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लाल निशान पर बाजार बंद, अमेरिकी टैरिफ ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 308.47 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,710.25 और निफ्टी 73.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,649.55 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 225.50 अंक या 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,206.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 28.85 अंक या 0.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,864.55 पर था। निफ्टी में आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, मीडिया और एनर्जी इंडेक्स लाल निशान में थे, जबकि मेटल, ऑटो और कमोडिटी इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स पैक में टाइटन, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एसबीआई, एलएंडटी, एचसीएल टेक और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स थे। रिलायंस, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल (जोमैटो), बीईएल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और आईटीसी टॉप लूजर्स थे। जानकारों के मुताबिक, बाजार के गिरने की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर और टैरिफ लगाए जाने की धमकी को माना जा रहा है। आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने नोट में कहा, "क्षेत्रवार रुझान मिले-जुले रहे, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में अपेक्षाकृत मजबूती देखी गई, जबकि ज्यादातर अन्य क्षेत्र नुकसान में रहे। खास तौर पर, तेल और गैस, फार्मा, निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं में भारी गिरावट देखी गई।" नोट में आगे कहा कि मौद्रिक नीति से पहले बाजार में निवेशकों के बीच सर्तकता देखी गई। सत्र के दूसरे भाग में बैंकिंग शेयरों में बिकवाली हुई। बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 58 मिनट पर सेंसेक्स 384.11 अंक या 0.47 प्रतिशत की गिरावट के बाद 80,634.61 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 113.80 अंक या 0.46 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,608.95 पर था।

ED की रडार पर अनिल अंबानी, लोन घोटाले में पूछताछ का दौर शुरू

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पूछताछ कर रही है. संघीय जांच एजेंसी ने 1 अगस्त को उन्हें समन जारी करके आज अपने नई दिल्ली दफ्तर में हाजिर होने के लिए कहा था. वह मंगलवार सुबह मुंबई से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर में पेश हुए.  पूछताछ का नेतृत्व असिस्टेंट डायरेक्टर रैंक के अफसर द्वारा किया जा रहा है. वहीं डेप्यूटी डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्ट रैंक के अधिकारी इस इंटेरोगेशन की निगरानी कर रहे हैं. ईडी ने कुछ दिन पहले ही अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 35 ठिकानों और व्यक्तियों के यहां छापेमारी की थी और महत्वपूर्ण दस्तावेज, कम्प्यूटर हार्ड ड्राइव समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे. जांच एजेंसी ने बैंकों को पत्र लिखकर अनिल अंबानी की कंपनियों को अप्रूव्ड लोन का ब्योरा भी मांगा है. ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन पर की गई उचित जांच-पड़ताल का विवरण मांगा है. सूत्रों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक से भी विवरण मांगा गया है. ₹17000 करोड़ के लोन फ्रॉड का मामला ईडी की प्रारंभिक जांच में येस बैंक से लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अवैध लोन ट्रांसफर (2017 से 2019 की अवधि) का पता चला है. बाद में अधिकारियों को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन फ्रॉड के बारे में पता चला. इसके बाद गत 24 जुलाई को ईडी ने दिल्ली और मुंबई में कम से कम तीन दिनों तक 35 ठिकानों पर छापेमारी की, जो 50 कंपनियों और 25 लोगों से जुड़े हैं. अनिल अंबानी की कंपनियों के कई अधिकारियों के यहां भी ईडी ने छापे मारे थे और 25 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी. इस कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए. रिलायंस इंफ्रा से लेकर रिलायंस पावर तक के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया. पिछले पांच दिनों में ही रिलायंस पावर का शेयर 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. वहीं रिलायंस इंफ्रा के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई है. इस मामले में ED ने की पहली गिरफ्तारी संघीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह इस केस के संबंध में पहली गिरफ्तारी की थी. ईडी ने बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को 1 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उन्होंने बताया कि ये बैंक गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी. अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है. CBI के बाद ED ने दर्ज किया था मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. ईडी सूत्रों के मुताबिक य​ह जांच मुख्य रूप से 2017-2019 के बीच अनिल अंबानी की कंपनियों को येस बैंक द्वारा दिए गए अवैध लोन डायवर्जन के आरोपों से संबंधित है. उनके मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनियों को लोन दिए जाने से ठीक पहले, येस बैंक के प्रमोटरों को उनके व्यवसाय में धन प्राप्त हुआ था. संघीय जांच एजेंसी रिश्वत और लोन के इस गठजोड़ की जांच कर रही है. ईडी ने अपनी प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं पाई हैं, जिनमें खराब या असत्यापित वित्तीय स्रोतों वाली कंपनियों को लोन जारी करना, लोन लेने वाली संस्थाओं में एक ही निदेशक और पते का उपयोग, लोन फाइलों में आवश्यक दस्तावेजों का नहीं होना, शेल कंपनियों के नाम लोन मंजूर करना, मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए नए लोन देना शामिल है. सेबी ने अनिल अंबानी की कंपनी, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट पेश की है. इसमें कहा गया है कि कंपनी का कॉरपोरेट लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2017-18 के 3,742 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2018-19 में 8,670 करोड़ रुपये हो गया. ED एक्शन पर रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की दो कंपनियों रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 26 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करते हुए कहा था कि वे ईडी की इस कार्रवाई को स्वीकार करते हैं, लेकिन छापों का उनके बिजनेस ऑपरेशन, फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, शेयर होल्डर्स, स्टाफ या किसी अन्य स्टेकहोल्डर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. कई नियामक और वित्तीय निकायों ने अपने निष्कर्ष ईडी के साथ साझा किए हैं, जिनमें नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं. एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और खुद अनिल अंबानी को 'फ्रॉड अकाउंट्स' के रूप में क्लासिफाइड किया है. यह पहली बार नहीं है जब बैंक ने किसी अकाउंट को धोखाधड़ी वाला बताया है. एसबीआई ने इससे पहले नवंबर 2020 में RCom और अनिल अंबानी के बैंक खातों को फ्रॉड अकाउंट्स घोषित किया था और 5 जनवरी, 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जनवरी, 2021 यथास्थिति का आदेश जारी किया, जिसके बाद शिकायत वापस ले ली गई.

