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4 लाख रुपये में मिलेगा दुनिया का पहला बिना ड्राइवर वाला ऑटो, जानें क्या है खासियत

नई दिल्ली भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में आज एक बड़ा इतिहास रच दिया गया है। ओमेगा सीकी मोबिलिटी (OSM) ने दुनिया का पहला ऑटोनॉमस (बिना ड्राइवर वाला) इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ‘स्वयंगति’ लॉन्च कर दिया है। इसकी कीमत सिर्फ 4 लाख रुपये से शुरू होती है। ये व्हीकल अब कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। ‘स्वयंगति’ को OSM के इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म और AI-आधारित ऑटोनॉमी सिस्टम पर तैयार किया गया है। यह शॉर्ट-डिस्टेंस ट्रांसपोर्ट जैसे एयरपोर्ट, स्मार्ट कैंपस, इंडस्ट्रियल पार्क, गेटेड कम्युनिटी और भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में बिना ड्राइवर के आराम से चल सकेगा। वाहन को पहले से मैपिंग करके सेट किया जाता है, ताकि वह तय किए गए रास्ते पर सुरक्षित और सुचारू रूप से यात्रा करा सके। 2025 की McKinsey रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ऑटोनॉमस वाहन बाजार 2030 तक 620 बिलियन डॉलर से अधिक का हो जाएगा। ऐसे में ‘स्वयंगति’ भारत का पहला ऐसा प्रोडक्ट है, जो इस तेजी से बढ़ते ट्रेंड को मैच नहीं, बल्कि लीड करेगा। भारत जैसे देश में जहां ट्रैफिक और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सबसे बड़ी चुनौती है, वहां यह तकनीक सुरक्षित और किफायती समाधान लेकर आई है। OSM के फाउंडर और चेयरमैन उदय नारंग ने कहा कि स्वयंगति का लॉन्च सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि भारत के ट्रांसपोर्टेशन भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। अब ऑटोनॉमस व्हीकल कोई सपना नहीं, बल्कि आज की जरूरत है। यह साबित करता है कि AI और LiDAR जैसी तकनीकें भारत में देश के लिए और सस्ती कीमत पर बनाई जा सकती हैं। OSM के चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर विवेक धवन ने कहा कि हमारा मकसद ऑटोनॉमी को डेमोक्रेटाइज करना है। स्वयंगति ने दिखाया है कि EV इंडस्ट्री में इंटेलिजेंट सिस्टम्स को अब रोजमर्रा की मोबिलिटी में लाया जा सकता है। स्वयंगति ने हाल ही में 3 किमी की ऑटोनॉमस रूट टेस्टिंग पूरी की, जिसमें 7 स्टॉप, रीयल-टाइम ऑब्स्टेकल डिटेक्शन और पैसेंजर सेफ्टी शामिल थी। यह सब बिना किसी ड्राइवर के पूरा किया गया। अब कंपनी Phase-2 में इसे कमर्शियल रोलआउट के लिए तैयार कर रही है। 4 लाख की कीमत और ‘मेड-इन-इंडिया’ टैग के साथ स्वयंगति न सिर्फ ऑटो इंडस्ट्री का फ्यूचर बदलने वाला है, बल्कि यह भारत को दुनिया के ऑटोनॉमस मोबिलिटी लीडर्स में शामिल कर सकता है।  

सोने-चांदी के रेट में रिकॉर्ड तेजी, Gold 1.16 लाख के पार, silver भी महंगी हुई — जानें ताज़ा रेट

मुंबई  त्योहारी सीजन में सोना-चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं. भारतीय सर्राफा बाजार में इस कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन आज (मंगलवार), 30 सितंबर 2025 को सोना-चांदी के भाव में फिर बढ़ोतरी देखने को मिली है. सोने की कीमत 1 लाख 16 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई है. वहीं, चांदी का रेट 1 लाख 45 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (India Bullion And Jewellers Association) के मुताबिक,सोमवार, 29 सितंबर की शाम को 916 शुद्धता यानी 22 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Rate) 105756 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो आज, 30 सितंबर की सुबह बढ़ोतरी के साथ 107083 रुपये तक आ गया है. इसी तरह शुद्धता के आधार पर सोना महंगा हुआ है और चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी किए गए रेट पूरे देश में सर्वमान्य हैं लेकिन इसकी कीमतों में जीएसटी शामिल नहीं होती है. बता दें कि गहने खरीदते समय सोने या चांदी के दाम टैक्स समेत होने की वजह से ज्यादा होते हैं. Gold Price Today 30 September: सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट   शुद्धता सोमवार शाम का रेट मंगलवार सुबह का रेट कितना सस्ता या महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 115454 116903 1449 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 114992 116435 1443 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 105756 107083 1327 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 86591  87677 1086 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 67541 68388 847 रुपये महंगा चांदी (प्रति 1 किलो) 999  144387 145060 673 रुपये महंगी सोमवार को क्या रहा सोना-चांदी का भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (India Bullion And Jewellers Association) के मुताबिक, सोमवार को भी सोने के दामों में बढ़ोतरी देखी गई थी और चांदी के भाव भी बढ़ गए थे. IBJA के अनुसार, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने का रेट 115292 रुपये था जो शाम के समय 115454 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था. वहीं, चांदी की कीमत 144100 से बढ़कर 144387 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. ibja की ओर से केंद्रीय सरकार द्वारा द्वारा घोषित रेट शनिवार और रविवार के साथ-साथ केंद्र सरकार की छुट्टियों पर जारी नहीं किए जाते. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. ये सभी रेट टैक्स और मेकिंग चार्ज के पहले के हैं.

अब आम आदमी के लिए और भी खुशखबरी! GST रेट कट के बाद सरकार कर सकती है ये बड़ा कदम

रॉयटर्स जीएसटी में कटौती के बाद आम आदमी को एक और बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खबर है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक सरप्राइज रेट कट कर सकता है। यानी अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में आम आदमी पर से ईएमआई का बोझ कम हो सकता है। बता दें कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति बैठक में बुधवार को रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखने की संभावना है। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कमजोर निवेश, वैश्विक व्यापार दबाव और नरम महंगाई को देखते हुए RBI सरप्राइज रेट कट का विकल्प भी चुन सकता है। बता दें कि RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि RBI अपनी प्रमुख नीति दर (रेपो रेट) को 5.50% पर बनाए रखेगा। लेकिन, अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी व्यापार और कमजो महंगाई दर के प्रभाव को देखते हुए दर में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या है डिटेल रॉयटर्स पोल के मुताबिक, करीब तीन-चौथाई अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकॉनॉमिक्स और एसबीआई जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने रेट कट की संभावना जताई है। उनका कहना है कि विकास दर पर दबाव और महंगाई की नरमी, कटौती के पक्ष में माहौल बना रही है। इस साल की शुरुआत से अब तक RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट की दरों में कटौती की है, लेकिन इसके बावजूद निजी निवेश कमजोर बना हुआ है। अगस्त पॉलिसी मीटिंग में RBI ने दरों को स्थिर रखते हुए 'न्यूट्रल स्टांस' बनाए रखा था, जिसके बाद वित्तीय हालात और सख्त हो गए। एनालिस्ट की राय सिटी इकॉनॉमिस्ट्स ने लिखा कि अक्टूबर की बैठक फिर से 'लाइव' हो गई है। RBI एक 'इंश्योरेंस रेट कट' का विकल्प चुन सकता है ताकि बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके, या फिर डोविश पॉज लेकर संकेत दे सकता है कि आने वाले समय में कार्रवाई की जाएगी। भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8% की बेहतर-से-उम्मीद ग्रोथ दर्ज की। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा महंगाई के समायोजन के बाद वास्तविक मजबूती से अधिक दिख रहा है। बता दें कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए आयकर राहत और जीएसटी दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन बढ़े हुए टैरिफ और रुपये की कमजोरी ने आर्थिक दृष्टिकोण को अनिश्चित बना दिया है। अमेरिका के साथ व्यापार तनाव बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका गहराई है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है और वीजा फीस बढ़ाई है, जिससे सेवाओं के व्यापार पर और सख्त कदम उठाए जाने की चिंताएं बढ़ गई हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिजर्व बैंक पूरी स्थिति का असर देखने का इंतजार करने की बजाय पहले ही कदम उठा सकता है। कैपिटल इकॉनॉमिक्स के मुताबिक, “अमेरिकी टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ को झटका लग सकता है। वहीं, महंगाई का स्तर अभी भी नियंत्रित है। ऐसे में RBI एक बार फिर से रेट कट चक्र शुरू कर सकता है।” संस्था ने अनुमान जताया है कि RBI अगले हफ्ते दरों में कटौती कर सकता है और दिसंबर में एक और कटौती संभव है।  

टैरिफ की धमक के बीच शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, इन 10 स्टॉक्स ने बनाई रॉकेट जैसी छलांग

मुंबई  शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत मंगलमय हुई. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गिरावट से उबरते हुए तेज रफ्तार से भागते हुए नजर आए. खास बात ये है कि बाजार में ये तेजी अमेरिका की ओर से लगातार किए जा रहे टैरिफ ऐलान के बावजूद देखने को मिल रही है, जिनसे भारतीय कारोबार भी प्रभावित हो सकता है. इसमें ताजा फार्मा और बाहरी फिल्मों पर 100% टैरिफ का ऐलान शामिल है. लेकिन ये शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक टिकी नहीं रह सकी और घंटेभर बाद दोनों इंडेक्स ने ये तेजी गंवा दी. मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 80,364.94 की तुलना में उछलकर ओपन हुआ और झटके में करीब 300 अंक की छलांग लगा गया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने अपने पिछले बंद 24,634.90 के मुकाबले तेज बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में टाटा ग्रुप के टाइटन से लेकर टीसीएस तक के शेयर ग्रीन जोन में कारोबार करते हुए नजर आए. लेकिन सुबह 10.15 बजे पर दोनों इंडेक्स कभी मामूली गिरावट के साथ रेड जोन में, तो कभी मामूली बढ़त लेकर ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आने लगे.  सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स बढ़त के सात 80,541.77 पर ओपन हुआ और फिर इसकी रफ्तार तेज हो गई और ये करीब 300 अंक से ज्यादा चढ़कर 80,677.82 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया. वहीं दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी इंडेक्स 24,691.95 पर ओपनिंग करने के बाद अचानक उछलकर 24,720.40 के लेवल पर पहुंच गया  शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 430 कंपनियों के शेयर अपने पिछले बंद के मुकाबले बढ़त के साथ ग्रीन जोन में खुले, तो 256 शेयरों की ओपनिंग गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई, वहीं 76 शेयर फ्लैट खुले. सबसे तेज भागने वाले शेयरों में Titan Company, Asian Paints, Cipla, Tata Consumer आगे रहे, तो वहीं गिरावट वाले शेयरों की बात करें, तो SBI Life Insurance, Tata Motors, SBI, Tech Mahindra और Dr Reddy's Labs रेड जोन में ओपन हुए.  सबसे तेज भागने वाले ये 10 स्टॉक  मंगलवार को बाजार में तेजी के बीच सबसे तेज भागने वाले शेयरों की बात करें, तो इस लिस्ट में बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल पावरग्रिड शेयर (1.40%), एशियन पेंट्स शेयर (1.20%), बीईएल शेयर (1.15%) और टाइटन भी करीब 1 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा शुरुआती कारोबार में ओला इलेक्ट्रिक (3.40%), फर्स्ट क्राई शेयर (2.55%), कल्याण ज्वेलर्स (2.90%), बैंक ऑफ इंडिया (2.20%), डेल्हीवेरी शेयर (2.05%) और महाराष्ट्र बैंक भी 2 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार करते हुए नजर आए. 

इतिहास रच गया Maruti, फोर्ड और फॉक्सवैगन को पछाड़कर पहुंचा टॉप-10 ऑटो कंपनियों की लिस्ट में

नईदिल्ली  भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने ग्लोबल ऑटोमोबाइल मार्केट में एक नई पहचान बना ली है. कंपनी अब दुनिया की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कार कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है. ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मारुति सुज़ुकी 8वें स्थान पर पहुंच गई है और सबसे तगड़े मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ फोर्ड, जनरल मोटर्स और फॉक्सवैगन जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है. वही मारुति जिसे आपने गली-मोहल्ले में खड़े अल्टो, वैगनआर और स्विफ्ट के रूप में देखा है, वही मारुति अब फोर्ड, जनरल मोटर्स और यहां तक कि फॉक्सवैगन जैसे बिग शॉट्स को पीछे छोड़ चुकी है. ताजा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 57.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो चुका है. यह उपलब्धि भारत की ऑटो इंडस्ट्री के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं है. अब सवाल उठता है कि मारुति की यह छलांग संभव कैसे हुई? इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है हाल ही में लागू हुई संशोधित जीएसटी स्ट्रक्चर. छोटे और बजट-फ्रेंडली कारों, जैसे अल्टो, एस-प्रेसो और वैगनआर पर टैक्स में राहत मिलने से ये कारें और सस्ती हुईं हैं. इसका असर सीधे बुकिंग पर पड़ा और ग्राहकों की कतारें लंबी हो गईं. विदेशी निवेशकों की नज़र भी एक बार फिर भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट पर गई, जहां मारुति का ब्रांड भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है. अगर ग्लोबल लेवल की तस्वीर देखें तो टेस्ला अभी भी बादशाह है. जिसका मार्केट कैप 1.4 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद टोयोटा (314 बिलियन डॉलर) और चीन की BYD (133 बिलियन डॉलर) का नंबर आता है. फेरारी (92.7 बिलियन डॉलर), बीएमडब्ल्यू (61.3 बिलियन डॉलर) और मर्सिडीज़-बेंज (59.8 बिलियन डॉलर) भी टॉप लिस्ट में शामिल हैं. लेकिन मारुति सुज़ुकी ने अपने 57.6 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के दम पर जनरल मोटर्स (57.1 बिलियन डॉलर), वोक्सवैगन (55.7 बिलियन डॉलर) और फोर्ड (46.3 बिलियन डॉलर) जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है. दुनिया की टॉप 10 ऑटोमोबाइल कंपनियां   रैंक  कंपनी मार्केट कैप (अमेरिकी डॉलर में) 1  टेस्ला 1.4 ट्रिलियन 2 टोयोटा  314 बिलियन 3  बीवाईडी  133 बिलियन 4   फेरारी 92.7 बिलियन 5  बीएमडब्ल्यू   61.3 बिलियन 6 मर्सिडीज़-बेंज  59.8 बिलियन 7 होंडा मोटर  59  बिलियन  8  मारुति सुज़ुकी   57.6 बिलियन 9  जनरल मोटर्स 57.1 बिलियन 10   फॉक्सवैगन   55.7 बिलियन 11 फोर्ड   46.3 बिलियन पैरेंट कंपनी Suzuki भी हुई मारुति के पीछे देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने अपने ही पैरेंट ब्रांड सुज़ुकी मोटर कॉरपोरेशन, जापान को भी पीछे छोड़ दिया है. जिसका वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 29 बिलियन डॉलर है. ग्लोबल रैंकिंग में अब मारुति, होंडा मोटर (59 बिलियन डॉलर) से ठीक नीचे स्थित है. यानी जल्द ही मारुति सुजुकी होंडा को भी पीछे छोड़ सकती है.  

ऑटो सेक्टर में मंदी के बीच पाकिस्तान ने खोला सेकेंड हैंड गाड़ियों का रास्ता, कई कंपनियां कर रहीं पलायन

नई दिल्ली पाकिस्तान की माली हालत खराब है. विदेशी कर्ज़ का बोझ बढ़ा हुआ है, डॉलर की तंगी है और दूसरी तरफ़ IMF की शर्तें सामने रखी हुई हैं. ऐसे में पाकिस्तान की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री भी इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है. देश की माली स्थिति, IMF का दबाव और इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने एक ऐसा फ़ैसला लिया है, जिसने पाक ऑटो इंडस्ट्री को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला दिया है.  हाल ही में हुए इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी (ECC) ने पुरानी यानी सेकेंड हैंड (Used Cars) गाड़ियों के आयात को मंजूरी दे दी है. सरकार इसे सुधार और आज़ादी की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन कार मैन्युफैक्चरर्स और ऑटो पार्ट्स मेकर्स कह रहे हैं कि यह फ़ैसला उनकी जड़ों को खोद देगा. वहीं, पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PAMA) ने चेतावनी दी है कि देश की पिछड़ी और शोषणकारी नीतियों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है और कुछ अन्य दिग्गज कंपनियाँ बाज़ार छोड़ सकती हैं. पाकिस्तान सरकार का फैसला वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब की अध्यक्षता में ने न्यूयॉर्क से होने वाली वर्चुअली ECC की बैठक में तय हुआ कि, पहले चरण में सिर्फ़ 5 साल तक की पुरानी गाड़ियाँ आगामी 30 जून 2026 तक आयात की जा सकेंगी. इस पर 40 फ़ीसदी रेगुलेटरी ड्यूटी भी लगेगी, जो हर साल 10-10 प्वाइंट घटती जाएगी और 2029-30 तक ख़त्म हो जाएगी. बाद में पुरानी गाड़ियों पर उम्र की कोई पाबंदी नहीं रहेगी. ऑटो इंडस्ट्री की चिंता अरब न्यूज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा, होंडा, सुज़ुकी, हुंडई और किआ जैसे बड़े ब्रांड्स का कहना है कि ये फ़ैसला उनकी मैन्युफैक्चरिंग को चौपट कर देगा. पाकिस्तान ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PAMA) के डायरेक्टर जनरल अब्दुल वहीद खान ने साफ कहा “40 फ़ीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाकर भी मार्केट पुरानी यानी यूज्ड कारों से भर जाएगा और लोकल मैन्युफैक्चरिंग तबाह हो जाएगी.” इसी तरह पाकिस्तान ऑटोमोबाइल पार्ट्स एंड एक्सेसरीज़ मैन्युफैक्चरर्स (PAAPAM) ने भी चिंता जताई है. संगठन के वाइस चेयरमैन शेहरयार क़ादिर ने मीडिया से कहा कि, इससे 1,200 लोकल कंपनियाँ बंद होने के कगार पर पहुँच जाएँगी, जो स्टील, प्लास्टिक, रबर, कॉपर और एल्युमिनियम जैसी पार्ट्स सप्लाई करती हैं. उनके मुताबिक़ 18 लाख से ज़्यादा लोगों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा. IMF का दबाव और डॉलर की तंगी यह फ़ैसला IMF मिशन के पाकिस्तान पहुँचने से ठीक पहले लिया गया है. IMF ने अपने 7 अरब डॉलर के लोन प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान से व्यापार को खोलने और यूज्ड गाड़ियों पर रोक हटाने की शर्त रखी थी. विश्लेषकों का मानना है कि सेकेंड हैंड गाड़ियों का आयात पाकिस्तान के पहले से ही कमज़ोर विदेशी मुद्रा भंडार (जो अभी महज़ 14 अरब डॉलर है) पर और बोझ डालेगा. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टॉपलाइन सिक्योरिटीज़ के विश्लेषक शंकर तलरेजा के अनुसार, पहले छोटे हैचबैक मॉडल्स की आयात ही ज़्यादा होती थी, लेकिन अब रेगुलेटरी ड्यूटी में साल-दर-साल कमी के साथ मिड-एंड कार्स का आयात भी बढ़ सकता है. लोकल इंडस्ट्री के लिए चुनौती कार निर्माताओं का कहना है कि यह क़दम उनके लिए सीधे घाटे का सौदा है. जैसा कि PAMA के वहीद खान ने कहा “एक गाड़ी का आयात मतलब प्रोडक्शन लाइन पर एक गाड़ी का नुकसान. आयातित गाड़ियाँ और लोकल गाड़ियाँ, दोनों एक-दूसरे की सीधी प्रतिद्वंद्वी हैं.” निचोड़ यह है कि पाकिस्तान की सरकार IMF की शर्तें पूरी करने के लिए लोकल इंडस्ट्री को बलि का बकरा बना रही है. लेकिन सवाल यही है कि इससे पाकिस्तानी कार इंडस्ट्री बचेगी कैसे, और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का क्या होगा? पाकिस्तान छोड़ भाग रही हैं कंपनियां: PAMA की चेतावनी हाल ही में जापानी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी यामाहा ने पाकिस्तान में अपने ऑपरेशन बंद करने का ऐलान किया था. अब पाकिस्तान ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि देश में “पिछड़े और शोषणकारी” नीतियों के चलते कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ पाकिस्तान छोड़ सकती हैं.  पाकिस्तान टुड में छपी एक रिपोर्ट में एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अब्दुल वहीद खान के हवाले से कहा गया है कि, पाकिस्तान में ऑटो सेक्टर में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) बेहद कम रहा है, और शेल, उबर, केरीम, माइक्रोसॉफ्ट और टेलिनोर जैसी बड़ी कंपनियाँ पहले ही पाकिस्तान का बाज़ार छोड़ चुकी हैं. यामाहा की हाल ही में पाकिस्तान से निकासी पर चर्चा करते हुए खान ने स्थानीय मीडिया को दिए अपने बयान में बताया कि, कंपनी का यह निर्णय उस नीति के कारण हुआ, जिसमें ऑटो निर्माताओं को कच्चे माल और कंपोनेंट के आयात के लिए अनिवार्य इंपोर्ट टार्गेट पूरे करने होते थे. खान ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों से पूरी तरह कट चुकी है और संघर्ष कर रहे ऑटो सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है. यामाहा ने 2015 में पाकिस्तान में 100 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ वापसी की थी. कंपनी ने तकरीबन एक दशक पर पाकिस्तान में अपने वाहनों की असेंबलिंग और बिक्री की और तमाम रोजगार पैदा किए. लेकिन अब यामाहा ने बाजार छोड़ दिया है. बता दें कि, यामाहा दूसरी जापानी कंपनी होंडा के अलावा, पाकिस्तान में इंजन उत्पादन का लोकलाइजेशन करने वाली एकमात्र कंपनी थी.

क्रिकेट में जीत, बाजार में रफ्तार: टीम इंडिया की जीत से टॉप 10 शेयरों में जबरदस्त तेजी

मुंबई  एशिया कप 2025 में भारत की पाकिस्तान पर धमाकेदार जीत को भारतीय शेयर बाजार ने भी सलाम किया है. सुस्त शुरुआत के बाद अचानक सेंसेक्स-निफ्टी ने तेज रफ्तार पकड़ ली है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां 300 अंक से ज्यादा तेजी लेकर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी अपने पिछले बंद के मुकाबले मामूली बढ़त लेकर खुलने के बाद 100 अंक से ज्यादा उछलकर कारोबार कर रहा था. बाजार में आई इस तूफानी तेजी के बीच टाटा स्टील से लेकर टाइटन कंपनी तक के शेयर रफ्तार पकड़कर कारोबार कर रहे थे.  80700 के पार निकला सेंसेक्स बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 80,426.46 की तुलना में तेजी लेकर सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को 80,588.77 पर ओपन हुआ और कुछ देर सुस्ती के साथ कारोबार करने के बाद अचानक इसकी चाल बदल गई और ये 330 अंक से उछलकर 80,758.45 के लेवल पर कारोबार करने लगा. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी ने भी रफ्तार पकड़ ली और अपने पिछले बंद 24,654.70 से मुकाबले तेजी लेकर 24,728.55 पर ओपन होने के बाद 100 अंक से ज्यादा चढ़कर 24,765.30 पर ट्रेड करता हुआ नजर आया.  TATA समेत ये शेयर उछले  बाजार में तेजी के बीज शुरुआती कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा उछलने वाले शेयरों की बात करें, तो लार्जकैप कंपनियों में शामिल BEL (2.84%), Eternal (2.16%), SunPharma (2%), Titan (1.60%) और Tata Steel (1.30%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में Petronet (2.75%), Bandhan Bank (2.70%) और 360One (2.67%) की तेजी, जबकि स्मॉलकैप में Panorama (10.59%) और Jaykay Share (10%) की उछाल के साथ ट्रेड कर रहा था.  गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे ये स्टॉक   खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 में से 25 शेयर ग्रीन जोन में कारोबार कर रहे थे. इस बीच मिडकैप 279.12 अंक की उछाल, जबकि स्मॉलकैप 337.64 अंक की बढ़त में था. हालांकि, तमाम कंपनियों के शेयर बाजार में तेजी के बावजूद रेड जोन में भी नजर आए. सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों में Axis Bank (1.50%), JSL (4.10%), Dixon (3.50%) और Ola Electric (1.50%) रहे.  टीम इंडिया ने पाकिस्तान को हराया बता दें कि एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबले में रविवार को टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से शिकस्त कर ट्रॉफी अपने नाम की. भारत के धुरंधरों ने पाकिस्तानी टीम को धूल चटाते हुए 9वीं बार एशिया कप पर कब्जा जमाया. फाइनल मुकाबले में मिडिल ऑर्डर बैटर तिलक वर्मा ने बल्ले से कमाल दिखाया, तो वहीं कुलदीप यादव की गेंदबाजी के आगे पाकिस्तानी खिलाड़ी पस्त नजर आए. 

क्या आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं? जानिए कैसे हो सकती है आपकी आर्थिक मजबूती

मुंबई  भारत में क्रेडिट कार्ड का यूज तेजी से बढ़ रहा है. अपने फाइनेंशियल खर्चों को मैनेज करने के लिए लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते है. कई लोग तो एक से ज्‍यादा क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, लेकिन क्‍या 2 क्रेडिट कार्ड का यूज सही फैसला हो सकता है. आइए जानते हैं इसपर एक्‍सपर्ट क्‍या कहते हैं… कई एक्‍सपर्ट दो क्रेडिट कार्ड रखने को एक अच्‍छा फैसला मानते हैं, क्‍योंकि इससे खर्च को मैनेज किया जा सकता है. साथ ही रिवॉर्ड्स को ज्‍यादा से ज्‍यादा तक बढ़ाया जा सकता है. एक्‍सपर्ट इसे फाइनेंशियल कंडीशन को मैनेज करने का भी एक अच्‍छा तरीका मानते हैं. अब वो मुख्‍य तीन वजह जानते हैं, जिससे क्रेडिट कार्ड ज्‍यादा उपयोगी हो सकता है.  रिवॉर्ड और ज्‍यादा लाभ  2 क्रेडिट कार्ड होने से आप रणनीतिक रूप से हर कार्ड का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के खर्चों के लिए कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, एक कार्ड का इस्तेमाल किराने के सामान या रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए किया जा सकता है, जिन पर कैशबैक मिलता है, जबकि दूसरे कार्ड का इस्तेमाल ऑनलाइन शॉपिंग, यात्रा या अन्य कैटेगरी के लिए किया जा सकता है. बेहतर क्रेडिट स्‍कोर  अपने क्रेडिट स्‍कोर को दो कार्ड की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है. दो कार्डों को जिम्‍मेदारी से यूज करने पर आपका क्रेडिट यूज रेशियो कम हो सकता है और आप अपने बिल का फटाफट पेमेंट भी कर सकते हैं. इससे आपके क्रेडिट स्कोर को बनाए रखने या सुधारने में मदद मिल सकती है, जो भविष्य के लोन या वित्तीय योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है.  खर्च करने में लचीलापन बढ़ाना  दूसरा क्रेडिट कार्ड आपके प्राथमिक कार्ड के खो जाने, ब्लॉक हो जाने या अस्वीकृत हो जाने की स्थिति में बैकअप का काम करता है. यह आपको खर्चों को अलग-अलग करने की सुविधा भी देता है. एक कार्ड का इस्तेमाल रोजमर्रा के खर्चों के लिए और दूसरे का इस्तेमाल हाई प्राइस या ऑनलाइन लेनदेन के लिए, जिससे धोखाधड़ी का जोखिम कम होगा है और खर्चों पर नजर रखना आसान होगा.  हालांकि दो क्रेडिट कार्ड होने से आपको रिवॉर्ड, लचीलापन और बेहतर क्रेडिट मैनेजमेंट मिल सकता है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है. ऊंची ब्याज दरें, छिपे हुए शुल्क और कर्ज का रिस्‍क वास्तविक परेंशानी है. वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दूसरे कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले इसके फायदे और नुकसान पर ध्यान से विचार करें और किसी एक्‍सपर्ट से सलाह लें. 

₹2.99 लाख में BMW की नई बाइक! सिर्फ 310 खुशकिस्मत लोग ही खरीद सकेंगे

मुंबई  बीएमडब्ल्यू मोटोराड ने भारत में अपनी लोकप्रिय एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक BMW G 310 RR का लिमिटेड एडिशन लॉन्च किया है. यह लॉन्चिंग कंपनी के लिए बेहद खास मौके पर हुई है क्योंकि बीएमडब्ल्यू ने भारत में इस बाइक की 10,000 यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है. ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में यह उपलब्धि छोटी नहीं मानी जाती, खासकर तब जब कम्यूटर सेग्मेंट से पटे बाजार में कोई प्रीमियम ब्रांड ये आंकड़ा छुए और अपनी पकड़ बनाए रखे. बता दें कि, BMW G 310 RR भारतीय बाजार में कंपनी के पोर्टफोलियो की सबसे सस्ती बाइक है. इसके लिमिटेड एडिशन मॉडल कीमत 2.99 लाख रुपये रखी गई है. यह बाइक आज से यानी 26 सितंबर 2025 से सभी बीएमडब्ल्यू मोटोराड इंडिया डीलरशिप्स पर उपलब्ध है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका एक्सक्लूसिव डिज़ाइन है. कैसी है बाइक?  लिमिटेड एडिशन में पूरे बॉडी किट पर खास डेकल्स दिए गए हैं, जिनमें व्हील रिम्स तक को शामिल किया गया है. इसके अलावा फ्यूल टैंक पर '1/310' की खास बैजिंग भी है, जो इसे कलेक्टर्स आइटम जैसा अहसास दिलाती है. एक और ख़ास बात ये है कि, कंपनी इस बाइक के केवल 310 यूनिट्स ही बनाएगी और यह दो रंगों, कॉस्मिक ब्लैक और पोलर व्हाइट कलर में उपलब्ध होगी. यानी केवल 310 लोग ही ये स्पेशल बाइक खरीद सकेंगे.  इंजन, पावर और परफॉर्मेंस टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो लिमिटेड एडिशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह स्टैंडर्ड वर्ज़न की तरह ही 312 सीसी वॉटर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर, फोर-स्ट्रोक इंजन से लैस है. जो 34 बीएचपी की पावर और 27 न्यूटन मीटर (Nm) का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स से जोड़ा गया है. मिलते हैं 4 राइडिंग मोड इस बाइक में चार राइडिंग मोड्स दिए गए हैं, जिसमें ट्रैक, अर्बन, स्पोर्ट और रेन मोड शामिल हैं. ट्रैक मोड में ABS को लेट ब्रेकिंग के लिए ट्यून किया गया है, अर्बन मोड शहर के ट्रैफिक में बैलेंस्ड एक्सेलेरेशन और ब्रेकिंग देता है, स्पोर्ट मोड फुल परफॉर्मेंस और मैक्स एक्सेलेरेशन ऑफर करता है. जबकि रेन मोड गीली सड़कों पर बेहतर स्टेबिलिटी और कंट्रोल प्रदान करता है. फीचर्स भी हैं ख़ास फीचर्स की लिस्ट भी काफी प्रीमियम है. इसमें राइड-बाय-वायर सिस्टम (E-Gas), रेस-ट्यून एंटी-हॉपिंग क्लच और टू-चैनल ABS दिया गया है, जो रियर-व्हील लिफ्ट-ऑफ प्रोटेक्शन के साथ आता है. बाइक में 5-इंच TFT डिस्प्ले दिया गया है, जो सभी जरूरी जानकारी जैसे राइडिंग मोड्स, स्पीड और टेम्परेचर दिखाता है. बाइक का हार्डवेयर सस्पेंशन सेटअप में आगे अपसाइड-डाउन (USD) फोर्क और पीछे डायरेक्ट माउंटेड स्प्रिंग स्ट्रट वाला एल्यूमिनियम स्विंग आर्म मिलता है. ग्रिप और कंट्रोल के लिए स्टैंडर्ड मिशलिन पायलट स्ट्रीट रेडियल टायर्स दिए गए हैं. ग्राहकों की सुविधा के लिए कंपनी आकर्षक फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस भी ऑफर कर रही है, जिसमें बाइक के साथ-साथ राइडर गियर और एक्सेसरीज़ भी शामिल हैं. इस बाइक पर कंपनी 3 साल की अनलिमिटेड किलोमीटर वारंटी दे रही है.  

ऑपरेशन सिंदूर से घबराया पाकिस्तान, लश्कर का ट्रेनिंग कैंप अफगान सीमा पर पहुंचाया

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का नया ट्रेनिंग सेंटर बन रहा है. यह खबर पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. यह सेंटर आतंकवाद को बढ़ावा दे सकता है. नया ट्रेनिंग सेंटर: मरकज जिहाद-ए-अकसा यह सेंटर लोअर डिर जिले के कुम्बन मैदान इलाके में बनाया जा रहा है. यह अफगान सीमा से करीब 47 किलोमीटर दूर है. 4643 वर्ग फुट के प्लॉट पर यह बन रहा है, जो LeT के हाल ही में बने जामिया अहले सुन्नाह मस्जिद के बगल में है.  निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ, जो ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने बाद था. यह दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर भारत की तरफ से था, जिसमें LeT के कई ठिकाने तबाह हो गए थे. मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य     ट्रेनिंग प्रोग्राम: यहां दो मुख्य कोर्स चलेंगे – दौरा-ए-खास और दौरा-ए-लश्कर. ये आतंकियों को हथियार चलाना, हमले करना और जिहाद की ट्रेनिंग देंगे.     पुराने सेंटर की जगह: यह LeT के जान-ए-फिदाई फिदायीन यूनिट की जगह लेगा. यह यूनिट पहले भींबर-बरनाला के मरकज अहले हदीस में था, जो ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने नष्ट कर दिया था.     भर्ती और कट्टरवाद: यहां नए लोगों की भर्ती होगी, उन्हें कट्टर बनाया जाएगा. बड़े ग्रुप में ट्रेनिंग दी जाएगी. नेतृत्व और संचालन     कमांड: नसर जावेद को कमान सौंपी गई है. वह 2006 के हैदराबाद बम धमाके का सह-मास्टरमाइंड था. 2004 से 2015 तक वह PoK के दुलाई कैंप चला चुका है.     जिहाद की शिक्षा: मुहम्मद यासिन (उर्फ बिलाल भाई) जिहाद की धार्मिक शिक्षा देगा.     हथियार ट्रेनिंग: अनस उल्लाह खान हथियारों की ऑपरेशनल ट्रेनिंग संभालेगा. उसने 2016 में LeT के गढ़ी हबीबुल्लाह कैंप में ट्रेनिंग ली थी. रणनीतिक महत्व     स्थान बदलना: LeT ने PoK और पंजाब के पुराने ठिकानों को छोड़कर खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट किया है. इसका मकसद भविष्य में भारतीय हमलों से बचना है.     दूसरे ग्रुप्स से तालमेल: यह सेंटर हिजबुल मुजाहिदीन के HM-313 कैंप से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है. इससे दोनों ग्रुप्स के बीच समन्वय या रणनीतिक सहयोग की आशंका है.     पाकिस्तानी सेना की भूमिका: जून 2025 में पाकिस्तानी सेना ने क्लीनअप ड्राइव चलाई, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सदस्य मारे गए. इससे इलाके को LeT के लिए साफ कर दिया गया लगता है. इलाके की सुरक्षा चिंताएं     आतंकी गतिविधियां: यह इलाका हमेशा से भारत-विरोधी आतंकवाद का केंद्र रहा है. यहां अल बद्र और TTP जैसे ग्रुप्स सक्रिय हैं.     नागरिकों की हानि: जून 2025 से पाकिस्तानी सेना और एयर फोर्स के हवाई हमलों में 40 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं. इससे काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं.     पाकिस्तान की रणनीति: पाकिस्तान अच्छे आतंकवाद को बढ़ावा देता है और बुरे आतंकवाद को खत्म करता है. यह बात मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने खुद स्वीकार की है. इससे पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता पर शक होता है. यह नया सेंटर भारत और पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है. LeT जैसे ग्रुप्स की गतिविधियां बढ़ने से शांति भंग हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर नजर रखनी चाहिए. भारत को अपनी सुरक्षा मजबूत करनी होगी ताकि ऐसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.