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प्रदूषण से बेहाल दिल्ली: खतरनाक स्तर पर AQI, स्मॉग में छिपी राजधानी की पहचानें

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। शनिवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में घना स्मॉग छाया रहा, जिससे लोगों को आंखों में जलन और सीने में घुटन महसूस हुई। इंडिया गेट पर विजिबिलिटी घटी दिल्ली के पॉपुलर प्लेस इंडिया गेट पर सुबह की सैर के लिए आने वाले लोगों को घने स्मॉग के कारण निराशा हाथ लगी। शनिवार सुबह इंडिया गेट स्मॉग की मोटी चादर में लगभग ओझल हो गया। सुबह 8 बजे यहां AQI 369 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। हॉटस्पॉट में हवा 'गंभीर' श्रेणी के करीब CPCB के आंकड़ों के मुताबिक प्रदूषण के हॉटस्पॉट माने जाने वाले इलाकों में स्थिति काफी चिंताजनक है। आनंद विहार में सुबह 8 बजे AQI 424 दर्ज हुआ, जो 'गंभीर' श्रेणी की तरफ इशारा करता है। वजीरपुर की हवा का स्तर 447 तक पहुंच गया, जो किसी भी शहर के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा लोधी रोड, नजफगढ़, करोल बाग और आईजीआई एयरपोर्ट के पास भी हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में बनी हुई है। हवा में धूल कणों, धुएं और नमी के मिश्रण ने एक मोटी स्मॉग की परत बना दी है, जिससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। NCR के हाल भी चिंताजनक दिल्ली से सटे NCR क्षेत्रों में भी हालात बेहतर नहीं हैं। नोएडा सेक्टर-1 में AQI 387 दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम सेक्टर-51 में AQI 285 रहा। सेहत के लिए गंभीर खतरा इस जहरीली हवा का सबसे बुरा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी शिकायतें हो रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक इतनी खराब हवा में रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों के लिए जारी की सलाह दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कच्चे ईंधन वाले वाहनों पर रोक, निर्माण स्थलों पर धूल-नियंत्रण के कड़े उपाय, एंटी-स्मॉग गन का उपयोग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठा रही है। आम जनता के लिए जारी की ये सलाह ·         सुबह और शाम के समय (जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है) बाहर निकलने से बचें। ·         घर से बाहर निकलने पर N-95 मास्क का उपयोग करें। ·         घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और शरीर को हाइड्रेट रखें। सरकारी एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन दिल्ली और एनसीआर में हवा की यह गुणवत्ता यहां के निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।

मालती राय का अचानक दौरा: रैन बसेरा की खामियाँ देख अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के आदेश

भोपाल राजधानी भोपाल में कड़ाके की ठंड के बीच महापौर मालती राय ने देर रात शाहजहानी पार्क स्थित रैन बसेरे का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के सख्त निर्देश दिए। महापौर मालती राय ने बताया, यह भोपाल का सबसे बड़ा रैन बसेरा है। सर्दी तेज होने के कारण मैंने स्वयं जाकर देखा कि यहां रुकने वाले लोगों को गर्म कंबल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। पिछले साल हमने निर्णय लिया था कि सभी रैन बसेरों में सर्दियों में हीटर लगाए जाएं। आज उसकी व्यवस्था की भी जांच की गई है। उन्होंने आगे कहा कि केयरटेकर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शराब या किसी मादक पदार्थ का सेवन करके आने वाले व्यक्तियों को रैन बसेरे में प्रवेश न दिया जाए, क्योंकि इससे अन्य जरूरतमंदों को परेशानी होती है। निरीक्षण के बाद महापौर ने नगर निगम अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के आदेश दिए। शहर के सभी रैन बसेरों में हीटर, गर्म कंबल, स्वच्छ बिस्तर और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

