिक कचरे से विमान को उड़ाने वाले ईंधन को भी विकसित किया जाए। कई जगहों पर हो सकती है शुरुआत प्लास्टिक वाले पेट्रोल से ईंधन बनाने की शुरुआत पहले उन जगहों पर की जा सकती है जहां प्लास्टिक का कचरा एक बड़ी समस्या है और ईंधन का पहुंचना उतना ही मुश्किल। लेह, लद्दाख, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे स्थानों पर यूनिट लगाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा झांसी के रेलवे लोकोमोटिव शेड और कोलकाता की छावनी में भी ऐसा किया जा सकता है। इसको लेकर कई मंत्रालयों में विचार विमर्श चल रहा है।

Tata Electronics में हड़कंप: 630GB डेटा लीक की खबर, Apple-Tesla के दस्तावेज भी बताए जा रहे शामिल

नई दिल्ली भारत की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जो चिपसेट, स्मार्टफोन पार्ट्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ने कंपनी के सिस्टम डेटा को हैक कर लिया और कई सीक्रेट फाइल्स चुरा ली है. इसके बाद हैकर्स की तरफ से पैसे की मांग की जा रही है।  बताया जा रहा है कि इस डेटा लीक में कई ऐसी सीक्रेट फाइल्स शामिल हैं, जिनसे कंपनी की जरुरी जानकारियां दुनिया के सामने आ सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ऐपल और टेस्ला जैसी कंपनियों को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स की सप्लाई कर रही थी।  जानिए कौन-सा डेटा हुआ चोरी, जिसके बाद मचा हड़कंप रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम में हैकर्स ने रैनसमवेयर नाम का वायरस डाला था. यह वायरस सिस्टम की फाइल्स और डेटा को लॉक कर देता है. इसके बाद हैकर्स डेटा वापस देने के बदले फिरौती की मांग करते हैं।  डेटा लीक के बाद डार्क वेब पर करीब 630GB का डेटा पोस्ट किया गया है. इसमें कंपनी की सीक्रेट जानकारी, ईमेल्स, कर्मचारियों की डिटेल्स और ऐपल से जुड़े डिजाइन डॉक्यूमेंट्स शामिल बताए जा रहे हैं. ऐपल और टेस्ला दोनों ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े कस्टम में शामिल हैं।  कैसे लगी सेंध, क्या-कुछ हुआ लीक? रिपोर्ट्स में पता चला है कि डेटा लीक होने की वजह एक मिडिलवेयर फर्म के पुराने क्रेडेंशियल्स यानी कि आईडी-पासवर्ड थे। हैकर्स ने उनका इस्तेमाल करके डेटा लीक किया। बता दें कि लीक हुए डेटा में एप्पल के सप्लायर स्पेसिफिकेशन्स और टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बेहद प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स देखने को मिले हैं। इतना ही नहीं चोरी हुए डेटा में कंपनियों के ग्राहकों की बिजनेस संबंधी जानकारी जैसे कि नाम, ईमेल आईडी, फोन नंबर और जॉब प्रोफाइल आदि भी शामिल है।(REF.) कंपनियों को मिली फिरौती की धमकी इस साइबर हमले की जिम्मेदारी एक कुख्यात साइबरक्राइम ग्रुप इकारस ने ली है। हैकर्स ने चेतावनी तक दी है कि अगर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित कंपनियां उन्हें समय पर फिरौती की रकम नहीं देती, तो वे पूरे डेटा को पब्लिक कर देंगे। इसे लेकर सुरक्षा कंपनी हंट्रेस ने खुलासा किया है कि हैकर्स ने उन्हें एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी के सर्वर का इस्तेमाल करके फिरौती का ईमेल भेजा था। डेटा लीक की पुष्टि होने के बाद क्लू ने सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक को जांच के लिए बुलाया है। बाकी का डेटा सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा फर्म ने सभी लिंक्स को तोड़ दिया है। क्यों हुई सुरक्षा में चूक? यह साइबर हमला इस तरह का था जिसमें हैकर्स एक कंपनी को निशाना बनाकर उससे जुड़ी सैकड़ों कंपनियों का डेटा चुरा लेते हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि क्लू के किसी कर्मचारी द्वारा अनजाने में पासवर्ड चुराने वाला मैलवेयर डाउनलोड करने की वजह से पुराने क्रेडेंशियल लीक हुए। यह भी बताया जा रहा है कि पिछले साल क्लू ने AI में निवेश करने के लिए आधे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसकी वजह से कंपनी की सुरक्षा कमजोर होती गई। जानिए साइबर अटैक के बाद टाटा का क्या था जवाब रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा कि उन्हें इस साइबर अटैक की जानकारी कुछ हफ्ते पहले ही मिल गई थी. हालांकि, इस हमले की वजह से कंपनी की फैक्ट्री या बिजनेस ऑपरेशन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।  हैकर्स की तरफ से डेटा लीक के बाद फिरौती की मांग की गई है. वहीं, इस पूरे मामले में ऐपल भी अपनी तरफ से जांच कर रहा है।  टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स टाटा ग्रुप की तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में से एक है. कंपनी ने 2023 में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी. वहीं, टेस्ला ने 2024 में सेमीकंडक्टर सप्लाई को लेकर टाटा के साथ डील की थी।  टाटा ने कर्मचारियों को दी थी जानकारी रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी।  रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी।  इस साइबर अटैक के बाद कंपनियों की सीक्रेट जानकारी और डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 

शेयर बाजार में भारी तबाही, 23 लाख करोड़ स्वाहा; हालात ऐसे कि ट्रेडिंग तक करनी पड़ी बंद

मुंबई  नई दिल्‍ली. अमेरिका में टेक शेयरों की जोरदार बिकवाली के कारण बाजार में आई गिरावट एशियाई बाजारों तक पहुंच गई है. भारतीय शेयर बाजार आज लाल निशान में कारोबार कर रहा है. समाचार लिखे जाने तक सेंसेक्‍स 574 अंक टूटकर तो 168 अंक गिरकर कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों में सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को लगा. मेन इंडेक्‍स कोस्पी 9% से ज्यादा टूट गया. भारतीय समयानुसार दिन के 11 बजकर 34 मिनट पर सर्किट लगने के बाद कोस्‍पी में ट्रेडिंग रोक दी गई. तीन घंटे में ही निवेशकों के ₹23 लाख करोड़ डूब गए।  दक्षिण कोरिया के अलावा जापान, चीन, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया के बाजार भी दबाव में दिखाई दिए. जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 1.5% गिर गया. चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स लगभग 1% नीचे आ गया. हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया. ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स भी फिसल गया।  अमेरिका में एआई शेयरों में गिरावट सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली. इसका असर एसएंडपी 500 और नैस्डैक जैसे प्रमुख इंडेक्स के फ्यूचर्स पर भी पड़ा है. एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.53% नीचे और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स लगभग 1% तक फिसल गए. सबसे ज्यादा दबाव उन कंपनियों पर दिखा, जिन्हें AI क्रांति का सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला माना जा रहा था. अमेरिका की इस कमजोरी का असर दक्षिण कोरिया में दिखाई दिया. दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था और उसका शेयर बाजार एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर से काफी हद तक जुड़ा हुआ है।  तेजी पर सवार था कोरियाई शेयर बाजार सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां AI सर्वर और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की दुनिया की सबसे बड़ी सप्लायर हैं. पिछले कई महीनों से AI की मांग बढ़ने के कारण इन कंपनियों के शेयरों में तूफानी तेजी आई थी. इस वजह से कोस्‍पी में भी जोरदार बढ़त दर्ज की गई. लेकिन आज, 23 जून को अचानक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।