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एमपी में 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्त, 123 नगर परिषदों में 4-4 और 46 नगर पालिकाओं में 6-6 पार्षद मनोनीत

भोपाल  मध्य प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एल्डरमैन की बड़े पैमाने पर नियुक्ति की है. राज्य की 123 नगर परिषदों में से प्रत्येक में चार-चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं, जिससे कुल 492 सदस्यों की नियुक्ति हुई है. इसके अलावा 169 अन्य शहरी स्थानीय निकायों में भी एल्डरमैन तैनात किए गए हैं. शहरी विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया है।  कामकाज की देखरेख प्रशासन के प्रतिनिधियों के तौर पर एल्डरमैन नगर परिषदों के कामकाज की देखरेख करेंगे और विकास कार्यों को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे. इस नियुक्ति के माध्यम से पार्टी ने शहरी स्थानीय निकायों के भीतर अपने कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिससे संगठन और प्रशासन के बीच तालमेल और मजबूत हुआ है।  इन परिषदों की लिस्ट हुई जारी जारी की गई परिषदों की सूची में सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, रतलाम, मंदसौर और नीमच शामिल हैं।  CM मोहन ने दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सभी नियुक्त एल्डरमैन को बधाई देते हुए लिखा कि, मध्यप्रदेश के 169 नगरीय निकायों में नव-नियुक्त एल्डरमैन साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आप सभी को शहरों के समग्र विकास, सुशासन और जन-भागीदारी को बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुझे विश्वास है कि ‘विकसित मध्यप्रदेश-विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आप सभी अपनी ऊर्जा, अनुभव और समर्पण से अपने-अपने नगरों में प्रगति के नये आयाम जोड़ेंगे. नागरिकों की अपेक्षाओं पर शत प्रतिशत खरा उतरेंगे।  चंबल और बुंदेलखंड में लिस्ट होल्ड नव-नियुक्त पार्षदों का कार्यकाल वर्तमान परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाएगा और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा. प्रत्येक नगर परिषद में अधिकतम चार एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं. चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्रों के लिए सूचियों को फिलहाल रोककर (होल्ड) रखा गया है. कई नगरीय निकायों में नामों को लेकर आम सहमति न बन पाने के कारण सूचियों को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।  एल्डरमैन कैसे चुने जाते हैं? एल्डरमैन नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) के अंतर्गत मनोनीत (नियुक्त) पार्षद होते हैं. इनका चुनाव जनता द्वारा सीधे तौर पर नहीं किया जाता, बल्कि इनकी नियुक्ति सरकार या संबंधित प्राधिकारी द्वारा की जाती है. ये शहरी स्थानीय निकाय की बैठकों में भाग लेते हैं और अपनी राय देते हैं।  25 जिलों के 123 नगर परिषदों की पहली लिस्ट चंबल, बुंदेलखंड में फिलहाल लिस्ट होल्ड रखी गई है। कई निकायों में नामों को लेकर सहमति न बन पाने के कारण फिलहाल लिस्ट होल्ड रखी गई है। एल्डरमैन के नामों की घोषणा नगरीय निकाय में सबसे शुरुआती इकाई यानी नगर परिषद से की गई है। इन जिलों के नगर परिषदों के एल्डरमैन जारी हुई सूची सागर, रीवा, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, कटनी, डिंडोरी, नरसिंहपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, धार,देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच इन नामों की हुई घोषणा जिला: सागर नगर परिषद कर्रापुर: प्रभु सिंह, कमलेशरानी राय, श्रीपाल जैन, विक्रम सिंह नगर परिषद बिलहरा: मनीष गर्ग, राजू पटेल, पुष्पेन्द्र ठाकुर, हीरालाल अहिरवार पेंटर नगर परिषद सुरखी: अरुण गौतम, गोपाल