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दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में 30 कलाकार देंगे कड़शा नृत्य की प्रस्तुति

​​​​​​​गुमला. इस वर्ष दिल्ली में 26 जनवरी गणतंत्र‎ दिवस का समारोह गुमला जिला के लिए‎ गर्व की अनुभूति कराएगा। वजह है, भारत ‎की राजधानी दिल्ली के लाल किला के‎ ग्राउंड में होने वाले ऐतिहासिक गणतंत्र‎ दिवस की परेड में झारखंड की‎ बहुचर्चित लोक नृत्य शैली कड़शा की ‎झांकी झारखंड के गुमला जिला के ‎भरनो निवासी प्रसिद्ध लोक गायिका सह‎शिक्षिका सुषमा नाग के नेतृत्व में 30 ‎कलाकारों का दल 7 जनवरी को गुमला‎ जिला के भरनो से दिल्ली के लिए‎ रवाना होगी। इसमें ‎भरनो, सिसई, बसिया, चैनपुर सहित कई ‎प्रखंडों के महिला, पुरुष कलाकार भाग ‎लेंगे। सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी भरनो मुख्यालय स्थित अमनपुर ‎निवासी बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुषमा‎ नाग अपनी प्रतिभा से कई बार गुमला ‎जिला को गौरवान्वित किया ‎‎है, परंतु इस बार की उपलब्धि और बड़ी‎ है। भारत सरकार के कला संस्कृति‎ मंत्रालय के निमंत्रण पर कड़शा नृत्य में ‎‎महारत सुषमा नाग झारखंड का ‎प्रतिनिधित्व करेंगी। युद्ध‎स्तर पर की जा रही तैयारी 26 जनवरी 2026 ‎गणतंत्र दिवस समारोह स्थल लाल किला ‎में प्रस्तुत होने वाले कड़शा नृत्य की झांकी‎ को लेकर कलाकार खासे उत्साहित हैं। युद्ध‎स्तर पर तैयारी की जा रही हैं। सुषमा‎ नाग ने बताया ‎‎कि झारखंड की लोक संस्कृति की अद्भुत‎ नृत्य शैली कड़शा है। उन्होंने कहा- यह झारखंड की‎ संस्कृति, सभ्यता, समृद्धि एवं पारंपरिक‎ जीवन शैली को प्रदर्शित करती है। गणतंत्र ‎‎दिवस समारोह में कड़शा नृत्य शैली की ‎‎झांकी दिखलाने का मौका मिला‎ है। झारखंडी नृत्य शैली को वैश्विक ‎पहचान मिलेगी और झारखंडी सभ्यता ‎‎संस्कृति को पूरी दुनिया के लोग देखेंगे।‎ 2021 में जनजाति लोक नृत्य में मिला था प्रथम स्थान कड़शा का अर्थ कलश होता है, जो उरांव जनजाति का प्रतीक चिन्ह है। इस नृत्य को अतिथियों के आगमन पर विशेष तौर पर आयोजित किया जाता है। इसमें कलश में नए धान की गुथी हुई बाली को डालकर पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी महिलाओं द्वारा अभिवादन किया जाता है, जो एकता पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है। उरांव जनजाति नृत्य शैली विभिन्न मौसमी रागों पर आधारित नृत्य शैली होती है। सुषमा नाग ने बताया कि रायपुर में 2021 में आयोजित जनजाति लोक नृत्य में इस नृत्य काे प्रस्तुत किया गया था। जहां उनकी टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का आतंक: एक ही परिवार के 3 लोगों को कुचला

गोइलकेरा. गोइलकेरा में पगलाए जंगली हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली। प्रखंड के आराहासा पंचायत अंतर्गत सोवां गांव में सोमवार–मंगलवार की दरमियानी रात हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। मृत बच्चों में एक साल का बेटा और तीन साल की एक बेटी है। वहीं, मृतक की पत्नी ने एक दुधमुंही बच्ची के साथ भागकर किसी तरह अपनी जान बचा पाई। हाथी के हमले से अब तक सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान वन प्रमंडल के अलग अलग गांवों में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, गोइलकेरा प्रखंड के सायतबा, कितापी और बिला गांव में एक एक व्यक्ति को मौत की नींद सुलाने के बाद लगातार चौथे दिन हाथी ने सोवां में एक ही परिवार के तीन लोगों को मार डाला। जानकारी के अनुसार वन विभाग सोमवार देर रात हाथी को ट्रैक कर उसे जंगल की ओर भगाने का अभियान चला रहा था। इसी दौरान विभाग को सूचना मिली कि हाथी को बाईहातु के पास देखा गया है। टीम के वहां पहुंचने पर पता चला कि सोवां में हाथी ने एक परिवार पर हमला कर दिया है। वन विभाग के कर्मी मशाल लेकर टुंगरी पर स्थित झोंपड़ी तक पहुंचे। जहां हाथी के हमले में एक व्यक्ति और उसके बच्चे की मौत हो चुकी थी, जबकि एक बेटी घायल अवस्था में थी और उसकी सांसें चल रही थी। उसे बचाने के लिए देर रात ही विभाग द्वारा मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार में पांच लोग थे और वे टुंगरी पर झोंपड़ी बनाकर रहते थे। आसपास कोई बस्ती नहीं थी, जिससे हाथी के हमले के दौरान उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी। घटना से पूरे इलाके में दहशत है। निगरानी में जुटा वन विभाग, अंधेरे में हो परेशानी : हाथी को सुरक्षित और सघन जंगल में भगाने के लिए वन विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पश्चिम बंगाल से आई एक्सपर्ट की टीम भी है। सोमवार की रात वन विभाग का 25 सदस्यीय दल हाथी को ट्रैक करने में जुटा था। इसी दौरान सोवां गांव में यह दर्दनाक हादसा हो गया। टीम मौके पर पहुंची लेकिन तमाम प्रयास के बावजूद घायल बच्ची को बचाया नहीं जा सका। वहीं, सुदूर क्षेत्र में सड़कों की खराब हालत और अंधेरे के चलते अभियान में परेशानी आ रही है। हाथी के हमले के बाद देर रात अभियान रोक कर बच्ची को अस्पताल ले जाया गया था। सुबह फिर से अभियान की शुरुआत की गई है।

बिहार में हाइवे-एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को अब नहीं लगेगा अड़ंगा

पटना. बिहार में हाइवे, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़कों के निर्माण के लिए सबसे प्रमुख माने जाने वाली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए नीतीश सरकार ने विशेष पहल की है। इसके तहत विभागों की आपसी असहमति को दूर करने की कोशिश की गई है। दरअसल, पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के बीच जमीन की रिपोर्ट मांगने-देने में कई बार देरी हो जाती है। इसका असर, विभिन्न सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पड़ता है। इसका समाधान निकालने के लिए बिहार में अब जमीन अधिग्रहण के लिए परियोजनावार राजस्व अधिकारी तैनात किए जाएंगे। पथ निर्माण ने इसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा है। विभाग की यह कवायद सड़क परियोजनाओं के लिए तेजी से जमीन अधिग्रहण करना है, ताकि उसे समय पर पूरा किया जा सके। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के आसार हैं। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में जब पथ निर्माण विभाग किसी खास परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रगति की रिपोर्ट मांगता है तो वे जिले भर की परियोजना का हवाला देते हुए अपनी उपलब्धि गिनाने लगते हैं। साथ ही परियोजनाओं की संख्या गिनाते हुए अपनी व्यस्तता भी गिनाने लगते हैं। उनकी इस दलील के कारण यह हो रहा है कि कोई-कोई परियोजना में सालों बाद भी भी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए अब विभाग ने तय किया है कि राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए अधिकारियों को नामित कर दिया जाए। खासकर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे में अधिकारियों को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की ओर से नामित किया जाता है। बिहार में सड़क निर्माण परियोजनाओं की बाधा दूर ऐसे में अगर पथ निर्माण विभाग किसी अधिकारी का नाम केंद्र को भेज देगा तो वे अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं पाएंगे। ऐसे अधिकारियों की मांग पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग से की है। ये अधिकारी एडीएलओ (अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी) होंगे। ये जिलों में ही डीएलओ के अधीन काम करते हैं। अनुमंडल में बैठने वाले डीसीएलआर के समकक्ष इनकी शक्ति होती है। दोनों विभागों में बनी सहमति, जल्द निकलेगा आदेश पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग को कहा है कि वह परियोजनावार एडीएलओ दे। वे पथ निर्माण के लिए सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करेंगे। केंद्र सरकार, पथ निर्माण के साथ ही राजस्व विभाग के साथ समन्वय कायम करने की जिम्मेदारी एडीएलओ की होगी। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग और पथ निर्माण विभाग के बीच इस पर सहमति बन गई है। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस बाबत विधिवत आदेश निकाला जाएगा।

इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन

जीसीसी नीति-2024 की एसओपी-2025 को योगी कैबिनेट की हरी झंडी इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, आईटी से लेकर आरएंडडी तक निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम जीसीसी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। कैबिनेट से अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी तथा राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी। जीसीसी में अब तक 21 कंपनियों ने किया निवेश औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कैबिनेट के निर्णय के विषय में बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे संपर्क में हैं। जीसीसी नीति हमारे लिए बहुत लाभप्रद है और आज हम इसकी एसओपी लेकर आए हैं। यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश प्रारंभ कर दिया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D), वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक कार्यों का निष्पादन करेगी। वित्तीय प्रोत्साहनों की व्यापक व्यवस्था इस नियमावली में जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इनमें फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट अथवा प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ केस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। वित्तीय लाभ के अतिरिक्त, जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता समूह, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहायता, आवेदन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, अनुमोदन एवं प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र सरकार की योजनाओं से अतिरिक्त लाभ नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि इसके अंतर्गत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन, भारत सरकार की किसी भी योजना अथवा नीति के तहत उपलब्ध लाभों के अतिरिक्त होंगे। किसी भी विधिक विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्राधिकार केवल लखनऊ स्थित न्यायालयों का होगा। स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त विभाग के प्रचलित नियमों एवं शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा योगी सरकार के इस निर्णय को प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। GCC नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री

ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा विकसित भारत–जी राम जी कानून : सीएम योगी यूपी को इससे सर्वाधिक लाभ, रोजगार की नई गारंटी के साथ प्रदेश में लागू करेंगेः मुख्यमंत्री सीएम बोले, जिन्होंने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, जनता उनसे सवाल करेगी मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी की शिकायतें मिलीं, इसलिए लाया गया बदलाव बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित भारत–जी राम जी कानून, 2025’ कानून की खूबियां बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 पारित किया गया है, जो देश के ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इस कानून से सर्वाधिक लाभ होगा। रोजगार की नई गारंटी के साथ इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।  लोकभवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए योगी ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश के संसाधनों पर डकैती डाली, गरीबों को भूख और युवाओं को बेरोजगारी व पलायन के लिए मजबूर किया, वे आज पारदर्शी सुधारों का समर्थन करने से इसलिए बच रहे हैं, क्योंकि तब जनता उनसे सवाल करेगी कि जब उन्हें मौका मिला था, तब उन्होंने यह काम क्यों नहीं किया। कांग्रेस और उसका इंडी गठबंधन इस महत्वपूर्ण अधिनियम पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि देशहित, श्रमिकों, किसानों और गांवों के विकास के लिए उठाए गए इस कदम का स्वागत होना चाहिए था। प्रधानमंत्री और एनडीए के प्रति आभार जताने के बजाय वे अपने पुराने, भ्रष्टाचार-प्रेरित मॉडल का बचाव कर रहे हैं। सीएम योगी ने बताया कि वीबी–जी राम जी एक्ट, 2025 की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब राज्य विकसित होंगे और राज्य तभी विकसित होंगे जब गांव विकसित होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर किसान आत्मनिर्भर बनेगा, श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। पहले कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां थीं मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून इसलिए जरूरी था क्योंकि मनरेगा के दौरान अधूरी व अस्थायी परिसंपत्तियां बनीं, फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान में कटौती जैसी शिकायतें हर जनपद से सामने आईं।  समाजवादी पार्टी की सरकार के समय मनरेगा में घोटाला हुआ था जिसकी सीबीआई जाँच चली।   कमजोर सोशल ऑडिट, शिकायत निवारण की खामियां, प्रशासनिक अक्षमताएं और मजदूरी में देरी लगातार बनी रहीं। खेती के मौसम में किसानों को मजदूर नहीं मिलते थे और श्रमिकों को समय पर काम व भुगतान की गारंटी नहीं मिल पाती थी। सीएम योगी ने बताया कि नए अधिनियम में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बंद होगा गड्ढा खोदने और पाटने का खेल उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत पंचायतें स्थायी परिसंपत्तियां बना सकेंगी। ग्राम पंचायतें चार प्राथमिक श्रेणियों में कार्य तय करेंगी। जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेक डैम, ग्रामीण सड़कें, नालियां, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल मैदान, ओपन जिम, बाजार और मंडियों का निर्माण किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य भी इसी के तहत होंगे। सीएम योगी ने बताया कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में शामिल किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी के माध्यम से सीधा भुगतान होगा। फर्जी नामों पर भुगतान का खेल पूरी तरह बंद होगा। पहले जो लोग गड्ढा खोदते थे और उसे पाटते थे, उनका यह खेल बंद होगा।  मनरेगा की तुलना में 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं राज्यों को उन्होंने बताया कि कानून में छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल और समयबद्ध शिकायत निवारण, जिला लोकपाल और मानकों के अनुरूप ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। केंद्र–राज्य की साझेदारी 60:40 रहेगी और कार्य पूरी तरह मांग आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई योजना से राज्यों को मनरेगा की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। जिन राज्यों में श्रमिकों की संख्या अधिक है, वहां अधिक कार्य मिलेगा। रोजगार अब केवल राहत नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूरी केंद्रीय कैबिनेट के प्रति आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है। हर पात्र को समय पर काम, हर गांव में टिकाऊ परिसंपत्तियां और हर श्रमिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत राजग से जुड़े दलों के नेता भी उपस्थित थे।

कोयल ब्रिज में दरार के कारण लोहदरगा नहीं आएगी मेमू

लोहरदगा/रांची. रांची-लोहरदगा-टोरी रेल लाइन के कोयल नदी स्थित रेलवे ब्रिज संख्या 115 के पिलर संख्या 4 और 5 में आई दरार के बाद ट्रेनों का परिचालन फिलहाल रद है। इस मामले को लेकर मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र तकनीकी टीम के साथ रेलवे के स्पीक कोच से लोहरदगा कोयल नदी पुल तक पहुंचे। इस दौरान महाप्रबंधक ने रेलवे ब्रिज का निरीक्षण किया। तकनीकी टीम के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की, जिसमें पिलर संख्या 5 की सबसे पहले मरम्मत करने की बात कही गई। इसके बाद पिलर संख्या 6 और 7 की भी मरम्मत की जाएगी। वहीं, 15 फरवरी तक सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि मार्च के अंतिम तक ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। सभी मरम्मत कार्य मई 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे। साथ ही रेलवे इस लाइन पर कोयल नदी में नए पुल के निर्माण को लेकर भी योजना पर काम करेगी। इरगांव तक चलेगी मेमू, मिलेगी बस सर्विस रेलवे महाप्रबंधक ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन लोहरदगा स्टेशन से सात किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक करेगी। यात्रियों को लोहरदगा से ईरगांव तक के लिए बस की सुविधा प्रदान की जाएगी। वहीं लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की सुविधा भी शुरू की जाएगी। फिलहाल रांची से लोहरदगा के बीच एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन नहीं होगा। उन्होंने यह भी महत्वपूर्ण बात कही कि बालू के उठाव और कटाव की वजह से रेलवे पुल को नुकसान पहुंचा है। पुल की मरम्मत के लिए तीन-चार टीम लगातार 24 घंटे काम करेगी। पुल का पिलर संख्या 4, 5, 6 और 7 जैकेटिंग और पाइलिंग के जरिए दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही स्टील गार्डर के माध्यम से फिलहाल परिचालन प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा। लगभग दो घंटे तक रेलवे महाप्रबंधक यहां पर मौजूद रहे और उन्होंने तकनीकी टीम और अलग-अलग एजेंसियों के साथ बात की और उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए।

उपमुख्यमंत्री ने बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर रिया का किया सम्मान

रायपुर. बिहार की राजधानी पटना में 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित साउथ एशियन बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हाँसिल किया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत, नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित चार देशों की टीमों ने भाग लिया था। इस चैंपियनशिप में भारत की विजेता टीम का हिस्सा बनकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली कवर्धा की होनहार खिलाड़ी सुश्री रिया तिवारी का उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सम्मान किया। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने रिया को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उपलब्धि की सराहना की तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि रिया तिवारी की यह उपलब्धि न केवल कवर्धा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा, अनुशासन और कठिन परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिया भविष्य में भी देश के लिए अनेक पदक जीतेंगी और प्रदेश की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकें। रिया ने कहा कि इस सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और मेरे कोच अविनाश चौहान एवं जय किशन को जाता है। उनके निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं हो पाती। हर कठिन समय में उन्होंने मेरा आत्मविश्वास बनाए रखा और मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी। यह जीत मेरे लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि मेरे खेल जीवन की एक नई शुरुआत है। मैं आगे भी पूरे समर्पण और मेहनत के साथ देश और प्रदेश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का प्रयास करूंगी

मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी

श्रद्धा, मनोरंजन व रोजगार का संगम है गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला मकर संक्रांति से शुरू होकर माहभर से अधिक चलने वाले मेले की तैयारियां पूरी त्रेतायुगीन है महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा गोरखपुर  मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में लगने और इससे पखवारा पूर्व शुरू होकर माह भर से अधिक समय तक चलने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का संगम है। पूरी प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाए जाने वाला अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। मंदिर के अन्न क्षेत्र में कभी भी कोई जरूरतमंद पहुंचा, खाली हाथ नहीं लौटा। ठीक वैसे ही, जैसे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। मंदिर में खिचड़ी का यह पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनेगा। गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन मानी जाती है। मान्यता है कि तत्समय आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार मे पहुंचे। मां ने उनके भोजन का प्रबंध किया। कई प्रकार के व्यंजन देख बाबा ने कहा कि वह तो योगी हैं और भिक्षा में प्राप्त चीजों को ही भोजन रूप में ग्रहण करते हैं। उन्होंने मां ज्वाला देवी से पानी गर्म करने का अनुरोध किया और स्वयं भिक्षाटन को निकल गए। भिक्षा मांगते हुए वह गोरखपुर आ पहुंचे और राप्ती और रोहिन के तट पर जंगलों में बसे इस स्थान पर धूनी रमाकर साधनालीन हो गए। उनका तेज देख लोग उनके खप्पर में अन्न (चावल, दाल) दान करते रहे। मकर संक्रांति का पर्व आने पर यह परंपरा खिचड़ी पर्व के रूप में परिवर्तित हो गई। तब से बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने का क्रम हर मकर संक्रांति पर अहर्निश जारी है। कहा जाता है कि उधर ज्वाला देवी के दरबार मे बाबा की खिचड़ी पकाने के लिए आज भी पानी उबल रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर नाथ पंथ की विशिष्ट परंपरानुसार गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख समृद्धि की मंगलकामना करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के दिन भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करते हैं। तत्पश्चात नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी बाबा को चढ़ाई जाती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और जनसामान्य की आस्था खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाती है। खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर तैयार है। प्रशासन के साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का पूरा इंतज़ाम किया गया है। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी अब तक तीन बार खिचड़ी मेला की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।   सामाजिक समरसता का केंद्र है गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ मंदिर सामाजिक समरसता का ऐसा केंद्र है जहां जाति, पंथ, महजब की बेड़ियां टूटती नजर आती हैं। इसके परिसर में क्या हिंदू, क्या मुसलमान, सबकी दुकानें हैं। यानी बिना भेदभाव सबकी रोजी रोटी का इंतजाम है। यही नहीं, मंदिर परिसर में  लगने वाला खिचड़ी मेला भी जाति-धर्म के बंटवारे से इतर हजारों लोगों की आजीविका का माध्यम बनता है। मंदिर परिसर में नियमित रोजगार करने वालों से लेकर मेला में दुकान लगाने वालों तक, बड़ी भागीदारी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया बल्कि अपनेपन के भाव से विभोर होते रहते हैं। मेले में खरीदारी से लेकर मनोरंजन के साधनों तक का भरपूर इंतजाम हैं।

लालू-राबड़ी के नाती लेंगे 2 साल की मिलिट्री ट्रेनिंग, रोहिणी ने दी जानकारी

पटना. RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य के घर काफी दिनों के बाद खुशियां लौटी हैं। यह मौका उन्‍हें उनके बड़े बेटे की वजह से म‍िला है। बेटे की सफलता पर मां (रोहिणी आचार्य) गर्व महसूस कर रही हैं। दरअसल रोहिणी के बेटे ने प्री यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी कर ली है और वे बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए गए हैं। रोहिणी ने खुद अपने एक्‍स हैंडल पर यह साझा किया है। तस्‍वीर और वीडियो शेयर करते हुए उन्‍होंने लिखा है-"आज मेरा दिल गर्व से भरा हुआ है। दो वर्ष की मिलिट्री ट्रेनिंग पर गया आदित्‍य आज अपनी प्री – यूनिवर्सिटी ( Pre-University) की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में हमारा बड़ा बेटा आदित्य 2 साल की Basic Military Training के लिए गया है। आदित्य .. तुम बहादुर , साहसी और अनुशासन के साथ रहने वाले हो, जाओ कमाल कर दिखाओ , हमेशा याद रखना जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं .. हम सबों का सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।" ममता बनर्जी को बताया मजबूती की मिसाल सोशल मीडिया पर एक्‍ट‍िव रहने वालीं रोहिणी अक्‍सर समकालीन विषयों पर पोस्‍ट करती रहती हैं। इससे पूर्व उन्‍होंने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को जन्‍मदिन की बधाई दी। उन्‍हें मजबूती की मिसाल और प्रेरणास्रोत बताया है। इसके अलावा एक दिन पहले सावित्रीबाई फुले की जयंती पर भी उन्‍होंने पोस्‍ट किया था। उसमें उन्‍होंने मह‍िलाओं का महत्‍व बयां किया था। रोहिणी ने लिखा-"खुशी हुई देखकर कि कल पूरा देश सावित्रीबाई फुले की जयंती मना रहा था। कहीं पढ़ी थी सावित्री माई कहती हैं क‍ि स्त्री को नीचा दिखाकर जो मर्द ऊँचा लगता है, वह असल में खड़ा नहीं, टिका हुआ है। और ऐसे टिके हुए तिनकों को बरगद समझने वालों के लिए उन्होंने कहा था “स्त्री को पापी बताने वाला समाज, अपने पाप छुपाना चाहता है।”

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान

परिवार के बीच दान विलेख पर स्टाम्प शुल्क में राहत, अब व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां भी शामिल योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राज्य में पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण होगा आसान पारिवारिक सदस्यों को दान दी गई संपत्ति पर देय होगा अधिकतम ₹5,000 स्टाम्प शुल्क  व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर मिली राहत, शहरी और गांव सभी जगह होगा लागू   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य में परिवार के सदस्यों के मध्य निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क में दी जा रही छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से अब पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार हस्तांतरण पत्र (कन्वेयंस डीड) की भांति स्टाम्प शुल्क देय होता है, जबकि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के अनुसार अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है। ₹5,000 तक सीमित है स्टाम्प शुल्क स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि यदि अचल संपत्ति का दान परिवार के सदस्यों के पक्ष में किया जाता है तो स्टाम्प शुल्क में छूट देते हुए अधिकतम ₹5,000 ही लिया जाएगा। यह छूट अब तक केवल कृष्य एवं आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। योगी कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के तहत इस छूट को पारिवारिक सदस्यों के मध्य व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी। शहरी और ग्रामीण सभी कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर मिलेगी राहत   प्रदेश के स्टांप तथा पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि 2022 से पहले तक परिवार के रिश्ते में यदि कोई प्रॉपर्टी देता था तो पूरे सर्किल रेट के बराबर स्टाम्प शुक्ल देना पड़ता था। 2022 में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में तय हुआ कि पारिवारिक रिश्तों में यदि कोई प्रॉपर्टी दान की जाती है तो उस पर फिक्स्ड 5 हजार रुपए स्टांप लगेगा। लेकिन यह दान केवल आवासीय और कृषि पर लागू था, लेकिन अब यह नियम कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू कर दिया गया है। शहर के अंदर अब तक यह 7 प्रतिशत और गांवों में 5 प्रतिशत था, लेकिन अब गांव या शहर कहीं भी आपको केवल 5 हजार रुपए ही भुगतान करना है।  प्रावधानों में और स्पष्टता कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पूर्व में जारी अधिसूचना में उल्लिखित संबंधियों की परिभाषा एवं अन्य प्रावधानों को भी और अधिक स्पष्ट किया गया है, जिससे नियमों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। यह छूट संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। सरकार के इस फैसले को आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पारिवारिक संपत्ति के वैधानिक हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिलेगा और विवादों में भी कमी आएगी। कुशीनगर और झांसी में नए उप निबंधक कार्यालय भवनों के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी कैबिनेट की बैठक में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत कैबिनेट ने जनपद कुशीनगर की तहसील कप्तानगंज में उप निबंधक कार्यालय भवन के निर्माण हेतु ग्राम बसहिया उर्फ कप्तानगंज स्थित तहसील परिसर की भूमि में से 0.0920 हेक्टेयर (920 वर्गमीटर) भूमि को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। वर्तमान में उप निबंधक कार्यालय जीर्ण-शीर्ण भवन में संचालित है, जिसे ध्वस्त कर नए भवन का निर्माण किया जाएगा।  इसके साथ ही कैबिनेट ने झांसी में उप निबंधक कार्यालय सदर एवं अभिलेखागार के निर्माण हेतु पुरानी तहसील परिसर, मौजा झांसी खास स्थित आराजी संख्या 3035 में से 0.0638 हेक्टेयर (638 वर्गमीटर) भूमि को राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को आवंटित/हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की। दोनों ही मामलों में भूमि राज्य सरकार के स्वामित्व की है, अतः भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत स्टाम्प शुल्क से तथा रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के अंतर्गत पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी।