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फ्री ट्रेड डील के बाद भी भारत के लिए जरूरी काम, रिपोर्ट में मिली अहम जानकारी

नई दिल्‍ली भारत ने एक के बाद एक दूसरे देशों से 18 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्‍ताक्षर किया है, लेकिन एक्‍सपोर्ट में उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि नए समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बजाय मौजूदा समझौतों से निर्यात में ठोस लाभ सुनिश्चित करने पर फोकस करना चाहिए. खासकर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, इंजीनियरिंग और टेक्‍सटाइल्‍स सेक्‍टर में, जहां से ज्‍यादा लाभ मिल सकता है.  रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 के दौरान इसमें मामूली इजाफा हुआ है और यह करीब 850 अरब अमेरिकी डॉलर तक होने का अनुमान है. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के असर कारण इसमें ज्‍यादा इजाफा नहीं हुआ है.   कमजोर इंटरनेशलन डिमांड और बढ़ते सेफ उपायों के कारण माल निर्यात में कोई खास बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, जबकि सर्विस सेक्‍टर एक्‍सपोर्ट 400 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकता है. यह भारत के समग्र व्यापार प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकता है.  भारत ने की 18 एफटीए डील GTRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं और साल 2026 में और भी हस्ताक्षर होने की संभावना है. ऐसे में भारत की प्राथमिकता समझौतों पर हस्ताक्षर करने से हटकर मुक्त व्यापार समझौतों से वास्तविक निर्यात लाभ प्राप्त करने की ओर होनी चाहिए.  GTRI ने इस बात पर फोकस किया है कि भारत पिछले कई सालों में सबसे कठिन ग्‍लोबल ट्रेड सिचुएशन के साथ 2026 में एंट्री ल रहा है. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद, वैश्विक मांग में मंदी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई व्यापार बाधाएं भारत के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खा रही हैं. इससे बाजार में विस्‍तार के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखने पर ज्‍यादा फोकस हो रहा है.  टैरिफ सबसे बड़ा दबाव  संयुक्त राज्य अमेरिका एक महत्वपूर्ण दबाव के तौर पर उभरा है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों को दरकिनार करते हुए एकतरफा भारी टैरिफ लागू किया है. मई और नवंबर 2025 के बीच मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 21 प्रतिशत गिर गया.  निर्यात में और गिरावट आ सकती है जीटीआरआई ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को वापस नहीं लेता या कोई व्यापार समझौता नहीं करता, भारत के सबसे बड़े बाजार को निर्यात में और गिरावट आ सकती है.  भारत के लिए यूरोप से भी चुनौती यूरोप एक अलग चुनौती पेश कर रहा है. यूरोपीय संघ 1 जनवरी, 2026 से अपना कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करेगा, जिसके तहत आयात पर कार्बन टैक्‍स लाया जाएगा. अभी ये टैक्‍स लागू होने से पहले ही यूरोपीय संघ को भारत के इस्पात निर्यात में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है.  हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में लचीलेपन के संकेत मिले हैं. अमेरिका को निर्यात में गिरावट के बावजूद अन्‍य ग्‍लोबल मार्केट को शिपमेंट में करीब 5.5 फीसदी की तेजी है. जीटीआरआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक भू-राजनीति पर सीमित प्रभाव के साथ, भारत को अपने देश पर फोकस करना चाहिए. 

Gold और Silver की कीमतों में जबरदस्त उछाल, सोना ₹1,287 बढ़कर रिकॉर्ड पर, चांदी ₹2.32 लाख पार

