samacharsecretary.com

न्यू इंडिया बैंक घोटाले में बड़ा कदम, हिरेन भानु दंपत्ति की तलाश तेज

मुंबई 122 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के मामले में न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन हिरेन भानु, उनकी पत्नी और बैंक की कार्यवाहक उपाध्यक्ष गौरी भानु के खिलाफ मुंबई पुलिस रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी कर रही है। मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट दोनों के खिलाफ घोषित अपराधी का नोटिस जारी कर चुकी है। इसके बाद, मुंबई पुलिस अपनी कार्रवाई में जुट गई है। मुंबई पुलिस ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) ने हिरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल करने के बाद दूसरी बार गैर-जमानती वारंट जारी किया था, क्योंकि घोटाले के उजागर होने से पहले ही दोनों आरोपी विदेश फरार हो गए थे। मुंबई पुलिस का कहना है कि अब कोर्ट की ओर से घोषित अपराधी नोटिस जारी होने के बाद ईओडब्ल्यू रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) जारी करने का अनुरोध करने की तैयारी कर रही है। इंटरपोल की मदद से यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें करीब एक महीने का समय लग सकता है। मुंबई के एस्प्लेनेड कोर्ट ने अप्रैल में हिरेन भानु और उनकी पत्नी गौरी भानु को 122 करोड़ रुपए के गबन मामले में भगोड़ा अपराधी घोषित किया। इसी समय, अदालत ने पुलिस को मामले में पांच आरोपियों की 167.85 करोड़ रुपए कीमत की 21 संपत्तियों को कुर्क करने की भी अनुमति दी थी। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) इस मामले में बैंक के पूर्व महाप्रबंधक हितेश मेहता और पूर्व सीईओ अभिमन्यु भोन समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। घोटाले का खुलासा होने के बाद हिरेन भानु अपनी पत्नी के साथ देश छोड़कर चले गए। हालांकि, हिरेन भानु ने खुद को निर्दोष बताते हुए गिरफ्तार वरिष्ठ अधिकारी हितेश मेहता पर 122 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। अपने बयान में हिरेन भानु ने खुलासा किया था कि मेहता ने फरवरी में बैंक के प्रभादेवी मुख्यालय में आरबीआई के अधिकारियों के पहली बार पहुंचने पर एक फोन कॉल के दौरान अपराध स्वीकार किया था।  

अनिल अंबानी मुश्किल में! बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI ने डाला छापा

