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दिग्विजय सिंह की पोस्ट पर घमासान, मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की एक फेसबुक पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दिग्विजय ने अपने पोस्ट में दो तस्वीरें शेयर की हैं. पहली तस्वीर में कांवड़ यात्रा को सड़क पर दिखाया गया है, जबकि दूसरी तस्वीर में नमाज अदा करते हुए लोग नजर आ रहे हैं. पोस्ट में सवाल उठाया गया है, 'एक देश, दो कानून?' इस पोस्ट पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मध्यप्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह को 'मौलाना' करार देते हुए कहा कि वे केवल सनातन धर्म का विरोध करते हैं. आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह कांवड़ यात्रा जैसे पवित्र पर्व को विवादास्पद बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जाकिर नाइक का महिमामंडन करने वाले, आतंकवादियों को संरक्षण देने वाले, सेना के ऑपरेशन पर विवाद खड़ा करने वाले, पाकिस्तान परस्ती की बात करने वाले, तुष्टिकरण को आगे बढ़कर राजनीति करने वाले दिग्विजय सिंह से और कुछ अपेक्षा नहीं है. विश्वास सारंग ने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा हिंदू धर्म के अनुयायियों, साधु-संतों और हिंदू त्योहारों का अपमान करते आए हैं, इसलिए उन्हें 'मौलाना दिग्विजय सिंह' कहा जाता है. मोहन सरकार के मंत्री ने आगे कहा, ''भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को इजाद करके दिग्विजय सिंह ने ही सनातन को इस दुनिया में बदनाम करने का काम किया है. मैं दिग्विजय सिंह से कहना चाहता हूं कि हिंदू और सनातन धर्म के किसी भी त्यौहार पर इस तरीके की टिप्पणी होगी तो यह सहन नहीं किया जाएगा.'' 

AIMIM से चुनी गई MP की एकमात्र हिंदू महिला पार्षद ने दिया इस्तीफा, पति ने लगाए थे धर्म परिवर्तन कराने के आरोप

खरगोन  मध्य प्रदेश खरगोन नगर पालिका परिषद में वार्ड क्रमांक 2 की एआईएमआईएम की एकमात्र गैर मुस्लिम पार्षद ने धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। खरगोन की वार्ड क्रमांक 2 से एआईएमआईएम के टिकट से चुनाव जीतने वाली पार्षद अरुण उपाध्याय ने राष्ट्रीय कार्यालय हैदराबाद को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि वह निजी कारणों के चलते प्रदेश कोर कमेटी के पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रही हैं। फंड लेकर धर्म परिवर्तन का आरोप उन्होंने आज पत्रकारों से इस्तीफा के कारण पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पति श्यामलाल उपाध्याय 2022 में चुनाव जीतने के बाद से पार्षद पद छोड़ने का दबाब बना रहे थे। पद छोड़ने से मना करने के बाद उन्होंने विगत दो वर्षों से उन पर फंड लेकर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगा कर विभिन्न फोरमों पर शिकायत भी की है। उन्होंने बताया कि वह जान से मारने की भी धमकी देते हैं, इसलिए अलग होकर उनके विरुद्ध तलाक का केस भी दायर किया है। इसके अलावा उन्होंने 15 दिन पहले पति के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से शिकायत भी की है। पत्रकार वार्ता में दी जानकारी उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने स्वयं धर्म परिवर्तन किया है, और ना ही वे फंड लेकर लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि पति से तकरार का कारण पार्टी थी, इसलिए वे इसे छोड़ रही हैं, लेकिन पार्षद के रूप में काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि 'मैंने पति से इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए भी कहा है।' AIMIM की पहली हिंदू महिला पार्षद 2022 के निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से प्रदेश में करीब आधा दर्जन पार्षद जीते थे। इनमें खरगोन की हिन्दू महिला अरुणा उपाध्याय सहित तीन पार्षद भी शामिल थे। वे AIMIM से प्रदेश की पहली हिंदू पार्षद बनकर चर्चा में रहीं। वार्ड 2 से अरुणा के सामने भाजपा प्रत्याशी सुनीता गांगले और कांग्रेस की शिल्पा सोनी मैदान में थीं। उन्होंने 643 वोट हासिल किए थे। भाजपा प्रत्याशी सुनीता को 612, कांग्रेस की शिल्पा को 498 मत मिले थे। अरुणा 31 वोट से जीती थी। खरगोन के वार्ड -2 में निकाय चुनाव के दौरान कुल 2915 मतदाता थे। वार्ड में 70% मुस्लिम आबादी होने के बावजूद उन्होंने जीत हासिल की थी।

बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी चल रही, पार्टी ने कई राज्यों में संगठन चुनाव पूरे कर लिए

नई दिल्ली मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो चुका है। इस बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी योजना बन रही है। सूत्रों के अनुसार नए भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और राज्यपालों में बदलाव (सोमवार को तीन नए राज्यपालों की नियुक्ति) के बाद मंत्रिमंडल में फेर बदल हो सकता है। बीजेपी के कई राज्यों के भी अध्यक्ष के चुनाव हो रहे हैं। माना जा रहा है इसके पूरा होने के बाद मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बदलाव हो सकता है। हरियाणा और गोवा के लिए नए राज्यपाल नियुक्त किए जा चुके हैं जबकि लद्दाख को भी नया उपराज्यपाल मिल चुका है। वहीं मोदी सरकार द्वारा राज्यसभा के लिए चार नए सदस्यों (एडवोकेट उज्ज्वल निकम, मीनाक्षी जैन, हर्षवर्धन श्रृंगला और सी सदानंदन मास्टर) के नामांकन की घोषणा की घोषणा भी हो चुकी है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इन बदलावों के जरिए कैबिनेट फेरबदल के लिए जमीन तैयार की जा रही है। हाल ही में हरियाणा, गोवा के लिए राज्यपाल और लद्दाख के लिए उपराज्यपालों की नियुक्ति की है। इससे एक दिन पहले ही एडवोकेट उज्ज्वल निकम, मीनाक्षी जैन, हर्षवर्दन श्रृंगला और सी सदानंद मास्टर को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। अखबार से बातचीत में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'बड़े मंत्रालय वाले अधिकांश मंत्रियों को पिछली मोदी सरकार से रिपीट किया गया है…। अब तक इस बात पर जोर दिया जाता था कि निरंतरता बनी रही, लेकिन अब कैबिनेट को विदेश मामलों जैसी नई प्राथमिकताओं के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ के चलते वाणिज्य मंत्रालय फिर संतुलित किया जा सकता है।' रिपोर्ट में भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कैबिनेट में राज्यसभा सांसद बदले जा सकते हैं, जिनका कार्यकाल अंतिम दौर में है और उन्हें संगठन में जगह दी जा सकती है। वहीं, अन्य का कहना है कि भाजपा जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी से नेताओं को देख सकती है। खास बात है कि बिहार में विधानसभा चुनाव हैं और लोजपा और जदयू बिहार आधारित पार्टियां हैं। एक भाजपा नेता ने अखबार से कहा, 'चीजें चल रही हैं और सवाल एक ही है कि अब आगे क्या होगा, गवर्नर में फेरबदल, अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य नेताओं की पार्टी संघठन में नियुक्ति की घोषणा या कैबिनेट फेरबदल।' कहा जा रहा है कि भाजपा 37 इकाइयों में से आधे से ज्यादा में अध्यक्षों का चुनाव कर चुकी है। साथ ही जल्द राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। फिलहाल, भाजपा की कमान केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हाथों में है। अध्यक्ष पद के लिए कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं. कुछ प्रमुख संभावित उम्मीदवार के नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल खट्टर शामिल हैं. धर्मेंद्र प्रधान: केंद्रीय शिक्षा मंत्री और ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान को एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उनकी संगठनात्मक क्षमता और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका की वजह से उन्हें इस दौड़ में आगे रखा जा रहा है. साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संघ दोनों से ही उनके संबंध भी सामान्य हैं. भूपेंद्र यादव: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है. राजस्थान से आने वाले यादव को संघ का करीबी माना जाता है, और उनकी शांत और रणनीतिक कार्यशैली पार्टी के लिए फायदेमंद भी रही है. साथ ही उन्हें संगठन का भी काफी लंबा अनुभव है, और पार्टी ने कई राज्यों में उन्हें चुनाव प्रभार भी दिया था. शिवराज सिंह चौहान: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता और संगठन में गहरी पकड़ उन्हें भी एक मजबूत दावेदार बना रही है. मगर सूत्रों का मानना है कि उनके नाम पर मुहर तभी लग पाएगी जब संघ की तरफ से दबाव डाले जाएगा. मनोहर लाल खट्टर: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम भी बीजेपी अध्यक्ष की रेस में शुरू से ही रहा है. हालांकि बीच में सूत्रों से ये भी खबर आई थी कि खट्टर ने उम्र की वजह से अपनी तबीयत का हवाला देते हुए ऐसे किसी पद को लेने से मना किया. मगर इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं हुई. इसके अलावा, सूत्रों की मानें तो पार्टी इस संभावना पर भी चर्चा कर रही है कि बीजेपी पहली बार किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर सकती है, जिससे संगठन में एक नया संदेश जाए. पार्टी का कोर वोटर वर्तमान में महिलाओं का वोट बैंक ही है, इसलिए पार्टी मुख्य पदों पर भी महिलाओं को आगे लाना चाह रही है. जुलाई में हो सकता है नए अध्यक्ष का ऐलान सूत्रों की मानें तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा जुलाई 2025 में होने की संभावना है, क्योंकि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने वाला है. पार्टी के आंतरिक संगठनात्मक चुनाव लगभग अंतिम चरण में हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 4 से 6 जुलाई तक दिल्ली में होने वाली प्रांत प्रचारकों की बैठक में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है. इस बैठक के बाद बीजेपी राष्ट्रीय परिषद की मुहर के साथ नए अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और आरएसएस के बीच नए अध्यक्ष के चयन को लेकर सहमति फिलहाल नहीं बन पाई है. सूत्रों के अनुसार, दोनों संगठन किसी एक नाम पर पूरी तरह सहमत नहीं हो पा रहे हैं. संघ अपनी वैचारिक दृष्टि और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए ऐसे नेता को प्राथमिकता देना चाहता है, जो संगठन की जड़ों को मजबूत करे और हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाए. वहीं, बीजेपी शीर्ष नेतृत्व, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं, एक ऐसे नेता की तलाश में हैं जो सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके. संघ की 4-6 जुलाई की बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला होने की संभावना है. यह बैठक न केवल नए बीजेपी अध्यक्ष के चयन पर केंद्रित होगी, बल्कि संघ की शताब्दी समारोह की तैयारियों और संगठनात्मक गतिविधियों की … Read more

