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520 विद्यार्थी, 104 शिक्षक और 6 अधिकारी तीन दिवसीय अहमदाबाद शैक्षणिक भ्रमण पर रवाना

भोपाल  प्रदेश के शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की पढ़ाई के साथ प्रत्यक्ष अनुभवों से जोड़ने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। गणित एवं विज्ञान ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए अहमदाबाद का शैक्षणिक भ्रमण कराया जा रहा है। रविवार को भोपाल से तीन दिवसीय अहमदाबाद शैक्षणिक भ्रमण के लिए 630 सदस्यीय दल रवाना हुआ। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, भोपाल से स्कूल शिक्षा विभाग की अपर परियोजना संचालक नंदा भिलावे कुशरे ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को अहमदाबाद के लिए रवाना किया। इस अवसर पर IRCTC क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल के क्षेत्रीय प्रबंधक  राजेंद्र बोरबन भी उपस्थित रहे। दल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 520 विद्यार्थी, 104 शिक्षक एवं स्कूल शिक्षा विभाग के 6 नियंत्रण अधिकारी शामिल हैं। यह शैक्षणिक भ्रमण शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित गणित एवं विज्ञान ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। ओलंपियाड में प्रदेश के लगभग 65 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता की थी। विज्ञान और नवाचार को करीब से समझेंगे विद्यार्थी भ्रमण के दौरान विद्यार्थी अहमदाबाद के प्रमुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थानों, विज्ञान केंद्र, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान उन्हें वैज्ञानिक गतिविधियों, शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली और देश की विविध उपलब्धियों को प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर मिलेगा। स्कूल शिक्षा विभाग का यह प्रयास विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर देखकर, समझकर और अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान कर उनके ज्ञान, जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और समृद्ध करेगा।

एआई और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में नई छलांग लगा रहा उत्तर प्रदेश: सुनील कुमार शर्मा

ग्रेटर नोएडा ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। आने वाले समय में एआई और आईटी का कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ाव प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा। मंत्री ने बताया कि हाल में 52 स्टार्टअप के साथ हुई बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में स्टार्टअप फूड सप्लाई से जुड़े हैं, जबकि कृषि क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने वाले स्टार्टअप की संख्या अभी कम है। उन्होंने इसे एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि एआई और आईटी को कृषि आधारित उद्योगों से जोड़कर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। प्रदेश में मक्का की खेती को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ने के बाद किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। भविष्य में इसी तरह तकनीक आधारित समाधान कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार निवेशकों को अनुकूल वातावरण देने के लिए लगातार नीतियों में आवश्यक बदलाव कर रही है। उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मुख्यमंत्री के स्तर से नीतिगत सुधार किए जाते हैं। निवेशकों को प्रोत्साहन राशि देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष जोर है और विभाग में निवेश प्रोत्साहन से संबंधित कोई फाइल लंबित न रखने की व्यवस्था की गई है। पिछले एक वर्ष में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए गए हैं। सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखा है। एक्सप्रेसवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तथा एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने रक्षा उत्पादन में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी अवैध हथियार निर्माण की चर्चा होती थी, वहीं आज प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइल और एके-203 जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के बढ़ते बजट को भी आर्थिक विस्तार से जोड़ते हुए कहा कि 2017 में राज्य का बजट करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 9.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बदलाव बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, निवेश और राजस्व क्षमता का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तकनीक और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को हर जिले तक पहुंचाना है। वर्ष 2026-27 के लिए तकनीक और औद्योगिक विकास को प्रदेश के सभी जिलों तक विस्तार देने के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है। उन्होंने निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का आह्वान किया।

लखना, बेमता और बलौदीखुर्द का दौरा कर जताया संबल

​रायपुर        प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों को गति देने के लिए राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने आज लखना, बेमता और बलौदीखुर्द गांवों का सघन दौरा किया। उन्होंने बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनका हालचाल जाना और पीड़ितों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विपदा की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।  ​अपने दौरे के दौरान राजस्व मंत्री ने गांव-गांव में बाढ़ के पानी से हुए नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से आत्मीय चर्चा करते हुए उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए  वर्मा ने कहा कि आपदा की इस कठिन परिस्थिति में शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। किसी भी प्रभावित परिवार को असहाय नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फसल, मकान एवं जन-धन के नुकसान का निष्पक्ष और त्वरित आकलन कराया जा रहा है, ताकि सभी पीड़ितों को नियमानुसार जल्द से जल्द राहत राशि और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।           ​निरीक्षण के दौरान मंत्री  वर्मा ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही फसल क्षति, मकानों के नुकसान और पशु हानि का पारदर्शी सर्वे तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए, ताकि मुआवजा वितरण में कोई देरी न हो। संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को गांवों में विशेष कैंप लगाने और कीटनाशकों का छिड़काव कराने की बात भी कही।         ​आपदा के समय सीधे अपने बीच पहुंचे राजस्व मंत्री की इस संवेदनशीलता और त्वरित पहल से लखना, बेमता एवं बलौदीखुर्द के ग्रामीणों ने मंत्री  वर्मा का आभार प्रकट किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित राजस्व और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

“सपा राज में पूरे प्रदेश की तिजोरी लूटकर सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे”: ओम प्रकाश राजभर

लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'सैफई मॉडल' के विकास के उदाहरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश की सरकार थी तब 24 घंटे बिजली केवल सैफई में मिलती थी। सैफई महोत्सव होता था और सैफई महोत्सव में मुंबई से हीरो-हीरोइन आकर डांस करते थे। आसपास के गांवों में दुष्टता का आतंक हो जाता था और लोग भय ग्रस्त होकर घरों में कैद रहते थे। अखिलेश राज में सिर्फ सैफई का हुआ विकास राजभर ने कहा कि अखिलेश ने केवल सैफई का ही विकास किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसे ले जा कर वहां लगा दिया। सैफई में मेडिकल कॉलेज बनवाने से लेकर वहां की सड़कें तक चौड़ी करवा दी। दूसरी जगहों की उपेक्षा हुई।  SIR पर अखिलेश के आरोप गलत राजभर ने कहा कि अखिलेश SIR पर जो आरोप लगा रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। मैं जिस विधान सभा से विधायक हूं वहां 16 हजार वोटर मृतक थे, उनको निकाला गया। इसके अलावा 23 हजार स्थानांतरित मतदाता थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने एक जगह करने के लिए स्वीकृत किया। SIR कोई नया नहीं है. यह 1952 से लेकर 2003 के बीच में कई बार हुआ है।  अखिलेश की सरकार में गुंडागर्दी चरम पर थी  राजभर ने कहा कि अखिलेश के राज में गुंडागर्दी, लूट, हत्या, बलात्कार और छिनैती चरम पर थे।  मुजफ्फरनगर जब दंगों में जल रहा था तो यह मुख्यमंत्री होते हुए डांस देख रहे थे। सरकारी नौकरियां पैसे पर देते थे। राजभर ने कहा अखिलेश को कोई वोट नहीं देगा। अखिलेश वोट पाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। उन्हें तो अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

यूपीआईटीएस में दिखा परिवहन विभाग का सड़क सुरक्षा पर जोर, 28 से 30 सितंबर तक चलेगा ऑपरेशन कवच