मुंबई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार सुबह कारोबारी अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास ‘सीविंड’, कफ परेड पर छापेमारी की. यह कार्रवाई 17,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत की गई है. सुबह लगभग 7 बजे CBI अधिकारी अंबानी के आवास पर पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, 7–8 अधिकारी तलाशी अभियान में शामिल हैं. छापेमारी के दौरान अनिल अंबानी और उनका परिवार घर पर मौजूद रहा. CBI की यह छापेमारी रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें एजेंसी ने हाल ही में अपने दायरे का विस्तार किया है. 10 दिन का मांगा था समय इससे पहले अनिल अंबानी ने जांच एजेंसियों को दस्तावेज जमा करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था, लेकिन अधिकारियों को अब तक दी गई जानकारी से संतोष नहीं है. ईडी को संदेह है कि यस बैंक से मिले लोन में गड़बड़ी की गई और पैसे को शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, ये शेल कंपनियां सिर्फ नाम मात्र के लिए थीं और उनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था. CBI की यह छापेमारी रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही विस्तृत जांच का हिस्सा है. अरबों का बकाया कर्ज ईडी के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) पर ₹5,901 करोड़ से अधिक रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) पर ₹8,226 करोड़ से अधिक और आरकॉम (RCom) पर लगभग ₹4,105 करोड़ का कर्ज है. यह कर्ज करीब 20 सरकारी और निजी बैंकों के समूह का है, जिनमें यस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं. CBI ने दर्ज किए थे FIR सीबीआई और ईडी दोनों अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े कथित 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड की जांच कर रहे हैं. CBI ने पहले दो FIR दर्ज कीं, जिसके बाद ईडी ने छापेमारी शुरू की. मामला वित्त वर्ष 2017 से 2019 के बीच का है, जब यस बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनियों को अवैध तरीके से लोन ट्रांसफर किए. ईडी सूत्रों का कहना है कि लोन मिलने से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटर्स को उनके व्यवसाय में मोटा पैसा मिला, जिससे रिश्वत और दोनों पक्षों के बीच सांठगांठ की आशंका गहराती है. इसी लेन-देन और संदिग्ध फंडिंग कनेक्शन की जांच फिलहाल जारी है. सूत्रों के मुताबिक, CBI ने दो एफआईआर दर्ज करने के बाद ईडी ने छापेमारी की थी. मामला वित्त वर्ष 2017 से 2019 का है, जब यस बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनियों को अवैध तरीके से लोन ट्रांसफर किए. आरोप है कि लोन स्वीकृत होने से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटर्स को उनके कारोबार में मोटा पैसा मिला, जिससे रिश्वत और सांठगांठ की आशंका गहराती है. इससे पहले 4 अगस्त को ईडी ने अनिल अंबानी से पूछताछ की थी. पूछताछ के बाद ईडी ने उनके कई शीर्ष अधिकारियों को भी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत समन जारी किए. इनमें अंबानी के दो करीबी सहयोगी अमिताभ झुनझुनवाला और सतीश सेठ शामिल हैं, जो उनके व्यापारिक साम्राज्य में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं और वित्तीय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम छह समन जारी किए जा चुके हैं. इन अधिकारियों पर ईडी की नजर पहले से ही थी, जब विभिन्न परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया था.

बिल्डिंग मटेरियल सस्ता, घर बनवाने का सपना हुआ आसान, सरिया के भाव में आई गिरावट

नई दिल्ली अपने घर का सपना आखिर किसका नहीं होता, हर कोई जी-तोड़ मेहनत करके पैसा जुटाता है और फिर इनसे अपने सपनों का आशियाना तैयार कराता है. लेकिन आज के समय में ये सपना सबसे महंगे सौदों में से एक बन चुका है और जमीन खरीदने से लेकर उस पर अपने मन मुताबिक कंस्ट्रक्शन कराने पर मोटा पैसा खर्च होता है. ऐसे में कई लोग इंतजार करते हैं कि House Construction में इस्तेमाल होने वाले बिल्डिंग मैटेरियल्स के दाम कम हों तब खरीदें. अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है, क्योंकि कंस्ट्रक्शन में सबसे अहम रोल निभाने वाले सरिया की कीमतों में गिरावट (Sariya Rate Fall) आई है और दिल्ली, गोवा, चेन्नई समेत कई शहरों में ये सस्ता हो गया है.   कंस्ट्रक्शन के खर्च में उतार-चढ़ाव लाता है सरिया House Construction पर होने वाले खर्च में सरिया बड़ा किरदार निभाता है और ये महंगे सामानों में से एक है. आखिर हो भी क्यों न आखिर आपके सपनों के आशियाने की मजबूती के लिए सरिया जरूरी जो है. इसकी कीमतों में घट-बढ़ का सीधा असर कंस्ट्रक्शन पर होने वाले खर्च पर पड़ता है. फिलहाल ये सस्ता मिल रहा है, जो अभी खरीद कर रख लेने से अपके हाउस कंस्ट्रक्शन की लगात में कमी आ सकती है.  दरअसल, बरसात के चलते इसकी कीमतों में कमी आई है और हो सकता है कि फिर इसका दाम बढ़ जाए. महज दो महीनों से भी कम समय में दिल्ली में Sariya Price 1000 रुपये प्रति मीट्रिक टन, मुज्जफरनगर में ये 1300 रुपये प्रति मीट्रिक टन सस्ता हुआ है. आइए अन्य शहरों में इसकी कीमतों में आए बदलाव पर नजर डालते हैं.  शहर (राज्य) 28 जून 2025 (प्रति मीट्रिक टन) 22 अगस्त 2025 (प्रति मीट्रिक टन) रायपुर 40,200 रुपये 39,900 रुपये रायगढ़ 40,000 रुपये 39,700 रुपये मुज्जफरनगर 43,300 रुपये 42,000 रुपये भावनगर 44,800 रुपये 44,800 रुपये दुर्गापुर (WB) 40,200 रुपये 40,000 रुपये कोलकाता 40,700 रुपये 40,500 रुपये गोवा 44,500 रुपये 44,200 रुपये जयपुर 43,300 रुपये 42,700 रुपये दिल्ली 44,600 रुपये 43,000 रुपये राउरकेला 41,000 रुपये 40,700 रुपये चेन्नई 46,000 रुपये 45,500 रुपये जालना 44,300 रुपये 43,800 रुपये इंदौर में 28 जून 2025 को सरिया 44,800 रुपये प्रति मीट्रिक टन चल रहा था, जो कि अब 45000 रुपये पर पहुंच गया है. वहीं मुंबई में भी सरिया की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है, जहां प्रति मीट्रिक टन Sariya 43,700 रुपये से बढ़कर 45,700 रुपये का हो गया है.  घर बैठे चेक कर सकते हैं अपने शहर में भाव सरिया की कीमतों में (Sariya Rates) में हर रोज बदलाव होता है और अपने शहर में इसके भाव के बारे में लेटेस्ट अपडेट आप घर बैठे पता कर सकते हैं. दरअसल, आयरनमार्ट की वेबसाइट (ayronmart.com) पर जाकर ताजा रेट और इसमें गिरावट या बढ़ोतरी की पूरी जानकारी देखा जा सकता है. यहां ध्यान रहे कि इस पर बताई गई कीमतें सरिया पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी से अलग होती है और इसके जुड़ने से ये बढ़ जाती हैं.