‘राहुल गांधी को पढ़ाने’ की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने सावरकर मामले में दखल से किया इनकार

मुंबई  बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर पर “अपरिपक्व टिप्पणी” की है। मांग की कि अदालत द्वारा राहुल गांधी को याचिका पढ़ने का निर्देश दिया जाए। यह याचिका डॉ. पंकज फडनीस द्वारा दायर की गई थी। वह अभिनव भारत कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उन्होंने अपनी याचिका में मांग की थी कि अदालत राहुल गांधी को निर्देश दे कि वे याचिका को पढ़ें ताकि उनकी "सावरकर को लेकर अज्ञानता" दूर हो सके। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता का दावा था कि राहुल गांधी के बयान ने उनके उस मौलिक कर्तव्य के पालन के अधिकार का उल्लंघन किया है, जिसमें संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को संजोने और उनका पालन करने की बात कहता है। कोर्ट ने खारिज की याचिका मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मरने की खंडपीठ ने स्पष्ट किया, “हम राहुल गांधी को कोई याचिका पढ़ने का निर्देश नहीं दे सकते। किसी नेता की सोच या विचारधारा को बदलने के लिए अदालत कोई बाध्यकारी आदेश नहीं दे सकती।” डॉ. पंकज द्वारा इसी विषय पर पहले सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ने भी यह यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि अदालत इस तरह के मुद्दों पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।  

