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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: निकिता ने रचा इतिहास, भारोत्तोलन में कुल 160 किलोग्राम उठाकर छत्तीसगढ़ को दिलाया पहला स्वर्ण

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की बेटी निकिता ने राज्य को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है। राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में निकिता ने महिला 77 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 160 किलोग्राम वजन उठाकर प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में निकिता ने स्नैच में 70 किलोग्राम तथा क्लीन एंड जर्क में 90 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों ही वर्गों में उन्होंने संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि छत्तीसगढ़ को खेलों में मजबूत शुरुआत भी दिलाई। प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर ओडिशा की मती जानी रहीं, जिन्होंने कुल 126 किलोग्राम वजन उठाया, जबकि तीसरा स्थान असम की जॉय पाटिर को मिला, जिनका कुल प्रदर्शन 118 किलोग्राम रहा। निकिता की इस उपलब्धि से पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है। खेल प्रेमियों और अधिकारियों ने उनकी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास की सराहना की है। यह जीत छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और आने वाले मुकाबलों में राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाएगी। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में देशभर के जनजातीय प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में निकिता का यह स्वर्ण पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।

Rajasthan IPS Nitya: सादगी से जीता दिल, चौकी छोड़ जमीन पर खड़े होकर लिया सम्मान

जोधपुर. राजस्थान पुलिस की युवा और तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी पीडी नित्या इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। जोधपुर ग्रामीण एसपी का पदभार ग्रहण करने के बाद शुक्रवार को वे पहली बार एक थाने के निरीक्षण पर पहुँचीं। लेकिन दौरे की चर्चा निरीक्षण से ज्यादा उनके उस 'अंदाज' की है, जिसने पुलिसिया तामझाम की दीवार को ढहा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक महिला एसपी ने वीवीआईपी कल्चर को दरकिनार कर अपने जवानों के साथ जमीन पर खड़े होकर 'गार्ड ऑफ ऑनर' स्वीकार किया। प्रोटोकॉल का 'कारपेट' और वो लकड़ी की 'चौकी' आमतौर पर जब भी कोई बड़ा पुलिस अधिकारी थाने के दौरे पर आता है, तो उसके स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया जाता है। सलामी (Guard of Honour) लेने के लिए एक विशेष लकड़ी की चौकी (Podium) रखी जाती है, जिस पर खड़े होकर अधिकारी जवानों की सलामी लेते हैं। क्या हुआ अलग: एसपी पीडी नित्या जैसे ही अपने सरकारी वाहन से उतरीं, उन्होंने बिछाए गए कारपेट पर चलने के बजाय कच्ची जमीन से होकर सलामी स्थल तक पहुंचना बेहतर समझा। पैर से सरकाई परंपरा: सलामी स्थल पर उनके लिए लकड़ी की चौकी रखी गई थी। लेकिन नित्या ने उसे अपने पैर से एक तरफ सरका दिया और नीचे जमीन पर ही जवानों के बिल्कुल बराबर खड़े होकर सलामी ली। जवानों के बराबर खड़ी होकर दिया बड़ा संदेश एसपी नित्या का यह कदम केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश था। पैर से उस चौकी को सरकाना इस बात का प्रतीक था कि बेमतलब के तामझाम और ब्रिटिश काल से चली आ रही 'दूरी' वाली परंपराएं अब मायने नहीं रखतीं। समानता का भाव: जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जमीन पर खड़ा होना यह दर्शाता है कि पुलिसिंग में अब 'साहब कल्चर' के बजाय 'टीम वर्क' और 'समानता' को प्राथमिकता दी जा रही है। वहां मौजूद हर पुलिसकर्मी एसपी के इस सादगी भरे व्यवहार से दंग रह गया। शेरगढ़ थाने का पहला निरीक्षण: अपराध नियंत्रण पर फोकस एसपी ने शेरगढ़ थाने का गंभीरता से जायजा लिया। आईपीएस इंदिरा देवी और सीआई बुद्धाराम ने उनका स्वागत किया। दस्तावेज और रिकॉर्ड: एसपी ने अपराध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के संधारण (Maintenance) की बारीकी से जांच की। प्राथमिकताएं: उन्होंने मादक पदार्थ (Drugs) की रोकथाम और महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों में भय और आमजन में विश्वास तभी पैदा होगा जब पुलिस सक्रिय और संवेदनशील होगी। पुरानी जीप और महिला बैरक: समस्याओं का सुना दुखड़ा निरीक्षण के दौरान थाने की जमीनी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। पुलिसकर्मियों ने एसपी को बताया कि थाने में जवानों की कमी है। जर्जर संसाधन: थाने की पुरानी जीप और महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग बैरक की अनुपलब्धता जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। आश्वासन: एसपी पीडी नित्या ने इन समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने जवानों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की बात कही। सोशल मीडिया पर 'तारीफों' का सैलाब जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, लोग एसपी पीडी नित्या की तुलना बॉलीवुड फिल्म 'सिंघम' के किरदारों से करने लगे। नेटिजन्स का कहना है कि राजस्थान को ऐसे ही अधिकारियों की जरूरत है जो तामझाम के बजाय काम और अपने मातहतों के सम्मान पर ध्यान दें।

2 अप्रैल की सुनवाई से पहले हाईकोर्ट जजों ने भोजशाला की जमीनी हकीकत परखी

धार शहर की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार को दोपहर में आकस्मिक रूप से स्थल का निरीक्षण किया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धार पहुंचे और लगभग एक घंटे तक भोजशाला परिसर का बारीकी से अवलोकन किया बाहरी और आंतरिक परिसर का लिया जायजा इस दौरान न्यायमूर्तिगण ने भोजशाला के बाहरी एवं आंतरिक दोनों परिसरों की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे की सारी प्रक्रिया के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। आयोजनों और सर्वे की ली जानकारी मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्तिगण ने परिसर में होने वाले मंगलवार और शुक्रवार के आयोजनों की जानकारी भी ली, कहां और किस प्रकार आयोजन होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। इंदौर खंडपीठ न्यायमूर्तिगण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे के संबंध में भी अधिकारियों से स्थानीय जानकारी ली। एएसआइ के अधिकारी ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। 16 मार्च को कहा था विवादित स्थल खुद देखेंगे बता दें कि ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट किया जाना है। प्रकरण में गत 16 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के दौरान विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही थी। इसी क्रम में करीब 12 दिन बाद न्यायाधीशों ने भोजशाला का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। शनिवार दोपहर लगभग 1:52 बजे न्यायाधीशों का वाहनों का काफिला भोजशाला परिसर पहुंचा और करीब 2:50 बजे तक निरीक्षण जारी रहा। इसके बाद वाहनों का काफिला वापस रवाना हो गया। इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा व एसपी मयंक अवस्थी मौजूद रहे। आगे होगी नियमित सुनवाई गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से इस मामले में नियमित सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में न्यायमूर्तिगण का यह स्थल निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मौके का प्रत्यक्ष अवलोकन उन्हें वास्तविक स्थिति समझने में सहायक होगा और आगे की सुनवाई में यह एक मजबूत आधार बन सकता है। पहले क्या हुआ था धार स्थित भोजशाला में 22 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे कार्य शुरू किया गया। यह सर्वे लगातार 98 दिनों तक चला। जुलाई 2024 में सर्वे रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण आगे की कार्रवाई लंबित रही। वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त रोक हटाए जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

Avalanche Tragedy: लद्दाख में शहीद हुआ नालंदा का जवान, अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़

नूरसराय/नालंदा. देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बिहार के नालंदा जिले के एक वीर सपूत ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के मोकरमपुर मिर्चायगंज निवासी जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज (45) लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन (एवलांच) की चपेट में आ गए थे। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही देर रात उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। बर्फ में दबने से बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान मौत जानकारी के अनुसार, 26 मार्च को लद्दाख में तैनाती के दौरान अचानक आए भीषण हिमस्खलन में सुमन कुमार सिंह बर्फ के नीचे दब गए। सेना के बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल लखनऊ स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां 27 मार्च को डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि वे पहले से पीलिया और ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे थे। परिवार का सहारा थे सुमन, सेना से जुड़ा है घराना सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के मजबूत स्तंभ थे। वे दो भाइयों में बड़े थे, जबकि उनके छोटे भाई वर्तमान में सीआईएसएफ में कार्यरत हैं। अपने पीछे वे पत्नी नीलम सिंह, दो बेटियां स्नेहा और सलोनी तथा दो बेटे अंश राज और यशराज छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी इंटर और छोटी बेटी मैट्रिक की छात्रा है। पिता के बलिदान की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ‘अमर रहें’ के नारों के बीच दी गई अंतिम विदाई शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा, पूरा इलाका ‘शहीद सुमन कुमार अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में बाढ़ के उमानाथ घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मां की आंखें नम, आखिरी बातचीत को किया याद शहीद की मां ने बताया कि 13 मार्च को बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। उसने कहा था, “आप चंडीगढ़ चली जाइए, बच्चों का ख्याल रखिएगा।” उन्होंने बताया कि बेटे ने दवा भी मंगवाकर दी थी और खुद का ख्याल रखने को कहा था। मंत्री श्रवण कुमार ने दी श्रद्धांजलि बलिदान की सूचना मिलते ही बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार शहीद के घर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश ने एक वीर योद्धा खोया है, लेकिन हमें उनके बलिदान पर गर्व है।

CM का मेगा ऐलान: अब हर घर पहुंचेगा नर्मदा का पानी 24×7, ₹1356 करोड़ की योजना लॉन्च

इंदौर  शहर में बढ़ती पानी की जरूरत पूरी करने की कवायद शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को 1356 करोड़ की नर्मदा चतुर्थ परियोजना का दशहरा मैदान में भूमिपूजन करेंगे। पेयजल व्यवस्था के लिए टनल निर्माण, क्लोरीनेशन सिस्टम भी बनेगा। सीएम सिरपुर में 20 एमएलडी के एसटीपी प्लांट का भी लोकार्पण करेंगे। वर्ष 2029 से इंदौर को चौथे चरण का पानी देने की योजना है। परियोजना के संबंध में भाजपा कार्यालय में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, एमआइसी सदस्य अभिषेक शर्मा आदि ने मीडिया को जानकारी दी। 24 घंटे पानी की सप्लाई और 29 गांवों में बिछेगी पाइपलाइन इंदौर महापौर भार्गव ने बताया कि नर्मदा के चौथे चरण की योजना पूरी होने से शहर में करीब 900 एमएलडी पानी की सप्लाई होगी। अमृत 2.0 योजना के तहत इस परियोजना से शहर में 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 29 गांवों के 10 वार्ड में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा नए नल कनेक्शन से पानी सह्रश्वलाई होगा। 40 नई टंकियों का निर्माण कर जल वितरण होगा। चौथे चरण में यशवंत सागर की क्षमता 30 से बढ़ाकर 45 एमएलडी कर रहे हैं। पैकेज 2     पैकेज-2 के तहत वांचू पाइंट से राऊ सर्कल तक 2235 एमएम की 39 किमी लंबी ग्रेविटीमेन पाइपलाइन बिछाकर तीन जगह 2870 मीटर लंबाई में टनल निर्माण किया जाएगा। राऊ सर्कल पर क्लोरिनेशन सिस्टम बनेगा। 448.23 करोड़ रुपए में लगभग 30 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य है। पैकेज 3     पैकेज-3 और 4 के तहत 40 नए ओवरहेड टैंक बनेंगे, 76 टैंकों का नवीनीकरण किया जाएगा। पैकेज-3 में 15 से 35 लाख लीटर क्षमता के 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण कर 29 मौजूदा टैंकों का सुदृढ़ीकरण होगा। इन टैंकों को जोड़ने के लिए 400 से 600 एमएम की 27.4 किमी लंबी फीडर पाइपलाइन तथा 1200 मिमी व्यास की 4.7 किमी ग्रेविटी मेन व 685 किमी डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाई जाएगी।     1 लाख 26 हजार पानी के कनेक्शन घरों में देकर 1 लाख 8 हजार से अधिक वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे 24 घंटे प्रेशर के साथ पानी सह्रश्वलाई होगी। यह काम 36 महीने में 410.50 करोड़ में किया जाएगा। स्मार्ट मॉनिटरिंग से लीकेज व पानी की बर्बादी पर नियंत्रण किया जाएगा।     यहां बनेंगी 40 नई टंकियां, पैकेज-3 के तहत पुराने रजिस्ट्रार ऑफिस का गार्डन, खालसा चौक, आइडीए गार्डन, लवकुश विहार, निरंजनपुर मंडी, कबीटखेड़ी, रेवेन्यू नगर, ट्रेजर टाउन, कावेरी परिसर, कैलोद करताल, लिंबोदी टैंक, पालदा इंडस्ट्रीज एरिया, आरटीओ पत्थर मुंडला, ओमेक्स हिल, देवगुराडिय़ा, कु्हेड़ी, पंचवटी कॉलोनी, अरंडिया, मायाखेड़ी, शक्करखेड़ी, रेवती। पैकेज 4     पैकेज-4 में 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण तथा 892 किमी लंबी वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।     साईं गंगौत्री, लक्ष्मीबाई मंडी, एकेवीएन कैंपस, मैकेनिक नगर, पीयू 4 गार्डन, विजय नगर, सयाजी होटल के पीछे, हाट बाजार के सामने कंचनबाग, महल कचहरी, शिवाजी नगर, कलेक्टोरेट पार्क आदि।

