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मध्य प्रदेश में डायल 112 की नई व्यवस्था, 2 मिनट में नहीं पहुंची टीम तो बजेगा अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में पुलिस की आपकालीन सेवा डायल- 112 में कुछ जिलों में रिस्पांस में देरी की शिकायतों के बाद व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। पुलिस रेडियो मुख्यालय द्वारा अब डायल-112 के आपातकालीन वाहनों के सिस्टम से जिले के जिम्मेदार पुलिस अफसरों को जोड़ा गया है। यानी की अब डायल 112 में घटना की सूचना आने के बाद यदि वाहन दो मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना नहीं होता है तो सीधे एडिशनल एसपी के पास अलर्ट जाएगा। जिसमें वाहन नंबर और थाना क्षेत्र भी होगा। दरअसल इस व्यवस्था से पहले सभी जिलों के एसपी को जोड़ा गया था। लेकिन बाद में परिवर्तन करते हुए यह जिम्मेदारी एडिशनल एसपी को दी गई है। 2 मिनट के भीतर करना होगा पायलट को एनरूट फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) यानी डायल- 112 के पायलट के पास जैसे ही कोई इवेंट आता है तो सबसे पहले उसे एकनॉलेज करना होता है यानी की उसे इवेंट की जानकारी प्राप्त हो गई है। उसके बाद उसे घटनास्थल रवाना होने से पहले एनरूट करना होता है यानी की वो मौके के लिए रवाना हो गया है। अब इस प्रक्रिया को एफआरवी का पायलट 2 मिनट तक नहीं करते है तो सिस्टम सीनियर अधिकारियों को देरी का अलर्ट देने लगेगा। 78 लाख लोगों ने मांगी 9 माह में मदद डॉयल 112 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सिंतबर 2025 ले 26 मई 2026 तक यानी नौ माह में 78 लाख लोगों ने फोन कर आपातकालीन सेवा से मदद मांगी। जिसमें 21 लाख से ज्यादा जगहों पर एफआरवी वाहन मदद के लिए भेजे गए। जिसमें सबसे ज्यादा साइबर क्राइम, महिला अपराध से जुड़े है। रिस्पांस टाइम बढ़ने की शिकायतों के बाद बदलाव पुलिस रेडियो मुख्यालय की मॉनिटरिंग में यह शिकायत लगातार सामने आ रही थी कि एफआरवी समय से कई जगहों पर मूवमेंट नहीं मूवमट कर रही है, जिस कारण रिस्पांस टाइम बढ़ रहा है। पड़ताल में पता चला कि पायलट गाड़ी खड़ी कर किसी अन्य काम में लग जाता था। जिस कारण इवेंट आने पर घटनास्थल पर पहुंचने में समय लगता था। खामी सामने आने के बाद सिस्टम में ही बदलाव कर दिया है। सीएम ने दी थी सौगात जानकारी के लिए बता दें कि एमपी में साल 2025 में एमपी पुलिस को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आधुनिक सुविधाओं और तकनीकों से लैस 1200 नई महिंद्रा स्कॉर्पियो और बोलोरो गाड़ियों की सौगात दी इसी के साथ पुलिस सहायता का नंबर भी डायल-100 के बजाए डायल-112 किया गया। यानी पुलिस सहायता के लिए आपको 112 पर कॉल करना होगा। कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया थी। बीते स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों को ये नए तकनीकी डायल-112 के वाहन सौंपे गए। इन अत्याधुनिक वाहनों के माध्यम से पुलिस रिस्पॉन्स टाइम को कम करने और आमजन तक त्वरित सहायता पहुंचाने में उल्लेखनीय सुधार होने का दावा किया गया। इसी पर अब काम किया जा रहा है।

कपूरथला में आज 25 जून से 24 जुलाई तक चलेगा विशेष पुनरीक्षण अभियान, हर घर भरेंगे गणना प्रपत्र

चंडीगढ़ पंजाब राज्य में आज 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर गणना शुरू होगी। यह कार्य 24 जुलाई तक चलेगा। सूबे में अब तक 86.02 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा नेमान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बैठक की। इस दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर दौरे के समय गणना प्रपत्रों के वितरण और संग्रहण की जानकारी साझा की गई। भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार यह गणना होगी। इसमें 24,453 बीएलओ राज्य के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं तक पहुंचेंगे। मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 24 जुलाई तक पूरा किया जाएगा। मतदाता सूचियों का प्रारूप प्रकाशन 3 अगस्त 2026 को होगा।  25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाएंगे BLO उपायुक्त ने बताया कि 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) वितरित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक BLO अभियान के दौरान हर परिवार के पास तीन बार जाएगा और पात्र मतदाताओं से हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र प्राप्त करेगा, ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जा सके। BLO को दिया जा चुका है विशेष प्रशिक्षण आकाश बंसल ने बताया कि संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में नियुक्त सभी BLO को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के लिए पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिला चुनाव अधिकारी एवं उपायुक्त दलविंदरजीत सिंह ने  बताया कि अमृतसर जिले में आने वाले 11 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर-2026 को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 19,73,071 मतदाता हैं, जिनमें से 17,49,155 मतदाताओं (88.65 प्रतिशत) की मैपिंग का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि चुनावी अमले की तैयारियों और कार्यान्वयन प्रक्रिया की समीक्षा कर ली गयी है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो। जिला चुनाव अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से अपील की कि घर-घर गणना के दौरान बीएलओ को पूरा सहयोग दें और सही एवं अद्यतन जानकारी उपलब्ध करायें, ताकि पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची तैयार की जा सके।प्रशासन के अनुसार, यह विशेष पुनरीक्षण अभियान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान BLO, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (BLA) के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे महीने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य करेंगे। 3 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, संशोधित प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) का प्रकाशन 3 अगस्त को किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची पर जोर उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को पूरी तरह सटीक एवं अद्यतन बनाना है।     25 जून से 24 जुलाई तक चलेगा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान।     BLO घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित और एकत्र करेंगे।     प्रत्येक परिवार के पास तीन बार जाएंगे बूथ लेवल अधिकारी।     सभी BLO को पहले ही विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।     राजनीतिक दलों के BLA भी अभियान में सहयोग करेंगे।     3 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची।     दावे और आपत्तियां निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार स्वीकार की जाएंगी।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गूगल क्लाउड के सीटीओ तरुण पंत और उनकी टीम के साथ की महत्वपूर्ण बैठक

बेंगलुरु/लखनऊ  विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को वैश्विक टेक्नोलॉजी और निवेश जगत के साथ जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेंगलुरु दौरे के दौरान गूगल क्लाउड के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर-सीटीओ) तरुण पंत और उनकी टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। राउंड टेबल बैठकों और रोड शो से पहले आयोजित इस संवाद में मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने, किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने, स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ने संबंधी राज्य सरकार के विजन को विस्तार से साझा किया। बैठक के दौरान सीटीओ तरुण पंत और गूगल टीम के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस और डेटा आधारित समाधानों के माध्यम से विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गूगल की टीम के साथ इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से सरकारी सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को कैसे बढ़ाया जा सकता है। किसानों, युवाओं, स्टार्टअप्स, एमएसएमई क्षेत्र और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नवाचार आधारित समाधानों पर भी चर्चा हुई। गूगल टीम के प्रतिनिधियों ने बैठक को अत्यंत सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विकास का स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप साझा किया। उन्होंने किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए निर्धारित लक्ष्यों एवं प्राथमिकताओं की जानकारी दी तथा यह भी चर्चा की कि एआई और आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से इन लक्ष्यों को और तेजी से कैसे हासिल किया जा सकता है। गूगल इंडिया की ओर से कहा गया कि कंपनी भारत के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के अवसर को लेकर उत्साहित है। वैश्विक निवेशकों के साथ भी हुआ व्यापक संवाद इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेंगलुरु में देश और दुनिया की अग्रणी निवेश एवं टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भी विशेष संवाद किया। इनमें वेस्टब्रिज कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर संदीप सिंघल, एक्सेल पार्टनर्स के प्रशांत प्रकाश, इनमोबी के संस्थापक पीयूष शाह, यूलू के संस्थापक अमित गुप्ता, एनवीडिया दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक विशाल धूपर, सर्वानएआई के प्रतिनिधि तथा ब्लैकस्टोन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। बैठक में उत्तर प्रदेश में निवेश, टेक्नोलॉजी, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेशक-अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए राज्य को भविष्य के विकास का प्रमुख केंद्र बताया। निवेश और नवाचार के नए केंद्र के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश लगातार निवेश, नवाचार और टेक्नोलॉजी आधारित विकास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक गलियारों, डिजिटल सेवाओं और निवेशक-अनुकूल नीतियों ने राज्य को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया है। बेंगलुरु में गूगल और वैश्विक निवेशकों के साथ हुए संवाद ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश अब टेक्नोलॉजी, एआई, स्टार्टअप, निवेश और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मोबाइल लूटकर फरार हुआ आरोपी पुलिस गिरफ्त में, गार्ड हत्याकांड का खुलासा

भोपाल कटाराहिल्स थाना क्षेत्र में ईकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे मिले युवक के अंधे कत्ल की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने युवक के साथ जबरन अप्राकृतिक कृत्य करने का प्रयास किया था। विरोध करने पर उसने पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी और मोबाइल फोन लेकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट पेश कर दिया है। मामले में आगे पूछताछ की जा रही है। 29 मई को मिला था शव पुलिस के अनुसार 29 मई को ईकोलॉजिकल पार्क के पास पुलिया के नीचे एक युवक का शव मिला था। शव कई दिन पुराना होने के कारण शुरुआत में उसकी पहचान नहीं हो सकी थी। बाद में मृतक की पहचान मंडीदीप निवासी युवक के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। गायब मोबाइल से मिला पुलिस को सुराग जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक का मोबाइल फोन घटना के बाद से गायब था। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की तो वह एक व्यक्ति के पास मिला। पूछताछ में उस व्यक्ति ने बताया कि उसने मोबाइल मिसरोद में रहने वाले एक परिचित युवक से खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने मिसरोद निवासी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार कर लिया। खाना खिलाकर पुलिया के नीचे ले गया आरोपी ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात वह साथी की तलाश में न्यू मार्केट और वीआइपी रोड क्षेत्र में घूम रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसकी मुलाकात नशे की हालत में मिले युवक से हुई। आरोपी उसे खाना खिलाकर पुलिया के नीचे ले गया, जहां उसने जबरन कुकर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उसने पत्थर उठाकर युवक के सिर पर कई वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मृतक का मोबाइल लेकर वहां से फरार हो गया। पहले भी जेल जा चुका है आरोपी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल पहले भी इसी तरह के एक मामले में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ मिसरोद थाने में केस दर्ज था। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।  

खंडवा के डायल-112 हीरोज रास्ता भटके 80 वर्षीय बुजुर्ग को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल खंडवा जिले के थाना हरसूद क्षेत्र में डायल- 112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से रास्ता भटक गए 80 वर्षीय बुजुर्ग को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से बुजुर्ग सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सके। 23 जून 2026 को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना हरसूद क्षेत्र अंतर्गत चौपाटी के पास स्थित यात्री प्रतीक्षालय में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति मिले हैं, जो अपने घर का रास्ता भटक गए हैं। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही हरसूद थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक शंकर कसदे एवं पायलट सैय्यद अली ने मौके पर पहुँचकर बुजुर्ग व्यक्ति को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। पूछताछ के दौरान ज्ञात हुआ कि बुजुर्ग व्यक्ति ठीक से देख नहीं सकते थे तथा अपने भाई के घर जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ता भटक गए थे। बुजुर्ग ने अपने भाई के निवास संबंधी जानकारी डायल-112 टीम को दी।इसके उपरांत डायल-112 जवानों ने बुजुर्ग को डायल 112 वाहन में बैठाकर बताए गए पते के अनुसार नंदगांव पहुँचाया, जहाँ उनके भाई से संपर्क स्थापित कर आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत उन्हें सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया। अपने परिजन को सकुशल पाकर सभी ने डायल-112 पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

बेंगलुरु में “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026” के तहत रोडशो में बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया सीएम योगी ने

बेंगलुरु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के लिए सेफ्टी, स्टेबिलिटी व स्पीड का थ्री-एस मॉडल बन चुका है। उद्योग के लिए ये तीनों आयाम सबसे महत्वपूर्ण हैं। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, बेमिसाल कनेक्टिविटी, पारदर्शी प्रशासन और संस्थाओं का बेहतर नेटवर्क नए उत्तर प्रदेश की पहचान है। स्किल्ड टैलेंट, टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली पॉलिसी, कुल मिलाकर एक संपूर्ण इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम आज नए भारत के नए यूपी में मौजूद है। मुख्यमंत्री बुधवार को बेंगलुरु में “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026”  के तहत रोडशो में बिजनेस लीडर्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरा दिन सभी इन्वेस्टर्स और अलग-अलग सेक्टर के इंडस्ट्री लीडर्स के साथ संवाद करने का अवसर मिला। हमने देखा कि कैसे बेंगलुरु एक गार्डन सिटी से विकसित होकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी पावरहाउस बना। बेंगलुरु की ग्रोथ स्टोरी आपने देखी-सुनी है। नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की जो कहानी आप यहां सुन रहे हैं, उसे आप उत्तर प्रदेश में जाकर स्वयं महसूस करेंगे, मैं आपको इसके लिए आमंत्रित करने आया हूं। पीएम मोदी के नेतृत्व में बने विकास के नए प्रतिमान सीएम ने कहा कि हमें गर्व है कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। और, पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश को इस ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनने का सौभाग्य मिला है। पहले यूपी की छवि बहुत अच्छी नहीं थी। बिगड़ी कानून व्यवस्था, पॉलिसी पैरालिसिस, गवर्नेंस का अभाव और 'बीमारू राज्य' की पहचान थी हमारी। पलायन नियति बन चुका था। कृषि व एमएसएमई से लोगों का नाता टूट चुका था। यूपी में वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में अब वह सब मिलेगा, जिसकी भारत को अपेक्षा है। बेहतर लॉ एंड ऑर्डर, वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, देश के 60% एक्सप्रेसवे, 16,000 किमी रेल नेटवर्क और 4 लाख किमी सड़क नेटवर्क यूपी के पास है। वाराणसी-हल्दिया राष्ट्रीय जलमार्ग, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल,  सात शहरों में मेट्रो, ईस्टर्न व वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन, 5 अंतरराष्ट्रीय व 11 घरेलू एयरपोर्ट के रूप में बेमिसाल कनेक्टिविटी यूपी की पहचान है। 5 नए एयरपोर्ट पर सरकार काम कर रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गत 15 जून से कमर्शियल फ्लाइट शुरू हो चुकी हैं। स्थिरता व सुरक्षा से बने टॉप-3 अर्थव्यवस्था सीएम ने कहा कि स्थिरता व सुरक्षा का परिणाम है कि यूपी अब बीमारू राज्य से निकलकर देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्था बन चुका है। पिछले 6 साल से हम रेवेन्यू सरप्लस स्टेट हैं। 9 साल में अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई। हमारे पास 36 सेक्टरल पॉलिसीज के साथ 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। एक्सप्रेसवे के किनारे 27 स्थानों पर इंडस्ट्रियल व लॉजिस्टिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। बीडा के रूप में सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल सिटी विकसित हो रहा है। निवेशकों को मिलेगा स्किल्ड मैनपावर निवेशकों को स्किल्ड मैनपावर के प्रति आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी हर साल 2 लाख स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथ) ग्रेजुएट्स तैयार करता है। 2 आईआईटी, एक आईआईएम, तीन स्टेट टेक्निकल यूनिवर्सिटी और तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा का बड़ा नेटवर्क युवाओं को हर क्षेत्र में दक्ष बना रहा है। हम उद्योग की जरूरत के अनुसार इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में स्किल्ड मैनपावर तैयार कर रहे हैं। कृषि व उद्योग क्षेत्र में जबरदस्त सफलता कृषि व एमएसएमई क्षेत्र की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 साल में हमारी कृषि ग्रोथ रेट 8% से बढ़कर 18% हुई। पांच कृषि विश्वविद्यालयों व 89  किसान विकास केंद्रों के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग व मार्केट से जोड़ा गया है। यूपी के पास देश में सर्वाधिक 86% सिंचित कृषि भूमि है। राज्य में 96 लाख एमएसएमई यूनिट संचालित हैं, जिन्हें ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) योजना से जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। इस योजना के माध्यम से हर जिले का एक विशिष्ट उत्पाद ब्रांड बना है। पिछले 9 साल में 18,000 से अधिक बड़े औद्योगिक संस्थान यूपी में स्थापित किए गए। 9 साल पहले राज्य में मात्र 14,000 बड़े कारखाने थे, जिनकी संख्या आज 33,000 से अधिक हो चुकी है। निवेशकों को मिलेगी सुरक्षा, सुविधा व नीतिगत स्थिरता मुख्यमंत्री ने बिजनेस लीडर्स को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार हर निवेशक को सुरक्षा, सिंगल विंडो सुविधा और नीतिगत स्थिरता देगी। यूपी के बारे में आपने जो संभावनाएं सुनी हैं, उन्हें आप अपने निवेश से स्वयं महसूस करेंगे। मुझे विश्वास है कि आप सब यूपी की ग्रोथ स्टोरी में सहभागी बनकर विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। मुख्यमंत्री ने रोडशो में उपस्थित सभी इंडस्ट्री लीडर्स व सीईओज का आभार भी प्रकट किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (उद्योग) आलोक कुमार, प्रमुख सचिव (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) आलोक कुमार, यीडा के सीईओ आर.के. सिंह तथा उद्योग जगत के लीडर्स व सीईओज उपस्थित थे।

एमपी ट्रांसको के एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशनों की सुरक्षा के लिए हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरे लगे : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युमन सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर सहित राज्य के अपने एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों की सुरक्षा सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरों की स्थापना शुरू कर दी है। लगभग 8.15 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना विद्युत ग्रिड को चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और संभावित नुकसान से सुरक्षित रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के 417 सबस्टेशनों पर कैमरे चरणबद्ध तरीके से लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की स्थापना से सबस्टेशनों की सुरक्षा एवं गश्त में मानव संसाधन के साथ तकनीक के उपयोग से सुरक्षा की दोहरी परत सुनिश्चित की जा सकेगी। टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा कवच ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह पहल एमपी ट्रांसको द्वारा एक्स्ट्रा हाई टेंशन लाइनों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग के बाद उठाया गया एक और तकनीकी कदम है, जो कंपनी के टेक्नोलॉजी-आधारित सुरक्षा समाधान की दिशा में बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है। कैमरे लगाने का निर्णय पूर्व में ट्रांसफॉर्मरों से कॉपर न्यूट्रल स्ट्रिप की बढ़ती चोरी की घटनाओं के मद्देनजर लिया गया था। ये कॉपर स्ट्रिप ट्रांसफॉर्मर का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग हैं, जिनके हटाए जाने से व्यापक क्षति और विद्युत आपूर्ति में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है। चोर इन कॉपर स्ट्रिप्स को निशाना बना रहे थे, जिनका उनके लिए भले ही सीमित मूल्य हो, लेकिन ट्रांसफॉर्मरों के लिए यह अत्यंत आवश्यक हैं। इन स्ट्रिप्स को हटाने से न केवल चोरों के जीवन को खतरा होता है, बल्कि ट्रांसफॉर्मर फेल होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को तीन से चार माह तक बिजली आपूर्ति से वंचित होना पड़ सकता है। कॉपर स्ट्रिप की चोरी से विद्युत आपूर्ति में हो सकता है लंबा व्यवधान कॉपर स्ट्रिप चोरी के कारण यदि ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त होता है, तो कंपनी को आर्थिक क्षति के साथ-साथ महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था दो से तीन माह तक प्रभावित हो सकती है। ट्रांसफॉर्मर प्रायः ऑर्डर पर निर्मित होते हैं, इसलिए उन्हें बदलने में कई महीने लग जाते हैं। स्थापित एचडी कैमरे सबस्टेशनों को 360 डिग्री कवरेज प्रदान कर रहे हैं तथा इनमें नाइट विजन, मोशन डिटेक्शन और हाई-रिजॉल्यूशन रिकॉर्डिंग जैसी आधुनिक तकनीकें भी उपलब्ध हैं। इससे रात के समय या दूरस्थ क्षेत्रों में भी संदिग्ध गतिविधियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। लाइव फीड अधिकारियों के मोबाइल पर इन कैमरों की लाइव फीड संबंधित सबस्टेशन प्रभारियों को उनके मोबाइल उपकरणों पर उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के एकीकरण के माध्यम से जबलपुर स्थित शक्तिभवन मुख्यालय के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से प्रदेश के सभी 417 सबस्टेशनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग का कार्य प्रगति पर है। इस तकनीकी व्यवस्था से न केवल सुरक्षा में वृद्धि होगी, बल्कि किसी भी तकनीकी गड़बड़ी, अनाधिकृत प्रवेश या आपात स्थिति की त्वरित जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी। इससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी। अब मुख्यालय से एक क्लिक पर किसी भी सबस्टेशन की निगरानी की जा सकती है, जिससे निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो गई है। एमपी ट्रांसको का उद्देश्य अपनी आधारभूत संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रदेश के उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखना है, ताकि कॉपर चोरी जैसी घटनाओं से होने वाली वित्तीय एवं ऑपरेशनल चुनौतियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।  

ग्राम पंचायत की विशेष ग्राम सभाओं में जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा

भोपाल  प्रदेश में जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ऐतिहासिक "जल गंगा संवर्धन अभियान-2026" का 25 जून से 30 जून 2026 की अवधि में प्रदेश में समारोहपूर्वक समापन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में वर्ष प्रतिपदा (19 मार्च 2026) को प्रारंभ हुए इस अभियान के तहत प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन के अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। इस व्यापक जन-आंदोलन के दौरान ग्रामीण, नगरीय, वन, सिंचाई, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 10,514 करोड़ रुपये की लागत से 3.62 लाख से अधिक कार्यों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। इसके अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर, चेकडेम, जलाशयों के जीर्णोद्धार, नालों की सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और नदी पुनर्जीवन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण कर प्रदेश को जल संसाधनों से समृद्ध बनाया गया है। अभियान की उपलब्धियों को जन-सामान्य के समक्ष लाने और जन-सहभागिता का सम्मान करने के उद्देश्य से 25 से 30 जून के बीच राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष समापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजनों के दौरान विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी, जिनमें निष्पादित कार्यों, उपलब्धियों और लाभान्वित परिवारों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने के साथ जल संरचनाओं पर आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। सभाओं में मुख्यमंत्री के प्रेरणादायी संदेश का वाचन कर जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया जाएगा। साथ ही, जनप्रतिनिधियों द्वारा महत्वपूर्ण जल संरचनाओं का लोकार्पण कराया जाएगा और खेत तालाब जैसी व्यक्तिगत संरचनाएं संबंधित हितग्राहियों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित की जाएंगी। इस अवसर पर जन-सहभागिता, श्रमदान और नवाचार के माध्यम से उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, जलदूतों, पंचायत प्रतिनिधियों और शासकीय कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा तथा सामुदायिक जल संरचनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को इनके रख-रखाव एवं जल के विवेकपूर्ण उपयोग की शपथ दिलाई जाएगी। समापन कार्यक्रमों में न केवल पिछले कार्यों की समीक्षा की जाएगी, बल्कि आगामी प्राथमिकताओं और भावी योजनाओं पर भी विशेष चर्चा होगी। इसके तहत 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने वाले "विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)" (VB – GRAM G) के विभिन्न आयामों और लाभों के संबंध में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, आगामी मानसून ऋतु में व्यापक पौध-रोपण के लिए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता सुनिश्चित करने तथा पूर्व में किए गए पौध-रोपण की समीक्षा की जाएगी, और किसानों के साथ खरीफ-2026 की तैयारियों तथा भावी कृषि कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा होगी। शासन के निर्देशानुसार इन कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला व जनपद पंचायत प्रतिनिधियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सख्ती का असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और उनके सख्त प्रशासनिक रुख के तहत राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू हो गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाना, राजस्व बढ़ाना और खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है। सबसे बड़ा बदलाव अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन पर लगने वाले जुर्माने में किया गया है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से समझौता शुल्क देना होगा। इसके अलावा अवैध रूप से ले जाए जा रहे खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करता है, तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये और खनिज का मूल्य अलग से देना होगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क तथा रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन आसानी से दोबारा अपराध में इस्तेमाल न हो सकें। अब जब्त वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन सुपुर्द किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र के नियम भी आसान बनाए हैं। शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध होगा और व्यवस्थित खनन को बढ़ावा मिलेगा। खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना भी की गई है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है। सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। इससे अलग-अलग प्रकार से स्वीकृत पट्टों के एकीकरण में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयां दूर होंगी और शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी। निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को भी एक समान बनाया गया है। अब सभी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर और सुरक्षा के तौर पर अतिरिक्त राशि निर्धारित नियमों के अनुसार काटेंगे। खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी, अन्यथा विभाग इसे खनिज मद में जमा करेगा। इससे अवैध स्रोतों से खनिज के उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगेगी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत गौण खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ अब केवल नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला पंचायतों को भी इसका हिस्सा मिलेगा। करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। राज्य में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए डेड रेंट से केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। जो खदानें संचालित नहीं होंगी, वे समर्पित होकर दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार के जीरो टॉलरेंस और सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा सख्त कदम माना जा रहा है। नए नियमों से एक ओर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, वहीं राज्य के राजस्व में वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

पीडब्लूडी सचिव ने अधिकारियों व ठेकेदारों की बैठक लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के पेंशनबाड़ा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में ठेकेदारों को निर्माणाधीन सड़कों पर वैकल्पिक या डायवर्टेड मार्ग बनाकर काम करने के दिए निर्देश दिए, ताकि बरसात में लोगों को आवाजाही में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने केशकाल घाटी बायपास सड़क के काम में तेजी लाते हुए सड़क के साथ ही इस मार्ग में बनने वाले दो बड़े पुलों के काम भी जल्दी शुरू करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी श्री अभिजीत कुमार तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी श्री आलोक कुमार ने बैठक में बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन रायपुर-विशाखापटनम एक्सप्रेस-वे और दुर्ग-आरंग बायपास मार्ग के काम अगले वर्ष मार्च तक पूरे कर लिए जाएंगे। भारतमाला परियोजना के तहत ही निर्माणाधीन रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरीडोर का काम भी तेज गति से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले भारतमाला परियोजना की सड़कों का पूरा लाभ उठाने राज्य की सड़कों को इनसे जोड़ने टू-लेन और फोर-लेन सड़कों के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए, जिससे इन इकोनॉमिक कॉरीडोर्स का पूरा लाभ राज्य को मिल सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के इन सड़क खंडों के चालू हो जाने से राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। माल और यात्री परिवहन की दृष्टि से ये सड़कें बहुत महत्वपूर्ण हैं।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में एनएचएआई द्वारा रायपुर के तेलीबांधा चौक, उद्योग भवन चौक और सरोना चौक में प्रस्तावित फ्लाईओवर्स की स्वीकृति की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित भूमि अधिग्रहण और वन-व्यपवर्तन के लंबित मामलों की जानकारी यथासमय उच्च कार्यालयों को देने के निर्देश दिए, जिससे कि इनके जल्द निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर की जा सके। उन्होंने विभिन्न जिलों में सड़कों और पुलों के अपने निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन तथा कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान ब्लैक-स्पॉट्स को खत्म करने के साथ ही सड़क सुरक्षा के मापदंडों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने मानकों के अनुरूप ही सड़कों पर गति अवरोधकों का निर्माण करने को कहा। उन्होंने सभी अधिकारियों को लगातार फील्ड में जाकर कार्यों के बारिकी से निरीक्षण करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्धारित समयावधि में काम पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्ता और समय-सीमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री ज्ञानेश्वर कश्यप और अधीक्षण अभियंता श्री एस.एस. माझी सहित पांचों राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के कार्यपालन अभिंयता और अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। ठेकेदारों की बैठक लेकर समस्याओं की ली जानकारी, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कर रहे ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्य एवं कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्णता में कोई समझौता नही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से राज्य की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इनके निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निर्धारित समायवधि में अच्छा काम होना चाहिए।