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सेफ दिल्ली ऐप: वॉयस कमांड से सेकंडों में मिलेगा SOS अलर्ट, सीधे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे नागरिक

नई दिल्ली  राजधानी में महिलाओं, बुजुर्गों, और छात्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार जल्द ही 'सेफ दिल्ली ऐप' लॉन्च करने जा रही है। दावा है कि यह मोबाइल ऐप किसी भी आपात स्थिति में एक सेकंड से भी कम समय में पुलिस कंट्रोल रूम तक अलर्ट भेज सकेगा। इसके जरिए न केवल लोकेशन, बल्कि घटनास्थल का लाइव ऑडियो, विडियो और GPS भी पुलिस को तुरंत उपलब्ध होगा। रेखा सरकार के सेफ दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि खतरा महसूस होने पर पीड़ित को फोन चलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल ऐप में पहले से दर्ज किए गए वॉयस कमांड बोलते ही ऐप सक्रिय हो जाएगा और पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके साथ ही ऐप में आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए पहले से फीड किए गए मोबाइल नंबर पर SMS और वट्सऐप के माध्यम से परिवार या भरोसेमंद लोगों को भी सूचना भेजी। अधिकारियों का कहना है कि यह ऐप खासतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी साबित होगा जो देर रात ऑफिस से घर आती है, वो छात्राएं जो सुनसान रास्तों या कॉलेज कैंपस में अकेली होती है और वरिष्ठ नागरिक जो घर में अकेले रहते हैं। बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ जाएंगे किसी भी आपात स्थिति में वे बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ सकेंगे। आपात स्थिति में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज सकेंगे। सरकार का दावा है कि दिल्ली में स्ट्रीट क्राइम, महिलाओं के साथ छेड़छाड़, स्टॉकिंग, लूटपाट, चेन स्नैचिंग, सुनसान इलाकों में होने वाली वारदातों और बुजुर्गों के साथ अपराधों पर अंकुश लगाने वाला यह ऐप देश में अपनी तरह का पहला SOS अलर्ट एक सकड से भी कम समय में पुलिस तक पहुंचेगा। अधिकारियों ने क्या कहा अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के सेंट्रल जिले में सेफ दिल्ली ऐप का एक सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लाइव विडियो और ऑडियो मिलने से कंट्रोल रूम को घटनास्थल की वास्तविक तस्वीर तुरंत मिल जाएगी। फुटेज होने से अपराधियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सेफ दिल्ली ऐप को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सबकुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द इसे कैबिनेट से लॉन्च भी कर दिया जाएगा

यूपी में बिजली दरों को लेकर फैसला टलता रहा, अब नियामक आयोग की तैयारियां अंतिम चरण में

लखनऊ  बिजली बिलों की नई दरों को लागू करने को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही उठक-बैठक अब खत्म होने वाली है। जल्द ही नियामक आयोग नई दरों को लेकर ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि इस बार नई नदरों में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।कभी भी नई दरों का ऐलान हो सकता है। बिजली की नई दरों के ऐलान की उलटी गिनती अब शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक नियामक आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार लगातार सातवें साल बिजली की दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बेहद कम है। अगर ऐसा हुआ तो यह नया रिकॉर्ड होगा। बिजली की नई दरों पर सभी बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने मार्च और अप्रैल में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी हो चुकी है। नियम के मुताबिक नियामक आयोग को पांच जून के पहले ही दरें घोषित कर देनी चाहिए थीं। हालांकि, अब देर से ही सही, जल्द ही ये जारी हो सकती हैं। 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को माना आधार पावर कॉरपोरेशन और बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व का अंतर बताया है। उन्होंने लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में इजाफे की मांग की है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना के तहत लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को उपभोक्ता बिलों में शामिल करने का भी प्रस्ताव पावर कॉरपोरेशन ने दिया है। बिजली दरों में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं पर डाले जाने को भी गलत बताते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया है। नोएडा पावर कंपनी के उपभोक्ताओं को मिल रही 10 प्रतिशत रियायत बरकरार रहे इसके लिए भी पैरवी की गई है। केवल दरें ही नहीं और भी फैसले आएंगे टैरिफ आदेश में केवल बिजली दरें ही नहीं तय होंगी बल्कि और भी फैसले आएंगे। इनमें बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले उपभोक्ताओं को साझा क्षेत्र में बिजली खर्च का ब्योरा मिलने, घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन ही इस्तेमाल करने की छूट और स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं से न लिए जाने समेत अन्य मसले शामिल हैं। बिजली बिल में पुराना बकाया नहीं जोड़ सकेगा पावर कॉरपोरेशन पावर कॉरपोरेशन अब पुराने बकाया भुगतान की रकम बिजली बिलों में नहीं वसूल सकेगा। जून में हो रही 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली मामले में नियामक आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने कहा है कि नियम पुराना बकाया जोड़ने की इजाजत नहीं देते हैं। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ईंधन अधिभार के एवज में अतिरिक्त शुल्क लगता रहा है। बीते 14 महीने में पावर कॉरपोरेशन ने इस तरह से करीब 2800 करोड़ रुपये की वसूली की। इस बीच 600 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के अलग-अलग महीनों में कम भी किए गए। इस साल जून में जब अधिकतम ईंधन अधिभार शुल्क के तौर पर 10 प्रतिशत लिए जाने लगे तो इसी गणना को लेकर सवाल उठने लगे। हर महीने बिल में जोड़ा जा रहा था अधिभार शुल्क मामला नियामक आयोग पहुंचा तो पावर कॉरपोरेशन ने जवाब दिया कि उसने बकाया भुगतान की रकम को भी जोड़कर अधिभार शुल्क लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि हर महीने किया गया है। नियामक आयोग ने अपने फैसले में बकाया भुगतान की रकम को ईंधन अधिभार शुल्क में जोड़ना गलत बता दिया। ऐसे में अब सभी 14 महीनों में हुई वसूली की समीक्षा होगी, जिसके बाद अतिरिक्त वसूली गई रकम पर फैसला होगा। वहीं, आयोग ने अब पहली बार यह भी साफ कर दिया है कि इस तरह की रकम पर फैसला सालाना तौर पर बिजली दरें तय करते वक्त लिया जाएगा। आयोग के इस फैसले तक बकाया भुगतान की रकम के समायोजन तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने आदेश में कहा है कि केवल तय महीने में वास्तिवक ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर खर्च की रकम के एवज में ही अधिभार शुल्क लगाया जाएगा।

मुरैना ट्रिपल मर्डर से सनसनी, पत्नी और मासूम बच्चों की हत्या के बाद आरोपी पति ने की आत्महत्या