आर्थिक मोर्चे पर भारत का कमाल, 110 अरब डॉलर से अमेरिका-चीन की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली भारत में सेमीकंडक्‍टर का उपयोग बड़े स्तर पर होता है और अब भारत कंजम्‍प्‍शन के अलावा, मैन्‍युफैक्‍चरिंग भी करने लगा है. भारत में तेजी से चिप (India Semiconductor Market) बनाने का काम हो रहा है, जिस कारण सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्री ग्रो कर रही है. घरेलू च‍िप मार्केट 2023 में 38 अरब डॉलर तक था और वित्त वर्ष 2024-25 में 45 से 50 अरब डॉलर था, जो 2030 तक 100 से 110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.  अगर भारत यह टारगेट हासिल कर लेता है तो वह US चीन की कैटेगरी में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेमीकंडक्‍टर इंडस्‍ट्रीज ट्रिलियन डॉलर की हैं. 2023 में चीन का सेमीकंडक्‍टर मार्केट 177.8 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 32 फीसदी हिस्‍सा है. वहीं मैन्‍युफैक्चरिंग की बात करें तो यह 16 से 18% उत्‍पादन करता है. अमेरिका का चिप मार्केट साल 2023 में 130 अरब डॉलर था, जो ग्‍लोबल मार्केट का 25 फीसदी है, लेकिन US 12 फीसदी ही उत्‍पादन करता है.  भारत उभरता हुआ चिप मार्केट  भारत का साल 2024 में कुल सेमीकंडक्‍टर मार्केट 45 अरब डॉलर था, जो कुल ग्‍लोबल मार्केट में 1 फीसदी उत्‍पादन करता है. हालांकि भारत का चिप मार्केट 16% ग्रोथ से बढ़ रहा है यानी 2030 तक इसकी ग्‍लोबल मार्केट में 6.21 फीसदी तक की हिस्‍सेदारी होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत ग्‍लोबल सेमीकंडक्‍टर मार्केट में एक उभरता हुआ देश है.  इस वजह से बढ़ रहा सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन  एक ऑफिशियल स्‍टेटमेंट के मुताबिक, इस ग्रोथ को 76000 करोड़ रुपये के खर्च से शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम जैसी सेमीकंडक्‍टर का उत्‍पादन बढ़ रहा है. इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) जैसे ग्‍लोबल सहयोग ने इस क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी को और बढ़ाया है.  फॉक्‍सकॉन और एचसीएल का ज्‍वाइंट वेंचर  देश का चिप निर्माण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर धीरे-धीरे साइज बदल रहा है. मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्‍टर मिशन के तहत एक सेमीकंडक्‍टर निर्माण सुविधा को मंजूरी दी, जो HCL और फॉक्‍सकॉन के बीच एक ज्‍वाइंट वेंचर है. यह प्‍लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार और PC जैसे उपकरणों के लिए डिस्‍प्‍ले ड्राइवर चिप्‍स का निर्माण करेगा. इस प्‍लांट को 20 हजार वेफर मंथली की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है. इससे मंथली 36 मिलियन चिप्‍स का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है.  भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन भी इसी वर्ष शुरू होने वाला है और पांच मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट अभी बन रही हैं. भारत सिर्फ एक मार्केट ही नहीं, बल्कि एक उत्‍पादन सेंटर के तौर पर भी महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए भी तैयार है. 

AI क्रांति या तबाही? विशेषज्ञ बोले– आने वाले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां जाएंगी

 नई दिल्ली दशकों पहले कंप्यूटर के आने पर जैसी हलचल मची थी, वैसी ही स्थिति अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर देखी जा रही है। कोई इसे लेकर आशंकित है कि नौकरियां चली जाएंगी तो कुछ लोगों को लगता है कि इससे तमाम काम आसान और पारदर्शी होंगे। इस बीच भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने बड़ा अनुमान जाहिर किया है। उनका कहना है कि अगले 5 सालों में 80 फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। निखिल कामथ के साथ पॉडकास्ट में विनोद खोसला ने कहा इन नौकरियों में लगे लोगों का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से होने लगेगा। यही नहीं उन्होंने छात्रों को भी जागरूक करते हुए कहा कि भविष्य के छात्रों को स्पेशलिस्ट बनने की बजाय जनरलिस्ट बनना होगा यानी उन्हें तमाम चीजों की जानकारी रखनी होगी। विनोद खोसला ने उम्मीद भरी एक बात भी की। उन्होंने कहा कि भले ही मौजूदा तमाम नौकरियां चली जाएंगी, लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि कुछ अवसर भी इससे पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर भी पैदा होंगे, जिनके बारे में आज हम सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी बहुत सी शानदार नौकरियां हैं, जिन्हें इंसान कर रहे हैं। उन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किया जाएगा। ऐसी करीब 80 पर्सेंट नौकरियां होंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक बहुत सी चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे होंगे कि कई काम तो खत्म ही हो जाएंगे। यदि कोई उन्हें करना चाहेगा तो वह उनका शौक होगा, लेकिन जरूरत नहीं होगी। विनोद खोसला का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब दिग्गज टेक कंपनियों में छटनी का दौर है। इन कंपनियों का कहना है कि वे वर्कफोर्स का पुनर्गठन कर रही हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि चीजें बदल रही हैं। हाल ही में देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी कही जाने वाली टीसीएस ने 12 हजार कर्मचारियों की छटनी का ऐलान किया है। इसके अलावा नीतियों में भी कुछ बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे भविष्य में भी नौकरियों पर तलवार रहेगी।

सारा तेंदुलकर को मिला इंटरनेशनल सम्मान, ऑस्ट्रेलिया टूरिज्म की बनीं ब्रांड एम्बेसडर

