samacharsecretary.com

उमा भारती ने टीमकगढ़ में लगाया पोहा-जलेबी का ठेला, प्रशासन से कहा- गरीबों की रोजी-रोटी मत छीनो

 टीमकगढ़   प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती मंगलवार को सड़क किनारे लगे एक ठेले पर पोहा बेचती नजर आई हैं। हालांकि, वो ऐसा प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के विरोध में रही हैं। लेकिन, कुछ ही देर में उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। आपको बता दें कि, पूर्व सीएम उमा भारती मंगलवार को टीकमगढ़ शहर के सिविल लाइन इलाके में सड़क किनारे लगे ठेले पर पोहा बेच रही हैं। उन्होंने प्रशासन द्वारा एक दिन पहले की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को गलत ठहराया था। आज वो उन्हीं हटाए गए ठेलो को फिर से लगाकर उनमें से एक ठेले पर पोहा बेचने पहुंची हैं। टीकमगढ़ में मंगलवार (7 अप्रैल) सुबह पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सड़क किनारे हाथठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेची। उन्होंने एक दिन पहले हटाए गए छोटे दुकानदारों को वापस ठेले लगाने के लिए बुलाया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गरीबों की रोजी-रोटी नहीं छीनी जनि चाहिए।  दरअसल, सोमवार को नगर पालिका, एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने सिविल लाइन रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। इस दौरान जेसीबी से कई छोटी दुकानें और हाथठेले हटा दिए गए थे। उमा भारती ने इस कार्रवाई का विरोध किया था और छोटे दुकानदारों को हटाने को गलत बताया था। इसी को लेकर मंगलवार सुबह वे सिविल लाइन रोड स्थित बंगले से निकलकर हाथठेले पर पहुंचीं। यहां खुद पोहा-जलेबी बेचकर दुकानदारों का समर्थन किया। उन्होंने हाथठेला वालों से दोबारा सड़क किनारे ठेले लगाने को कहा। उमा बोलीं- प्रशासन पहले दुकानों के लिए जगह दे, बाद में हटाए उमा भारती ने कहा कि पार्षदों ने पहले स्थान चिह्नित करने को कहा था। तीन-चार स्थान भी बताए थे। प्रशासन पहले दुकानों के लिए जगह दे, बाद में हटाए। उन्होंने हटाए गए दुकानदारों से अपील की कि वे वापस आएं और यहीं दुकानें लगाएं, मैं उनके साथ हूं। उनके ठेलों को यहां से नहीं हटने दिया जाएगा। प्रशासन से बात करूंगी, सभी के ठेले वापस यहां लगाए जाएंगे उमा भारती से पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रशासन से बात की है। उन्होंने कहा कि मुझे अभी इसका पता चला है। मैं अभी प्रशासन से बात करूंगी। सभी के ठेले वापस यहां लगाए जाएंगे। उमा भारती ने उठाए थे कार्रवाई पर सवाल प्रशासन ने सोमवार की दोपहर सिविल लाइन से अतिक्रमण हटाया तो देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उस पर सवाल उठते हुए इसे गरीबों के खिलाफ की गई अनुचित कार्रवाई बताया था। उनका कहना था कि, प्रशासन सबसे पहले पैसे वालों का अतिक्रमण हटाएं। ठेले वाले सबसे बाद में आते है। सोमवार की रात 8.45 बजे पूर्व मुख्यमंत्री ईदगाह के सामने पहुंची। यहां पर उन्होंने प्रशासन द्वारा हटाए गए अतिक्रमण की जानकारी ली थी।

हरियाणा में 6 ट्रेनी IAS की पोस्टिंग, विवेक यादव होंगे हिसार सहायक आयुक्त, विशाल को मिला रोहतक, शिवानी को कैथल

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने तुरंत प्रभाव से 6 प्रशिक्षणाधीन आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। अमितेज पांगटे को नूंह तथा मुस्कान श्रीवास्तव को फरीदाबाद में सहायक आयुक्त लगाया गया है। इसी तरह शिवानी पांचाल को कैथल, सोहम शैलेन्द्र को करनाल, विशाल सिंह को रोहतक तथा विवेक यादव को हिसार में सहायक आयुक्त लगाया गया है।

भूमि मामलों पर मंथन: पटना में DCLR की अहम बैठक, दाखिल-खारिज और लैंड बैंक एजेंडे में शामिल

