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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 2023 में हुई थी शुरुआत, चौथे संस्करण में 2,400 से अधिक प्रदर्शक

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर वर्ष 2023 में शुरू हुआ यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो चार साल में 60 से 90 देशों तक पहुंच गया है। पहले संस्करण में 1,914 प्रदर्शक आए थे, इस बार संख्या 2,400 के पार है। 90 देशों के 600 से अधिक विदेशी खरीदार भी इसमें शामिल हो रहे हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स के पहुंचने की उम्मीद है।   चार साल के आंकड़े ट्रेड शो के बढ़ते दायरे की तस्वीर भी साफ करते हैं। वर्ष 2024 के दूसरे संस्करण में प्रदर्शकों, बी2बी विजिटर्स और विदेशी खरीदारों की संख्या बढ़ी। वर्ष 2025 में 2,228 प्रदर्शकों के साथ 85 देशों के खरीदार आए। कुल 5.07 लाख से अधिक लोगों ने ट्रेड शो देखा, इनमें 1.40 लाख से ज्यादा बी2बी विजिटर्स थे। इस बार 4.5 लाख से अधिक सामान्य विजिटर्स के आने का अनुमान है।   छह देशों के विशेष पवेलियन इस बार ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम को पार्टनर देशों के रूप में जोड़ा गया है। इनके विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। यहां प्रदेश के कारोबारी विदेशी कंपनियों और खरीदारों से सीधे बात कर सकेंगे। कारोबार के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उद्यम पर भी बातचीत होगी।   1,882 करोड़ के एमओयू, 11,200 करोड़ की इन्क्वायरी पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि ट्रेड शो अब सिर्फ उत्पाद दिखाने तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 में यहां 1,882 करोड़ रुपये के 2,400 से अधिक एमओयू हुए थे। 11,200 करोड़ रुपये से अधिक की बिजनेस इन्क्वायरी भी मिली थी। ओडीओपी पवेलियन में लगे 466 स्टॉल से 20.77 करोड़ रुपये की बिजनेस लीड और डील सामने आई थीं।   एक करोड़ से अधिक एमएसएमई को मिल रहा बाजार उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। प्रदेश के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। ट्रेड शो में इन छोटे और मध्यम उद्यमों को देश-विदेश के खरीदारों के सामने अपने उत्पाद रखने का मौका मिल रहा है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के ब्रासवेयर समेत अलग-अलग जिलों के ओडीओपी उत्पाद भी यहां पहुंचे हैं।   80 हजार करोड़ से करीब दो लाख करोड़ पहुंचा निर्यात प्रदेश का निर्यात वर्ष 2017 में करीब 80 हजार करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक करीब दो लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अब एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2025-30 में वस्तु एवं सेवा निर्यात को वित्त वर्ष 2024 के 21 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है। इसमें एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों पर खास जोर है। सभी जिलों को निर्यात से जोड़ने की भी तैयारी है।   निर्यात बढ़ाने की यह कवायद प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का भी हिस्सा है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ यूपी में बने उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार तैयार करने पर जोर है।   हस्तशिल्प के साथ एआई और ईवी भी ट्रेड शो में यूपी के उद्योगों का बदलता चेहरा भी नजर आ रहा है। हस्तशिल्प, हैंडलूम और परंपरागत उत्पादों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रेड और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उत्पाद भी यहां हैं। एक तरफ भदोही का कालीन और मुरादाबाद का ब्रासवेयर है तो दूसरी तरफ एआई, ईवी और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग। चार साल में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का दायरा इसी तरह परंपरागत हुनर से नई तकनीक तक फैल गया है।

नई दिल्ली के 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह में मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत की संधारणीय जल प्रबंधन की अनुकरणीय रूपरेखा

भोपाल  अपर मुख्य सचिवनगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे ने कहा है कि जल केवल एक साधारण प्राकृतिक संसाधन नहीं, अपितु एक रणनीतिक परिसंपत्ति है, जो राज्य की आर्थिक संवृद्धि, नगरीय सहनशीलता, पर्यावरण संधारणीयता और दीर्घकालिक विकास आयोजना की मूल धुरी है। अपर मुख्य सचिव  दुबे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 9वें 'भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह' में "जल को राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में पुनर्परिभाषित करना" विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय परिचर्चा में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भावी जल सुरक्षा और समर्थ शहरों के निर्माण के लिए नवोन्मेषी वित्तीय तंत्रों, टिकाऊ अधोसंरचना विकास तथा एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को अंगीकार करना समय की मांग है। नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संतुलन अपर मुख्य सचिव  दुबे ने राज्य की दूरदर्शी जल प्रबंधन नीतियों को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश शासन संधारणीय अधोसंरचना, नवीन वित्तीय प्रबंधन और उत्तरदायी जल संरक्षण को एक साथ एकीकृत कर रहा है। उन्होंने इंदौर में नर्मदा नदी प्रणाली से संबद्ध जल अधोसंरचना के लिए जारी किए गए देश के सफल 'ग्रीन बॉन्ड' का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इंदौर का यह नवाचार यह सिद्ध करता है कि किस प्रकार नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ गति दी जा सकती है। 'नमामि नर्मदे' मिशन और दीर्घकालिक जल सुरक्षा अपर मुख्य सचिव  दुबे ने कहा कि 'नमामि नर्मदे' मिशन नदियों के पुनरुद्धार, पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के प्रति मध्यप्रदेश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह मिशन राज्य के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुकूल है, जिसके तहत आर्थिक प्रगति को प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रबंधन और संरक्षण का संबल प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बल दिया कि 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि के लिए मध्यप्रदेश समावेशी विकास, सुदृढ़ नगरीकरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिये जल सुरक्षा को निरंतर सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। 'इंडिया वाटर डाइजेस्ट' पॉलिसी ब्रीफ का विमोचन सत्र में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) तथा एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई नीतिगत रिपोर्ट "इंडिया वाटर डाइजेस्ट: स्केलिंग इन्वेस्टमेंट फॉर ए वाटर-सिक्योर इंडिया" का विमोचन किया गया। यह रिपोर्ट जल क्षेत्र में पूंजीगत निवेश को बढ़ाने तथा भारत की विकास यात्रा में जल सुरक्षा को एक अनिवार्य आर्थिक स्तंभ के रूप में स्थापित करने पर बल देती है। इस अवसर पर देश-विदेश के नीति निर्माता, विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं जल क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान, बाढ़ में फंसे दर्जनों लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

रायपुर  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। बुधवार से जारी भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उनके भोजन, ठहरने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बस्तर कलेक्टर  आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ के पानी में फंसे लगभग 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकालकर ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया। इसी तरह तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया है। ग्राम पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया है। 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिले में कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ का सर्वाधिक असर जगदलपुर शहर में देखने को मिला है, जहां स्थापित चार राहत शिविरों में 175 लोगों को ठहराया गया है। अकेले शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।  इसी प्रकार जगदलपुर तहसील के नगरनार क्षेत्र अंतर्गत नदी बोड़ना राहत शिविर में लगभग 40 लोग ठहरे हुए हैं। बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77, बकावंड विकासखंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 तथा लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत भेजा में बनाए गए राहत शिविर में 26 प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। प्रशासन द्वारा सभी राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित क्षेत्रों का किया सघन निरीक्षण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर  आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा ने सुबह स्वयं प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने जगदलपुर शहर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल डिमरापाल के नजदीकी क्षेत्र तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना सहित विभिन्न जलभराव वाले स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।      इस दौरान अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, बांधों के गेट खुलने से निचले इलाकों में सतर्कता        लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों के तहत ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन तथा मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में सतर्कता एवं निगरानी बढ़ा दी है।      मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित चारों ओर से पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी कंट्रोल रूम, फोन नेटवर्क और मैदानी अमले के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविर स्थापित करने और राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी रखी गई है। प्रशासन की अपील, उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करें जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें तथा उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। आपात स्थिति में बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल सूचना दें।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।

JSSC-CGL केस में CID की कार्रवाई तेज, कुंदन और समीर दो दिन की रिमांड पर

रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में राज्य सरकार की ओर से रद की गई झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया। अदालत ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की। यह मामला एपीपी नियुक्ति, फाॅरेस्ट आफिसर सहित अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद किए जाने से संबंधित है। सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाओं में संबंधित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद करने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्ति का विज्ञापन रद किया था। JSSc-CGL केस के दो आरोपित कुंदन व समीर दो दिनों की रिमांड पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित लेन-देन, पेपर लीक व अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के क्रम में पूर्व में गिरफ्तार दो आरोपित कुंदन कुमार व समीर कुमार को सीआइडी ने गुरुवार को दो दिनों की रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह खंगालने में जुटी है कि अभ्यर्थियों की सेटिंग किस स्तर तक और किन-किन माध्यमों से की गई थी तथा इस पूरे खेल में परीक्षा संचालन व दलालों के तंत्र से कौन-कौन लोग शामिल थे। सीआइडी जांच में मिले तथ्यों का सत्यापन भी कर रही है। कुंदन कुमार ने न केवल खुद मोटी रकम देकर परीक्षा पास की थी, बल्कि उसने गिरोह के साथ मिलकर अन्य अभ्यर्थियों की भी सेटिंग कराई और बिचौलिए की भूमिका निभाई। वहीं, समीर कुमार का नाम भी पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुराग के बाद इस पूरे प्रकरण में सामने आया था।

सरगांव में खुलेगा ट्रॉमा सेंटर, मदकू द्वीप में बनेगा इको टूरिज्म सेंटर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के ग्राम मदकू में 68 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की लागत के 21 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, बिजली, खेल और जनसुविधाओं के विस्तार से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री  साय ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा, रक्तदान एवं नि:शुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर’ में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि विकास की गति तेज हो और जनसेवा की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो। गांवों में अच्छी सड़कें हों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण मिले और गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक शासन की प्रत्येक योजना का लाभ सहजता से पहुंचे। इसी सोच के साथ हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को शासन के केंद्र में रखा है। उनके नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश में विकास के साथ जनकल्याण का एक नया अध्याय लिखा गया है। छत्तीसगढ़ में भी हमारी सरकार प्रधानमंत्री जी की इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनसेवा के संकल्प को जनभागीदारी से और मजबूत करने का माध्यम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और जनकल्याण की योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के साथ समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी विस्तार मिल रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ है कि नागरिक को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े, उसकी समस्या का समय पर समाधान हो और शासन की योजनाओं का लाभ उसे आसानी से मिले। इसी उद्देश्य से सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बना रही है। ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवन में बदलाव लाने का काम हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हमारा स्पष्ट प्रयास है कि पात्रता रखने वाला कोई भी परिवार जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में किसी योजना के लाभ से वंचित न रहे। स्वस्थ माता और सुपोषित बच्चा मजबूत समाज की नींव आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र हमारे बच्चों के पोषण और माताओं के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके संपूर्ण विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए उनके पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्रारंभिक देखभाल पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आंगन मिलन के माध्यम से परिवार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और स्वास्थ्यकर्मी एक साथ बैठकर बच्चों के पोषण, गर्भवती माताओं की देखभाल, एनीमिया, टीकाकरण और स्वच्छता जैसे विषयों पर संवाद कर रहे हैं। यह पहल स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को पहुंचाने में इनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनकी सेवा और समर्पण के कारण शासन की अनेक योजनाएं घर-घर तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे पहुंच रही है। यह राशि महिलाओं को अपनी और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। समय पर जांच कराएं, अपने स्वास्थ्य को भी दें प्राथमिकता मुख्यमंत्री  साय ने मेगा स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित नागरिकों से स्वास्थ्य जांच की सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया सहित अनेक बीमारियों की समय रहते पहचान हो जाए तो उनका उपचार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने माताओं-बहनों से विशेष रूप से आग्रह किया कि परिवार की देखभाल के साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। स्वस्थ माता ही स्वस्थ परिवार की आधारशिला है और स्वस्थ परिवारों से ही स्वस्थ एवं सशक्त छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा। रक्तदान करने वाले सेवाभावियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। हमारे द्वारा दिया गया रक्त किसी अनजान जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। समाज के लिए आगे बढ़कर रक्तदान करने वाले युवा और सभी सेवाभावी अभिनंदन के पात्र हैं। मदकू की विरासत को विकास और पर्यटन से जोड़ेंगे मुख्यमंत्री  साय ने मदकू द्वीप के ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत हमारी पहचान और हमारा गौरव है। इसका संरक्षण करने के साथ इसे नई पीढ़ी से जोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है। मदकू द्वीप में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इसकी विशिष्ट पहचान को और मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। मदकू द्वीप जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को संरक्षित करते हुए यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि प्रदेश और देश के अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ की इस समृद्ध धरोहर से परिचित हो सकें। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और जनसुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं मुख्यमंत्री  साय ने सरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ट्रॉमा सेंटर प्रारंभ करने तथा पिपर डोल और लमती की प्राथमिक शालाओं को मिडिल स्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। उन्होंने ताला महोत्सव और मदकू द्वीप उत्सव के आयोजन के लिए 15-15 लाख रुपये तथा पथरिया के अवंती बाई लोधी कॉलेज में रानी अवंती बाई लोधी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। … Read more

अब WhatsApp पर करें कचरा संग्रहण की शिकायत, हरियाणा के शहरी निकायों में बनेगी त्वरित व्यवस्था

चंडीगढ़  हरियाणा में कचरा संग्रहण से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सभी शहरी निकायों में वार्ड समितियों का गठन कर दिया गया है। कोई भी व्यक्ति इन वार्ड समितियों के वाट्सएप नंबर पर शिकायत दर्ज करवा सकता है, जिसका तुरंत समाधान किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कचरा उठान के लिए घर-घर जीपीएस आधारित वाहन पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को शहरी निकायों में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, रूट मैपिंग, मशीनरी की उपलब्धता, पोर्टल के माध्यम से भुगतान, वार्ड समितियों के गठन, स्वच्छता पखवाड़ा कलैंडर, बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान व पंजीकरण तथा एनजीओ मैपिंग एंड एमओयू सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की। 5जी नेटवर्क वाले जीपीएस प्रणाली के तहत चलाए जा रहे वाहन बैठक में बताया गया कि कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए 83 शहरी स्थानीय निकायों में 4जी व 5जी नेटवर्क वाली जीपीएस प्रणाली के वाहन चलाए जा रहे हैं। शेष चार शहरी स्थानीय निकायों में भी इस प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि जून में जहां 28 शहरी स्थानीय निकायों में 100 रूट मैपिंग का कार्य पूरा हुआ था, वहीं 20 सितंबर तक ऐसे निकायों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वार्ड की रूट मैपिंग में संबंधित कचरा संग्रहण वाहन, उसका समय और चालक का संपर्क नंबर शामिल किया जाए। यह जानकारी संबंधित वार्ड कमेटी के वाट्सएप समूह में साझा की जाए, ताकि घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी हो सके। सेवा प्रदाता एजेंसियों को भुगतान केवल सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। भुगतान में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर दंड लगाया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि सितंबर तक 87 में से 86 शहरी स्थानीय निकायों में 1646 वार्ड कमेटियां गठित की जा चुकी हैं जो पूरी तरह से सक्रिय हैं। वार्ड कमेटियों के सदस्यों को पहचान पत्र भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। हरियाणा स्वच्छ लीग के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक और रैंकिंग आधारित स्वच्छता व्यवस्था विकसित की जा रही है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को जिला स्तर पर तिमाही आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। उपायुक्तों के लिए बनी यूजर आइडी सभी जिलों में उपायुक्तों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पोर्टल पर यूजर आइडी बनाई जा चुकी है। 21 जिलों में जिला विशेष प्रकोष्ठों का गठन किया जा चुका है, जबकि चरखी दादरी और पलवल में प्रक्रिया जारी है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ कैलेंडर को हरियाणा में भी अपनाया जा रहा है। इसके तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली वार्ड कमेटियों को सम्मानित भी किया जाएगा। बल्क वेस्ट जनरेटरों का पंजीकरण अनिवार्य सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर इनका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन नहीं करने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों पर कार्रवाई की जाएगी। 65 निकायों में मानव संसाधन की कमी दूर की जा चुकी है, जबकि 68 शहरी स्थानीय निकायों में मशीनरी की कमी दूर की जा चुकी है।  