संजय दत्त की खामोशी से हुआ बड़ा नुकसान: उज्ज्वल निकम ने खोले पुराने राज़

मुंबई  महाराष्ट्र में भाषा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. मराठी और अंग्रेजी के साथ एक से पांचवीं कक्षा तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के आदेश के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आंदोलन का ऐलान किया था. महाराष्ट्र सरकार ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का आदेश वापस ले लिया, लेकिन यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा. महाराष्ट्र में जल्द ही बीएमसी और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं और सत्ताधारी महायुति की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मराठी अस्मिता की सियासी पिच पर घिरी नजर आ रही है. महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद के बीच राज्यसभा में चार सदस्य मनोनीत किए गए. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिन चार सदस्यों को उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है, उनमें एक नाम चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का भी है. उज्ज्वल निकम के राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने के बाद अब बात इसे लेकर भी हो रही है कि क्या उनका मनोनयन उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मराठी पॉलिटिक्स की काट है? मराठी पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों उज्ज्वल निकम एक मराठी परिवार से आते हैं. निकम का जन्म जलगांव के एक संभ्रांत मराठी परिवार में हुआ था और उनके पिता न्यायिक सेवा में जज थे. उज्ज्वल निकम को पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने टिकट दिया था. हालांकि, कोर्ट रूम में अजेय निकम सियासत में अपना डेब्यू मैच हार गए थे. बीजेपी संदेश, संकेत और प्रतीकों की सियासत में दक्ष मानी जाती है और मराठी विवाद के बीच अब मराठा उज्ज्वल निकम का देश के उच्च सदन में मनोनयन भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. क्या कहते हैं जानकार महाराष्ट्र के मुंबई में ही रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि उज्ज्वल निकम बड़े वकील हैं, लेकिन एंटी मराठी नैरेटिव काउंटर करने में कारगर होंगे भी या नहीं? यह भविष्य ही बताएगा. हां, बीजेपी ने ठाकरे बंधुओं के इस नैरेटिव को काउंटर करने के लिए अपने सबसे बड़े चेहरे को आगे कर दिया है. उन्होंने कहा कि उज्ज्वल निकम से पीएम मोदी का मराठी में बात करना मराठी समुदाय के लिए बीजेपी की ओर से यह संदेश है कि हमारा सबसे बड़ा नेता भी मराठी बोलता है, मराठी जानता है, उसका सम्मान करता है और यह मुद्दा अब यहीं पर समाप्त हो जाना चाहिए. महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव संदेश की पॉलिटिक्स का लिटमस टेस्ट होंगे. महाराष्ट्र में एमपी-छत्तीसगढ़ वाली रणनीति! राज्यसभा में उज्ज्वल निकम के मनोनयन को बीजेपी की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले वाली रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. दोनों राज्यों में छिटके अनुसूचित जनजाति (एसटी) के मतदाताओं को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश में बीजेपी ने रानी दुर्गावती गौरव यात्रा निकाली और सरकार ने भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर कर दिया. आदिवासी समाज के बीच भगवान का दर्जा रखने वाले बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई और जबलपुर में शंकर शाह-रघुनाथ शाह के नाम पर स्मारक भी बनवाया गया. छत्तीसगढ़ में पुरखौती सम्मान यात्रा भी इसी रणनीति का हिस्सा थी. दोनों राज्यों में मतदान से ठीक पहले पीएम मोदी ने बिरसा मुंडा की जयंती पर उनके गांव उलिहातु जाकर भी आदिवासी समाज को संदेश दिया था और यह चुनाव में कारगर भी साबित हुआ था. अब उज्ज्वल निकम के राज्यसभा में मनोनयन को भी मराठी पॉलिटिक्स की मुश्किल दिख रही पिच पर बीजेपी की संदेश और प्रतीक की सियासत वाली रणनीति से जोड़कर ही देखा जा रहा है. संजय दत्त अगर हथियार के बारे में बता देते तो मुंबई में नहीं होते धमाके राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे मशहूर वकील उज्ज्वल निकम ने मुंबई धमाकों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता अगर संजय दत्त हथियारों से लदे वाहन की जानकारी दे देते, तो मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट टल सकते थे। 1993 में देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में हुए धमाकों में 267 लोगों की मौत हो गई थी।  निकम ने कहा, 'मैं सिर्फ एक ही बात कहना चाहता हूं। धमाका 12 मार्च को हुआ। इससे एक दिन पहले वैन उनके (संजय दत्त) के घर पहुंची थी। वह हथियारों हैंड ग्रेनेड, एके 47 से लदी हुई थी। अबू सलेम उसे लेकर आया था। संजय ने कुछ हैंड ग्रेनेड और बंदूकें उठा ली थीं। इसके बाद उन्होंने सबकुछ वापस कर दिया और सिर्फ एक एके 47 रखी।' वकील ने कहा, 'अगर वह उस समय पुलिस को घर कर देते, तो पुलिस जांच करती और मुंबई धमाके कभी नहीं होते।' निकम ने कहा कि उन्होंने इस बारे में दत्त के वकील को भी बताया था कि एके 47 का नहीं चलना और उसका पास में होना एक बात है, लेकिन उनकी तरफ से पुलिस को नहीं बताए जाने के चलते ब्लास्ट हुए और बहुत सारे लोगों की जान गई। निकम ने चैनल को बताया कि तब संजय दत्त निर्दोष थे और बंदूकों के प्रति आकर्षण होने के कारण हथियार उठा लिया था। उन्होंने कहा, 'कानून की नजरों में जुर्म किया है, लेकिन वह सीधे व्यक्ति हैं…। मैं उन्हें निर्दोष मानता हूं।' कोर्ट ने TADA केस में दत्त को बरी कर दिया था, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी 6 साल की सजा को घटाकर 5 साल कर दिया था। दत्त इस दौरान महाराष्ट्र के पुणे स्थित येरवाड़ा जेल में बंद थे। संजय दत्त से क्या हुई थी बात निकम बताते हैं कि आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए जाने के बाद संजय दत्त को बड़ा झटका लगा था। उन्होंने कहा, 'मैंने उनकी बॉडी लैंग्वेज बदलते देखी। मैंने महसूस किया कि उन्हें झटका लगा है। वह फैसले को सहन नहीं कर पा रहे थे और घबराए लग रहे थे।'  बातचीत में निकम ने 'राज' का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, 'मैंने संजय से कहा था कि संजय ऐसा मत करो। मीडिया आपको देख रही है। आप एक एक्टर हैं। अगर आप सजा से डरे हुए लगेंगे, तो लोग आपको दोषी समझेंगे। आपके … Read more

