samacharsecretary.com

70 हजार शिक्षकों को राहत! ₹15-20 हजार तक बढ़ सकती है सैलरी

 जबलपुर मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पहली नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने प्रदेश सरकार को अदालती आदेश का अनुपालन करने के लिए 4 हफ्तों का आखिरी समय दिया है। अदालत के इस फैसले से शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और एरियर जैसे लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी फायदे मिलने का रास्ता खुलने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश के संबंधित शिक्षकों को पहली नियुक्ति तारीख से सेवा लाभ मिलने पर सैलरी में हर महीने 15 से 20 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद बनी है। इसके अलावा, 6वें वेतनमान की पात्रता 1 जनवरी 2006 से माने जाने पर करीब 10 साल का एरियर भी मिल सकेगा, जो हर शिक्षक लगभग 7 से 8 लाख रुपए (12 प्रतिशत संभावित ब्याज की दर से) मिलना संभव है। प्रदेश सरकार को दिये 4 सप्ताह आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पिछले फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्तों का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को होगी। यहां से शुरु हुआ पूरा विवाद इस मामले में शिक्षक राजेश पांडेय समेत एमपी के 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवाओं को संविलियन में शामिल न करने वाले सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि, पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता और सभी देय लाभ दिए जाएं। वहीं, अब इस मामले में हाईकोर्ट का रुख सामने आने के बाज शिक्षक नेताओं का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट से अपील निरस्त होने के बाद अब सरकार को बिना विलंब किए हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करना चाहिए। शिक्षक संगठनों ने जताया आभार दूसरी तरफ प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 2 दिनों में 600 से अधिक दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र देने के त्वरित फैसले का स्वागत किया। संगठनों ने इस मानवीय पहल के लिए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से अशफाक खान का पक्के घर का सपना हुआ साकार

रायपुर गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत गोरखपुर निवासी  अशफाक खान के लिए अपना पक्का मकान होना वर्षों पुराना सपना था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने परिवार के लिए पक्का घर बनाने में असमर्थ थे। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई और उनके पक्के घर का सपना साकार हुआ।  अशफाक खान ने पक्का मकान बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन किया। पात्रता पूरी होने के बाद उनका नाम आवास सूची में शामिल हुआ और उन्हें योजना के तहत आवास निर्माण के लिए सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिले सहयोग से उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण कराया। कुछ ही समय में उनका वर्षों पुराना सपना हकीकत में बदल गया। नए घर में परिवार के साथ रहने की खुशी  अशफाक खान के चेहरे पर साफ दिखाई देती है। वे बताते हैं कि आर्थिक परेशानियों के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली सहायता ने इस कठिनाई को दूर कर दिया। आज उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित घर में सुख-शांति के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।  अशफाक खान ने कहा कि पक्का मकान मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। उन्होंने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और आत्मविश्वास भी ला रही है।  अशफाक खान का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित होकर बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

कुपोषण के खिलाफ मैदानी स्तर पर मजबूत हो रही पोषण व्यवस्था : सचिव रश्मि

भोपाल  मध्यप्रदेश में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार, पुनर्वास और निरंतर निगरानी पर भी विभाग का विशेष फोकस है। महिला एवं बाल विकास सचिव जी.वी. रश्मि ने शुक्रवार को विदिशा जिले का भ्रमण कर आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं का मैदानी स्तर पर जायजा लिया। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने उनके साथ भ्रमण कर जिले में संचालित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्राम कुंआखेड़ी स्थित सक्षम आंगनबाड़ी के न्द्र का निरीक्षण कर बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, पोषण आहार और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ली। इसके बाद विदिशा ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत खरी तथा ग्यारसपुर परियोजना के अटारीखेजड़ा क्रमांक-2 एवं 3 और मानोरा क्रमांक-2 स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति को मौके पर देखा। कुपोषित बच्चों के उपचार से लेकर पुनर्वास तक पर नजर ग्यारसपुर स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र का निरीक्षण करते हुए सचिव ने अतिगंभीर एवं कुपोषित बच्चों के उपचार, पोषण आहार, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों से संवाद कर उपचार एवं पोषण की स्थिति जानी तथा संबंधित अधिकारियों से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और उपचार के बाद उनकी निरंतर निगरानी की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। सचिव रश्मि ने कहा कि कुपोषण से निपटने के लिए बच्चों को केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी पोषण स्थिति की नियमित निगरानी, समय पर कुपोषण की पहचान, आवश्यक उपचार और परिवार की सहभागिता भी जरूरी है। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाओं का प्रभावी केन्द्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। पौष्टिक पोहा चखकर परखी भोजन की गुणवत्ता सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्यारसपुर में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता, पोषण गुणवत्ता और केन्द्रों तक वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। सामुदायिक रसोई में तैयार किए जा रहे पौष्टिक पोहा को सचिव जी.वी. रश्मि और कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने समूह की महिलाओं से चर्चा कर जाना कि बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन में किन पोषक तत्वों और खाद्य सामग्री का समावेश किया जा रहा है। सचिव ने भोजन निर्माण से लेकर आंगनबाड़ी केन्द्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित पोषण मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रदेश में पोषण सेवाओं को प्रभावी बनाने पर जोर प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा अन्य पात्र हितग्राहियों तक पोषण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। विभाग का प्रयास है कि पोषण आहार की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था के साथ-साथ कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया भी प्रभावी हो। मैदानी स्तर पर केन्द्रों के निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जहां आवश्यक है, वहां सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। सामुदायिक रसोई के माध्यम से एक ओर जहां बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है। इस प्रकार बाल पोषण के साथ महिला सशक्तिकरण को भी एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सचिव श्रीमति जी वी रश्मि को जिले में संचालित योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया।  

सेवा_ संकल्प_ अभियान मत्स्य पालन से संवरी गांधीराम की ज़िंदगी

रायपुर, कहते हैं कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग हो, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है जिले के ग्राम बरदूला निवासी श्री गांधीराम अजगल्ले ने। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन-यापन करने वाले गांधीराम के लिए आज मछली पालन केवल आजीविका का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की किस्मत बदलने वाला एक मजबूत जरिया बन चुका है।     प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने दिखाया नया रास्ता गांधीराम की जिंदगी में यह सकारात्मक मोड़ 'प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना' के तहत आया। उन्होंने अपनी खुद की जमीन पर 0.20 हेक्टेयर जलक्षेत्र में 'तालाब लाइनर' का निर्माण कराया। 16.80 लाख रुपए की कुल लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें सरकार की ओर से 4 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। योजना से मिली इस शुरुआती मदद ने उन्हें स्वावलंबन का नया मार्ग दिखाया। ​उत्पादन और आय का नया कीर्तिमान  तालाब तैयार होने के बाद गांधीराम ने पूरे लगन और नियमित प्रबंधन के साथ मत्स्य पालन की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि मात्र 0.20 हेक्टेयर के इस छोटे से जलक्षेत्र से वे प्रतिवर्ष औसतन 100 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में बिक्री के बाद तमाम खर्चे निकालकर उन्हें सालाना 5 से 8 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। ​आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर  योजना का लाभ मिलने से पहले गांधीराम का जीवन काफी संघर्षमय था। परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने मत्स्य पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया। आज इस व्यवसाय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित हो चुका है।श्री गांधीराम अजगल्ले ने कहा कि योजना से मिले सरकारी सहयोग ने मेरे लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया। अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आर्थिक रूप से एक बेहतर आधार तैयार हुआ है। ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई 'बदलाव की कहानी'  राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ऐसी ही वास्तविक बदलाव की कहानियों को सामने लाया जा रहा है, जो यह दर्शाती हैं कि शासकीय योजनाएं किस प्रकार आम नागरिक के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। गांधीराम अजगल्ले की यह सफलता की कहानी प्रदेश के उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं।

गजराजों के विश्राम और सेवा का पर्व, ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप-2026 का हुआ शुभारंभ

भोपाल  विश्वविख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य और पुनर्यौवनीकरण को समर्पित ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप-2026 का शुभारंभ गुरुवार को परासी गेट के समीप धमोखर बफर क्षेत्र में हुआ। कार्यक्रम में उमरिया कलेक्टर मती राखी सहाय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक  योहान कटारा ने बताया कि हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप का उद्देश्य ‘कैंप हाथियों’ को नियमित कार्य से विश्राम देना, उनके स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करना तथा उन्हें पौष्टिक और पसंदीदा आहार उपलब्ध कराना है। इससे हाथियों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। नन्हे ‘कृष्णा’ ने खींचा सबका ध्यान कैंप के दौरान नन्हा नर हाथी ‘कृष्णा’ आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। अपनी चंचलता, उछलकूद और मासूम अंदाज से कृष्णा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 दिसंबर 2025 को बांधवगढ़ प्रवास के दौरान उसका नामकरण किया था। 15 में से 9 कैंप हाथी कैंप में शामिल वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 ‘कैंप हाथी’ कार्यरत हैं। इनमें से 4 हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन और 2 हाथी अनुश्रवण कार्य में लगे हैं। शेष 9 हाथियों को हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप-2026 में शामिल किया गया है। कैंप में इन हाथियों को नियमित कार्य से विश्राम देने के साथ उनके स्वास्थ्य परीक्षण, पौष्टिक एवं पसंदीदा भोजन तथा विशेष देखभाल की जा रही है। इसका उद्देश्य हाथियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तरोताजा रखना है। बफर क्षेत्र में पर्यटन और जन-जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा इस वर्ष ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप के लिए परासी गेट का चयन किया गया है। इसका उद्देश्य कैंप हाथियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के साथ बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों को वन्य जीवों के प्रति जागरूक करना है। परासी और आसपास के ग्रामीणों को कैंप में शामिल होकर हाथियों को करीब से देखने तथा उनके व्यवहार, देखभाल और संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। रेस्क्यू अभियान के कारण कुछ कैंप हाथी नहीं हो सके शामिल मैहर वन मंडल के गोरसरी फॉरेस्ट क्षेत्र में हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के नेतृत्व में बांधवगढ़ के कैंप हाथियों, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोमर और रेस्क्यू दल द्वारा रेस्क्यू अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके चलते कुछ कैंप हाथी इस आयोजन में शामिल नहीं हो सके।  

सेवा और समर्पण से ही सशक्त समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित अंत्योदय सेवा वंदन पर्व, ‘अनकही कहानियां’ सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं वीरगाथा सम्मान समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम में सेवा, समर्पण, साहस और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरक कहानियों को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सेवाभाव पर केंद्रित ‘नमो सेवा गाथा’ का भी मंचन किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले नागरिकों के साथ पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बलों, नागरिक सेवाओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े सेवाभावी व्यक्तियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की सेवा में निष्ठापूर्वक योगदान देने वाले लोगों का सम्मान नई पीढ़ी को भी सेवा और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अंत्योदय का भाव हमारी विकास यात्रा का मूल आधार है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचाना तथा उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प के साथ देश आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इसी भावना के अनुरूप जनकल्याण और विकास के कार्यों को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सेवा कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। स्वच्छता, स्वास्थ्य, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों में बढ़ती जनभागीदारी इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। लोककला और देशभक्ति के रंगों से सजा मंच अंत्योदय सेवा वंदन पर्व में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और देशभक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। कलाकारों ने लोकगीत, जसगीत, भजन, राउत नाचा और पारंपरिक समूह नृत्यों के साथ बांसुरी वादन तथा नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने लोकगीत एवं समूह नृत्य प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं की जीवंत झलक दिखाई। दिव्यांग विद्यालय के बच्चों ने देशभक्ति समूह गीत प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से सभी का मन मोह लिया। श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा विभिन्न समूहों से जुड़े प्रतिभागियों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। स्वच्छता के संदेश पर आधारित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया गया। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी शमा अंजुम की उपस्थिति भी विशेष रही। ‘हमार संगी-साथी’ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक संदेश दिया गया। वहीं ड्रोन दीदी मती अंजना दास ने अपने पुत्र के साथ ‘मेरी यशोदा मैया’ गीत पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। रायपुर शहर के साथ ही आरंग, अभनपुर, धरसींवा और खरोरा क्षेत्र के कलाकारों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। विविध अंचलों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने अंत्योदय सेवा वंदन पर्व को छत्तीसगढ़ की लोककला, प्रतिभा और सामाजिक सहभागिता का व्यापक मंच बना दिया। मुख्यमंत्री ने तीन नवाचारों का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर रायपुर जिला प्रशासन के तीन नवाचारों- ‘प्रोजेक्ट राहत’, ‘प्रोजेक्ट ध्वस्त’ और Advance AI – ‘ताकत है MY’ का शुभारंभ किया। ‘प्रोजेक्ट राहत’ के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को आरबीसी 6(4) के अंतर्गत दी जाने वाली राहत राशि की प्रक्रिया को अधिक त्वरित और प्रभावी बनाने की पहल की गई है, ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों तक समय पर सहायता पहुंच सके। ‘प्रोजेक्ट ध्वस्त’ के अंतर्गत जिले में जर्जर एवं असुरक्षित भवनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं की आशंका को कम करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी प्रकार Advance AI – ‘ताकत है MY’ के माध्यम से आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में पहल की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक और नवाचार का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उससे आम नागरिकों को सुविधाएं तेजी और सरलता से मिलें। सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सम्मानित सभी नागरिकों, जवानों, समाजसेवियों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सेवा, साहस और समर्पण की कहानियां समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा संकल्प अभियान प्रदेश में जनसेवा और सामाजिक सहभागिता की भावना को और व्यापक बनाएगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, मंत्री  टंकराम वर्मा, राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समाजसेवी, कलाकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।  

यात्रियों को मिलेगी बड़ी सुविधा, इंदौर से 36 शहरों के लिए शुरू होगी सीधी बस सेवा

इंदौर  मप्र में राज्य परिवहन मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीआरटीसी) की तर्ज पर शुरू हो रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का दायरा अब बढ़ने जा रहा है। सिटी बसों के ट्रायल के बाद अब इंदौर से प्रदेश के 36 दूरस्थ शहरों के लिए बसों का संचालन शनिवार से शुरू होगा। ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए शहर में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड इंदौर लगी हुई है। पीएम ई-बस सेवा के तहत 150 अत्याधुनिक ई-बसें चलाने की योजना है। पिछले दिनों मार्ग नंबर-14 पर शुरू किया गया 10 ई-बसों का तकनीकी और व्यावसायिक ट्रायल सफल रहा है। पीएम ई-बस सेवा के तहत 70 नई बसें चलेंगी इसके चलते पीएम ई-बस सेवा के तहत 70 नई बसें चलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री सुगम यात्री परिवहन सेवा के तहत 20 बसों को बढ़ाया जाएगा। एआइसीटीएसएल के सीइओ अर्थ जैन ने बताया कि एआइसीटीएसएल द्वारा अभी शहर में करीब 200 सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से इनका ट्रायल रन हो रहा था। सभी बसें शहर के प्रमुख मार्गाें पर अपना औपचारिक संचालन शुरू करेंगी। आने वाले दिनों में इन बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। यात्रियों को बसें एआइसीटीएसएल, सरवटे बस स्टैंड, गंगवाल बस स्टैंड और नायतामुंडला बस स्टैंड से यात्रियाें को बसें मिल सकेंगी। इंदौर-भोपाल का किराया 380 रुपये जानकारी के अनुसार नई इंटरसिटी सेवा के लिए किराए भी तय किए गए हैं। ये किराया पिछले दिनों परिवहन विभाग द्वारा बढ़ाए गए बसों के किराए पर ही आधारित होगा। कोई भी आपरेटर इससे ज्यादा किराया नहीं ले सकेगा। इसके तहत इंदौर से भोपाल के लिए नान एसी बस का किराया 380 रुपये, डीलक्स नान एसी का 475, डीलक्स एसी का 570 और सुपर लग्जरी वाल्वो का किराया 665 रुपये होगा। एसी बसों पर पांच प्रतिशत जीएसटी अलग से लागू होगा। महिलाओं व दिव्यांग यात्रियों के लिए प्रावधान नई बस सेवा में यात्रियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। बसों में महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधा होगी। किसी ही आपात स्थिति में महिलाएं बटन दबाकर सहायता ले सकेंगी। दिव्यांग यात्रियों को किराए में 50 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान रहेगा। इसके अलावा हर बस में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की निगरानी की जा सकें। इन 36 मार्गों पर आज से चलेगी बसें इंदौर-धार, इंदौर-अशोक नगर, इंदौर-झाबुआ, इंदौर-रतलाम, इंदौर-रीवा, इंदौर-पन्ना, इंदौर-छतरपुर, इंदौर-सतना, इंदौर-जबलपुर, इंदौर-चंदेरी, इंदौर-उज्जैन, इंदौर-खंडवा, इंदौर-बुरहानपुर, उज्जैन से इंदौर होकर ओंकारेश्वर, इंदौर-भोपाल, इंदौर-मंदसौर-नीमच, इंदौर-रतलाम, इंदौर-अहमदाबाद, इंदौर-जयपुर, इंदौर-उदयपुर, इंदौर-सागर, इंदौर-मुलताई, इंदौर-नागपुर चलेगी। आगामी दिनों में इन 20 शहरों के लिए चलेगी बसें बड़वानी-शाजापुर, बुरहानपुर-रतलाम, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, धार-पंचमढ़ी, इंदौर-नरसिंहपुर, बुरहानपुर-नीमच, इंदौर-ग्वालियर (एसी), इंदौर-ग्वालियर (नान-एसी), इंदौर-जबलपुर (नान-एसी), इंदौर-नर्मदापुरम, इंदौर-सागर (नान-एसी), इंदौर-छतरपुर, बड़वानी-आगर मालवा, इंदौर-बीना, इंदौर-नर्मदापुरम, इंदौर-अनूपपुर, इंदौर-सागर (एसी), इंदौर-रीवा (एसी) और इंदौर-जबलपुर (एसी) मार्गों पर बसें चलेंगी।

सेवा की कहानी: हुनर से आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला, बुटीक शुरू कर अब दूसरों को भी दे रहीं रोजगार

रायपुर हुनर को जब प्रशिक्षण और अवसर का साथ मिलता है, तो वह आत्मनिर्भरता के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार की राह खोल सकता है। सूरजपुर जिले के ग्राम राजापुर, पोस्ट साल्ही की उर्मिला सिंह ने कौशल प्रशिक्षण से मिले हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाकर इसे साबित किया है। छह माह का प्रशिक्षण लेने के बाद उर्मिला ने अम्बिकापुर में अपना बुटीक शुरू किया। आज वे स्वयं प्रतिमाह 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, दो लोगों को रोजगार दे रही हैं और चार-पांच लोगों को सिलाई का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। खेती-किसानी से जुड़े परिवार की बेटी ने हुनर को बनाया ताकत उर्मिला बताती हैं कि उनके माता-पिता खेती-बाड़ी करते हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गांव में ही पूरी की और इसके बाद सूरजपुर से कॉलेज की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण की जानकारी मिली। उन्होंने जन शिक्षण संस्थान के माध्यम से छह माह का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण में मिले व्यावहारिक ज्ञान और सिलाई के हुनर ने उन्हें स्वयं का काम शुरू करने का आत्मविश्वास दिया। प्रशिक्षण के बाद अम्बिकापुर में शुरू किया अपना बुटीक कौशल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उर्मिला ने नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलने का निर्णय लिया। करीब तीन-चार महीने पहले उन्होंने अम्बिकापुर में अपना बुटीक शुरू किया। वे महिलाओं के विभिन्न प्रकार के परिधान तैयार करती हैं। प्रशिक्षण से मिली दक्षता का उपयोग करते हुए उन्होंने कम समय में ही अपने काम को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। खुद के साथ दूसरों के लिए भी खोली रोजगार की राह उर्मिला की उपलब्धि केवल स्वयं का रोजगार शुरू करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने बुटीक में दो लोगों को रोजगार दिया है। इसके साथ ही चार से पांच लोगों को सिलाई की बारीकियां और परिधान तैयार करने का काम भी सिखा रही हैं, ताकि वे भी हुनर सीखकर अपनी आजीविका का साधन तैयार कर सकें। इस तरह उर्मिला को प्रशिक्षण से मिला अवसर अब दूसरे लोगों तक भी पहुंच रहा है। उनका प्रयास बताता है कि कौशल विकास के माध्यम से स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआती दौर में ही 12 से 15 हजार रुपये की मासिक आमदनी उर्मिला बताती हैं कि बुटीक को शुरू किए अभी तीन से चार महीने ही हुए हैं और इस शुरुआती दौर में उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। वे आने वाले समय में अपने काम को और आगे बढ़ाने के साथ अधिक लोगों को हुनर सिखाना चाहती हैं। “हुनर ने अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया” अपनी यात्रा साझा करते हुए उर्मिला सिंह ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत यह हुनर सीखा। इसके जरिए मैं अपने पैरों पर खड़ी हुई हूं। अब मैं दूसरे लोगों को भी सिखा रही हूं और दो लोगों को काम भी दिया है। हमें ऐसा अवसर और योजना मिली, जिससे हम अपने पैरों पर खड़े हो पाए। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं।” कौशल से स्वरोजगार और फिर रोजगार सृजन तक का सफर सेवा संकल्प अभियान के तहत उर्मिला सिंह की यह ‘सेवा की कहानी’ कौशल से स्वरोजगार और फिर रोजगार सृजन तक के सफर को सामने लाती है। प्रशिक्षण से मिले हुनर ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और अब वही हुनर दूसरे लोगों के लिए भी आजीविका की राह तैयार कर रहा है।

सेवा की कहानी: आंगनबाड़ी से मिली जानकारी ने ममता को योजनाओं से जोड़ा, बच्चों के पालन-पोषण को मिला आर्थिक संबल

रायपुर आंगनबाड़ी केंद्र महिलाओं और बच्चों को पोषण एवं अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ पात्र परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम’ में खालपारा निवासी ममता ने अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिली जानकारी और सहयोग से वे विभिन्न योजनाओं से जुड़ीं। योजनाओं से मिली आर्थिक सहायता आज उनके बच्चों के पालन-पोषण और उनकी जरूरतों को पूरा करने में मददगार बन रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने योजना से जोड़ा, आवेदन में भी किया सहयोग ममता ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी देने के साथ आवेदन की पूरी प्रक्रिया समझाई। उनके मार्गदर्शन में ममता ने आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें योजना के तहत 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। दूसरी बेटी के जन्म के बाद उन्हें 6 हजार रुपये की सहायता भी मिली। बच्चों के पालन-पोषण में काम आई सहायता राशि परिवार की जिम्मेदारियों के बीच योजनाओं से मिली आर्थिक सहायता ममता के लिए उपयोगी साबित हुई। उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि का उपयोग बच्चों के पालन-पोषण और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में किया गया। इससे परिवार को बच्चों से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिला। “आंगनबाड़ी से मिली योजनाओं की जानकारी और लाभ” आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में अपना अनुभव साझा करते हुए ममता ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से उन्हें केवल एक योजना ही नहीं, बल्कि शासन की कई योजनाओं और सेवाओं की जानकारी मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें योजनाओं के बारे में बताने के साथ आवेदन की प्रक्रिया में भी सहयोग किया। ममता ने कहा, “आंगनबाड़ी के माध्यम से हमें कई लाभ मिले हैं। योजनाओं से मिलने वाली राशि बच्चों के पालन-पोषण में काम आ रही है।” उन्होंने योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा सहयोग करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। हितग्राही और योजनाओं के बीच मजबूत कड़ी बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र सेवा संकल्प अभियान के तहत ममता की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि सही समय पर जानकारी और आवेदन में सहयोग किस तरह पात्र परिवार तक योजना का लाभ पहुंचा सकता है। आंगनबाड़ी केंद्र महिलाओं एवं बच्चों को सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाकर पात्र हितग्राहियों को उनसे जोड़ने की प्रभावी कड़ी बन रहे हैं।  

सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील वन विभाग की टीमें निगरानी में जुटीं

रायपुर सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से बाघ के संभावित पगमार्क मिले हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में बाघ की संभावित आवाजाही की निगरानी तेज कर दी है। डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के नेतृत्व में  संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों का वन विभाग के अमले द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है। कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की निर्धारित SOP के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं, मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधियों की पुष्टि एवं निगरानी की जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचने और आवश्यकता होने पर समूह में ही जाने की अपील की है। बाघ दिखाई देने पर उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ लगाने, उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करने की सलाह दी गई है। बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित न करने तथा केवल वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होने पर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-प् में संरक्षित वन्यजीव है और इसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल है। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और इस संबंध में किसी भी सूचना को तत्काल वन विभाग के साथ साझा करने की अपील की है।