रिटायरमेंट से पहले मिलेगा प्रमोशन, 50 हजार MP कर्मचारियों को लाभ

भोपाल  भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को निर्देश दिए हैं कि जनवरी 2027 से शुरू होने वाले पदोन्नति के दूसरे चरण की तैयारियां जल्द पूरी की जाएं। इस चरण में मुख्य रूप से उन अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके सेवानिवृत्त होने में केवल 1 से 2 साल का समय बचा है। सरकार का उद्देश्य विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के जरिए इन कर्मचारियों का प्रमोशन सुनिश्चित करना है, ताकि कानूनी विवादों के कारण कोई भी कर्मचारी अपने हक के प्रमोशन से वंचित न रह जाए। लंबित प्रमोशन होंगे पूरे नियमों के मुताबिक हर 5 साल में पदोन्नति का प्रावधान है, लेकिन 2016 से चले आ रहे कानूनी विवाद के कारण कर्मचारियों को 10 साल बाद 2026 में पहला प्रमोशन मिल सका। अब दूसरा प्रमोशन भी बकाया हो चुका है, जिसे जनवरी से डीपीसी कर नियमित किया जाएगा। इन पदों को मिलेगा लाभ प्रशासनिक कैडर में ग्रेड-2 से ग्रेड-1, सेक्शन ऑफिसर से अवर सचिव, अवर सचिव से डिप्टी सेक्रेटरी तथा सहायक संचालक से अतिरिक्त संचालक स्तर तक के पद शामिल हैं। वहीं इंजीनियरिंग सेक्शन में असिस्टेंट इंजीनियर से लेकर ईएनसी (Engineer-in-Chief) तक के पदों पर पदोन्नति मिलेगी। मध्य प्रदेश विधानसभा ने दूसरे चरण के प्रमोशन को लेकर अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। पदोन्नति के आंकड़े और शिक्षकों की स्थिति चालू वर्ष में जुलाई से लेकर अब तक लगभग 1 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा चुकी है। हालांकि अभी भी विभिन्न कारणों से करीब 50 हजार प्रमोशन अटके हुए हैं। कुल अटके मामलों में सबसे बड़ी संख्या शिक्षा विभाग की है, जहां शिक्षक पात्रता परीक्षा के कारण 30 हजार शिक्षकों के प्रमोशन रुके हुए थे। विभाग ने इसका समाधान निकाल लिया है और दिसंबर से पहले इन शिक्षकों को पदोन्नत करने की योजना है। सीपीसीटी में जल्द मिलने जा रही राहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रमोशन में परेशानी बनी सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता में राहत जल्द ही मिलने जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग इसको लेकर आदेश जारी करने जा रहा है. सीपीसीटी परीक्षा न होने से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का प्रमोशन तृतीय श्रेणी में नहीं हो पा रहा था, इसको देखते हुए पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसमें राहत देने का ऐलान किया था।   

मध्यप्रदेश सरकार ने नवाचार के साथ सार्वजनिक परिवहन को दोबारा किया शुरू : केन्द्रीय मंत्री गडकरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी की उपस्थिति में प्रदेशवासियों को मध्यप्रदेश सुगम परिवहन सेवा की सौगात देकर आज के दिन को ऐतिहासिक बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सात शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम के बाद स्वयं भेल दशहरा मैदान से टिकिट लेकर बस से ही मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। 3500 से अधिक मार्गों पर 15 हजार से अधिक बसों का चरणबद्ध रूप से होगा विस्तार प्रदेशवासियों को सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू की जा रही है। इस सेवा से शहरी ग्रामीण क्षेत्रों में बस कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। प्रदेश की 75% ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा का विस्तार होगा। इस इण्टरसिटी और इण्टर स्टेट बस सेवा के अंतर्गत अगले 5 वर्षों में 3500 से अधिक मार्गों पर 15 हजार से अधिक बसों का चरणबद्ध विस्तार होगा। पूरे प्रदेश में नगरों, छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आम आदमी के लिए सफर आसान होगा। यह ऐसा एकीकृत परिवहन तंत्र है जो यात्रा के समय को कम करेगा और सफर को अधिक सुगम बनाएगा। पूरे प्रदेश में आधुनिक-सुविधाजनक बस स्टॉप, बस टर्मिनल और निजी बस ऑपरेटरों के लिए बस डिपो विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में ऑनलाइन टिकटिंग, ईवी और सीएनजी बसों को प्राथमिकता देते हुए पर्यावरण अनुकूल आधुनिक बसें, शामिल होंगी। यात्री फीडबैक के आधार पर शिकायतों और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 24×7 कस्टमर केयर सुविधा रहेगी। कार्यक्रम स्थल से बसों को झंडी दिखाकर किया रवाना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के भेल दशहरा मैदान पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई बस सेवा पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री  गडकरी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के संचालन के लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध संचालक  मनीष सिंह तथा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के निर्देशक प्रोफेसर डॉ. कैलाश राव एम के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री  गडकरी ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत बसों का सिंगल क्लिक से लोकार्पण किया तथा कार्यक्रम स्थल से बसों का झंडी दिखाकर रवाना किया। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, भोपाल के प्रभारी मंत्री  चैतन्य काश्यप, सहकारिता मंत्री  विश्वास सारंग, राज्य मंत्री कृष्णा गौर उपस्थित थी। जनता की सेवा के संकल्प की पूर्ति में लिखा गया नया अध्याय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भेल दशहरा मैदान पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्मोत्सव 17 सितंबर से 17 अक्टूबर के अवसर पर सेवा संकल्प माह और एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर 21 साल बाद मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन बस सेवा पुन: शुरू हो रही है। जनता की सेवा के संकल्प की पूर्ति का नया अध्याय लिखा गया है। हमारी सड़क परिवहन सेवाओं का लाभ प्रदेश के दूर-दराज स्थित जनजातीय क्षेत्रों को भी मिलेगा। गरीब और जरुरतमंदों के लिए प्रदेश सरकार ने सेवा का संकल्प लिया है। केंद्रीय मंत्री  गडकरी के माध्यम से प्रदेश में सड़कों और हाईवे का जाल बिछ रहा है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हैं विशेष व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन के एक आधुनिक और यूनिक मॉडल की शुरुआत हो रही है। बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, पैनिक बटन, इमरजेंसी डोर, जीपीएस मॉनिटरिंग, ऑनलाइन टिकटिंग, शिकायतों के समाधान सहित कई प्रकार से मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। बस ड्राइवरों की ट्रेनिंग और सुरक्षा के प्रबंधन भी किए गए हैं। वर्ष 2029 तक सभी रूटों पर भगवा रंग की बसें दौड़ती नजर आएंगी, जो प्रमुख शहरों के साथ देश के प्रमुख तीर्थस्थलों और महानगरों तक आवागमन को सुगम बनाएंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड, बस स्टॉप और चार्जिंग स्टेशनों के साथ सुव्यवस्थित नियंत्रण प्रणाली भी लागू की गई है। प्रदेशवासियों की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हुए बालाघाट जिले को नई सौगात मिलने जा रही है। हमारी सरकार ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और शांति के लिए चुनौती बने सभी संकटों को समाप्त किया है। हमारी सरकार ने भोपाल से यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन करते हुए निष्पादन किया है। प्रदेशवासियों की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी मंत्रीगण संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने बिजली, पानी, सड़क और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। सभी क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार और नौकरी के उपलब्ध हैं अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। सभी क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर दिए गए हैं। पिछले एक साल में 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर भर्ती की गई है। गुरूवार 24 सितम्बर को ही खनिज विभाग के निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। पुलिस विभाग में 18 हजार पद, शिक्षक भर्ती और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। प्रदेश सरकार मौजूदा वर्ष में एक लाख शासकीय पदों पर भर्ती करेगी। दूसरी ओर, किसान कल्याण वर्ष में प्रदेशवासियों को दो नदी जोड़ो अभियान केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना की सौगात मिली है। प्रदेश में गरीब-जरूरतमंदों को एयर एंबुलेंस की सुविधा मिल रही है। गरीब से गरीब की जान बचाना हमारी सरकार का संकल्प है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रदेश के गरीब-जरूरतमंदों के लिए होगी लाभप्रद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  गडकरी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत का यह निर्णय मध्यप्रदेश की जनता के लिए आवागमन सुविधाओं को सुगम बनाने की … Read more

