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आठ भ्रष्ट अधिकारियों की 4.14 करोड़ की संपत्ति होगी राजसात

पटना. राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। ब्यूरो ने आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लगभग 4.14 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों को राजसात करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को बताया कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राजसात करने की प्रक्रिया लगातार तेज की जा रही है। वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव भेजे गए हैं, और प्रस्ताव पारित होते ही कार्रवाई की जाएगी। 8 लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा ब्यूरो के अनुसार, जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक अधीक्षण अभियंता, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज किए गए थे। इनमें लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ 2012 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 88.25 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। हथुआ (गोपालगंज) के तत्कालीन एसडीओ विजय प्रताप सिंह के खिलाफ 2015 में तीन भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए थे, जिनकी 62.35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव में तत्कालीन अधिकारियों के नाम पटना ग्रामीण की तत्कालीन एसडीपीओ फूलपरी देवी की 12.76 लाख रुपए की संपत्ति, मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दरोगा अजय कुमार गुप्ता की 34.62 लाख रुपए की संपत्ति और समस्तीपुर की जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय की 3.71 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है। ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी की 90.75 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है, जिन्हें पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। पश्चिम चंपारण की राज मारहिया पकड़ी पंचायत, लौरिया के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपए की संपत्ति राजसात करने की अनुशंसा की गई है। दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के खिलाफ 2019 में मामला दर्ज हुआ था, जिनकी 41.12 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव है।

SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, यूपी में 2.89 करोड़ नाम कटे, छंटनी बिहार से भी ज्यादा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. इस ड्राफ्ट में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. आयोग के अनुसार, यह सूची 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से हुई थी.  यूपी में ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन तीन बार टलने के बाद आजा जारी किया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है. उन्होंने बताया कि लगभग 18 प्रतिशत लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए. मंगलवार को लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जिन 2.89 करोड़ लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें 46.23 लाख मृत, 2.17 करोड़ स्थानांतरित और 25.47 लाख डुप्लीकेट, 79.52 लाख वोटर शामिल हैं। प्रतिशत की बात करें तो करीब 18 फीसदी वोटरों के नाम इस लिस्ट कट गए हैं। उन्होंने बताया, सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। मंगलवार से छह फरवरी तक मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां की जाएंगी। वहीं मंगलवार से लेकर 27 फरवरी तक इन दावे व आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन छह मार्च को किया जाएगा। UP SIR में नाम न मिलने पर करें ये काम ड्राफ्ट सूची में अगर किसी मतदाता का नाम नहीं है तो वह 6 फरवरी तक अपना दावा और आपत्ति दर्ज करवा सकता है. नए व नाम कटने वाले मतदाता को फॉर्म-6 भरना होगा, गलत नाम वालों के लिए फॉर्म-7, संशोधन के लिए फॉर्म-8 भरना होगा. इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों mod में जमा किया जा सकता है. इसके साथ जन्म प्रमाण पत्र, पते और पहचान प्रमाण पत्र जरुर आवश्यक होगा. अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क करें. जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं वह 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. सबसे बड़ा वोटर लिस्ट सफाई अभियान नवदीप रिणवा के मुताबिक वोटर लिस्ट का यह अब तक सबसे बड़ा सफाई अभियान है. अब तक राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, SIR प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.सबसे ज्यादा नाम ट्रासफर से कटे हैं इनकी संख्या 1.26 करोड़ है. 46 लाख मृतक, डुप्लीकेट 23.70 लाख और जो पते पर नहीं मिले उनकी संख्या 83.73 लाख है, इसके अलावा भी अन्य श्रेणी में शमिल हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, सबसे ज्यादा 12 लाख मतदाताओं के नाम लखनऊ में कटेंगे। वहीं प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में नौ लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख, बरेली में 7.14 लाख, मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने बताया कि 12.55 करोड़ में से 91 प्रतिशत की मैपिंग हो गई है। अब 1.04 करोड़ को नोटिस जाएगी। यह 8 प्रतिशत हैं। सीईओ ने कहा कि फ़ार्म 6 भरें नए मतदाता बनने को। करेक्शन व शिफ्ट होने वाले फॉर्म 8 भरें । अगर किसी सदस्य जो अब जीवित नहीं है या दूसरी जगह चले गए हैं तो नाम हटाने को फॉर्म 7 भरें। अभी तक नए मतदाता बनने को 15.78 करोड़ ने फॉर्म भरा है। उन्होंने कहा कि पहले यूपी में करीब 15 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 12.55 करोड़ मतदाताओं (81.30%) ने खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए गणना प्रपत्र (enumeration form) पर हस्ताक्षर कर उसे जमा किया. उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए, उनके पीछे कई कारण रहे-  46.23 लाख मतदाता (2.99 प्रतिशत)) मृत पाए गए. – 2.17 करोड़ मतदाता या अनुपस्थित (14.06 प्रतिशत)) मिले या वो शिफ्ट कर गए. – 25.47 लाख मतदाता (1.65 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए. इन्हीं कारणों से 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं. फिलहाल यूपी में ड्राफ्ट सूची के अनुसार मतदाताओं की संख्या करीब 12 करोड़ रह गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार अब एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे, जबकि पहले यह संख्या करीब 1500 थी. इसी वजह से नए पोलिंग स्टेशन भी बनाए गए, जिसमें अतिरिक्त समय लगा. निर्वाचन आयोग ने 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है. जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे इस अवधि में आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं. सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, और 6 मार्च 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी. चुनाव आयोग ने 18 साल पूरे कर चुके सभी नए मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांचें. नाम न होने पर फॉर्म-6, और नाम या पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरने की सुविधा उपलब्ध है

नितिन गडकरी की बड़ी घोषणा, MP में 60 हजार करोड़ की परियोजनाएं, भोपाल से जबलपुर तक ग्रीन फील्ड हाईवे

भोपाल भोपाल से जबलपुर के बीच 255 किमी लंबा नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनाया जाएगा, जिसकी लागत 15 हजार करोड़ रुपए होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर अप्रैल-मई 2026 से हाईवे निर्माण शुरू हो जाएगा। लखनादौन से रायपुर के बीच 220 किमी लंबा 4 लेन हाईस्पीड कॉरिडोर 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा, यह रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर से जुड़ेगा। मध्यप्रदेश सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जुड़ेगा। इंदौर से भोपाल 160 किमी ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी जा रही है, जिसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपए होगी। मध्यप्रदेश के लिए 4250 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 174 किमी लंबी 9 सड़क परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही। कार्यक्रम में गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिए 60 हजार करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की घोषणाएं भी की। इनके पूरे होने से जहां कई क्षेत्र आपस में जुड़ेंगे, वहीं यात्रा समय में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने महाकौशल सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों के निवासियों की रोड नेटवर्क संबंधी आकांक्षा व अपेक्षा को पूर्ण किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिए प्रदेशवासियों की ओर से गडकरी का आभार माना। सबकी समृद्धि के लिए हमारी सरकार सक्रिय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुगम संपर्क, तेज विकास, बेहतर सुरक्षा और सबकी समृद्धि सुनिश्चित करने के प्रण को पूरा करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ अद्यतन अधोसंरचना निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय है।

पंजाब के CBSE स्कूलों के प्रिंसीपल्स करेंगे प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक एक्सपोजर दौरा

लुधियाना. सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) से संबद्ध स्कूलों के प्रिंसीपल्स को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा और उभरते शैक्षणिक ट्रैंड्स से रू-ब-रू होने का अवसर मिलेगा। इसके लिए सी.बी.एस.ई. देश के चुनिंदा संस्थानों में प्रिंसीपल्स का एक्सपोजर दौरा कराएगा। यह दौरा 22 जनवरी से 30 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा जिसमें भाग लेने के लिए प्रिंसीपल्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सी.बी.एस.ई .राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अपने संबद्ध स्कूलों में कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसी दिशा में बोर्ड ने 2 वर्ष पहले प्रिंसीपल्स के लिए एक्सपोजर विजिट योजना शुरू की थी जिसके तहत समय-समय पर देश के नामचीन संस्थानों का चयन किया जाता है। देशभर से चुने गए ये 5 संस्थान इस बार बोर्ड द्वारा देशभर से 5 प्रमुख संस्थानों को चुना गया है। चयनित संस्थानों में मुमबई की एटलस स्किल टैक यूनिवर्सिटी, पंजाब की लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी, असम स्थित टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, झारखंड का बिरला इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी और पश्चिम बंगाल स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डिवैल्पमैंट इंस्टीच्यूट शामिल हैं। इन दौरों के माध्यम से प्रिंसीपल्स को आधुनिक शिक्षा पद्धतियों को समझने और उन्हें अपने स्कूलों में लागू करने का मौका मिलेगा। नई तकनीकों को देखने का अवसर डॉ. सत्वंत कौर भुल्लर, प्रिं. डीएवी स्कूल, पक्खोवाल रोड ने कहा कि “सी.बी.एस.ई. की यह योजना बेहद सराहनीय है, क्योंकि इससे प्रिंसीपल्स को नई और उभरती तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों का यह दौरा न केवल शैक्षणिक ज्ञान को बढ़ाएगा बल्कि स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के नए आयाम स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।”

जयपुर मैराथन की तैयारियां तेज, कैलेंडर जारी; ड्रीम रन में उमड़ेगा एक लाख का सैलाब

जयपुर जयपुर गुलाबी नगर एक बार फिर फिटनेस, स्वास्थ्य और सामूहिक ऊर्जा के उत्सव के लिए तैयार है। जयपुर मैराथन 2026 के 17वें संस्करण का आधिकारिक इवेंट कैलेंडर लॉन्च कर दिया गया है। इस आयोजन को राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान खेल परिषद और राजस्थान युवा बोर्ड का सहयोग प्राप्त है। कैलेंडर लॉन्च कार्यक्रम में मैराथन से पहले आयोजित होने वाली एक माह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी रहे। उनके साथ संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा, एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा, एयू स्मॉल फाइनेंस से धर्मेंद्र सिंह शेखावत सहित आयोजन से जुड़े कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि जयपुर मैराथन अब ऐसा आयोजन बन चुका है, जिसका शहर हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करता है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जो पूरे शहर को स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूक करता है। जयपुर मैराथन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। चार अलग-अलग जोन में बांटा गया शहर संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य मैराथन को जयपुर की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है, ताकि फिटनेस आदत बने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिले। प्रतिभागियों की बेहतर तैयारी के लिए जयपुर रनर्स क्लब द्वारा शहर को चार अलग-अलग ज़ोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। हर वर्ग के लोगों को एक मंच पर जोड़ रही मैराथन वहीं एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा ने कहा कि जयपुर मैराथन 2026 अब केवल एक दिन की दौड़ तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक समग्र फिटनेस मूवमेंट का रूप ले चुकी है, जो युवाओं, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, रनर्स और आम नागरिकों को एक मंच पर जोड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। खासतौर पर ड्रीम रन में लगभग एक लाख लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी का अनुमान लगाया जा रहा है।

राजस्थान में शीतलहर और कोहरे का असर, 20 जिलों में स्कूलों की छुट्टी

जयपुर राजस्थान में कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश में घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते शीतलहर का असर तेज हो गया है। हालात को देखते हुए राज्य के 20 जिलों में कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को 18 जिलों में कोहरा और शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे सीजन में पहली बार विजिबिलिटी शून्य (0 मीटर) दर्ज की गई। इसके साथ ही शहर की हवा की गुणवत्ता भी खराब रही और अधिकांश इलाकों में AQI 200 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। जयपुर के अलावा सीमावर्ती जिलों, अजमेर और कोटा सहित कई क्षेत्रों में भी घने कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 7 जनवरी तक कोहरे और 9 जनवरी तक शीतलहर का प्रभाव बना रह सकता है। इस दौरान तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना है। नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ रही है। बीते पांच दिनों में तीन दिन माउंट आबू और शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री या उससे नीचे दर्ज किया गया। घने कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह भी शीतलहर के चलते कड़ाके की ठंड महसूस की गई। इससे पहले सोमवार को जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा सहित कई जिलों में दोपहर तक कोहरा छाया रहा। प्रदेश के 19 शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया, जबकि गंगानगर सबसे ठंडा जिला रहा। मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

स्कूल में पीटी करते समय गिरी छठी की छात्रा, 13 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत की आशंका