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा योगी सरकार के कार्यकाल में परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में भी देखने को मिल रही है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में परिवहन विभाग ने अपने स्टॉल के माध्यम से विभागीय सेवाओं, सड़क सुरक्षा और वाहन संबंधी नई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। यहीं पर परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि सड़क सुरक्षा के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेश में अनधिकृत बसों के विरूद्ध ऑपरेशन कवच अभियान चलाया जाएगा। 28 से 30 सितंबर तक ऑपरेशन कवच परिवहन विभाग की तकनीकी कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ ऑपरेशन कवच के तहत 28 से 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य परिवहन नियमों के अनुपालन को प्रभावी बनाना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। एनसीआर के प्रदूषण पर ईओएल वाहनों पर फोकस उन्होंने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्र पर स्क्रैप कराने की अपील की। एनसीआर के वाहन स्वामियों से पुराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप जीवन पूरा कर चुके वाहनों को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके। परिवर्तन पोर्टल से पुराने वाहनों को बदलने का लाभ उन्होंने परिवहन विभाग की परिवर्तन योजना की जानकारी देते हुए यूरो मानक बीएस 1,2,3 व 4 वाले वाहनों के स्वामियों से परिवर्तन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की अपील की। वहीं कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए यातायात नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया। लोगों से नियंत्रित गति से वाहन चलाने, दोपहिया पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने, शराब पीकर वाहन न चलाने व ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई। परिवहन विभाग ने बताया कि जनसुविधा के लिए उसकी 52 सेवाओं को फेसलेस किया गया है, जबकि 40 सेवाएं ऑटो अप्रूवल मोड में संचालित की जा रही हैं। ट्रेड शो में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी आधुनिक तकनीक और सिमुलेटर के जरिए युवाओं को जानकारी भी दी जा रही है।

नेलसनार में बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की मानवीय पहल, बाढ़ में फंसे यात्रियों को कराया भोजन

बीजापु भैरमगढ़ के समीप नेलसनार क्षेत्र में बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ। इस दौरान मार्ग में फंसे यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराया गया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 26 सितंबर को दिन के समय करीब 150 लोगों तथा रात्रि में लगभग 70 मुसाफिरों को भोजन कराया गया। विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल से रास्ते में फंसे लोगों को राहत मिली। कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम, तहसीलदार सहित मैदानी अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित एवं फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

साइबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, कानून-व्यवस्था, पुलिस आधुनिकीकरण सहित पुलिसिंग के विभिन्न विषयों पर वरिष्ठ अधिकारियों ने दी जानकारी

भोपाल  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह के प्रस्तावित मध्यप्रदेश दौरे के दौरान पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों एवं नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी आयोजित की जानी है। इसकी तैयारियों के संबंध में आज डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश की पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार साइबर अपराध, आपराधिक न्याय प्रणाली, कानून-व्यवस्था, आतंकवाद प्रतिरोध, नक्सल उन्मूलन, विदेशियों से संबंधित विषय, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण तथा पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा संबंधी समन्वय सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं प्रस्तुतिकरण दिया। डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने बैठक में सेफ क्लिक, ‘नशे से दूरी है जरूरी’, नक्सलवाद के उन्मूलन एवं हार्टफुलनेस सहित मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न पहलों एवं अभियानों से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा जनहित से जुड़े अभियानों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने एवं प्रदर्शनी में इन अभियानों की प्रभावी प्रस्तुति तथा इनके माध्यम से पुलिस और नागरिकों के बीच जागरूकता एवं सहभागिता को प्रदर्शित करने पर जोर दिया। साइबर अपराध, सुरक्षा एवं आधुनिक पुलिसिंग पर समीक्षा बैठक में ई-जीरो एफआईआर, 1930 साइबर हेल्पलाइन, साइबर कमांडो प्रशिक्षण तथा ‘सेफ क्लिक’ जागरूकता अभियान की प्रगति की जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से 8.6 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई गई। आतंकवाद प्रतिरोध के अंतर्गत एटीएस की क्षमताओं एवं परिचालन दक्षता तथा अंतरराज्यीय प्रकृति के मामलों में समन्वय पर चर्चा हुई। विदेशियों एवं अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कार्रवाई, आपदा प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण तथा पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय की भी समीक्षा की गई। डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने आधुनिक तकनीक एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर जोर दिया। कानून-व्यवस्था, आपराधिक न्याय प्रणाली एवं फॉरेंसिक व्यवस्थाओं की जानकारी अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था एवं आपराधिक न्याय प्रणाली, नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, ई-समन, मेडिको-लीगल परीक्षण एवं पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग सिस्टम पर प्रस्तुतिकरण दिया। साथ ही अभियोजन निदेशालय, नेटग्रिड के उपयोग, नवीन न्याय संहिता के अंतर्गत दो वर्षों की तुलनात्मक स्थिति, फॉरेंसिक सेवाओं तथा 57 मोबाइल फोरेंसिक वैन की जानकारी दी गई। जेल विभाग द्वारा मॉडल जेल अधिनियम-2023 के अंतर्गत मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी अधिनियम-2024 तथा मॉडल जेल मैन्युअल-2016 से संबंधित जानकारी साझा की गई। प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी दी  पंकज वास्तव ने बैठक के दौरान विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव ने 3 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित नवीन आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में अपराध घटित होने से लेकर नागरिक को न्याय मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को सरल एवं सहज तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें पुलिस, एफएसएल, अभियोजन, जेल एवं अन्य संबंधित विभागों की भूमिका, आधुनिक तकनीक तथा डिजिटल व्यवस्थाओं को विभिन्न स्टॉल, वीडियो, डिजिटल स्क्रीन, पोस्टर एवं मॉडल के माध्यम से दर्शाया जाएगा। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर जागरूकता, नक्सल उन्मूलन, ‘सेफ क्लिक’, ‘नशे से दूरी है जरूरी’ सहित विभिन्न जनहितकारी पहलों एवं उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान, वन एवं वन्यजीवन, पारंपरिक कला-संस्कृति एवं जनजातीय विरासत की झलक भी प्रदर्शनी में शामिल की जाएगी। प्रदर्शनी लगभग पांच दिनों तक संचालित की जाएगी और 3 अक्टूबर से आम नागरिकों के लिए प्रारंभ होगी। बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित बैठक में विशेष पुलिस महानिदेशक  आदर्श कटियार,  अनिल कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  डी. निवास वर्मा,  योगेश चौधरी,  जयदीप प्रसाद,  के.पी. वेंकटेश्वर राव,  अंशुमन यादव, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. आशीष, जेल डीआईजी  एम.आर. पटेल, डायल 112 एवं स्वास्थ्य विभाग   के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

बिहार में लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा का ऐलान, 150 सवालों की होगी CBT परीक्षा

 पटना  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा, 2026 का नोटिफिकेशन रविवार को जारी कर दिया है। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए निर्धारित वेबसाइट  sletregistration.cbrt.co.in पर जाना होगा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम ने परीक्षा को लेकर जानकारी साझा की है। परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। इसमें कुल 150 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि 150 मिनट यानी ढाई घंटे होगी। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और गलत उत्तर के लिए निगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी।   पुस्तकालय विज्ञान से 100 और सामान्य ज्ञान से 50 अंक विद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 100 अंक के प्रश्न पुस्तकालय विज्ञान विषय से होंगे, जबकि 50 अंक के प्रश्न सामान्य ज्ञान पर आधारित होंगे। परीक्षा का पाठ्यक्रम राज्य के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय विज्ञान की स्नातक डिग्री के लिए लागू पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा। स्नातक के साथ पुस्तकालय विज्ञान की डिग्री जरूरी पात्रता परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास स्नातक की डिग्री के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। स्नातक में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। निर्धारित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को इसमें पांच प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। सभी वर्गों को उम्र सीमा में 10 वर्ष की छूट परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आयु सीमा में सभी वर्गों के लिए 10 वर्ष की छूट दी जाएगी। पात्रता से जुड़ी अन्य शर्तें बोर्ड की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार लागू होंगी। किस वर्ग के लिए कितने न्यूनतम अंक जरूरी पात्रता परीक्षा में सफल होने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम अर्हतांक निर्धारित किया गया है। श्रेणी                                                  न्यूनतम अर्हतांक सामान्य वर्ग                                       50 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग                                         45.5 प्रतिशत अत्यंत पिछड़ा वर्ग                              42.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति     40 प्रतिशत दिव्यांग                                                 40 प्रतिशत महिला                                                  40 प्रतिशत

