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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: जयपुर में ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ थीम के साथ भव्य आयोजन

जयपुर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस(21 जून) के अवसर पर रविवार को जयपुर में विभिन्न स्थानों पर भव्य योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यः सामूहिक योग्याभ्यास कार्यक्रम प्रातः 6 बजे से 8 बजे तक एस.एम.एस. स्टेडियम में आयोजित होगा। साथ ही अल्बर्ट हॉल, पत्रिका गेट, जलमहल तथा आमेर फोर्ट जैसे शहर के प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर एवं पर्यटन स्थलों पर भी इस दौरान सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम प्रभारी एवं आयुर्वेद विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. बत्तीलाल बैरवा ने बताया कि इस 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की थीम 'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है। इस अवसर पर विभिन्न आयु वर्गों के नागरिकों को योग के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एस.एम.एस. स्टेडियम, अल्बर्ट हॉल, पत्रिका गेट, जलमहल एवं आमेर फोर्ट पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थी, कोचिंग संस्थानों के छात्र-छात्राएं, विभिन्न संस्थाओं के योग साधक, एनसीसी, सीआरपीएफ, पुलिस, होमगार्ड, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के कार्मिक के साथ बड़ी संख्या में आमजन भाग लेंगे। मीडिया प्रभारी एवं सहायक निदेशक डॉ. लक्ष्मण सैनी ने बताया कि योग आज विश्वभर में समग्र स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण का प्रभावी माध्यम बन चुका है। योग न केवल शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि भावनात्मक संतुलन स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आमजन से योग दिवस कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मध्यप्रदेश के 6 जिलों को बड़ी सौगात, UIMR योजना से खुलेंगे रोजगार के 5 लाख अवसर

इंदौर. मध्य प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए मालवा अंचल से विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047' के संकल्प को गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडल यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) की रूपरेखा साझा की है। सरकार ने इस महा-परियोजना के दायरे को बढ़ाते हुए अब 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया है, जिससे मालवा के 6 जिलों की करीब सवा करोड़ आबादी सीधे लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी योजना केवल महानगरों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य इंदौर की आर्थिक तरक्की का लाभ आसपास के छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना है। इस रणनीति के तहत इंदौर को मुख्य ग्रोथ इंजन बनाकर उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों का संतुलित व आधुनिक विकास सुनिश्चित किया जाएगा। इस वृहद क्षेत्र में कुल 38 तहसीलें और 2,781 गांव शामिल किए गए हैं। 5 लाख युवाओं को रोजगार और 14 नए इंडस्ट्रियल पार्क योजना का सबसे मजबूत पक्ष रोजगार और औद्योगिक क्लस्टर्स का निर्माण है। क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल लैंड बैंक तैयार कर रही है, जहां 14 नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। इस कदम से मालवा अंचल में लगभग 5 लाख युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने का अनुमान है। शहरों को विशिष्ट औद्योगिक पहचान दी जाएगी: पीथमपुर: इसे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में ढाला जाएगा। उज्जैन: यहां की विक्रम उद्योगपुरी को औद्योगिक गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। रतलाम: इस जिले को बड़े लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट (निर्यात) हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। '60 मिनट एक्सेस' और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़ाव क्षेत्रीय परिवहन को सुगम बनाने के लिए '60 मिनट एक्सेस' मॉडल की परिकल्पना की गई है। इसके तहत पूरे 16 हजार वर्ग किलोमीटर के दायरे में ऐसी उन्नत सड़क और परिवहन प्रणाली तैयार होगी, जिससे कोई भी नागरिक एक घंटे के भीतर मुख्य आर्थिक केंद्रों तक पहुंच सकेगा। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे और मेट्रो के विस्तार जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही, इस पूरे रीजन को सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान होगी। कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मार्गों का निर्माण उज्जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विभिन्न मार्गों का निर्माण भी किया जा रहा है। शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य भी जारी है। सिंहस्थ के लिए 5 रेलवे ओवरब्रिज और 17 नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात… — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 19, 2026 देश का अनूठा 'लैंड पूलिंग' मॉडल और ब्लू-ग्रीन पॉलिसी भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार ने एक अभिनव और किसान-हितैषी दृष्टिकोण अपनाया है। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए देश का पहला अनूठा लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत 17 गांवों के किसानों से जमीन तो ली जाएगी, लेकिन विकास कार्यों के बाद उनकी 60 प्रतिशत भूमि पूरी तरह विकसित अवस्था में वापस सौंप दी जाएगी। इससे किसान सिर्फ अपनी जमीन खोने वाले पक्षकार नहीं, बल्कि विकास के सीधे हिस्सेदार बनेंगे। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट को 'ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट' नीति पर आधारित किया गया है। नर्मदा नदी सहित सभी प्राकृतिक जल स्रोतों और जंगलों के आसपास बिना अनुमति के निर्माण पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। उद्योगों के लिए 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' नीति अनिवार्य होगी और नए क्लस्टर्स को पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अध्यात्म और डेटा-आधारित वैज्ञानिक नियोजन मालवा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार ने वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत योगदान तय करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को मिलाकर एक भव्य आध्यात्मिक और हेरिटेज टूरिज्म सर्किट का निर्माण किया जाएगा, जिसमें नर्मदा रिवरफ्रंट और रूरल टूरिज्म के जरिए स्थानीय लोगों को आय के साधन मिलेंगे। अव्यवस्थित शहरीकरण और अनियोजित बसाहट की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘मध्य प्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के तहत एक हाई-टेक मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनाई जाएगी। यह विंग भविष्य की जनसंख्या, ट्रैफिक और बुनियादी जरूरतों का वैज्ञानिक व डेटा-आधारित विश्लेषण कर एडवांस प्लानिंग करेगी, जिससे आने वाले दशकों में भी यह रीजन देश के सबसे सुव्यवस्थित और आधुनिक क्षेत्रों में शुमार रह सके।

किसानों को नैनो उर्वरकों की जानकारी, नुक्कड़ नाटक के जरिए चलाया गया जागरूकता अभियान

बलौदा बाजार. किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विशेष किसान जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग, लाभ तथा वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही इन उर्वरकों को लेकर किसानों के बीच फैली भ्रांतियों, अफवाहों और आशंकाओं को दूर करने का प्रयास भी किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की 50 सहकारी समितियों को चिन्हित कर विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में आकर्षक नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के फायदे और उपयोग की जानकारी सरल भाषा में समझाई जा रही है। नुक्कड़ नाटक के बाद विशेषज्ञ दे रहे तकनीकी जानकारी अभियान के दौरान नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी और ग्राम कृषि विशेषज्ञ किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। किसानों की जिज्ञासाओं और सवालों का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा मौके पर किया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल वॉल पेंटिंग, पोस्टर और पाम्पलेट के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। किसानों को व्यक्तिगत रूप से पाम्पलेट वितरित कर नैनो उर्वरकों के उपयोग की विधि, लाभ और आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। किसानों ने बताया लाभकारी पहल ग्राम ओडान के किसान भोज राम वर्मा ने बताया कि उन्हें पहले नैनो यूरिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें सही और उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि उनके मन में मौजूद कई सवालों का जवाब विशेषज्ञों ने दिया, जिससे उनकी शंकाएं दूर हुईं। भोज राम वर्मा ने कहा कि अब तक वे केवल पारंपरिक यूरिया का उपयोग करते थे, लेकिन इस बार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का प्रयोग करेंगे। वहीं ग्राम वटगन के किसान सुभाष वर्मा ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होने चाहिए। इससे किसानों को नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिनसे वे अक्सर अनजान रहते हैं। उन्होंने इस पहल के लिए कलेक्टर कुलदीप शर्मा का आभार भी व्यक्त किया। वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने की पहल जिला प्रशासन का उद्देश्य किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर फैले भ्रम और आशंकाओं को दूर कर उन्हें वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सही जानकारी उपलब्ध कराना है। प्रशासन का मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि कर सकते हैं। “जागरूक होगा किसान – उन्नत होगी खेती” के संकल्प के साथ यह अभियान जिले में लगातार संचालित किया जा रहा है। इन 50 सहकारी समितियों में चल रहा अभियान जिले की चयनित 50 सहकारी समितियों में यह विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इनमें लवन, तिल्दा, अहिल्दा, सरखोर, बम्हनपुरी, रिसदा, खम्हरिया, सेमराडीह, रसेड़ा, डमरू, कसडोल, छरछेद, कटगी, सेल, अमोदी, हंसुवा, टुंड्रा, सोनाखान, गिरौद, चिखली, कुम्हारी, खपराडीह, सुहेला, सकलोर, भटभेरा, रावन, बिटकुली, जांगड़ा, दावनबोड़, हथबंद, अर्जुनी, गोढ़ी (टी), मिरगी, खोखली, तरेंगा-भाटापारा, केसला, खैरा, मोपका, लेवई, निपनिया, गिर्रा, कोदवा, जर्वे, ओडान, वटगन, कोसमंदी, अमेरा, कोनारी, लच्छनपुर और रोहांसी शामिल हैं।

पंजाब के नए DGP पर मंथन तेज, 14 IPS अधिकारियों में से चुने जाएंगे 3 नाम

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस को जल्द ही स्थायी मुखिया मिलने की संभावना बढ़ गई है। राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 30 जून को एंपैनलमेंट कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें पंजाब कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार इन तीन नामों में से एक अधिकारी को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त करेगी। पंजाब में चार साल से कार्यवाहक डीजीपी यह नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंजाब में पिछले लगभग चार वर्षों से पुलिस महकमा कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में चल रहा है। जुलाई 2022 में गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। तब से लेकर अब तक राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी। ऐसे में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले स्थायी डीजीपी की नियुक्ति कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस प्रक्रिया ने गति पकड़ी। शीर्ष अदालत ने 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान कई राज्यों पर नाराजगी जताई थी, जहां लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे पुलिस प्रशासन चलाया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि प्रकाश सिंह पुलिस सुधार मामले में तय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है और डीजीपी नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्यों में “एक्टिंग डीजीपी” व्यवस्था स्थायी विकल्प नहीं हो सकती। यूपीएससी ने 18 फरवरी को मांगी पात्र अफसरों की लिस्ट इसी आदेश के बाद यूपीएससी ने 18 फरवरी को पंजाब सरकार से पात्र अधिकारियों की सूची मांगी थी। पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को 14 योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजी। इनमें 1992 बैच के चार वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। इस बैच में शरद सत्य चौहान सबसे वरिष्ठ हैं। उनके बाद हरप्रीत सिंह सिद्धू, कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव और कुलदीप सिंह का नाम आता है। इसके अलावा 1993 बैच के तीन तथा 1994 बैच के सात अधिकारियों को भी पात्र सूची में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी ने पैनल बैठक से पहले कुछ अधिकारियों से जुड़े लंबित मामलों पर पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। शरद सत्य चौहान के खिलाफ लंबित मामलों की स्थिति तथा कुलदीप सिंह की 23 फरवरी से 16 अक्टूबर तक की हाफ-पे लीव को लेकर आयोग ने जानकारी मांगी थी। राज्य सरकार द्वारा आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण सौंपने के बाद अब चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। कमेटी में ये लोग रहेंगे शामिल यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में आयोग के चेयरमैन, केंद्रीय गृह सचिव या उनके नामित वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख तथा पंजाब के मुख्य सचिव और मौजूदा डीजीपी शामिल रहेंगे। यह कमेटी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और विजिलेंस स्थिति का मूल्यांकन कर तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैनल तैयार होने के बाद अंतिम फैसला पंजाब सरकार के हाथ में होगा। यानी आप सरकार को तीन नामों में से अपने पसंद के अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करने का अधिकार रहेगा। नियमित डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल मिलेगा, चाहे इस दौरान सेवानिवृत्ति की तारीख क्यों न आए। अब पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सबकी नजर 30 जून की बैठक पर टिकी है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: स्वस्थ जीवन और विकसित भारत का आधार बनेगा योग

रायपुर.  भारत में प्राचीन काल से ही योग हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। ऋषि-मुनियों, योगियों और संतों ने योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। भारतीय ज्ञान परंपरा की यह अमूल्य धरोहर आज विश्वभर में स्वास्थ्य और कल्याण का पर्याय बन चुकी है। इसी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की, जो आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है। यह थीम योग के माध्यम से जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संदेश देती है। योग न केवल रोगों से बचाव का प्रभावी माध्यम है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की आधारशिला भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में योग आज विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। योग व्यक्ति को स्वस्थ बनाकर परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का माध्यम बनता है इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का मुख्य आयोजन कोलकाता में आयोजित किया जा रहा है जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे।  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह अंबिकापुर में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं योगाभ्यास में सहभागिता करेंगे और प्रदेशवासियों को नियमित योग अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। राज्य सरकार द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता अभियानों में योग को विशेष महत्व दे रही है।  प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में योग का संदेश लोगों के जीवन से सहज रूप से जुड़ता है। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली योग के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय संस्थानों में नियमित योग गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोग, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि योग को केवल एक दिवस का आयोजन न मानकर दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग को अपनाना समय की आवश्यकता है। आइए, योग के माध्यम से स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।

सुशासन का नया चेहरा बना बस्तर मॉडल, डिजिटल सिस्टम और जमीनी प्रशासन ने रचा इतिहास

​रायपुर.  प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी 'फौती नामांतरण' (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है। ​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा 'सक्रिय मॉडल' (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य  जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है। 'सक्रिय अभियान': एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच ​आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस 'रिएक्टिव' (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा। ​इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है। ​प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब 'त्रिमूर्ति' ने संभाला मोर्चा ​इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी। ​इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति' ने इस अभियान को संभाला। डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने 'जन्म एवं मृत्यु पंजीयक' के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से 'विलम्ब पंजीयन' की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए। तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला 'वंश वृक्ष' तैयार किया। पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई। ​ बस्तर की तहसीलों में सुशासन का 'सेचुरेशन' ​जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं। ​बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत 'सेचुरेशन' (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं। ​प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है। ​भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है। ​अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं। ​बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं। ​इस … Read more

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे डॉक्टर, रायपुर में निकाला कैंडल मार्च

रायपुर. छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों ने भाग लिया। डॉक्टरों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बगैर पंजीयन दूसरे राज्य से आउटसोर्सिंग का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—     इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि।     राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।     छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकार और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।     मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में बाहरी राज्यों से बिना पंजीयन प्रवेश का विरोध। लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के रोजगार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का भी सवाल है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेश के युवा चिकित्सकों में असंतोष और चिंता को और बढ़ा दिया है। डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। यह संघर्ष पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। JDA और CGDF का संयुक्त बयान जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और स्थानीय युवाओं के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक संशोधन

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के सभी जिलों के लिए मुख्य अतिथियों का नामांकन पूर्व में किया गया था। विभाग द्वारा आज जारी संशोधित आदेश के अनुसार चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। राज्य के शेष जिलों में पूर्व आदेशानुसार नामांकित मुख्य अतिथि यथावत रहेंगे। संशोधित आदेश के अनुसार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह को नामांकित किया गया है। इसी प्रकार बेमेतरा जिले में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा तथा बीजापुर जिले में विधायक श्री नीलकंठ टेकाम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों का आयोजन मुख्य अतिथियों के परामर्श तथा चिकित्सा शिक्षा (आयुष) विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

अशोकनगर में किन्नरों के दो गुटों में विवाद, ‘सनातन’ मुद्दे पर बढ़ा तनाव; पुलिस का पहरा

अशोक नगर. जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच चल रहा वर्चस्व का विवाद अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। काजल ठाकुर और चांदनी नायक ग्रुप के बीच शुरू हुई यह लड़ाई अब केवल इलाकों (गुरु गद्दी) के बंटवारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सनातन बनाम गुरु-शिष्य परंपरा और जातिगत बयानों का एंट्री हो चुकी है। एक ओर जहां काजल ठाकुर ने इस पूरे मामले को सनातन धर्म से जोड़कर नया मोड़ देने का प्रयास किया है, वहीं अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने पलटवार करते हुए कहा है कि किन्नर की कोई जाति या धर्म नहीं होता, किन्नर की स्वयं किन्नर ही जाति होती है और वे सभी धर्मों का सम्मान करती हैं। सनातन में वापसी के आग्रह से सुलग उठी विवाद की चिंगारी मिली जानकारी के अनुसार, कुछ समय पूर्व काजल ठाकुर ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए कई स्थानीय किन्नरों को अपने गुट में शामिल कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने सभी किन्नरों से सनातन धर्म में वापसी करने का आग्रह किया। जब यह मामला प्रदेश के किन्नर समाज के बीच पहुंचा, तो गुरु-शिष्य की सदियों पुरानी परंपरा को बचाए रखने के लिए अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने सबसे पहले मोर्चा खोला और काजल ठाकुर का जमकर विरोध किया। इस विरोध से बौखलाई काजल ठाकुर ने चांदनी नायक पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें 'जिहादी' तक कह डाला। इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए चांदनी मौसी ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल अपनी परंपरा को बचाना है। अशोक नगर में दी गई थी मारपीट की धमकी, तैनात रहा पुलिस बल विवाद इस कदर बढ़ा कि करीब 15 दिन पहले काजल ठाकुर द्वारा अशोकनगर आकर किन्नर गुरु चांदनी नायक के साथ मारपीट करने की धमकी दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चांदनी नायक ने तत्काल अशोकनगर पुलिस और जिला प्रशासन से लिखित शिकायत कर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए किन्नर गुरु को पुलिस प्रोटेक्शन मुहैया कराया और उनके निवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के चलते फिलहाल अशोकनगर में ऐसी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।

आदित्य बिड़ला फैशन यूनिट का दौरा, धनबाद में रोजगार सृजन की नई संभावनाओं पर मंथन

धनबाद बीसीसीएल क्षेत्र में पुनर्वासित और परियोजना-प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशने के उद्देश्य से बेंगलुरु स्थित आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड की वस्त्र विनिर्माण इकाई का अध्ययन शुक्रवार को भ्रमण किया। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गई है। भ्रमण के दौरान टीम ने फैक्ट्री में चल रही उत्पादन प्रणाली, पूरी आपूर्ति श्रृंखला, गुणवत्ता प्रबंधन और सहायक तकनीकी व्यवस्थाओं का विस्तार से अवलोकन किया। कंपनी अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी और प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दी। रोजगार सृजन और औद्योगिक माडल पर चर्चा: सीएमडी सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि बीसीसीएल रोजगार को लेकर काफी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखकर इस पर काम कर रही है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच संभावित सहयोग, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त औद्योगिक माडल और पुनर्वासित परिवारों के लिए रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों ओर से व्यावहारिक पहलुओं और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए गए। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल बीसीसीएल की ओर से डीटीओपी संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (जेएमपी) राजीव चोपड़ा सहित अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल थे। वहीं आदित्य बिड़ला समूह की ओर से मुख्य आपूर्ति श्रृंखला अधिकारी स्वामीनाथन रामचंद्रन, मुख्य स्थिरता अधिकारी डा. नरेश त्यागी, कॉरपोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ अधिकारी और मैन्युफैक्चरिंग हेड सुधाकरन गुरुनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आगे की योजना पर होगा निर्णय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को औद्योगिक माडल के क्रियान्वयन और रोजगार आधारित गतिविधियों के विकास पर विस्तृत चर्चा होगी। इस अध्ययन से मिले निष्कर्षों के आधार पर बीसीसीएल भविष्य की कार्ययोज