धार   धार जिले के बदनावर इलाके में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज सुबह यहां नवोदय विद्यालय मुलथान में छात्रा की स्कूल के मैदान में खड़े-खड़े हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। बच्ची का नाम निशा पिता राहुल सूर्यवंशी निवासी ग्राम मुलथान बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि, जिस छात्रा की साइलेंट अटैक से मौत हुई है, उसकी उम्र महज 13 साल थी और वो स्कूल की 6वीं कक्षा में पढ़ती थी। मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा रोजाना की तरह सुबह पीटी के लिए मैदान में अन्य बच्चों के साथ गई थी। तभी 7:15 बजे वो अचानक गिरी तो बच्चों के साथ-साथ मैदान में मौजूद शिक्षकों ने उसे संभाला लेकिन बच्ची में कोई हलचल मेहसूस न होने से उसे तत्काल बदनावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। निशा रोज की तरह सुबह पीटी के लिए बाकी बच्चों के साथ ग्राउंड पर गई थी। सुबह करीब सवा 7 बजे वह पीटी करते-करते अचानक गिर पड़ी। ग्राउंड पर मौजूद बच्चों और टीचर्स ने उसे संभाला। शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसे फौरन सिविल अस्पताल, बदनावर ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद निशा को मृत घोषित कर दिया। तहसीलदार सुरेश नागर भी सिविल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया।   पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज बाद में अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, अभी मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कड़ाके की ठंड में अल सुबह खुले मैदान में खेलने से उसकी मौत होने का शक है। इस असामयिक घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। फिलहाल, स्कूल में शोक की लहर है। बच्चों को लेकर माता-पिता रखें ये ध्यान ठंड में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों की तरह बच्चों को भी गर्म कपड़ों में रखें। घर के अंदर खेलने या हल्की-फुल्की कसरत (जैसे योग) कराएं। भरपूर तरल पदार्थ (गुनगुना पानी, सूप) पिलाएं। पौष्टिक आहार दें और ज्यादा ठंड में बाहर निकलने से रोकें, ताकि रक्त वाहिकाएं सिकुड़ें नहीं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, खासकर अगर बच्चे को पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय -गर्म और परतदार कपड़े पहने : बच्चे को हमेशा गर्म, ऊनी कपड़े, मोज़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं, खासकर बाहर जाते समय। -घर के अंदर रखें : बहुत ज़्यादा ठंड या कोहरे के दौरान बच्चों को घर के अंदर ही खेलने दें। बाहर की गतिविधियां (जैसे मॉर्निंग वॉक) बहुत अधिक ठंड में टालें। -हाइड्रेटेड रखें : ठंड में भी शरीर को पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें गुनगुना पानी, सूप, हर्बल चाय पिलाएं। -पौष्टिक आहार : फल, सब्जियां, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन दें। तैलीये और ज़्यादा नमक/चीनी वाले खाने से बचाएं। -शारीरिक गतिविधि (घर के अंदर) : हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग कराएं, जो घर के अंदर किए जा सकें। -तनाव से बचाएं : बच्चों को तनावमुक्त रखें। उनका मनपसंद काम करने दें और सकारात्मक माहौल दें। -बीमारियों से बचाव : सर्दी-खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. फ्लू और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए टीका लगवाएं। किन लक्षणों पर ध्यान दें (अगर बच्चा बीमार हो) -सांस लेने में तकलीफ -सीने में दर्द या बेचैनी -बहुत ज़्यादा थकान -होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना -तेज़ धड़कन नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। माता-पिता के लिए अतिरिक्त सलाह -बच्चों को समय पर दवा दें (यदि कोई दवा चल रही है)। -ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं, खासकर अगर जोखिम हो।

हरियाणा में युवक ने पाकिस्तानी युवक से अफेयर बताकर पत्नी का कत्ल किया और खुद भी दी जान

कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र के लाडवा कस्बे के गांव दबखेड़ा में एक युवक ने अपने बेटे की बेल्ट से पत्नी की गला घोटकर हत्या कर दी। बाद में गांव के तालाब में कूदकर खुद भी जान दे दी। दंपती की पहचान रणदीप सिंह (35) और उसकी पत्नी निशा (32) के रूप में हुई। घटना रविवार रात करीब एक बजे की है। पुलिस की प्राथमिक जांच में हत्या का कारण महिला के पाकिस्तान के युवक के साथ अवैध संबंध सामने आया है। तालाब के ठेकेदार ने सोमवार तड़के करीब तीन बजे वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में रात की फुटेज देखी तो उसे रणदीप सिंह कपड़े व चप्पल उतार कर तालाब में छलांग लगाता दिखा। आधे घंटे तालाब में तलाशी अभियान चला शव बाहर निकाला गया। घटना के बाद पुलिस टीम के साथ लोग घर पहुंचे तो रणदीप की पत्नी घर के कमरे में मृत पड़ी मिली। उसके गले पर बेल्ट के लाल निशान थे। पुलिस को पास की चारपाई पर रणदीप द्वारा लिखा सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। घर के दूसरे कमरे में दंपती के दोनों बच्चे सो रहे थे। पुलिस को दी शिकायत में रणदीप सिंह के ताऊ के बेटे मोहन सिंह ने बताया कि अब घर में सिर्फ रणदीप की बुजुर्ग मां के अलावा 11 और सात साल के दो छोटे बच्चे हैं। थाने गया था रिपोर्ट लिखाने कोई नहीं मिला तो लौट आया सरपंच प्रतिनिधि स्वर्ण सिंह ने बताया कि रणदीप रविवार को उनके घर आया और उसने अपनी पत्नी से पीछा छुड़वाने के लिए तलाक देने की बात कही। जब इसका कारण पूछा तो विदेशी नंबर से चैट दिखाकर पत्नी पर संदेह जताया। उसने युवक को पुलिस थाने में जाकर शिकायत करने की बात कही। रविवार को रणदीप थाने में भी गया था। थाने के बाहर शिकायत लिखने वाला नहीं मिला तो वापस घर लौट आया। पाकिस्तानी नंबर से बातचीत और पैसे ट्रांसफर की हुई पुष्टि लाडवा थाना प्रभारी जगदीश टामक ने बताया कि शुरुआती जांच में पाकिस्तानी नंबर से कॉल के बाद पैसे ट्रांसफर की बात सामने आई है। पुलिस इसे पति-पत्नी के बीच मनमुटाव का मामला मान रही है। इसी वजह से दोनों ने सुसाइड किया या कोई और वजह है जांच के बाद साफ होगा। कोई भांप नहीं पाया रणदीप के इरादे… पहले करना चाहता था आत्महत्या लाडवा के गांव दबखेड़ा में पत्नी की हत्या कर खुद आत्महत्या करने वाले रणदीप पूरा दिन पत्नी के साथ प्यार से रहा और रात को उसे मौत के घाट उतार दिया। उसके इरादों को कोई भांप नहीं पाया था। वह अपनी पत्नी से काफी परेशान चल रहा था। इसके कारण उसने रविवार को गांव के सरपंच प्रतिनिधि के समक्ष अपनी मां के साथ पेश होकर पत्नी से तलाक दिलवाने की गुहार लगाई थी। सरपंच ने रणदीप को कोर्ट में याचिका दायर करने की राय दी। पुलिस जांच में मौके से सुसाइड नोट मिला जिसमें रणदीप ने पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। नोट में लिखा गया कि निशा का किसी अज्ञात व्यक्ति से अवैध संबंध था। वह उसके साथ व्हाट्सएप पर लगातार संपर्क में रहती थी, घर के गहने बेचकर पैसे भेजती थी। परिवार वालों ने बताया कि दंपती के बीच लंबे समय से झगड़े चल रहे थे। वारदात की रात भी निशा के फोन पर उस नंबर से पांच से छह बार कॉल आई थी। रणदीप पत्नी की हरकतों से मानसिक रूप से परेशान था। अंत में निशा उसे तलाक देने की मांग करने लगी। साथ ही रणदीप के फोन पर भी पाकिस्तानी नंबर से कई बार कॉल आई और निशा को तलाक देने की बात कही। रणदीप उसे तलाक देने के लिए तैयार भी हो गया था। तलाक की गुहार, फिर गुरुद्वारे में बिताई शाम रविवार को रणदीप अपनी मां के साथ गांव के सरपंच प्रतिनिधि से मिला और तलाक की फरियाद की। सरपंच ने सलाह दी कि कोर्ट का दरवाजा खटखटाओ। शाम को रणदीप पत्नी निशा के साथ बाबैन के मंडोखरा साहिब गुरुद्वारे गया। दोनों ने वहां काफी वक्त बिताया, लंगर खाया और देर शाम घर लौटे। बाहर से सब कुछ सामान्य लग रहा था। उसने रात में पहले आत्महत्या का इरादा किया, सुसाइड नोट लिखा। फिर पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद खुद तालाब में कूद गया। दूसरे कमरों में सो रहे परिजन को कुछ पता नहीं चला रणदीप ने पूरी साजिश इतनी चालाकी से रची कि घर में बगल वाले कमरों में सो रहे परिजनों को कुछ पता नहीं चला। सुबह जब रणदीप का शव तालाब से निकाला गया और सरपंच पुलिस के साथ घर पहुंचा, तो मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। रोते-बिलखते उन्होंने दोनों पोतों को सीने से लगा लिया। थाने जाने की चर्चा लेकिन शिकायत नहीं हुई गांव में अफवाह उड़ी कि सरपंच से मिलने के बाद रणदीप थाने भी गया था और निशा की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन लिखित शिकायत मांगने पर वह लौट आया। क्योंकि रविवार होने के कारण उसे वहां टाइपिस्ट नहीं मिला। हालांकि थाना प्रभारी जगदीश टामक ने कहा कि रणदीप थाने नहीं आया, न मौखिक और न लिखित कोई शिकायत दी गई। सोशल मीडिया से शुरू हुई थी नजदीकियां पुलिस सूत्रों के अनुसार निशा का किसी अज्ञात व्यक्ति से सोशल मीडिया पर संपर्क हुआ था। वह उसे मॉडलिंग के सपने दिखाकर करीब लाया और कई फोटो मंगवाए। धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं जिसने घर की नींव हिला दी। पुलिस दोनों के मोबाइल फोन की गहन जांच कर रही है। बेल्ट, दुपट्टा और सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया है। एक चिता पर ही हुआ दंपती का अंतिम संस्कार लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दंपती के शवों को परिजनों के हवाले कर दिया गया। देर रात गांव के श्मशान घाट में एक चिता पर ही दंपती का अंतिम संस्कार कर दिया गया। निशा के रिश्तेदार भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। सरपंच प्रतिनिधि स्वर्ण सिंह ने बताया कि निशा के माता-पिता व भाई नहीं हैं।

चम्पारण के विराट रामायण मंदिर में पहुंचा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग

चम्पारण. दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग पूर्वी चम्पारण के जानकीपुर में बन रहे विराट रामायण मंदिर पहुंच गया है। यहीं पर 17 जनवरी को 5 नदियों के जल से अभिषेक किया जाएगा। हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर, सोनपुर आदि के जल से शिवलिंग का अभिषेक होगा। इधर, सोमवार को विराट शिवलिंग जैसे ही पूर्वी चंपारण की धरती पर पहुंचा, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थापना से 12 दिन पहले श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का भव्य स्वागत किया। शिवलिंग को लेकर सबसे बड़ी चुनौती डुमरियाघाट थाना क्षेत्र‎के रामपुर-खजुरिया ओवरब्रिज को पार करना रहा। इसे पार करने में पांच घंटे लग गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में भक्त घंटों पहले से सड़क किनारे खड़े होकर शिवलिंग के स्वागत का इंतजार करते नजर आए। डुमरिया घाट पुल पार करते ही चारों ओर हर-हर महादेव के नारे गूंजे। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे, फूल-मालाओं और रोशनी से पूरे रास्ते को सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भगवान शिव का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर शिवलिंग को कुछ देर के लिए रोका गया, जहां भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना की और जयकारे लगाए। हर चौराहे पर पुलिस टीम मौजूद शिवलिंग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मोतिहारी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। चकिया के DSP संतोष कुमार खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। उनके नेतृत्व में करीब 150 से अधिक पुलिस बल को तैनात किया गया है। इनमें सीनियर पुलिस अधिकारी से लेकर सिपाही तक शामिल हैं।

इंदौर में दूषित पानी से 17 मौतें, MP में 211 नदियां और 353 जल स्रोत दूषित, इको सिस्टम बिगड़ने की चिंता

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पानी से 17 लोगों की असमय मौत और 1400 से ज्यादा लोगों में दूषित पानी के बेक्टीरिया पाए जाने के मामले ने देश के सबसे स्वच्छ शहर की पेयजल गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही नहीं, सामने आई इस गंभीर लापरवाही ने प्रदेशभर के हालातों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में आनन फानन में जांच पड़ताल शुरु हुई है, जिसमें बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। दरअसल, पेयजल आपूर्ति में बड़ा योगदान नदियों और जलाशयों को माना जाता है। लेकिन, गंभीर चिंतन की बात ये है कि, इन्हीं नदियों और जलाशयों में उद्योगों का रसायनयुक्त पानी मिलने से आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। हालिया खुलासे के अनुसार, राज्य में 2,515 उद्योग ऐसे हैं, जो जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। इन उद्योगों ने प्रदूषित जल के ट्रीटमेंट के भी कोई उपाय नहीं किए और दूषित जल सीधे जल स्रोतों में छोड़ दिए। ऐसे लाल (रेड) केटेगिरीके उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक का कोई बस नहीं चल पा रहा है। अनियंत्रित प्रदूषण और नियमों की अनदेखी आपको बता दें, उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए जल प्रदूषण नियंत्रण समेत अन्य पर्यावरण संबंधी अनुमतियां जरूरी होती हैं। प्रदेश में चल रहे 5,961 उद्योगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समेकित सहमति और प्राधिकरण (कंसोलिडेटेड कंसेंट एंड अथाराइजेशन-सीसीए) रिन्युएशन ही नहीं कराया है। ये अनियंत्रित प्रदूषण फैला रहे हैं, इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों का जल तक जहरीला कर रहा है। इनके अपशिष्ट से नदियों का इको सिस्टम बिगाड़ रहे हैं। CCA रिनिवल न कराने वाले उद्योगों की जानकारी -लाल (Red) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,515 उद्योग (इनमें 2,311 लघु, 153 मध्यम और 51 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -नारंगी (Orange) कैटेगरी के उद्योग: कुल 1,398 उद्योग (इनमें 1,295 लघु, 80 मध्यम और 23 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -हरा (Green) कैटेगरी के उद्योग: कुल 2,048 उद्योग (इनमें 2,022 लघु, 20 मध्यम और 6 वृहद उद्योग शामिल हैं)। -कुल अनियंत्रित उद्योग: इस तरह प्रदेश में कुल 5,961 उद्योगों ने अपना जरूरी रिनिवल ही नहीं कराया है। अमृत मित्र और प्रदूषित जल स्रोत हालात ये हैं कि, प्रदेशभर में 7 हजार अमृत मित्र हैं, फिर भी यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। मध्य प्रदेश में 7 हजार अमृत मित्र जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत 3.70 करोड़ रुपए बजट प्रदेश को दिया गया और अमृत मित्र अंतर्गत 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई हैं। इसके बावजूद यहां 305 नदियां, तालाब और जलाशय प्रदूषण की चपेट में हैं। योजनाओं पर करोड़ों खर्च प्रदेश में अमृत मित्र योजना के अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण की 55 परियोजनाएं, हरित क्षेत्र की 10 परियोजनाएं, अर्बन फारेस्ट्री में 501 परियोजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से 184 परियोजनाएं भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी हैं, शेष 317 परियोजनाएं भारत सरकार की समीक्षा में हैं। राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम में एमपी के चिह्नित दूषित स्रोत -नदियां: 211 -झीलें: 20 -तालाब: 11 -टैंक: 01 -भूजल स्रोत: 353 -जलाशय: 08 क्या कहता है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड? मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव अचुत्य ए. मिश्रा का कहना है कि, प्रदेश में रेड (लाल) श्रेणी के उद्योग प्रदूषणकारी हैं। समय-समय पर इनकी मानीटरिंग की जाती है। इनसे निकलने वाला अपशिष्ट नदियों के जल को प्रदूषित करता है। हालांकि कुछ उद्योगों में रियल टाइम मानीटरिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं, लेकिन कुछ उद्योग ऐसे भी है जो अधिक प्रदूषणकारी हैं, उन्हें नोटिस देकर कार्रवाई भी की जाती है।