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लुधियाना में बदलाव, नगर निगम के नए कमिश्नर ने संभाली कमान

लुधियाना बुधवार, 21 जनवरी को बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 26 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में  लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर को भी बदल दिया गया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, नगर निगम लुधियाना के मौजूदा कमिश्नर आदित्य डेचलवाल का तबादला कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर रोपड़ नियुक्त किया गया है। वहीं, लुधियाना नगर निगम की कमान अब नीरू कत्याल को सौंपी गई है। अब लुधियाना नगर निगम के नए कमिश्नर नीरू कत्याल होंगे। बता दें कि नीरू कत्याल वर्तमान में पुड्डा (PUDA) में मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थीं।   नीरू कत्याल इससे पहले नगर निगम लुधियाना में एडिशनल कमिश्नर के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वह ग्लाडा (GLADA) की चीफ एडमिनिस्ट्रेटर भी रह चुकी हैं। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें लुधियाना जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी सौंपी है।  इस तबादला सूची को आगामी समय में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 में शामिल होने पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप: सब नेशनल ब्लू प्रिंट फॉर यूटिलिटी स्केल एनर्जी ट्रांजीशन" विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग में भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की ऊर्जा यात्रा में नवकरणीय ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा मध्यप्रदेश के समावेशी और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन को प्रेरणा बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने हरित ऊर्जा को विकास की मुख्य धारा में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि अन्तर्राज्यीय सहयोग और बेहतर समन्वय से राज्य में बिजली और जल आपूर्ति में स्थिरता आई है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों को भी लाभ मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण से जुड़ी नई नवकरणीय परियोजनाओं की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। राउण्ड टेबल मीटिंग के समापन-सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने भारत और प्रधानमंत्री श्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न को साझा किया। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नीति स्थिरता के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने सुधारोन्मुख राज्यों, विशेषकर मध्यप्रदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सौर ऊर्जा संबंधित उपलब्धियाँ वैश्विक स्तर पर साझा की जा सकती हैं। उन्होंने श्रम, भूमि और ऊर्जा के बेहतर समन्वय से स्वच्छ ऊर्जा में जोखिम कम करने के मध्यप्रदेश मॉडल को उल्लेखनीय बताया और प्रौद्योगिकी निवेश और ब्लेंडेड फाइनेंस पर ज़ोर दिया। राउण्ड टेबल मीटिंग में मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन श्री अशोक खन्ना, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना एवं एमडी एमपीआईडीसी श्री चन्द्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे। मीटिंग में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये एक ड्रॉफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया। विदेश में म.प्र. की नवकरणीय ऊर्जा नीति की हुई सराहना इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के उप-राज्यपाल श्री एमिल एलेस्टियान्तो डार्डक ने कहा कि उप-राष्ट्रीय सरकारें भी राष्ट्रीय नीतियों में परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की प्रगतिशील नीतियों की सराहना की। राउंड टेबल मीटिंग में प्रतिभागियों में वैश्विक और घरेलू कंपनियों के कॉरपोरेट प्रतिनिधि और निवेशक शामिल थे, जिन्होंने राज्य की नीतियों, हरित ऊर्जा की उपलब्धता, तथा डेटा सेंटर जैसी नई प्रौ‌द्योगिकी एवं नवाचारों के संबंध में जानकारी ली। चर्चाओं में नियामकीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि किस प्रकार से मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रीय या उप-राष्ट्रीय सरकारें इस क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व कर सकती हैं।  

मंत्री भूरिया की वर्ल्ड बैंक अधिकारियों के साथ बैठक हुई

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में महिला सशक्तिकरण, पोषण, बाल विकास तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उनके प्रभाव पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने वर्ल्ड बैंक के सहयोग से संचालित परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। बैठक में पोषण अभियान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण एवं नवाचारों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने राज्य सरकार द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा तकनीकी सहयोग, और भविष्य की कार्य-योजनाओं को लेकर अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने राज्य के साथ निरंतर समन्वय एवं सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक में विभागीय सचिव श्रीमती जीवी रश्मि, उप सचिव श्रीमती माधवी नागेंद्र, आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता, वर्ल्ड बैंक की दक्षिण एशिया की प्रैक्टिस मैनेजर, सुश्री अपर्णा सोमनाथन, सीनियर हेल्थ स्पेशलिस्ट सुश्री दीपिका चौधरी, साउथ एशिया रीजन के लीड हेल्थ स्पेशलिस्ट श्री सोमिल नागपाल एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

भागीरथपुरा मामला: हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, टेंडर प्रक्रिया और प्रदूषण बोर्ड के दस्तावेज होंगे संरक्षित

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हाई कोर्ट का आदेश जारी हो गया है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का संपूर्ण रिकॉर्ड (टेंडर प्रक्रिया सहित) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी कहा कि उन्हें नगर निगम और शासन द्वारा 20 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर अगर किसी तरह की आपत्ति है तो प्रस्तुत कर दें। कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर के साथ बनाई जाने वाली स्वतंत्र कमेटी के लिए याचिकाकर्ताओं से नाम मांगे हैं। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं में मंगलवार 20 जनवरी को करीब डेढ घंटे सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो बुधवार दोपहर जारी हुआ। तीन पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों के साथ छोड़छाड़ की जा सकती है।   कोर्ट ने दिया दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश याचिकाकर्ता ने ऐसी ही आशंका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट के साथ होने की आशंका भी व्यक्त की है जिसमें पानी के नमूने दूषित पाए गए थे। ऐसी स्थिति में इन दस्तावजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि वे इन दोनों दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता सुझाएं नाम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। शासन ने भागीरथपुरा मामले के लिए दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए अधिकारियों की कमेटी बना दी है। यह जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ दिखावा है। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे कलेक्टर के साथ इस मामले की स्वतंत्र निगरानी के लिए बनाई जाने वाले कमेटी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करें। 27 से पहले दे दें आपत्ति शासन ने 20 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। बताया था कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बुधवार को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि उन्हें अगर इस रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की आपत्ति है तो वे इसे 27 जनवरी से पहले पेश कर दें।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में अनुभूति कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल वन विभाग द्वारा अनुभूति कार्यक्रम वर्ष 2025-26 का आयोजन वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में किया गया। अनुभूति कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को वन, वन्य-प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अनुभूति कराकर उनके संरक्षण के लिये जागरूक एवं सहभागिता के लिये प्रेरित करना है। साथ ही वन विभाग के कार्यों, उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड के समन्वय से अनुभूति शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अनुभूति शिविर में गत वर्ष में "मैं भी बाघ" एवं "हम है बदलाव'' को जोड़ते हुये नई थीम "हम हैं धरती के दूत" के माध्यम से संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण-सह-जागरूकता शिविर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में आज बुधवार को अंतिम शिविर आयोजित किया गया। शिविर में शासकीय माध्यमिक शाला, अब्बास नगर, भोपाल के 59 छात्र-छात्राओं एवं 4 शिक्षकों ने भाग लिया। अनुभूति कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर के रूप में सेवानिवृत उप वन संरक्षक श्री ए.के. खरे उपस्थित रहे। इस अवसर पर सेवानिवृत उप वन संरक्षक श्री राजीव श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संचालक वन विहार श्री विजय कुमार, सहायक संचालक वन विहार श्री वीरेन्द्र सिंह एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहे। शिविर में शामिल हुए प्रत्येक बच्चे को अनुभूति बुक, अनुभूति बैग, केप, हर्बल किट, बटन वडी, पेन, वन विहार के ब्रोशर के साथ जलीय पक्षी, स्थलीय पक्षी, तितली प्रजाति और गिद्ध कुंजी के ब्रोशर भी प्रदान किये गये। विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर एवं नवीन प्रेरकों द्वारा पक्षी दर्शन, वन्य-प्राणी दर्शन, प्रकृति पथ भ्रमण, स्थल पर विद्यमान वानिकी गतिविधियों एवं फूड चैन की जानकारी प्रदान की गई। वन, वन्य-प्राणी व पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियों कराई गई एवं जानकारी प्रदान कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। छात्र-छात्राओं को वन्य-प्राणियों को कैसे रेस्क्यू किया जाता है, इसके सम्बंध में वन विहार में उपलब्ध रेस्क्यू वाहन के माध्यम से रेस्क्यू टीम द्वारा अवगत कराया गया। इसका प्रतिभागियों ने गंभीरता के साथ भरपूर आनंद लिया। शिविर में वन, वन्य-जीव एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिये बच्चों को शपथ दिलाई गई एवं पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र भी वितरित किये गये।  

कलेक्टर समन्वय कर बेहतर परिणाम दें : मुख्य सचिव जैन

कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में मुख्य बिंदुओं की समीक्षा कृषि वर्ष की कार्ययोजना पर भी हुआ विमर्श योजनाओं और कार्यक्रमों के लक्ष्य को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन नेकलेक्टर्स से कहा है कि वे जिलों में सरकार के प्रतिनिधि है और शासन की प्रत्येक योजना और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सभी विभागों के अमले के साथ लीडर की भूमिका निभाकर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दें। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए जिला पंचायत और नगरीय क्षेत्र के विकास योजनाओं के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ उत्कृष्ट समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत बताईं। मुख्य सचिव ने कहा कि टीम के रूप में काम करने में ही परिणाम आयेंगे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सेक्टर बनाकर माह में कम से कम दो बैठक कर लंबित योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शतप्रतिशत उपलब्धि सुनिचिश्त करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने बुधवार को मंत्रालय में कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस के पालन प्रतिवेदन पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में समीक्षा की। कलेक्टर कमिश्र्नर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाये जाने के दृष्टिगत संबंधित विभागों को आगामी एक वर्ष की कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने सुशासन को मध्यप्रदेश शासन का मूल्य मंत्र बताया उन्होंने कहा कि नामांतरण, बटवारा और सीमांकन जैसे प्रकरणों में सौ-सौ दिन की पेंडेंसी असंतोषजनक है। उन्होंने सम्पूर्ण राजस्व प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद इस तरह की कार्यप्रणाली को समन्वय के साथ दुरूस्त करने को कहा है। नामांतरण में मुरैना-भिंड, बटवारा के प्रकरणों में अनूपपूर और रीवा, भूमि के सीमांकन प्रकरणों में विदिशा और सतना, खसरा अपडेट में रीवा और इंदौर तथा अवैध कब्जा हटाने के मामले में भिंड और विदिशा जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत असंतोषजनक पायी गयी है। राजस्व संग्रहण में कम वसूली को भी मुख्य सचिव ने गम्भीरता से लिया और निर्देश दिए कि टेक्नोलॉजी का लाभ लेकर राजस्व संग्रहण बढाये। उन्होंने राजस्व प्रकरणो में बटांकन के बाद रिकार्ड दुरूस्त होने के पश्चात ही प्रकरण को निराकृत मानने को कहा है। बैठक में समग्र पोर्टल में केवाईसी को इस वर्ष के अन्त तक शत-प्रतिशत करने के निर्देश दिये है। मुख्य सचिव श्री जैन ने एमपीई सेवा पोर्टल को प्रदेश के नागरिकों के लिए सेवाओं और सुविधा की दृष्टि से रिफार्म बताते हुए कलेक्टर्स और अन्य विभागों से कहा कि मार्च अंत तक सभी 1700 सेवाएं जुड़ जाए जिससे नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से सेवाएं प्राप्त कर सकें। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गांरटी अधिनियम के प्रकरणों की समीक्षा की। बैठक मे बताया गया कि लोक सेवा गारंटी के तहत प्राप्त 1 करोड़ 9 लाख आवेदनों में से 1 करोड़ का निराकरण किया गया है इस मामले में निवाड़ी और बड़वानी टॉप पर जबकि मऊगंज और शिवपुरी निचले पायदान पर हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर संवेदनशीलता बरतें और समयअवधि बैठक में हर सप्ताह समीक्षा करें। उन्होंने निवास और आय प्रमाण पत्र, सीमांकन, अविवादित नामांतरण और जन्म के एक वर्ष पश्चात पंजीयन जैसी सेवाएं समय अवधि में निराकृत करने के निर्देश दिये। वर्तमान में 735 सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम में अधिसूचित हैं जिनमें से 602 ऑनलाइन है शेष 133 सेवाओं को भी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए है। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की कई शिकायतों को अटेंड नहीं किये जाने पर बैतूल, मऊगंज, शहडोल और भोपाल जिलों को सुधार करने की हिदायत दी। उन्होंने भूमि विवाद के मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज नही करने पर सेवा में कमीं बताया और आमजन को राहत पहुंचाने वाले इन कार्यों को सर्वोच्च्प्राथमिकता से करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स से कहा कि वे टीम भावना से काम करें और जन प्रतिनिधियों सहित आम आदमी से संवेदनशील व्यवहार रखें और यह उनकी कार्य संस्कृति में भी दिखना चाहिए । उन्होंने वन ग्राम से राजस्व ग्राम कार्य की धीमी गति पर अंसतोष व्यक्त किया तथा वन भूमि का दावा कार्य में भी कम प्रगति पर कलेक्टर्स को राजस्व और वन अमले के साथ बेहतर समन्वय कर 31 मार्च तक सभी प्रकरण निराकृत करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री जैन ने कृषि वर्ष 2026 के विभिन्न 10 आयाम की समीक्षा की और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कृषि विकास के विभिन्न पहलूओं पर रणनीति बनाने के लिए कहा है। उन्होंने मिट्टी, पानी और मौसम को सटीक तकनीकी से जोड़ने और जिला स्तर पर प्लान बनाने को कहा है। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के निर्माण के समय आकल्पित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता में अंतर होने को गम्भीरता से लिया और कहा कि राजस्व कृषि तथा जल संसाधान विभाग इस दिशा में सटीक योजना बनाकर क्रियान्वयन करें। बैठक में पराली/नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए किसानों के बीच वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रेसराईज्ड सिंचाई, परड्राप, मोरक्राप, उद्यानिकी क्लस्टर , खाद्य प्रसंस्करण, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना एक बगिया माँ के नाम, डॉ. भीमराव कामधेनु योजना की भी समीक्षा की गयी। मुख्य सचिव ने कलेक्टरर्स कों सभी योजनाओं का उत्कृष्ट क्रियान्वयन के निर्देश दिए है। स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किये जाने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए कि वे माह में स्वास्थ्य विभाग के साथ कम से कम दो बार बैठक करें और स्वास्थ्य मापदंडों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करें। बैठक में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच पूरी गुणवत्ता से करने और असत्य आकँडें प्रस्तुत नहीं करने के लिए निर्देश दिये हैं। 

मुख्यमंत्री साय शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में हुए शामिल

शहीद गैंदसिंह के नाम पर चौक, मूर्ति स्थापना और सामाजिक केंद्रों की घोषणा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

संभल में जज के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों ने बताया दबाव की कार्रवाई

लखनऊ यूपी के संभल में हिंसा के मामले में सीओ रहे एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का ट्रांसफर कर दिया गया है। सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर संभल जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं में रोष देखने को मिला। मंगलवार को सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर स्थानांतरण किए जाने के बाद बुधवार को अधिवक्ताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।   बुधवार को जिला न्यायालय परिसर में एकत्र हुए अधिवक्ताओं ने स्थानांतरण के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर द्वारा न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और सक्रियता दिखाई जा रही थी। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय लिए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में गति आई। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मीडिया कवरेज को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि स्थानांतरण से जुड़े तथ्यों को सही तरीके से सामने लाया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं का मत है कि बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी का तबादला न्याय व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं देता।हालांकि, स्थानांतरण शासन का विषय है, लेकिन अधिवक्ताओं ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। आपको बता दें कि संभल हिंसा मामले में सीओ रहे अब एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का तबादला हो गया है। विभांशु सुधीर का कार्यकाल यहां मात्र तीन माह का रहा। हाईकोर्ट ने उनके स्थान पर सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) आदित्य सिंह को सीजेएम चंदौसी नियुक्त किया है। इसके अलावा सीतापुर की सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह को इसी पद पर कन्नौज स्थानांतरित किया गया है। इस फेरबदल में इसी स्तर के आठ अन्य न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। एक सप्ताह पहले ही संभल में शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत ने यह आदेश गोली लगने से घायल खग्गू सराय निवासी एक युवक के पिता की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया था।  

बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल बना मध्यप्रदेश

नवाचार, सुशासन, जन-सहभागिता और सतर्क निगरानी तंत्र से ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान हुई सशक्त भोपाल मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का हृदय प्रदेश है। जैव-विविधता और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश राष्ट्रीय के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वनाच्छादित है, यही कारण है कि यहां वन्यजीवों, विशेषकर बाघ, तेंदुआ, चीता जैसी बिग-कैट प्रजाति के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए हैं, जिनमें से 785 बाघ मध्यप्रदेश में दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। इसी के आधार पर मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव प्राप्त हुआ है। मध्यप्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या, वैज्ञानिक प्रबंधन, पारदर्शी आंकड़े और सख्त निगरानी यह प्रमाणित करती है कि प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है। यदि यही निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश न केवल ‘टाइगर स्टेट’ बल्कि वैश्विक संरक्षण मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा। संरक्षित क्षेत्रों का सशक्त नेटवर्क मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण के लिए एक मजबूत और सुव्यवस्थित संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क विकसित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यप्राणी अभयारण्य और 09 टाइगर रिजर्वहैं। इन संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से निगरानी, आवास प्रबंधन, शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अंतरराज्यीय बाघ पुनर्स्थापना में ऐतिहासिक भूमिका मध्यप्रदेश को यह गौरव भी प्राप्त है कि यहां विश्व की पहली अंतर्राज्यीय बाघ पुनर्स्थापना परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। कान्हा एवं पेंच टाइगर रिजर्व से बाघों को अन्य प्रदेशों में स्थानांतरित कर वहां बाघ आबादी को पुनर्जीवित किया गया है। मध्यप्रदेश की यह पहल पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। राष्ट्रीय औसत से दोगुनी वृद्धि आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में 24.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 49.24 प्रतिशत रही। वार्षिक आधार पर देश में बाघों की औसत वृद्धि लगभग 6.02 प्रतिशत रही। मध्यप्रदेश में यह दर 12.31 प्रतिशत तक पहुंच गई जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक हैं। इससे सिद्ध हुआ है कि प्रदेश की संरक्षण रणनीतियां प्रभावी रही हैं। मृत्यु दर पर वैज्ञानिक और पारदर्शी दृष्टिकोण बाघ संरक्षण रणनीतियों में केवल संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मृत्यु दर का विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 तक देश में बाघ मृत्यु दर औसतन 5 प्रतिशत से कम रही, जबकि मध्यप्रदेश में यह दर लगभग 6 से 7 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बाघों की अधिक संख्या और बेहतर निगरानी प्रणाली के कारण मृत्यु की घटनाएं अधिक सटीकता से दर्ज होती हैं। इसे संरक्षण में विफलता नहीं, बल्कि बेहतर डिटेक्शन रेट के रूप में देखा जाना चाहिए। वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विश्लेषण वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में दर्ज 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्य हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है।इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, रेल और सड़क हादसे शामिल हैं। शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है।इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इन प्रकरणों में अवैध शिकार की मंशा सिद्ध नहीं हुई, बल्कि फसलों और पशुधन की रक्षा का प्रयास प्रमुख कारण रही है। व्याघ्र अंगों की तस्करी के लिये 6 बाघों का शिकार हुआ, जो कुल मौतों का 11% है।इन मामलों में बाघ के अवयव जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे वन अमले की सक्रियता और सजगता सिद्ध हुई है। आधुनिक तकनीक और सख्त कानूनों से प्रभावी बाघ संरक्षण बाघ संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा रियल-टाइम निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत विभाग की टीम के साथ विद्युत लाइन के आसपास संयुक्त गश्त, फील्ड इंटेलिजेंस नेटवर्क, स्थानीय समुदायों की सहभागिता और विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत सख्त कार्रवाई जैसे उपाय निरंतर अपनाए जा रहे हैं। बाघ संरक्षण का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। टाइगर रिजर्व आधारित पर्यटन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे संचालकों को आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इससे प्रदेश की पर्यटन आय में वृद्धि हो रही है। जनसहभागिता से प्रभावी वन और वन्य-जीव संरक्षण वन विभाग ने आम नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि बाघ संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लें। किसी भी सूचना, शिकायत या सुझाव के लिए विभागीय माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।  

झारखंड के गांव में बाहरी लोगों की NO ENTRY!

गोमो. हरिहरपुर थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव में मंगलवार की रात संदिग्ध चार युवकों को गांव में घुसने पर ग्रामीण एकजुट होकर शोर मचाते हुए पीछा किया। लेकिन युवकों ने अंधेरा का फायदा उठाकर जीतपुर सरकारी विद्यालय के पीछे स्थित जंगल की ओर भाग निकले। घटना की मिलते ही थाना के सब इंस्पेक्टर डी. हांसदा दल बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के साथ पूरे जंगल में टोर्च की रौशनी सहारे खोजबीन किया। लेकिन तब तक वे लोग भाग चुके थे। महिलाएं भी एकजुट होकर घर के बाहर खड़ी ग्रामीणों ने डंडा, टोर्च लेकर देर रात तक तलाश करते रहे। वहीं महिलाएं भी एकजुट होकर घर के बाहर खड़ी नजर आई। बता दें कि 16 जनवरी को इसी गांव के एक बंद घर से करीब डेढ़ लाख रुपय की संपत्ति की चोरी हुई थी। जिसके बाद संदिग्ध व्यक्ति का चहल पहल ज्यादा बढ़ गया था। गांव में दूसरी चोरी की घटना ना हो इसके लिए जीतपुर गांव में पुलिस के सहयोग से ग्रामीण पिछले पांच दिनों से पहरेदारी कर रहे हैं। गांव में बाहरी लोगों के लिए प्रवेश वर्जित  चोरी की घटना के बाद से गांव में पुलिस के द्वारा दिए गए बैरियर को बीच सड़क पर लगा दिया गया है ताकि बाहरी लोगों की प्रवेश से पूर्व बैरियर में अपनी पहचान बतानी होगी।  ग्रामीणों ने कहा कि गांव में बाहरी लोगों के साथ कबाड़ी तथा फेरी करने वाले को भी अपनी पहचान बताना होगा, अन्यथा नहीं घुसने दिया जायेगा‌। गांव में कबाड़ी लेने के लिए पश्चिम बंगाल नंबर की मोपेड बाइक से घूमने वाले को भी चिन्हित किया जा रहा है। मौके पर पूर्व मुखिया जागरनाथ महतो, कपिल सिंह, पंसस सोहन महतो आदि शामिल थे। लोगों को चिन्हित किया जा रहा ग्रामीणों की सूचना पर हमलोग गांव पहुंचे। तब तक संदिग्ध युवक जंगल की ओर भाग निकले। खोजबीन किया पर उन लोगों का कुछ भी पता नहीं चल पाया, हालांकि वैसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है। – डी. हांसदा, सब इंस्पेक्टर, हरिहरपुर थाना