TikTok इंडिया फिर लौट रहा, वेबसाइट एक्टिव होने से बढ़ी उम्मीदें

नईदिल्ली    TikTok की भारत वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।  अभी तक कुछ भी पक्का नहीं है, लेकिन जो लोग TikTok को पसंद करते हैं, उनके लिए कुछ अच्छी खबरें जरूर सामने आई हैं। TikTok, जो एक चीनी कंपनी का ऐप है, 2020 में भारत में बैन कर दिया गया था।  TikTok की वेबसाइट फिर से दिखने लगी है! हाल ही में कुछ लोगों ने देखा कि TikTok की वेबसाइट (mobile और laptop पर) फिर से काम कर रही है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी इसे नहीं खोल पा रहे हैं, जिससे लगता है कि शायद वेबसाइट कुछ चुनिंदा लोगों के लिए या टेस्टिंग के लिए खोली गई है। लेकिन TikTok का ऐप अभी भी Google Play Store या Apple App Store पर उपलब्ध नहीं है। इसलिए सिर्फ वेबसाइट का दिखना यह नहीं कह सकता कि TikTok पूरी तरह वापस आ गया है। भारत-चीन के रिश्तों में सुधार? TikTok की वापसी की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि हाल ही में भारत और चीन के बीच रिश्ते थोड़े बेहतर होते दिख रहे हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं हालांकि TikTok की वेबसाइट दिख रही है, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक TikTok की वापसी को मंजूरी नहीं दी है, और कंपनी की ओर से भी कोई घोषणा नहीं की गई है।इसका मतलब है कि TikTok अभी भी भारत में आधिकारिक रूप से बैन ही है, और वह बिना सरकार की इजाजत के काम नहीं कर सकता।