योगी सरकार संवार रही यूपी के शहर, पेयजल-सीवरेज परियोजनाओं को मिली रफ्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को नई गति देने के लिए योगी सरकार के प्रयासों के तहत अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं। पेयजल, सीवरेज, जल संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विस्तार पर केंद्रित इस मिशन से प्रदेश के शहरों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है। लगभग 29,716 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की स्वीकृति शहरी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत सरकार की अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) योजना वर्ष 2021 से 2026 तक संचालित है। इसके तहत प्रदेश के 762 नगरीय निकायों और 60 अमृत शहरों को शामिल किया गया है। योजना का उद्देश्य शहरी परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल, सीवर कनेक्शन और बेहतर पर्यावरणीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 637 परियोजनाओं को मिली मंजूरी प्रदेश में अमृत 2.0 के तहत कुल 637 परियोजनाओं के लिए 29,716.29 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इनमें से 114 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि453 परियोजनाओं पर कार्य जारी है। अब तक 612 परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति और 567 की निविदाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। पेयजल और सीवरेज पर विशेष जोर योजना में सबसे बड़ा हिस्सा पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके तहत 18,829 करोड़ रुपये की 437 पेयजल परियोजनाएं और 10124 करोड़ रुपये की 41 सीवरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों से शहरों में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं के विस्तार का लक्ष्य है। सरोवरों के पुनर्जीवन से पर्यावरण संरक्षण शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए 403.45 करोड़ रुपये की लागत से 190 सरोवर पुनर्जीवन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके अतिरिक्त 89.76 करोड़ रुपये की 1777 हरित भूमि एवं पार्क परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले सरोवरों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण भी मिशन का हिस्सा हैं। योगी सरकार के नेतृत्व में संचालित इन परियोजनाओं से प्रदेश के शहरों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को गति मिलने की उम्मीद है। अमृत 2.0 के तहत प्रदेश के शहरों में पेयजल और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने पर विभाग का जोर है। सरोवरों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्रों के विकास से शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। मिशन के माध्यम से प्रदेश के नगरीय निकायों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिल रही है।  

धमतरी में फ्लैटेड फैक्टरी और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 बनेगा

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की उच्च स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने धमतरी जिले के ग्राम कचना में प्लग एंड प्ले फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु प्रस्तावित स्थल एवं लागत और शासकीय भूमि पर फैक्टरी बिल्डिंग के निर्माण के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अंतर्गत भू-तल और मंजिला बहुमंजिला इमारतों में कुल 43,200 वर्गमीटर में निर्माण किया जाएगा। इसमें कुल 96 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। यह स्थल राजधानी रायपुर से करीब 32 किमी और धमतरी जिला मुख्यालय से 41 किमी की दूरी पर पुराना धमतरी रोड से एक किलोमीटर अंदर स्थित है। इस कॉम्प्लेक्स में विद्युत, जल आपूर्ति, सड़क, सीवरेज एवं साझा जनसुविधाएं पहले से तैयार मिलेगा। इससे उद्योगपति सीधे मशीनरी स्थापित कर तुरंत उत्पादन शुरू कर सकेंगे, जिससे समय व पूंजी की बचत होगी और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बल मिलेगा।  बैठक में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति का बैठक में राजनांदगांव जिले के तहसील-घुमका अंतर्गत ग्राम पटेवा में नवीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 की स्थापना हेतु 469 करोड़ 61़ लाख रूपए की अधोसंरचना निर्माण योजना को मंजूरी दी गई। इसमें केंद्रांश 210 करोड़ 56 लाख रूपए तथा राज्यांश 259 करोड़ 05 लाख रूपए शामिल है। इस परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 12वीं प्रोजेक्ट रिव्यू कमेटी द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है।  यह क्लस्टर कुल 306.56 एकड़ भूमि में फैला होगा, जिसमें से 150.56 एकड़ में औद्योगिक भू-खण्ड विकसित किए जाएंगे। क्लस्टर में 04 प्रमुख एंकर यूनिट्स की स्थापना भी प्रस्तावित है।    प्रस्तावित अधोसंरचनाएं में 04 नग बहुमंजिला फ्लैटेड फैक्टरी भवनों का निर्माण होगा। इनमें प्रशासनिक भवन, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तथा कॉमन फैसिलिटी सेंटर होगा। कर्मचारियों हेतु 250 बेड क्षमता वाला हॉस्टल भवन, विद्युत अधोसंरचना के तहत 05 एमवीए क्षमता विद्युत सब-स्टेशन और सोलर स्ट्रीट लाइट और 11केव्ही एचटी लाइन नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, इलेक्टॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग तथा आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर सहित वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वित्त, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी एवं अन्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए।