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मानवीय संवेदना का निर्णय: 99 हिंदू बंगाली विस्थापित परिवारों को स्थायी पुनर्वासन की मंजूरी

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर बड़ा एवं मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद मेरठ से जुड़े इस प्रकरण को मंजूरी दी गई। यह मामला जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई का है, जहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में किया जाएगा। ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा। प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर 30 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस प्रकार पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा। लंबे समय से अस्थायी हालात में रह रहे इन परिवारों को अब स्थायी ठिकाना और भविष्य की सुरक्षा मिल सकेगी।

डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा: ई-ऑफिस में बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को मुख्य सचिव विकासशील का सम्मान

रायपुर. मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने मंत्रालय सहित राज्य शासन के सभी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से निर्धारित समय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।उन्होंने ऐसा नहीं करने वालों को सचेत करते हुए कार्यालय में निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने कहा है।    मुख्य सचिव ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नही करना स्वीकार नही होगा। मुख्य सचिव ने राज्य शासन के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस से ही फाईल संचालन  करने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएग। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में ऑनबोर्ड हो जायें। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी वर्ष से अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश आवेदन ई-ऑफिस प्रणाली से ही स्वीकार किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि अचल सम्पत्ति का विवरण और एसीआर भी प्रतिवर्ष ई-ऑफिस से ही दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों से कहा है कि टीम भावना से कार्य करें और पूरे देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के रूप में दर्ज करायें। मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को विभागवार ई-ऑफिस का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए। विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके कार्यों की स्थिति की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायें।      मुख्य सचिव ने सभी से ई-ऑफिस में दक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की है। उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए कि अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण देने कहा है। मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है उनमें ई-ऑफिस से फाईल वर्क करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव मती जयश्री जैन, आदिवासी विकास विभाग के संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपुत और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव  प्रणय मिश्रा को प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव  दुरदेशी राम संतापर, सीएम सचिवालय के उप सचिव  तीरथ प्रसाद लाड़िया और सामान्य प्रशासन विभाग-1 के उप सचिव  किशोर कुमार भूआर्य को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव स्वर्गीय रणबहादुर ग्वाली, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव  अरूण कुमार मिश्रा और गृह विभाग के अवर सचिव  पूरनलाल साहू को ई फाईल के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया। अनुभाग अधिकारियों में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी  पी.नागराजन, सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी  नंदकुमार मेश्राम और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी  भोलेनाथ सारथी को प्रशंसा पत्र दिया गया। इसी तरह से ई-फाईल में अच्छा कार्य करने के लिए खनिज संसाधन विभाग के कनिष्ठ सहायक  प्रदीप कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग-3 के कनिष्ठ सहायक  दीनानाथ साहू और सामान्य प्रशासन विभाग-7 के कनिष्ठ सहायक  प्रदीप कुमार राय को प्रशंसा पत्र देकर ई-ऑफिस में ई-फाईल कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।    मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव ने समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मंत्रालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया है। इसमें प्रथम 10 में प्रथम स्थान करने वालों में अवर सचिव  राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपूत, स्टेनोग्राफर  नवीन नाग, सहायक अनुभाग अधिकारी  योगेन्द्र कुर्रे, अतिरिक्त सचिव  चंद्रकुमार कश्यप, संयुक्त सचिव  अनुपम त्रिवेद्वी, अवर सचिव  मनोज कुमार जायसवाल, सहायक अनुभाग अधिकारी  पवन कुमार साहू, स्टेनोटायपिस्ट भावना यादव और अतिरिक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार वासनिकर को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है। 

जमशेदपुर में 24 अवैध बिल्डिंग ध्वस्त करने का हाई कोर्ट ने दिया आदेश

रांची. झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी की याचिका खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अगर अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। अदालत ने कहा कि किसी ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है। अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए? इनके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशन नहीं मिली रही है। ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है। कोर्ट इन्हें राहत नहीं दे सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व का आदेश हाई कोर्ट की बनाई अधिवक्ताओं की कमेटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद ही दिया गया है। वकीलों की कमेटी ने कहा है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एक मात्र विकल्प है। जेएनएसी की सांठगांठ पर फटकार कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि ऐसा करने के लिए जेएनएसी की भरपूर सांठगांठ रही है। अदालत ने कहा कि नौ मार्च तक जेएनएसी 24 अवैध निर्माण को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। आदेश के खिलाफ 10 भवन मालिकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमशेदपुर में अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर राकेश कुमार झा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण एक माह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जेएनएसी को हर संभव सहयोग प्रदान करे। कोर्ट ने नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को जेएनएसी को सहयोग देने में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। अवैध निर्माणों के प्रति किसी प्रकार की दया नहीं खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर यह कहा है कि अब अवैध निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की दया दिखाने का समय नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों की मिलीभगत या कम से कम उनकी घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं हैं। कुछ निर्णयों में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में उन नगर निकायों या प्राधिकरणों के विरुद्ध भी आदेश पारित किए जाने चाहिए, जिन्हें इस तरह के अवैध निर्माणों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन नहीं होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी नहीं होना ही इस स्थिति के मुख्य कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक पीड़ित हो रहे हैं।

देश के लिए मिसाल : कचरे को रिसाइकिल कर बनाया अनोखा संविधान पार्क

लखनऊ. संविधान को समझना अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में ऐसा अनोखा संविधान पार्क विकसित किया गया है, जहां बच्चे खेल-खेल में संविधान के मूल्यों को सीखेंगे, युवा नागरिक कर्तव्यों से जुड़ेंगे और आमजन स्वस्थ जीवन के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएंगे। कचरे को रिसाइकिल कर बनाए गए इस पार्क ने “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए देश के लिए एक नई मिसाल पेश की है। सहजता से जुड़ सकेगा हर आयु वर्ग का व्यक्ति यह पार्क सिर्फ हरियाली या टहलने की जगह नहीं, बल्कि एक ओपन क्लासरूम और स्ट्रीट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया गया है। न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल आदर्शों को प्रतीकों, बोर्डों और संरचनाओं के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति सहजता से उनसे जुड़ सके। बच्चों के लिए यह पार्क सीखने का आनंददायक माध्यम बन गया है, जहां पढ़ाई बोझ नहीं, अनुभव बन जाती है। संविधान पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 600 किलोग्राम की संविधान की किताब की विराट प्रतिकृति है। 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी यह प्रतिकृति न केवल आकार में भव्य है, बल्कि अपने संदेश में भी अत्यंत प्रभावशाली है। संविधान की मूल प्रस्तावना की प्रतिकृति बड़ौत नगर पालिका में स्थापित की गई है। इसका लोकार्पण राज्य मंत्री केपी मलिक और जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता राष्ट्रपिता का चरखा पूरी तरह रिसाइकल्ड मटीरियल से निर्मित यह प्रतिकृति पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह दिखाती है कि कचरा भी नवाचार और संदेश का माध्यम बन सकता है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि पार्क में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। वहीं बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर विकसित वाटर कियोस्क स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव को दर्शाता है। बदलते शहरी परिवेश में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का यह संदेश पार्क को खास बनाता है। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक और बौद्धिक समृद्धि संविधान पार्क में अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े बोर्ड, बुक प्वाइंट, लाइब्रेरी और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों की व्यवस्था की गई है। यहां आने वाला व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी समृद्ध होता है। यही कारण है कि यह पार्क युवाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश के लिए प्रेरक मॉडल बनकर उभरा संविधान पार्क जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, बागपत का संविधान पार्क बेहतर सेहत के साथ-साथ नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की समझ देता है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा गया है। संविधान पार्क आज केवल बागपत की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

राजस्थान में ED ने ठगी की 15.97 करोड़ रुपए की संपत्ति की कुर्क

जयपुर. बहुचर्चित अपेक्षा समूह चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर आंचलिक कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 15.97 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 37 अचल संपत्तियां और 1.50 करोड़ रुपए की एक चल संपत्ति शामिल है। कुर्क की गई 37 अचल संपत्तियां कृषि और आवासीय भूमि के रूप में हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं। ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गाशंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी सहित अन्य आरोपियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा समूह से संबंधित 1.50 करोड़ रुपए के बैंक खाते को भी कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी को की गई। ये था पूरा मामला यह पूरा मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि अपेक्षा समूह ने वर्ष 2012 से 2020 के बीच निवेशकों को असाधारण और अव्यावहारिक लाभ का लालच देकर करीब 194.76 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की। समूह का मुख्य संचालन कोटा से किया जा रहा था और इसकी गतिविधियां राजस्थान के कई जिलों तक फैली हुई थीं। पुलिस की ओर से मुरली मनोहर नामदेव और अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस प्रकरण में जांच शुरू की। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आपराधिक और दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसी योजनाएं तैयार कीं, जिनका उद्देश्य केवल भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर निवेशकों को फंसाना था। निवेश पर भारी मुनाफे का कोई वैध आधार या वित्तीय तंत्र मौजूद नहीं था। लाभ देकर पुन: करवाया निवेश जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआती वर्षों में निवेशकों को नाममात्र का लाभ देकर भरोसा बनाया गया। यह राशि या तो नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से दी जाती थी या पुराने निवेशकों को मिले लाभ को दोबारा निवेश कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। इससे योजनाओं के सफल होने का भ्रम पैदा किया गया, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी व्यवस्था अस्थिर थी और इसका विफल होना तय था। कोविड-19 महामारी के दौरान स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपनी जमा राशि और लाभ लौटाने की मांग की। उस समय समूह इन मांगों को पूरा करने में असमर्थ रहा और योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। इसके बाद निवेशकों ने ठगी की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। आरोपी हो चुके है गिरफ्तार पुलिस जांच में अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी मुरली मनोहर नामदेव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा संजय कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से लैपटॉप, बड़ी संख्या में चेक और नकद राशि बरामद हुई। अन्य सहयोगियों दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार और गिरिराज नायक की भूमिका भी जांच में सामने आई है। कोटा पुलिस ने इस मामले में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं और अब तक 2300 से ज्यादा पीड़ित सामने आ चुके हैं। मामले की फैक्ट फाइल जांच की शुरुआत : 2019 में, कोटा और बूंदी जिलों में। पहली कार्रवाई : मुरली मनोहर नामदेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज। मामले का खुलासा : एसआइटी और कोटा पुलिस ने निवेशकों से शिकायत मिलने के बाद शुरू किया। इतने वर्षों तक हुई चालित : 2012 से 2020 तक – मुख्यालय: कोटा प्रभावित जिले: कोटा, बूंदी, बारां कुर्क की गई संपत्तियां: 37 अचल संपत्तियां (कृषि और आवासीय भूमि) चल संपत्ति: समूह का बैंक खाता 1.50 करोड़ रुपए के साथ निवेशकों की संख्या: 2300 से अधिक पीड़ित सामने आए पुलिस और ईडी की कार्रवाई – 12 कंपनियों का रिकॉर्ड रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) जयपुर से प्राप्त 20 बैंक खातों को सीज लैपटॉप और 250 चेक बरामद 50 से अधिक मुकदमे दर्ज जांच जारी : अन्य डायरेक्टर और निवेशकों के बैंक खाते व संपत्ति नेटवर्क की पड़ताल

किसानों को मिलेगा तकनीकी लाभ: जशपुर में DST परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना

रायपुर. जशपुर में DST प्रायोजित परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नवाचार और स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिला महुआ फूल के मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हो चुका है। जिले में महुआ नेक्टर, महुआ च्यवनप्राश, लड्डू, कुकीज़ सहित अनेक पारंपरिक एवं पोषक खाद्य उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। जशपुर में DST प्रायोजित परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना हालांकि, पूरी मूल्य श्रृंखला में खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रह और सुरक्षित निर्जलीकरण एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्वीकृत परियोजना “Technological Augmentation of Indigenous Practices of ST Communities of Chhattisgarh for Sustainable Livelihood and Entrepreneurial Development” वर्तमान में जशपुर जिले में क्रियान्वित की जा रही है। यह परियोजना DST द्वारा वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी को स्वीकृत की गई है, जिसे स्थानीय सहभागिता के साथ लागू किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), कुंडली के वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी द्वारा जशपुर जिले में सोलर टनल ड्रायर की स्थापना की गई है। इस पहल में स्थानीय स्तर पर जय जंगल फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का सक्रिय सहयोग रहा है। फूड प्रोसेसिंग कंसल्टेंट एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि पारंपरिक खुले वातावरण में महुआ सुखाने की प्रक्रिया में धूल, नमी और कीटों के कारण गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे खाद्य उपयोग और बाज़ार की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। इन व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक एवं नियंत्रित निर्जलीकरण प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई। स्थापित सोलर टनल ड्रायर के माध्यम से महुआ फूलों को नियंत्रित तापमान में स्वच्छ, तेज़ और समान रूप से सुखाया जा सकता है। इससे महुआ की गुणवत्ता, रंग, सुगंध और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं तथा दीर्घकालीन भंडारण संभव हो पाता है। यह प्रणाली वर्षा, धूल और कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है तथा पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित होने के कारण पर्यावरण-अनुकूल भी है। महुआ के साथ-साथ परियोजना के अंतर्गत वनौषधियों के निर्जलीकरण पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आदिवासी महिला लाभार्थियों को गिलोय, अडूसा जैसी महत्वपूर्ण वन औषधियों एवं पालक जैसी मौसमी सब्ज़ियों के वैज्ञानिक और स्वच्छ निर्जलीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं लाइव डेमोंस्ट्रेशन कराया गया। प्रशिक्षण में सुरक्षित हैंडलिंग, ट्रे लोडिंग, नमी नियंत्रण और भंडारण की वैज्ञानिक विधियों पर विशेष जोर दिया गया। उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी पिछले तीन वर्षों से जशपुर जिले में निरंतर कार्य कर रहे हैं और खाद्य प्रसंस्करण एवं तकनीकी क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी दीर्घकालिक सहभागिता से यह परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित एक व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस प्रकार की वैज्ञानिक निर्जलीकरण प्रणालियाँ राज्य के अन्य महुआ एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से स्थापित की जाएँ, तो इससे अपव्यय में कमी, खाद्य-ग्रेड उत्पादों की उपलब्धता और आदिवासी समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। जशपुर में संचालित यह पहल छत्तीसगढ़ में वन-आधारित मूल्य संवर्धन और नवाचार की दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभर रही है।

बिहार में भी घर बैठे मिलेगा पाइप लाइन गैस कनेक्शन

दरभंगा. भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा संचालित पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) सेवा के लिए अब दरभंगा में ऑनलाइन ग्राहक पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही दरभंगा बिहार का पहला जिला बन गया है, जहां पाइपलाइन गैस कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई है। इस ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली का उद्घाटन सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने लहेरियासराय स्थित अपने संसदीय कार्यालय में किया। उन्होंने बीपीसीएल के गैस बिजनेस यूनिट (जियोग्राफिकल एरिया) द्वारा शुरू की गई इस डिजिटल सेवा का बटन दबाकर शुभारंभ किया। बीपीसीएल की ओर से दरभंगा शहर के साथ-साथ बहेड़ी और बेनीपुर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। जल्द ही ग्रामीण इलाकों में भी इस योजना को विस्तार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसद डॉ. ठाकुर ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली आम लोगों के लिए वरदान साबित होगी। अब नागरिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे, अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी ले सकेंगे और कम समय में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। पीएनजी का अर्थ है पाइप्ड नेचुरल गैस। इसमें गैस सिलेंडर के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों के किचन तक गैस पहुंचाई जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस का उपयोग होता है, जो हवा से हल्की और सुरक्षित मानी जाती है।

अंबाला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने मेयर और पार्षद के 2 फरवरी तक मांगे आवेदन

अंबाला. कांग्रेस ने अंबाला नगर निगम चुनावों के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने मेयर और पार्षद पदों के इच्छुक उम्मीदवारों से 2 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं। इसके बाद किसी का फार्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल ही में शहरी कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है। आवेदन बायोडाटा, जाति प्रमाण पत्र, आधार और वोटर कार्ड के साथ अंबाला शहर कांग्रेस भवन में या ईमेल द्वारा जमा किए जा सकते हैं। फार्मों में से चयन करने के बाद चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाई जाएगी। बता दें, बीते दिनों से कांग्रेस ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर शहरी कांग्रेस कमेटियों का गठन कर दिया गया है। अब नगर निगम चुनावों को लेकर भी पूरी तरह से मैदान में उतरने का प्लान बनाया जा रहा है। इसी के चलते जिला स्तर पर कमेटी की ओर से फैसला लिया गया है, जिसमें मेयर से लेकर पार्षद तक से चुनाव में उतरने के लिए इच्छुक लोगों के आवेदन मांगे गए हैं। जिला कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन ठाकुर ने बताया कि कांग्रेस का संगठन बनने से कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के दिशा निर्देशानुसार, कांग्रेस पार्टी का समर्पित कोई भी कार्यकर्ता महिला या पुरुष मेयर का चुनाव या पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता है तो वह प्रत्याशी अपने बायोडाटा के साथ-साथ अपना जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व वोटर कार्ड अंबाला शहर कांग्रेस भवन में जाकर जमा करवा सकता है। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी ने एक ईमेल आईडी भी जारी किया है। प्रत्याशी चाहे तो इस ईमेल आईडी पर भी अपना आवेदन कर सकता है।

शिक्षा और परंपरा का संगम: लक्ष्मणेश्वर पीजी कॉलेज खरौद के हीरक जयंती समारोह में पहुंचे वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर. वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी छत्तीसगढ़ के वित्त, वाणिज्य एवं जांजगीर चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी आज जांजगीर-चांपा जिले के खरौद नगर पंचायत स्थित शासकीय लक्ष्मणेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित हीरक जयंती समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के दीर्घ शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि हीरक जयंती जैसे आयोजन भारत की गौरवशाली बौद्धिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत की स्मृति को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि पहली सदी से 17वीं सदी तक लगभग 1600 वर्षों तक भारत विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति रहा है। शून्य जैसे महान आविष्कार और नालंदा–तक्षशिला जैसे ज्ञान केंद्र इस तथ्य के सशक्त प्रमाण हैं कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र रहा है। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान युग तकनीक और नवाचार का युग है, ऐसे में शिक्षा को समयानुकूल, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेज़ी से विकास पथ पर अग्रसर है और इस विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय की स्मारिका दर्पणग्रंथ का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव  अम्बेश जांगड़े, कलेक्टर  जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक  विजय कुमार पांडेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सरस्वती शिशु मंदिर में अतिरिक्त कक्ष का शिलान्यास वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खरौद में 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अतिरिक्त कक्ष का शिलान्यास किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने से सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में निर्णायक भूमिका निभाती है। वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक तकनीकों के महत्व से अवगत कराते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

पूर्व विधायक ताहिर हुसैन को झटका, दिल्ली दंगा केस में जमानत नहीं मिली

 नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पूर्व AAP विधायक ताहिर हुसैन, सलीम मलिक और अथर खान की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने तीनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तीनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद समानता (पैरिटी) के आधार पर जमानत की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया. इन तीनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं. अभियोजन के मुताबिक, इनकी भूमिका 2020 के दंगों की साजिश में अहम रही है. अथर खान, जो पहले एक कॉल सेंटर कर्मचारी रह चुका है, पर आरोप है कि वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अनुसार, अथर ने वहां भड़काऊ भाषण दिए और कथित तौर पर गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया, जिनमें 'दिल्ली जलाने का समय आ गया है' जैसे बयान दिए गए. उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट कराने में समन्वय करने का भी आरोप है. वहीं सलीम मलिक पर भी आरोप है कि वह CAA-NRC विरोधी बैठकों के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में शामिल था. पुलिस के अनुसार, इन आयोजकों में मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद यूनुस, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उसका भाई खालिद शामिल थे. गौरतलब है कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शारजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि उमर खालिद और शारजील इमाम के खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और सभी आरोपी एक जैसी स्थिति में नहीं हैं. इस मामले में कुल 20 आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से दो अब भी फरार हैं. शेष 18 में से कई ने पहले जमानत याचिकाएं दायर की थीं. इनमें से सात आरोपी अब भी जेल में बंद हैं, जिनमें उमर खालिद, शारजील इमाम, अथर खान, सलीम मलिक, पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन, तसलीम अहमद और खालिद सैफी शामिल हैं.