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अंता में कांग्रेस का धमाकेदार जीत, भाजपा तीसरे स्थान पर खिसकी

जयपुर अंता के नतीजों ने सियासत की उस तस्वीर को बदल दिया है जिसमें बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन के प्रचार में सीएम भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे एक साथ चुनावी रथ पर नजर आ रहे थे क्योंकि अंता का गढ़ आखिरकार कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने जीत लिया। इन परिणामों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात रही निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा और भाजपा की जीत का अंतर, इसने भाजपा को लगभग तीसरे नंबर पर ही धकेल दिया था। बीजेपी के हाथ से न सिर्फ अंता सीट छिन गई बल्कि सत्ता और संगठन की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन 15 राउंड तक तीसरे नंबर पर रहे। विजयी प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने अंता से तीसरा चुनाव जीता है, इससे पहले वे 2008 और 2018 में भी अंता से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। बीजेपी ने अंता सीट जीतने के लिए सीएम भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सहित अपनी पूरी टीम को मैदान में उतार दिया था। सीएम भजनलाल शर्मा ने यहां दो बार रोड शो भी किए थे लेकिन इसके बावजूद बीजेपी के प्रदर्शन ने यहां उसके समर्थकों निराश किया। प्रमोद जैन भाया ने पोस्टल बैलेट राउंट से ही अपनी बढ़त यहां बरकरार रखी थी। इसके बाद ईवीएम की गणना में शुरुआती दो राउंड को छोड़कर वे शेष सभी राउंड्स में लगभग बढ़त बनाए रहे। अंता में जीत-हार से विधानसभा में सियासी समीकरणों पर भले कोई अंतर नहीं आ रहा है लेकिन इसके सियासी असर बहुत गहरे होंगे। विधानसभावार आंकड़े देखें तो मौजूदा समय में राजस्थान विधानसभा में 199 विधायकों में से 118 बीजेपी के 66 कांग्रेस के व शेष अन्य दलों के हैं। अंता की सीट जीतने से कांग्रेस की संख्या बढ़कर 67 हो जाएगी। अंता विधानसभा सीट झालवाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र में आती है। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता है और यहां से उनके बेटे दुष्यंत सिंह सांसद हैं। इस कारण इस उपचुनाव का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है। बीजेपी ने यहां वसुंधरा राजे को फ्रंट फुट पर रखा और उन्हें सीएम भजनलाल शर्मा के साथ प्रचार में लगाए रखा। एक मैसेज देने की कोशिश की गई कि बीजेपी ने अंता के लिए सभी तरह के मतभेद भुला लिए और पार्टी पूरी तरह एकजुट है लेकिन जिस तरह के नतीजे आए हैं उसने अब सरकार और संगठन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी सिर्फ हारी ही नहीं बल्कि निर्दलीय नरेश मीणा ने भी बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है। नरेश शुरुआती 15 राउंड्स तक बीजेपी से आगे रहे और बीजेपी तीसरे पायदान पर रही, जबकि यहां प्रचार के लिए बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। नरेश ने क्या बदला अंता में अब तक हुए चार चुनावों में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा। इसमें दो बार बीजेपी जीती और दो बार कांग्रेस। इस बार यहां 5वां चुनाव था। इन 5 मुकाबलों में बीजेपी ने अपने चेहरे 4 बार बदले लेकिन कांग्रेस ने हर बार यहां भाया पर ही दांव लगाया। इसकी वजह भी अब नतीजों से समझ आने लगी है। प्रमोद जैन भाया यहां अपने आप में एक क्षत्रप हैं, जिस तरह से उन्होंने इलेक्शन का मैनेजमेंट किया वह चौंकाने वाला रहा लेकिन नरेश मीणा ने यहां पहली बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। वोटों की गिनती शुरू होने से पहले यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला माना जा रहा था लेकिन नरेश ने सभी को चौंकाते हुए मुकाबले को रोचक बना दिया। नेताओं की प्रतिक्रिया पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत :  अंता उपचुनाव में कांग्रेस को विजय दिलाने के लिए मैं सभी मतदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं और नवनिर्वाचित विधायक प्रमोद जैन भाया को हार्दिक बधाई देता हूं। अंता की जीत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आमजन का विश्वास एक बार फिर मजबूत किया है। भाजपा सरकार पिछले दो वर्षों की अपनी एक भी ठोस उपलब्धि बताने में नाकाम रही है। हमारी लोकप्रिय जनहितकारी योजनाओं को कमजोर करने के कारण आम आदमी बेहद परेशान है और यह परिणाम कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्व में चलाई गई योजनाओं पर जनता की मुहर है।  इस परिणाम से लगता है कि मात्र दो वर्षों में ही सरकार पर एंटी-इंकंबेंसी हावी हो गई है और यह सरकार अपने लिटमस टेस्ट में फेल साबित हुई है। कांग्रेस के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को अंता में की गई मेहनत के लिए धन्यवाद देता हूं। अंता के नतीजों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि वे जनता के आदेश को स्वीकार करते हैं। वहीं पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भाया को जीत की बधाई दी। कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया की पत्नी और बारां जिला प्रमुख उर्मिला जैन समर्थकों के बीच पहुंचीं। उन्होंने कहा कि पूरा बारां उनका परिवार है और जहां परिवार होता है, वहां किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता नहीं रहती। जनता ने इस चुनाव में कांग्रेस और भाया पर अपना भरोसा जताया है। उर्मिला जैन ने आगे कहा कि उन्होंने ऐसा चुनाव पहले कभी नहीं देखा। लोकतंत्र में चुनाव होते रहते हैं लेकिन इस बार उनके खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता खत्म, लाल किला ब्लास्ट के बाद छात्रों की स्थिति क्या?

फरीदाबाद देश की राजधानी दिल्ली के दिल में हुई लाल किला ब्लास्ट की गूंज अब हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंच चुकी है. सोमवार शाम करीब 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सफेद i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इस साजिश के तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हो सकते हैं. इसी बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है. AIU ने कहा कि अब यूनिवर्सिटी को AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. यह फैसला न केवल संस्थान के लिए बड़ा झटका है, बल्कि हजारों छात्रों के करियर पर भी गहरा असर डाल सकता है. छात्रों के लिए क्या रास्ते बचे हैं? छात्र फिलहाल UGC और AICTE से मान्यता प्रमाणपत्र लेकर भारतीय विश्वविद्यालयों या सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं. लेकिन विदेशी एडमिशन के लिए उन्हें AIU समकक्ष सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा. इससे बाहर पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि यूनिवर्सिटी को अब सुधारात्मक कदम उठाकर AIU से सदस्यता पुनः प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए. कैसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी बनी आतंकी साजिश का अड्डा जांच एजेंसियों के मुताबिक अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 आतंकियों की गुप्त बैठकों का केंद्र थी. बताया जा रहा है कि ये मीटिंग्स रूम नंबर 13 में होती थीं, जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सीरियल ब्लास्ट की योजना बनाई जा रही थी. लाल किला ब्लास्ट केस की जांच में अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 से आतंकी लिंक सामने आए हैं. यह कमरा डॉ. मुजम्मिल अहमद गाई का था जो पुलवामा का रहने वाला बताया जा रहा है. जांच में सामने आया कि वह नियमित रूप से कुछ कट्टरपंथी डॉक्टरों और छात्रों से मिलता था. एजेंसियों को संदेह है कि यूनिवर्सिटी की लैब से IED की क्षमता बढ़ाने वाले केमिकल इसी कमरे में लाए गए थे. फिलहाल पुलिस ने कमरा नंबर 13 को सील कर दिया है, और वहां से लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कैमिकल कंटेनर, और डिजिटल नोट्स बरामद किए गए हैं. AIU ने आधिकारिक बयान में कहा- अल-फलाह यूनिवर्सिटी को अपनी किसी भी गतिविधि में AIU का नाम या लोगो इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. विश्वविद्यालय की वेबसाइट से तुरंत AIU का लोगो हटाया जाए. AIU के अनुसार यह फैसला संस्था की “Good Standing” नीति के तहत लिया गया है. अगर किसी यूनिवर्सिटी का नाम किसी विवाद, आपराधिक जांच या फर्जी गतिविधि में सामने आता है, तो उसकी सदस्यता निलंबित या समाप्त की जा सकती है. AIU क्या है और क्यों है इतनी अहम संस्था? AIU यानी Association of Indian Universities भारत की सबसे पुरानी उच्च शिक्षा संस्था है, जो 1925 में स्थापित हुई थी. यह संस्था भारत के सभी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों (केंद्रीय, राज्य, डीम्ड, निजी, ओपन) का प्रतिनिधित्व करती है और विदेशी डिग्रियों की समानता (Equivalence) तय करती है. AIU की मुख्य जिम्मेदारियां     भारत के सभी विश्वविद्यालयों को एक शैक्षणिक मंच पर लाना.     विदेशी डिग्रियों की भारतीय स्तर पर वैधता तय करना.     यूनिवर्सिटीज के बीच रिसर्च, नीति और खेल सहयोग बढ़ाना.     विश्वविद्यालयों को सदस्यता, स्पोर्ट्स पार्टिसिपेशन और इंटरनेशनल रिप्रेजेंटेशन देना.     यदि कोई यूनिवर्सिटी विवादों में हो तो उसकी सदस्यता निलंबित या रद्द करना. AIU सदस्यता रद्द होने के परिणाम प्रभाव का क्षेत्र    संभावित असर विदेशी शिक्षा    विदेशों की यूनिवर्सिटीज में प्रवेश मुश्किल, Equivalence सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा सरकारी नौकरियां    UPSC, SSC, PSU जैसी नौकरियों में आवेदन रुक सकता है यूनिवर्सिटी की साख    प्रतिष्ठा में गिरावट, एडमिशन में 40-50% कमी संभव रिसर्च फंडिंग    अंतरराष्ट्रीय सहयोग और परियोजनाएं ठप खेलकूद    AIU के यूनिवर्सिटी गेम्स से प्रतिबंध छात्र    करियर अनिश्चित, डिग्रियों की वैल्यू घटेगी अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर असर: साख और भविष्य पर संकट अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद की प्रतिष्ठित निजी यूनिवर्सिटीज में मानी जाती रही है. लेकिन अब इस विवाद और सदस्यता रद्द होने से-     यूनिवर्सिटी की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां खत्म होंगी,     नए छात्र एडमिशन से कतराएंगे,     खेल और रिसर्च फंडिंग प्रभावित होगी,     और विदेश में डिग्री की वैधता खत्म हो जाएगी.     हालांकि, राहत यह है कि UGC और NMC की मान्यता फिलहाल बरकरार है, इसलिए यूनिवर्सिटी की डिग्रियां घरेलू स्तर पर वैलिड रहेंगी. दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर दोहरी मार पड़ी है. एक तरफ आतंकवादी साजिश के तारों से जुड़ने के आरोप, दूसरी ओर AIU सदस्यता का रद्द होना. यह मामला न सिर्फ एक विश्वविद्यालय के भविष्य बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है. अब देखना होगा कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी खुद को इस संकट से कैसे बाहर निकालती है. अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर, जानें कहां-कहां से होती है कमाई? हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बसा अल फलाह विश्वविद्यालय हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर जांच के घेरे में आ चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके कुछ डॉक्टरों का दिल्ली बम धमकों से संबंध है. जांच जारी रहने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी भी संस्थागत संलिप्तता से इनकार कर दिया है. लेकिन एक बात सबका ध्यान आकर्षित कर रही है वह इसके चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी का व्यवसायिक बैकग्राउंड. आइए जानते हैं की यूनिवर्सिटी के अलावा किन कंपनियों का मालिक है जावेद अहमद सिद्दीकी. कहां से हुई सफर की शुरुआत  जावेद अहमद सिद्दीकी का सफर 1990 के दशक के अंत में शुरू हुआ. 1990 के दशक के अंत में जावेद अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली एनसीआर में कई व्यवसाय स्थापित किए. आज के समय में वह अल फलाह विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में काम करते हैं. इसी के साथ वह अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं. यह ट्रस्ट विश्वविद्यालय और स्कूलों, अनाथालय और मदरसों के साथ-साथ कई शैक्षणिक और कल्याणकारी संस्थानों की देखरेख करता है.  जावेद अहमद सिद्दीकी के स्वामित्व और प्रबंधन वाली कंपनियां  भारत के कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक जावेद अहमद सिद्दीकी 9 पंजीकृत कंपनियों से निर्देशक या प्रबंध प्रमुख के रूप में जुड़े हुए हैं. इनमें अल फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड, अल फलाह सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह कंसलटेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अल फलाह एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, अल फलाह एनर्जी लिमिटेड, अल … Read more

