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फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी रोक, बिहार सरकार ने आवेदन के साथ सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना किया जरूरी

पटना  बिहार सरकार ने जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियमों को बदल दिया है. अब आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा. अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरी कागजात के आवेदन करता है, तो उसका आवेदन खारिज कर दिया जाएगा. इस नए नियम का मकसद फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर रोक लगाना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. नए नियम के तहत निवास प्रमाण पत्र के लिए अब सिर्फ पहचान पत्र देना काफी नहीं होगा. आवेदक को अपने पते से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज या जमीन से संबंधित कागज भी देना होगा. यानी अब यह साबित करना जरूरी होगा कि आप वास्तव में उसी जगह के निवासी हैं. क्या- क्या अनिवार्य आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी नियम बदल दिया गया है. पहचान पत्र के साथ-साथ आय से जुड़े सैलरी स्लिप, आय प्रमाण या अन्य संबंधित डॉक्यूमेंट देने होंगे. इससे गलत जानकारी देकर आय प्रमाण पत्र बनवाने पर रोक लगेगी. जाति प्रमाण पत्र के लिए भी अब नया नियम लागू किया गया है. इसमें पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर जमीन आवेदक के नाम पर नहीं है और पिता, दादा या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर है, तो उस स्थिति में वंशावली देना जरूरी होगा. इससे यह पता चलेगा कि आवेदक का उस परिवार से क्या संबंध है. कम होगा फर्जीवाड़ा सरकार ने खतियान, दान पत्र, जमीन के अन्य कागजात और भूमिहीनों को मिली जमीन के दस्तावेज को भी मान्य माना है. यानी अलग-अलग तरह के राजस्व रिकॉर्ड अब आवेदन के लिए स्वीकार किए जाएंगे. हालांकि जिन लोगों के पास जमीन या इससे जुड़े कागजात नहीं हैं, उनके लिए भी व्यवस्था रखी गई है. ऐसे आवेदक आवेदन के समय जगह निरीक्षण का विकल्प चुन सकते हैं. इसके बाद राजस्व कर्मी मौके पर जाकर जांच करेंगे और सही पाए जाने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. सरकार के इस फैसले से अब प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया थोड़ी सख्त जरूर हो गई है. इससे फर्जीवाड़ा कम होगा और सही लोगों को ही इसका लाभ मिलेगा.

नीतीश कुमार 11 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात और बिहार में नई सरकार के गठन पर होगी चर्चा

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बस चंद दिनों तक ही सीएम रहेंगे. नई सरकार की सुगबुगाहट प्रदेश में तेज हो गई है. एक तरफ नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे तो दूसरी ओर बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. कौन होगा इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ सामने होगा. खबर है कि नीतीश कुमार 09 अप्रैल को दिल्ली के रवाना होंगे. वहीं 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर वे शपथ लेंगे. 11 अप्रैल को पीएम मोदी से दिल्ली में बिहार में बनने वाली नई सरकार पर चर्चा के लिए मुलाकात हो सकती है. इसके बाद नीतीश कुमार 11 अप्रैल की शाम या फिर 12 अप्रैल को पटना लौट आएंगे. 13 अप्रैल को हो सकती है पटना में बैठक सूत्रों की मानें तो बिहार में बनने वाली नई सरकार पर रायशुमारी, चर्चा के लिए 13 अप्रैल को पटना में एनडीए की बैठक हो सकती है. 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद एनडीए विधानमंडल की बैठक बुलायी जाएगी जिसमें नेता चुना जाएगा. 18 अप्रैल के आसपास बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है. इस तारीख से अगर देखें तो अब नीतीश कुमार कुछ ही दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. प्रदेश के कामकाज को नहीं छोड़ रहे नीतीश बता दें कि एक तरफ जहां नई सरकार की तैयारी हो रही है और नीतीश कुमार को सीएम पद छोड़ना है इन सबके बीच वे प्रदेश के विकास कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं. गुरुवार (02 अप्रैल, 2026) को नीतीश कुमार ने शहर की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं का निरीक्षण किया. वे पाटलिपुत्रा कॉलोनी में निर्माणाधीन पार्क नंबर 113 का निरीक्षण करने पहुंचे. यहां लोगों के घूमने-फिरने, जिम, बच्चों के खेल-कूद की सुविधाएं सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद पाटलि पथ पर रूककर नेहरू पथ को पाटलिपथ से जोड़ने के लिए किए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी ली. रूपसपुर नहर के समीप रूककर खगौल नेहरू पथ-अशोक राजपथ को जोड़नेवाले रूपसपुर नहर पथ के प्रस्तावित फोरलेन चौड़ीकरण कार्य एवं मजबूतीकरण कार्य के संबंध में जानकारी ली. सगुना मोड़ के पास रूककर रूपसपुर नहर से सगुना मोड़ तक नेहरू पथ के दोनों तरफ भूमिगत नाला के साथ पथ के चौड़ीकरण के संबंध में जानकारी ली.  

नक्सल सन्नाटे से विकास की रफ्तार तक: ककनार घाटी में लौटी सामान्य जिंदगी

रायपुर बस्तर की भौगोलिक विषमताओं और कठिन परिस्थितियों के बीच विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर गांव कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जो कभी वामपंथी आतंक के गढ़ माने जाते थे, आज मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। इन गांवों के निवासियों के लिए पक्की सड़क का निर्माण एक ऐसा सपना था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान और माओवाद के साये ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर बनी नई सड़क में बस का दौड़ना बस्तर की बदलती तस्वीर का सबसे सशक्त प्रमाण है। ज्ञात हो कि बस्तर जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरूआत बीते 04 अक्टूबर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के द्वारा की गई थी। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के माध्यम से जिले के चार चयनित मार्गों पर बस सेवा संचालित की जा रही है।          मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत शुरू हुई यह बस सेवा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की एक कड़ी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोण्डागांव जिले के मर्दापाल से अपनी यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गांवों को जोड़ती है जहाँ कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा था। घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचती है। इससे उन लोगों का सफर अब सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सड़क और बस का इंतजार किया था।          वामपंथी समस्या के कमजोर पड़ने और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते अब इन संवेदनशील इलाकों में सड़कों का निर्माण संभव हो पाया है। पक्की सड़कों के इस जाल ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से अलगाव का डर भी खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। यह निरंतर बस सेवा इस बात का प्रतीक है कि बस्तर का वह हिस्सा जो कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति की राह पर अग्रसर है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर यह बस आज हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं और खुशहाली का संदेश पहुँचा रही है। इस बारे में चंदेला के सरपंच  तुलाराम नाग कहते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस ईलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास थम सी गई थी लेकिन आज सड़क बन जाने के साथ ही विकास को एक नई दिशा मिल चुकी है। इस ईलाके में स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र की सेवाओं के साथ ही उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्री सुलभ हो रही है वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में साप्ताहिक बाजार की रौनक देखते ही बनती है। क्षेत्र के ककनार सरपंच  बलीराम बघेल बताते हैं कि पहले उन्हे अपने तहसील मुख्यालय लोहण्डीगुड़ा और जिला मुख्यालय तक जाने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सड़क के बन जाने से बारहमासी आवागमन की सुविधा मिल रही है।

ट्राइबल गेम्स में ओडिशा का दबदबा, जगदलपुर में झारखंड रहा रनर-अप

रायपुर बस्तर के हृदय स्थल जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित प्रथम श्खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्सश् की एथलेटिक्स स्पर्धाओं का गुरुवार को भव्य समापन हो गया। 30 मार्च से शुरू हुए इस चार दिवसीय खेल महाकुंभ ने देशभर की जनजातीय प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ एथलीटों ने अपने अदम्य साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन जैसे ही अंतिम दौर के मुकाबले समाप्त हुए, पदक तालिका की तस्वीर साफ हो गई। इस रोमांचक खेल आयोजन में ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों ने अपनी खेल परंपरा और श्रेष्ठता को बरकरार रखते हुए शीर्ष स्थानों पर कब्जा जमाया।        ​ पदक तालिका के आंकड़ों पर गौर करें तो ओडिशा की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। ओडिशा को झारखंड से कड़ी टक्कर मिली, जिसने भी 8 स्वर्ण पदक अपने नाम किए, लेकिन अन्य पदकों के समीकरण के आधार पर वह दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, कर्नाटक की टीम 5 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों ने क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। मेजबान छत्तीसगढ़ के एथलीटों ने भी घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी उत्साह के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और 1 स्वर्ण, 4 रजत व 1 कांस्य पदक जीतने में सफलता प्राप्त की।         खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ​प्रतियोगिता के समापन सत्र के दौरान खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य रूप से वन मंत्री  केदार कश्यप, जिला पंचायत में खेल एवं युवा समिति के सभापति  बनवासी मौर्य, कमिश्नर  डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक  सुन्दरराज पी, कलेक्टर  आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने कार्यक्रम में शिरकत की। अतिथियों ने विजेता प्रतिभागियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस आयोजन ने न केवल जनजातीय युवाओं के खेल कौशल को निखारा है, बल्कि बस्तर की धरती पर खेल संस्कृति को एक नई दिशा भी प्रदान की है।

जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर करें सख्त कार्यवाही

भोपाल संपूर्ण प्रदेश में एलपीजी सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी तरह की कोई कमी नहीं है। मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने पेट्रोलियम पदार्थों की सुगम उपलब्धता के लिए प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर्स से कहा है कि वे प्रतिदिन मानीटरिंग करें और जमाखोरी के साथ कालाबाजारी की शिकायतों पर त्वरित तथा सख्त कार्यवाही करें। मुख्य सचिव  जैन ने गुरूवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टर्स के साथ जिलों में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि राज्य स्तर और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता पर प्रतिदिन रिव्यू होगा। मुख्य सचिव  जैन ने पीएनजी लाइन वाले जिलों में अधिकाधिक घरेलू कलेक्शन देने के लिए संबंधित एजेंसियों को जिला प्रशासन से नियमित समन्वय करने के साथ ही कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे एजेंसियों को वर्क फोर्स उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी की विशेषताओं का प्रचार-प्रसार करें, जिससे अगले 3 महीने की समय-सीमा मे उन क्षेत्रों में अधिकतम घरों तक पाइप से गैस पहुंच सके। बैठक में विगत एक माह में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा की गई। पेट्रोल पंप तथा गैस एजेंसियों पर अब लाइन आदि समाप्त होने के साथ पैनिक बुकिंग बंद होने पर संतोष व्यक्त किया गया। मुख्य सचिव  जैन ने निर्देश दिए कि वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव  जैन ने गैस की पर्याप्त उपलब्धता और निरंतर आपूर्ति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने घरों में पीएनजी कनेक्शन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि पाइप लाइन की क्षमता अनुरूप घरेलू कनेक्शन करें। कनेक्शन जो बंद हो गए हैं, उन्हें भी पुन: प्रारंभ करें। उन्होंने इन एजेंसियों के लिए विभागों से 24 घंटे में अनापत्ति प्रमाण-पत्र आदि जारी करने के साथ ही कालोनियों में कनेक्शन के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिए। जमा और मुनाफाखोरो के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश मुख्य सचिव  जैन ने प्रदेश में एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध की गई कार्यवाही की समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के लागू करने के साथ भारी अर्थदंड और एजेंसियों पर आवश्यक होने पर निलंबन की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि एजेंसियाँ कई बार मुनाफे के लिए अपने कर्मियों से भी कालाबाजारी करवाती है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। 2759 छापे मारे गए हैं। दोषियों के विरूद्ध 11 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और ऑयल कंपनी के डिपो से निरंतर आपूर्ति जारी है। जिलों में गैस पाईप लाईन बिछाने के सभी आर.ओ.यू आवेदनों को आवेदन प्रस्तुत करने के 24 कार्यकारी घंटो के अंदर डीम्ड सीजीडी अनुमति प्रदान करने के आदेश अनुसार कार्यवाही की जा रही हैं। राज्य शासन को अतिरिक्त 10% एलपीजी आवंटन प्राप्त हो चुका है। 27 मार्च 2026 को भारत सरकार द्वारा कॉमर्शियल एलपीजी का अतिरिक्त 20% आवंटन उ‌द्योग जैसे-स्टील, ऑटोमोबाईल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल्स, प्लास्टिक्स आदि के लिए किया गया है और उद्योगों को कॉमर्शियल गैस सप्लाई उक्त अनुसार की जा रही है। बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को केरोसीन आवंटन और एवं प्रत्येक जिले में 2 पेट्रोल पंपों का आंकलन प्रक्रियाधीन है। विभाग द्वारा केरोसीन वितरण के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। केरोसीन का वितरण मांग के आधार पर होगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी और आयल कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

​रफ्तार और शक्ति का महासंग्राम बस्तर की धरा पर संपन्न हुई खेलो इंडिया एथलेटिक्स स्पर्धाएं

रायपुर बस्तर की पावन धरा जगदलपुर के धरमपुरा स्थित आधुनिक क्रीड़ा परिसर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत गुरुवार को एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के अंतिम दिन ट्रैक पर रफ्तार, शक्ति और अटूट संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला। बीते 30 मार्च से भव्यता के साथ शुरू हुए इस खेल महाकुंभ के समापन अवसर पर देश के कोने-कोने से आए जनजातीय एथलीटों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कई रोमांचक पदक अपने नाम किए। दिन की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में से एक, पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में नागालैंड के धावक वेडे टमेरो ने शुरू से ही अपनी लय बरकरार रखी और 32ः28.46 के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनके ठीक पीछे महाराष्ट्र के जुझारू एथलीट कमलाकर लक्ष्मण देशमुख रहे, जिन्होंने रजत पदक जीता, जबकि जम्मू-कश्मीर के हंस राज ने कांस्य पदक जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।            इसी स्पर्धा के महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की संजीता ओरांव ने अपनी सहनशक्ति का परिचय देते हुए 40ः21.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जहाँ ओडिशा की संध्या मुर्मू को रजत और मेघालय की बलारिशा थिरनियांग को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।           मैदान पर रोमांच तब और बढ़ गया जब एथलेटिक्स के इस अंतिम पड़ाव पर लघु दूरी की स्पर्धाओं में धावकों ने अपनी बिजली जैसी तेजी दिखाई। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 21.51 सेकंड के रिकॉर्ड समय के साथ फिनिशिंग लाइन पार कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के अर्पण ताई और राजस्थान के जगदीश मीणा ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।           महिला वर्ग की 200 मीटर स्पर्धा में कर्नाटक की ऋतुश्री ने 25.87 सेकंड की रफ्तार से स्वर्ण पदक अपने नाम कर राज्य का गौरव बढ़ाया। मध्यम दूरी की 1500 मीटर दौड़ में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहाँ महिला वर्ग में कर्नाटक की नागिनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं पुरुष वर्ग में झारखंड के राहुल उरांव ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उल्लेखनीय है कि मेजबान छत्तीसगढ़ के मनीष कुमार ने घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी समर्थन के बीच तीसरा स्थान हासिल कर राज्य की झोली में कांस्य पदक डाला।          शक्ति और तकनीक के संगम वाली भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) स्पर्धा में मध्य प्रदेश के गुलाब सिंह ने 62.80 मीटर की प्रभावशाली दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के प्रमोद हागजेर मात्र कुछ ही फासले से पीछे रहकर रजत पदक के हकदार बने। टीम वर्क और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन करते हुए महिला 4×400 मीटर रिले दौड़ में झारखंड की आशा किरण बारला और तनीषा कुमारी की टीम ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं पुरुषों की इसी स्पर्धा में ओडिशा की टीम ने चौंपियन बनकर अपनी धाक जमाई। मेजबान छत्तीसगढ़ की पुरुष रिले टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। एथलेटिक्स मुकाबलों के इस अंतिम दिन की अंतिम रोमांचक स्पर्धाओं में महिला लंबी कूद शामिल रही, जहाँ झारखंड की प्रीति लकड़ा ने 5.54 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह महाकुंभ न केवल पदक तालिका में उलटफेर कर रहा है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को एक सशक्त राष्ट्रीय मंच प्रदान कर बस्तर के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।

संस्कृति एवं पर्यटन विभाग द्वारा लोकमाता देवी अहिल्या बाई पर बनी फिल्म को दिल्ली फिल्म फेस्टिवल में मिला सम्मान

भोपाल  देश की राजधानी दिल्ली में मध्यप्रदेश संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा देवी अहिल्या बाई की ३०० वीं जयंती के अवसर पर निर्मित फिल्म लोकमाता देवी अहिल्या बाई को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली – 2026 के दौरान “सिनेमा के माध्यम से इतिहास संरक्षण में योगदान" से सम्मानित किया गया। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी)  तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता और कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  कपिल मिश्रा द्वारा “नाइट ऑफ ऑनर्स” समारोह में फिल्म की निर्देशक डिंपल दुगर को सम्मानित किया। आईएफएफडी, दिल्ली सरकार (NCT) की एक आधिकारिक सांस्कृतिक पहल है, जिसका आयोजन दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम द्वारा किया जाता है। मध्यप्रदेश की संस्कृति और विरासत की वैश्विक पहचान का प्रतीक यह सम्मान : अपर मुख्य सचिव  शुक्ला अपर मुख्य सचिव संस्कृति, गृह, जेल और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व  शिव शेखर शुक्ला ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ दिल्ली – 2026 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर पर आधारित फिल्म को मिले सम्मान को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मध्यप्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विरासत की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के अवसर पर 7 मिनट की प्रभावशाली एनीमेशन फिल्म, उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप निर्मित की गई है। इसमें उनके सुशासन, धर्म संरक्षण, न्यायप्रियता और मंदिरों के पुनर्निर्माण की गौरवगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की निर्देशक डिंपल दुगर ने जताया आभार  जेवीडी एनीमेशन स्टूडियो की निदेशक एवं संस्थापक और फिल्म की निर्देशक डिंपल दुगर ने इस सम्मान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  धर्मेंद्र सिंह लोधी सहित वरिष्ठ अधिकारियों का फिल्म निर्माण में मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के निर्माण में प्राप्त मार्गदर्शन, सहयोग और विश्वास ने इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सम्मान न केवल पूरी टीम के प्रयासों का परिणाम है, बल्कि मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रेरणादायी इतिहास को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। फिल्म –JIO HOSTAR पर भी उपलब्ध लोकमाता अहिल्याबाई होलकर पर आधारित यह फिल्म उनके अद्वितीय जीवन, आदर्श शासन और जनकल्याणकारी कार्यों को केंद्र में रखती है। फिल्म में उनके न्यायप्रिय, संवेदनशील और दूरदर्शी शासन का सशक्त चित्रण किया गया है। धर्म, संस्कृति और समाज के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक कार्य जैसे मंदिरों का पुनर्निर्माण और तीर्थस्थलों का विकास को जीवंत रूप में दर्शाया गया है। साथ ही, यह फिल्म महिला सशक्तिकरण और सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।फिल्म यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार अहिल्याबाई होलकर ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, नीति और सेवा भाव के साथ शासन करते हुए आदर्श नेतृत्व का परिचय दिया।यह केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं, बल्कि आज के समय में भी सुशासन, नारी शक्ति और सांस्कृतिक गौरव की प्रेरणा देने वाली एक सशक्त प्रस्तुति है। आर इस फिल्म को JIO HOSTAR पर देख सकते हैं।  आईएफएफडी-2026 में 30 हजार से अधिक दर्शकों ने कराया पंजीकरण आईएफएफडी-2026 में 30 हजार से अधिक दर्शकों ने पंजीकरण कराया था।सात दिनों तक चले इस महोत्सव में 100 से अधिक देशों से आई 2,187 फिल्मों की रिकॉर्ड प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें 1,372 अंतर्राष्ट्रीय और 815 भारतीय फिल्में शामिल थीं। राजधानी के 15 से अधिक स्थलों पर प्रदर्शित 125 से ज्यादा फिल्मों ने दर्शकों को विविधता और विषयवस्तु से परिचित कराया।  

मल्लखंभ प्रतियोगिता के प्रथम दिन छत्तीसगढ़ की पुरूष टीम 124.35 अंक के साथ रही विजेता

रायपुर खेलो इंडिया ट्राईबल गेम्स 2026 के अंतर्गत आज सरगुजा जिले के अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में डेमो खेल मल्लखंभ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। प्रतियोगिता में आज रोप मल्लखंभ, पोल मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ का आयोजन हुआ। जिसमें खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। हिस्सा ले रहे 14 राज्यों की टीम में से राजस्थान, तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र झारखंड, मध्य प्रदेश,दिल्ली ,गुजरात, छत्तीसगढ़ के पुरुष टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई।              आज हुई स्पर्धा में छत्तीसगढ़ की मल्लखंभ टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय खेल खेलो इंडिया एवं बीच गेम्स आदि के दोनों वर्गों में विजेता रहे। छत्तीसगढ़ ने 124.35 अंक के साथ प्रथम, महाराष्ट्र ने 118.35 अंक के साथ द्वितीय एवं झारखंड ने 86.95 अंक के साथ तृतीय स्थान हासिल किया।

प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने विज्ञान संकाय शिक्षकों को राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान में दिया जा रहा प्रशिक्षण

भोपाल  मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मंशा के अनुरूप विज्ञान संकाय की शिक्षा को समृद्ध किया जा रहा है। इसमें विभाग द्वारा विज्ञान विषय के शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं मैथमेटिक्स जैसे विषयों में शिक्षकों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न पहलें की गई हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधारभूत सिद्धान्त के अनुसार विभाग द्वारा सभी हाई और हायर सेंकडरी विद्यालयों में समुचित अधोसंरचना विकास के साथ प्रयोगशालाओं तथा अन्य शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यकता है शिक्षक साथी इन संसाधनों का कक्षा शिक्षण में यथोचित उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे विद्यार्थी रूचिपूर्वक अध्ययन कर सकें। यह बात स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने शिक्षकों के प्रशिक्षण सत्र में कही। मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR) भोपाल के सहयोग से विगत 28 मार्च से भौतिकी, रसायन एवं गणित (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) विषयों के शिक्षकों को प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग एवं प्रायोगिक शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने एक अप्रैल को राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल पहुंचकर अवलोकन किया। साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षकों से संवाद किया।  17,000 शिक्षक होंगे प्रशिक्षित यह पहला अवसर है जब प्रदेश में विज्ञान शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में कक्षा 9 से 12 तक के विज्ञान विषय से संबंधित सभी संकायों (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) के शिक्षकों को विज्ञान प्रयोगशालाओं के व्यापक एवं सार्थक उपयोग का प्रशिक्षण विशेषज्ञों द्वारा दिया किया जा रहा है। प्रदेश के लगभग 17,000 शिक्षक, प्रयोगशालाओं के बेहतर उपयोग का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण का प्रथम चरण 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें कुल 416 मास्टर ट्रेनर तैयार किये जायेंगे। यह मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण देंगे। सभी कक्षाओं के लिए तैयार किए गए हैं अलग-अलग मॉड्यूल लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा विज्ञान प्रयोगशाला प्रशिक्षण के लिए सभी कक्षाओं के लिए अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इन मॉड्यूल्स में समग्र एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए सामग्री-आधारित प्रयोगों को शामिल किया गया है, जो विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं की गहन समझ प्रदान करते हैं। प्रत्येक प्रयोग में जीवनोपयोगिता, सिद्धांत, अधिगम उद्देश्य, कार्य विधि, प्रेक्षण, परिणाम, सावधानियां एवं प्रश्नोत्तर को व्यवस्थित रूप से सम्मिलित किया गया है। एनटीटीटीआर के सहयोग से संचालित यह पहल भारत सरकार के "Skill India" और "Developed India@2047" के विज़न के अनुरूप है, जो हमारे शिक्षकों को उनकी दक्षता संवर्धन में सहयोग करने के साथ ही कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने में भी सहायक होगी। इस अवसर पर आयुक्त लोक शिक्षण  शिल्पा गुप्ता, अपर परियोजना संचालक  नंदा भलावी कुशरे, एनटीटीटीआर के निदेशक प्रो. चंद्र चारू त्रिपाठी एवं अन्य अधिकारी और प्रशिक्षु शिक्षक उपस्थित थे।  

राजस्थान में जून तक खाद का पर्याप्त स्टॉक, खरीफ सीजन में मांग बढ़ने से पैदा हो सकती है चुनौती

जयपुर खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब भारत की खेती पर दिखने की आशंका है. खरीफ सीज़न से ठीक पहले फर्टिलाइजर सप्लाई प्रभावित होने की संभावना है. जिससे जुलाई-अगस्त में मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा गैप बनने का खतरा है. अभी क्यों है राहत की स्थिति? फिलहाल राहत की बात यह है कि अप्रैल से जून तक स्थिति नियंत्रण में है. राजस्थान सरकार के मुताबिक, इन महीनों में राज्य को करीब 6.15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, जबकि उपलब्ध स्टॉक 7.46 लाख मीट्रिक टन है, यानी मांग से ज्यादा. चूंकि इस दौरान खपत भी कम रहती है, इसलिए तत्काल संकट की स्थिति नहीं है. अप्रैल से जून के बीच फर्टिलाइजर की खपत सामान्य तौर पर कम रहती है. यही वजह है कि मौजूदा स्टॉक पर्याप्त माना जा रहा है. • जरूरत (अप्रैल–जून 2026): 6.15 लाख मीट्रिक टन • उपलब्ध स्टॉक: 7.46 लाख मीट्रिक टन यानी राज्य के पास जरूरत से ज्यादा उर्वरक मौजूद होने की वजह से फिलहाल किसी संकट की आशंका नहीं है. उर्वरकों के प्रबंधन के लिए कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि 01.04.2026 को राजस्थान में उपलब्ध उर्वरकों का स्टॉक पर्याप्त है. राज्य में किस खाद का कितना स्टॉक? 1 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध प्रमुख उर्वरकों का ब्रेकअप     यूरिया: 3.89 लाख मीट्रिक टन     डीएपी: 81 हजार मीट्रिक टन     एनपीके: 68 हजार मीट्रिक टन     एसएसपी: 2.08 लाख मीट्रिक टन ये स्टॉक मुख्य रूप से खुदरा विक्रेताओं, सहकारी समितियों और थोक भंडारों में मौजूद है. जून के बाद असली चुनौती, बढ़ेगी मांग असली चुनौती जून के बाद शुरू होती है. खरीफ सीजन के चलते जुलाई और अगस्त में उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़कर करीब 10 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है. वैश्विक हालात के कारण सप्लाई चेन प्रभावित रही तो यही बढ़ी हुई मांग संकट का रूप ले सकती है. जुलाई और अगस्त में खरीफ सीजन के चलते खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है.  यानी कुछ ही महीनों में मांग में तेज उछाल आता है, जो सप्लाई पर दबाव बनाता है. संकट का खतरा क्यों? • खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से इंपोर्ट सप्लाई प्रभावित होने की आशंका • अचानक बढ़ती खरीफ मांग • लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर दबाव इन तीनों के चलते जून के बाद गैप बढ़ सकता है और यही संभावित संकट की वजह है. सरकार की रणनीति क्या है? इसी संभावित दबाव को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें पहले से अलर्ट मोड में हैं. राज्य में उपलब्ध स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा है, ताकि कहीं जमाखोरी या गड़बड़ी न हो. उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए पीओएस मशीन के जरिए बिक्री अनिवार्य की गई है. साथ ही, कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए राजस्थान की सीमाओं पर चेकपोस्ट लगाने का फैसला किया गया है. संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य ने क्या कदम उठाए? • 15 दिन का स्टॉक वेरिफिकेशन अभियान • पीओएस मशीन से खाद वितरण अनिवार्य • कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती • बॉर्डर चेकपोस्ट (गुजरात, एमपी, यूपी, हरियाणा) • 29 मार्च–30 अप्रैल तक विशेष निगरानी अभियान राज्य में वर्तमान स्टॉक की बात करें तो यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी पर्याप्त मात्रा में खुदरा और थोक विक्रेताओं के पास मौजूद है. जिससे जून तक सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद है.   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हालात की गंभीरता को देखते हुए सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की और साफ किया कि 'हमने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अगले 15 दिनों तक फर्टिलाइजर के फिजिकल स्टॉक का वेरिफिकेशन करें, ताकि कहीं भी कमी या गड़बड़ी की स्थिति न बने. उन्होंने यह भी कहा कि खाद की कालाबाजारी और डायवर्जन को रोकना हमारी प्राथमिकता है. हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके.' यानी फिलहाल स्थिति संभली हुई है, लेकिन असली परीक्षा जुलाई-अगस्त में होगी. जब बढ़ती मांग, ग्लोबल सप्लाई दबाव और लॉजिस्टिक्स मिलकर फर्टिलाइजर सिस्टम की क्षमता को परखेंगे.