मुंबई  ऑस्ट्रेलिया की सरकार अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को अपने यहां छुट्टियां बिताने के लिए आकर्षित करने के लिए नया टूरिज्म कैंपेन लॉन्च करने जा रही है। इस खास अभियान के लिए उसने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। 13 करोड़ डॉलर के इस कैंपेन का नाम है 'कम ऐंड से जी-डे'। इस खास अभियान का मकसद अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां बिताने और टूर प्लान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। अभियान की शुरुआत 7 अगस्त से चीन से होगी और उसके बाद इस साल के आखिर तक भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे दूसरे बड़े बाजारों में इसे लॉन्च किया जाएगा। कम ऐंड से जी डे कैंपेन का यह दूसरा सीजन है। सबसे पहले इसे अक्टूबर 2022 में लॉन्च किया गया था। ये कैंपेन अगले 2 साल तक चलेगा और इसके खत्म होने तक ऑस्ट्रेलियाई सरकार 2022 से अब तक इसमें 25 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुकी होगी। स्पेशल टूरिज्म कैंपेन को जब भारत में लॉन्च किया जाएगा तो सारा तेंदुलकर उसका चेहरा होंगी। अमेरिका में इस कैंपेन के लिए ऑस्ट्रेलिया के महान वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशनिस्ट स्टीव इर्विन के बेटे रॉबर्टन इर्विन चेहरा होंगे। इसी तरह ब्रिटेन में फूड राइटर और टीवी कुक निजेला लॉसन इस अभियान की चेहरा होंगी। इस अभियान के तहत जिन देशों के पर्यटकों को लुभाने की कोशिश होगी, उन देशों की चर्चित हस्तियों को इसका चेहरा बनाया जाएगा। चीन में एक्टर योश हू जबकि जापान में मीडिया पर्सनैलिटी और कॉमेडियन अबरेरु कुन इस अभियान के ब्रांड एम्बेसडर होंगे।

अनिल अंबानी पर ईडी का कड़ा प्रहार, बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंची जांच की आंच

 मुंबई केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक तरफ रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के समूह की कंपनियों के खिलाफ करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 5 अगस्त को पूछताछ के लिए समन भेजा है, तो दूसरी तरफ दर्जन भर ऐसे बैंकों को चिट्ठी लिखकर उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं, जिन्होंने उनकी कंपनियों को लोन दिए थे। ईडी ने उन बैंकों को पत्र लिखकर उनकी कंपनियों को दिए गए ऋणों का विवरण मांगा है। मामले से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी।  रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने 12-13 सार्वजनिक और निजी बैंकों को पत्र लिखकर रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन का विवरण माँगा है। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने जिन बैंकों को चिट्ठी लिखी है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल है। जो लोन बन गए NPA… रिपोर्ट में कहा गया है कि ईडी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप को दिए गए ऋण के मामले में उन लोन्स को स्वीकृत करने और जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है, जो बाद में NPA बन गए। सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने ऋण मंजूरी की प्रक्रिया, चूक की समय-सीमा और ऐसे खातों पर की गई वसूली कार्रवाई का विवरण भी माँगा है। पिछले हफ्ते पहली गिरफ्तारी एजेंसी ने पिछले हफ्ते अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में पहली गिरफ्तारी की थी। बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को शुक्रवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि ये गारंटी रिलायंस पावर की ओर से दी गई थी। 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी का मामला बता दें कि ईडी 2017 और 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस समूह की कंपनियों को दिए गए लगभग 3,000 करोड़ रुपये के कथित ऋण हेराफेरी की जांच कर रही है। एजेंसी ने पाया है कि बैंक के प्रवर्तकों को ऋण स्वीकृत होने से ठीक पहले भुगतान भी प्राप्त हुआ था, जो एक लेन-देन व्यवस्था का संकेत देता है। एजेंसी ने पिछले महीने इस मामले से जुड़ी 50 से अधिक फर्मों पर छापे मारे थे। अंबानी के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।