राजनीतिक चंदे में बड़ा अंतर: वेदांता ने बीजेपी को जमकर दिया, कांग्रेस को न के बराबर

नई दिल्ली  अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल की खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र और कई राज्यों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 97 करोड़ रुपये का चंदा दिया। यह रकम फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। कंपनी ने वित्त वर्ष (2024-25) में कुल 157 करोड़ रुपये का राजनीतिक चंदा दिया जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 97 करोड़ रुपये था। रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी को दिया गया चंदा चार गुना हो गया लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को चंदा घटकर सिर्फ 10 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक वेदांता ने फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में बीजेपी को 26 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। बीते वित्त वर्ष में कंपनी ने बीजू जनता दल को 25 करोड़ रुपये (इससे पिछले वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये), झारखंड मुक्ति मोर्चा को 20 करोड़ रुपये (इससे पिछले वित्त वर्ष में पांच करोड़ रुपये) और कांग्रेस को 10 करोड़ रुपये (पिछले वित्त वर्ष में भी 49 करोड़ रुपये) का चंदा दिया। वेदांता राजनीतिक दलों को चंदा देने के मामले में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। 457 करोड़ का चंदा वित्त वर्ष 2022-23 में इसने राजनीतिक दलों को कुल 155 करोड़ रुपये और 2021-22 में 123 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। हालांकि, इन वित्त वर्षों के लिए चंदा पाने वाले राजनीतिक दलों का ब्योरा नहीं दिया गया है। कंपनी ने चुनावी बॉन्ड (अब रद्द हो चुके) के माध्यम से 2017 से राजनीतिक दलों को 457 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। चुनावी बॉन्ड कंपनियों और व्यक्तियों को राजनीतिक दलों को अपनी पहचान बताए बिना चंदा देने की अनुमति देते थे। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए इनपर प्रतिबंध लगाया दिया था। वेदांता का जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट, राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए कंपनियों द्वारा स्थापित एक दर्जन से अधिक चुनावी न्यास में से एक है। इसी तरह के न्यास टाटा का प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट भी है। अलग-अलग कंपनियों के ट्रस्ट कंपनियों द्वारा स्थापित इसी तरह के अन्य न्यास में रिलायंस का पीपल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट, भारती समूह का सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट, एमपी बिड़ला समूह का परिवर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट और के के बिड़ला समूह का समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन शामिल हैं। बजाज और महिंद्रा के भी इसी तरह के इलेक्टोरल ट्रस्ट हैं।