OpenAI भारत में खोलेगा अपना पहला ऑफिस, सैम ऑल्टमैन अगले महीने करेंगे दौरा

मुंबई  भारत में ओपनएआई अपना पहला दफ्तर खोलने वाला है, जिसके लिए कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन अगले महीने सितंबर में देश के दौरे पर आएंगे। ओपनएआई के सीईओ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह इस साल भारत में अपना पहला ऑफिस खोलेंगे। उन्होंने देश में चैटजीपीटी के बढ़ते यूजर्स पर बात की। एक्स पर उन्होंने लिखा, "हम इस साल के अंत में भारत में अपना पहला कार्यालय खोल रहे हैं! और मैं अगले महीने आने के लिए उत्सुक हूं। भारत में एआई को अपनाते हुए देखना अद्भुत रहा है-पिछले एक साल में चैटजीपीटी यूजर्स की संख्या चार गुना बढ़ी है-और हम भारत में और अधिक निवेश करने के लिए उत्साहित हैं!" केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया स्वागत केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में ओपनएआई का स्वागत किया और कहा कि भारत एआई-आधारित परिवर्तन की अगली लहर को आगे बढ़ाने के लिए अद्वितीय स्थिति में है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "भारत एआई-आधारित परिवर्तन की अगली लहर को आगे बढ़ाने के लिए अद्वितीय स्थिति में है। इंडियाएआई मिशन के हिस्से के रूप में, हम विश्वसनीय और समावेशी एआई के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "एआई के लाभों को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में हम ओपनएआई की साझेदारी का स्वागत करते हैं।" फरवरी में ओपनएआई सीईओ से हुई थी मुलाकात इस साल फरवरी में, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सैम ऑल्टमैन से मुलाकात की थी, जिसमें संपूर्ण एआई स्टैक – जीपीयू, मॉडल और ऐप्स – बनाने की भारत की रणनीति पर चर्चा हुई थी। केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर लिखा कि ऑल्टमैन इन तीनों क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा कि ओपनएआई के सीईओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के दृष्टिकोण की सराहना की। बैठक के दौरान, जिसमें कई स्टार्टअप उपस्थित थे, वैष्णव ने स्टार्टअप समुदाय से अनूठे समाधान प्रस्तुत करने का अनुरोध किया। मंत्री ने ऑल्टमैन और स्टार्टअप समूह के साथ अपनी बातचीत का एक क्लिप साझा किया। वीडियो में मंत्री ने कहा, "हम बहुत जल्द (एआई के लिए) एक तरह की खुली प्रतियोगिता शुरू करने जा रहे हैं।"