मुख्यमंत्री ने अपने जन्म दिवस पर भी इस प्रतिबद्धता को दोहराया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के वन और जल स्त्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य प्राणियों तथा जंगली जीवों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। जन्म दिवस वाले दिन कछुओं को विमुक्त कर उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता प्रकट की। उल्लेखनीय है कि जल संरचनाओं को स्वच्छ बनाए रखने और जलीय जैव विविधता के संतुलन में यह कछुएं महत्वपूर्ण भूमिका हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्म दिवस पर सागर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त किया। इस दिन चीतों के पुनर्वास के लिए बनने वाले विशेष बाड़े का पूजन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रकृति और वन्य जीवों की सेवा को ही ईश्वर की सेवा के समान माना है। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव, जैव विविधता के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही इनकी उपस्थिति से वनों और जल संरचनाओं के संरक्षण में भी मदद मिली है तथा प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलता है। यह गतिविधियां रोजगार सृजन का माध्यम बनती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस दृष्टिकोण का परिणाम है कि अपने जन्मदिवस पर भी उन्होंने प्रदेश के वन विकास और जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए गतिविधियां संचालित कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि नदियां प्रदेश के वन केवल राज्य ही नहीं, अपितु राष्ट्र की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, क्योंकि प्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों के उद्गम क्षेत्र हैं। इस दृष्टि से हमारे वनों से निकली नदियां कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वनों की सुरक्षा केवल पर्यावरणीय दायित्व ही नहीं है अपितु यह हमारी सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामुदायिक सहभागिता से वनों के प्रबंधन पर विशेष बल देते हैं। इसके दृष्टिगत प्रधानमंत्री  मोदी के आत्मनिर्भर भारत@2047 के लक्ष्य की पूर्ति में प्रदेश की ओर से हरसंभव योगदान देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विजन@2047 री-इमेजिनिंग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर नामक डॉक्यूमेंट का गति‍दिवस विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन प्रबंधन में बदलते वर्षा पैटर्न, बढ़ते तापमान, भूमि उद्योग के दबाव के दृष्टिगत पारिस्थितिकी आधारित, जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया जा रहा है। प्रदेश में वन आश्रित समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं अपितु वन संसाधनों के सहप्रबंधक और संरक्षक के रूप में देखा जा रहा है। व्यवस्थाएं इस आधार पर विकसित की जा रही हैं कि जब समुदायों को वनों से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा तो वे वनों के सर्वाधिक सशक्त संरक्षक बनेंगे। यह विचार समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वनों के प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही पूर्ण व्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वनों के प्रति इस संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप राज्य सरकार वनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ उत्पादक और सम-सामयिक दृष्टि से उपयोगी संसाधनों के स्त्रोत के रूप में सौंपना चाहती हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, वन संरक्षण के साथ ही सामुदायिक वानिकी और आजीविका, पर्यावरण, पर्यटन और प्रकृति शिक्षा, कार्बन एवं पारिस्थितिकीय तंत्र, वन भूमि के बाहर हरित आच्छादन बढ़ाने की दिशा में वैज्ञानिक रणनीति से गतिविधियां संचालित की जा रही है।  

अन्न उत्पादन को बढ़ावा देगा मप्र

भोपाल  मध्यप्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को शीघ्र ही जी आई टैग मिलने जा रहा है। तीनों फसलों के प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चैन्नई भेज दिए गए है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार अन्न उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक कोदो-कुटकी को बचाने और उत्पादन करने के लिये किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। औषधीय गुणवत्ता और पौष्ट‍िकता के कारण अब दुनिया अन्न की ओर लौट रही है। ग्लोबल मार्केट में अन्न की मांग बढ़ रही है। अन्न अब किसानों के लिये आर्थ‍िक लाभ देने वाली फसल बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर रानी दुर्गावती  अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों से 1,000 प्रति क्विंटल पर कोदो कुटकी की खरीदी हो रही है। कोदो-कुटकी की खरीद के लिए 22,000 से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इन किसानों का 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस योजना में 16 जिलों में पहली बार खरीद की जा रही है। इन जिलों में जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, बालाघाट, सिवनी, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं । सिताही कुटकी सिताही कुटकी एक कम अवधि (60 दिन) वाली 'लिटिल मिलेट' (छोटी बाजरा) की देशी किस्म है। यह वर्षा-आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की स्थितियों के लिए उपयुक्त है। यह सूखे की मार, नमी की कमी, और प्रमुख कीटों (शूट फ्लाई), 'ग्रेन स्मट' व 'ब्राउन स्पॉट' जैसी बीमारियों का सामना करने में सक्षम है। इस प्रकार, यह किसानों को एक स्थिर पैदावार दिलाने में मददगार साबित होती है। सिताही कुटकी की मध्यम ऊँचाई और मोटे तने के कारण फसल के गिरने की समस्या नहीं रहती। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ तथा कमज़ोर मिट्टी वाली स्थितियों में भी उगाया जा सकता है। डिण्डोरी के 'बैगा' तथा 'गोंड' जनजातियों के किसानों के लिए अच्छी आय दे सकती है। डिंडोरी में 'सिताही कुटकी' की खेती की 10,395 हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी और 10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की स्थिर पैदावार से इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका, भोजन और पोषण सुरक्षा में मदद मिली है। जनजातीय ज़िलों के लगभग 60,000 आदिवासी किसान—खासकर डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया, बालाघाट और जबलपुर के कुछ हिस्सों के किसान पैदावार बढ़ाकर आर्थिक ले सकते हैं। डिंडोरी के पहाड़ी और मुश्किल इलाकों के 54 गाँवों के किसानों को मुनाफ़ा हुआ है। इन इलाकों में दूसरी रबी फ़सलों की खेती नहीं होती। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर ने 'भौगोलिक संकेतक' (GI) टैग के लिए दस्तावेज़ तैयार किया है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर 'सिताही कुटकी' का एक ब्रांड नाम स्थापित होगा। बाज़ार के नए अवसर खुलेंगे। इससे बाजरे की खेती करने वाले जनजातीय किसानों को आर्थ‍िक लाभ होगा। नागदमन कुटकी डिंडोरी जिले में उगाई जाने वाली कुटकी की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है। यह अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। बैंगनी अरहर दरअसल अरहर की विशेष किस्म है। इसमें पौधे या फलियों पर बेंगनी रंग की झलक हेती है। इसमें भरपूर प्रोटीन होता है। रोगों से लड़ने की जबरदस्त क्षमता होती है। अच्छी देखभाल होने पर 15 से 20 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन हो सकता है। जीआई टैग से लाभ : औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। जीआई टैग मिलने से इस फसल की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे बिक्री बढेगी। यह साबित होगा कि फसल स्थापित मानकों के अनुरूप है। जनजातीय क्षेत्रों में उत्पादन जनजातीय जिलों में किसानों को कोदो-कुटकी की सभी प्रकार की किस्मों को बचाने और उनका उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रात्साहित किया जा रहा है। सीधी, जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में किसानों को जोड़ा गया है। सहरिया-बहुल श्योपुर जिले में जनजातीय बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मिलेट आधारित व्यंजनों का उपयोग किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकताओं और एकीकृत बाल विकास योजना के अमले को मिलेट के व्यंजन बनाने की जानकारी दी गई है और इसके पौष्ट‍िक गुणों से परिचित कराया गया है। जिले में 130 एकड़ में कोदो कुटकी की खेती हो रही है। करीब 200 किसानों को इसमें जोड़ा गया है। इस पहल का परिणाम यह रहा कि 2000 बच्चों का पोषण स्तर बढ़ गया और उनके स्वास्थ्य में सुधार आया। डिण्डोरी के समनापुर ब्लाक की महिला किसानों को कोदो-कुटकी उत्पादन से जोड़ा गया है। प्रत्येक महिला किसान के पास औसत ढाई एकड़ खेती है। इससे 32 गांवों की 1250 महिला किसान जुड़कर खेती कर रही है। पिछले दो सालों में कोदो कुटकी उत्पादन बढ़ा है।  

पेट्रोल-डीजल व गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में ईंधन व गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी भी तरह की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों की नियमित निगरानी की जा रही है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने बताया कि अवैध भंडारण पर कार्रवाई जारी है और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से निर्धारित अंतराल पर ही गैस बुकिंग करने तथा आवश्यकतानुसार ही उपयोग करने की अपील की है, ताकि सभी को समय पर सुविधा मिल सके।

बदले की आग में क्रूरता: किसान ने बाघ को जहर देकर मारा, रेडियो कॉलर ने सुलझाई गुत्थी

नर्मदापुरम  सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के बाघ की नजदीकी छिंदवाड़ा जिले में जहर देकर हत्या कर दी गई। छिंदवाड़ा के छाती आम गांव में यह घटना करीब 10 दिन पहले हुई। हत्या का आरोप किसान उदय सिंह पर लगा है। रेडियो कॉलर आईडी से खुला मौत का राज किसान ने बाघ के शव को एक गड्ढे में डालकर उसे पत्तों से ढंक दिया था। बाघ को रेडियो कॉलर आईडी लगी हुई थी। उसकी लोकेशन एक ही स्थान पर आ रही थी। उसे खोजते हुए एसटीआर और छिंदवाड़ा वन विभाग की टीम जब घटनास्थल पर पहुंची तो घटना का राज खुला। छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया शुक्रवार को छाती आम गांव के एक खेत में बाघ की लोकेशन मिली थी। यहां पहुंचने पर कर्मचारियों को बाघ का सड़ चुका शव मिला। खेत के मालिक उदय सिंह से पूछताछ की तो उसने यूरिया का घोल मांस पर डालकर बाघ की हत्या की बात स्वीकार की। चार आरोपित गिरफ्तार, टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर उठे सवाल छिंदवाड़ा वन विभाग ने उदय सिंह के अलावा सहयोगी बिसनलाल शीलू, झिरना माखननगर निवासी मनोहर सिंह, कूचीखोह निवासी कैलाश के विरुद्ध संरक्षित वन्य जीव की हत्या का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। एसटीआर की क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि विशेषज्ञों ने शव का पोस्टमार्टम किया और प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बता दें, मारे गए बाघ को करीब डेढ़ साल पहले ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एसटीआर लाया गया था। कॉलर आईडी वाले बाघ को 10 दिनों तक नहीं ढूंढ पाने पर रिजर्व प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।  

द ट्रेटर्स 2 की शूटिंग के बीच स्वर्णनगरी में दिखा करण जौहर का जलवा और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फिल्म धुरंधर 2 का खास रिव्यू

करण जौहर जैसलमेर में ‘द ट्रेटर्स 2’ की शूटिंग के दौरान ‘धुरंधर 2’ की प्राइवेट स्क्रीनिंग देखने पहुंचे। इसके लिए उन्होंने पूरा सिनेमा हॉल बुक कर लिया। जौहर का फिल्म रिव्यू भी सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रहा है। स्वर्णनगरी जैसलमेर में इन दिनों फिल्मी रंग कुछ ज्यादा ही चढ़ा हुआ है। इसकी बड़ी वजह बने बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर करण जौहर, जो अपने रियलिटी शो की शूटिंग के सिलसिले में शहर पहुंचे हुए हैं। इसी दौरान उनका अचानक शहर के चर्चित सिनेमाघर रमेश टॉकीज पहुंचना सिनेप्रेमियों के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं रहा।  शनिवार शाम को करण जौहर अपनी पूरी टीम के साथ यहां फिल्म ‘धुरंधर 2’ देखने पहुंचे। खास बात यह रही कि उन्होंने इस फिल्म के लिए पूरे सिनेमा हॉल को निजी तौर पर बुक करवा लिया था, जिससे वे बिना किसी व्यवधान के अपनी टीम के साथ फिल्म का आनंद ले सकें। इस दौरान सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया और आम दर्शकों के लिए सिनेमाघर में एंट्री पूरी तरह बंद रखी गई।  हालांकि जैसे ही शहर में उनके आने की खबर फैली, सैकड़ों प्रशंसक टॉकीज के बाहर जमा हो गए। हर कोई अपने पसंदीदा फिल्ममेकर की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आया। कई फैंस घंटों इंतजार करते रहे और कुछ को उनके साथ फोटो खिंचवाने का मौका भी मिला।   प्राइवेट स्क्रीनिंग में टीम के साथ बिताए खास पल जानकारी के अनुसार, शाम के शो के दौरान करण जौहर और उनकी यूनिट ने साथ बैठकर फिल्म देखी। इंटरवल के दौरान उन्होंने स्नैक्स का आनंद लिया और हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते नजर आए। पूरे आयोजन को बेहद निजी रखा गया था, जिसमें केवल चुनिंदा लोग ही शामिल थे। सिनेमा हॉल प्रबंधन ने भी इस खास मौके के लिए बेहतर व्यवस्था की थी, जिसकी खुद करण जौहर ने सराहना की। फिल्म खत्म होने के बाद उन्होंने टॉकीज स्टाफ और संचालक परिवार के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।   सोशल मीडिया पर रिव्यू ने बटोरी सुर्खियां फिल्म देखने के बाद करण जौहर ने सोशल मीडिया पर ‘धुरंधर 2’ को लेकर विस्तृत रिव्यू साझा किया, जो अब खूब चर्चा में है। उन्होंने फिल्म को सिर्फ देशभक्ति या एक्शन तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसकी कहानी, किरदारों की गहराई और भावनात्मक पक्ष की जमकर तारीफ की। उन्होंने फिल्म के निर्देशक आदित्य धर के काम को बेहतरीन बताते हुए कहा कि उनका निर्देशन, तकनीकी पकड़ और सिनेमाई दृष्टि फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाती है।  वहीं, अभिनेता रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस को उन्होंने उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ बताया। करण जौहर के मुताबिक, रणवीर ने अपने हर एक्सप्रेशन, हर सीन और अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से यह साबित कर दिया कि वे इंडस्ट्री के सबसे दमदार कलाकारों में से एक हैं।   करण जौहर ने यह भी कहा कि फिल्म देखते हुए उन्हें 70 के दशक के सिंगल स्क्रीन सिनेमा का दौर याद आ गया, जब दर्शक पूरी तरह संतुष्ट होकर थिएटर से बाहर निकलते थे। इस फिल्म ने उन्हें उसी दौर की याद दिला दी और इंडस्ट्री का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कराया।   ‘द ट्रेटर्स 2’ की शूटिंग भी बनी चर्चा का केंद्र करण जौहर का जैसलमेर दौरा सिर्फ फिल्म देखने तक सीमित नहीं है। वे यहां अपने चर्चित रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ सीजन 2 की शूटिंग के लिए पहुंचे हुए हैं। इस शो की शूटिंग शहर के प्रसिद्ध लग्जरी होटल सूर्यागढ़ पैलेस में चल रही है, जहां पहले सीजन की शूटिंग भी भव्य स्तर पर हुई थी। जैसलमेर की ऐतिहासिक विरासत, सुनहरी रेत और शानदार लोकेशन्स इस शो के लिए परफेक्ट बैकड्रॉप साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि एक बार फिर इस शहर को बड़े प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।