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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सूरज कुण्ड को स्वच्छ और सुंदर बनाने की चली मुहिम

भोपाल जल संरक्षण व संवर्धन के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार सम्पूर्ण प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं को संरक्षित करने एवं संवारने का कार्य किया जा रहा है। ग्वालियर दुर्ग पर स्थित ऐतिहासिक सूरज कुण्ड को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर के नेतृत्व में शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, गुरुद्वारा प्रबंध समिति के सदस्यों और नागरिकों ने सूरज कुण्ड की सफाई का कार्य विशेष अभियान चलाकर किया। ऊर्जा मंत्री  तोमर के नेतृत्व में सूरज कुण्ड की काई को साफ करने के लिये सभी लोगों ने मिल-जुलकर प्रयास किए। नगर निगम आयुक्त  संघ प्रिय के नेतृत्व में निगम का अमला मय संसाधनों के विशेष सफाई अभियान में लगा रहा। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने सभी से आग्रह किया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पूर्ण जिले में जल संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन का कार्य सभी के सहयोग से हाथ में लिया जाए। बरसात का पानी अधिक से अधिक संग्रहीत हो, इसके लिये शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में सार्थक प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण का कार्य केवल सरकार के भरोसे ही नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए।  

ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर में नाला निर्माण एवं सीवर लाइन का किया निरीक्षण

भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उपनगर ग्वालियर के वार्ड-3 एवं 4 में सीवर लाइन, सड़क, नाला निर्माण, पेयजल, साफ-सफाई एवं विद्युत व्यवस्था का घर-घर जाकर निरीक्षण किया। स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना एवं अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त  प्रदीप तोमर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने मोहिते गार्डन के सामने नाले का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नाला कचरे से भरा हुआ पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की तथा नाले की शीघ्र सफाई कर एक चेंबर बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों के दिए। साथ ही विनय नगर सेक्टर-03 में चल रहे सीवर कार्यों का निरीक्षण किया तथा स्वच्छता व्यवस्था का अवलोकन किया। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने वार्ड-4 के इंद्रा नगर, ओम नगर,  राम विहार कॉलोनी, सूरज नगर वार्ड 03 विनय नगर सेक्टर 3 आदि क्षेत्र में सीवर लाइन, सड़क, पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों ने भी ऊर्जा मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। लोगों ने जल भराव, गंदगी और सीवर जाम जैसी समस्याओं की शिकायत की, जिस पर मंत्री  तोमर ने अधिकारियों को तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवर और नाला निर्माण का मुख्य उद्देश्य आम जनता को जल भराव और गंदगी से राहत दिलाना है, इसलिए कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर, शहरी स्वास्थ्य केंद्र मोहिते गार्डन का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, दवाइयों की उपलब्धता एवं आमजन को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया तथा संजीवनी क्लीनिक पर कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से फोन पर बात कर आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्री  तोमर समय-समय पर क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण करते रहते हैं और मौके पर ही समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हैं।  

प्रमुख सचिव उमराव ने जबलपुर एवं मंडला जिले का किया भ्रमण, क्षीरधारा योजना अंतर्गत चयनित पशुपालकों के घर जाकर की भेंट

भोपाल प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी  उमाकांत उमराव औचक भ्रमण पर जबलपुर पहुंचे। यहां पर पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय सभागार में पशु चिकित्सकों के साथ बैठक की। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर जबलपुर  राघवेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव  उमराव ने बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रकरणों में विस्तार से एक-एक पशु चिकित्सक से विस्तृत चर्चा कर लंबित प्रकरण बैंकों से स्वीकृत करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले के अंतर्गत चयनित क्षीरधारा ग्रामों में चलाई जा रही गतिविधियों एवं दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान पर भी चर्चा की। अवार्णित पशुओं में नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों की प्रशंसा की प्रमुख सचिव  उमराव ने कृत्रिम गर्भाधान कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की प्रशंसा की। साथ ही न्यूनतम कार्य करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार करने के निर्देश दिए। सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों एवं मैत्री कार्यकर्ताओं से फील्ड में कार्य करने में आ रही कठिनाइयों एवं उनके निराकरण पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख सचिव  उमराव ने पाटन के क्षीर धारा ग्राम के पशु चिकित्सालय नुनसर का औचक निरीक्षण भी किया। बैठक में संयुक्त संचालक पशुपालन एवं डेयरी जबलपुर डॉ. व्ही.एन. मिश्रा एवं उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. प्रफुल्ल मून भी उपस्थित रहे। मंडला जिले के क्षीरधारा अंतर्गत चयनित ग्राम मैली का किया भ्रमण प्रमुख सचिव  उमराव मंडला जिले के ग्राम मैली पहुंचे। क्षीरधारा योजना अंतर्गत चयनित मैली ग्राम का भ्रमण किया। इस दौरान वे पशुपालक इंद्रकुमार सिंगरौरे, गौरीशंकर सिंगरौरे एवं कृष्णकांत झरिया, ग्राम बिनेका में शिवा चंदरोल, अशोक चंदरोल के घर पहुंचकर भेंट की। पशुपालकों को चयनित सीमेंन के उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही पशुओं के नस्ल सुधार में इसका अधिक से अधिक उपयोग करने पर जोर दिया। अधिकारियों को सघन बधियाकारण एवं बांझ निवारण शिविर लगाने को कहा। जिससे पशुओं में नस्ल सुधार किया जा सके। साथ ही दुग्ध उत्पादन में वृद्धि भी हो सके।।  

संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र सहित अन्य अधिकारी पहुंचे स्कूल, विद्यार्थियों से किया संवाद

भोपाल स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत शनिवार को प्रदेश की स्कूलों में भविष्य से भेंट कार्यक्रम का आयोजन हुआ। संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र  हरजिंदर सिंह भोपाल के पीएम  नवीन कन्या विद्यालय तुलसी नगर पहुंचे और विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बात करते हुए उन्हें किताबी पढ़ाई के साथ-साथ दैनन्दिनी जीवन में खेलों के माध्यम से शारीरिक सुदृढता एवं कम्प्यूटर और एआई जैसी तकनीकी सुविधाओं के समावेश पर भी जोर दिया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन की दृष्टि से 4 अप्रैल को प्रदेश की समस्त शालाओं में समाज के प्रमुख व्यक्तियों की सहभागिता में “भविष्य से भेंट’’ कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध, प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तियों को एक प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों से भेंट के लिये शालाओं में आमंत्रित किया गया था, जिसके तहत प्रदेश की अनेक शालाओं में स्थानीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी विशेष रूप से बच्चों के बीच पहुंचे और उन्हें जीवन में आगे बढने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान अनेक शालाओं में सामाजिक संस्थाओं एवं आमंत्रित व्यक्तियों द्वारा स्वेच्छा से विद्यार्थियों को शाला उपयोगी वस्तुएं भी भेंट की गई। स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगणों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया और सत्रारंभ के अवसर पर शालाओं में आवश्यक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। प्रत्येक जिले में प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों ने भी चयनित शालाओं में जाकर एक कालखण्ड अध्यापन कराया। भविष्य से भेंट कार्यक्रम में राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक  शीतांशु शुक्ला ने सीहोर, अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह इंदौर और देवास जिले की विभिन्न शालाओं में विद्यार्थियों के बीच जाकर संवाद किया इस अवसर पर राज्य शिक्षा केन्द्र के समस्त जिला प्रभारी अधिकारियों के द्वारा जिलों में प्रवास कर स्कूल चलें हम अभियान अंतर्गत प्रवेशोत्सव के दौरान बच्चों का शाला नामांकन, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों एवं नि:शुल्क साईकिल वितरण आदि का अवलोकन कर आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।  

हरित खाद, नीली-हरी शैवाल के उत्पादन तकनीक और उपयोग को गांव-गांव तक पहुंचाएं

रायपुर कृषि उत्पादन आयुक्त  शहला निगार ने कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ की। उन्होंने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि “हरित खाद, नीली-हरी शैवाल एवं जैव उर्वरकों” पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आगामी खरीफ सीजन से पहले किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों के प्रति जागरूक करना और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना था।       इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए हरित खाद, नीली-हरी शैवाल और जैव उर्वरक जैसे विकल्प फसलों की पोषक आवश्यकताओं का लगभग 50 प्रतिशत तक पूरा कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले दो से तीन महीनों में इन तकनीकों के उत्पादन और उपयोग को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।        प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए 150 से अधिक कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।         इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर उभरती अनिश्चितताओं के बीच छत्तीसगढ़ ने टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दक्षिण-पूर्व एशिया और विशेषकर ईरान में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों एवं उर्वरक निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के आयात पर संभावित असर को देखते हुए राज्य सरकार ने वैकल्पिक पोषक स्रोतों को बढ़ावा देने की पहल तेज कर दी है।       तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य सुधार और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए जैविक एवं पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने बताया कि नीली-हरी शैवाल नाइट्रोजन स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर धान की खेती में इसकी उपयोगिता अधिक है। वहीं, हरित खाद से मृदा की संरचना बेहतर होती है और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है। समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन को भविष्य की कृषि के लिए अनिवार्य बताया गया।     कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिसमें नीली-हरी शैवाल उत्पादन की तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा खरीफ सीजन के लिए इन विकल्पों के व्यापक उपयोग की रणनीति पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन वैकल्पिक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की लागत में कमी और मृदा स्वास्थ्य में सुधार भी सुनिश्चित होगा। कार्यक्रम के अंत में सतत, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।  

भोपाल रेल मंडल में RPF का अद्भुत प्रयास: 720 बच्चों को मिली घर वापसी, 33 लोगों को सुरक्षा—‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’

भोपाल  रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वित्तीय वर्ष अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और रेल संपत्ति की रक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर अपनी प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है। चौबीसों घंटे मुस्तैद रहकर आरपीएफ ने जहां अपराधों पर सख्ती से नियंत्रण किया, वहीं विशेष अभियानों के माध्यम से बिछड़े बच्चों को परिवार से मिलाया, खोया सामान लौटाया और जरूरतमंद यात्रियों को त्वरित सहायता प्रदान की। इसके साथ ही अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई कर रेलवे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया है। 33 लोगों की बचाई जान आपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत 720 बिछड़े, घर से भागे या अपहृत बच्चों को सुरक्षित परिजनों या चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। वहीं आपरेशन अमानत में 973 यात्रियों को करीब 2.88 करोड़ रुपए मूल्य का खोया सामान वापस दिलाया गया। आपरेशन जीवन रक्षा के जरिए 33 लोगों की जान बचाई गई। महिलाओं को दी जा रही सुरक्षा महिला सुरक्षा के लिए आपरेशन मेरी सहेली के तहत प्रतिदिन औसतन 110 ट्रेनों में महिला यात्रियों को सहायता दी गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेल अधिनियम के तहत 53,566 मामलों में कार्रवाई कर 3.81 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना वसूला गया। अनाधिकृत वेंडरों पर सख्ती इसके अलावा अवैध ई-टिकट कारोबार पर कार्रवाई करते हुए 64 लोगों को गिरफ्तार कर 52 लाख रुपए से अधिक के टिकट जब्त किए गए। अनाधिकृत वेंडरों पर सख्ती दिखाते हुए 18,166 लोगों पर कार्रवाई की गई। रेल संपत्ति चोरी के 328 मामलों में 635 आरोपियों को गिरफ्तार कर संपत्ति बरामद की गई। वहीं नशे के खिलाफ आपरेशन नारकोस के तहत 27 मामलों में 43 तस्करों को पकड़कर 27 करोड़ रुपए से अधिक के मादक पदार्थ जब्त किए गए। साथ ही साइबर सेल के माध्यम से 180 मोबाइल ब्लाक कर 39 फोन यात्रियों को लौटाए गए।  

5500 पदों के लिए दौड़ शुरू: 15 से फिजिकल टेस्ट, लाखों अभ्यर्थी आजमाएंगे दमखम

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल के 5500 पदों की भर्ती के लिए मैदान में पसीना बहा रहे युवाओं के लिए परीक्षा का समय आने वाला है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने शनिवार को संभावित शेड्यूल जारी करते हुए 15 अप्रैल से शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) शुरू करने की सूचना दी है। प्रवेश पत्र जल्द ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। एचएसएससी चेयरमैन हिम्मत सिंह ने भी फेसबुक और एक्स पर इसकी जानकारी साझा की है। पीएमटी के बाद शारीरिक जांच परीक्षण (पीएसटी) किए जाएंगे। पीएमटी के लिए आयोग की ओर से पहले ही खेल निदेशक को पंचकूला स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बास्केटबॉल और वॉलीबॉल हाल को आरक्षित करने का अनुरोध किया जा चुका है। खेल विभाग से कोच भी मांगे गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खेल विभाग की ओर से पीएमटी के लिए कितने कोच उपलब्ध कराए जाएंगे। तैयारियों को लेकर एचएसएससी चेयरमैन ने खेल विभाग के संयुक्त निदेशक अश्विनी मलिक के साथ बैठक भी की है, जिसमें स्टेडियम में उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा हुई। एचएसएससी की टीम ने खेल स्टेडियम में जाकर भी तैयारियों का जायजा लिया है। पीएमटी के लिए सीना और कद मापने की मशीनों के लिए अलग-अलग कंपनियों से टाईअप किया जाएगा। जल्द ही मशीनें आयोग के पास पहुंच सकती हैं। भर्ती में करीब दो लाख 70 हजार युवाओं ने आवेदन किया है। ऐसे में लगातार कई दिन तक पीएमटी की प्रक्रिया चलेगी।

घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक, अब तक ₹6.76 करोड़ कमाए

भोपाल मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है। प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं। होम-स्टे योजना पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है। सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है। बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं। "बाचा'' के  गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष  अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए  धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे  रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे,  अंकित का गुलमोहन होम-स्टे,  राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे,  सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सु मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां  कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए  कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा। छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया … Read more

स्टेट बार काउंसिल मतगणना अपडेट, चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने शिकायतों को बताया निराधार

रांची झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव की मतगणना 20 मार्च से लगातार जारी है. शुक्रवार यानी 3 अप्रैल को लगभग सभी जिला बार संघों में हुए मतदान के प्रथम प्राथमिकता के वोटों की गिनती पूरी कर ली गई है. हालांकि इन वोटों की जांच में दो दिन का समय लगेगा, जिसके बाद द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाएगी. गड़बड़ी के आरोपों को किया गया खारिज चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. गजेंद्र कुमार, अजय कुमार, नेहा ठाकुर और अनामिका शर्मा द्वारा उठाए गए आरोपों को निराधार बताया गया. उन्होंने कहा कि शिकायतें चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली थीं और इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए मामला स्टेट बार काउंसिल को भेज दिया गया है. जांच में नहीं मिली कोई अनियमितता इस मामले की जांच सहायक रिटर्निंग ऑफिसर व सेवानिवृत्त जिला जज शिवनारायण सिंह को सौंपी गई थी. उन्होंने मतदान केंद्र के रजिस्टर, कुल मतदान और बैलेट पेपर लेने के समय किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया. जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके आधार पर सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया. अजय कुमार के दावे पर भी नहीं मिला प्रमाण अजय कुमार ने एक भी वोट नहीं मिलने का मामला उठाते हुए कहा था कि उनके भतीजे ने उन्हें एक वोट दिया था, लेकिन जब इसकी जांच के लिए भतीजा का नाम मांगा गया, तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया.

राज्यपाल जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए जेनेटिक काउंसलिंग और व्यापक जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़कर इसे एक जन-आंदोलन बनाना होगा। राज्यपाल  पटेल शनिवार को खरगोन जिले के प्रवास के दौरान जनजातीय जीवन रक्षा एवं सिकल सेल हितैषी संवाद को संबोधित कर रहे थे।   राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि विवाह से पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच से आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होने  विशेष रूप से जेनेटिक काउंसलिंग पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत वर्ष 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकेंगे। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी महामहिम राज्यपाल के सिकल सेल के क्षेत्र में किए जा रहे पुनीत कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वह इस बीमारी की वेदना को समझते हुए पूरे प्रदेश विशेषतः जनजातीय वर्ग मे इसके उन्मूलन और सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक  बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया अनुवांशिक रोग है, जिसका  प्रभाव शरीर  में अनेक गंभीर रोग उत्पन्न करता है। समाज के सेवाभावी लोगों और संस्थाओं की प्रशंसा की, जिन्होंने इस क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं। सिकल सेल यूनिट का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल ने रक्षा अस्पताल में नवनिर्मित सिकल सेल यूनिट का विधिवत लोकार्पण किया। उन्होंने सिकेल सेल यूनिट के अंतर्गत निर्मित 2 वार्डों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और जांच उपकरणों की जानकारी ली। साथ ही निर्देशित किया कि सिकल सेल पीड़ितों को समय पर उपचार और उचित मार्गदर्शन मिलना सुनिश्चित किया जाए। सिकेल सेल पीड़ित बच्चों से की मुलाकात राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और अधिकारियों के कार्यों की सराहना की। सिकेल सेल क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सिकल सेल पीड़ित बच्चों से उपचार के सम्बंध में भी जानकारी प्राप्त कर उन्हे नियमित दवाई, सुपाच्य भोजन, अधिक मात्रा में पानी पीने, व्यायाम एवं ठंडे पानी से नहीं नहाने की समझाइश दी।