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चना, सरसों और मसूर की खरीद 2 अप्रैल से शुरू, सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा कर दी है। चना, मसूर, सरसों और अरहर की खरीद के लिए रेट भी पिछली बार से बढ़ाकर घोषित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहनी और तिलहनी फसलों की सरकारी खरीद की कार्ययोजना जारी कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद लक्ष्यों का खुलासा किया। सरकार ने इस बार दालों और तिलहन के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसे किसानों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' बताया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि की गई है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। इसी तरह मसूर पर 300 रुपये की वृद्धि के साथ 7000 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों पर 250 रुपये की वृद्धि के साथ 6200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव निर्धारित किया गया है। अरहर के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य मिलेगा। खरीद लक्ष्य और अवधि प्रदेश में इस वर्ष रबी फसलों की खरीद 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यानी कुल 90 दिनों तक चलेगी। सरकार ने इस बार खरीद के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन यानी कुल उत्पादन का 100% खरीदी होगी। सरसों 5.30 लाख मीट्रिक टन, चना 2.24 लाख मीट्रिक टन और अरहर 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी। पारदर्शिता के लिए 'आधार इनेबल्ड' व्यवस्था सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पिछली सरकारों में दलहन-तिलहन की खरीद पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन योगी सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है। वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों को बाहर रखने के लिए प्रत्येक क्रय केंद्र पर आधार-सक्षम पीओएस (PoS) मशीनें लगाई गई हैं। किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जाएगा। 6 एजेंसियां और 190 से अधिक क्रय केंद्र खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 02 केंद्रीय एजेंसियां (नैफेड और एनसीसीएफ) और 04 राज्य स्तरीय एजेंसियां (यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस) तैनात की गई हैं। इस वर्ष नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा सीधी खरीद के लिए 190 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है, जबकि राज्य एजेंसियां भी अपने केंद्र संचालित करेंगी। पिछले वर्ष इस योजना से 20 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे, जिसे इस वर्ष और बढ़ाने का प्रयास है।

थाने में धमाके के बाद सनसनी, वायरल पोस्ट में खालिस्तानी संगठन का दावा

अमृतसर. बीते दिनों अमृतसर ग्रामीण के थाना भिंडीसैदां में हुए धमाके के मामले से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार भिंडीसैदां पुलिस स्टेशन में हुए धमाके की एक देश विरोधी संगठन द्वारा ली गई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में खालिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा इसकी जिम्मेदारी ली गई है पर इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वायरल पोस्ट में लिखा गया है कि अमृतसर खालिस्तान लिबरेशन आर्मी के हाई कमांड ने 30 मार्च 2026 को ऑपरेशन खालसा नया सवेरा के तहत अजनाला, अमृतसर के भिंडीसैदां पुलिस स्टेशन पर 2 ग्रेनेड हमले किए, जिससे तीन पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हो गए। इसकी जिम्मेदारी हम, KLA, स्वीकार करते हैं। ये हमले निर्दोष रणजीत सिंह (गुरदासपुर के गांव अधियां) के खून का बदला लेने के लिए किए गए हैं, साथ ही उन पीड़ित सिखों के लिए भी, जो झूठे मामलों में फंसाए गए और बाद में झूठे एनकाउंटर में मारे गए। ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेंगी और इन्हें और तेज किया जाएगा। डीआईजी संदीप गोयल को चेतावनी! हम तुम्हारे पीछे आ रहे हैं। इसके साथ ही खालिस्तान जिंदाबाद भी लिखा गया।  

राजस्थान सरकार पर बरसे पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, पंचायती राज चुनाव में देरी को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह से की अपील

 जयपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज सुबह जब जयपुर हवाई अड्डे पहुंचे, तो उनके तेवर काफी तल्ख नजर आए। त्रिवेंद्रम रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए वर्तमान सरकार पर जनहित के कामों को रोकने का सीधा आरोप लगाया। गहलोत ने साफ कहा कि उनकी इंतजार शास्त्र सीरीज का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। बेटे वैभव को लेकर किया खुलासा खबरों के बीच सबसे चौंकाने वाली बात तब आई जब गहलोत ने अपने परिवार पर हो रहे निजी हमलों का जवाब दिया। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि राजनीति में परिवार को घसीटना गलत है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मेरा बेटा वैभव सीएम आवास में नहीं बल्कि किराए के मकान में रहता था। आरसीए (RCA) चुनाव में भी वैभव को कोई सरकारी फायदा नहीं दिया गया। जोधपुर से चुनाव लड़ने का मौका पार्टी ने दिया था, मैंने उसे आउट ऑफ टर्म कोई लाभ नहीं पहुंचाया। पंचायत चुनाव पर मोदी-शाह से अपील गहलोत ने पंचायती राज चुनाव में हो रही देरी को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लपेटे में लिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है, जो कि संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने दिल्ली दरबार से अपील की है कि राजस्थान के इस मामले में तुरंत दखल दें। राजस्थान दिवस पर भी खिंची तलवारें गहलोत ने कहा कि राजस्थान दिवस हमेशा से एक तय तारीख पर मनाया जाता रहा है और खुद प्रधानमंत्री भी इसी दिन बधाई देते रहे हैं। लेकिन अब परंपराओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ शक के आधार पर नहीं दी जा सकती सजा, सभी आरोपी बरी

बिलासपुर. जगदलपुर के ढाई दशक पुराने बहुचर्चित फर्जी वेतन आहरण और भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। मामला जगदलपुर स्थित स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 1979 से 1985 के बीच कथित रूप से फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकालने से जुड़ा था, जिसमें करीब 42 हजार रुपये के गबन का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सेन और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने मिलकर तीन सफाई कर्मचारी जयसिंह, लालमणि और मयाराम के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए। कहा गया कि ये कर्मचारी वास्तविक रूप से काम नहीं कर रहे थे, फिर भी उनके नाम पर वेतन निकालकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप यह भी था कि वेतन बिलों में फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए। जगदलपुर की विशेष अदालत ने 28 जनवरी 2002 को इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (साजिश) सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2-2 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। मामले में गवाहों के बयान से यह सामने आया कि सभी कार्य तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आरके सेन के निर्देश पर किए गए थे। कोर्ट ने माना कि अन्य आरोपी केवल अधीनस्थ कर्मचारी थे, जो अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन कर रहे थे। उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र भूमिका या आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई। उन्होंने केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। मामले में जिन कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाले जाने का आरोप था, उन्होंने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे कब तक काम पर नहीं थे या उन्हें वेतन नहीं मिला। कई गवाहों ने कहा कि उन्हें काम के दौरान वेतन मिला और उन्होंने हस्ताक्षर कर भुगतान लिया। इससे अभियोजन का दावा कमजोर हो गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गहन समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन के पास आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। किसी भी आरोपी के खिलाफ यह साबित नहीं हुआ कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए या उनका उपयोग किया। हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान फर्जी होने का कोई विशेषज्ञ प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। कई दस्तावेज केवल कार्बन कॉपी थे, मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध नहीं होते। हाईकोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही जो आरोपी जमानत पर हैं, उनके जमानती बांड 6 महीने तक प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

UP में अनोखा मामला: जिंदा शख्स ने करवाई अपनी तेरहवीं, 1900 मेहमानों को बुलाकर सबको चौंकाया

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आई यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। अकेलेपन और भविष्य की चिंता ने 65 वर्षीय राकेश यादव को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है। राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं कर डाली। उन्होंने करीब 1900 लोगों को इस अनोखे भोज में आमंत्रित किया, ताकि उनके मरने के बाद होने वाले सभी संस्कारों का “झंझट” पहले ही खत्म हो जाए। निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था। उसमें मशहूर डायलॉग लिखा था, 'मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।' मानो यह लिखकर वो अपने जीवन की पीड़ा को बयान कर रहे हों।मुरादगंज चौकी क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में सोमवार दोपहर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, लेकिन किसी ने शादी नहीं की। दो भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में सिर्फ उनकी एक विवाहित बहन ही बची हैं। मेरी तेरहवीं कौन कराएगा, इस चिंता ने मजबूर किया बुढ़ापे में सहारे की कमी और अपने अंतिम संस्कार को लेकर उठते सवालों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उनका कहना है, मेरे बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा, मेरी तेरहवीं कौन कराएगा। इसी चिंता ने मुझे यह फैसला लेने पर मजबूर किया। पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया राकेश ने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया और अब वह एक साधारण मड़ैया में रह रहे हैं। उन्हें रिश्तेदारों पर भी भविष्य को लेकर भरोसा नहीं है। उन्होंने अपनी वृद्धावस्था पेंशन और वर्षों की मेहनत से बचाए पैसों से यह पूरा आयोजन कराया। करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए भोज की शुरुआत कन्या पूजन से हुई, जिसमें करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए गए। इसके बाद विशाल भंडारे में पूड़ी, सब्जी और बूंदी के लड्डू परोसे गए। रिश्तेदारों का भी खास ख्याल रखा गया। करीब 100 महिला रिश्तेदारों को साड़ियां और 90 पुरुष रिश्तेदारों को बर्तन भेंट किए गए। बहन भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं इस अनोखे आयोजन में उनकी बहन कालिंद्री भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जहां अकेलापन इंसान को जीते-जी अपने अंत की तैयारी करने पर मजबूर कर देता है।  

रतलाम में पोल्ट्री फार्म में मिली एमडी ड्रग फैक्ट्री, 100 किलो केमिकल जब्त, 3 आरोपी गिरफ्तार

रतलाम  पिपलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खाली पड़े पोल्ट्री फार्म में संचालित एमडी ड्रग फैक्ट्री का राजफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तीन से अधिक आरोपितों को एमडी ड्रग बनाते हुए पकड़ा है। फिलहाल पुलिस ने अधिकारिक रूप से आरोपितों की जानकारी और जब्त मशरूका का खुलासा नहीं किया है। दोपहर तीन बजे पुलिस मामले का खुलासा करेगी। जानकारी के अनुसार खेत में बने इस पोल्ट्री फार्म में अवैध रूप से एमडी ड्रग तैयार की जा रही थी। सूचना मिलने पर थाना पिपलौदा पुलिस, साइबर सेल जावरा एवं एसडीओपी संदीप मालवीय व थाना प्रभारी रमेश कोली के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने दबिश दी। सूत्रों के अनुसार छापे के दौरान पुलिस द्वारा करीब 600 ग्राम एमडी ड्रग और 100 किलो से अधिक संदिग्ध केमिकल बरामद करने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि इन केमिकल्स का उपयोग एमडी ड्रग बनाने में किया जा रहा था। पहले भी पकड़ी गया था अवैध माल     गौरतलब है कि इससे पहले 16 जनवरी को जावरा के कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। रात करीब 1 बजे मस्जिद के पीछे स्थित एक मकान पर दबिश देकर यह कार्रवाई की गई थी। मकान दिलावर खान पठान का बताया गया, जहां करीब एक वर्ष से अवैध गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। उस दौरान पुलिस ने मौके से 10 किलो से अधिक एमडी ड्रग, बड़ी मात्रा में केमिकल से भरे ड्रम, एमडी निर्माण में प्रयुक्त उपकरण, 12 बोर की बंदूक, 91 जिंदा कारतूस, दो मोर तथा चंदन की लकड़ियां बरामद की थीं। करीब ढाई माह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में अवैध ड्रग निर्माण के नेटवर्क की गंभीरता उजागर हुई है। पुलिस जल्द ही पूरे गिरोह का करेगी खुलासा फिलहाल पुलिस ने बोरखेड़ा मामले में पकड़े गए आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों के नाम-पते और नेटवर्क का पूरा खुलासा नहीं किया गया था। पुलिस का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।

बड़वानी उत्कृष्ट विद्यालय में ‘अपात्र’ का चयन: नियमों को ताक पर रखकर कार्तिक को भेजा नागालैंड, जिला टॉपर शिवम बागुल का हक मारा!

