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Metro Project Update: भोपाल में 32 किमी की नई मेट्रो लाइन, 27 रैक होंगे शामिल

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है।

डिजिटल पंचायतों से गांवों में विकास की नई राह, 2100 सेवाओं का मोबाइल पर लाभ शुरू

भोपाल  पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा। खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है। एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो। इन पर भी फोकस आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे  किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे। वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती।

सहायक शिक्षक नियुक्तियों की समीक्षा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी पूरी जांच

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों को न केवल बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनसे अब तक ली गई सैलरी की वसूली भी की जाए। 6 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि पूरी जांच प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से ऐसे फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे। अदालत ने आदेश दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 15 साल की सेवा के बाद खुली पोल यह पूरा मामला गरिमा सिंह नाम की एक शिक्षिका की याचिका से शुरू हुआ। गरिमा सिंह को जुलाई 2010 में देवरिया जिले के सलेमपुर विकास खंड के एक उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। वह लगभग 15 वर्षों से अपनी सेवा दे रही थीं। 2025 में एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य संबंधित अधिकारियों की जांच में पाया गया कि गरिमा सिंह ने जिन शैक्षिक दस्तावेजों और निवास प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, वे फर्जी थे। असल में वे दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के थे, जिनके नाम का सहारा लेकर उन्होंने धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) देवरिया ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जताई चिंता गरिमा सिंह ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील का तर्क था कि वह 15 साल से निष्कलंक सेवा दे रही हैं और नियुक्ति के समय उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति चौहान ने टिप्पणी की कि "धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ का लाभ उठाने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की रियायत या जांच का हकदार नहीं है।" अदालत ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते पैटर्न पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई सहायक अध्यापक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे हैं और यह सब प्रबंधन या शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव पर प्रहार करती है। अदालत के अनुसार, छात्रों का हित सर्वोपरि है और अयोग्य शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।  

जयपुर मेट्रो का बदलेगा नाम, अंतिम मंजूरी का इंतजार

जयपुर. जयपुर मेट्रो पर नया अपडेट आया है। जल्द ही जयपुर मेट्रो को नाम मिल सकता है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में जयपुर मेट्रो लाइन-2 की आधारशिला रख सकते है। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि आधारशिला समारोह के बाद जयपुर मेट्रो रेलवे निगम (जेएमआरसी) का नाम बदलकर राजस्थान मेट्रो रेलवे निगम (आरएमआरसी) हो जाएगा। अंतिम मंजूरी अभी बाकी है जयपुर मेट्रो रेलवे निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बारे में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है। हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल से परियोजना को अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। अधिकारियों ने कहा कि वे पीएमओ से अंतिम मंजूरी और शिलान्यास समारोह की निश्चित तिथि दोनों की एक साथ मिलने की उम्मीद है। जयपुर मेट्रो को जल्द मिलेगा नया नाम मेट्रो के एक अधिकारी के अनुसार जयपुर मेट्रो (कोलकाता मेट्रो के अलावा) एकमात्र मेट्रो है, जिसका निर्माण और संचालन राज्य सरकार ने किया है। अब, हम निगम को केंद्र और राज्य के बीच एक संयुक्त उद्यम इकाई में बदलकर आरएमआरसी का गठन करेंगे।

उज्जैन में शिव-विवाह उत्सव की शुरुआत, बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में देंगे दर्शन, तैयारियां अंतिम चरण में

उज्जैन  महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी। अधिकारियों ने देखी व्यवस्था महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों को राहत: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की अवधि बढ़ी, 4–5 फरवरी को भी होगी खरीद

रायपुर राज्य सरकार ने धान खरीदी की समय अवधि दो दिन बढ़ा दी है। अब चार और पांच फरवरी को भी धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जानकारी मिली कि कुछ किसानों के टोकन नहीं कट पाए हैं, कुछ पंजीयन नहीं कर पाए। इसलिए समय अवधि बढ़ाई जा रही है। राज्य के ऐसे किसान जो पंजीकृत है और जिनका टोकन कट चुके है, उन किसानों का धान खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी की  ने अपनी पड़ताल के बाद खबर प्रकाशित कर सरकार को चेताया था कि टोकन कट जाने के बाद भी प्रदेश के लगभग ढाई लाख किसानों का धान नहीं बिक पाया है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी जिलों से जानकारी मांगी थी और इसके बाद मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी कर दी। अब तक 140 लाख टन धान की खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। राज्य में इस वर्ष 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया हुई है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे। यह भी पढ़ें- रायपुर-दुर्ग के बीच सफर होगा और भी आसान, सिरसा गेट और खुर्सीपार में बनेंगे ग्रेड सेपरेटर, ₹77 करोड़ मंजूर ये किसान होंगे धान बेचने के पात्र   ऐसे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद टोकन के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन उनका भौतिक सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।  वे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद आवेदन किया और सत्यापन के दौरान जिनके पास वास्तव में धान का स्टॉक (बचा हुआ धान) पाया गया है।  ऐसे किसान जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी 2026 के लिए टोकन जारी किया गया था, लेकिन वे किसी भी कारणवश निर्धारित तिथि पर अपना धान नहीं बेच पाए थे। हमने धान खरीदी की समीक्षा की है। कुछ किसान जिनका टोकन कट गया था और धान नहीं बेच पाए थे और कुछ किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया था। इसलिए दो दिन और किसानों का धान खरीदेंगे। – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़    

सालाना 6 हजार से बढ़कर 9 हजार! बिहार सरकार ने पीएम किसान और कर्पूरी निधि में की बढ़ोतरी

पटना बिहार में किसान सम्मान निधि योजना की राशि डेढ़ गुना बढ़ा दी गई है। इसके लिए नीतीश सरकार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत किसानों को साल में 3000 रुपये एक्स्ट्रा मिलेंगे। यह राशि पीएम किसान सम्मान निधि की मौजूदा राशि के साथ ही डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। मंगलवार को बिहार विधानमंडल में पेश हुए बजट में इसकी घोषणा की गई। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अभी तक हर साल कुल तीन किस्तों में लाभार्थियों को कुल 6000 रुपये दिए जाते हैं। एक किस्त में किसानों के खाते में 2000 रुपये आते हैं। अब बिहार सरकार ने कर्पूरी ठाकुर के नाम पर अलग से किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत प्रति किस्त 1000 और कुल तीन किस्तों में 3000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह, बिहार के किसानों को पीएम किसान एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि, दोनों योजनाओं को मिलाकर हर किस्त में कुल 3000 रुपये मिलेंगे। यानी कि साल में कुल तीन किस्तों में बिहार के किसानों को 6000 की बजाय कुल 9000 रुपये दिए जाएंगे। NDA ने चुनावी संकल्प पत्र में किया था वादा- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में कर्पूरी ठाकुर के नाम से किसानों के लिए नई योजना शुरू करने का वादा किया था। एनडीए ने संकल्प किया था कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले लाखों किसानों को साल में 3000 रुपये अतिरिक्त देंगे। पिछले बिहार चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते नवंबर में नई सरकार का गठन हुआ। अब सरकार के पहले पूर्णकालिक बजट में इस योजना की शुरुआत करने की घोषणा कर दी गई है। इस योजना का लाभ बिहार के लगभग 73 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा।

75 लाख की लूट केस में बड़ा खुलासा, होटल कर्मचारी समेत 4 आरोपी पुलिस गिरफ्त में

 नरसिंहपुर.  जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होटल में रखी रकम बना लालच की वजह जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची। इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।     पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।     सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई। 4 गिरफ्तार, 3 फरार पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर, राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।  

ग्वालियर में आसमानी आफत: ओलावृष्टि से खेत बर्फ में तब्दील, फसलें चौपट, किसान की मौत

ग्वालियर.  पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते ग्वालियर जिले में मंगलवार सुबह वर्षा और भारी ओलावृष्टि हुई। प्रकृति का यह प्रकोप भितरवार-चीनोर क्षेत्र के गांव कछौआ, बड़की सराय, जुझारपुर, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया और सिकरौदा समेत 12 से अधिक गांवों में देखा गया। जहां पर भीषण ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक बर्फ जम गई। बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजारा मंजर ऐसा था कि दूर-दूर तक फैली हरियाली गायब हो गई और पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजर आने लगा। किसानों के मुताबिक गेहूं, सरसों व चना आदि फसलों में 70 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए मौके पर पहुंची। कुछ गांवों में कलेक्टर रुचिका चौहान भी नुकसान को देखने के लिए पहुंची। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक आगामी 24 घंटों में गरज चमक के साथ वर्षा व ओलावृष्टि की संभावना अभी बनी हुई है। साथ ही कोहरा भी रहेगा। आसमानी बिजली से किसान की मौत शिवपुरी में आसमानी बिजली की चपेट में आने से एक किसान की मौत भी हो गई। कई खेतों में तो नुकसान का आकलन 70 से 90 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। ओलावृष्टि की सूचना के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बड़की सराय व सिकरौदा गांव में पहुंचकर ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र निरीक्षण किया और किसानों से बात की। शिवपुरी में बिजली गिरने से किसान झुलसा शिवपुरी के सिलानगर निवासी वीर सिंह पुत्र रामप्रसाद आदिवासी उम्र 25 साल गांव में बटाई से खेती करता है। रात में खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका था। इसी दौरान तेज आंधी, वर्षा आदि से बचने के लिए वह खेत में बनी झोंपड़ी के अंदर जाकर सो गया। इसी दौरान आसमानी बिजली झोपड़ी गिरी, जिससे झोंपड़ी में आग लग गई। किसान झोपड़ी में लगी आग की चपेट में आ गया, जिससे उसकी जलने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर मर्ग कायम कर लिया है।  

टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती सीएम योगी के $1 ट्रिलियन इकोनॉमी विजन को देगी मजबूती

लखनऊ  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।  आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।  डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं।  जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।  इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे।  राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। … Read more