Vivo Y400 5G की एंट्री, सुहाना खान की ग्लैमरस मौजूदगी से हुआ धमाकेदार लॉन्च

मुंबई  Vivo ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम Vivo Y400 5G है. यह एक मिड रेंज स्मार्टफोन है और इसमें कई अच्छे फीचर्स दिए गए हैं. इस स्मार्टफोन के लिए कंपनी ने SRK की बेटी सुहाना खान को ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है. Vivo Y400 5G में 6,000mAh की बैटरी और बेहतरीन कलर ऑप्शन दिए हैं. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.  Vivo Y400 5G की भारत में शुरुआती कीमत 21,999 रुपये है, जिसमें 8GB Ram + 128GB स्टोरेज मिलती है. वहीं, 8GB RAm + 256GB स्टोरेज वेरिएंट के लिए 23,999 रुपये खर्च करने होंगे.   7 अगस्त से शुरू होगी सेल  Vivo Y400 5G  दो कलर वेरिएंट Glam White और Olive Green कलर में आता है. इसकी पहली सेल 7 अगस्त से शुरू होगी, जो Vivo India e-store, Flipkart, Amazon और चुनिंदा रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध होगा. प्री बुकिंग करने वाले यूजर्स को चुनिंदा बैंक के कार्ड्स पर 10 परसेंट तक का डिस्काउंट मिलेगा.  Vivo Y400 5G  के स्पेसिफिकेशन्स  Vivo Y400 5G  में 6.67-inch full-HD+ AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 120Hz Refresh Rate और 1800 Nits की पीक ब्राइटनेस मिलेगी.  Vivo Y400 5G  का प्रोसेसर और रैम  Vivo का यह लेटेस्ट हैंडसेट Snapdragon 4 Gen 2 चिपसेट के साथ आता है. इसमें 8GB LPDDR4X RAM और 256GB की UFS 3.1 स्टोरेज मिलेगी.  Vivo Y400 5G का कैमरा  Vivo Y400 5G के कैमरा की बात करें तो इसमें बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 50-megapixel Sony IMX852 प्राइमरी कैमरा सेंसर है. सेकेंडरी कैमरा 2-Megapixel Depth सेंसर दिया है. इसमें 32MP का फ्रंट कैमरा दिया है. फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी के लिए खास AI Modes का यूज किया है.  Vivo Y400 5G की बैटरी और अन्य फीचर्स Vivo Y400 5G में 6,000mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 90W का वायर चार्जिंग सपोर्ट मिलता है. इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है, जो बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ आता है. इस स्मार्टफोन को  IP68+IP69 रेटिंग मिली है जो इसे वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंस बनाता है.     

जूनूनी तेजी: सोने ने छूआ ₹1 लाख का आंकड़ा, चांदी 1.11 लाख की ओर

मुंबई   घरेलू वायदा बाजार में आज कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई है। सोने की कीमतों ने एक बार फिर ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर लिया है। सोमवार (4 अगस्त) को सोना ₹1,00,272 और चांदी करीब ₹1,11,021 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो वहां सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है, जबकि चांदी की चाल फिलहाल कुछ धीमी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना चांदी तेज अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज सोने चांदी के वायदा भाव की शुरुआत तेजी के साथ हुई। Comex पर सोना 3,416.60 डॉलर प्रति औंस के भाव पर खुला। पिछला क्लोजिंग प्राइस 3,399.80 डॉलर प्रति औंस था। खबर लिखे जाने के समय यह 7.10 डॉलर की तेजी के साथ 3,406.90 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के वायदा भाव ने इस साल 3,509.90 डॉलर के भाव पर ऑल टाइम हाई छू लिया है। Comex पर चांदी के वायदा भाव 37.09 डॉलर के भाव पर खुले। पिछला क्लोजिंग प्राइस 36.92 डॉलर था। खबर लिखे जाने के समय यह 0.14 डॉलर की तेजी के साथ 37.07 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था।

सुस्ती से जूझ रहा ऑटो सेक्टर, फेस्टिव सीजन में मिल सकती है राहत की रफ्तार

मुंबई  जुलाई 2025 में भारत में कारों की मांग में हल्की सुस्ती देखने को मिली है। पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री इस महीने भी तेजी पकड़ने में नाकाम रही। लगातार दो महीनों की गिरावट के बाद जुलाई में थोक बिक्री में सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन खुदरा बिक्री यानी ग्राहकों को डिलीवरी अभी भी दबाव में रही। देश की प्रमुख सात कार कंपनियों ने मिलकर जुलाई में लगभग 3,29,113 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो घरेलू बाजार का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें से चार कंपनियों की बिक्री या तो स्थिर रही या घट गई। भारी बारिश और कमजोर ग्राहक भावना ने बढ़ाई मुश्किलें जुलाई में ऑटो डीलरों ने बताया कि तेज बारिश और बाजार में नकदी की कमी के कारण कारों की बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया धीमी रही। कई कंपनियों द्वारा छूट और ऑफर के बावजूद ग्राहक खरीदारी से बचते रहे। इस वजह से डीलरों के पास औसतन 53 दिनों का इन्वेंटरी स्टॉक बना रहा, जो सामान्य से अधिक है। मारुति सुजुकी की बिक्री स्थिर, उम्मीदों में बढ़ोतरी देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने जुलाई में 1,37,776 यूनिट्स डीलरों को भेजे, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग स्थिर हैं। जून में कंपनी की बिक्री पिछले 18 महीनों में सबसे कमजोर थी, इसलिए जुलाई की स्थिरता को राहत माना जा रहा है। कंपनी के बिक्री प्रमुख पार्थो बनर्जी ने बताया कि Wagon R की मांग में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है और आने वाले त्योहारों का सीजन इस कार की बिक्री को और बढ़ावा देगा। मारुति के मिनी और कॉम्पैक्ट सेगमेंट में जनवरी के बाद पहली बार तेजी देखी गई है, जो सकारात्मक संकेत है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने SUV सेगमेंट में बढ़त बनाई एसयूवी सेगमेंट में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी ने जुलाई में लगभग 50,000 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है।

‘भारत के पास विकल्प हैं, घाटा अमेरिका को होगा’ — रूस से तेल पर एक्सपर्ट्स की दो टूक

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने पर भारी जुर्माना लगाने का ऐलान किया है। इसके बाद भारत ने साफ किया कि वह किसी दबाव में नहीं आएगा। हालांकि, भारत किसी कारणवश रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा। इसका असर भारत से ज्यादा अमेरिका पर पड़ेगा। क्योंकि, अमेरिका दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा कहते हैं, अमेरिका से रूस के तेल खरीदने पर जुर्माने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो खुद अमेरिका अछूता नहीं रहेगा। वहां भी तेल के दाम बढ़ेंगे। साथ ही मंहगाई बढ़ेगी। भारत पर भी इसका असर पड़ेगा पर अभी उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखने की बात कही है। पेट्रोलियम क्षेत्र के जानकार मानते हैं, रूस पर पूरी तरह कच्चे तेल की खरीद बंद करना आसान नहीं है। क्योंकि, सभी देश अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेते हैं। किसी दबाव या रूस का कच्चा तेल महंगा होने पर आपूर्ति बंद होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। मांग और आपूर्ति में अंतर की वजह से कच्चे तेल के दाम सौ से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते है। रोज लाखों बैरल निर्यात रूस रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात करता है। भारत अपनी जरूरत का 33 से 40% तक तेल रूस से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। क्योंकि, भारत कच्चे तेल के मामले में अमेरिका के बाद तीसरा बड़ा आयातक है। भारत के पास विकल्प भारत करीब तीन दर्जन से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में दूसरे देश से इस तेल की आपूर्ति की जा सकती है पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोलियम कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है कि कंपनियां इस भार को सीधा उपभोक्ताओं पर डाल देंगी। रूस से जमकर तेल आयात भारत ने फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद रूसी तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ उठाते हुए सस्ता तेल खरीदना शुरू किया। मई 2025 में भारत ने रूस से 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का करीब 38% है। भारत खरीदता रहेगा रूस से तेल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को दरकिनार करते हुए भारतीय तेल कंपनियां रूस से तेल खरीदेंगी। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह दावा किया। वहीं, इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि मैंने सुना है कि भारत ने रूस से तेल लेना बंद कर दिया है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह अच्छा फैसला है, लेकिन इस मामले में क्या हो रहा है मुझे इसकी जानकारी नहीं है। भारत सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि तेल खरीद के लिए भारत ने रूस के साथ लंबे समय के लिए करार किया है। ऐसे में एक रात में तेल की खरीदारी बंद हो जाए,यह संभव नहीं है। अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। अधिकारियों ने कहा, रूस से तेल खरीदने के लिए भारत सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकार ने रूस से तेल नहीं खरीदने के लिए भारतीय कंपनियों को कोई दिशा- निर्देश नहीं दिया है।