अपराध पर जीरो टॉलरेंस, बिहार में कानून का बोलबाला: शाहनवाज हुसैन

नई दिल्ली पटना के उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या मामले में नीतीश सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। इस मामले में जांच चल रही और अब भाजपा नेता की हत्या मामले में विपक्ष ने पूरी तरह से नीतीश सरकार को घेर लिया है। विपक्ष लगातार कानून व्यवस्था को संभालने में डबल इंजन सरकार की विफलता को उजागर कर रहा है। बिहार की कानून व्यवस्था पर भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार में कानून का राज स्थापित है और राज्य ने किसी भी तरह के अपराधियों के साथ कोई समझौता नहीं किया है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन है। अपराध की घटना होती है, उस पर कार्रवाई की जाती है। हुसैन ने गोपाल खेमका हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस ने एक्शन लिया। एक अपराधी का एनकाउंटर हुआ। कुछ की गिरफ्तारी हुई। अपराध के खिलाफ नीतीश सरकार एक्शन लेती है और आगे भी एक्शन जारी रहेगा। रविवार को जो घटना हुई, उस पर भी एक्शन लिया जाएगा। तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें कानून व्यवस्था पर ज्ञान देने से पहले लालू प्रसाद यादव के जंगलराज को याद करना चाहिए। लालू राज में अपराधियों के साथ सरकार का तालमेल होता था। आज की सरकार में अपराधियों पर कड़ा एक्शन लिया जाता है, अपराध और अपराधियों से समझौता नहीं होता है, सीधे एक्शन होता है। जो अपराध करेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई निश्चित होगी। उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सत्यापन और पुनरीक्षण का काम सही तरीके से हो रहा है। कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोर्ट ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई। बिहार के लोग ही बिहार के भाग्य का फैसला करेंगे। वेरिफिकेशन सही तरीके से हो रहा है। इस दौरान नेपाल, बांग्लादेश के लोग भी मिल रहे हैं, जो बिहार में वोटर बने हुए हैं। ऐसे लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करने का काम किया जाएगा। चुनाव में बिहार के वोटर ही वोट डालेंगे। 

सीएम यादव ने कहा- पीएम मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में निवेशकों का यज्ञ चल रहा है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में निवेशकों का यज्ञ चल रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेशकों से समर्थन मिल रहा है। प्रदेश सरकार आकर्षक औद्योगिक और निवेश नीतियों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने का निरंतर प्रयास कर रही है। विगत एक वर्ष में प्रदेश के संभागों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और देश के प्रमुख औद्योगिक नगरों में रोड-शो आयोजित किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को नई दिल्ली से दुबई रवाना होने से पहले अपने संदेश में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में फरवरी माह में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था, जिसमें 30 लाख करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ था। निवेश आकर्षित करने का यह सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में सूरत, लुधियाना और जोधपुर में भी सफल रोड-शो का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से 13 से 19 जुलाई के बीच दुबई और स्पेन की यात्रा की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की समृद्धि बढ़ाने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह दौरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के पहले वे प्रदेशवासियों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों महिला, युवा, किसान और गरीब के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में इसी प्रकार से काम करती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दुबई और स्पेन की यात्रा के माध्यम से विदेशी निवेशकों को प्रदेश में निवेश संभावनाओं और आकर्षक निवेश नीतियों से अवगत कराया जाएगा। इस यात्रा के दौरान दुबई और स्पेन के निवेशकों के बीच राज्य की औद्योगिक निवेश के संबंध में ब्रांडिंग की जाएगी, जिससे मध्यप्रदेश विदेशी निवेश में शीर्ष राज्य बने। प्रदेश में सभी प्रकार के उद्योग, भारी उद्योग, मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम, आईटी सहित पर्यटन, वन, खनन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही प्रदेश के विभिन्न अंचलों जैसे चंबल, महाकौशल, विंध्य, मालवा और बुंदेलखंड अंचल की विशेषताओं के आधार पर अनुकूल प्लानिंग के साथ विदेशी सरकारों के सौजन्य से विदेशी निवेशकों से चर्चा की जाएगी।  

धार के मांडू में होगी कांग्रेस विधायकों की ट्रेनिंग, राहुल गांधी देंगे मंत्र!

