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यूपी में आंगनवाड़ी भर्ती शुरू: घर बैठे करें अप्लाई, जानें योग्यता और चयन प्रक्रिया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी के पदों पर बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने राज्यभर की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत महिला उम्मीदवारों के लिए भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इच्छुक व योग्य महिला अभ्यर्थी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाकर आवेदन कर सकती हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तय की गई है। योग्यता मानदंड आंगनवाड़ी पदों के लिए आवेदन करने वाली महिला अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से कम से कम 12वीं पास या समकक्ष शैक्षणिक योग्यता होनी आवश्यक है। उम्मीदवार की आयु 17 सितंबर 2025 के अनुसार 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वेतनमान चयनित महिला अभ्यर्थियों को विभाग की ओर से प्रतिमाह 4500 रुपये का मानदेय प्रदान किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया इच्छुक महिला उम्मीदवार नीचे बताए गए चरणों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं: 1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाएं। 2. होमपेज पर उपलब्ध ‘Latest Links’ सेक्शन में जाएं। 3. वहां पर ‘Anganwadi Worker Registration’ लिंक पर क्लिक करें। 4. मांगी गई जानकारी जैसे नाम, पिता का नाम, जिला और मोबाइल नंबर भरें। 5. अपनी शैक्षणिक योग्यता का विवरण दर्ज करें। 6. सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट अवश्य लें।   विशेष शर्तें अभ्यर्थी उसी ग्राम क्षेत्र की निवासी होनी चाहिए, जिसके लिए विज्ञापन जारी किया गया है। एक ही आंगनवाड़ी केंद्र पर एक ही परिवार की दो महिलाओं की नियुक्ति मान्य नहीं होगी। यह भर्ती प्रदेश की महिलाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जो अपने ही क्षेत्र में सेवा करते हुए समाज के विकास में योगदान देना चाहती हैं।