पटैल, अभय जैन, विजय सिंह लोधी नगर परिषद राहतगढ़: अर्पित जैन चौधरी, सोनू सोती, पूरनदास कबीरपंथी, अनुराग चौरसिया जिला: रीवा नगर परिषद् वैकुण्ठपुर: कैलाश बारी, बहादुर सिंह, सीमा पाण्डेय, सतीश रजक नगर परिषद् सिरमौर: उर्मिला सिंह, सविता कोल, लालपति लोध नगर परिषद् डभौरा: लीलावती विश्वकर्मा, बृजनाथ साहू, ज्योति केशरवानी, भूपनारायण मिश्रा नगर परिषद् सेमरिया: गीता देवी विश्वकर्मा, बनारसी दास गुप्ता, मुकेश कुशवाहा, विमलेश द्विवेदी, राजकुमार सेन नगर परिषद् त्योंथर: सतीश तिवारी, मंगलेश्वर सिंह, पुष्पा देवी, अभयनाथ श्रीवास्तव नगर परिषद् चाकघाट: उमाशंकर केशरवानी, सौखीलाल सोनी, दीपिका नामदेव, पंकजदत्त त्रिपाठी नगर परिषद् मनगवां: पूनम बंसल, कुसुमलता वर्मा, भागवत प्रसाद द्विवेदी, लवकुश गुप्ता नगर परिषद् गोविन्दगढ़: नरेन्द्र बुधौलिया, ब्रम्हानन्द पाण्डेय, श्रीनिवास साकेत, शैलेन्द्र सोनी नगर परिषद् गुढ: शंभु प्रसाद लोनिया, शैलेन्द्र कुमार बंसल, खुशबू कोरी, रामप्रसाद गुप्ता जिला: मऊगंज नगर परिषद् नई गढ़ी: श्याम सुन्दर गुप्ता, ललित कुमार पटेल, विजय शंकर यादव, रामपाल सिंह जिला: शहडोल नगर परिषद् बुढार: तारा शर्मा, अशोक वैश, संजू पात्रीक, रविकांत चौरसिया नगर परिषद् बकहो: पंकज नापित, अनिल वर्मा, राहुल जैन, रजनीश प्रसाद मिश्रा नगर परिषद् ब्यौहारी: नीता साहू, विश्वनाथ कोल, प्रशांत गुप्ता, मनोज शुक्ला नगर परिषद् खाँड (बाणसागर): रामपाल गौतमा, शारदा प्रसाद गुप्ता, अरुणा केवट, रामबाबू पनिका नगर परिषद् जयसिंहनगर: रामलाल खटीक, चंद्रशेखर नामदेव, रामनिवास तिवारी, देवकी सोनी जिला: उमरिया नगर परिषद् नौरोजाबाद: झाला नरेश पटेल, गणेश सिंह, शिवनारायण गौतम, तीर्थबती कोल नगर परिषद् चंदिया: संजय यादव, राजकुमारी तिवारी, राकेश वर्मा, गोविन्द कोल नगर परिषद् मानपुर: हरीश विश्वकर्मा, रसिक खण्डेलवाल, रामनिधि शुक्ला, अमर बैगा जिला: कटनी नगर परिषद कैमोर: शोभा सोनी, अरुण गुप्ता, सुनीता मुंगेरिया, किरण बर्मन नगर परिषद बरही: किरण पटेल, रजनीश नामदेव, रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, मनोज रावत कोल नगर परिषद विजयराघवगढ़: राकेश पाण्डेय, भारत कोल, महेन्द्र ताम्रकार, रोशनी सोनी जिला: डिण्डोरी नगर परिषद् शहपुरा: राजेश साहू, मनोज सोनी, हारून मंसूरी, रामलाल रजक नगर परिषद् डिण्डौरी: कुवरिया मरावी, सुदील बरगैया, मोहन सिंह राठौर, आशीष सोनी जिला: नरसिंहपुर नगर परिषद सालीचौका: पंकज सहेला, राजेन्द्र वर्मा, सरस्वती विश्वकर्मा, भैरो प्रसाद गहरा नगर परिषद चीचली: कैलाश काशीवाले, चंद्रकांत गुप्ता, जगदीश कौरव, कलाबाई मेहरा नगर परिषद् साईखेड़ा: सुरेन्द्र सिंह तोमर, मोहन पटेल, शांति राजपूत, ब्रजेश चौधरी नगर परिषद तेंदूखेड़ा: परषोत्तम पटेल, राजू पाली, मनीष चौबे, ठाकुर दास हरिजन जिला: बालाघाट नगर परिषद बैहर: राजेश उइके, प्रिती मेरावी, राजेश्वर कदम, किर्ती शुक्ला नगर परिषद कटंगी: प्रगति बिसेन, संजय वाघमारे, प्रितम खटवानी, चंदन खरे नगर परिषद लांजी: आलोक चौरसिया, सुशीला दुग्गड, प्रगति पालिवाल, अविनाश रैच जिला: सिवनी नगर परिषद बरघाट: राजेन्द्र ठाकुर, किरण टेंभरे, रमन लुधियाना, प्रदीप ठाकुर नगर परिषद छपारा: स्वर्णिम साहू, रेखा जावरे, सुनील दत्त पाठक, दिनेश लोधी नगर परिषद लखनादौन: आशीष गोल्हानी, देवेन्द्र जैन, प्रकाश सोनी, नरेश सेन नगर परिषद केवलारी: सुधीर पाण्डेय, राजकुमार बघेल, त्रिवेणी दमाहे, संजय तिवारी जिला: छिंदवाडा नगर परिषद हर्रई: योगेन्द्र शर्मा, मनबोध बघेल, अशोक ठाकुर, नितिन चौरसिया नगर परिषद चांद: रमाकांत सिंग लोधी, ओम चौरसिया, तुलसीराम साहू, मुकेश चौरिया नगर परिषद् बिछुआ: भजनलाल गाकरे, चुकन प्रसाद विश्वकर्मा, रघुराज सिंग रघुवंशी, गणेश चौरागढ़े नगर परिषद् चांदामेटा बूटरिया: मनीष जैन, विक्रम सिंह गौर, उमेश … Read more

डेडलाइन से पहले सुकमा में भिड़ंत, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता; एक नक्सली मारा गया

सुकमा. केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा अब नजदीक आ गई है। इस डेडलाइन को पूरा होने में अब केवल दो दिन बचे हैं। इसी बीच सुकमा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां गट्टापाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुआ है। इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गट्टापाड़ इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान आज सुबह नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला। जंगलों के बीच दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। वहीं इस मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिलहाल, इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, घटना स्थल से सुरक्षाबलों ने .303 राइफल भी बरामद की है. इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. जवान जंगल में नक्सलियों की घेराबंदी में जुटे हैं.  इस पूरे ऑपरेशन को सुकमा एसपी किरण चव्हाण लीड कर रहे हैं. फिलहाल, सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन से जुड़ी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. यह बताया गया कि मुठभेड़ में 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को मार दिया गया है. मुठभेड़ अभी जारी है, सर्च के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. पूर्व नक्सलियों की साथियों से अपील इससे पहले शनिवार को कांकेर में परतापुर थाना में आत्मसमर्पण करने वाले तीन नक्सलियों ने अपने साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. उन्होंने गोंडी भाषा में पत्र लिखकर लीडर चंदर और रूपी को संबोधित करते हुए कहा कि हथियार छोड़कर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीना ही बेहतर है. नक्सलियों ने जंगल की कठिन जिंदगी और लगातार खतरे का जिक्र करते हुए बाकी साथियों से भी जल्द सरेंडर करने की अपील की है.

डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष कार्गो रूट से उद्योगों को सीधा लाभ, सप्लाई चेन होगी मजबूत

कार्गो हब बनाएगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ग्लोबल ट्रेड गेटवे, लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष कार्गो रूट से उद्योगों को सीधा लाभ, सप्लाई चेन होगी मजबूत 20 लाख से 80 लाख मीट्रिक टन तक कार्गो क्षमता विस्तार का लक्ष्य मल्टी मोडल कार्गो हब से निर्यात-आयात को मिलेगा बड़ा बूस्ट इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनेगा एयरपोर्ट जेवर  उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के सबसे बड़े कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी उभरने जा रहा है। एयरपोर्ट के पास निर्मित डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और विशेष कार्गो रूट इस क्षेत्र को ग्लोबल ट्रेड गेटवे बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है। डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल से बढ़ेगी क्षमता एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल विकसित किया गया है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 20 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शुरुआती चरण में लगभग 2.5 लाख टन प्रति वर्ष कार्गो संचालन की क्षमता विकसित की गई है, जिसे आगे बढ़ाकर करीब 15 लाख टन प्रति वर्ष तक विस्तारित किया जाएगा। लगभग 80 हजार वर्गमीटर में फैले इस कार्गो क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की लॉजिस्टिक्स सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। मल्टी मॉडल कार्गो हब का हो रहा विकास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां वायु मार्ग, सड़क और संभावित रेल कनेक्टिविटी के माध्यम से माल परिवहन को आसान बनाया जाएगा। डेडिकेटेड कार्गो रूट का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे औद्योगिक इकाइयों से सीधे एयरपोर्ट तक माल की तेज और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी। उद्योगों को मिलेगा सीधा लाभ यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और फार्मा सेक्टर को इस कार्गो हब से सीधा लाभ मिलेगा। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास स्थापित उद्योगों के उत्पाद अब तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे निर्यात को नई गति मिलेगी और उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। सप्लाई चेन होगी मजबूत, समय और लागत में कमी डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष रूट के कारण लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया अधिक सुगम और समयबद्ध हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उद्योगों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस तरह की सुविधाओं से उत्तर प्रदेश “जस्ट-इन-टाइम” सप्लाई मॉडल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा भी बढ़ेगा। ग्लोबल ट्रेड गेटवे के रूप में उभरता उत्तर प्रदेश नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह कार्गो हब उत्तर प्रदेश को ‘लैंडलॉक्ड’ स्थिति से बाहर निकालते हुए सीधे वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे न केवल निर्यात-आयात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

अंबाला की सुशीला देवी ने रिटायरमेंट के बाद खेल के मैदान में जीता गोल्ड और सिल्वर

हरियाणा हरियाणा को खेलों की जननी कहा जाता है और यहां की मिट्टी से निकले खिलाड़ी दुनिया भर में प्रदेश का नाम रोशन करते हैं. इसी परंपरा को अंबाला शहर के बलदेव नगर की रहने वाली 65 साल की सुशीला देवी आगे बढ़ा रही हैं. उन्होंने हाल ही में चंडीगढ़ में हुए ‘5वें खेलों मास्टर नेशनल गेम 2026’ में अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. सुशीला देवी ने इस उम्र में एक या दो नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग मेडल जीतकर यह संदेश दिया है कि फिटनेस और खेल के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती. तीन अलग-अलग खेलों में दिखाया दम सुशीला देवी ने बताया कि चंडीगढ़ में आयोजित इस नेशनल प्रतियोगिता में देशभर से 35 साल से ज्यादा उम्र के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. 65 साल के आयु वर्ग में खेलते हुए सुशीला देवी ने जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) और डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीता. वहीं, शॉट पुट (गोला फेंक) में उन्होंने अपनी ताकत दिखाते हुए गोल्ड मेडल झटका. सुशीला देवी बताती हैं कि खेलों के प्रति उनका यह लगाव बचपन से ही है, जो नौकरी के दौरान भी बना रहा. नौकरी के साथ भी जारी रखा खेलों का सफर सुशीला देवी पहले यमुनानगर के एक अस्पताल में सीनियर ऑफिसर के पद पर तैनात थीं. व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वह समय निकालकर खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेती रहती थीं. उनके परिवार में दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है. सुशीला देवी गर्व से बताती हैं कि जब वह मेडल जीतकर घर लौटती हैं, तो उनका नाती सबसे ज्यादा खुश होता है. उनके पति भी उन्हें हमेशा मैदान में उतरने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं. कैबिनेट मंत्री ने दी बधाई सुशीला देवी की इस उपलब्धि पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने भी उन्हें बधाई दी है. अपनी सफलता से उत्साहित सुशीला देवी ने अन्य महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी फिटनेस और पहचान के लिए खेलों से जरूर जुड़ना चाहिए. वह खुद रोजाना घर के पास के मैदान में 2 से 3 घंटे कड़ी प्रैक्टिस करती हैं. इससे पहले वह अजमेर में हुई नेशनल प्रतियोगिता में भी मेडल जीत चुकी हैं. पासपोर्ट की कमी से रह गई विदेश जाने की हसरत सुशीला देवी ने बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती थीं, लेकिन पासपोर्ट न बना होने के कारण वह विदेश में होने वाले गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाईं. हालांकि, उनकी हिम्मत अभी भी कम नहीं हुई है. वह लगातार प्रैक्टिस कर रही हैं और उनका लक्ष्य अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराना है.

बड़ा अपडेट: CM विजिट से पहले ROB पर लोड टेस्टिंग, ट्रैफिक जाम से जल्द मिलेगी राहत

बांदीकुई. अलवर-बांदीकुई मार्ग पर धोली गुमटी स्थित ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य को गति देने के प्रयास तेज हो गए हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने शनिवार शाम एक बार फिर लोड टेस्टिंग शुरू की, जिससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग अब ओवरब्रिज के कार्य को पूरा करने में जुटा हुआ है। बता दें कि बांदीकुई विधायक भागचंद टांकड़ा आरओबी को जल्द से जल्द चालू कराने के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। विभाग ने टोटल स्टेशन मशीन से 25-25 टन के चार ट्रकों को ओवरब्रिज पर खड़ा कर लोड डाला है। ट्रकों को 24 घंटे तक खड़ा रखा जाएगा, इसके बाद हटाकर अगले 24 घंटे तक ब्रिज की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरओबी को चालू करने पर निर्णय लिया जाएगा। सुरक्षा पर फोकस, फिर क्यों हुई टेस्टिंग गौरतलब है कि जून 2025 में भी नमो टेक कंसल्टेंसी द्वारा ब्रिज की जांच की जा चुकी है। इसके बावजूद दोबारा टेस्टिंग को लेकर विभागीय अधिकारी खुलकर कुछ नहीं कह रहे, लेकिन सूत्रों के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से कोई जोखिम नहीं लेने की नीति के तहत यह कदम उठाया गया है। यह आरओबी वर्ष 2015-16 में स्वीकृत हुआ था और 2019 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक निर्माण अधूरा है। करीब 28 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुआ प्रोजेक्ट बढ़कर 34 करोड़ तक पहुंच गया है। लगभग 980 मीटर लंबाई के इस ब्रिज के अधूरे रहने से लोगों को वर्षों से परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले तेज हुई हलचल मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे और संभावित उद्घाटन को देखते हुए विभागीय अधिकारी काम पूरा करने में जुटे हैं। सहायक अभियंता विनोद कुमार मीणा और नितेश सैनी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और बताया कि अब विभिन्न प्वाइंट बनाकर टेस्टिंग की जा रही है। विधायक के प्रयास, जल्द उद्घाटन की उम्मीद विधायक भागचंद टांकड़ा लंबे समय से आरओबी चालू कराने के प्रयास में लगे हैं। उन्होंने उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बैठकों में इस मुद्दे को उठाया है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री के आगमन पर विकास कार्यों के लोकार्पण की तैयारी है, जिसमें इस आरओबी को भी शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

