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कार दुर्घटना बनी खतरा: इंदौर में पाइपलाइन टूटी, कॉलोनी में गैस फैलने से अफरा-तफरी

इंदौर. सुदामा नगर के ई-सेक्टर में बड़ा हादसा टल गया। कार की टक्कर से अवंतिका गैस की पाइप लाइन टूट गई और पूरे इलाके में हवा में गैस घुल गई। लोगों ने पाइप पकड़ने का प्रयास किया मगर प्रेशर के साथ उखड़ गया। करीब आधा घंटे तक हाहाकार मचा और लोग घरों से बाहर निकल आए। इस दौरान जरा सी चिंगारी धमाका कर सकती थी। घटना शनिवार सुबह करीब 11 बजे की है। मकान नंबर 3009 के सामने कार खड़ी हुई थी। तभी तेज रफ्तार में कार आई और चालक ने बाहर खड़ी कार में जोरदार टक्कर मारी। इससे कार आगे बढ़ गई और घर के बाहर लगे गैस पाइप को तोड़ दिया। इससे पूरी कॉलोनी में गैस फैलने लगी। रहवासी अंकित उपाध्याय, पवन शर्मा, कैलाश जायसवाल, वकील राहुल दवे सहित अन्य लोग भी एकत्र हो गए। लोगों ने पाइप जोड़ने की कोशिश की मगर गैस का दबाव इतना तेज था कि पाइप उखड़ने लगे। रहवासियों द्वारा द्वारकापुरी थाना और फायर ब्रिगेड को भी अलर्ट किया गया। करीब आधे घंटे बाद गैस कंपनी के कर्मचारी पहुंचे और सप्लाई बंद कर पाइप जोड़ा गया। रहवासियों ने कहा इस दौरान जरा सी चिंगारी पूरी कॉलोनी में आग लगा सकती थी। कंपनी को एक स्टेशन बनाना चाहिए ताकि आपातकाल स्थिति में वाल्व बंद कर सप्लाई रोक सकें। पुलिस ने टक्कर मारने वाले कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इंद्रलोक कॉलोनी के सिलाई कारखाने में भीषण आग सिलाई कारखाना में देर रात भीषण आग केशरबाग रोड़ पर शुक्रवार देर रात एक सिलाई कारखाना में आग लग गई। आग की लपटें दूर से दिखाई देने लगी थीं। फायरकर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण किया है। घटना इंद्रलोक कॉलोनी की है। दो मंजिला मकान में सिलाई कारखाना चलता था। रात में अचानक आग लग गई। मोती तबेला से एसआइ संतोष दुबे पानी के टैंकर लेकर पहुंचे और आग बुझाई। यह भी पढ़ें- एमपी में कक्षा 9वीं का बदला पूरा सिलेबस, बाजार से गायब हुईं NCERT की किताबें, अभिभावक परेशान संचालक की सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड एसआइ के अनुसार संचालक पीयूष द्वारा ही फायर ब्रिगेड के कंट्रोल रूम पर कॉल लगाया था। पहली और दूसरी मंजिल पर कारखाना चलाते हैं। तल मंजिल पर दुकान बना रखी है। रहवासी क्षेत्र होने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई थी।

कोरापुट से बस्तर तक कांपी धरती, भूकंप के झटकों का वीडियो सामने आया

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। CCTV में कैद हुई घटना शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।

डिजिटल सुरक्षा पर फोकस: पंचकूला में जल्द बनेगा हरियाणा का साइबर सिक्योरिटी हब

चंडीगढ़. हरियाणा में साइबर हमले के किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा केंद्र बनाया जाएगा। प्रदेश सरकार जल्द ही हरियाणा डिजिटल कवच-साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने जा रही है। वर्तमान में पंचकूला में प्रदेश स्तरीय डायल 112 केंद्र स्थापित किया गया है। इसके अलावा साइबर सिटी गुरुग्राम में कई विदेशी कंपनियों के काल सेंटर चल रहे हैं। भविष्य के संभावित खतरे से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। साइबर सुरक्षा के मद्देनजर हरियाणा डिजिटल कवच-साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। यह केंद्र सभी विभागों के लिए 24 घंटे सातों दिन थ्रेट इंटेलिजेंस, घटना होने की सूरत में तवरित प्रतिक्रिया देने, घटना न हो इसके लिए सुरक्षा मानक को पहले से लागू किया जाएगा। इस केंद्र की सबसे खास बात यह होगी कि इस केंद्र के माध्यम से संबंधित विभागों में नियमित रूप से सुरक्षा परीक्षण किया जाएगा। प्रदेश सरकार आने वाले समय में 70 विभागों की 1000 योजनाओं तथा सेवाओं को मर्ज करने जा रही है। इनके संचालन के लिए वन स्टाप हेल्पलाइन शुरू किया जाएगा। इस योजनाओं को लागू करने में नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रिड) की भूमिका अहम रहेगी। हालिया बजट में इन परियोजनाओं के लिए 423 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।

‘CM सेहत योजना’ से मरीजों को सहारा: पंजाब में 2300 बीमारियों तक मिल रहा इलाज

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत ढाल बनकर उभर रही है। यह योजना प्रति परिवार 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया करवा रही है, जिससे दिल की बीमारियों, कैंसर और अन्य गंभीर रोगों के इलाज में लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। खासतौर पर आपातकालीन स्थितियों में यह योजना समय पर इलाज सुनिश्चित कर आर्थिक बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर किया जा रहा है। अचानक होने वाली गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं अक्सर बिना चेतावनी के सामने आती हैं। ऐसे में समय पर इलाज और आर्थिक सुरक्षा दोनों जरूरी हो जाते हैं, जिसे यह योजना पूरा कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राज्य में 33 लाख से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं। 330 करोड़ रुपये हुए खर्च राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 1,98,793 मामलों में मुफ्त इलाज को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर करीब 330 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें से 59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अस्पतालों को जारी भी की जा चुकी है। योजना का लाभ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। मोहाली जिला अस्पताल की मेडिकल आफिसर डा ईशा अरोड़ा के मुताबिक, अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। समय पर जांच और इलाज से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। कैंसर-डायबिटीज और सांस से जुड़ी बीमारी 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस संबंधी रोग दुनिया भर में करीब 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अस्पताल नेटवर्क को मजबूत करने और दावों की प्रक्रिया को आसान बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना ने उन परिवारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें पहले इलाज के लिए कर्ज लेना या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारत में अभी भी करीब 47 प्रतिशत स्वास्थ्य खर्च लोगों को अपनी जेब से करना पड़ता है, ऐसे में यह योजना बड़ी मदद साबित हो रही है। कुल मिलाकर ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ न केवल इलाज का साधन बन रही है, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो रही है।

जशपुर दौरे पर सीएम साय: श्रीरामकथा रसपान में होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने गृह जिला जशपुर के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 1 बजे रायपुर से कुनकुरी रवाना होंगे। इसके बाद वे दोपहर 3 बजे सालिया टोली स्टेडियम में आयोजित प्रभु श्री रामकथा रसपान कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 4:30 बजे कुनकुरी से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे और शाम 6 बजे तक रायपुर लौट आएंगे। आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा बैठक आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा बैठक 6 अप्रैल को आयोजित की जाएगी। यह बैठक प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में होगी। बैठक का आयोजन सुबह 11 बजे नया रायपुर में किया जाएगा, जिसमें विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाने पर फोकस रहेगा। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 की योजनाओं की स्थिति का आकलन के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों पर भी चर्चा होगी। रायपुर में आज सन टू ह्यूमन साधना सत्र सन टू ह्यूमन फाउंडेशन द्वारा ‘सन टू ह्यूमन’ साधना सत्र का आयोजन किया जा रहा है। यह सत्र रायपुर के झूलेलाल गार्डन (कटोरातालाब) में आयोजित होगा। यह साधना सत्र प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक संचालित किया जाएगा। सामूहिक रांदल माता पूजा श्री गुजराती ब्रह्म समाज महिला मंडल द्वारा सामूहिक रांदल माता पूजा का आयोजन आज किया जा रहा है। यह आयोजन न्यू टिम्बर मार्केट, त्रिमूर्ति नगर स्थित दया भवन में संपन्न होगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8:30 बजे से होगी। झूलेलाल मंदिर का स्थापना दिवस झूलेलाल मंदिर भोईपारा में मंदिर का स्थापना दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन का आयोजन श्रीराम मंडली एवं श्रीराम युवा मंडली द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत सुबह 10 बजे से पूजा-अर्चना शुरू होगी, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा: सरकारी कर्मचारियों के परिजनों की अनुग्रह राशि ढाई गुना बढ़ी

भोपाल. अब तक सेवाकाल के दौरान किसी शासकीय सेवक की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिजनों को मिलने वाली 'अनुग्रह राशि' (Ex-gratia) की अधिकतम सीमा मात्र 50 हजार रुपये थी। बढ़ती महंगाई और आधुनिक दौर की जरूरतों के सामने यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान थी। लेकिन अब, मध्यप्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए इस सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार रुपये कर दिया है। वित्त विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, अब मृतक कर्मचारी के परिवार को उनके छह माह के वेतन के बराबर राशि दी जाएगी। इसमें 'वेतन पुनरीक्षण नियम 2017' के मानकों को आधार बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अनुग्रह राशि केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस आर्थिक सहायता होगी। आदेश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होने जा रहा है। यानी इस तारीख या इसके बाद आने वाले सभी दुखद प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को सवा लाख रुपये तक की मदद तत्काल मिल सकेगी। यह कदम उन छोटे कर्मचारियों (जैसे चतुर्थ श्रेणी) के लिए जीवनदान जैसा है, जिनके पास बचत के नाम पर बहुत कम संसाधन होते हैं। सवा लाख रुपये की यह राशि शायद किसी की कमी को पूरा न कर सके, लेकिन अंतिम संस्कार, तात्कालिक बिलों और बच्चों की शिक्षा जैसे शुरुआती झटकों को सहने में यह एक मजबूत लाठी का काम जरूर करेगी।

एलपीजी संकट के बीच मोगा के किसान का समाधान: बायोगैस से जल रहा चूल्हा, 20,000 में बचाए लाखों रुपये

मोगा  देश भर में एलपीजी संकट के बीच लोग सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं मोगा के गांव राजेआना के किसान निर्मल सिंह मौज में हैं। दरअसल, निर्मल सिंह ने साल 2011 में मात्र 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट लगाया था। इस प्लांट से निकलने वाली गैस से ही उनके घर का खाना तैयार होता है। आज जब एलपीजी के लिए लोग परेशान हैं, वहीं निर्मल सिंह को उनके इस बायोगैस प्लांट ने बड़ी राहत दी है। उन्हें न तो लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है और न ही महंगे दामों पर गैस सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। किसान के लिए बायोगैस एक वरदान साबित हुआ। 25 गज में 20 हजार की कीमत से लगाया प्लांट निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने घर में दूध के लिए पशु पाले हुए हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर का सही उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने घर पर बायोगैस प्लांट लगाया। यह प्लांट लगभग 25 गज क्षेत्र में करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इस बायोगैस प्लांट का खास फायदा समझ नहीं आया, लेकिन आज जब देश में LPG को लेकर संकट है तब उन्हें इस बायोगैस का असली महत्व समझ आया।  निर्मल सिंह ने कहा कि उनके घर में तो जैसे अपनी ही गैस एजेंसी खुली हुई है, इसलिए उन्हें कभी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले 15 साल में उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये की बचत की है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। उन्होंने बताया कि इस प्लांट को चलाने में कोई खास मेहनत नहीं लगती। रोजाना केवल दो टोकरी गोबर को पानी के साथ मिलाकर प्लांट में डालना होता है। सुबह यह प्रक्रिया करने के बाद शाम तक गैस तैयार हो जाती है। इस गैस से उनके 5 सदस्यों वाले परिवार का खाना आराम से बन जाता है।  पूरी तरह सुरक्षित है बायोगैस निर्मल सिंह ने बताया कि बायोगैस पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें गैस लीकेज से आग लगने का कोई खतरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि पंजाब में ज्यादातर किसानों के पास पशु होते हैं, इसलिए सभी किसानों को इस तकनीक का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बायोगैस अपनाने वाले किसानों पर एलपीजी संकट का कोई असर नहीं पड़ेगा। कम खर्च, कम मेहनत और अधिक लाभ, यही बायोगैस की सबसे बड़ी खासियत है। आधुनिक दौर में यह पुरानी तकनीक किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। 

मावां-धीयां सत्कार योजना: अप्रैल से महिलाएं उठाएंगी लाभ, सरकार ने जारी की अधिसूचना, पंजीकरण निशुल्क

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना की अधिसूचना जारी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बजट पेश करते समय वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि योजना का लाभ महिलाओं को 2 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। पंजीकरण सेवा केंद्रों पर निःशुल्क होगा।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह आप सरकार की गारंटी थी, जिसे पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं (सरकारी कर्मचारियों, पूर्व विधायकों, सांसदों तथा पेंशनभोगियों को छोड़कर) को इस योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,100 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सीएम मान ने कहा कि यह एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना है, इसलिए राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने अपील की कि जिन महिलाओं के बैंक खाते नहीं हैं, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। सीएम ने दावा किया कि प्रदेश की करीब 97 प्रतिशत महिलाएं (लगभग 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी। क्या है यह योजना? पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) की घोषणा की थी। इसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे। इस महत्वकांक्षी योजना के लिए 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है। किन्हें नहीं मिलेगा इसका लाभ? बता दें कि 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) में केवल वर्तमान या पूर्व सरकारी कर्मचारी, पूर्व और वर्तमान सांसद/विधायक और आयकर दाताओं को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत वयस्क महिलाएं इसके दायरे में आएंगी। कैसे करें आवेदन? इस योजना के लिए 13 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। पंजाब सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को काफी सरल और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के लिए किन-किन माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। आइए जानते हैं। कौन-कौन से डॉक्यूमेंट की पड़ेगी जरूरत? 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' के लिए रजिस्ट्रेशन करने से पहले आपके पास पंजाब का निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र, इनकम सर्टिफिकेट और राशन कार्ड जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है।   महिलाओं की आर्थिक भलाई पर जोर सरकार ने 'मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना' को लागू करने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। 2 अप्रैल के नोटिफिकेशन के अनुसार, मौजूदा सोशल सिक्योरिटी पेंशन पाने वाले भी इस स्कीम के तहत उन्हें पहले से मिल रही सोशल सिक्योरिटी पेंशन के अलावा पूरे फाइनेंशियल फायदे पाने के हकदार होंगे। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस स्कीम का मकसद पूरे राज्य में महिलाओं की फाइनेंशियल सिक्योरिटी और आजादी को मजबूत करना, घरेलू भलाई में सुधार करना, घरेलू फाइनेंशियल फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और पूरे पंजाब में जेंडर इक्विटी को बढ़ावा देना है। सभी पात्र महिलाओं की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और उनके पास वैलिड आधार और वोटर आईडी कार्ड होने चाहिए, साथ ही वे पंजाब के रजिस्टर्ड रेजिडेंट वोटर होने चाहिए। इन लोगों को नहीं मिलेगा फायदा     पंजाब सरकार, या केंद्र सरकार, या देश के किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     राज्य या केंद्र सरकार के तहत बने किसी भी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, स्टैच्युटरी बोर्ड, कॉर्पोरेशन, कमीशन, कमेटी, डायरेक्टरेट, कोऑपरेटिव इंस्टीट्यूशन, या ट्रिब्यूनल से पेंशन पाने और पाने वाली रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     जिन महिलाओं ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में इनकम टैक्स दिया है, मौजूदा या पूर्व मंत्री, सांसद या विधायक और मौजूदा मंत्री, सांसद या विधायक के पति/पत्नी को भी बाहर रखा जाएगा। महिला बाल विकास विभाग लागू करेगा स्कीम नोटिफिकेशन में कहा गया है कि फाइनेंशियल फायदे लाभार्थियों को हाई-लेवल इम्प्लीमेंटेशन कमिटी द्वारा समय-समय पर तय किए गए शेड्यूल और फ्रीक्वेंसी के अनुसार जारी किए जाएंगे। फाइनेंशियल मदद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। इसमें कहा गया है कि पैसे बांटने के तरीके में अगर कोई बदलाव या मॉडिफिकेशन होता है, तो वह मुख्यमंत्री की मंजूरी से किया जा सकता है। स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन सभी तय सेंटर पर फ्री होगा, और किसी भी लाभार्थी से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह स्कीम सोशल सिक्योरिटी और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लागू की जाएगी।

निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन जल्द, भोपाल को मिलेगा नया पांचवां रेलवे स्टेशन

 भोपाल  भोपाल मेन स्टेशन के साथ ही रानी कमलापति, संतनगर, मिसरोद के अलावा निशातपुरा के रूप में राजधानी भोपाल को जल्द ही पांचवा रेलवे स्टेशन मिलने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने निशातपुरा रेलवे स्टेशन कमीशनिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। बुनियादी सुविधाएं पूरी होने के साथ ही इसे ट्रेनों के हॉल्ट और यात्रियों के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर मालवा एक्सप्रेस सहित कई अन्य ट्रेनों को हॉल्ट मिलेगा जिससे भोपाल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ट्रैफिक वर्तमान के मुकाबले कम किया जा सकेगा। भोपाल स्टेशन पर अभी प्लेटफार्म उपलब्ध नहीं होने के चलते कई यात्री ट्रेन प्लेटफार्म खाली होने के इंतजार में आउटर पर खड़ी करनी पड़ती हैं। भोपाल रेल मंडल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए डीआरएम पंकज त्यागी एवं सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रेल मंडल में यात्री सुविधाओं में इजाफा करने के लिए नए प्रोजेक्ट लागू किए हैं। यात्री सुविधाओं में वृद्धि करने के लिए भोपाल रेल मंडल द्वारा माल परिवहन, टिकट चेकिंग अभियान, स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर आमदनी में 14 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। भोपाल रेलवे को वित्तीय 2025-26 में 896.38 करोड रुपए की आय अर्जित हुई है। इस राशि का इस्तेमाल यात्री सुविधाओं के एक्सटेंशन में किया जाएगा। इन ट्रेनों को निशातपुरा स्टेशन पर मिलेगा ठहराव डॉ. आंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस। इंदौर-पटना-इंदौर (शनिवार/सोमवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-पटना-इंदौर (सोमवार, बुधवार/बुधवार,शुक्रवार) द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस। डा.आंबेडकर नगर-प्रयागराज जंक्शन-डा. आंबेडकर नगर एक्सप्रेस (प्रतिदिन) अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद (रविवार/मंगलवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-बरेली-इंदौर (गुरुवार/बुधवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-हावड़ा-इंदौर क्षिप्रा (मंगलवार, गुरुवार, शनिवार/सोमवार, गुरुवार, शनिवार) त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस। भुज-शालीमार-भुज एक्सप्रेस (साप्ताहिक) यात्री सुविधाओं के एक्सटेंशन प्रोजेक्ट में भोपाल स्टेशन पर आधुनिक स्लीपिंग पॉड में फैमिली और सिंगल बेड की सुविधा को बढ़ाया जाएगा। 300 क्षमता वाला एग्जीक्यूटिव लाउंज डेवलप होगा। इंटीग्रेटेड पार्किंग सिस्टम के लिए स्टेशन के बाहर मल्टी लेवल पार्किंग भवन बनेगा। स्टेशन पर ड्रॉप एंड को फैसिलिटी की लेन बढ़ाई जाएंगी। भोपाल स्टेशन पर बनाए जा रहे सभी 6 बेस किचन और प्रीमियम ट्रेनों की मॉनिटरिंग में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का उपयोग भोपाल स्टेशन पर बनाए जा रहे सभी 6 बेस किचन और प्रीमियम ट्रेनों की मॉनिटरिंग में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। जो नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, उन्हें इंटरनेट के जरिए एआइ मॉनिटरिंग से लिंक कर यह व्यवस्था बनाई जाएगी। डीआरएम पंकज त्यागी के मुताबिक रेलवे में भी अन्य विभागों की तरह एआइ बेस्ड मॉनिटरिंग लगातार बढ़ रही है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर नई टेक्नोलॉजी के 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। सीनियर DCM बोले – भोपाल स्टेशन का दबाव कम होगा भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि निशातपुरा स्टेशन 2023 से तैयार किया जा रहा है और इसके अधिकतर कार्य पूरे हो चुके हैं। फिलहाल रेलवे द्वारा अंतिम परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नव वर्ष में इस स्टेशन को शुरू करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही उद्घाटन कार्यक्रम की अनुमति प्राप्त होगी, स्टेशन को ऑपरेशन में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर–वरावल (सोमनाथ) एक्सप्रेस का हॉल्ट निशातपुरा में नोटिफाई किया जा चुका है। भोपाल स्टेशन परिचालन की दृष्टि से अत्यधिक कंजस्टेड है। ट्रेनों का लगातार रिवर्सल होना यात्रियों की यात्रा में देर कराता है। निशातपुरा शुरू होने से न सिर्फ ऑपरेशन आसान होगा, बल्कि भोपाल के भीड़भाड़ वाले हिस्से में जाने का समय भी बचेगा। यात्री सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि “भविष्य में यात्रियों की मांग और लोड के आधार पर और ट्रेनों के हॉल्ट बढ़ाए जाएंगे। कई गाड़ियों के रूट और ठहराव का मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को अधिकतम सुविधा मिल सके। भोपाल स्टेशन से दो किलोमीटर दूर है निशातपुरा… भोपाल शहर में अभी 3 रेलवे स्टेशन हैं। इनमें भोपाल रेलवे स्टेशन, रानी कमलापति, संत हिरदाराम नगर शामिल हैं। निशातपुरा और मैन स्टेशन की कनेक्टिविटी बेहतर करने का भी एक प्रोजेक्ट है। संत हिरदाराम नगर स्टेशन का भी विकास कार्य चल रहा है। यह विकास कार्य पूरा होने पर यहां ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। निशातपुरा NSG-3 कैटेगरी का स्टेशन होगा भोपाल में निशातपुरा स्टेशन एनएसजी-3 कैटेगरी में कर दिया गया है। इसके चलते पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, निशातपुरा स्टेशन को 2017 से पहले सी कैटेगरी में रखा गया था। स्टेशनों के वर्गीकरण के मानदंडों को नवंबर 2017 से संशोधित किया गया है। नए वर्गीकरण के अनुसार, स्टेशनों के वर्गीकरण के लिए वहां आने वाले यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखा गया है। स्टेशनों को तीन समूहों में बांटा गया है, गैर-उपनगरीय (एनएसजी), उपनगरीय (एसजी), और हाल्ट (एचजी)। इसके अलावा इन समूहों को क्रमशः 1-6, 1-3 और 1-3 ग्रेड में रखा गया है। नहीं बदलनी पड़ेगी इंजन की दिशा मालवा और ओवरनाइट एक्सप्रेस जैसी चार से ज्यादा ट्रेनें हैं, जिनके स्टॉपेज भोपाल स्टेशन पर हैं। यदि इन ट्रेनों का हाल्ट भोपाल में खत्म कर निशातपुरा तक सीमित किया जाता है, तो इनके इंजन की दिशा नहीं बदलनी पड़ेगी।इससे उन्हें सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की तरफ रवाना करना आसान हो जाएगा। वर्तमान में इन ट्रेनों के भोपाल आवागमन के दौरान इंजन की दिशा बदलने में आधे घंटे से अधिक का समय लगता है, जिसे बचाया जा सकेगा।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में एमपी ट्रांसको की ट्रांसफार्मेशन क्षमता में हुई उल्लेखनीय वृद्धि : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने अपनी स्थापित ट्रांसफार्मेशन क्षमता में वृद्धि कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत में जहां कुल स्थापित ट्रांसफार्मेशन क्षमता 81911 एमवीए थी, वहीं मार्च 2026 की स्थिति में यह बढ़कर 84293 एमवीए हो गई है। यह वृद्धि प्रदेश की बढ़ती विद्युत मांग को सुचारु रूप से पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा मंत्री ने जानकारी दी कि इस वित्तीय वर्ष में क्षमता विस्तार के लिए एमपी ट्रांसको द्वारा कुल 35 ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए, जिनमें 11 सब-स्टेशनों की क्षमता वृद्धि तथा 21 सब-स्टेशनों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की स्थापना शामिल है। मंत्री  तोमर ने इस उपलब्धि पर एमपी ट्रांसको के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। ट्रांसमिशन लाइनें हुईं 43 हजार सर्किट किलोमीटर से अधिक ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि एमपी ट्रांसको ने इस वित्तीय वर्ष में 138 सर्किट किलोमीटर नई एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइनों का निर्माण कर उन्हें ऊर्जीकृत किया है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी की कुल ट्रांसमिशन लाइनें बढ़कर 43128 सर्किट किलोमीटर हो गई हैं। पॉवर ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़कर हुई 1046 वर्तमान में मध्यप्रदेश में एमपी ट्रांसको अपने 417 सब-स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण कर रही है, जिनमें 400 केवी के 14, 220 केवी के 88 तथा 132 केवी के 315 सब-स्टेशन शामिल हैं। 31 मार्च 2026 की स्थिति में एमपी ट्रांसको में कुल क्रियाशील पॉवर ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़कर 1046 हो गई है। इनमें 400 केवी स्तर के 40, 220 केवी के 218 तथा 132 केवी स्तर के 788 ट्रांसफार्मर शामिल हैं।