 बड़वानी  बड़वानी -शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़वानी में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना के तहत छात्रों के चयन में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ताज़ा खुलासे ने विद्यालय प्रबंधन और चयन समिति की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। आरोप है कि प्राचार्य और समिति ने जानबूझकर एक 'अपात्र' छात्र को उपकृत करने के लिए जिले के वास्तविक मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है। ​नियमों की धज्जियां: 2024-25 की योजना में 2025-26 के छात्र का चयन कैसे? ​सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नागालैंड भ्रमण की यह योजना सत्र 2024-25 के लिए निर्धारित थी। नियमानुसार, इस अवधि में विद्यालय में अध्ययनरत छात्र ही इसके पात्र थे। लेकिन चयन समिति ने कार्तिक शुक्ल का चयन किया, जो सत्र 2024-25 में इस विद्यालय का छात्र ही नहीं था, बल्कि एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। कार्तिक ने सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश लिया है। सवाल यह है कि जो छात्र योजना के समय स्कूल का हिस्सा ही नहीं था, उसे हवाई यात्रा और सरकारी भ्रमण का लाभ किस 'जादुई' प्रक्रिया के तहत दे दिया गया? ​मेधावी छात्र शिवम बागुल की अनदेखी क्यों? ​चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा प्रहार तब होता है जब हम कक्षा 10वीं के परिणामों को देखते हैं। सत्र 2024-25 में उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र शिवम बागुल (पिता राजेश बागुल) ने अपनी मेहनत से जिला टॉपर का गौरव हासिल किया था। कायदे से, ऐसे राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समन्वय कार्यक्रम के लिए पहला हक जिले के उस टॉपर छात्र का था जिसने विद्यालय का नाम रौशन किया। ​लेकिन, चयनकर्ताओं ने एक जिला टॉपर (शिवम बागुल) को दरकिनार कर एक ऐसे छात्र (कार्तिक शुक्ल) को चुन लिया जो उस वक्त स्कूल में था ही नहीं। यह सीधे तौर पर मेधावी छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाली कार्रवाई है। ​चयन समिति पर उठते तीखे सवाल: ​क्या चयन समिति को यह जानकारी नहीं थी कि कार्तिक शुक्ल सत्र 2024-25 में विद्यालय का छात्र नहीं था? ​जिला टॉपर शिवम बागुल के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया? क्या उस पर किसी 'खास' का दबाव था? ​प्राचार्य अनिल मिश्रा इस स्पष्ट नियम विरुद्ध चयन पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? ​भ्रष्टाचार की बू और जांच की मांग ​यह मामला केवल एक चयन की गलती नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और पद के प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होता है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इस चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ​शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की 'सेटिंग' और 'भाई-भतीजावाद' बड़वानी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यदि जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो मेधावी छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठना तय है।

देवरिया में नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़: सपा नेता निकला ‘धुरंधर’, चार आरोपी पकड़े गए

प्रयागराज जिले में नकली नोट का धुरंधर समाजवादी पार्टी का एक नेता निकला। वह अपने साथियों के साथ नकली नोट की फैक्ट्री देवरिया में चला रहा था। मामले में चार लोगों की गिरफ्तार किया गया है, जबकि सपा नेता विवेक यादव सहित दो फरार हैं। अभियुक्तों के कब्जे से एक लाख 18 हजार रुपये के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर सहित अन्य सामान बरामद हुआ है। इसी मामले में पूर्व में जेल जा चुका है धर्मेंद्र  डीसीपी गंगानगर कुलदीप गुनावत ने बताया गिरफ्तार अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार जनपद देवरिया में रहा है। वह रामपुर करखाना से पूर्व में जेल भी इसी मामले में जेल जा चुका है। गैंग बनाकर कर रहे थे यह धंधा चारों अभियुक्तों विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया के निर्देशन में गैंग बनाकर पैसे कमाने की उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से यह कार्य कर रहे थे। राहुल यादव व विवेक कुमार उपरोक्त पैसों के साथ यह लोगों से संपर्क करते थे और धर्मेंद्र, विवेक यादव और जो एक अन्य सहयोगी से मिलकर देवरिया स्थित कमरे पर नोट बनाकर, छापते थे व उसकी सप्लाई करते थे। बाजार में नकली नोट खपाने के लिए लाए थे ये सभी नकली भारतीय नोटों को बाजार में खपाने के उद्देश्य से लाये थे जिन्हें लोगों द्वारा छोटे ग्रामीण बाजारों में छोटे-छोटे मात्रा में (100-500/- रुपये) बजार में चलाया जाना था। अभियुक्त विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया की गिरफ्तारी अभी शेष है, जिसके गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों का गठन किया गया था। जिपं चुनाव लड़ चुका है विवेक यादव पुलिस का कहना है कि देवरिया निवासी विवेक यादव जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुका है। समाजवादी पार्टी से विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस ने देवरिया पुलिस से संपर्क साधा है। ये हैं गिरफ्तार अभियुक्त 1. राहुल यादव पुत्र राजकुमार यादव निवासी सरायकंसराय थाना दुर्गागंज जनपद भदोही, उम्र करीब 28 वर्ष। 2. विवेक कुमार यादव पुत्र राकेश यादव निवासी गोकलपट्टी थाना सुरीयावां जनपद भदोही, उम्र करीब 26 वर्ष 3. नरेन्द्र यादव उर्फ विराट पुत्र रामजी यादव निवासी बैतालपुर थाना गौरीबाजार जनपद देवरिया, उम्र करीब 26 वर्ष। 4. धर्मेन्द्र कुमार पुत्र राजाराम प्रसाद निवासी ग्राम महाराजगंज थाना रुद्रपुर जनपद देवरिया, उम्र करीब 22 वर्ष।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हटाई सेना के जवानों की डिसेबिलिटी पेंशन पर रोक

चंडीगढ़  भारतीय सेना के जवानों के हितों की रक्षा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सशस्त्र बलों के सदस्यों को दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और सैन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि सेवा के दौरान दिव्यांग हुए जवानों को उनका जायज हक तुरंत दिया जाए। यह फैसला उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। 1. कोर्ट का कड़ा रुख: "सेवा की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते" हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेना की ड्यूटी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में होती है। यदि कोई जवान सेवा के दौरान किसी शारीरिक अक्षमता या बीमारी का शिकार होता है, तो यह माना जाना चाहिए कि वह 'Attributable to Military Service' (सैन्य सेवा के कारण) है। कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि जवान की बीमारी का ड्यूटी से सीधा संबंध नहीं है। 2. पेंशन रोकने के नियमों पर सवाल अदालत ने पाया कि कई मामलों में सैन्य अधिकारियों द्वारा पेंशन के दावों को यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि दिव्यांगता 'अग्रवेटेड' (Aggravated) नहीं है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि अगर मेडिकल बोर्ड ने भर्ती के समय जवान को पूरी तरह फिट घोषित किया था, तो सेवा के दौरान पैदा हुई किसी भी अक्षमता के लिए विभाग ही जिम्मेदार है। 3. पूर्व सैनिकों को मिलेगी बड़ी राहत इस फैसले के बाद अब उन जवानों के लिए पेंशन का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें 'डिस्चार्ज' के समय मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट घोषित कर घर भेज दिया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पिछले बकाया (Arrears) के साथ पेंशन का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए। 4. सैन्य नियमों की व्याख्या में स्पष्टता हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कल्याणकारी नियमों की व्याख्या हमेशा लाभार्थी (जवान) के पक्ष में होनी चाहिए। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचना चाहिए।

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह के भतीजों को मिली अग्रिम जमानत

पटना  दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) से जेडीयू विधायक अनंत सिंह के भतीजे राजवीर सिंह और करमवीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह की एकलपीठ ने वरीय अधिवक्ता नरेश दीक्षित और अधिवक्ता कुमार हर्षवर्दन को सुनते हुए उक्त आदेश पारित किया। इससे पहले, इसी मामले में 19 मार्च को अनंत सिंह को भी हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। वह 2 नवंबर 2025 से बेऊर जेल में बंद थे और करीब साढ़े चार महीने बाद उन्हें राहत मिली थी। मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। राजवीर और कर्मवीर पर क्या आरोप हैं? राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जबरदस्ती दुलारचन्द को गाड़ी से खींच लिया और अनंत सिंह ने जान मारने की नियत से उनके बाएं पैर पर चला दी थी, इसके पश्चात दुलारचंद की मृत्यु हो गई थी। प्राथमिकी में अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर और करमवीर सिंह समेत अन्य को नामजद किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों को राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत नेपी दोनों को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अभियुक्त जांच में सहयोग करेंगे।