बस ड्राइवरों की फिटनेस भी जरूरी! इंदौर में स्कूल-कॉलेज बसों में नियमों का पालन सुनिश्चित

इंदौर  स्कूल और कॉलेज बसों के सुरक्षित संचालन तथा विद्यार्थियों एवं नागरिकों की सुरक्षा को लेकर शहर के विभिन्न स्कूल प्रशासकों और स्कूल बसों के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सभागार में हुई। इसमें विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, सड़क पर बसों के सुरक्षित संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने सभी स्कूल और कॉलेजों के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों एवं प्रशासकों से कहा कि स्कूल के बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा एवं सुरक्षित यातायात हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूल/कॉलेज प्रबंधन/बस चालकों एवं संचालकों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह, पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी भी उपस्थित थे। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले और सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों के खिलाफ उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इन बातों का करना होगा पालन     स्कूल बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य।     बसों में स्पीड गर्वनर सिस्टम लगवाना आवश्यक है और गति सीमा 40 किमी घंटा से अधिक न हो।     बसों में किसी भी आपात स्थिति के लिए आवश्यक उपकरण जैसे अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बाक्स और अन्य जरूरी सामान हो।     बसों में एक इमरजेंसी गेट जरूरी, बसों के फिटनेस व निर्धारित मानकों की निगरानी की जानी चाहिए।     किसी भी स्थिति में खराब वाहनों का संचालन नहीं किया जाए।     ड्राइवरों के पास वैध और भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हो, जिसकी वैधता की जांच भी की जानी चाहिए।     ड्राइवरों की शारीरिक स्थिति की समय पर जांच हो और उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाए।  

भोपाल :2 महीने से जमी समस्या दूर: इंजीनियर त्रिवेदी ने गड्ढे में उतरकर 400 परिवारों की मुश्किलें हल कीं

भोपाल राजधानी भोपाल में नगर निगम के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आरके त्रिवेदी ने अपने काम के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की एक नई मिसाल पेश की है. पिछले दो माह से चोक पड़ी सीवेज लाइन को ठीक करने के लिए त्रिवेदी खुद 22 फीट गहरे सीवेज गड्ढे में उतरे और केवल दो घंटे में 400 से अधिक रहवासियों की समस्या को दूर कर दिया. दरअसल, भोपाल के रोहित नगर में पिछले दो माह से सीवेज लाइन लगातार चोक थी, जिससे करीब 400 से ज्यादा परिवार परेशान थे. नगर निगम के कर्मचारी कई बार सफाई करने पहुंचे, लेकिन सीवेज लाइन की तकनीकी खामी का पता नहीं लगा पा रहे थे. सीनियर अफसरों तक शिकायतें पहुंचने के बाद एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आरके त्रिवेदी (60) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. आरके त्रिवेदी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और जेसीबी मशीन के सहारे खुद 22 फीट गहरे चैंबर में उतरे. उन्होंने कैमरे की मदद से सीवेज लाइन के अंदर देखा. रिवेदी ने पाया कि सीवेज लाइन में बोरियां फंसी हुई हैं. अपनी सूझबूझ और इंजीनियरिंग कौशल का उपयोग करते हुए, उन्होंने ड्रिलिंग के सहारे उन बोरियों को बाहर निकाला और चैंबर की सफाई की. इस कोशिश से 2 घंटे के भीतर ही सीवेज लाइन पूरी तरह से साफ हो गई और 400 से अधिक परिवारों को इस गंभीर समस्या से राहत मिली. इंजीनियर त्रिवेदी ने समस्या का मूल कारण भी बताया. उन्होंने कहा कि चैंबर न होने के कारण सीवेज लाइन में लगातार कचरा जा रहा था, जिसके चलते यह बार-बार चोक हो रही थी. ईई ने आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर वहां नया चैंबर बनाया जाएगा, ताकि आगे से ऐसी कोई परेशानी न हो.

MP में हज घोटाला: आवेश रजा और सैयद हैदर अली ने आठ लोगों से ₹18.62 लाख ठगे

 मंदसौर  मध्य प्रदेश के मंदसौर और उज्जैन के 8 लोगों से 18.62 लाख रुपए की ठगी करने के आरोप में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.  हज यात्रा की व्यवस्था करने के नाम पर राजस्थान के जोधपुर निवासी दो लोगों ने इस ठगी को अंजाम दिया.  मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा ने बताया कि इस साल अप्रैल में मंदसौर और उज्जैन के आठ लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई थी. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आवेश रजा और सैयद हैदर अली ने हज यात्रा पैकेज के तहत एमपी के लोगों से  18.62 लाख रुपए वसूले, लेकिन न तो तीर्थयात्रा की व्यवस्था की और न ही पैसे वापस किए. उन्होंने आगे कहाकि सभी लेन-देन ऑनलाइन किए गए थे. उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और अदालत के आदेशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. जोधपुर में कई छापों के बावजूद आरोपी हर बार गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहे. तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं का उपयोग करके राजस्थान पुलिस के माध्यम से आरोपियों का पता लगाया गया और उन्हें गिरफ्तार किया. मीणा ने बताया कि आरोपियों को  अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. पीड़ितों की धनराशि की वसूली के प्रयास जारी हैं. आवेश रजा और सैयद हैदर अली को भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 316(2) और 318(4) के तहत आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण और अन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया है.

महागठबंधन को मिली करारी शिकस्त, SIR की रणनीति पर बोले अखिलेश– यूपी में दोहराने नहीं देंगे

लखनऊ  बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार का ठीकरा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एसआईआर पर फोड़ा है। उन्होंने दावा किया है कि बिहार में एसआईआर ने खेल कर दिया और अब यह बंगाल, यूपी समेत अन्य राज्यों में नहीं हो पाएगा। शुक्रवार सुबह से जारी बिहार चुनाव की गिनती में महागठबंधन काफी पिछड़ चुका है। रुझानों में एनडीए एकतरफा प्रचंड जीत की ओर है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक, एनडीए 185 सीटों पर आगे चल रहा था, जबकि महागठबंधन महज 53 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है। प्रशांत किशोर की जनसुराज का खाता भी नहीं खुल सका है। वहीं, अन्य तीन सीटों पर आगे है। हालांकि, अभी यह रुझान है और आने वाले घंटों में आंकड़े में तब्दीली आ सकती है। राज्य में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन की करारी हार पर अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, ''बिहार में जो खेल एसआईआर ने किया है, वो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, यूपी और बाकी जगह पर अब नहीं हो पाएगा, क्योंकि इस चुनावी साजिश का अब भंडाफोड़ हो चुका है। अब आगे हम यह खेल, इनको नहीं खेलने देंगे। सीसीटीवी की तरह हमारा पीपीटीवी मतलब ‘पीडीए प्रहरी’ चौकन्ना रहकर भाजपाई मंसूबों को नाकाम करेगा।'' कांग्रेस ने भी महागठबंधन की हार के पीछे एसआईआर को ही वजह बताया है। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एएनआई से बात करते हुए कहा, ''शुरुआती रुझानों में लगता है कि ज्ञानेश गुप्ता (मुख्य चुनाव आयुक्त) बिहार की जनता पर भारी पड़ रहे हैं। आने वाले समय में स्पष्ट होगा कि बिहार के लोग भारी पड़ेंगे ज्ञानेश कुमार गुप्ता पर या ज्ञानेश गुप्ता पड़ेंगे। इंतजार करना होगा। बिहार की जनता को कम नहीं आंक सकता हूं, एसआईआर, वोट चोरी के बाद भी उन्होंने पूरी हिम्मत दिखाई है।'' वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक्स पर कहा कि जो मेरा शक था वही हुआ। 62 लाख वोट कटे 20 लाख वोट जुड़े उसमें से 5 लाख वोट बिना SIR फॉर्म भरे बढ़ा दिए गए। अधिकांश वोट गरीबों के दलितों के अल्प संख्यक वर्ग के कटे। उस पर EVM पर तो शंका बनी हुई है। कांग्रेस को अपने संगठन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आज का चुनाव मतदान केंद्र पर सघन जनसंपर्क का है ना कि रैली व जनसभा का। विजयी प्रत्याशियों को बधाई एवं शुभकामनाएं।  

मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क तैयार करता है बड़े अनुभव, 24 चीते और दूसरा फॉरेस्ट रिट्रीट शुरू

ग्वालियर मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में वर्ष 2023 के बाद इस वर्ष फिर बड़े रोमांच की तैयारी है। 14 नवंबर से कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट फेस्ट सीजन-2.0 शुरू हो रहा है। इसमें पर्यटकों को जंगल सफारी के जरिये चीतों को प्राकृतिक रहवास में दिखाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। पर्यटकों के लिए भव्य टेंट सिटी बनाई गई है। इसके साथ कई एडवेंचर (साहसिक) गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी। चीतों के बारे में जानकारी देने के लिए चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर तैयार किया गया है। यहां पर्यटक चीतों के बारे में सब कुछ जान सकेंगे। इस बार भी 25 टेंट हाउस तैयार होंगे, जिसमें देश-विदेश के पर्यटकों को आमंत्रित किया गया है। इस सीजन में पर्यटक कूनो की समृद्ध जैव विविधता के बीच ग्लैंपिंग (लग्जरी सुविधाओं के साथ कैंपिंग) का अनूठा अनुभव ले सकेंगे। पहले फॉरेस्ट रिट्रीट में नहीं दिखे थे चीते कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 24 चीते हैं। इनमें से 16 चीते खुले जंगल में और आठ चीते बड़े बाड़ों में हैं। वर्ष 2023 के पहले फॉरेस्ट रिट्रीट में पर्यटक चीतों को नहीं देख सके थे। कूनो में जंगल सफारी के लिए फिलहाल 10 वाहन चल रहे हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए इनकी संख्या भी बढ़ाई जा रही है। पार्क प्रबंधन की ओर से रिट्रीट में सोविनियर सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, इसमें पार्क और चीतों से जुड़ी चीजों को पर्यटकों के लिए रखा जाएगा। पर्यटक इन्हें खरीद भी सकेंगे। टेंट सिटी के साथ ही विलेज वाक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्थानीय प्रस्तुतियां, बर्ड वाचिंग, नाइट वाक से लेकर अन्य गतिविधियां भी पर्यटकों के लिए रहेंगी। यह आयोजन मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड निजी कंपनी के सहयोग से कर रहा है। पर्यटक ले रहे जानकारी रिट्रीट में इस बार कई आकर्षण जोड़े गए हैं। पर्यटकों की ओर से पूछताछ की जा रही है, यह उत्साहजनक है। – युवराज पडोले, डिप्टी डायरेक्टर, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की लिस्ट में शामिल: इंदौर के वैज्ञानिकों को रिसर्च में अंतरराष्ट्रीय पहचान

इंदौर  इंदौर ने एक बार फिर रिसर्च के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। देवी अहिल्या विवि की प्रो. अंजना जाजू, डॉ. मुकेशचंद्र शर्मा और UGC-DAE के डायरेक्टर डॉ. वसंत साठे को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) और एल्सेवियर द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों चुना।  यह रैंकिंग वैज्ञानिकों के एच-इंडेक्स, शोध पत्रों की संख्या और प्रभाव के आधार पर तय होती है। इसमें कुल 22 विषयों और 174 उप-क्षेत्रों के वैज्ञानिकों का मूल्यांकन किया जाता है। इंदौर के तीनों वैज्ञानिक कंसोर्टियम फॉर साइंटिफिक रिसर्च से जुड़े हैं। देवी अहिल्या विवि के कुलपति प्रो. राकेश संघवी और UGC-DAE के डायरेक्टर प्रो. कौस्तुभ प्रियोलकर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह इंदौर और भारत के लिए गौरव की बात है। इन रिसर्च के कारण सूची में आया नाम डॉ. अंजना जाजू को जल-संकट में फसलों की स्थिरता पर शोध के लिए लगातार छठे वर्ष यह सम्मान मिला है। डॉ. मुकेश शर्मा को फार्मेसी व फार्माकोलॉजी में योगदान के लिए लगातार चौथे साल वैश्विक मान्यता मिली है। डॉ. वसंत साठे ने रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिए परमाणु स्तर पर कंपनों को मापने की नई तकनीक विकसित की है इसलिए उन्हें विश्व स्तरीय मान्यता मिली है। यह मान्यता एक समग्र स्कोर पर आधारित है, जो शोध प्रभाव का मूल्यांकन साइटेशन, H-इंडेक्स, सह-लेखक मानदंडों और 170 से अधिक वैज्ञानिक उप-शाखाओं में प्रकाशन के महत्व के आधार पर करता है। डॉ. अंजलि जाजू: लगातार छह वर्षों से वैश्विक रैंकिंग में DAVV के बायलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. अंजलि जाजू ने लगातार छठे वर्ष (2020–2025) इस सूची में अपनी जगह बनाई है। इसमें उनके निरंतर योगदान और वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान में उत्कृष्टता साबित हुई है। उनका शोध पौध विज्ञान (Plant Sciences) के क्षेत्र में है, जो जलवायु-प्रतिरोधी कृषि पद्धतियों के विकास पर केंद्रित है, विशेष रूप से कम जल उपलब्धता में मक्का और गेहूं की खेती के तरीकों पर। उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक के प्रभाव और सूक्ष्म जीवों के माध्यम से उनके अपघटन पर भी महत्वपूर्ण शोध किया है, जो वर्तमान में पर्यावरणीय चिंता का एक बड़ा विषय है। डॉ. जाजू की लगातार वैश्विक उपस्थिति उनके मौलिक और अनुप्रयुक्त पौध जीवविज्ञान (Plant Biology) में बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। डॉ. मुकेशचंद्र शर्मा: लगातार चौथे साल मान्यता देवी अहिल्या विवि के स्कूल ऑफ फार्मेसी के एसोसिएट प्रो. डॉ. मुकेशचंद्र शर्मा को भी क्लिनिकल मेडिसिन, फार्मेसी और फार्माकोलॉजी के क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब डॉ. शर्मा ने यह सम्मान प्राप्त किया है। उनके शोध में Elsevier, Springer, Bentham Science और Taylor & Francis जैसी शीर्ष अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित 100 से अधिक शोध पत्र शामिल हैं। उनका काम हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर-रोधी दवाओं के विकास, जैव सामग्री (biomaterials) और कंप्यूटर से औषधि डिजाइन जैसे कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्रों को कवर करता है। उनका लगातार चयन फार्मास्युटिकल विज्ञान और अनुसंधान में उनके बढ़ते योगदान का प्रमाण है। डॉ. वसंत साठे: रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी के माध्यम से पदार्थ विज्ञान को आगे बढ़ाया UCG-DAE कंसोर्टियम फॉर साइंटिफिक रिसर्च से जुड़े डॉ. वसंत साठे को लगातार दूसरे वर्ष विश्व के शीर्ष 2% शोधकर्ताओं की सूची में शामिल किया गया है। डॉ. साठे अपने रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में अग्रणी कार्य के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक नई विधि विकसित की है, जो 10⁻¹⁵ मीटर जितने सूक्ष्म परमाणु स्तर के संरचनात्मक परिवर्तनों को मापने में सक्षम है। यह खोज सघन पदार्थ भौतिकी (Condensed Matter Physics) में जटिल पदार्थों के गुणों को समझने की दिशा में नए आयाम खोलती है। DAVV परिसर स्थित यह UGC-DAE सेंटर, यूजीसी द्वारा वित्तपोषित एक राष्ट्रीय अनुसंधान सुविधा है, जो देशभर के वैज्ञानिकों को उन्नत प्रयोगशाला संसाधन उपलब्ध कराता है। डॉ. साठे की यह उपलब्धि इस केंद्र की अत्याधुनिक प्रायोगिक अनुसंधान क्षमता को और सशक्त बनाती है। कुलपति ने की सराहना कुलपति प्रो. राकेश सिंह ने इन वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने वाली है। यह मान्यता विवि की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है। UGC-DAE के डायरेक्टर प्रो. कौस्तुभ प्रयोलकर ने इस उपलब्धि को संस्थान की अनुसंधान संस्कृति, उत्कृष्टता और समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की वैश्विक मान्यता युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित करती है कि वे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और समाज व उद्योग में सार्थक योगदान देने की दिशा में काम करें।

CM मोहन यादव बोले: बिहार में NDA आगे, पीएम मोदी की नीतियों ने जनता को उत्साहित किया

भोपाल  बिहार विधानसभा चुनाव के आ रहे नतीजों के बीच मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव का बयान सामने आया है.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के रुझान वास्तव में उत्साह वर्धन करने वाले है. यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने 2014 के बाद नए प्रकार की विकासपरक राजनीति का दौर देखा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक-एक करके तीनों लोकसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला. भाजपा ने दिल्ली में भी अपनी सरकार बनाई है. उसी सिलसिले को जारी रखते हुए तीसरी बार बिहार में फिर एनडीए सरकार की वापसी हो रही है.  सीएम ने कहा कि पूर्ववर्ती समय में हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और अब बिहार यह बता रहा है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए की लहर चल रही है. तथाकथित कांग्रेस और उनके गठबंधन के दलों की जो कुव्यवस्थाएं हैं, उन्हें देखकर जनता अपना मन चुकी है और एनडीए के साथ विकास के साथ कदम से कम मिला करके आगे बढ़ना चाहती है.  सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो रुझान आ रहे हैं वो उत्साहवर्धन भी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एक नए प्रकार की विकास परख राजनीति 2014 से देखी है। एक-एक करके तीनों लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रचंड जीत के साथ एनडीए ने दिल्ली में भी अपनी सरकार बनाई। राज्यों के चुनाव में बिहार भी उसी कड़ी में शामिल हो गया है। इसके पहले हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद अब बिहार में सामने आते परिणाम ये बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सुशासन की बयार चल रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि तथाकथित कांग्रेस के गठबंधन की जो कुव्यवस्थाएं हैं, जनता का मन उससे टूट चुका है। एनडीए के साथ कदम से कदम मिलाकर के देश के विकास और सुरक्षा के लिए पीएम मोदी ने जो नीतियां लागू की हैं। ये सभी का मनोबल बढ़ाने वाली है। बिहार में बढ़ती जीत की ओर के लिए मैं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष सहित एनडीए के सभी दलों को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि जो रुझान आ रहे उसमें भाजपा नंबर एक पर है, दूसरा हमारा सहयोगी दल जनता दल युनाइटेड है। कांग्रेस ने बिहार में आरजेडी को डुबाने का काम किया है। लोकतंत्र में जनता जो होती है उसका निर्णय सर्वोपरी होता है। जनता को निर्णय लेती है उसे शिरोधार्य करना चाहिए। सीएम इंदौर के गोपाल मंदिर में सरप्राइज विजिट पर पहुंचे सीएम ने इंदौर में कहा कि मैं खुद बिहार चुनाव में प्रचार करने के लिए गया था। कांग्रेस के सामने यह साफ हो गया है कि जमीन पर रहकर ही राजनीति करो, हवा में रहोगे, तो हवा में ही उछाल दिए जाओगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल देश के विकास बल्कि देश की सुरक्षा के लिए जो नीतियां लागू की है, वह वाकई हम सभी का मनोबल बढ़ाने वाली है. बिहार में जीत की ओर बढ़ते एनडीए गठबंधन के साथियों और प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, चिराग पासवान,जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को बधाई देना चाहता हूं. विजय होने वाले सभी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को भी बधाई.  सबसे ज्यादा सीटें जीतकर नंबर वन पार्टी बनी है BJP मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिहार चुनाव में ऐतिहासिक जीत के साथ भाजपा ने अपनी अलग पहचान बनाई है. भाजपा सबसे ज्यादा सीटें जीतकर नंबर वन पार्टी बनी है. दूसरा हमारा सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड है. जैसे हमने देखा है कि इस चुनाव में कांग्रेस ने राजद को डुबाने का काम किया है कांग्रेस के सबसे बड़े नेता ने समय से पहले ही चुनाव मैदान छोड़ दिया. उसी का परिणाम उनकी सहयोगी पार्टी को भुगतना पड़ा है. यह उनके लिए सोचने का समय है कि लोकतंत्र में जनता जो देती है, वही सही होता है और जनता के इस जनादेश को स्वीकार करते हैं. बिहार में विकास के लिए फिर एनडीए सरकार तैयार है.

इज्तिमा में डिजिटल सुविधा: क्यूआर कोड से खुलेंगे स्थल के नक्शे, भोपाल में बदलेंगे रास्ते

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में शुक्रवार को फजिर की नमाज के साथ ही 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Ijtema 2025 Tablighi Jamaat) शुरू हो गया। इस बार दुनिया का ये सबसे बड़ा आयोजन तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम लेकर आया है। ऐसा पहली बार है कि इस धार्मिक सम्मेलन में क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इससे न केवल सेवादारों को अपनी जिम्मेदारी समझने में आसानी होगी, बल्कि आयोजन स्थल की संपूर्ण जानकारी भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी। इज्तिमा के प्रवक्ता उमर हफीज कहते हैं कि पहला आधिकारिक इज्तिमा 1947 में हुआ था, इसलिए यह 79वां आलमी इज्तिमा है, लेकिन कोरोना काल में साल 2020 में यह आयोजन नहीं हो सका था, इसलिए यह 78वां आयोजन है। उमर बताते हैं विदेश से कोई जमात नहीं आती, बल्कि व्यक्तिगत रूप से लोग इस इज्तिमा में शामिल होने आते हैं। पहले उनका पुलिस वेरीफिकेशन होता है। इसके बाद ही इज्तिमा में शामिल होने की अनुमति दी जाती है। इस बार इज्तिमा का प्रबंधन पहले से ज्यादा बड़ा और व्यवस्थित है। मुख्य पंडाल 120 एकड़ में, पार्किंग 350 एकड़ में बनाई गई है और पूरा आयोजन क्षेत्र करीब 600 एकड़ में फैला है।दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई है। रेलवे स्टेशन से लेकर इज्तिमा-स्थल तक हर जगह सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।आईजी अभय सिंह ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, इसलिए सुरक्षा, ट्रैफिक और इमरजेंसी सेवाओं के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। स्कैन करते ही खुल जाएगा इज्तिमा स्थल का डिजिटल नक्शा इज्तिमा स्थल पर तीस हजार से अधिक वालेंटियर को विशेष क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र दिए गए हैं, इनमें नगर निगम के पांच हजार और 25 हजार स्वयंसेवक शामिल हैं। ये रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और इज्तिमा स्थल जाने वाले प्रमुख मार्गों पर तैनात किए गए हैं। इस कार्ड को स्कैन करते ही मोबाइल पर पूरा इज्तिमा परिसर का डिजिटल नक्शा खुल जाएगा, जिसमें यह जानकारी होगी कि कौन सी जमाअत किस क्षेत्र में ठहरी है, किस जगह जरूरी सामान, पानी या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है, सफाई या सुरक्षा से जुड़ी टीमें कहां-कहां तैनात की गई हैं। आयोजन समिति के अनुसार, यह सिस्टम भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगा और किसी भी आपात स्थिति में मदद पहुंचाने में समय की बचत होगी। इस सुविधा से लोग परेशान होने से बचेंगे और उन्हें सटीक जानकारी मिल सकेगी। 12 लाख से अधिक जायरीनों के आने की संभावना चार दिवसीय यह मजहबी आयोजन आज शुक्रवार 14 नवंबर को फज्र की नमाज के साथ शुरू हो गया है। वहीं 17 नवंबर सोमवार को सामूहिक दुआ के साथ संपन्न होगा। देशभर की जमाअतों और विदेशों से व्यक्तिगत रूप से आने वाले मुस्लिम नागरिक बड़ी संख्या में इसमें शामिल होंगे। दुआ के आखिरी दिन करीब 12 लाख जमाअतियों के आने की संभावना बताई जा रही है। रोजाना होंगी चार तकरीरें इज्तिमा में हर दिन चार तकरीरें होंगी- फज्र, जोहर, असर और मगरिब के बाद। बता दें वक्ताओं के नाम पहले से घोषित नहीं किए जाते। तकरीरों में दीनी संदेश, सामाजिक सुधार और उम्मत की बेहतरी से जुड़ी बातें रखी जाती हैं। कमेटी सदस्य डॉ. उमर हफीज़ ने बताया कि “हर तकरीर तय वक्त पर होगी और जायरीन इनसे सीधे जुड़ सकेंगे।” दिल्ली धमाके के बाद सख्त सुरक्षा दिल्ली धमाके के बाद भोपाल रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जीआरपी ने पहली बार रेंडम BD & DS (Bomb Detection and Disposal Squad) चेकिंग शुरू की है। प्लेटफॉर्म, पार्किंग एरिया और मालखानों में रोजाना दो बार तलाशी ली जा रही है। बुधवार को टीम ने 250 से 300 वाहनों की जांच की। स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर HHMD (हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर) और DFMD (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जीआरपी एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया, “इज्तिमा के दौरान रोजाना दो बार अलग-अलग जगहों पर रेंडम चेकिंग होगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।”   जीरो वेस्ट और ग्रीन थीम के साथ पर्यावरण संरक्षण भी इस बार का इज्तिमा 'जीरो वेस्ट' थीम पर आधारित है। प्रवक्ता उमर हफीज के मुताबिक प्लास्टिक और डिस्पोजल वस्तुएं आयोजन स्थल पर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। नगर निगम और ग्राम पंचायतों के सहयोग से पूरे आयोजन को 'ग्रीन एंड क्लीन इज्तिमा' बनाने की योजना है। कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ सैयद इम्तियाज अली ने बताया कि इस बार उत्पन्न होने वाला कचरा 180 मीट्रिक टन से घटाकर 120 मीट्रिक टन तक सीमित रखने का लक्ष्य है। पहली बार पंचायतें भी सहयोगी इस सम्मेलन में पहली बार इज्तिमा स्थल के आसपास की आठ ग्राम पंचायतें सफाई समेत अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर वुजू में प्रतिदिन खर्च होने वाले 90 लाख लीटर पानी को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट और गंदे पानी का ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग भी की जाएगी। आज से बदले रहेंगे ये रास्ते, यहां जाने से बचें भोपाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित ईंटखेड़ी के ग्राम घासीपुरा में 14 से 17 नवंबर तक चार दिवसीय आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आयोजन होगा। इसमें देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में धर्मावलंबी सम्मलित होंगे, जो रेलवे स्टेशन, पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यक्रम स्थल तक पहुचेंगे। अंतिम दिन सामूहिक दुआ में शहर से भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होंगे। सुबह छह बजे से पुराना शहर से इज्तिमा स्थल की ओर आवागमन करने वाले मार्गों जैसे-मुबारकपुर से पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर से अयोध्यानगर बायपास, रत्नागिरी, लाम्बाखेड़ा से करोंद भोपाल टाकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रायल मार्केट, लालघाटी चौराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन, अल्पना तिराहा, भारत टाकीज, बोगदापुल आदि क्षेत्रों में भारी संख्या में जनसमुदाय एवं वाहनों के सड़कों पर होने से अत्यधिक यातायात दबाव रहेगा। ऐसे में पुराने शहर और इज्तिमा स्थल की ओर आने-जाने के लिए आमजन को अन्य वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ेगा।