मुरैना   मध्य प्रदेश के मुरैना में पति-पत्नी के बीच हुए आपसी झगड़े में पति इतना आक्रोशित हो गया कि उसने अपने दो मासूम बच्चों व पत्नी को कुल्हाड़ी से काट दिया और खुद भी ट्रेन से जाकर कट गया। यह घटना माता बसैया थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव में घटित हुई। इस हत्याकांड का पता शनिवार की सुबह पड़ोसियों को लगा तो पुलिस को सूचना दी पुलिस मौके पर पहुंचकर छानबीन कर रही है। पत्नी से चल रहा था विवाद, मायके से दो दिन पहले ही लाया था जानकारी के मुताबिक किशनपुर गांव निवासी बलराम पुत्र हरिचरण कुशवाह का अपनी पत्नी रविता उम्र 30 साल से विवाद चल रहा था। जिसकी वजह से वह कुछ दिन से अपने मायके कुतवार गांव में रह रही थी। दो दिन पहले ही बलराम व अन्य लोग पंचायत के बाद उसे किशनपुर गांव लाये थे। शुक्रवार की रात बलराम और रविता में फिर विवाद हो गया। जिससे आक्रोशित बलराम ने रविता और अपने बच्चों आरव उम्र 10 साल व अतुल उम्र 7 साल पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद खुद घर से भाग गया। सुबह जब बलराम के घर के दरवाजे नही खुले तो पड़ोसियों ने देखा तो घर के आंगन में मां और दो बच्चों के रक्तरंजित शव पड़े थे। जिस पर पुलिस को सूचना दी गई। उधर, शनिवार की सुबह पता चला कि शिकारपुर फाटक के पास जाकर बलराम ने भी ट्रेन के सामने जाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस अभी मोके पर पड़ताल कर रही है। चरित्र शंका ने उजाड़ा परिवार बताया जा रहा है कि मृतक बलराम अपनी पत्नी रविता के चरित्र पर शक करने लगा था। कुछ दिन पहले किशनपुर में आयोजित भागवत कार्यक्रम के दौरान रविता ने मंच पर डांस किया था। कार्यक्रम में मौजूद किसी करीबी व्यक्ति ने उसका वीडियो बनाकर बलराम को भेज दिया। वीडियो देखने के बाद बलराम के मन में पत्नी को लेकर संदेह गहराने लगा और वह आए दिन उससे विवाद करने लगा।विवाद बढ़ने पर रविता कुछ समय के लिए अपने मायके भी चली गई थी, लेकिन इसके बावजूद बलराम की नाराजगी और नफरत कम नहीं हुई। बताया जाता है कि उसने डांस का वीडियो अपने करीबी रिश्तेदारों को भी भेजा और पत्नी के बारे में आपत्तिजनक व भला-बुरा लिखकर मैसेज भी भेजे। वारदात से जुड़े अहम घटनाक्रम     बचाव के लिए कड़ा संघर्ष- घटनास्थल के हालात देखकर साफ है कि मृतका रविता ने खुद को और बच्चों को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। उसका शव खटिया से करीब 20 फीट दूर मिला।     मौके से कुल्हाड़ी बरामद- पुलिस को छानबीन के दौरान वारदात में इस्तेमाल की गई खून से सनी कुल्हाड़ी घर के भीतर से ही मिल गई है।     घर के बाहर सो रही थी मां- दिल दहला देने वाली बात यह है कि मृतक बलराम की मां रामकली रातभर घर के बाहर ही सो रही थी, लेकिन उसे भीतर चल रहे इस कत्लेआम की भनक तक नहीं लगी।     दूधवाले के आने पर खुला राज- शनिवार सुबह जब दूधवाला आया और घर के भीतर हलचल नहीं हुई, तब जाकर इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा हुआ।  

किशनगंज-पूर्णिया में भारी बारिश की चेतावनी, उत्तर बिहार में गरज-चमक की संभावना

पटना  बिहार में मौसम का रंग बदलने लगा है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी से हीट वेव से निजात मिली है। कई जिलों में बादलों की आवाजाही से मौसम पहले से बेहतर हुआ है। राज्य के 23 शहरों के अधिकतम तापमान में शुक्रवार को आंशिक कमी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शनिवार को किशनगंज और पूर्णिया में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल में मेघ-गर्जन और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। कुल मिलाकर सात जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण मध्य बिहार में भी एक दो जगहों पर आंधी -पानी की संभावना है। मौसम विभाग की ओर से 28 और 29 जून को राज्य में कई जगहों पर तेज बारिश का पूर्वानुमान किया गया है। मौसमविदों के अनुसार मानसून ट्रफ अभी राज्य में मोतिहारी से होकर गुजर रहा है। उत्तर बिहार में पुरवा तो दक्षिण बिहार में कई जगहों पर पछुआ का प्रभाव है। पटना में पुरवा और पछुआ के मिलन की स्थिति बनी हुई है। इस वजह से धूप और नमी के मिश्रण से गरज तड़क वाले बादल बन रहे हैं। मानसूनी बारिश के लिए अभी करना होगा इंतजार मुजफ्फरपुर जिले में मानसून की बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को जारी पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। इसके अनुसार अगले चार दिनों में बारिश की संभावना काफी कम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने से यह स्थिति बन रही है। हालांकि, इस दौरान जिले में तीन दिनों तक खंड बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, शुक्रवार को अधिकतम के साथ ही न्यूनतम तापमान में गिरावट आई। लेकिन, पुरवा हवा के कारण उमस की अधिकता से लोग बेचैन रहे। पूसा स्थित ग्रामीण मौसम विज्ञान केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि पहले से ही बंगाल की खाड़ी से आनेवाला मानसूनी ट्रफ जिले में प्रवेश के साथ कमजोर पड़ा है। उसके बाद अब दक्षिण-पश्चिम मानसून भी पूर्वी यूपी में आने के बाद कमजोर हो गया है। इससे बारिश की संभावना कम हो गई है। फिलहाल 30 जून तक बारिश होने की संभावना महज 20 से 25 फीसदी है। यह बारिश भी जिले के एकाध स्थानों पर हो सकती है। लेकिन इस बीच जिले में गरज चमक के बीच 50 किमी तक की तेज पुरवा हवा चल सकती है। दो जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में मानसूनी गतिविधियों के जोर पकड़ने की संभावना है। नमी बढ़ने से परेशानी इधर, पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान एक डिग्री कम होकर 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2.3 डिग्री कम रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान में 2.2 डिग्री की कमी आई। यह सामान्य से 2 डिग्री नीचे 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। औसत नमी 70% रही। साथ ही 8 किमी की गति से पुरवा हवा चली।

​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा ​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात रायपुर        राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।      ​मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने। ​ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण   ​शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।      इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है। ​ आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति       ​सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।      ​सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।  "योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"     ​प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

हनुमानगढ़ी महंत संतराम दास के निधन से संत समाज में शोक, सरयू तट पर होगा अंतिम संस्कार

अयोध्या अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंत संतराम दास (85) का शनिवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 11 बजे अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनके निधन से संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है। महंत संतरामदास सीएम योगी के करीबी महंतों में से थे। बताया गया कि महंत संतराम दास उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित थे तथा पिछले करीब आठ माह से उनका उपचार चल रहा था। हाल ही में उनका इलाज मेदांता अस्पताल में हुआ था। इलाज के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे। महंत के पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। महंत संतराम दास की अंतिम यात्रा शनिवार शाम 4 बजे हनुमानगढ़ी से निकलेगी। इसके बाद सरयू तट पर पूरे वैदिक रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। महंत संतराम दास का अयोध्या के संत समाज में विशेष सम्मान था। सीएम योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या प्रवास के दौरान समय-समय पर उनके आश्रम पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते रहे थे और उन्हें गदा व रामनामा भेंट कर सम्मानित करते रहे थे। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास उन्हीं के शिष्य हैं। उज्जैनिया पट्टी के महंत संतराम दास के निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। राजू दास ने सोशल मीडिया एक्स पर दी जानकारी हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने सोशल मीडिया एक्स पर महंत संतराम दास जी के निधन की सूचना दी। उन्होंने अस्पताल की फोटो साझा करके लिखा, हमारे पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री 1008 श्री महंत संतराम दास जी महाराज पंचांग पट्टी उज्जैनिया हनुमानगढ़ी,अयोध्या जी का गोलोकवास अभी हो गया है। अभी सायं 3 बजे शोभा यात्रा निकाली जाएगी। दाह संस्कार आज (शाम 4 बजे ) नया घाट सरयू तट (कच्चा घाट) पर किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर महंत के निधन को लेकर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने का क्रम शुरू हो गया। आचार्य संतोष अवस्थी ने लिखा, हनुमानगढ़ी उज्जैनिया पट्टी के पूज्य महंत श्री संतरामदास जी महाराज का सांकेतवास श्री अवध की नागातीत संत परम्परा की अपूरणीय क्षति है। भावभीनी श्रद्धांजलि। श्री हनुमन्तलाल जी महाराज पुण्यात्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें। अनुयायियों के प्रति हार्दिक संवेदना।

जनता के द्वार, डिजिटल सरकार’— छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई पहचान बना सेवा सेतु

​'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार': छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’ ​धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी रायपुर        आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।       ​इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है। ​चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक       ​अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।       ​पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। ​घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा      ​लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। ​नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी। ​डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'     ​सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।      लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। ​सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर     ​धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

अमृतसर में आज जुटेंगे CM मान और केजरीवाल, हंसराज रघुवंशी करेंगे शिव महिमा का गुणगान; ट्रैफिक एडवाइजरी जारी

 अमृतसर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज अमृतसर आएंगे। वे पाइटेक्स ग्राउंड, रंजीत एवेन्यू में आयोजित भगवान शिव के नाम एक शाम कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी भगवान शिव की महिमा का गुणगान करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सनातन सेवा समिति पंजाब तथा पंजाब सरकार के पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम शनिवार शाम 6:30 बजे शुरू होगा। संत-महापुरुषों, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। आयोजन में प्रवेश सभी श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः निःशुल्क रहेगा। कार्यक्रम स्थल पर विशाल मंच और भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने, पेयजल, पार्किंग, चिकित्सा एवं सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। शुक्रवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सलाहकार दीपक बाली, जिलाधीश दलविंदरजीत सिंह, पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर तथा सनातन सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष विजय शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया और तैयारियों की समीक्षा की।  मुख्यमंत्री मान और केजरीवाल करेंगे शिरकत राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी विशेष रूप से शामिल होंगे। दोनों नेता भगवान शिव के चरणों में मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना करेंगे। समय पर पहुंचने की अपील पंजाब सरकार के अनुसार, इस राज्य स्तरीय धार्मिक समागम का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। आज शाम होने वाले इस समागम को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। आयोजकों ने लोगों से समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। 4 पॉइंट्स में पढ़ें जारी ट्रैफिक एडवाइजरी:-     एडीसीपी ट्रैफिक अमनदीप कौर ने बताया कि हरतेज अस्पताल से गुमटाला रोड और टी-पॉइंट (इन-आउट बेकरी) से कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर विशेष ट्रैफिक प्रबंधन लागू रहेगा। आम लोगों से अपील की गई है कि अत्यंत आवश्यक कार्य न होने पर इन मार्गों का उपयोग करने से बचें।     रंजीत एवेन्यू जाने वाले वाहन चालक रतन सिंह चौक, एम.के. होटल रोड, बेस्ट वेस्टर्न रोड और सी-मार्केट टी-पॉइंट से होकर जाने वाले वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें। वहीं, शहर के बाहर से आने वाले लोगों को आईटीआई–आनंद पार्क मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।     कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि प्रमुख चौराहों पर पुलिस कर्मी लगातार निगरानी रखेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी भी प्रकार की शरारती गतिविधि में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त और तत्काल कार्रवाई की जाएगी।     ट्रैफिक पुलिस ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं से ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने, निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करने तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों का सहयोग करने की अपील की है। इससे धार्मिक समागम के शांतिपूर्ण संचालन के साथ लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं सरकार की ओर से आयोजन स्थल पर पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष प्रबंध किया गया है। आयोजकों ने लोगों से समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव कार्यक्रम के दौरान रंजीत एवेन्यू और आसपास के इलाकों में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहेगा। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार हरतेज अस्पताल से गुमटाला रोड तथा इन-आउट बेकरी टी-पॉइंट से कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया जाएगा।

श्रीराम के अस्तित्व को नकारने और रामभक्तों पर गोली चलाने वाले लोग कर रहे हैं आस्था की बात: सीएम

आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में पहली एफआईआर के बाद सीएम योगी ने कहा- एसआईटी रिपोर्ट आते ही शुरू हो गई कार्रवाई मुख्यमंत्री ने दोहराया- मैंने कहा था कि दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा, एसआईटी की संस्तुतियों के अनुरूप कार्रवाई को आगे बढ़ा रही सरकार रामभक्तों से सीएम योगी की अपील- अयोध्या पर आक्षेप मत करें, श्रीराम की मर्यादा का पालन करें श्रीराम के अस्तित्व को नकारने और रामभक्तों पर गोली चलाने वाले लोग कर रहे हैं आस्था की बात: सीएम देवरिया, श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही तत्काल कार्रवाई प्रारंभ हो गई। मैं आश्वस्त करता हूं और मैंने कहा भी था कि हम दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेंगे। जन आस्था के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा, वह उसका भुक्तभोगी होगा। यह छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती। देवरिया में शुक्रवार को विकास परियोजनाओं के शिलान्यास/लोकार्पण अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं 19 जून को अयोध्या दौरे पर था। मैंने तब भी कहा था कि अयोध्या हम सबकी आस्था की प्रतीक है, भारत के सनातन धर्म की प्रतीक है। अयोध्या पर आक्षेप न करो, प्रभु श्रीराम की मर्यादा का पालन करना सीखो। अयोध्या के बारे में जो समाचार मिल रहे थे, उस पर मैंने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कार्रवाई भी प्रारंभ हो जाएगी। आक्षेप लगाने वालों की मंशा अच्छी नहीं मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों व रामभक्तों से कहा कि जो लोग आज आक्षेप लगाने का प्रयास कर रहे हैं, उनकी मंशा अच्छी नहीं है। ये वो लोग हैं जो भगवान राम को नकार चुके थे, भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर चुके थे। कांग्रेस व सपा को आड़े हाथ लेते हुए सीएम ने कहा कि एक पार्टी कहती थी कि राम हुए ही नहीं, यानी वे लोग अयोध्या को भी नहीं मानना चाहते थे। वे लगातार न्यायालय में मुकदमा लड़ते रहे, वकीलों की फौज खड़ी करते रहे। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण के खिलाफ खड़े रहे। वहीं दूसरा पक्ष उन लोगों का है, जो भगवान राम का नाम लेने वालों पर गोली चलाता था और आज वही लोग कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ये लोग बताएंगे हमें आस्था ! रामनवमी पर दंगा करवाते थे, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को बैन करते थे, कांवड़ यात्रा नहीं निकलने देते थे, दुर्गा पूजा में दंगा करवाते थे। लार का दंगा तो सबको याद ही है। और, ये लोग कहते हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है ! एसआईटी की सिफारिश के अनुरूप कार्रवाई को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दलों के काले कारनामों का काला चिट्ठा है। कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं, बल्कि बेईमानी व भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए थे। वही लोग आज अयोध्या पर आक्षेप लगा रहे हैं। डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती रोकी इसीलिए वह छटपटाहट रही है। जब उसे कुछ नहीं मिला तो जन आस्था के साथ खिलवाड़, रामभक्तों पर आक्षेप और अयोध्या को बदनाम करने में जुट गई। यह स्वीकार्य नहीं है। सरकार की मंशा पहले दिन से स्पष्ट है। मैं फिर अपील करूंगा कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत लो। रामभक्तों और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करो। अगर पुष्ट प्रमाण नहीं हैं तो आरोप-प्रत्यारोप बंद करो और अगर प्रमाण हैं तो प्रस्तुत करो, एसआईटी का सहयोग करो। एसआईटी की सिफारिश के अनुरूप सरकार कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। जब वरिष्ठ अधिकारियों की टीम काम कर रही है तो फिर राजनीतिक बयानबाजी बंद होनी चाहिए।

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से OBC परिवारों को बड़ी राहत, 5 हजार से ज्यादा बेटियों को मिला लाभ

योगी सरकार की शादी अनुदान योजना से ओबीसी परिवारों को बड़ी राहत, 5 हजार से अधिक बेटियां लाभान्वित 2026-27 में 1.05 लाख लाभार्थियों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की सहायता गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहारा बनी शादी अनुदान योजना विकलांग, विधवा और भूमिहीन परिवारों को आवेदन में प्राथमिकता लखनऊ   उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए राहत का मजबूत आधार बनती जा रही हैं। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के गरीब परिवारों के लिए संचालित शादी अनुदान योजना बेटियों की शादी में आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही इस योजना का सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक 5 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों को शादी अनुदान योजना का लाभ मिल चुका है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं तेजी से जमीनी स्तर पर पहुंच रही हैं और जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध हो रही है। 2026-27 में 1 लाख से अधिक लोगों को लाभ देने का लक्ष्य दरअसल गरीब परिवारों के लिए बेटी की शादी हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती रही है। ऐसे में योगी सरकार की शादी अनुदान योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार लोगों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें शुरुआती महीनों में ही 5032 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। कुल आवेदकों में 4178 ऐसे भी शामिल हैं, जिन्होंने मार्च में शादी की थी और उसी माह आवेदन किया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 लाख 16 हजार से अधिक आवेदकों को इस योजना के तहत सहायता प्रदान की गई थी। बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को दिया जाता है, जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। साथ ही योजना के लिए यह भी अनिवार्य है कि लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष हो। योगी सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता देने का भी सराहनीय कार्य किया है। विकलांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को आवेदन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाती है।  लाभार्थियों को समय पर मिल रही धनराशि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने शादी अनुदान योजना की सफलता पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रही है। आवेदक को 20 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी है और लाभार्थियों को समय पर मदद मिल रही है। प्रमुख सचिव ने बताया कि यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देकर बड़ी सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।