इंदौर  सोने-चांदी की दहाड़ से सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है। आज सोने-चांदी के भाव एक और नया इतिहास लिख चुके हैं। दोनों धातुएं आज भी एक नए ऑल टाइम हाई पर हैं। चांदी के भाव एक झटके में 13117 रुपये प्रति किलो उछकर 232100 रुपये प्रति किलो पर खुले। जबकि, सोने के भाव में 1287 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 239063 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 142051 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। MCX पर दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से बुलियन सेगमेंट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर सोना 1.39 लाख के पार, बना नया रिकॉर्ड मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना तेज उछाल के साथ नया इतिहास रच गया। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,39,290 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया, जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।दोपहर के कारोबार में भी सोना मजबूती बनाए हुए नजर आया और करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड करता दिखा। निवेशकों का रुझान साफ तौर पर सोने की ओर बढ़ा है। चांदी की रफ्तार और तेज, 2.33 लाख रुपये के पार सोने के साथ-साथ चांदी ने भी बाजार में तूफान ला दिया। MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 2,33,183 रुपये प्रति किलो का स्तर छूकर नया ऑल-टाइम हाई बना दिया।दिनभर के कारोबार में चांदी में हजारों रुपये की तेजी देखने को मिली, जिसने इसे निवेशकों का सबसे पसंदीदा एसेट बना दिया। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 1282 रुपये उछल कर 137362 रुपयेकै प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 141482 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1179 रुपये चढ़कर 126329 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 130118 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 966 रुपये की तेजी के साथ 103436 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 106539 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 753 रुपये चढ़ा है। आज यह 80680 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 83100 रुपये पर है। 2025 में सोना-चांदी ने दिया जबरदस्त रिटर्न इस साल की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, वहीं चांदी ने तो उम्मीद से कहीं ज्यादा कमाई कराई है। यही वजह है कि मौजूदा समय में बुलियन मार्केट को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चमक, डॉलर के मुकाबले मजबूती वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा, जबकि चांदी ने भी नया उच्चतम स्तर छू लिया।अमेरिकी बाजारों में निवेशकों की बढ़ती मांग और आर्थिक अनिश्चितता ने इस तेजी को और बल दिया। आखिर क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक तनाव, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और डॉलर में उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश बनकर उभरे हैं। आगे क्या रहेगा ट्रेंड, निवेशकों को क्या करना चाहिए? मौजूदा हालात में बुलियन बाजार का ट्रेंड मजबूत नजर आ रहा है। हालांकि, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होती हैं, तो मुनाफावसूली का जोखिम भी बढ़ जाता है।निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें और बाजार की दिशा को समझते हुए ही निवेश करें। इस साल सोना ₹61,752 और चांदी ₹1,46,083 महंगी हुई     इस साल अब तक सोने की कीमत 61,752 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,37,914 रुपए हो गया है।     चांदी का भाव भी इस दौरान 1,46,083 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 2,32,100 रुपए प्रति किलो हो गई है। गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण     डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।     जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।     रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण     इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।     ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।     मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल के आखिर तक चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में अगले साल तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है। वहीं इस साल के आखिर तक इसकी कीमत 1.40 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड … Read more

Egg Price रिकॉर्ड हाई: सर्दियों में 25–50% तक महंगे हुए अंडे, जनवरी में और बढ़ोतरी संभव

 नई दिल्ली दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, लखनऊ, वाराणसी, पटना, रांची जैसे कई बड़े शहरों में इस बार अंडे की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं. कोई भी शहर ऐसा नहीं है, जहां दुकानों में रिटेल में एक अंडा 8 रुपये से कम बिक रहा हो. आमतौर पर हर साल 7-9 रुपये में मिलने वाला अंडा इस सर्दी में बहुत महंगा हो गया है. दुकानदार और खरीदार दोनों हैरान हैं कि अंडे को इस बार क्या हुआ? अभी दिसंबर चल रहा है और जनवरी बाकी है, तो क्या कीमतें और बढ़ेंगी? पोल्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस साल अंडा ऊंचे दाम पर नहीं बिका तो बीते साल के दाम तो छोड़िए अंडा खरीदने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती.अंडों के बाजार रेट पर नजर दौड़ाएं तो अगस्त-सितंबर के मुकाबले 25 से 50 फीसद तक महंगे हो चुके हैं. अभी जनवरी का पूरा महीना बाकी है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि दाम और बढ़ सकते हैं. डिमांड बढ़ने से महंगा हुआ अंडा यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अकबर अली ने बताया कि दिसंबर आते ही पूरे देश में अंडों की मांग बहुत बढ़ गई है. यह सिर्फ एक शहर या राज्य में नहीं, हर जगह की अंडों की मांग बढ़ी है. उत्तर प्रदेश को ही रोज 5.5 से 6 करोड़ अंडों की जरूरत होती है, जिसमें से 3.5 से 4 करोड़ दूसरे राज्यों से आते हैं. यूपी में दुकानों पर रिटेल में एक अंडा 8 से 10 रुपये तक बिक रहा है. जबकि होलसेल यानी थोक में कीमत 7.5 रुपये तक पहुंच गई है. ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़ें तो कीमत और बढ़ जाती है. बाजार को देखकर ऐसा लग रहा है कि होलसेल में 15.20 पैसे प्रति अंडा और महंगा हो सकता है. ऐसे में  जनवरी में अगर अंडा 8.5 रुपये का हो जाए तो हैरानी नहीं. फरवरी से ही कीमतें कम होने की उम्मीद है. अगर सही दाम नहीं मिले तो अंडा ढूंढना पड़ेगा! पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रनपाल ढांढा ने कहा कि अंडा अगर 8 रुपये का बिक रहा है तो उसे महंगा नहीं कह सकते. इस पोल्ट्री फार्मर को अंडे के सही कीमत मिल रही है. दरअसल, बीते कई साल से पोल्ट्री फीड महंगा हो रहा है लेकिन अंडे के दाम नहीं बढ़े थे. हर साल बड़ी संख्या में फार्मर अपने पोल्ट्री फार्म बंद कर रहे हैं. जिससे अंडा उत्पादन कम हो रहा है. अगर इस बार भी अच्छे दाम नहीं मिलते, तो आगे अंडा मिलना मुश्किल हो जाता. बता दें कि पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाली मक्का और सोयाबीन की सरकारी कीमत हर साल बढ़ जाती है, लेकिन अंडे की नहीं. दुनिया में सबसे सस्ता अंडा भारत में ही बिकता है. सबसे सस्ता अंडा नमक्कल-होसपेट में  नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) के रोज के रेट देखें तो थोक में सबसे सस्ता अंडा नमक्कल और होसपेट में बिक रहा है. जहां 640-645 रुपये प्रति 100 अंडे का रेट है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ये दोनों भारत की सबसे बड़ी अंडा मार्केट हैं. नमक्कल से सबसे ज्यादा अंडा दूसरे देशों में निर्यात होता है.

ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर ब्रेक: 2 दिन जोमैटो-स्विगी रहेंगे प्रभावित, डिलीवरी बॉय हड़ताल पर

नई दिल्ली  जोमैटो, स्विगी, जेप्टो, ब्लिंकिट, अमेजन और फ्लिपकार्ट से जुड़े डिलीवरी वर्कर 25 और 31 दिसंबर को हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रस्तावित आंदोलन का नेतृत्व इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) कर रहे हैं। डिलीवरी वर्करों की मांग है कि उन्हें नौकरी की गारंटी, बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ प्रदान किए जाएं। यह विरोध प्रदर्शन उन चिंताओं को सामने लाता है, जिनमें तेजी से बढ़ती प्लेटफॉर्म कंपनियों की कमाई के मुकाबले डिलीवरी वर्करों की बिगड़ती कार्य स्थितियां शामिल हैं। यूनियनों का देशव्यापी आंदोलन का ऐलान यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल खराब होती कार्य परिस्थितियों और लगातार घटते भुगतान के खिलाफ एक संगठित आवाज है। IFAT और TGPWU ने संयुक्त रूप से इस हड़ताल का आह्वान किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर यूनियनों ने स्विगी, जोमैटो, फ्लिपकार्ट मिनट्स सहित सभी प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी वर्करों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। यूनियनों ने इसे देशव्यापी आंदोलन बताया है और इसे जानबूझकर उन दिनों के लिए तय किया गया है, जब फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाओं की मांग सबसे अधिक रहती है। क्या है यूनियनों की मुख्य मांगे यूनियन की प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, अधिक वेतन, सुरक्षित कामकाजी हालात और सामाजिक सुरक्षा के लाभ शामिल हैं। TGPWU के संस्थापक अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने एक बयान में कहा कि अस्थिर कार्य ढांचा, घटती आय और सामाजिक सुरक्षा की पूरी तरह से कमी के कारण डिलीवरी वर्कर बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल न्याय, सम्मान और जवाबदेही की मांग है। उनका कहना है कि सरकार अब आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती, जब प्लेटफॉर्म कंपनियां वर्करों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमा रही हैं। नए श्रम कानून जल्द हो लागू यह प्रस्तावित हड़ताल ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार ने कुछ ही हफ्ते पहले नए श्रम कानून लागू किए हैं। इन कानूनों में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। नए नियमों के तहत, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिलीवरी, वेयरहाउसिंग और इससे जुड़ी सेवाओं के लिए गिग वर्करों पर निर्भर हैं, उन्हें अपने वार्षिक कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत गिग वर्कर वेलफेयर फंड में जमा करना अनिवार्य होगा। इस घोषणा के बाद जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल और स्विगी ने बयान जारी कर कहा है कि वे नए श्रम कानूनों का पालन करेंगे। कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का उनके लंबे समय के व्यवसाय या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वहीं, डिलीवरी वर्करों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात में सुधार के लिए इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।  

इंदौर सराफा मार्केट: सोना बना निवेशकों की पहली पसंद, चांदी के भाव भी उड़े

इंदौर  आसमान छू रहे सोने और चांदी की कीमतों के चलते देश भर में इसे सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है. यही वजह है कि 1 महीने में चांदी की कीमतों में करीब 65000 की वृद्धि हो चुकी है. वहीं, सोना भी 10000 की उछाल पर है. चांदी की कीमतें बढ़ाने की एक वजह इसके विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक आइटम और अन्य संसाधनों में उपयोग है. जिसके कारण चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. निवेशकों में सोने चांदी की डिमांड देश में त्योहारी सीजन और शादियों के बाद भी सोने और चांदी की कीमत तेजी से बढ़ रही है. बीते 1 महीने में सराफा बाजार की धारणा पर गौर किया जाए, पता चलता है कि बड़े-बड़े निवेशकों के बीच सोने और चांदी की बंपर डिमांड है. जिसके चलते फिलहाल प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में चांदी प्रति किलो 2 लाख 2000 और सोना 134500 प्रति तोले के भाव पर पहुंच गया है. प्रॉपर्टी सेक्टर में निवेश पड़ा ठंडा सराफा बाजार में अन्य वस्तुओं के ग्राहक बिल्कुल घट गए हैं, लेकिन सोने चांदी की थोक खरीदी वाले बुलियन मार्केट में केडबरी और पांसे की बिक्री जोरों पर है. इधर रियल एस्टेट मार्केट और प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले लोग भी अब सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं. इसके चलते भी भाव बढ़ रहे हैं. वहीं, इन दिनों पूरा प्रॉपर्टी सेक्टर खरीदी बिक्री के लिहाज से बिल्कुल ठंडा है. सोना को सबसे सुरक्षित निवेश मान रहे ग्राहक इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुमचंद सोनी बताते हैं कि "सोने और चांदी के भाव में लगातार वृद्धि हो रही है. इसलिए कोई भी निवेशक इसी में निवेश कर रहा है. यदि भाव में वृद्धि के यही हाल रहे, तो कुछ दिनों में ही प्रति किलो चांदी की कीमत ढाई लाख रुपए हो जाएगी और सोना डेढ़ लाख रुपए तोला तक पहुंच जाएगा. वैसे भी सोना ग्राहकों के बीच सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, जो खरीदी के लिहाज से पहली पसंद बना हुआ है." इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में चांदी के इस्तेमाल से बढ़ रहा रेट ज्वेलरी के फुटकर विक्रेता वसंत सोनी बताते हैं कि "शादियों के सीजन में सोने और चांदी की जमकर खरीदारी हुई है, लेकिन फिलहाल बाजार ठंडा है. चांदी की थोक खरीदारी आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में हो रही है, जिसके चलते भाव में लगातार उछाल बना हुआ है."

Russia–India Oil Trade: प्रतिबंधों से बाहर सप्लायरों से रूस का तेल खरीद रही रिलायंस

मुंबई  रूस से भारत को सस्ता तेल मिलता है, और भारत वर्षों से खरीदते आया है. लेकिन बीच में अमेरिकी विरोध के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना थोड़ा कम कर दिया था. लेकिन अब खबर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रूस से कच्चा तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है. कुछ समय पहले मुकेश अंबानी की कंपनी ने रूसी तेल का आयात रोक दिया था, लेकिन अब दोबारा इसे मंगाया जा रहा है. यह तेल गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी में इस्तेमाल किया जाएगा, जहां से पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन बनाए जाते हैं. दरअसल, अमेरिका ने रूस की कुछ बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे. इन प्रतिबंधों के बाद कई भारतीय कंपनियां रूसी तेल खरीदने में सावधानी बरतने लगी थीं. इसी वजह से रिलायंस ने भी कुछ समय के लिए रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. लेकिन अब कंपनी ऐसे सप्लायरों से तेल खरीद रही है, जो इन प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते.  अमेरिकी बैन का अब क्या होगा? बता दें,अमेरिकी प्रशासन ने 22 अक्टूबर को रूस के दो बड़े तेल उत्पादक Rosneft और Lukoil पर बैन लगाए थे और रिफाइनरी कंपनियों को इन आपूर्तिकर्ताओं के साथ अपने सौदों को पूरा करने के लिए महीनेभर का वक्त दिया था. उस आदेश के बाद Reliance ने कुछ समय के लिए रूसी तेल की खरीद रोक दी थी.  आयात फिर से शुरू होने से पहले Reliance को अमेरिकी प्रशासन से एक अतिरिक्त महीने की छूट भी प्राप्त हुई थी, ताकि वह पहले से किए गए करार के तहत प्राप्त जहाजों को रिसीव कर सके. इस एक महीने की अनुमति ने कंपनी को समयसीमा के भीतर पुराने सौदों को पूरा करने में मदद की है.  सौदे पूरा करने के लिए मिला था महीनेभर का वक्त रिलायंस रूसी तेल इसलिए भी खरीदता है, कि ये दूसरे देशों के मुकाबले सस्ता मिलता है. सस्ता तेल मिलने से कंपनी को ईंधन बनाने में लागत कम पड़ती है और देश को भी फायदा होता है. रिलायंस का यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत में रूसी तेल का आयात घटने लगा था. अगर रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी खरीदारी दोबारा शुरू करती है, तो इससे भारत में रूसी तेल की हिस्सेदारी बनी रह सकती है. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है. गौरतलब है कि भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है. ऐसे में सस्ते तेल का विकल्प बहुत अहम होता है.   खबर के मुताबिक, यह तेल बड़े समुद्री जहाजों (टैंकरों) के जरिये भारत लाया जा रहा है. जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और यहां हर रोज लाखों बैरल तेल रिफाइन किया जाता है. यहां बना ईंधन भारत के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई होता है.

Bajaj ने पेश की अपडेटेड Pulsar 150, जानें नए फीचर्स और कीमत

मुंबई   स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto ने भारत में अपनी अपडेटेड Bajaj Pulsar 150 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 1.09 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उतारा गया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को तीन वेरिएंट में उतारा है. इनमें पहला Pulsar 150 SD, जिसकी कीमत 1.09 लाख रुपये है, Pulsar 150 SD UG, जिसकी कीमत 1.12 लाख रुपये है, और तीसरा Pulsar 150 TD UG है, जिसकी कीमत 1.15 लाख रुपये है. पिछले वर्जन की तुलना में, इसके बेस मॉडल की कीमत में 3,600 रुपये की मामूली बढ़ोतरी हुई है. यहां हम बताने जा रहे हैं कि इसमें पुराने मॉडल के मुकाबले क्या बदलाव हुए हैं. 2026 Bajaj Pulsar 150 का डिजाइन Classic Pulsar के लेटेस्ट अपडेट में कॉस्मेटिक और लाइटिंग में बदलाव किए गए हैं. Bajaj Pulsar 150 में अब नए ग्राफिक्स के साथ LED हेडलाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स दिए गए हैं. इसके अलावा, इसमें नए पेंट स्कीम के साथ नए ग्राफिक्स भी मिलते हैं, जिसमें ऑरेंज हाइलाइट्स वाला ग्रीन कलर शामिल है. इसी कलर को अपडेटेड Bajaj Pulsar 220F में देखा गया था, और ब्लू, ग्रे और रेड ऑप्शन भी हैं, जिनमें से हर एक के साथ ब्लैक कलर दिया गया है. 2026 Bajaj Pulsar 150 का इंजन इसके स्पेसिफिकेशन्स के बारे में बात करें तो, Bajaj Pulsar 150 में पहले वाला इंजन ही मिलता है, जोकि एक 149cc, सिंगल-सिलेंडर एयर-कूल्ड इंजन है. यह इंजन 8,500 rpm पर 13.8 bhp की मैक्सिमम पावर और 6,500 rpm पर 13.4 Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है. इस इंजन के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स मिलता है. इसके अलावा, मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. Bajaj Pulsar 150 लंबे समय से पल्सर ब्रांड के मुख्य पिलर्स में से एक रही है और बाइक ने कम्यूटर और स्पोर्टी कम्यूटर सेगमेंट में Bajaj Auto की मौजूदगी को बनाने में अहम भूमिका निभाई है. बदलते ट्रेंड और लाइनअप में नए मॉडल आने के बावजूद, Pulsar 150 काफी समय से काफी हद तक उसी रूप में बनी हुई है, जिसमें रास्ते में सिर्फ़ मामूली अपडेट किए गए हैं.

दूध-ब्रेड नहीं, अब सोना-चांदी भी: क्विक कॉमर्स पर 10 मिनट में हुई लाखों की शॉपिंग

नई दिल्ली किसी को 68 हजार रुपये की टिप, किसी ने क्लिक में खरीद 4.3 लाख रुपये के iPhone 17 खरीदे तो किसी ने 1 किलो चांदी ऑर्डर कर दी. स्विगी के इंस्टामार्ट ने बताया है कि साल 2025 में लोगों ने क्या-क्या खरीदा.  हैदराबाद के एक शख्स ने एक क्लिक में 4.3 लाख रुपये का ऑर्डर देकर iPhone 17 बुक कर डाले थे. इंस्टामार्ट पर किया गया ऑर्डर भले ही अजीब लगे, लेकिन अब क्विक कॉमर्स पर शॉपिंग का लेवल बढ़ रहा है. अब क्विक कॉमर्स सिर्फ दूध, दही, ब्रेड और ग्रोसरी आदि ऑर्डर करने की जगह नहीं है.  सिंगल क्लिक में किया गया सबसे बड़ा ऑर्डर 4.3 लाख रुपये में खरीदे गए iPhone 17 का यह ऑर्डर इस साल सिंगल कार्ड में खरीदा गया सबसे बड़ा ऑर्डर है. लेकिन बड़े ऑर्डर की लिस्ट में यह इकलौता ऑर्डर नहीं है, इससे पहले भी कई बड़े ऑर्डर किए जा चुके हैं. आइए जानते हैं.  2025 में सिंगल अकाउंट से 22 लाख रुपये का खर्चा  दरअसल, साल 2025 में एक यूजर्स ने 22 लाख रुपये का खर्चा किया है, जिसकी जानकारी कंपनी ने अपनी एनुअल रिपोर्ट्स में दी है. शख्स ने 22 iPhones, गोल्ड कॉइन, किचप एप्लाइसेंस और डेली जरूरत का सामान ऑर्डर किया था. इसमें दूध, दही, ब्रेड और ग्रोसरी आइटम शामिल थे.  2 किलोग्राम चांदी बुक कर दी  बेंगलुरु में एक शख्स ने दिवाली कार्ट के दौरान करीब 2 लाख रुपये की कीमत का 2 किलो ग्राम चांदी का ऑर्डर किया था. वहीं, धनतेरस के दौरान गोल्ड ऑर्डर में 400 परसेंट का इजाफा देखने को मिला.  4.36 लाख रुपये नूडल्स ऑर्डर किए  बेंगलुरु के एक शख्स ने अपने अकाउंट से 4.36 लाख रुपये सिर्फ नूडल्स पर खर्च किए थे. वहीं मुंबई में एक यूजर्स ने अपने अकाउंट्स से पूरे एक साल के दौरान RED Bull Sugar Free पर करीब 16.3 लाख रुपये का खर्चा किया था.  नोएडा ने शख्स ने खरीदा था 2.8 लाख रुपये का प्रोटीन दिल्ली-NCR के शहर नोएडा में एक शख्स ने 1,343 प्रोटीन आइटम का ऑर्डर कर डाला. इसके लिए उसने करीब 2.8 लाख रुपये का खर्चा कर डाला.

भारत में ईवी की बड़ी छलांग: टाटा नेक्सन ईवी ने छुआ 1 लाख बिक्री का मील का पत्थर

मुंबई  भारत में इलेक्ट्रिक कार बाजार में नया कीर्तिमान भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच टाटा मोटर्स ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। टाटा नेक्सन ईवी देश की पहली ऐसी इलेक्ट्रिक कार बन गई है, जिसने 1 लाख यूनिट की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि केवल एक मॉडल की सफलता नहीं, बल्कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तेजी से बढ़ते भरोसे का प्रतीक मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में जिस तरह से ईवी सेगमेंट ने रफ्तार पकड़ी है, उसमें नेक्सन ईवी की भूमिका सबसे अहम रही है। लॉन्च के बाद से लगातार बढ़ता भरोसा साल 2020 में भारतीय बाजार में कदम रखने वाली टाटा नेक्सन ईवी ने शुरुआत से ही ग्राहकों का ध्यान खींचा। दमदार परफॉर्मेंस, संतुलित रेंज और मजबूत ब्रांड वैल्यू ने इसे आम उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाया। समय के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और सर्विस नेटवर्क के विस्तार ने भी इसकी बिक्री को मजबूती दी। आज नेक्सन ईवी को भारत में इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट की पहचान माना जाने लगा है। पावरट्रेन और रेंज की पूरी जानकारी टाटा नेक्सन ईवी को दो अलग-अलग बैटरी विकल्पों के साथ पेश किया गया है। इसमें पहला बैटरी पैक 30 kWh क्षमता का है, जो अच्छी पावर और संतुलित परफॉर्मेंस देता है। दूसरा विकल्प 40.5 kWh बैटरी पैक के साथ आता है, जिसे लंबी दूरी तय करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, छोटे बैटरी पैक के साथ यह ईवी एक बार चार्ज करने पर लगभग 325 किलोमीटर तक चल सकती है, जबकि बड़ा बैटरी पैक फुल चार्ज पर 465 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। फीचर्स में भी नहीं है कोई कमी टाटा नेक्सन ईवी के केबिन को आधुनिक तकनीक और आराम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और वायरलेस चार्जिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा, सिंगल पेन सनरूफ और प्रीमियम इंटीरियर फिनिश इसे अपने सेगमेंट में खास बनाते हैं। सेफ्टी में भी कायम किया मानक परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टाटा नेक्सन ईवी को उच्च स्तर की सेफ्टी के साथ तैयार किया गया है। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को भारत NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। स्टैंडर्ड सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इसमें 6 एयरबैग और 360-डिग्री कैमरा जैसी तकनीक दी गई है, जो इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद विकल्प बनाती है। कीमत और बाजार में स्थिति भारतीय बाजार में टाटा नेक्सन ईवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 12.49 लाख रुपये से शुरू होती है, जबकि इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 17.49 लाख रुपये तक जाती है। इस कीमत पर मिलने वाली रेंज, फीचर्स और सेफ्टी इसे इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। 1 लाख यूनिट की बिक्री का आंकड़ा पार करना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भी नेक्सन ईवी भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की अगुवाई करती रहेगी।

2029 तक सोने की कीमतों में विस्फोट? 10 ग्राम ₹3 लाख पहुंचने की भविष्यवाणी, अमेरिकी एक्सपर्ट का दावा

नई दिल्ली  सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और अब इस तेजी के संभावित भविष्य का अनुमान सुनकर निवेशक हैरान हैं। जहां आज सोना लगभग ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, वहीं एक प्रतिष्ठित अमेरिकी अर्थशास्त्री का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में यह रेट दोगुना से भी ऊपर बढ़ सकता है। अगर यह अनुमान हकीकत बनता है तो 2029 तक सोने का भाव भारत में लगभग ₹3,08,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है—जो माता-पिता के लिए बेटी की शादी जैसे खास खर्चों को और चुनौतीपूर्ण बना देगा। क्या है 2029 लक्ष्य? अमेरिका के रणनीतिक वित्तीय विशेषज्ञ एड यार्डेनी ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत 2029 तक $10,000 प्रति औंस के करीब पहुंच सकती है। अगर आज की कीमत (लगभग $4,410 प्रति औंस) से तुलना करें, तो यह लगभग 127% से भी ज्यादा उछाल को दर्शाता है—एक बेहद तेज वृद्धि जो निवेशकों के लिए आकर्षक भी है और चुनौतीपूर्ण भी।   ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को कम किए जाने की अटकलों ने निवेशकों को सोने की ओर खींचा है। जैसे ही बैंक ब्याज दरें घटती हैं, शेयर और मुद्रा बाजार का आकर्षण कम हो सकता है, जिससे पैसा सुरक्षित परिसंपत्तियों- जैसे कि सोना- की ओर बढ़ता है। वैश्विक अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल विश्वभर में अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने को ‘सुरक्षित आश्रय’ यानी सेफ हेवन एसेट के रूप में और मजबूत बनाया है। क्या परंपरागत धारणा बदल रही है? आम धारणा यह रही है कि जब शेयर बाजार मजबूत होता है, सोने की कीमतें गिरती हैं। लेकिन एड यार्डेनी ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि मौजूदा समय में सोने की मांग सिर्फ संकट में ही नहीं बल्कि सामान्य निवेश पोर्टफोलियो में भी बढ़ रही है। इसका मतलब यह हुआ कि सोना अब केवल “बुरे वक्त का आश्रय” नहीं रह गया, बल्कि लंबी अवधि में एक मुनाफे वाला निवेश भी बन चुका है।