विकसित भारत जीरामजी योजना से सेंड फिल्टर निर्माण ने दी भूजल को संजीवनी

रायपुर “जल है तो जीवन है”—यह पंक्तियाँ धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत मुल्ले के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था की बुनियाद बन चुकी हैं। वर्षा आधारित इस क्षेत्र में जल की एक-एक बूंद को सहेजने के संकल्प के साथ 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत विकसित भारत जीरामजी योजना से जल स्रोतों में सेंड फिल्टर (Sand Filter) का सफल निर्माण कराया गया है। यह पहल वर्षा एवं सतही जल के कुशल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है। प्राकृतिक छनन तकनीक से बहते पानी का जतन ​वर्षाकाल में खेतों और गलियों से बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को उपयोगी बनाने के उद्देश्य से गाँव में सेंड फिल्टर की स्थापना की गई है। इस संरचना में रेत और प्राकृतिक छनन माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जो जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद और अन्य ठोस अशुद्धियों को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे स्वच्छ जल जमीन के भीतर समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। सीमित संसाधनों में तैयार यह छोटी संरचना भविष्य की जल संपदा को सुरक्षित करने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है। 52 हजार की लागत में दोहरा लाभ: जल संरक्षण के साथ रोजगार ​ग्राम मुल्ले में इस सेंड फिल्टर का निर्माण 52 हजार रुपये की स्वीकृत लागत से सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें सामग्री के लिए 41 हजार रुपये तथा मजदूरी के लिए 11 हजार रुपये निर्धारित थे। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कुल 52 हजार रुपये व्यय हुए, जिसमें से 10,500 रुपये मजदूरी मद में खर्च किए गए। इस कार्य की सबसे खास बात यह रही कि इसमें गाँव के ही श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आय का साधन प्राप्त हुआ। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि प्रधान ग्राम मुल्ले की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर जल की उपलब्धता पर निर्भर है। ऐसे में सेंड फिल्टर के ज़रिए भूजल स्तर में सुधार होने से आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ेगा। बदलाव की बयार: 'आज का संरक्षण, कल की सुरक्षा' इस पहल ने ग्रामीणों की सोच में भी बड़ा बदलाव लाया है। अब गाँव के लोग वर्षा जल को केवल एक तात्कालिक जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संजोने योग्य प्राकृतिक धरोहर मान रहे हैं। मुल्ले गाँव का यह प्रयास यह संदेश देता है कि जल सुरक्षा की जंग केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से भी जीती जा सकती है। आज सहेजी जा रही यही एक-एक बूंद आने वाले कल में गाँव की जीवनरेखा बनेगी।

योगी सरकार की तत्परता से अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव तेज, जिलों में फील्ड पर उतरा प्रशासन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जारी भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश राहत आयुक्त के अनुसार 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। क्षतिग्रस्त मकानों की सूचना पर मदद में जुटा प्रशासन अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से प्रदेश में 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस संबंध में प्रशासन मदद उपलब्ध कराने में जुट गया है। फसल क्षति का तत्काल आकलन अधिकारियों को फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण और आकलन कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था व पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने को भी कहा गया है। फील्ड में रहकर राहत कार्यों की निगरानी राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री और अनुमन्य सहायता राशि का वितरण प्राथमिकता के आधार पर करने और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने को कहा गया है। रेस्क्यू अभियान लगातार जारी जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों को आवश्यक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने आमजन से जलभराव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा नदियों-नालों के तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। आपातकालीन सहायता के लिए राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की भी अपील की गई है।