भोपाल  मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में पार्टी 21 और 22 जुलाई को धार जिले के ऐतिहासिक शहर मांडू में विधानसभा स्तर के विधायकों के लिए दो दिवसीय रणनीतिक प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने जा रही है। शिविर का उद्देश्य विधायकों को मौजूदा राजनीतिक चुनौतियों, संगठनात्मक भूमिका, कानूनी दबावों और संचार के आधुनिक माध्यमों के प्रति तैयार करना है। शिविर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विशेषज्ञ वक्ता और राजनीतिक रणनीतिकार विभिन्न विषयों पर सत्र लेंगे, ताकि विधायकों को व्यावहारिक और वैचारिक रूप से चुनावी दृष्टिकोण से सशक्त बनाया जा सके। राहुल गांधी करेंगे वर्चुअल संबोधन 21 जुलाई से संसद का सत्र शुरू होने के कारण लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शिविर में वर्चुअली शामिल होंगे। वे कांग्रेस विधायकों को आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर मार्गदर्शन देंगे और कुछ विधायकों से व्यक्तिगत संवाद भी कर सकते हैं। सत्ता पक्ष को घेरने का मास्टर प्लान! कांग्रेस के इस खास ट्रेनिंग कैंप को "नव संकल्प" नाम दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस शिविर का मुख्य लक्ष्य न केवल भविष्य की चुनावी रणनीति तैयार करना है, बल्कि विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में सत्ताधारी बीजेपी को पूरी आक्रामकता से घेरने की योजना बनाना भी है। इसके लिए, दिल्ली से खास राजनीतिक ट्रेनर बुलाए गए हैं जो विधायकों को ट्रेनिंग देंगे। ट्रेनर विधायकों को सिखाएंगे कि जनता के बीच जाकर सरकार की कमियों का प्रभावी ढंग से कैसे खुलासा किया जाए। उन्हें विधानसभा में सत्ता पक्ष के सवालों का सटीक और तर्कसंगत जवाब देने की कला भी सिखाई जाएगी। यह शिविर विधायकों और पार्टी संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि जमीनी स्तर पर एकजुट होकर काम किया जा सके। राहुल गांधी समेत शीर्ष नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ेंगे इस अहम शिविर में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। पार्टी के दिग्गज नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल भी इस प्रशिक्षण में वर्चुअल माध्यम (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) से जुड़कर विधायकों और नेताओं को संबोधित करेंगे। 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के कारण, ये नेता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाएंगे, लेकिन उनकी वर्चुअल उपस्थिति शिविर के महत्व को और बढ़ाएगी। मानसून सत्र में दिखेगा असर? मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू हो रहा है और उससे ठीक पहले आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नीतीश सरकार पर चिराग का हमला, कहा– बिहार में मर्डर आम बात बन गया है

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। चिराग ने शनिवार को ट्वीट कर बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए और पूछा कि और कितने बिहारी हत्याओं की भेंट चढ़ेंगे। बता दें कि बिहार में आगामी महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष जहां कानून व्यवस्था को मुद्दा बना रहा है। वहीं, दूसरी ओर सत्ताधारी गठबंधन के घटक दल लोजपा-आर के मुखिया चिराग भी आपराधिक घटनाओं पर अपनी सरकार को घेरने में लगे हुए हैं। चिराग का हालिया पोस्ट सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें उन्होंने लिखा, "बिहारी अब और कितनी हत्याओं की भेंट चढ़ेंगे? समझ से परे है कि बिहार पुलिस की जिम्मेदारी क्या है?" बता दें कि बिहार में लगातार हत्या समेत अन्य आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। पिछले दिनों पटना में नामी कारोबारी गोपाल खेमका को गोलियों से भून दिया गया था। दो दिन पहले पटना जिले में ही बालू कारोबारी रमाकांत यादव को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद शुक्रवार रात तृष्णा मार्ट के मालिक विक्रम झा की राजधानी में गोली मारकर हत्या कर दी गई। अन्य जिलों में भी आए दिन हत्याकांड बिहार में एक के बाद एक हो रही हत्याओं पर चिराग पासवान ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब चिराग ने अपनी ही सरकार के प्रशासन को घेरा है। इससे पहले मुजफ्फरपुर की दलित बच्ची से रेप होने और पटना के पीएमसीएच में समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत होने पर भी लोजपा-आर के प्रमुख ने नीतीश सरकार को घेरा था। उस घटना को चिराग ने पूरा सिस्टम फेलियर बताया था। बता दें कि लोजपा-आर आगामी विधानसभा का चुनाव बीजेपी, जेडीयू समेत अन्य दलों के साथ एनडीए में रहकर ही लड़ेगी। चिराग पासवान भी केंद्र की राजनीति छोड़कर बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। वे लगातार क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। उनकी आरा, राजगीर, छपरा में रैलियां हो चुकी हैं। एनडीए में सीट बंटवारे से पहले वे सहयोगियों को ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं।