samacharsecretary.com

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से पहले रेलवे ने शुरू की अहम कवायद

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे आने वाले समय में आठवें वेतन आयोग से बढ़ने वाले वेतन बोझ को संभालने की तैयारी में जुट गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे मेंटेनेंस, खरीद और एनर्जी जैसे सेक्टर में खर्च घटाने के उपाय अपना रहा है, ताकि भविष्य में वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहे। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मकसद यह है कि जब नया वेतनमान लागू हो, तब उस अतिरिक्त खर्च को आसानी से झेला जा सके और रेलवे की कमाई पर ज्यादा दबाव न पड़े। आठवां केंद्रीय वेतन आयोग जनवरी 2024 में गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करेगा। आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। इससे करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी, जिनमें रक्षा कर्मी भी शामिल हैं, और लगभग 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे। आयोग को 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट देनी है, हालांकि जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी सौंपी जा सकती है। क्या कहते हैं रेलवे के आंकड़े रेलवे के वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो (OR) 98.90% रहा, जिससे उसे करीब ₹1,341 करोड़ की शुद्ध आय हुई। 2025-26 के लिए रेलवे ने OR को घटाकर 98.42% तक लाने का लक्ष्य रखा है, जिससे अनुमानित नेट रेवेन्यू ₹3,041 करोड़ तक पहुंच सकता है। अच्छी बात यह भी है कि 2027-28 से रेलवे को IRFC को किए जाने वाले सालाना भुगतान में कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च सरकार की बजटीय सहायता (GBS) से किया गया है। अधिकारियों ने क्या कहा रेलवे अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल नए शॉर्ट-टर्म कर्ज लेने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि जब 2027-28 में नए वेतन का असर पड़ेगा, तब तक फ्रेट से होने वाली सालाना कमाई में करीब ₹15,000 करोड़ की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे बढ़े हुए वेतन खर्च को संभालने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि इससे पहले 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना था और उसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं। आमतौर पर हर 10 साल में वेतन आयोग बनता है। कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने के लिए महंगाई भत्ता (DA) भी दिया जाता है, जिसे हर छह महीने में महंगाई दर के आधार पर बढ़ाया जाता है।  

महंगाई के आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर, इस हफ्ते बदल सकती है शेयरों की रंगत

मुंबई  घरेलू शेयर बाजारों में लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह में बाजार पर महंगाई के आंकड़ों के साथ ग्लोबल कारकों का असर भी दिख सकता है। घरेलू स्तर पर रिटेल महंगाई के आंकड़े शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी किए गए थे। थोक महंगाई के आंकड़े सोमवार को जारी होने हैं। बाजार पर वैश्विक कारकों का असर भी दिखेगा। पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में प्रमुख सूचकांक पहले तीन दिन की गिरावट के बाद अंतिम दो दिन बढ़त में रहे। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 444.71 अंक (0.52 प्रतिशत) टूटकर सप्ताहांत पर 85,267.66 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 139.50 अंक यानी 054 प्रतिशत गिरकर 26,046.95 अंक पर रहा। एनएसई का मिडकैप-50 सूचकांक 0.61 फीसदी और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.67 फीसदी की साप्ताहिक गिरावट में बंद हुआ।   सप्ताह के दौरान सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 18 के शेयर लाल निशान में और अन्य 12 के हरे निशान में रहे। एशियन पेंट्स में सबसे अधिक 6.80 प्रतिशत की गिरावट रही। बीईएल का शेयर 4.25 फीसदी, हिंदुस्तान यूनीलिवर का 3.33, बजाज फाइनेंस का 2.96, ट्रेंट का 2.78 और पावर ग्रिड का 2.28 प्रतिशत टूट गया। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 1.87 फीसदी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का 1.71, भारती एयरटेल 1.16, इंफोसिस तथा आईटीसी दोनों के 1.06, और महिंद्रा एंड महिंद्रा का 1.01 प्रतिशत उतर गया। इनके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, सनफार्मा, टीसीएस, बजाज फिनसर्व और एचडीएफसी बैंक के शेयर भी लाल निशान में रहे।   टाटा स्टील का शेयर सबसे अधिक 2.87 प्रतिशत चढ़ा। इटरनल में 1.92 फीसदी, टाइटन में 1.73, मारुति सुजुकी में 1.50, अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.08 और कोटक महिंद्रा बैंक में 1.02 प्रतिशत की तेजी रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा एनटीपीसी और एक्सिस बैंक के शेयर भी साप्ताहिक बढ़त में रहे।

नए साल से Credit Card पर लगेगा नया नियमों का पहरा, यूजर्स अभी जान लें ये जरूरी बदलाव

जम्मू-कश्मीर  क्रेडिट कार्ड आज के समय में आम लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। ऐसे में SBI ने अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जो 10 जनवरी 2026 से लागू होंगे। यदि आप SBI क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और हवाई यात्रा के दौरान एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा का लाभ उठाते हैं, तो यह बदलाव आपके लिए बेहद जरूरी जानकारी है। इस बदलाव का सीधा असर डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस पर पड़ेगा। SBI कार्ड ने अपने क्रेडिट कार्ड्स को अब सेट A और सेट B—दो कैटेगरी में बांट दिया है।   सेट A कार्ड्स पर सीमित होगी सुविधा सेट A में आने वाले कार्ड्स जैसे Apollo SBI Card SELECT, BPCL SBI Card OCTANE, Club Vistara SBI Card SELECT, Landmark Rewards SBI Card SELECT, Paytm SBI Card SELECT और PhonePe SBI Card SELECT पर अब लाउंज एक्सेस सिर्फ चुनिंदा बड़े शहरों तक ही मिलेगा। इन कार्ड्स से केवल अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और पुणे के एयरपोर्ट लाउंज में ही प्रवेश मिलेगा।   सेट B कार्ड्स को मिलेगा ज्यादा फायदा वहीं, सेट B में शामिल SBI Card PRIME, KrisFlyer SBI Card, Titan SBI Card और पार्टनर बैंकों के PRIME वेरिएंट कार्ड्स पर लाउंज एक्सेस का दायरा ज्यादा बड़ा रहेगा। इन कार्ड्स से भुवनेश्वर, चंडीगढ़, कोच्चि, गोवा, इंदौर, जयपुर, वडोदरा, श्रीनगर और विशाखापट्टनम जैसे शहरों के एयरपोर्ट लाउंज में भी प्रवेश मिलेगा।   लाउंज में एंट्री के लिए नई शर्तें SBI कार्ड ने साफ किया है कि यह बदलाव सिर्फ लाउंज बेनिफिट्स तक सीमित हैं, बाकी सभी सुविधाएं पहले जैसी ही रहेंगी। नए नियमों के अनुसार, लाउंज में प्रवेश के लिए POS मशीन पर कार्ड को स्वाइप या ऑथेंटिकेट करना जरूरी होगा।   फ्री विजिट खत्म हुई तो देना होगा पैसा अगर किसी कार्डधारक की फ्री लाउंज विजिट लिमिट पूरी हो चुकी है, तो उसे मुफ्त प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त विजिट के लिए स्टैंडर्ड लाउंज चार्ज देना होगा। SBI कार्ड के मुताबिक, लाउंज प्रोग्राम का संचालन Visa, RuPay और Mastercard नेटवर्क पार्टनर्स करते हैं और उन्हीं के नियम लागू होंगे। ऐसे में SBI क्रेडिट कार्ड यूजर्स को सलाह है कि वे 10 जनवरी 2026 से पहले इन नए नियमों को ध्यान से समझ लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

SBI ने घटाया लोन ब्याज, जानिए कैसे कम होगी आपकी EMI

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्‍याज में कटौती करने के बाद भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. भारतीय स्‍टेट बैंक ने होम लोन के ब्‍याज दरों में कटौती का ऐलान किया है. एसबीआई मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR), एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR), रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR), बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) और बेस रेट में कटौती करेगा.  यह बदलाव 15 दिसंबर, 2025 से प्रभावी माना जाएगा. अब इस कटौती के साथ आपके लोन ब्‍याज दर कम हो जाएंगे, जिससे आपके लोन की ईएमआई भी 0.25 फीसदी तक कम हो जाएगी. भारत के सबसे बड़े पब्लिक सेक्‍टर बैंक के इस फैसले से लाखों खुदरा और कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं को लाभ मिलेगा.  गौरतलब है कि एसबीआई का यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद आया है. आरबीआई ने ग्रोथ को बढ़ावा देते हुए लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की है. इस कटौती के साथ ही रेपो रेट घटकर 5.25 फीसदी हो चुका है. अभी कितना आपके लोन का ब्‍याज? अभी एसबीआई अपने कस्‍टमर्स से होम लोन पर कम से कम ब्‍याज  7.4% का ब्‍याज वसूलता है और पर्सनल लोन पर ब्‍याज 9 से 10 फीसदी वूसलता है. लेकिन अब इस फैसले के बाद होम लोन और पर्सनल लोन पर ब्‍याज कम हो जाएंगे. इससे कस्‍टमर्स की बड़ी सेविंग हो सकती है. MCLR रेट अब कितना हुआ?  अवधि मौजूदा MCLR (%) संशोधित एमसीएलआर (%) रातोंरात 7.90 7.85 एक महीना 7.90 7.85 तीन महीने 8.30 8.25 छह महीने 8.65 8.60 एक वर्ष 8.75 8.70 दो वर्ष 8.80 8.75 तीन वर्ष 8.85 8.80 लिंक्ड लोन के लिए EBLR और RLLR में कटौती एसबीआई ने अपने ईबीएलआर (EBLR) को 8.15% + क्रेडिट रिस्क प्रीमियम (सीआरपी) + बैंक स्प्रेड (बीएसपी) से घटाकर 7.90% + सीआरपी + बीएसपी कर दिया है, जो बेंचमार्क में 25 बेसिस पॉइंट की गिरावट है. आरएलएलआर (RLLR) 7.75% + सीआरपी से घटकर 7.50% + सीआरपी हो गया है. इन बाहरी बेंचमार्क लोन के उधारकर्ताओं को उनके रिस्‍क प्रोफाइल के आधार पर ईएमआई में कमी देखने को मिलेगी.  ईबीएलआर 8.15% + सीआरपी + बीएसपी 7.90% + सीआरपी + बीएसपी आरएलएलआर 7.75% + सीआरपी 7.50% + सीआरपी बीपीएलआर और बेस रेट अपडेट आखिरी में एसबीआई ने अपने बीपीएलआर को घटाकर 14.65% प्रति वर्ष और बेस रेट को 9.90% कर दिया, जो दोनों 15 दिसंबर से प्रभावी हैं. इन कदमों से क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे घर खरीदने और व्यावसायिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है.  कितनी बचेगी आपकी ईएमआई?  अगर आपने EBLR बेस पर 30 लाख रुपये तक का लोन 20 साल के टेन्‍योर पर लिया है और अभी ब्‍याज 8 फीसदी है तो आपकी ईएमआई ₹25,093 होगी. वहीं अब 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह ईएमआई घटकर ₹24,628 हो जाएगी. 

FD या बचत खाते से लोन लिंक करने पर बैंक को मिलेगी ग्राहक की अनुमति, लोन लिमिट अब सुरक्षित

नई दिल्ली  बैंक और लोन ऐप (Banks and Loan apps) अब अपनी मर्जी से लोन की लिमिट को नहीं बढ़ा सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने स्पष्ट किया कि ग्राहक की लिखित मंजूरी के बाद ही लोन सीमा को बढ़ाया जा सकता है। बैंकों की लोन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आरबीआई ने नए दिशा-निर्देश (RBI New Rules) जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ने डेटा संरक्षण को लेकर साफ किया है कि बिना ग्राहक की मंजूरी के उसका डाटा थर्ड पार्टी से साझा नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि बैंकों द्वारा अपनी मर्जी से लोन सीमा बढ़ाए जाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। छोटी धनराशि वाले कर्ज को लेकर शिकायतें सबसे अधिक थीं। उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने 20 हजार का लोन मंजूर कराया और तय किस्तों पर ग्राहक द्वारा लोन चुकाया जा रहा है तो कुछ बैंक और लोन ऐप आखिरी किस्त आने से पहले बिना स्वीकृति ग्राहक के खाते में 10 हजार रुपये का लोन जारी कर देते हैं। बैंक इसके पीछे अच्छी साख का तर्क देते हैं। ग्राहक इसे लौटाना चाहे तो बैंक आनाकानी करते हैं और ग्राहक पर जुर्माना लगाया जाता है। कर्ज लेने वाले ग्राहकों की एफडी या बचत ब्लॉक न करें आरबीआई के नए नियमों के तहत बैंक कर्ज को किसी सावधि जमा यानी एफडी, बचत खाते या सुरक्षा योजना से लिंक नहीं कर सकते। बैंकों को लेकर शिकायत थी कि छोटे ऋण जारी करते वक्त गारंटी के तौर पर ग्राहक की एफडी, खाते या अन्य सुरक्षा योजना को लिंक किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब तक ऋण पूरा अदा नहीं होता है या कोई किस्त जमा नहीं जाती है तो बैंक ग्राहक को एफडी तोड़ने की इजाजत नहीं देते। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि घर के खर्च और आय का आकलन बैंकों के लिए करना जरूरी है, लेकिन ऋण के बदले एफडी, खाते या किसी अन्य सुरक्षा को लिंक नहीं किया जा सकता। जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक : कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा।  जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। अब बैंक और उनके पार्टनर केवल जरूरत के आधार पर ही ग्राहक का डेटा लें सकेंगे, जिसके लिए ग्राहकों की स्पष्ट सहमति लेनी अनिवार्य होगी। ग्राहक के मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा। ग्राहकों को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी डेटा शेयरिंग को रोक सकें और पहले दी गई सहमति को वापस ले सकेंगे। ग्राहक बैंक/एलएसपी से अपना डेटा डिलीट करवाने की मांग कर सकें। किसी भी थर्ड-पार्टी के साथ ग्राहक की जानकारी साझा करने से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती।

युवाओं के लिए गोल्डन चांस: कम निवेश में लाखों कमाने वाला गांव का नंबर-1 आइडिया

नई दिल्ली  गांव में रहने वाले युवाओं और किसानों के लिए कम पूंजी में बड़ा मुनाफा कमाने का एक जबरदस्त मौका उभरकर सामने आया है मुर्गी पालन का व्यवसाय। यह ऐसा धंधा है, जिसे सही तरीके से शुरू किया जाए तो यह न सिर्फ स्थायी आय देता है, बल्कि कुछ ही महीनों में हाथों-हाथ कमाई भी शुरू करा देता है। सरकार की सब्सिडी और बढ़ती मांग ने इस बिजनेस को ग्रामीण भारत में तेजी से पॉपुलर बना दिया है। अंडे और चिकन की डिमांड ने बढ़ाई चांदी आजकल बाजार में अंडे और चिकन की मांग कभी कम नहीं होती। शहरों से लेकर गांवों तक लोग प्रोटीन के लिए बड़े पैमाने पर इनसे जुड़े उत्पाद खरीद रहे हैं। यही वजह है कि मुर्गी पालन उन चुनिंदा बिजनेस में शामिल हो गया है, जहां मंदी का कोई असर नहीं पड़ता।   छोटी जगह, कम निवेश और तेज ग्रोथ ये तीन बातें मिलकर इस धंधे को ग्रामीण युवाओं के लिए एक दमदार विकल्प बनाती हैं। साथ ही, स्थानीय बाजारों में हमेशा खरीददार मिल जाते हैं, जिससे बिक्री की चिंता भी कम हो जाती है। कौन-सी नस्ल दिलाएगी ज्यादा कमाई? मुर्गी पालन में कमाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप कौन-सी नस्ल चुनते हैं। अंडे के लिए (लेयर फार्मिंग):     व्हाइट लेगहॉर्न सबसे लोकप्रिय नस्ल है।     एक मुर्गी साल में 250–300 अंडे देती है। मांस के लिए (ब्रायलर/देसी):     कड़कनाथ, ग्रामप्रिया और वनराजा जैसी नस्लें तेजी से वजन पकड़ती हैं।     इनमें कड़कनाथ की मांग सबसे ज्यादा है क्योंकि इसके मांस को औषधीय माना जाता है। 10,000–20,000 रुपये में बिजनेस की शुरुआत अगर आप सोचते हैं कि मुर्गी पालन में बहुत पैसा लगता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। छोटे स्तर पर यह काम बेहद कम लागत में शुरू हो सकता है-     50 चूजों की कीमत: ₹2,000–₹3,000     शेड या घरूट बनवाना: ₹5,000–₹10,000     खाने-पानी के बर्तन: ₹1,000–₹2,000     दवाएं व टीके: ₹1,000–₹2,000     कुल मिलाकर ₹9,000–₹17,000 में आपका छोटा मुर्गी फार्म तैयार हो सकता है। कमाई का नया गणित अगर आप अंडे बेचते हैं-     100 मुर्गियों से रोज़ 80–90 अंडे मिलते हैं।     महीने में 2400–2700 अंडे।     एक अंडा सिर्फ ₹5 में भी बेचे तो महीने की कमाई ₹12,000–₹13,500 तक। अगर आप मांस के लिए मुर्गियां पालते हैं-     45–60 दिनों में मुर्गियां 1.5–2 किलो की हो जाती हैं।     एक मुर्गी से ₹150–₹200 का मुनाफा।     100 मुर्गियां = ₹15,000–₹20,000 का फायदा।     साल में 5–6 बैच = ₹75,000–₹1,20,000 की सालाना कमाई। सफल मुर्गी पालन के छुपे हुए राज     संतुलित आहार दें, जिससे ग्रोथ और अंडा उत्पादन दोनों बढ़ते हैं।     हमेशा साफ पानी उपलब्ध कराएं।     टीकाकरण समय पर करवाएं, खासकर रानीखेत जैसी बीमारियों से बचाव जरूरी है।     स्थानीय बाजार की कीमतों पर नजर रखें, सीधे ग्राहकों को बेचने पर मुनाफा और बढ़ जाता है।     सरकारी योजनाओं और NABARD की सब्सिडी का लाभ अवश्य लें। गांव में सोने की खान है मुर्गी पालन मुर्गी पालन उन दुर्लभ बिजनेस में से है जहां छोटा निवेश बड़ी कमाई में बदल सकता है। सही योजना, थोड़ी मेहनत और जानकारी के सहारे कोई भी ग्रामीण युवा या किसान इस क्षेत्र में मजबूत भविष्य बना सकता है। अगर आप आर्थिक स्वतंत्रता की तलाश में हैं, तो मुर्गी पालन आपका वह पहला कदम हो सकता है, जो आपको सफलता की बड़ी मंज़िल तक पहुंचा दे।

खपत बढ़ाने की तैयारी: सरकार ने घटाया GST, आम जनता को सीधी राहत

नई दिल्ली  भारत के लिए आने वाला साल आर्थिक दृष्टि से बेहतर रहने की उम्मीद है, क्योंकि उपभोक्ता खर्च यानी कंजम्पशन मोमेंटम मजबूत रहेगा। इसे कम महंगाई, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में कटौती के लंबे समय तक असर और इनकम-टैक्स व पॉलिसी रेट्स में ढील का समर्थन मिलेगा। ये वही कारण हैं जिन्होंने 2025 में मांग बढ़ाई और आने वाले साल में भी भरोसा बनाए रखेंगे। HDFC बैंक की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता के अनुसार हाल के ट्रेंड्स को देखकर कहा जा सकता है कि 2026 में कंजम्पशन मोमेंटम काफी मजबूत स्थिति में होगा, जो आगे की ग्रोथ के लिए अच्छा आधार तैयार करता है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसराय के मुताबिक, कंजम्पशन में वृद्धि के प्रमुख कारण कम महंगाई और सैलरी में सुधार हैं। अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई, जबकि 2025 के पहले 10 महीनों में यह औसतन 2.5% रही, पिछले साल इसी समय यह 4.9% थी। मिडिल-इनकम कंजम्पशन बढ़ेगा नोमुरा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑरोदीप नंदी ने बताया कि कम महंगाई 2026 में भी रहने की उम्मीद है, जिससे घरों की असली कमाई और कंपनियों के मुनाफे को समर्थन मिलेगा। इसका असर मिडिल-इनकम वर्ग की खरीदारी पर पड़ेगा, जबकि तेज ग्रोथ अमीर खरीदारों की तरफ से आएगी। जुलाई-सितंबर में निजी खपत तीन तिमाहियों के उच्चतम 7.9% पर पहुंच गई थी, पिछली तिमाही में यह 7% थी और FY26 की पहली छमाही में यह 7.5% रही। केयरएज रेटिंग्स की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा को उम्मीद है कि रफ्तार बनी रहेगी, हालांकि H2FY26 में निजी खपत लगभग 7.3% और FY27 में 7% पर आ सकती है, क्योंकि पिछले साल का बेस इफेक्ट कम हो रहा है और त्योहारों के बाद मांग घट सकती है। ग्रामीण और शहरी खपत ग्रामीण और शहरी खपत में भी सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में वेतन बढ़ने और खेती के अच्छे उत्पादन के कारण खर्च बढ़ेगा, लेकिन फॉर्मल जॉब मार्केट पर नजर रखना जरूरी है। क्वांटइको रिसर्च की इकोनॉमिस्ट युविका सिंघल के मुताबिक नौकरी और आय की स्थिति शहरी कंजम्पशन मोमेंटम के लिए महत्वपूर्ण है। शहरी खपत को रोजमर्रा की चीज़ों से लेकर प्रीमियम प्रोडक्ट्स तक बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि अभी यह केवल प्रीमियम सेगमेंट में ही बेहतर प्रदर्शन कर रही है।    

Land Rover Classic ने Defender V8 में Octa से प्रेरित अपडेशन किया, पेश किया रीमास्टर्ड Classic Defender

मुंबई   लग्जरी एसयूवी निर्माता कंपनी Land Rover की Land Rover Classic ने अपने वर्क्स बेस्पोक प्रोग्राम के ज़रिए अपने तीनों मॉडलों – 90 Station Wagon, 110 Station Wagon और 90 Soft Top – में V8 इंजन के साथ रीमास्टर्ड Classic Defender की रेंज पेश की है. खरीदारों को नए एक्सटीरियर कलर्स और इंटीरियर मटीरियल के ज़रिए अपने Classic Defender V8 को Defender Octa से मैच करने का ऑप्शन भी मिलता है. आपको बता दें कि Land Rover Classic, Jaguar Land Rover का एक डिवीज़न है जो कंपनी के क्लासिक मॉडल्स की मेंटेनेंस करता है और अपने अप्रूव्ड व्हीकल प्रोग्राम के लिए उन्हें सोर्स भी करता है. नए कलर ऑप्शन और सामग्री विकल्प कंपनी ने Land Rover Classic को पांच नए कलर ऑप्शन में पेश किया है, जिनमें पेट्रा कॉपर, फैरो ग्रीन, सरगासो ब्लू, नारविक ब्लैक और पेटागोनिया व्हाइट शामिल हैं. ये मौजूदा बोरास्को ग्रे, कार्पेथियन ग्रे और शैरेंट ग्रे ऑप्शन में जुड़ते हैं. खरीदार ग्लॉस और सैटिन फिनिश में से चुन सकते हैं, जिसमें सैटिन फिनिश ऑक्टा की ऑप्शनल मैट प्रोटेक्टिव फिल्म जैसा दिखता है. इंटीरियर की बात करें तो इसके लिए, Land Rover Classic ने एक हल्का, प्रीमियम अल्ट्राफैब्रिक्स PU मटीरियल भी इस्तेमाल किया है, जो लेदर का एक सस्टेनेबल विकल्प है. यह मटीरियल तीन कलर ऑप्शन में उपलब्ध है, जिनमें खाकी ग्रीन, लाइट क्लाउड और लूनर शामिल हैं. लेदर ऑप्शन में बर्न्ट सिएना सेमी-एनिलिन और एबोनी मिलते हैं. Classic Defender V8 में ऑप्शन के तौर पर हीटेड रेकारो स्पोर्ट्स सीटें भी मिलती हैं. Classic Defender V8 के स्पेसिफिकेशन कंपनी 2012-2016 के प्रोडक्शन रन वाली गाड़ियां लेती है और उन्हें अपनी कोवेंट्री फैसिलिटी में अलग-अलग हिस्सों में बांट देती है. इसके बाद, इसमें 5.0-लीटर V8 इंजन के साथ 8-स्पीड ZF ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाया जाता है, जो 400 hp की पावर देता है, और गाड़ी को पूरी तरह से रीबिल्ड किया जाता है. सस्पेंशन में कस्टम स्प्रिंग, डैम्पर और एंटी-रोल बार लगाए जाते हैं, जबकि ब्रेकिंग हार्डवेयर में 4-पिस्टन कैलिपर के साथ 335mm फ्रंट और 300mm रियर डिस्क शामिल हैं. पेंट शॉप हर गाड़ी पर 300 घंटे काम करती है, तैयारी से लेकर कलर-मैचिंग और फाइनल पॉलिश तक. खरीदार अपनी गाड़ियों को ग्लॉस-ब्लैक रेडिएटर ग्रिल, कार्बन-फाइबर बोनट स्क्रिप्ट और 11 फिनिश में पांच व्हील स्टाइल के साथ और कस्टमाइज़ कर सकते हैं, जो 16-इंच और 18-इंच साइज़ में उपलब्ध हैं. हर गाड़ी के साथ एक साल की अनलिमिटेड माइलेज वारंटी मिलती है. भारत में Defender Octa Land Rover ने 26 मार्च, 2025 को भारत में Defencer Octa लॉन्च की है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 2.42 करोड़ रुपये से शुरू होती है. अपने रीमास्टर्ड मॉडल के उलट, Octa में 4.4-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड V8 इंजन का इस्तेमाल किया गया है.

सोने के दाम में बदलाव, 12 दिसंबर के ताजा भाव जानें – 10 ग्राम सोना 1.31 लाख, चांदी 2 लाख के पार

इंदौर  16 दिसंबर से खरमास लगने वाला है, जो जनवरी तक चलेगा। इससे पहले शादी या किसी फंक्शन के लिए सोना या चांदी खरीदने का विचार कर रहे है और बाजार जाने का सोच रहे है तो पहले ताजा भाव चेक कर लीजिए। आज 12 दिसंबर को सोने के दाम में 1910 रूपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमतों में 3000 रूपए प्रति किलो का फिर उछाल आया है। आज शुक्रवार को 22 कैरेट सोने के दाम (Gold Rate Today) 1,21,750 , 24 कैरेट का भाव 1, 32,810 और 18 ग्राम सोने का रेट 99,640 रुपए पर ट्रेंड कर रहे है। वहीं 1 किलो चांदी का रेट (Silver Rate Today)2,04,000 रुपए चल रहा है। आईए जानते है आपके शहर का 18, 22 और 24 कैरेट सोने का भाव…… शुक्रवार का 18 कैरेट सोने का ताजा भाव     दिल्ली व जयपुर सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 99,640/- रुपये।     कोलकाता और मुंबई सराफा बाजार में 99,490/- रुपये।     इंदौर और भोपाल में सोने का भाव 99,540 चल रहा है।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 1,02,300/- रुपये पर ट्रेड कर रही है। शुक्रवार का 22 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 1,19,400/- रुपये ।     जयपुर, लखनऊ, दिल्ली सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold price Today) 1,21,750/- रुपये ।     हैदराबाद, केरल, कोलकाता, मुंबई सराफा बाजार में 1 21,600/- रुपये ट्रेंड कर रहा है। शुक्रवार का 24 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1,32,710 रुपये     दिल्ली जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1, 32, 810/- रुपये।     हैदराबाद, केरल, बैंगलुरू और मुंबई सराफा बाजार में 1,32, 660/- रुपये ।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 1,33,640 /- रुपये पर ट्रेंड कर रहा है।     जयपुर कोलकाता अहमदाबाद लखनऊ मुंबई दिल्ली सराफा बाजार में 01 किलोग्राम चांदी की कीमत (Silver Rate Today) 2,04,000 /- रुपये     चेन्नई, मदुरै , विजयवाड़ा, विशाखापटनम, हैदराबाद और केरल सराफा बाजार में कीमत 2,15,000/- रुपये।     भोपाल और इंदौर में 1 किलो चांदी की कीमत 2,04,000/ रुपए ट्रेंड कर रही है। GOLD SILVER : कैसे चेक करें प्योरिटी? सोना खरा है या नहीं?     ISO (Indian Standard Organization) द्वारा सोने की शुद्धता पहचानने के लिए हॉल मार्क दिए जाते हैं।24 कैरेट गोल्ड 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है और 22 कैरेट लगभग 91 प्रतिशत शुद्धता होती है।     24 कैरेट सोने में 1.0 शुद्धता (24/24 = 1.00) होनी चाहिए। 22 कैरेट सोने में 0.916 शुद्धता (22/24 = 0.916) होनी चाहिए।24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।     22 कैरेट गोल्ड में 9% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक मिलाकर जेवर तैयार किए जाते हैं। 24 कैरेट में कोई मिलावट नहीं होती, इसके सिक्के मिलते है, लेकिन 24 कैरेट सोने के आभूषण नहीं बनाए जा सकते, इसलिए ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट सोना बेचते हैं और इसी के आभूषण बनाते है। चांदी पर हॉलमार्किंग का नियम     सोने के बाद अब 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्यूलरी पर हॉलमार्किंग का नियम लागू कर दिया है।चांदी के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है। आप बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी खरीद सकते हैं।     हॉलमार्किंग के नियमों के तहत, चांदी पर 6 अंकों का यूनिक HUID कोड होगा।     इससे तुरंत पता चल जाएगा कि गहना किस शुद्धता का है और वह असली है या नहीं।     भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की शुद्धता के लिए 6 नए स्टैंडर्ड 800, 835, 900, 925, 970 और 990 तय किए हैं। 925 या 9250 अंक का मतलब है कि चांदी 92.5% शुद्ध है।  

कैश संकट पर RBI का दांव मजबूत, 50,000 करोड़ के बॉन्ड खरीदकर बढ़ाई लिक्विडिटी

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को देश के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। इसके जरिए केंद्रीय बैंक का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाना है। यह खरीदारी आरबीआई द्वारा पिछले सप्ताह की गई मौद्रिक नीति की घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी बॉन्ड की खरीद के माध्यम से बाजार में 1 लाख करोड़ रुपए और विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा के माध्यम से करीब 5 अरब डॉलर के बराबर की राशि बैंकिंग सिस्टम में डाली जाएगी। केंद्रीय बैंक रुपए को अधिक गिरने से रोकने के लिए बाजार में अमेरिकी डॉलर बेच रहा है, जिसके कारण बैंकिंग प्रणाली से काफी नकदी बाहर निकल गई है और इससे बाजार में ब्याज दरों में वृद्धि होने की संभावना भी बढ़ जाती है। मौद्रिक नीति के ऐलान के समय भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि आरबीआई शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के लगभग 1 प्रतिशत के अधिशेष स्तर को स्पष्ट रूप से लक्षित किए बिना बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, "मौद्रिक संचरण हो रहा है और हम इसे समर्थन देने के लिए पर्याप्त तरलता प्रदान करेंगे।" मल्होत्रा ​​ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में वर्तमान लिक्विडिटी कभी-कभी एनडीटीएल के 1 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो 0.6 प्रतिशत और 1 प्रतिशत के बीच रहती है, और कभी-कभी इससे भी अधिक हो जाती है। उन्होंने आगे कहा, "सटीक संख्या, चाहे 0.5, 0.6 या 1 प्रतिशत हो, मायने नहीं रखती। महत्वपूर्ण यह है कि बैंकों के पास सुचारू रूप से कार्य करने के लिए पर्याप्त भंडार हो।" केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और फॉरेक्स बाय-सेल स्वैप के माध्यम से लिक्विडिटी उपायों की घोषणा की है। ओएमओ के तहत 1 लाख करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद दो किस्तों में की जाएगी, प्रत्येक किस्त 50,000 करोड़ रुपए की होगी, जो 11 दिसंबर और 18 दिसंबर के बीच होगी। इसके अतिरिक्त, 16 दिसंबर को तीन साल के लिए 5 अरब डॉलर का यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल स्वैप किया जाएगा।