ये राज्य हैं भारत के सबसे बड़े दाल उत्पादक, UP केवल 5वें स्थान पर

नई दिल्ली दालें भारत की प्रमुख फसलों में से एक हैं। इसकी खेती करके किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमाते हैं। दालों की खेती कई राज्यों में की जाती है। खरीफ और रबी सीजन में अलग-अलग दालों की खेती की जाती हैं। सरकार दलहन की खेती को बढ़ावा भी दे रही है। इसके लिए सरकार किसानों को प्रोत्साहित भी करती है। अलग-अलग राज्य अलग-अलग तरह के दालों की खेती करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि भारत का सबसे बड़ा दाल उत्पादक राज्य कौन सा है? अगर आप उत्तर प्रदेश के हैं और आपको लग रहा है कि यूपी ही दाल उत्पादन में नंबर वन होगा तो आप गलत हैं। आइए भारत के टॉप 5 दाल उत्पादक राज्यों के बारे में जानते हैं।   ये भारत के टॉप 5 दाल उत्पादक राज्य  सामान्य क्षेत्रफल लगभग 290 लाख हेक्टेयर (खरीफ- 140 लाख हेक्टेयर + रबी- 150 लाख हेक्टेयर) में दालों की खेती की जाती है।। खरीफ क्षेत्र का मौसमी प्रतिशत हिस्सा 48% है, शेष 52% क्षेत्र रबी दलहन के लिए जाता है।     Madhya Pradesh     Rajasthan     Maharashtra     Karnataka     Uttar Pradesh भारत का सबसे बड़ा दाल उत्पादक राज्य MP मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य का वार्षिक दलहन उत्पादन लगभग 59.70 लाख टन रहा। चना, तुअर और उड़द दलहनों की सूची में सबसे ऊपर हैं। मध्य प्रदेश में इनकी खेती और उत्पादन काफी ज्यादा होती है। दाल उत्पादन में दूसरे और तीसरे नंबर पर राजस्थान और महाराष्ट्र दाल उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर राजस्थान है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य का वार्षिक उत्पादन लगभग 38.19 लाख टन रहा है। राज्य रबी सीजन में मूंग, मोठ, मूंग और चना जैसी दालों और खरीफ सीजन में अरहर जैसी दालों का सबसे अधिक उत्पादन करता है। महाराष्ट्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो राज्य 35.71 लाख टन रहा है। महाराष्ट्र में लगभग 20 लाख हेक्टेयर भूमि पर मुख्यतः तुअर दाल की खेती होती है। दाल उत्पादन में चौथे पर कर्नाटक और पांचवें पर UP दाल उत्पादन के मामले में कर्नाटक चौथे नंबर पर है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो कर्नाटक में औसत दलहन उत्पादन 19.37 लाख टन रहा है। राज्य में चना और अरहर की फसलों की 60% वृद्धि होती है। यह राज्य चना, अरहर, कुलथी, उड़द और मूंग जैसी विभिन्न प्रकार की दालों की खेती के लिए जाना जाता है। दाल उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पांचवें नंबर पर है। वित्त वर्ष 2016-17 और 2020-21 के औसत की बात करें तो यूपी में औसत दलहन उत्पादन 23.43 लाख टन रहा है। दालों की सूची में चना सबसे ऊपर है क्योंकि इसका उत्पादन क्षेत्र सबसे अधिक है। भारत है दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश भारत 28 मिलियन मीट्रिक टन दालों के उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है। पिछले 20 वर्षों में, भारत का दाल उत्पादन 2002 के 11.13 मिलियन मीट्रिक टन से दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। भारत में चना, अरहर और मसूर जैसी विभिन्न दालें उगाई जाती हैं, जो इनकी व्यापक खपत को दर्शाता है।  

बैंक ट्रांसफर महंगा! जानिए SBI, HDFC, PNB और केनरा की नई चार्ज दरें

नई दिल्ली  अगर आप इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग के जरिए पैसे भेजते हैं, तो आपके लिए यह जरूरी खबर है. देश के कई बड़े बैंकों ने अब इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आईएमपीएस (IMPS) पर चार्ज लगाने का फैसला लिया है. आईएमपीएस ट्रांजैक्शन करने वालों इन बैंकों के ग्राहकों को अब तय सीमा के हिसाब से फीस चुकानी होगी. पहले ज्यादातर बैंक इस सुविधा को बिल्कुल फ्री मुहैया कराते थे. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को बड़ा झटका दे दिया है. दरअसल, एसबीआई ने खुदरा ग्राहकों के लिए अपनी आईएमपीएस ट्रांजैक्शन चार्ज में बदलाव करने का ऐलान किया है. नए बदलाव 15 अगस्त, 2025 से लागू होंगे. SBI के नए चार्ज (15 अगस्त से लागू) 25,000 रुपये तक – कोई चार्ज नहीं 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक – 2 रुपये + GST 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक – 6 रुपये + GST 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक – 10 रुपये + GST केनरा बैंक के नए चार्ज     1,000 रुपये तक: कोई चार्ज नहीं     1,000 रुपये – 10,000 रुपये तक: 3 रुपये + GST     10,000 रुपये – 25,000 रुपये तक: 5 रुपये + GST     25,000 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: 8 रुपये + GST     1,00,000 रुपये – 2,00,000 रुपये तक: 15 रुपये + GST     2,00,000 रुपये – 5,00,000 रुपये तक: 20 रुपये + GST पंजाब नेशनल बैंक के नए चार्ज 1,000 रुपये तक: कोई चार्ज नहीं 1,001 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: ब्रांच से 6 रुपये + GST, ऑनलाइन: 5 रुपये + GST 1,00,000 रुपये से ऊपर: ब्रांच से: 12 रुपये + GST, ऑनलाइन: 10 रुपये + GST HDFC बैंक के नए चार्ज (1 अगस्त 2025 से लागू)     1,000 रुपये तक: आम ग्राहक: 2.50 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 2.25 रुपये     1,000 रुपये – 1,00,000 रुपये तक: आम ग्राहक: 5 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 4.50 रुपये     1,00,000 रुपये से ऊपर: आम ग्राहक: 15 रुपये, वरिष्ठ नागरिक: 13.50 रुपये     HDFC बैंक के Gold और Platinum अकाउंट होल्डर्स को चार्ज नहीं देना होगा. क्या होता है IMPS बता दें कि इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी आईएमपीएस एक रियल टाइम पेमेंट सर्विस है. यह सर्विस 24 घंटे उपलब्‍ध होती है. इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऑपरेट करता है. इस सर्विस के जरिए ग्राहक किसी भी समय तुरंत पैसे भेज भी सकते हैं और हासिल भी कर सकते हैं.

स्टॉक मार्केट फिसला, छह दिन की तेजी टूटी; जानें कौन से 10 शेयर बिखरे

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में बीते छह कारोबारी दिनों से जारी तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लगा नजर आया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) खुलने के साथ ही 400 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी पिछले बंद के मुकाबले 127 अंक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. शुरुआती कारोबार में ICICI Bank, Axis Bank, Reliance जैसे शेयर गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे.  धीमी शुरुआत के बाद फिसलते गए इंडेक्स बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 82,000.71 की तुलना में गिरावट के साथ 81,951.48 के लेवल पर खुला और फिर कुछ ही मिनटों में ये 411 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ टूटकर 81,578 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी की भी चाल रही और ये अपने पिछले बंद 25,083.75 की तुलना में 25,064.15 पर खुलने के बाद फिसलता चला गया और 25000 के स्तर के नीचे आ गया. महज 10 मिनट के कारोबार के दौरान ही ये 127 अंकों की गिरावट लेकर 24,950 पर ट्रेड कर रहा था.  खुलते ही बिखर गए ये बड़े शेयर  शुक्रवार को बाजार में आई इस गिरावट के चलते कई दिग्गज कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बिखर गए. इनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HCL Tech Share (1.50%), Asian Paints Share (1.25%) फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो दूसरी ओर ITC, HDFC Bank, ICICI Bank, NTPC, Tata Steel और Reliance शेयर भी रेड जोन में ओपन हुए. शुरुआती कारोबार में जहां 1362 कंपनियों के शेयरों ने ग्रीन जोन में ओपनिंग की, तो वहीं 920 कंपनियों के स्टॉक्स गिरावट के साथ खुले. 151 शेयरों की स्थिति फ्लैट रही.  सबसे ज्यादा टूटने वाले 10 शेयर सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों की बात करें, तो एचसीएल और एशियन पेंट्स के अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ramco Cement Share (2.42%), LIC Housing Finance Share (2%), Relaxo Share (1.40%), Bandhan Bank Share (1.35%) और Hindustan Petro Share (1.30%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों में भी जोरदार गिरावट देखने को मिली और खुलने के साथ ही Vimta Labs Share (6%), Force Motors Share (5.10%) और Everest India Share (3.90%) फिसल गया.  इस गेमिंग स्टॉक में गिरावट जारी सरकार के ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 का असर ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनी Nazara Tech के शेयर पर कम होने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार तीसरे दिन इस शेयर में गिरावट देखने को मिली. सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी ये खुलते ही 4 फीसदी के आस-पास फिसल गया. तीन दिन में ये करीब 19 फीसदी टूट चुका है और इसका मार्केट कैप कम होकर 10740 करोड़ रुपये रह गया है. 

इस दीवाली सस्ती होंगी कारें-बाइकें? टैक्स बदलाव से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली ऑटो सेक्टर इस साल की शुरुआत से ही सुस्ती झेल रहा है. लेकिन अब उम्मीद की किरण नजर आ रही है. माना जा रहा है कि इस दीवाली सरकार GST दरों में बदलाव कर सकती है, जिससे गाड़ियों की कीमतों में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है. मौजूदा समय में छोटी कारों और टू-व्हीलर्स पर 28% GST लगाया जाता है. खबर है कि सरकार इस टैक्स को घटाकर 18% तक लाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो ऑटो इंडस्ट्री को जबरदस्त राहत मिलेगी और ग्राहकों के लिए भी गाड़ियां खरीदना आसान हो जाएगा. सेल्स का हाल – गिरावट से जूझ रहा सेक्टर ऑटो सेक्टर पिछले कुछ समय से दबाव में है. ट्रैक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेगमेंट की सेल्स में कमी आई है. टू-व्हीलर की बिक्री में लगभग 4% की गिरावट दर्ज की गई है. पैसेंजर व्हीकल की सेल्स भी सालाना आधार पर करीब 1% घट गई है. वहीं, कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट अपेक्षाकृत स्थिर नजर आया है. टैक्स कटौती से क्या होगा असर? अगर टू-व्हीलर्स और छोटी कारों पर GST घटकर 18% हो जाता है, तो सीधा फायदा ग्राहकों और कंपनियों दोनों को मिलेगा. वाहनों की कीमतें करीब 7% तक सस्ती हो सकती हैं. कीमत घटने से त्योहारों के सीजन में डिमांड में उछाल आएगा. टू-व्हीलर और पैसेंजर कार की बिक्री बढ़ने से ऑटो सेक्टर को दोबारा रफ्तार मिल सकती है. फेस्टिव सीजन में बढ़ सकती है चमक दीवाली का समय वैसे भी गाड़ियों की बिक्री के लिए अहम माना जाता है. अगर इस बार GST में कटौती लागू होती है, तो ग्राहक ज्यादा संख्या में गाड़ियां खरीदने आगे बढ़ेंगे. इससे न केवल ऑटो कंपनियों की बिक्री में तेजी आएगी बल्कि बाजार का समग्र माहौल भी सकारात्मक होगा.

निवेशकों के लिए खुशखबरी: अब IPO से पहले भी खरीद-बिक्री कर सकेंगे शेयर

नई दिल्ली शेयर बाजार नियामक सेबी जल्द ही एक विनियमित प्लेटफॉर्म लॉन्च कर सकता है, जहां प्री-आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक पेशकश से पहले) कंपनियां कुछ खुलासे करने के बाद कारोबार कर सकेंगी। नियामक के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल पायलट आधार पर होगी। फिक्की की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए पांडे ने कहा कि निवेशकों के लिए निवेश निर्णय लेने के लिए कंपनियों की लिस्टिंग से पहले अक्सर पर्याप्त नहीं होती है। सेबी प्रमुख ने संकेत दिया कि हम पायलट आधार पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म ला सकते हैं, जहां आईपीओ से पहले कंपनियां कुछ खुलासे कर व्यापार करने का विकल्प चुन सकती हैं।" सेबी प्रमुख ने कहा कि इस पहल के अनावश्यक प्रक्रियाओं और समस्याओं के दूर करने की उम्मीद है। यह धन जुटाने, प्रकटीकरण और निवेशक को शामिल करने में अनावश्यक परेशानी पैदा करती हैं। इसके अलावे यह प्लेटफॉर्म उन उभरते क्षेत्रों, उत्पादों और परिसंपत्ति वर्गों का पता लगाएगी जो पूंजी की मांग और आपूर्ति दोनों का सृजन करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर डिपॉजिटरीज के साथ कोई चर्चा हुई है, तो उन्होंने कहा, "यह केवल सिद्धांत रूप में है, जो मैं कह रहा हूं।" यह नया प्लेटफॉर्म निवेशकों को आईपीओ आवंटन और लिस्टिंग के बीच तीन दिनों की अवधि में विनियमित तरीके से शेयरों का व्यापार करने की अनुमति दे सकता है। यह पहल मौजूदा अनियमित ग्रे मार्केट की जगह ले सकती है, जो वर्तमान में इस अवधि के दौरान संचालित होता है।