50 हजार से 7 करोड़ तक का सफर: यादविंदर की मशरूम खेती की सफलता कहानी

कुरुक्षेत्र  मशरूम फार्मिंग हरियाणा सहित पूरे भारत में काफी लोकप्रिय होती जा रही है। मशरूम एक पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर फफूंद  है, जिसे सब्जी और औषधि दोनों रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B, D, पोटेशियम, सेलेनियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। मशरूम में वसा और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम होता है, जिससे यह हृदय के लिए लाभकारी माना जाता है।    दुनिया भर में 10,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ ही खाने योग्य हैं, जैसे बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम और मिल्की मशरूम। भारत में मशरूम की खेती अब तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि यह कम जगह, कम समय और कम लागत में अधिक लाभ देती है। ऐसी ही एक कहानी हम आज को बता रहे हैं कि एक किसान ने कैसे मशरूम के बारे में नए आयाम स्थापित किए हैं।   8वीं पास किसान ने 50000 से शुरू की मशरूम फार्मिंग  अगर मशरूम की खेती में किसान थोड़ी मेहनत करें तो वह इसमें अच्छा मुनाफा ले सकता है और यह एक ऐसी खेती है जो सर्दियों के समय में की जा लेकिन 12 महीने इसका प्रयोग किया जाता है। मशरूम की खेती में मेहनत करके किसान अपनी नई कहानी लिखकर हजारों लाखों लोगों को प्रेषित कर रहे हैं। ऐसी ही एक किसान यादविंदर सिंह हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के गांव तल्हेरी की संघर्ष भरी कहानी है जिन्होंने मशरूम की खेती में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यादविंदर केवल आठवीं पास है लेकिन उन्होंने 2014 में अपने बंद पड़े पोल्ट्री फार्म में 50000 पर लगाकर मशरूम फार्मिंग शुरू की थी लेकिन अब उनका सालाना टर्नओवर  साढ़े 7 करोड़ का है। ₹3200 महीना दूसरे मशरूम फार्म पर करते थे नौकरी  यादविंदर सिंह ने कहा कि 2008 में उन्होंने अपने ही गांव में एक मशरूम फार्म पर नौकरी करना शुरू की थी और उनकी तनख्वाह ₹3200 रुपए प्रति महीना थी। वहां पर काम करते-करते मशरूम फार्मिंग में वह इतना एक्सपर्ट हो गए कि वह एक छोटे से कर्मचारियों से सुपरवाइजर के पद पर पहुंच गए लेकिन फिर उन्होंने अपना खुद का काम शुरू करने की सोची और 2014 में उन्होंने 50000 रुपए लगाकर मशरूम फार्मिंग शुरू की। वह साथ में नौकरी भी करते थे और अपनी मशरूम फार्मिंग भी संभाल रहे थे। किसी दूसरे फार्म पर ₹3200 प्रति महीना नौकरी करना और फिर अपना काम नौकरी के साथ शुरू करना और उसको 7 करोड रुपए टर्नओवर तक लेकर जाना यादविंदर के लिए काफी चुनौती भरा रहा है।  2016 में नौकरी छोड़ अपने काम का किया विस्तार उन्होंने बताया कि 2016 में उन्होंने मशरूम फार्मिंग शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी हालांकि पहले वह 2014 से छोटे लेवल पर मशरूम फार्मिंग कर रहे थे लेकिन फिर उन्होंने अपना ही काम आगे बढ़ाने की सोची और फिर 2016 के बाद से ही उनका एक सफर शुरू हुआ जहां उन्होंने कड़ी मेहनत करके अपने मशरूम फार्मिंग के काम को करोड़ों रुपए के टर्नओवर तक पहुंचाने का काम किया।  डोंकी से जाना चाहते थे विदेश लेकिन नहीं पहुंच पाए  उन्होंने बताया था कि एक समय वह भी था जब 2006 में वह काम की तलाश में अपना देश छोड़ने को मजबूर हो गए और विदेश में डोंकी से जाने की सोची, वह कोरिया जाना चाहते थे लेकिन डोंकी से बीच रास्ते काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा जिसके चलते वह बीच रास्ते से ही वापस अपने वतन लौट आए। आज यादविंदर काफी खुश है कि अगर वह विदेश में भी होते तो इतना पैसा नहीं कमा पाते वहां भी वह मेहनत करते लेकिन फिर भी कभी इतने अमीर नहीं बन पाए और उनका भारत आने का फैसला उनके लिए काफी अच्छा साबित हुआ उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से मशरूम फार्मिंग में अपना पूरे भारत में नाम किया है।  15 एकड़ में कर रहे मशरूम फार्मिंग  उन्होंने बताया कि वह मशरूम का कंपोस्ट बनाने का काम करते हैं और साथ में मशरूम फार्मिंग करते हैं मशरूम का कंपोस्ट बनाने के लिए जो पक्का प्लांट है वह तीन एकड़ में बना हुआ है जबकि 12 से 15 एकड़ में वह मशरूम की खेती कर रहे हैं यह खेती शेड बनाकर की जा रही है। उन्होंने बताया कि वह 90 फीट वाले साइड बनाते हैं जिसमें करीब ढाई लाख रुपया खर्च आता है और एक साइड से मशरूम का उत्पादन होता है जिसमें मेहनत और मौसम के हिसाब से एक से ₹200000 आसानी से एक सेड से बचत हो जाती है। Usa से मंगवाया मशरूम का बीज तैयार करने वाला कल्चर  उन्होंने बताया कि वह अपने काम को और आगे लेकर जाना चाहते थे जिसके लिए वह ऊंच गुणवत्ता का मशरूम का बीज तैयार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक मशरूम उत्पादक किसान से संपर्क किया जिन्होंने उनका usa से मशरूम का बीज तैयार करने वाला कलर मुहैया करवाया। अब वह मशरूम का बीज usa के कलर के साथ उच्च गुणवत्ता का तैयार कर रहे हैं। उनका हर रोज करीब 3 टन कंपोस्ट फार्म से निकलता है जो किसानों तक पहुंचता है। दूसरे राज्यों में मशरूम होती है सप्लाई  उन्होंने बताया कि जो मशरूम का कंपोस्ट और बीज तैयार करते हैं वह उनका हरियाणा में ही बिक जाता है काफी डिमांड उसकी रहती है जो मुश्किल से पूरी होती है लेकिन जो उनकी मशरूम होती है वह दूसरे राज्यों में जैसे दिल्ली पंजाब उत्तर प्रदेश जम्मू कश्मीर जैसे आसपास के राज्यों में सप्लाई होती है हालांकि शुरुआती समय में जब उन्होंने फॉर्म की शुरुआत की थी तब उनको मशरूम सेल करने में थोड़ी समस्या होती थी लेकिन अब उनके पास दूसरे राज्यों से आर्डर आते हैं और वह उनको दूसरे राज्यों में ऑर्डर के आधार पर सप्लाई करते हैं। 