पटना. भूमि सुधार उप समाहर्ताओं की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक सात अप्रैल को पटना में होगी। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को दी। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दाखिल-खारिज, अपील वाद, राजस्व वसूली और लैंड बैंक से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा से प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत होगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए लंबित मामलों के तेजी से निष्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण जिन नए लोगों को चार्ज दिया गया है, उन्हें भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। लोगों के कार्य की गति बढ़ाने का दिशा निर्देश देने के साथ–साथ कोई काम बाधित नहीं हो, इसकी तैयारी की जा रही है। सिन्हा ने निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का हर हाल में पालन किया जाए। अनुसूचित जाति, जनजाति, विधवा, सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान, बाहर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामलों का तुरंत निबटारा किया जाए। विशेष श्रेणी के आवेदन को प्राथमि‍कता  उन्होंने कहा कि फि‍फो व्यवस्था स्थगित है इसलिए विशेष श्रेणी के आवेदनों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े। आवश्यक होने पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देकर उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की जाए। दिनभर होगा मंथन और मूल्‍यांकन  बताया जाता है कि पुराना सचिवालय में होनेवाली बैठक दिनभर चलेगी। पहले सत्र में प्रधान सचिव सीके अनिल वित्‍तीय वर्ष के कार्यों का मूल्‍यांकन करेंगे। दूसरे सत्र में तकनीकी और कौशल विकास पर मंथन होगा। इसमें कोर्ट केस लिखने का टेस्‍ट भी डीसीएलआर देंगे। इसका उद्देश्‍य आदेश की सटीकता परखना है। सभी डीसीएलआर को लैपटॉप, डोंगल और पांच कोर्ट केस के डिटेल के साथ आने का निर्देश दिया गया है।

PNB लूट का त्वरित खुलासा: जालंधर पुलिस ने मुख्य आरोपी को दबोचा, रिटायर्ड DSP का बेटा निकला मास्टर माइंड

जालंधर. जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने खुरला किंगरा स्थित पीएनबी बैंक में हुई लूट की वारदात को कुछ ही घंटों में सुलझाते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान से सिमरनजीत सिंह के रूप में हुई है जो रिटायर्ड डीएसपी का बेटा है, जिनकी मौत हो चुकी है। पिता के मरने के बाद सिमरनजीत नशे वाली हो गया था न। अपने साथियों के साथ मिलकर वह नशा बेचने भी लगा और करने भी लगा। इसी के चलते उसने बैंक लूट की योजना बनाई। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया रिवाल्वर, तीन जिंदा कारतूस और लूटी गई नकदी का हिस्सा भी बरामद किया है। यह पिस्टल कहां से आया है और किसका है इसकी जांच की जा रही है। पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 2:35 बजे दो नकाबपोश युवक बैंक में दाखिल हुए और हथियार के बल पर लूटपाट कर फरार हो गए। बैंक कर्मचारी विक्रम भगत के बयान पर थाना डिवीजन नंबर 7 में केस नंबर 65 दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने सिमरनजीत सिंह उर्फ अमरिक सिंह निवासी ग्रीन मॉडल टाउन, जालंधर को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पहले भी दो आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी और एनडीपीएस एक्ट के तहत केस शामिल हैं। पुलिस अब उसके फरार साथी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

अब बिना साइन चलेगा काम: छत्तीसगढ़ सरकार ने लागू की ई-ऑफिस प्रणाली, प्रक्रिया हुई पूरी तरह ऑनलाइन

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने ई-ऑफिस प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम निर्णय लिया है. नई व्यवस्था के तहत अब शासकीय पत्राचार में कार्यालयीन ज्ञापन, पत्र और आदेश जैसे दस्तावेजों में केवल मूल प्रति पर ही सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर किए जाएंगे. जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पृष्ठांकित प्रति (एंडोर्समेंट) पर अब हस्ताक्षर करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है. इस फैसले से सरकारी कामकाज में अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करने के साथ-साथ कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद है. शासन का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा और ई-ऑफिस प्रणाली और अधिक प्रभावी बन सकेगी. सभी विभागों और कार्यालयों को इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं. छत्तीसगढ़ में अभी सभी सरकारी विभागों में ई-आफिस के जरिए काम किया जा रहा है। इससे एक अधिकारी के लिए दो जगहों पर हस्ताक्षर करना संभव नहीं है। इस तकनीकी दिक्कत को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सभी आनलाइन और आफलाइन दस्तावेजों में दो जगहों हस्ताक्षर की बाध्यता ही खत्म कर दी है। शासन का कहना है कि प्रतिलिपि सिर्फ सूचनात्मक होती है। इसलिए उसमें हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं। सिर्फ अधिकारी का नाम, पदनाम और कार्यालय का उल्लेश होना ही पर्याप्त है।