धान खरीदी सीजन शुरू: मुख्यमंत्री साय बोले—किसानों का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर प्रदेश में तयशुदा कार्यक्रम के हिसाब से आज से धान खरीदी शुरू हुई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया के जरिए धान खरीदी केंद्रों में की गई व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि का यह सफर आज फिर एक नई उम्मीद और किसानों के अटूट विश्वास की रोशनी के साथ आगे बढ़ रहा है.     आज भोर की सुनहरी किरणों के साथ छत्तीसगढ़ की धरती पर फिर शुरुआत हुई है छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की । यह धान खरीदी किसान भाइयों की मेहनत और सरकार पर उनके विश्वास का उत्सव है। छत्तीसगढ़ सरकार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान की खरीदी करेगी. किसान सोमवार से शुक्रवार तक केंद्र में धान बेच सकेंगे. धान खरीदी के लिए किसानों को पिछली बार की तरह इस बार भी प्रति क्विंटल 3100 रुपये के दाम मिलेंगे. धान खरीदी के लिए प्रदेश भर में 2739 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं. सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य पर 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. धान अवैध बिक्री पर रोक प्रदेश में धान के अवैध परिवहन को रोकने के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं. अन्य राज्यों की सीमा में चेक पोस्ट बनाकर कड़ी निगरानी की जा रही है. धान की सुरक्षा के लिए खरीदी केन्द्रों में ड्रेनेज और तारपोलिन आदि की व्यवस्था की गई है. सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. सरकार के निर्देश के अनुसार अगर कोई अवैध परिवहन या बिक्री करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. किसानों को लेना पड़ेगा टोकन रजिस्टर्ड किसानों को धान बेचने के लिए तुंहर एप से टोकन लेना पड़ता है. टोकन के लिए एप लॉन्च किया गया है. जिसकी मदद से हर किसान को निर्धारित तिथि पर संबंधित खरीदी केंद्र में धान बेचने के लिए टोकन ले सकते हैं. किसान घर बैठे टोकन ले सकते हैं. जो किसान ऑनलाइन टोकन नहीं ले पा रहे हैं उसने लिए मंडी में टोकन की व्यवस्था की गई है. मंडी में किसानों के लिए भी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं. कितने टोकन पर कितनी धान बिकेगी तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के जरिए किसान हर दिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक ऑनलाइन टोकन ले सकते हैं. 2 एकड़ या उससे कम जमीन वाले किसानों को अधिकतम एक टोकन मिलेगा. 2 से 10 एकड़ जमीन वाले छोटे किसानों को दो टोकन और 10 एकड़ से ज़्यादा जमीन वाले बड़े किसानों को अधिकतम तीन टोकन दिए जाएंगे.

कोर्ट में चूक या साज़िश? बिना अनुमति जारी वारंट से हड़कंप, पीड़ित पूरी रात हिरासत में

 इंदौर  जिला अदालत में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घरेलू हिंसा के एक केस में कोर्ट के आदेश के बिना ही पति के खिलाफ वसूली वारंट निकल गया। बिना आदेश के जारी इस फर्जी वारंट को लेकर एसपी से लेकर थाने के टीआई तक पूरी पुलिस टीम तामिली में लग गई और विकलांग शासकीय शिक्षक पति को पकड़कर रातभर लॉकअप में रख दिया। जब पीड़ित को अगले दिन कोर्ट में ले जाया गया तो न्यायालय भी दंग रह गया कि ऐसा वारंट तो कभी जारी हुआ ही नहीं। कोर्ट ने तत्काल पति को रिहा करने का आदेश दिया और वारंट जारी करने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित न्यायालयीन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। घटना ने जिला न्यायालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी वसूली का पूरा खेल जानकारी के मुताबिक पत्नी ने घरेलू हिंसा के मामले में 8,500 रुपये अंतरिम भरण-पोषण का आदेश प्राप्त किया था। पति ने इसे वरिष्ठ न्यायालय में चुनौती दी और वरिष्ठ न्यायालय ने यह आदेश रद्द कर दिया। आदेश रद्द होने के बाद भी पत्नी ने चालाकी से उसी अस्तित्वहीन आदेश पर वसूली का केस एक अन्य कोर्ट में लगा दिया। कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी किए थे, किसी भी तरह के वारंट का आदेश जारी नहीं किया था। इसके बावजूद पत्नी ने प्रोसेस राइटर को गुमराह करते हुए बिना आदेश के वसूली वारंट निकलवा लिया, जिसमें तामिली के लिए एसपी इंदौर का नाम भी फर्जी रूप से दर्ज करवा दिया गया। वारंट के कागज पर “कोर्ट आदेश” देखकर पुलिस भी भ्रमित हो गई और हातोद थाना टीआई सहित पूरी टीम पति को पकड़ लाने में लग गई। रातभर लॉकअप, समाज में अपमान विकलांग शासकीय शिक्षक पति को रातभर लॉकअप में रहना पड़ा। अपमान का दर्द अलग।अगले दिन कोर्ट को जब यह बताया गया कि आदेश पत्रिका में वारंट का कोई आदेश है ही नहीं, तो कोर्ट हतप्रद रह गया और तुरंत पति को रिहा करने के निर्देश दिए।कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही पर गंभीर रुख अपनाया और संबंधित अधिकारी से जवाब तलब किया। पत्नी, कोर्ट स्टाफ और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग पीड़ित पति ने इस पूरे मामले में आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रशासनिक न्यायमूर्ति इंदौर और जिला जज इंदौर को याचिका देकर स्वतः संज्ञान लेने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।पीड़ित का आरोप है कि पत्नी ने प्रोसेस राइटर सहित अज्ञात लोगों से मिलीभगत कर फर्जी वारंट निकलवाया, जो धारा 245, 246, 247 BNS के तहत गंभीर अपराध है, जिसकी सजा दो साल तक हो सकती है। बिना आदेश वारंट दंडनीय अपराध हाईकोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि यह मामला न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है। पत्नी ने कपटपूर्वक झूठी वसूली का केस लगाया और बिना आदेश वारंट जारी हुआ, जो सीधे-सीधे दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ने हाई कोर्ट में ज्ञापन देकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।एडवोकेट डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और ऐसे मामलों में माननीय न्यायालय स्वयं भी संज्ञान ले सकता है।

तेजस्वी की RJD को सबसे ज्यादा वोट, लेकिन NDA ने जीतीं ज्यादा सीटें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केवल 25 सीटें जीत सका। राजद ने कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन की अगुवाई की और 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सीटों की संख्या के लिहाज से शर्मनाक प्रदर्शन के बावजूद तेजस्वी यादव के लिए एक अच्छा संकेत रहा। आरजेडी ने इन चुनाव में किसी भी दूसरी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किए। राजद के खाते में 23 प्रतिशत वोट शेयर आए। पिछले विधानसभा चुनाव के 23.11 प्रतिशत से यह थोड़ा कम रहा, जब पार्टी ने 144 उम्मीदवार उतारे थे। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 19.46% से बढ़कर इस बार 20.07% हो गया। बीजेपी ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि पिछले चुनाव में 110 निर्वाचन क्षेत्रों पर उम्मीदवार उतारे थे। वोट शेयर कुल डाले गए वोटों से किसी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार को मिलने वाले मत का प्रतिशत होता है। वोट शेयर मतदाताओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता या समर्थन के बारे में बहुत कुछ बताता है। तेजस्वी यादव की आरजेडी का वोट शेयर सबसे अधिक रहा तो फिर पार्टी ज्यादा सीटें क्यों नहीं जीत पाई? चलिए समझते हैं। कई सीटों पर रही टक्कर राजद का वोट शेयर दर्शाता है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी दूसरे या तीसरे स्थान पर रही होगी, जहां उसने काफी वोट तो इकट्ठे किए लेकिन जीत की रेखा पार करने के लिए काफी नहीं था। इससे उसके कुल वोट शेयर में इजाफा होता है, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बढ़ती। इससे यह भी पता चलता है कि भले ही कुल मिलाकर उसे बहुत वोट मिले हों, लेकिन वे वोट उन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दिलाने के लिए काफी नहीं थे। तेजस्वी की पार्टी कई सीटों पर टक्कर देते हुए पीछे रह गई। सहयोगी दलों का खराब प्रदर्शन महागठबंधन में RJD के सहयोगियों का प्रदर्शन भी फ्लॉप रहा। कांग्रेस ने 61 सीटों में से सिर्फ 6 पर जीत दर्ज की। सीपीआई(एमएल)एल ने 2 सीटें और सीपीआई(एम) ने एक सीट पर जीत हासिल की। सीपीआई तो अपना खाता भी नहीं खोल पाई। मुकेश सहनी की वीआईपी का हाल भी ऐसा ही रहा। VIP ने 15 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए थे लेकिन एक पर भी विजय नहीं मिली। ऐसे में महागठबंधन को कुल 35 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं, एनडीए ने 202 सीटें हासिल कीं, जिसमें भाजपा का योगदान 89 सबसे बड़ा रहा। इसके बाद जदयू को 85, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 19, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।  

चुनावी सफलता के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई: भाजपा ने आरके सिंह को किया निलंबित

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत के अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया है। भाजपा ने उन्हें नोटिस भेजकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर जवाब भी मांगा गया है। आरा से भाजपा के पूर्व सांसद और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके आरके सिंह बीते लंबे समय से पार्टी में सक्रिय नहीं हैं। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते यह कार्रवाई की गई। भाजपा ने शुक्रवार को MLC अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को भी कारण बताओ नोटिस भेजा। बिहार भाजपा की ओर से भेजे गए नोटिस में आरके सिंह से कहा गया कि उनकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में है, इसे गंभीरता से लिया गया है। इसलिए उन्हें निलंबित करते हुए कारण पूछा जा रहा है, कि उन्हें पार्टी से निष्कासित क्यों न कर दिया जाए। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरके सिंह ने भाजपा नेताओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सम्राट चौधरी को तारापुर से वोट नहीं देने की अपील भी की थी। आरके सिंह ने एनडीए द्वारा अनंत सिंह, विभा देवी समेत दागदार नेताओं को टिकट देने पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा शाहाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा की चुनावी रैलियों में आरके सिंह नहीं नजर आए थे। हालांकि, चुनाव के दौरान अपनी ही पार्टी और गठबंधन के नेताओं को घेरने वाले आरके सिंह पर भाजपा ने चुप्पी साधे रखी थी। चुनाव के दौरान उनपर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। जैसे ही इलेक्शन खत्म हुए और रिजल्ट आए, पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। फरवरी 2025 में आरके सिंह ने भोजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया था कि भाजपा के कुछ नेताओं ने पैसा देकर भोजपुरी स्टार पवन सिंह काराकाट लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़वाया था। उस चुनाव में काराकाट से एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई थी। वहीं, आरा से अपनी हार की वजह भी आरके सिंह ने भाजपा के ही अंदर के नेताओं की साजिश बताई थी।  

72 वें सहकारी सप्ताह पर अपेक्स बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों ने ली ईमानदारी एवं शुचिता की शपथ: मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक

भोपाल अपेक्स बैंक, मुख्यालय, भोपाल के टी.टी.नगर स्थित प्रांगण में 72 वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के आयोजन की शुरूआत हर्षोंल्लास के साथ हुई।  बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने ’’सहकारी ध्वज’’ फहराया एवं बैंक के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ईमानदारी एवं समर्पण भाव से शुचिता के साथ अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निवर्हन करने की शपथ दिलाई एवं सहकारिता अमर रहे के नारे भी लगवाए।   इस अवसर पर बैंक के विषेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्रीमती अरूणा दुबे, श्री अरूण मिश्र, श्री संजय मोहन भटनागर, श्री अरविंद बौद्ध, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन के साथ अपेक्स बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, जिला सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित हुए ।

ओवैसी की पार्टी का बड़ा दावा: पाँच सीटों के सहारे सरकार बनाने में मदद को तैयार, नीतीश–तेजस्वी से बातचीत के संकेत

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बेहद उत्साहित है। सीमांचल में 5 सीटों को जीतने के बाद ओवैसी की पार्टी बिहार में सरकार बनाने का सपना भी देखने लगी है। इसके लिए उसने नया समीकरण गढ़ते हुए आरजेडी और जेडीयू को अपने साथ आने का ऑफर दिया है। इतना ही नहीं पार्टी ने मुख्यमंत्री पर पर भी दावेदारी पेश की है और बदले में नीतीश कुमार को 2029 में पीएम उम्मीदवार बनाने का वादा किया गया है। एआईएमआईएम बिहार के एक्स हैंडल पर यह पेशकश की गई है। एआईएमआईएम बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि अभी भी सरकार बनाने का मौका है। पार्टी का कहना है कि जेडीयू, राजद, कांग्रेस, आईएमआईएम, सीपीआईएमएल, सीपीआईएम मिल जाएं तो सरकार बन सकती है। गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 तो आरजेडी के पास 25 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमश: 6 और 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीपीआई-एमएल और सीपीआई एम ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इनका योग 124 होता है, जोकि बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो अधिक है। एआईएमआईम ने कल्पना के घोड़े इतने तेज दौड़ाए कि कैबिनेट की तस्वीर तक बना डाली। पार्टी ने कहा कि उसका मुख्यमंत्री होगा जबकि जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राजद को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं तो कांग्रेस के पास दो मंत्री पद होगा। सीपीआईएमएल और सीपीआईएम से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा ओवैसी की पार्टी ने कहा, 'हम, हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसीलिए अभी भी मौका है।'

MP News: रक्षा उत्पाद में निवेश से लेकर निर्यात तक में मदद करेगी सरकार

भोपाल/जबलपुर. मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पाद बनाए जाने के प्रयास फिर तेज हो गए हैं। निवेशकों को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। निवेश पर प्रोत्साहन से लेकर रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी राज्य सरकार सहायता करेगी। स्टार्टअप और रक्षा उत्पाद की कोई बेहतर तकनीक है तो उसे प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्यात के लिए उत्पाद के परीक्षण को सरल किया गया है और इसकी फीस भी घटाई गई है। किसी व्यक्ति के पास किसी नए रक्षा उत्पाद का आइडिया है तो चयन होने पर 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रोत्साहन बतौर दी जाएगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी रक्षा उत्पाद तैयार किए जाने से विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी। भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हुआ और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है। रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है। धार के पीएम मित्रा पार्क में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रस्ताव बुलाए गए हैं। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेश करने वालों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी। इको सिस्टम पहले से मौजूद जबलपुर में पहले से रक्षा इको सिस्टम मौजूद है, जैसे व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जबलपुर में भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों का ओवरहालिंग शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश में जबलपुर, इटारसी में आर्डनेंस फैक्टरी है। ग्वालियर के पास और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कटनी-जबलपुर में डिफेंस कॉरिडोर की संभावनाएं कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच भी डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया तेज़: टेट की तारीख जारी, सेट नोटिफिकेशन का इंतज़ार खत्म होने वाला

रायपुर एससीईआरटी द्वारा छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट-26) के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 13 नवंबर गुरुवार से शुरू हो चुकी है। आठ दिसंबर तक आनलाइन आवेदन मंगाए गए हैं। स्कूल शिक्षकों के लिए टेट की परीक्षा फरवरी 2026 में होगी। साथ ही कॉलेज में शिक्षकों के लिए सेट की परीक्षा भी मार्च-अप्रैल में आयोजित की जाएगी। इसके लिए दिसंबर 2025 में अधिसूचना जारी हो सकती है। सरकार ने स्कूलों में 5,000 और कालेजों में 700 पदों पर सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की घोषणा की थी। इसके बाद कालेजों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अब स्कूलों के लिए टेट परीक्षा के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। एक बार पास करने पर आजीवन वैधता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार ने भर्ती परीक्षा कराने से पहले स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए पात्रता परीक्षा कराने के लिए विभागों को कहा है। टेट के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के प्रस्ताव पर व्यावसायिक परीक्षा मंडल (सीजी व्यापमं) ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश में अभी तक 2011, 2014, 2016, 2017, 2019, 2022 और 2024 में टेट परीक्षा हो चुकी है। एक बार परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद इसकी वैधता आजीवन रहेगी। वहीं कालेजों के लिए सेट परीक्षा सातवीं बार होगी। यह है टेट-सेट टेट राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा तय करती है कि कोई उम्मीदवार कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने के योग्य है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से हजारों शिक्षक प्रभावित होंगे, खासकर वे जिन्हें पदोन्नति की उम्मीद थी। इसी तरह कॉलेजों में सेट एक राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा है, जो विश्वविद्यालयों और कालेजों में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अनिवार्य है। इसे यूजीसी की अनुमति से प्रत्येक राज्य आयोजित करता है। विभाग से मिल चुकी है मंजूरी स्कूलों में पांच हजार और कॉलेजों में 700 शिक्षक समेत अन्य पदों पर भर्ती होनी है। इसके लिए वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। भर्ती के लिए स्वीकृत पदों में सहायक प्राध्यापक के 625 पद शामिल किए गए हैं। इसी क्रम में क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद हैं। इनकी नियुक्ति से महाविद्यालयों में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। राज्य के स्कूलों में कुल एक लाख 88 हजार 721 शिक्षक कार्यरत हैं, जिसमें से सरकारी स्कूलों में एक लाख 86 हजार 657 शिक्षक हैं। जबकि शिक्षकों के करीब 40 हजार पद खाली हैं। इसी तरह कालेजों में लगभग 2,600 सहायक प्राध्यापक के पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद टेट के लिए बढ़ी सक्रियता एक सितंबर 2025 को उच्चतम न्याय ने शिक्षा जगत से जुड़े हजारों शिक्षकों पर असर डालने वाला आदेश सुनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब नौकरी और पदोन्नति चाहने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करनी अनिवार्य होगी। यह आदेश पूरे देश के सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। लेकिन अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों को इसमें छूट दी गई है। जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से ज्यादा का समय शेष है, उन्हें हर हाल में टीईटी पास करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेनी पड़ेगी। वहीं जिनकी सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें अपने पद पर बने रहने के लिए टीईटी देना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन अगर वे पदोन्नति चाहते हैं तो परीक्षा पास करनी होगी।