ध्यान दें! जालंधर का यह रेलवे फाटक सोमवार तक रहेगा बंद, ट्रैफिक डायवर्ट

अलावलपुर  अलावलपुर-किशनगढ़ मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक नंबर सी-22 सोमवार शाम तक बंद रहेगा। रेलवे विभाग ने कल दोपहर 11.30 बजे बिना किसी सूचना के इस मार्ग को बंद कर दिया। सोमवार तक बिना किसी सूचना के पूरे क्षेत्र में रेलवे फाटक अचानक बंद होने से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। वाहन चालकों को अलावलपुर से ब्यास पिंड जाने वाले लिंक रोड का इस्तेमाल करना पड़ा। जालंधर जाने वालों को अलावलपुर-सिकंदरपुर, धोगरी होते हुए जाना पड़ा। छात्रों और काम पर जाने वाले लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। लोगो ने बताया कि दशहरा ग्राउंड चौक पर कर्मचारी तैनात थे, लेकिन कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। किशनगढ़ और करतारपुर जाने वाले वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि जालंधर-जम्मू रेलवे लाइन के डाउन ट्रैक पर नई पटरी बिछाने का काम चल रहा है। इसी के चलते फाटक बंद करना पड़ा। अगर विभाग को जरूरी काम के लिए फाटक बंद करना ही था तो उसे पहले सूचित करना चाहिए था। रेलवे विभाग रात में भी रेल लाइन बिछाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि काम पूरा होने के बाद सोमवार तक रेलवे फाटक खोल दिया जाएगा। लोगों की सुविधा के लिए अलावलपुर के दशहरा ग्राऊंड चौक पर कर्मचारियों को तैनात किया गया है ताकि लोगों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। 

26 करोड़ की लागत से हरियाणा को मिलेंगे 30 आयुष्मान हेल्थ सेंटर, ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों को बड़ा फायदा

चंडीगढ़ हरियाणा के गुरुग्राम में 30 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनेंगे। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के निर्माण पर 26.20 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी सभी सिविल अस्पतालों के लिए 4.64 करोड़ रुपए की लागत से 87 डिफाइब्रिलेटर, 1.01 करोड़ की लागत से 40 मोबाइल एक्स-रे मशीनें, 4 करोड़ की लागत से 11 वीडियो ब्रोंकोस्कोप, और 7.19 करोड़ रुपए की लागत से जीआई वीडियो एंडोस्कोपी सिस्टम की खरीद को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय गत दिवस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती राव की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों के साथ हुई एसएचपीपीएच बैठक में लिए गए। समिति ने हिस्टोपैथोलॉजी विभागों के लिए 1.60 करोड़ रुपए में 9 स्वचालित स्लाइड स्टेनर, दंत विभागों के लिए 2.20 करोड़ में 4 मोबाइल डेंटल वैन की मंजूरी दी। लैब विभागों के लिए 1.47 करोड़ में 70 एबीजी बेंचटॉप मशीनें, नेत्र विभागों के लिए 3.94 करोड़ में 15 हाई-एंड आॅपरेटिंग माइक्रोस्कोप (आंख) और टीबी रोगियों के परीक्षण हेतु 6 करोड़ की लागत से 40 ट्रूनेट मशीनें खरीदने की भी स्वीकृति दी। जीवनरक्षक दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 60 करोड़ रुपए की 44 आवश्यक दवाओं को भी दो वर्ष की अवधि के दर एग्रीमेंट के तहत मंजूरी प्रदान की गई।   बैठक में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि इन स्वीकृतियों से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल सुधार होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों और तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों तक मरीजों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।  

उपज बढ़ाने के लिए बीजशोधन अनिवार्य: रबी फसलों की तैयारी पर जोर

औरैया जिला कृषि रक्षा अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने किसानों को रबी की फसलों में शत-प्रतिशत बीजशोधन करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रतिवर्ष फसलों को खरपतवारों, रोगों, कीटों और चूहों से 15 से 20 प्रतिशत तक नुकसान होता है। इनमें रोगों से होने वाली क्षति सबसे अधिक होती है। बीज व भूमि जनित रोगों से बचाव हेतु बीजशोधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “बीज शोधन” से फसलें रोगों से सुरक्षित रहती हैं और कम लागत में अधिक पैदावार संभव होती है, जिससे किसान की आय में वृद्धि होती है। बीजशोधन न करने पर फफूंद और जीवाणु जनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, जो फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। अधिकारी ने बताया कि आलू की फसल में जीवाणु झुलसा और जीवाणुधारी रोग से बचाव के लिए स्ट्रेप्टोमायसीन सल्फेट 90% + टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10% की 4 ग्राम मात्रा प्रति 25 किग्रा बीज के हिसाब से 10 लीटर पानी में मिलाकर रात भर भिगोकर अगले दिन छाया में सुखाकर बोना चाहिए। वहीं गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों/राई और मसूर के बीजों को कार्बेन्डाजिम (50% डब्लूपी) 2 ग्राम या थीरम (75% डब्लूएस) 2.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से शोधन करना उपयोगी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसान ट्राइकोडर्मा का प्रयोग 4 ग्राम प्रति किग्रा बीज के हिसाब से कर सकते हैं। भूमि जनित रोगों से बचाव के लिए 2.5 किग्रा ट्राइकोडर्मा (2% डब्लूपी) तथा ब्यूबैरिया बेसियाना (1% डब्लूपी) को 65–70 किग्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर 10–12 दिन छाया में रखकर अंतिम जुताई के समय खेत में प्रयोग करें। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न कृषि रक्षा रसायन विकासखंड स्तर की कृषि रक्षा इकाइयों पर 50 से 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं। किसान अपनी फसलों में कीट या रोग संबंधी समस्या का समाधान पाने के लिए फोटो सहित अपना नाम, ग्राम, विकासखंड एवं पंजीकरण नंबर लिखते हुए मोबाइल नंबर 9452247111 या 9452257111 पर एसएमएस या व्हाट्सएप भेज सकते हैं। विभाग द्वारा 48 घंटे के भीतर समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।  

15 नवंबर झारखंड स्थापना दिवस: रांची नगर निगम ने की तैयारियों में झोंकी ताकत

रांची झारखंड राज्य के 25 वें स्थापना दिवस के सफल व भव्य आयोजन को लेकर रांची नगर निगम ने पूरी तत्परता से जुटा है। वर्ष 2000 में झारखंड के गठन की परिणति को यादगार बनाने के लिए 15 और 16 नवम्बर को मोरहाबादी मैदान में भव्य स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अपर प्रशासक संजय कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक की गई। बैठक में अपर प्रशासक ने कहा कि कार्यक्रम की प्रत्येक गतिविधि समय से पूरी हो और किसी प्रकार की असुविधा आमजन को न हो। उन्होंने साफ-सफाई, पथ बत्ती, अतिक्रमण मुक्त पथ, पेयजल, पाकिर्ंग, रंग रोगन, पेड़ो की छंटाई, चलंत शौचालय सहित अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उप प्रशासक रविंद्र कुमार, गौतम प्रसाद साहू सहित निगम के कई पदाधिकारी और साफ-सफाई कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि इस बैठक में मौजूद रहे। राज्य स्थापना दिवस से पहले कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 11 नवंबर को‘रन फॉर झारखंड' के जरिए खेल और स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा। 12 नवंबर को रांची के प्रमुख स्थलों पर झारखंड की सांस्कृतिक नृत्यों का आयोजन होगा। मोरहाबादी मैदान में होगा मुख्य आयोजन अपर प्रशासक ने कहा कि 13 नवंबर को 'नो योर टूरिस्ट प्लेस' कार्यक्रम के तहत पर्यटक स्थलों के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। 14 नवंबर को वॉल पेंटिंग के जरिए लोगों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्य आयोजन 15 और 16 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में होगा, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और झारखंड की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस तरह के आयोजन न सिर्फ राज्य के गौरव को बढ़ाएंगे बल्कि लोगों में एकता व भाईचारे की भावना भी उत्साहित करेंगे। नगर निगम ने सुनिश्चित किया है कि सभी व्यवस्थाएं उच्च गुणवत्ता की हो और आमजन के लिए स्वच्छ, संरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण माहौल तैयार किया जाए। झारखंड वासियों को इस बार का स्थापना दिवस उत्साह व उमंग से मनाने का अवसर मिलेगा। बता दें कि झारखंड अपना स्थापना दिवस 15 नवंबर को मनाता है, क्योंकि इसी दिन साल 2000 में बिहार से अलग होकर यह भारत का 28वां राज्य बना था। यह दिन बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया  

मंगलवार को पंजाब बंद! जानें किन संस्थानों पर रहेगा अवकाश

पंजाब पंजाब में एक बार फिर सरकारी छुट्टी का ऐलान किया गया है। जानकारी के अनुसार 11 नवंबर यानि की मंगलवार को स्कूल, कॉलेज और दफ्तर बंद रहेंगे।  बता दें कि उपचुनाव के चलते तरनतारन में छुट्टी का ऐलान किया गया है। इस संबंध में तरनतारन के डी.सी. ने आदेश जारी किए हैं। गौतरलब है कि तरनतारन में 11 नवंबर को उपचुनाव को लेकर वोटिंग है और 14 नवंबर के नतीजों का ऐलान किया जाएगा।     

ई-बस सेवा: नए बस स्टॉप शहीदों के नाम पर, मध्यप्रदेश में तेजी से शुरू होगा इलेक्ट्रिक बस संचालन

भोपाल  राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत 195 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। इसके लिए कस्तूरबा नगर और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में अत्याधुनिक बस डिपो का निर्माण अंतिम चरण में है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) को पहले चरण में 100 बसें मिली हैं, जबकि आरएसवीपी योजना के तहत 95 अतिरिक्त बसों की भी स्वीकृति मिल चुकी है। इस तरह शहर के बेड़े में जल्द ही कुल 195 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। महापौर मालती राय ने दिए निर्देश महापौर ने डिपो स्थलों का निरीक्षण किया और कार्यों को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने डिपो पर सोलर पैनल लगाने और सभी बस स्टॉप पर उच्च स्तरीय साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। दोनों डिपो में बसों की पार्किंग, चार्जिंग और संधारण की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। 50-50 बसों के लिए दोनों स्थलों पर डिपो बन रहे हैं। लोककला से सजेंगे बस स्टॉप ● डिपो स्थल: कस्तूरबा नगर (आइएसबीटी) और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़)। ● मॉडल: जीसीसी (ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट) मॉडल पर संचालन। ● नामकरण: नए बस स्टॉप शहीदों के नाम पर होंगे। ● आर्ट वर्क: बस स्पॉट में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण के साथ लोककला भी दिखेगी।

एमपी में बरेली तहसील को नया जिला बनाने की पुर्नविचार रिपोर्ट दिसंबर में पेश होगी

बरेली मध्यप्रदेश में एक और नया जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग फिर से उठी है। दरअसल रायसेन जिले की बरेली तहसील को जिला बनाने की दो दशक पुरानी उम्मीद क्षेत्रीय विधायक को राज्य मंत्री मंडल में स्थान मिलने से बढ़ गई है। यह उम्मीद छह माह पहले प्रशानिक इकाई पुनर्गठन आयोग के गठन के साथ बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार पुनर्गठन आयोग माह दिसंबर में अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगा। जिसमें बरेली को जिला बनाने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। बरेली को जिला बनाने की मांग जिला मुख्यालय रायसेन से बरेली और उदयपुरा क्षेत्र की दूरी को देखते हुए लोग बरेली को जिला बनाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। देवरी क्षेत्र की सीमा जिला मुख्यालय से 180 किमी दूर है। भोपाल रियासत के वर्ष 1949 में भारत संघ में विलय के बाद 1950 में भोपाल राज्य में नबाब की शर्त के कारण राजधानी भोपाल से मात्र 45 किलोमीटर दूर रायसेन को जिला बनाया गया था। 1956 में गठित अविभाजित मध्यप्रदेश में भी रायसेन को जिला बनाए रखा गया। नबाबी दौर में प्रशासन का प्रमुख केंद्र रहे, रायसेन का ना तो नाम बदला गया ना ही विभाजित कर अन्य जिला बनाया गया। प्रदेश सरकार और मंत्री नबाबी दौर की यादों को भुलाने और नष्ट करने की बात कर रहे हैं, ऐसे में क्षेत्र के लोग नबाबी दौर में अपनी जान न्यौछावर कर भोपाल रियासत को प्रदेश में विलय कराने में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों की याद में बरेली को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। जो उन शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 200 किमी. के दायरे में फैला है रायसेन जिला लोगों का कहना है कि बरेली में एडीजे कोर्ट बनाकर जिले को दो भागों में बांटा गया है। रायसेन जिला दो सौ किलोमीटर के दायरे में फैले होने के कारण लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय नहीं मिल रहा था। इसलिए उच्च न्यायालय ने बरेली में एडीजे कोर्ट स्थापित कर जिले में न्याय व्यवस्था को रायसेन और बरेली दो भागों में बांटा। जब न्याययिक संस्थाएं सुलभ और सस्ते न्याय के लिए दो भागों में बांट सकते हैं तो सुलभ और चुस्त प्रशासन के लिए बरेली को जिला भी बनाया जा सकता है। जो भौगोलिक राजनीतिक, प्रशासनिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक दृष्टि से भी उपयुक्त है।

ऑनलाइन प्रतियोगिता में इस वर्ष 70 पुरस्कार, महोत्सव में 1 दिसम्बर को गतिविधियां होंगी

श्रीमद भगवद गीता ज्ञान प्रतियोगिता में अधिक से अधिक हिस्सेदारी हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऑनलाइन प्रतियोगिता में इस वर्ष 70 पुरस्कार, महोत्सव में 1 दिसम्बर को गतिविधियां होंगी गीता जयंती पर प्रदेश में श्रीमद् भगवद् गीता का होगा सस्वर पाठ: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गीता जयंती, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के गरिमापूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जाएं। ऑनलाइन श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता में अधिकाधिक भागीदारी के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके लिए संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता मध्यप्रदेश के 70 वें स्थापना वर्ष में इस स्पर्धा में 70 पुरस्कारों का प्रावधान गीता ज्ञान स्पर्धा में किया गया है। पुरस्कार में प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार 51 हजार रूपए का रहेगा। इसके साथ ही 31 हजार रूपए के तीन तृतीय पुरस्कारों सहित 15 लैपटाप, 30 ई-बाइक और 20 ई-रिक्शा का वितरण भी किया जाएगा। श्रेष्ठ ज्ञान स्तर के लिए प्रतियोगिता में 11 से 25 वर्ष आयु के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप 2 वर्ष तक शिक्षावृत्ति देने का प्रावधान भी किया गया है। प्रतियोगिता में नागरिकों, विद्यार्थियों के साथ ही प्रतियोगिता में कारावास के बंदी भी हिस्सा ले सकेंगे। यह ऑनलाइन प्रतियोगिता प्रदेश भर में शिक्षण संस्थानों के सहयोग से आयोजित की जा रही है। कुरूक्षेत्र में मध्यप्रदेश की कला होगी प्रदर्शित, व्यंजनों के स्टॉल सजेंगे 24 नवंबर से 1 दिसंबर की अवधि में कुरुक्षेत्र में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में मध्यप्रदेश के आंचलिक और जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की ओर से प्रदर्शनी, मेले और नाट्य समारोह के आयोजन होंगे। नाट्य समारोह में श्री पुनीत इस्सर और श्री मोहित शेवानी मुंबई, श्री शिरीष राजपुरोहित उज्जैन के कार्यक्रम होंगे। जनजातीय संग्रहालय के सौजन्य से जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति भी होगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, वीर भारत न्यास सहित उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, गृह, जनसंपर्क, संस्कृति संचालनालय, कृषि उद्योग विकास परिषद नई दिल्ली, इस्कॉन, गीता परिवार और विश्व गीता प्रतिष्ठानम की भागीदारी के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरों में गीता भवन और विभिन्न चिन्हित स्थानों पर श्रीकृष्ण पाथेय से संबंधित कार्यों को भी पूर्ण करने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग और रोजगार वर्ष 2025 के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के साथ स्कूल विद्यार्थियों को जोड़कर एक अभिनव कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उज्जैन में 1 से 3 दिसंबर तक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव गीता महोत्सव में ऑनलाइन श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान प्रतियोगिता के पुरस्कृत प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता में 21 लाख नागरिकों की विशाल भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 दिसम्बर को दशहरा मैदान उज्जैन में गीता पाठ और प्रदर्शनी सहित सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन काव्य पाठ और सांगीतिक प्रस्तुति और तीसरे दिन बैंगलोर एवं भोपाल के संगीत दल प्रस्तुति देंगे। श्रीमद् भगवद् गीता का सस्वर पाठ भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत 1 दिसम्बर को लाल परेड ग्राउण्ड पर आचार्यों की सन्निधि में श्रीमद् भगवद् गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ होगा। इसके साथ ही गौ और गोपाल पर आधारित प्रदर्शनी और बैंगलोर के दल द्वारा गीता ऑन व्हील्स सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दो दिसम्बर को रवीन्द्र भवन भोपाल के हंसध्वनि सभागार में कृष्णायन की प्रस्तुति के साथ दिव्यांग कलाकार भी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। जिला स्तर पर कार्यक्रमों का स्वरूप 1 दिसम्बर को प्रदेश के विकासखंडों में गीता पाठ होंगे। जिला मुख्यालय पर भी आचार्यों की सन्निधि में सस्वर पाठ होंगे। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े विशेष स्थलों जैसे इंदौर जिले के जानापाव, धार जिले के अमझेरा, उज्जैन जिले के नारायणा, अशोकनगर जिले के चंदेरी, रायसेन जिले के जामगढ़, देवास जिले के पीवडिया-खातेगांव, सागर जिले के प्राचीन नगर एरण और पन्ना जिले में भी विशेष कार्यक्रम होंगे। गीता जयंती पर श्रीकृष्ण मंदिरों की विशेष सज्जा की जाएगी। जिला स्तर पर संतों और विद्वतजनों के व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे। संस्कृति विभाग द्वारा इन सभी कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही है।