भोपाल में बड़ा तालाब के पास बुलडोजर की कार्रवाई, 9 दुकानों को गिराया, 347 अन्य पर कार्रवाई की तैयारी

भोपाल बड़ा तालाब के किनारे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। भदाभदा इलाके से कार्रवाई की शुरुआत हुई है। तालाब किनारे अवैध रूप से बने नौ दुकानों को सोमवार को जमींदोज कर दिया गया है। वहीं, 347 लिस्टेड जगह हैं, जिन पर कार्रवाई होनी है। इसे लेकर भोपाल प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। 21 अप्रैल तक चलेगा अतिक्रमण अभियान दरअसल, भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील जो न सिर्फ शहर की पहचान है बल्कि भोपाल की जनता की प्यास भी बुझाती है। इसी बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर आज से बुलडोजर चलना शुरू हो गया है जो 21 अप्रैल तक चलेगा। जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं, जिन पर अवैध निर्माण किया गया है। भदभदा इलाके में चला बुलडोजर पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला है। नौ दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला, कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन बुलडोजर चलता रहा। बड़े तालाब के किनारे है अतिक्रमण     भोपाल की शान है बड़ा तालाब     नोटिस के बाद गुरुवार से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू     347 अतिक्रमणकारियों को लिस्टेड किया गया     नोटिस देने के बाद हो रही है कार्रवाई 15 दिनों में हटाया जाएगा अतिक्रमण वहीं, तालाब किनारे जितने भी अतिक्रमण हैं वो 15 दिनों के अंदर हटाए जाएंगे। 16 मार्च 2022 के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। एनजीटी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्नित कर रहा है। सभी लोगों को चिह्नित कर नोटिस दिया गया था। इसके साथ ही उनसे कहा गया था कि आप खुद से हटा लें, नहीं तो प्रशासन हटाएगी। गौरतब है कि आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। कुछ जगहों पर लोग खुद हटा रहे हैं। हर इलाके से अतिक्रमण हटाने के लिए अलग-अलग तारीख तय की गई है। प्रेमपुरा में हटाई गई दुकानों और मकानों की जमीन की कीमत कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक 2788 रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है। 72 घंटे में दुकानों को खाली कराया गया था, इसके बाद सोमवार सुबह एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राऊत टीम के साथ कार्रवाई शुरू की। टीटी नगर सर्कल में एफटीएल क्षेत्र में 116 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें 68 सरकारी और 48 निजी जमीन पर बने हैं। निजी जमीन पर बने 92 निर्माण-होटल, रिसोर्ट, फार्महाउस, मकान और दुकान की अलग से जांच चल रही है। नगर निगम ने इन्हें नोटिस देकर दस्तावेज मांगे हैं। पहले नोटिस, फिर कार्रवाई… अतिक्रमण चिह्नित करने के बाद संबंधित को नोटिस देकर दस्तावेज मांगे गए और सुनवाई की गई। जिन मामलों में अतिक्रमण पाया गया, वहां कार्रवाई की गई। बुजुर्ग दंपति को राहत… भदभदा चौराहे पर कार्रवाई के दौरान टीम एक कमरे तक पहुंची, जहां चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्ग दंपति रह रहे थे। उन्हें देख एसडीएम टीटी नगर अर्चना शर्मा ने कमरा नहीं तोड़ने के निर्देश दिए और अधिकारियों को देखभाल के लिए कहा। एफटीएल के 50 मीटर दायरे में सख्ती बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर तक के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस सीमा के भीतर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं बचेगा। 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। इसी आधार पर पूरी कार्रवाई की जा रही है। इन गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा इलाके में भी बड़ी संख्या में निर्माण किए गए हैं। 25 फरवरी से शुरू हुआ अभियान 28 फरवरी के बाद धीमा पड़ गया था, लेकिन अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए रोजाना कार्रवाई का शेड्यूल तय कर दिया है। किस दिन कहां चलेगा बुलडोजर 10 अप्रैल: हलालपुरा 11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे) 12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड 15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान, मैरिज गार्डन) 17 अप्रैल: हुजूर तहसील 18-19 अप्रैल: टीटी नगर 20 अप्रैल: बैरागढ़ शेष अतिक्रमण 21 अप्रैल: हुजूर तहसील अंतिम कार्रवाई वन विहार में पिलर निर्माण पर नया विवाद कार्रवाई के बीच वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने का मामला सामने आया है। विशेषज्ञ इसे वेटलैंड नियमों के खिलाफ बता रहे हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने इस मामले को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने की तैयारी की है।  

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द

आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता होगी रद्द आर.टी.ई. प्रतिपूर्ति राशि दूसरे राज्यों से बेहतर  रायपुर छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ​प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान            शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है। यह राशि सरकारी स्कूल में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) के आधार पर निर्धारित की जाती है। ​अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रतिपूर्ति             छत्तीसगढ़ में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर या उनके समकक्ष है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 से ही कक्षा 1 से 5 तक 7000 रूपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रूपए वार्षिक प्रतिपूर्ति राशि निर्धारित है। तुलनात्मक रूप से देखें तो मध्य प्रदेश में 4,419 रूपए बिहार में 6,569 रूपए, झारखंड में 5,100 रूपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रूपए वार्षिक दिए जाते हैं। यद्यपि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, किंतु समग्र मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति राशि संतुलित और उचित है। ​साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे ले रहे लाभ             वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में आर.टी.ई. के माध्यम से लगभग 3,63,515 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। चूंकि सभी निजी विद्यालयों को आर.टी.ई. अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही मान्यता दी गई है, अतः यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करें। ​नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई            यदि कोई निजी विद्यालय आर.टी.ई. के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

नक्सलवाद के अंधकार से बाहर निकली शर्मिला, स्वावलंबन की दिशा में बढ़ी कदम

नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई दंतेवाड़ा में लिख रही हैं बदलाव की इबारत रायपुर ​बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं। ​हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर ​          बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया। ​कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर ​        राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहाँ सिलाई का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे आधुनिक परिधान जैसे सूट और ब्लाउज सिलने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव लौटकर सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर आधुनिक खेती (टमाटर, मूली व भाजियाँ) कर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है। ​सुविधाओं ने बदला नजरिया          ​शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें पहली बार शासन की ओर से इतनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, ​पौष्टिक आहाररू कॉलेज में नियमित रूप से अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हुआ है। ​सक्रिय सहभागितारू बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। ​पारिवारिक प्रेरणा- शर्मिला की दीदी मुड़ो पोयामी (पूर्व नक्सल सदस्य) भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भरता की राह पर हैं। ​गाँव के विकास की उम्मीद ​         शिक्षा और कौशल की ताकत को समझने के बाद शर्मिला अब अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति भी सजग हैं। वे चाहती हैं कि उनके गाँव की कच्ची सड़कों और पेयजल की समस्याओं का जल्द निराकरण हो ताकि विकास की यह लहर सुदूर अंचलों तक पहुँचे। ​शर्मिला पोयामी का यह संघर्षपूर्ण सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की एक सशक्त पहचान बन गया है।

महिलाओं के हाथ में स्टीयरिंग: हरियाणा सरकार की ‘पिंक कैब’ योजना से बढ़ेगा रोजगार

चंडीगढ़. हरियाणा की गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत खासकर “लखपति दीदी” बनाने के लिए राज्य सरकार खास पहल करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए पिंक कैब योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है। इस योजना के अंतर्गत न केवल महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विकास की योजनाओं को बढ़ावा देने की कड़ी में पिंक कैब योजना आरंभ करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। महिलाओं के लिए विशेष “पिंक टैक्सी” या “महिला कैब” का विचार भारत और दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर शुरू हुआ। देश में सबसे शुरुआती संगठित पहल चेन्नई (2014) में “पिंक टैक्सी” के रूप में देखी गई, जहां महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए कैब सेवा शुरू की गई थी। इसके बाद देश के कई शहरों जैसे बेंगलुरु, कोलकाता और दिल्ली में इस तरह की सेवाएं शुरू हुईं। वैश्विक स्तर पर भी 2015 के आसपास “पिंक टैक्सी” जैसे महिला केंद्रित माडल सामने आए, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बार के बजट में पिंक कैब योजना की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। राज्य में करीब पांच लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से आधी से ज्यादा महिलाएं अब तक लखपति बन चुकी हैं। लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह की एक ऐसी सदस्य होती है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये या इससे अधिक है। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक है, जो कि लगातार बनी रहे। पिंक कैब योजना के अंतर्गत सरकार की चाह है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें स्वाभिमान पैदा किया जा सके। प्रदेश सरकार “पिंक कैब योजना” शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ेगी, ताकि उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की “लखपति दीदी” अवधारणा से इसलिए जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय के स्रोत से जुड़ सकें। महिलाओं को मिलेंगी कई प्रकार की सुविधाएं – – वाहन चलाने का विशेष प्रशिक्षण – इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण – स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता – सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था महिलाओं को क्या-क्या लाभ होंगे? 1. आर्थिक सशक्तीकरण – महिलाएं खुद वाहन चलाकर नियमित आय कमा सकेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी 2. रोजगार के नए अवसर – परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और बड़े स्तर पर रोजगार सृजित होगा 3. सुरक्षित यात्रा व्यवस्था – महिला ड्राइवर होने से महिला यात्रियों को अधिक सुरक्षित महसूस होगा, जिससे इस सेवा की मांग भी बढ़ेगी 4. आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – प्रशिक्षण और स्वरोजगार से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगी 5. हरित (ग्रीन) परिवहन को बढ़ावा 6. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से तीन राज्य उद्यमिता विकास संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। ऐसे प्रत्येक संस्थान में प्रति वर्ष एक हजार युवाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। इनमें महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक राज्य कौशल संकाय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र भी स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना है।

मानसा थर्मल प्लांट पर ड्रोन का खतरा: देर रात दिखी संदिग्ध गतिविधि, पुलिस-सेना हाई अलर्ट पर

मानसा/पंचकूला. उत्तर भारत के सबसे बड़े तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के ऊपर तीन से चार शक्की ड्रोन की गतिविधि देखने के बाद पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए गए हैं, इन ड्रोन की सूचना पुलिस ने भारतीय फौज को देने के बाद बठिंडा स्थित अधिकारियों की ओर से थर्मल प्लांट का निरीक्षण किया गया बताया जा रहा है कि तीन से चार थर्मल प्लांट की चारद्वारी नंबर 194 के नजदीक इन ड्रोन को काफी समय थर्मल के ऊपर उड़ते देखा गया इस दौरान यूनिट का सर्वेक्षण करने के बाद गेट नंबर 2 के द्वारा प्लांट से बाहर चले गए। मामले की गंभीरता को देखते प्लांट प्रबंधन के सुरक्षा प्रबंधन की ओर से इस मामले की जानकारी पुलिस चौकी बहनीवाल इंचार्ज को दी गई, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते इसकी जांच शुरू कर दी गई है, उन्होंने बताया कि थर्मल की ओर से रात के समय कुछ ड्रोन उड़ने की सूचना दी गई है जिसकी पुलिस जांच कर रही है। वहीं पंचकूला के अंतर्गत पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के पास 4/5 अप्रैल देर रात एक सड़क हादसा घटित हुआ। त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार दो चचेरे भाइयों को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने उसी दिन आरोपित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर वाहन को कब्जे में ले लिया है। पंचकूला वासी मृतक के भाई निशांत ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शनिवार रात वह अपने छोटे भाई अरुण (18) और चाचा के लड़के दीक्षित के साथ अपनी मौसी के लड़के से मिलने गांव बडोना कलां गए थे। रात करीब 12.15 बजे जब वे वापस अपने गांव लौट रहे थे, तो रायपुररानी में पीर बाबा की मजार के पास यह हादसा हुआ। निशांत अपनी बाइक पर पीछे चल रहा था, जबकि अरुण अपनी मोटरसाइकिल चला रहा था और दीक्षित उसके पीछे बैठा था। निशांत ने बताया कि त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे ट्रक के चालक ने वाहन को बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हुए गलत दिशा में लाकर अरुण की मोटरसाइकिल को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों भाई सड़क पर गिर गए और ट्रक का पिछला टायर उनके ऊपर से गुजर गया। चश्मदीदों और राहगीरों ने तुरंत ट्रक को रुकवाया और पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक अरुण और दीक्षित की मौत हो चुकी थी। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि यह सड़क हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सूचना मिलते ही रायपुररानी थाना से मुख्य सिपाही राजीव कुमार और उनकी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था। शिकायतकर्ता निशांत के बयान के आधार पर आरोपित ट्रक चालक अभिषेक ठाकुर, निवासी जिला चम्बा (हिमाचल प्रदेश) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 281 और 324(4) के तहत मामला दर्ज किया गया। मौके से दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल और ट्रक को जब्त किआ गया। हमारी टीम द्वारा उसी दिन आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया था।