ठाकुर दिलीप सिंह पर भगोड़ा नोटिस, CBI कोर्ट से 8 अप्रैल तक का समय; भैणी साहिब गद्दी विवाद और मर्डर केस में शामिल

लुधियाना  नामधारी संप्रदाय के सतगुरु जगजीत सिंह की मौत के बाद उत्तराधिकार विवाद में ठाकुर दिलीप सिंह अब फंसते नजर आ रहे हैं। सीबीआई स्पेशल कोर्ट मोहाली ने ठाकुर दिलीप सिंह को भगोड़ा (PO) घोषित करने के लिए पब्लिक नोटिस जारी कर दिया है। यह आदेश 9 साल से चल रही जांच और आरोपी के लगातार गायब रहने के बाद आया है। कोर्ट ने ठाकुर दिलीप सिंह के पीओ घोषित करने के लिए बाकायदा पब्लिक नोटिस भी पब्लिश करवा दिए हैं। आरोपी को 8 अप्रैल तक कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। अगर ठाकुर दिलीप सिंह कोर्ट में तय तिथि तक पेश नहीं हुए तो उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया जाएगा। ठाकुर दिलीप सिंह के खिलाफ तीन अलग-अलग थानों में केस दर्ज थे। माता चंद कौर की हत्या, सतगुरु उदय सिंह व माता चंद कौर के दामाद जगतार सिंह पर हमले की साजिश और नामधारी अवतार सिंह की हत्या में ठाकुर दिलीप सिंह का नाम आया। 2017 में ये तीनों मामले मर्ज करके सीबीआई को भेज दिए गए। सीबीआई ने चंडीगढ़ में मामला दर्ज करके इसकी जांच शुरू की, लेकिन ठाकुर दिलीप सिंह इस मामले में कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए। जिसकी वजह से कोर्ट ने पीओ नोटिस जारी किया है। भगोड़ा घोषित हुए तो CBI और पुलिस दिलीप सिंह की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए उनकी तलाश तेज की जाएगी। ठाकुर दिलीप सिंह कौन हैं? ठाकुर दिलीप सिंह नामधारी संप्रदाय के दिवंगत सतगुरु जगजीत सिंह के बड़े भतीजे हैं। 5 अगस्त 1953 को भैणी साहिब (लुधियाना) में महाराज बीर सिंह के घर जन्मे दिलीप सिंह सिरसा स्थित अपने डेरे से नामधारी संगत के एक हिस्से का नेतृत्व करते हैं। 2012 में सतगुरु जगजीत सिंह की मौत के बाद उत्तराधिकार का विवाद भड़का। माता चंद कौर ने छोटे भाई उदय सिंह का समर्थन किया, जबकि दिलीप सिंह खुद गद्दी पर दावा कर रहे थे। इस विवाद ने संप्रदाय को दो गुटों में बांट दिया। श्री भैणी साहिब में उत्तराधिकार को लेकर उपजे विवाद में सीबीआई की जांच…     2012 में सतगुरु जगजीत सिंह की मौत: 2012 में श्री भैणी साहिब के प्रमुख सतगुरु जगजीत सिंह की मौत हुई। मौत से पहले उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी को उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया। उनकी मौत के साथ ही उत्तराधिकार विवाद शुरू हुआ। ठाकुर उदय सिंह व ठाकुर दिलीप सिंह दावेदार थे।     सतगुरु उदय सिंह बने प्रमुख: ठाकुर उदय सिंह को श्री भैणी साहिब में नामधारी संप्रदाय की कमान सौंपी गई। उन्हें सतगुरु जगजीत सिंह की जगह सतगुरु बनाया गया। वहीं से ठाकुर दिलीप सिंह ने इस फैसले का विरोध करना शुरू किया।     जालंधर में टिफिन बम ब्लास्ट की साजिश: CBI जांच के अनासार ठाकुर दिलीप सिंह पर दिसंबर 2015 में एक खौफनाक आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है। साजिश यह थी कि जालंधर के फेमस 'हरिबल्लभ संगीत सम्मेलन' (25 दिसंबर 2015) के दौरान नामधारी संप्रदाय के वर्तमान प्रमुख सतगुरु उदय सिंह और माता चंद कौर के दामाद जगतार सिंह को टिफिन बम धमाके में मार दिया जाए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस हमले का मास्टरमाइंड दिलीप सिंह ही थे। इस मामले की एफआईआर जालंधर में दर्ज की गई।     माता चंद कौर हत्याकांड: यह संप्रदाय के इतिहास का सबसे हाई-प्रोफाइल मर्डर केस रहा। 4 अप्रैल 2016 को नामधारी संप्रदाय के मुख्यालय भैणी साहिब (लुधियाना) के भीतर माता चंद कौर की दो अज्ञात हमलावरों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। माता चंद कौर ने ठाकुर उदय सिंह को सतगुरु बनाने की घोषणा की थी, जिससे ठाकुर दिलीप सिंह गुट नाराज था। इस मामले की एफआईआर थाना कुमकलां लुधियााना में दर्ज की गई।     नामधारी अवतार सिंह की हत्या: माता चंद कौर की हत्या के बाद नामधारी समुदाय के अवतार सिंह की हत्या अज्ञात हमलावरों ने 2017 में की। इस हत्या में भी ठाकुर दिलीप सिंह का नाम सामने आया। इस मामले की एफआईआर साहनेवाल थाने में दर्ज की गई।     पुलिस जांच नहीं कर पाई तो सीबीआई को दिया केस: पुलिस जब इन तीनों मामलों को हल नहीं कर पाई तो राज्य सरकार ने इसे सीबीआई जांच के लिए भेज दिया। तीनों केस नामधारी समुदाय से संबंधित थे और उनका कनेक्शन दिलीप सिंह से बताया। सीबीआई ने तीनों केसों को मर्ज करके 2017 में एक नई एफआईआर दर्ज की और उसके बाद जांच शुरू की। जांच के बाद सीबीआई ने कई अहम खुलासे किए। सीबीआई जांच में यह बात सामने आई कि इन घटनाओं से सतगुरु उदय सिंह व उनके समर्थकों को डराना था।     मामले में निकाल थाइलैंड कनेक्शन: पंजाब पुलिस ने अमृतसर के पास से कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने कबूला कि उन्हें सिरसा गुट (दिलीप सिंह) से निर्देश मिले थे। बाद में CBI ने इस साजिश की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों (थाइलैंड कनेक्शन) की जांच शुरू की।     ड्राइवर की गिरफ्तारी से खुला था राज: इस मामले में दिलीप सिंह का पूर्व ड्राइवर पलविंदर सिंह उर्फ डिंपल मुख्य कड़ी साबित हुआ। डिंपल को साल 2018 में बैंकॉक (थाइलैंड) से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था। उसके बयानों के आधार पर ही साजिश की कड़ियां जुड़ीं। अन्य आरोपियों में जगमोहन सिंह, हरदीप सिंह और हरभेज सिंह शामिल हैं।

15 अप्रैल तक नहीं पहुंचीं नई किताबें, बिहार के स्कूलों में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई जारी

पटना. जिले के सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा के बाद आगे की कक्षा में प्रोमोट होने वाले स्कूली बच्चों को पुरानी किताबें स्कूल में जमा करने के लिए कहा गया है। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, पुरानी जमा लेने के बाद नई किताबों को मिलाकर बच्चों को वितरित किया जाएगा। पुरानी किताबों की उपलब्धता नहीं होने की स्थिति में ही बच्चों को नई किताबें दी जाएंगी। जिले में कक्षा एक से आठवीं की करीब 50 हजार पुरानी किताबें वापस होने की उम्मीद है। बहुत पुरानी और फटे हुए किताब वितरित नहीं की जाएगी। उनकी जगह नई किताबें दी जाएंगी। सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से 9वीं तक की नई किताबें पहुंचनी शुरू हो गई है। पहले चरण में नया सत्र शुरू होने से पहले चार लाख 25 हजार किताबें स्कूलों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। जिले के प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों की ओर से 7,25,189 नई किताबों की मांग की गई है। विभागीय आदेश के अनुसार, बच्चों को किताबें उपलब्ध कराने के बाद स्कूलों के निरीक्षण करने वाले अधिकारी यह भी जांच करेंगे नई किताबें उपलब्ध कराई गई हैं या नहीं। इसकी की रिपोर्ट विभाग को देंगे। 15 अप्रैल तक पहुंचाने का लक्ष्य मांग की गई किताबों को 15 अप्रैल तक स्कूलों में पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, स्कूलों में एक अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई प्रारंभ होगी। प्रधानाध्यापक को निर्देशित किया गया कि जब तक नई किताबें नहीं पहुंच पातीं, तब तक वे पुरानी से ही बच्चों को पढ़ाया जाएगा। जिले में कक्षा एक से आठवीं तक वर्गवार नामांकित बच्चे कक्षा     बच्चों की संख्या     किताबों की संख्या     प्रति बच्चा किताबें (औसत) कक्षा 1     46,732     41,568     0.89 कक्षा 2     60,260     50,056     0.83 कक्षा 3     68,380     59,649     0.87 कक्षा 4     76,868     66,779     0.87 कक्षा 5     79,229     67,567     0.85 कक्षा 6     67,402     57,699     0.86 कक्षा 7     64,417     53,817     0.84 कक्षा 8     64,335     52,144     0.81 कुल     5,27,623     4,49,279     0.85 कुल छात्र: 5,27,623 कुल किताबें: 4,49,279

दो दशक की ईमानदारी बनी ढाल और एक झटके में दर्जनों ज्वेलर्स को लगा करोड़ों का चूना

हरियाणा किसी बड़ी वारदात या चोरी को अंजाम देने के लिए कोई कितने साल तक प्लानिंग कर सकता है? एक-दो साल? जी नहीं, हरियाणा के पानीपत से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बंगाली कारीगर ने शहर के सर्राफा व्यापारियों (ज्वेलर्स) का विश्वास जीतने के लिए पूरे 25 साल लगा दिए. साल 2001 से शहर में काम कर रहे इस कारीगर ने जैसे ही व्यापारियों का पूरा भरोसा जीता, वह दर्जनों ज्वेलर्स के करोड़ों रुपये के गहने लेकर रातों-रात फरार हो गया. 25 साल से बना रहा था मास्टरप्लान पानीपत के ज्वेलर्स कभी सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि जो व्यक्ति उनके बीच 25 साल (साल 2001 से) से रह रहा है, वह असल में विश्वास नहीं जीत रहा था, बल्कि एक बहुत बड़ी डकैती की प्लानिंग कर रहा था. आरोपी कारीगर का नाम मोहिदुल मलिक है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है. वह पिछले 25 साल से पानीपत में रहकर ज्वेलरी रिपेयरिंग (गहने सुधारने) का काम कर रहा था. इतने लंबे समय तक ईमानदारी से काम करने के कारण बाजार के दर्जनों ज्वेलर्स उस पर आंख मूंदकर भरोसा करने लगे थे.   रिपेयरिंग के नाम पर इकट्ठा किए करोड़ों के जेवर ठगी का शिकार हुए पीड़ित ज्वेलर सचिन वर्मा ने बताया कि मोहिदुल मलिक ने हाल ही के दिनों में एक सोची-समझी साजिश के तहत काम किया. पिछले कुछ दिनों से मोहिदुल अलग-अलग ज्वेलर्स से रिपेयरिंग के लिए आने वाले गहनों को सिर्फ इकट्ठा कर रहा था और वापस नहीं लौटा रहा था. जब उसके पास करोड़ों रुपये का गोल्ड (सोना) जमा हो गया, तो वह एक दिन अचानक अपनी पत्नी और बच्चों के साथ शहर छोड़कर फरार हो गया. व्यापारियों को अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि 25 साल पुराना कारीगर उनके साथ इतनी बड़ी धोखाधड़ी कर सकता है. पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश तेज ठगी का अहसास होने के बाद ज्वेलर्स ने तुरंत पुलिस का दरवाजा खटखटाया है. डीएसपी सतीश वत्स ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बाजार के कई सर्राफा व्यापारियों ने कारीगर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस के मुताबिक, अभी तक यह स्पष्ट रूप से कन्फर्म नहीं हो पाया है कि आरोपी कुल कितनी कीमत के गहने लेकर फरार हुआ है, लेकिन अनुमान करोड़ों में है. पुलिस ने आरोपी बंगाली कारीगर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें तलाश में जुट गई हैं.  

पाम संडे पर ईसाई समाज ने एक स्वर में व्यक्त की श्रद्धा, सभी ने कहा – प्रभु हम आपके सेवक हैं

पाम संडे पर ईसाई समाज ने एक स्वर में व्यक्त की श्रद्धा, सभी ने कहा – प्रभु हम आपके सेवक हैं भोपाल  आज दिनांक 29/ 3/ 2026 को  ईसाई समाज में पाम संडे का दिन खास रहा और  सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रभु हम आपके सेवक है   हम पूरी कलीसिया ने मिलकर  देश-विदेश के लिए प्रार्थना करी कि प्रभु देश में शांति बनाए रखें और सभी स्वास्थ्य में प्रसन्न रहे चर्च के लोगों ने खजूर की डालियां हाथ में थाम कर सुभाष पाठक से बेथलम चर्च बरखेड़ी फाटक से चर्च तक रैली निकाली इस माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया रैली में शामिल लोग यीशु के बलिदान और उसकी महिमा से जुड़े गीत एवं ह होस्ना के नारे लगाए गए जिसमें रतलाम से आए हुए स्पीकर पास्टर धूलिया ने चर्च के अंदर पाम संडे पर सभी समाज के लोगों के साथ प्रभु का वचन दिया और उन्होंने बताया कि 2000 वर्ष पहले प्रभु यीशु ने यरुशलम में प्रवेश के दिन को याद किया . इस दिन लोगों ने खजूर की डालियां डाली और अपने वस्त्र मार्ग में बिछाकर प्रभु यीशु मसीह के आगमन पर उनका स्वागत किया श्री हैरीस लाल ने बताया कि चर्च में चर्च के बच्चों के द्वारा प्रभु यीशु मसीह को याद करते हुए स्क्रिप्ट करा और होस्नाके नारे लगाएंसभी  भोपाल के सभी गिरजाघर में नारे लगे और इसी प्रकार जुलूस निकाला गया चर्च के अंदर बहुत बड़ी संख्या में ईसाई समाज इकट्ठा हुआ सबने मिलकर युद्ध बंद करने के लिए प्रार्थना की गई और समाज में मिलकर रहने का प्रभु यीशु मसीह से प्रार्थना किया .

स्थापना दिवस पर भाजपा का बड़ा प्लान, 6 से 14 अप्रैल तक प्रदेशभर में होंगे आयोजन

रायपुर. भाजपा 6 अप्रैल को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाएगी। देशभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में भी इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों के संचालन के लिए प्रदेश स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यशवंत जैन को इस समिति का संयोजक बनाया गया है। वहीं, समिति में रंजना साहू, जी वेंकटराव और शिवनाथ यादव शामिल किए गए हैं। इसके अलावा ऋतु चौरसिया और कमल गर्ग भी समिति के सदस्य होंगे। 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक कार्यक्रमों का पखवाड़ा चलेगा। इस दौरान बूथ, मंडल और जिला स्तर पर विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। समिति द्वारा पूरे कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी और गरिमामय आयोजन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी इसी समिति पर होगी। 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी का गठन 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी का गठन हुआ था. हर साल 6 अप्रैल को बीजेपी स्थापना दिवस मनाती है. इस बार छत्तीसगढ़ में भाजपा 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विभिन्न कार्यों के जरिए बीजेपी स्थापना दिवस मनाएगी. इस बार के आयोजन में बीजेपी बाबासाहेब के विचारों और उनकी जीवनी को गांव गांव तक पहुंचाएगी. इस आयोजन से पहले बीजेपी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है. संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर अटैक किया है और कांग्रेस पर बाबासाहेब के अपमान का आरोप लगाया है. अविभाजित मध्य प्रदेश का हिस्सा छत्तीसगढ़ हमेशा से सुर्खियों में रहा है। साल 1998-99 में लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने रायपुर के सभा में वादा किया था कि अगर केंद्र में उनकी सरकार बनी तो वह छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दे देंगे। इसी चुनाव में बीजेपी की जीत हुई और छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बन गया। 1 नवंबर, 2000 में छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिल गया। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद राज्य की बागडोर कांग्रेस नेता और पूर्व कलेक्टर अजीत जोगी को सौंपी गई। 2003 में पहली बार हुए थे चुनाव अलग छत्तीसगढ़ में पहली बार विधानसभा के चुनाव 2003 में हुए और बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की। अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस का किला रहा छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद बीजेपी का गढ़ बन गया। साल 2000 से 2003 तक भाजपा विपक्ष की भूमिका में रही, 2003 में बीजेपी जीती और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में डॉ रमन सिंह पर भरोसा जताया। यह वही समय था जब पार्टी की स्थिति हासिए पर मानी जाती थी। इसी दौरान भाजपा के 13 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के संपर्क में आकर कांग्रेस में शामिल हो गए। बीजेपी इस समय बड़े घमासान से जूझ रही थी। ऐसे में डॉक्टर रमन सिंह ने चुनौती को सुनहरे अवसर में बदल दिया। 15 साल तक छत्तीसगढ़ राज्य में राज कर चुके रमन सिंह की भूमिका भी बीजेपी की प्रदेश में मौजूदा स्थिति में काफी योगदान रहा है।