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छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र

 छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य स्टाल  छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य प्रदर्शन, मिली लोगों की बड़ी प्रतिक्रिया रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मेला स्थल में आयोजित भव्य राज्योत्सव 2025 के दौरान जिंदल स्टील ने एक आकर्षक और जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाया, जिसने वहां आने वाले लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचा । जिंदल स्टील के इस स्टॉल में कंपनी के विभिन्न उत्पादों, आधुनिक तकनीक, मशीनरी डिवीजन के उन्नत उपकरणों एवं CSR गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही, कंपनी द्वारा पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल में जिंदल स्टील के स्टील, स्ट्रक्चरल्स, रेल्स, प्लेट्स, मशीनरी पार्ट्स इत्यादि उत्पादों की जानकारी के साथ-साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को भी दर्शाया गया। इसके अलावा, कंपनी के CSR  कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की झलक भी दिखी. राज्योत्सव के दौरान बड़ी संख्या में आये लोग  एवं उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं सरकारी अधिकारियों ने स्टॉल का भ्रमण किया और जिंदल स्टील के नवाचार एवं उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्टॉल न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि छत्तीसगढ़ में जिंदल स्टील की 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा और योगदान को गर्व के साथ प्रदर्शित भी करता है। जिंदल स्टील के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी आगे भी छत्तीसगढ़ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान जारी रखेगी और “विकसित छत्तीसगढ़, मजबूत भारत” के विज़न को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

दहेज न मिलने पर इंदौर में पत्नी को दिया तीन तलाक, पति ने करवाई जबरन हलाला, फिर भी नहीं रखा साथ

इंदौर  इंदौर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां दहेज की मांग पूरी न होने पर पति ने पत्नी को तीन तलाक दे दिया और फिर जबरन हलाला करवाया. इसके बाद भी आरोपी पति ने महिला को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया. पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पति और सास को हिरासत में ले लिया गया. खजराना थाना क्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीय फरहाना खान की शादी साल 2010 में वसीम पठान से हुई थी. फरहाना ने बताया कि शादी के बाद से ही पति वसीम और सास गुड्डो बी दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान करते थे. उनका कहना था कि परिवार चलाने के लिए मायके से पैसे लाकर दो. तीन बच्चे होने के बाद दबाव और बढ़ गया. दहेज की मांग पूरी ना होने पर तीन तलाक  फरहाना के अनुसार अक्टूबर 2024 में वसीम ने मारपीट कर उसे तीन बार तलाक कहा और घर से निकाल दिया. उसने दो बच्चों को अपने पास रख लिया और एक बच्चा फरहाना के साथ रह गया. महिला ने परिवार के माध्यम से सुलह की कोशिश की, तब वसीम ने कहा कि मुस्लिम धर्म के अनुसार हलाला करना होगा. पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया  दिसंबर 2024 में वसीम ने रिश्तेदार सईद के साथ फरहाना का हलाला करवाया. इसके लिए 500 रुपये के स्टाम्प पर कागज तैयार किए गए. हलाला पूरा होने के बाद भी वसीम ने साथ रखने से साफ इंकार कर दिया. मजबूर होकर महिला ने सोमवार को खजराना थाने में शिकायत दर्ज कराई. थाना प्रभारी के अनुसार मुस्लिम विवाह संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है.

जबलपुर से सिहोरा की 2 दिन की बच्ची एयर एंबुलेंस से जाएगी मुंबई, बाल हृदय योजना के तहत इलाज

जबलपुर जबलपुर से दो दिन की बच्ची को एयर एंबुलेंस से मुंबई ले जाया जा रहा है. बच्ची के दिल में छेद है और उसका इलाज मुंबई के नारायण अस्पताल में होगा. बच्ची को मुंबई तक पहुंचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों ने बुधवार को छुट्टी के दिन भी कागजी तैयारी पूरी की. गुरुवार को दोपहर 12:00 बजे बच्ची जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना हुई . बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन सरकार की बाल हृदय योजना के तहत उसे यह सुविधा दी जा रही है. दो दिन पहले जन्में जुड़वा बच्चे, 1 के दिल में छेद सिहोरा के रहने वाले सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया को जबलपुर के एक निजी अस्पताल में 2 दिन पहले जुड़वा बच्चे हुए थे. जब बच्चे हुए तब तक सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन कुछ ही देर में जब बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तो पता लगा कि इनमें से एक बच्ची के दिल में छेद है. इस बात की जानकारी तुरंत सरकारी अस्पताल को भी पहुंचा दी गई. बाल हृदय योजना के तहत होगा इलाज मध्य प्रदेश सरकार की बाल हृदय योजना के तहत जिन बच्चों के दिल में छेद होता है, उनका इलाज राज्य सरकार करवाती है. इसके लिए राज्य सरकार ऐसे बच्चों के इलाज के साथ उनके परिवहन की व्यवस्था भी करती है. लेकिन गुरु नानक जयंती की वजह से बुधवार को अवकाश था, ऐसी स्थिति में सरकार ने एक टीम बनाई है जो छुट्टी के दिन भी आपात स्थिति में लोगों की मदद करे. इस टीम ने एक बार फिर तत्परता से काम किया और सत्येंद्र दहिया और शशि दहिया के 2 दिन की बेटी को मुंबई ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई. मुंबई पहुंचते ही शुरु हो जाएगा इलाज स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह एयर एंबुलेंस गुरुवार दोपहर 12:00 बजे जबलपुर से मुंबई के लिए रवाना होगी. इसके लिए पेपर वर्क पूरा कर लिया गया है और जैसे ही बच्ची मुंबई पहुंचेगी तुरंत उसका इलाज भी शुरु हो जाएगा. सत्येंद्र दहिया एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं और उनके लिए यह इलाज संभव नहीं था. सरकार की योजना की वजह से अब सत्येंद्र की बच्ची को जीवन भर कष्ट नहीं भोगना होगा.'' वहीं, डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि, ''यह पहला मौका है जब 2 दिन की बच्ची के लिए सरकार एयर एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने जा रही है.'' सत्येंद्र को जिस तत्परता से मदद मिली, उसकी जरूरत हर उस आदमी को है जो सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए जा रहा है. क्योंकि सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने वहीं पहुंचता है जिसके पास निजी अस्पतालों में इलाज करवाने का पैसा नहीं है. स्वास्थ्य विभाग में जो कोशिश सत्येंद्र की बच्ची के लिए की है इस तरह की कोशिश यदि हर आम आदमी के लिए हो जाए तो सच में राम राज्य की कल्पना साकार हो जाएगी.

UP को मिली नई वंदे भारत एक्सप्रेस: लखनऊ से सहारनपुर तक सफर होगा और तेज, जारी हुआ पूरा शेड्यूल

मुरादाबाद आठ नवंबर को हाइ स्पीड ट्रेन लखनऊ से सहारनपुर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का शुभारंभ हो रहा है। इसको लेकर बुधवार को डीआरएम कार्यालय में तैयारियां तेज हो गई हैं। अवकाश के दिन भी अधिकारी प्लेटफार्म, स्वागत मंच, अतिथियों की सूची, सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा और सुरक्षा प्रबंधों पर अहम चर्चा हुई। सांसद रुचि वीरा व क्षेत्रीय विधायकगण को आमंत्रित किया गया है।लखनऊ में उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली हिस्सा लेंगे। यह ट्रेन लखनऊ से सुबह 5 बजे रवाना होगी और मुरादाबाद में सुबह 9:27 बजे प्रवेश करेगी, इसके बाद दोपहर 12:45 बजे सहारनपुर पहुंचेगी। लखनऊ से मुरादाबाद तक का मार्ग लगभग 325 किमी है। इस ट्रैक पर वंदे भारत ट्रेन को मुरादाबाद तक पहुंचने में लगभग 4 घंटे 37 मिनट का समय लगेगा। इस वजह से सामान्य ट्रेनों की तुलना में मुरादाबाद तक पहुंचने में करीब एक घंटे की बचत होगी। यह ट्रेन सप्ताह में सोमवार को छोड़कर छह दिन चलेगी और इसमें कुल सात स्टेशन पर ठहराव होगा। लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर,बरेली, मुरादाबाद,नजीबाबाद, रुड़की, सहारनपुर। सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता का कहना है कि लखनऊ से मुरादाबाद आगमन पर आठ नवंबर को वंदे भारत एक्सप्रेस का स्वागत किया जाएगा। इसकी तैयारियां तेजी पर हैं। जिम्मेदारियों सौंप दी गई हैं।  लखनऊ से सहारनपुर के बीच समय सारिणी लखनऊ (प्रस्थान) सुबह 05:00 बजे सीतापुर सुबह 05:55 बजे शाहजहाँपुर जंक्शन सुबह 07:10 बजे बरेली जंक्शन सुबह 08:08 बजे मुरादाबाद जंक्शन सुबह 09:27 बजे नजीबाबाद जंक्शन सुबह 10:45 बजे रुड़की दोपहर 11:40 बजे सहारनपुर (अंतिम) दोपहर 12:45 बजे वापसी रूट सहारनपुर से 15:00 बजे रवाना, रुड़की 15:35, नजीबाबाद 16:40, मुरादाबाद 18:10, बरेली 19:33, शाहजहाँपुर 20:38, सीतापुर 21:50, लखनऊ 23:00।   मंडल को मिली चौथी वंदेभारत एक्सप्रेस मुरादाबाद रेल मंडल को चौथी वंदेभारत एक्सप्रेस मिली है। मेरठ से वाराणसी, देहरादून से लखनऊ, दिल्ली से देहरादून अब चौथी लखनऊ से मुरादाबाद होकर सहारनपुर के लिए वंदेभारत एक्सप्रेस मिली है।  

यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल डेका

रायपुर : लखपति दीदी महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि की मिसाल – उपराष्ट्रपति  राधाकृष्णन यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल  डेका राजनांदगांव में लखपति दीदी सम्मेलन में शामिल हुए उपराष्ट्रपति राज्यपाल और मुख्यमंत्री रायपुर राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित लखपति दीदी सम्मेलन में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महतारी वंदन योजना और नियद नेल्लानार योजना के तहत 69 लाख 15 हजार 273 हितग्राहियों को कुल 647 करोड़ 28 लाख 36 हजार 500 रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने कहा कि लखपति दीदी आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक हैं। यह केवल आय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके बढ़ते प्रभाव का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिला महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन चुका है, जहां महिलाएं आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अग्रसर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ आज बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लखपति दीदी आंदोलन दिखाता है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो परिवर्तन की गाथाएं स्वयं लिखती हैं। अपने संबोधन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की जीवंत तस्वीर है। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, संकल्प और आत्मबल से कैसे समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज हर जिले में महिलाएं स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। बलरामपुर में महिलाएं बाड़ी विकास और विपणन में, बस्तर में वनोपज से जैविक उत्पाद तैयार करने में, और कोण्डागांव में फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। राजनांदगांव जिले में ही लगभग 40 हजार लखपति दीदियां बनी हैं, जिनमें से 208 दीदियां सालाना 5 लाख रुपए से अधिक और 26 दीदियां 10 लाख रुपए से अधिक का व्यवसाय कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर दीदी की कहानी प्रेरणा है। जब संकल्प और सामूहिक प्रयास जुड़ते हैं, तो आत्मनिर्भरता केवल सपना नहीं रहती, वह हकीकत बन जाती है। राज्यपाल ने पद्मश्री फूलबासन बाई यादव जैसी महिलाओं के कार्यों को आदर्श बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से नारी सशक्तिकरण का मार्ग और सशक्त हुआ है।  राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए देशभर में अनेक योजनाएं चल रही हैं, और छत्तीसगढ़ ने उन्हें ज़मीन पर उतारकर एक “सशक्त भारत, सशक्त छत्तीसगढ़” की मिसाल पेश की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 7 लाख 82 हजार लखपति दीदी बनाने का है, जिनमें से अब तक 4 लाख 93 हजार दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन नारी शक्ति की पहचान और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले ने विकास की दिशा में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं  चाहे वह पीएम आवास निर्माण हो, जल संरक्षण या कुपोषण उन्मूलन का अभियान। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने हेतु पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के योगदान की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष योगेशदत्त मिश्रा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला स्वसहायता समूह की दीदियां उपस्थित थीं।

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव-2025 : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 37 विभूतियों और 4 संस्थाओं को अलंकरण से किया सम्मानित

रायपुर : छत्तीसगढ रजत महोत्सव-2025 : उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को किया सम्मानित रायपुर उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के राज्य अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय अलंकरण समारोह के अति विशिष्ट अतिथि तथा विशिष्टि अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित थे। राज्य अलंकरण समारोह में उप राष्ट्रपति  राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री  साय ने शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार  हिरेश सिन्हा जिला कांकेर को प्रदान किया। यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर सोठी जिला जांजगीर-चांपा, गुण्डाधूर सम्मान सु ज्ञानेश्वरी यादव राजनांदगांव, मिनीमाता सम्मान मती ललेश्वरी साहू दुर्ग, गुरूघासीदास सम्मान संयुक्त रूप से  भुवनदास जांगड़े बेमेतरा एवं  शशि गायकवाड़ बलौदाबाजार-भाटापारा,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति डोमा जिला धमतरी, हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा जिला रायपुर, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान सु चांदनी साहू जिला बिलासपुर को प्रदान किया गया।  इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान  राजेश अग्रवाल जिला रायपुर, पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान डॉ. चिंतरंजन कर जिला रायपुर, चक्रधर सम्मान पंडित कीर्ति माधव लाल व्यास जिला दुर्ग, दाऊ मंदराजी सम्मान  रिखी क्षत्रिय जिला दुर्ग, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार संयुक्त रूप से  थनेन्द्र कुमार साहू जिला धमतरी एवं  वामन कुमार टिकरिहा जिला बलौदाबाजार, महाराजा अग्रसेन सम्मान  राजेन्द्र अग्रवाल राजू जिला बिलासपुर, चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया हिन्दी डॉ. संदीप कुमार तिवारी रायपुर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी का पुरस्कार संयुक्त रूप से डॉ. सोमेश कुमार पटेल एवं  अभिषेक शुक्ला रायपुर, मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया अंग्रेजी सु भावना पाण्डेय जिला दुर्ग, दानवीर भामाशाह सम्मान  नीरज कुमार बाजपेयी जिला राजनांदगांव, धन्वन्तरि सम्मान डॉ. अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ, मती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार  सुखदेव दास जिला रायपुर को प्रदान किया गया। इसी तरह डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था ग्राम दमकसा जिला कांकेर, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार संयुक्त रूप से  मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग तथा एनटीपीसी लिमि. लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पुसौर जिला रायगढ़ , पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान  योगेश कुमार साहू जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान  मनीष तिवारी जिला रायपुर, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार  रोहित कुमार कोसरिया जिला महासमुंद, किशोर साहू सम्मान  सुनील सोनी जिला रायपुर, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान  राकेश तिवारी जिला रायपुर, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा जिला बिलासपुर, किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण  अनुराग बसु मुम्बई को प्रदान किया गया।   बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान संयुक्त रूप से  खेमचंद जैन राजनांदगांव, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेन्द्र करवंदे एवं  भरतलाल सोनी रायपुर को, वीरांगन अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार मती प्रेमशीला बघेल महासमुंद को, माता बहादुर कलारिन सम्मान मती शिल्पा पाण्डेय सृष्टि जिला सरगुजा को, पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान  अवधेश कुमार नई दिल्ली तथा संस्कृत भाषा सम्मान डॉ. दादू भाई त्रिपाठी जिला रायपुर को प्रदान किया गया। 

बीजापुर में विकास की नई पहल: माओवाद प्रभावित सात गांवों में पहली बार आयोजित हुआ मेगा हेल्थ कैंप

 बीजापुर में विकास की दस्तकः धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र के सात गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप 989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ रायपुर कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे।  विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं। बीजापुर कलेक्टर  संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है। बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।

दिल्ली की हवा अब होगी साफ? चीन की तकनीक देगी प्रदूषण पर ‘नियंत्रण’

नई दिल्ली दिल्ली में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर के बीच चीन ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस समस्या से निपटने के लिए मदद की पेशकश की है। 2010 के दशक की शुरुआत में दिल्ली और बीजींग दोनों ही धुंध और वायु प्रदूषण के अत्यधिक और खतरनाक स्तर से जूझ रहे थे, जहां पीएम 2.5 की सांद्रता नियमित रूप से 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर वार्षिक दिशानिर्देश से 50 गुना ज्यादा थी। नवंबर 2025 तक बीजींग ने निरंतर सुधारों के जरिये वायु प्रदूषण की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगाने में सफलता हासिल कर ली है। आइये जानते हैं चीन ने बीजींग की हवा को कैसे साफ किया।   चीन की दिल्ली को प्रदूषण में मदद की पेशकश नई नीतियों के साथ कड़ाई से लागू किए गए नियम चीनी सरकार ने एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया, जिसमें नई नीतियों के साथ नए नियम बना कर उनको कड़ाई से लागू किया। चीन ने सबसे पहले बीजींग को चुना। यहां दूसरे देशों के दूतावास हैं और वायु प्रदूषण की समस्या चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण बन गई थी। तमाम बदलाव लाने वाली तकनीकों का परीक्षण बीजींग में किया गया और इसके सकारात्मक नतीजे सामने आने के बाद इसे दूसरी जगहों पर भी लागू किया गया। लो एमिसन जोन की रणनीति वायु प्रदूषण से निपटने और विशिष्ट क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की बीजींग की रणनीति में लो एमिसन जोन(एलईजेड) जैसी पहलों ने महत्पपूर्ण भूमिका निभाई। बीजिंग ने प्रदूषण नियंत्रण में सफलता पाई ये क्षेत्र उच्च-उत्सर्जन वाले वाहनों के प्रवेश को सीमित करते हैं, जिससे परिवहन के स्वच्छ और अधिक पर्यावरण-अनुकूल साधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त, शहर ने प्रदूषणकारी औद्योगिक सुविधाओं को बंद करके और ही¨टग प्रणालियों को उन्नत करके कोयले की खपत को कम करने के लिए काम किया।गैस आधारित इंडस्ट्री बीजींग ने कोयले के इस्तेमाल में कमी लाने में अग्रणी भूमिका निभाई। 3,000 छोटे बायलरों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया और 2017 तक कोयले के इस्तेमाल को 1.5 करोड़ टन तक सीमित कर दिया। यानी 30 प्रतिशत की कटौती। प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों ने इस कमी को पूरा किया, और शहर ने 4 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाई। वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण का तरीका बीजींग ने लाइसेंस प्लेट लाटरी के •ारिए वाहनों की संख्या सीमित कर दी और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 1,000 किलोमीटर तक कर दिया। कैसे साफ हुई बीजींग की हवा? बीजींग ने सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग और नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से चलने वाले ई-वाहनों को अपनाया है, जिससे शहर के परिवहन परि²श्य में नया बदलाव आया है। 2020 तक, सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से नई बिक्री में इलेक्टि्रक वाहनों का योगदान 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। 2,000 से ज्यादा कारखाने बंद हो गए या स्थानांतरित हो गए, और सर्दियों के दौरान इस्पात उत्पादन में कटौती की गई। निगरानी और पेड़ लगाने पर जोर निगरानी के मोर्चे पर काफी काम किया गया। 1,500 स्टेशनों के एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क ने रियल टाइम पीएम2.5 डाटा उपलब्ध कराया। सार्वजनिक ट्रेकिंग के लिए 'ब्लू स्काई' जैसे एप को सशक्त बनाया गया। बीजींग के आसपास 10 करोड़ पेड़ लगाए। इससे पेड़ों ने बड़ी मात्रा में कार्बन का अवशोषण किया और हवाओं के प्रदूषण को कम करने में बड़ा योगदान दिया। ये रहे नतीजे 2013 से 2017 तक, बीजींग में पीएम2.5 का स्तर 35 प्रतिशत से घटकर 89.5 से 58 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। इसी अवधि में राष्ट्रीय औसत में 25 प्रतिशत की गिरावट आई। 2020 तक, तीन-वर्षीय कार्य योजना ने कोयले की खपत में 15 करोड़ टन की और कटौती की और कुल खपत में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ा दी। सांस की दिक्कतों से जुड़े मामलों में 20 प्रतिशत की कमी आई। औसत आयु पर असर वायु गुणवत्ता में सुधार ने लोगों की जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में योगदान दिया है। बीजींग में, पीएम2.5 के स्तर में गिरावट से स्थानीय जीवन प्रत्याशा में लगभग 4.6 वर्ष की वृद्धि होने का अनुमान है। राष्ट्रीय स्तर पर 2013 से औसत जीवन प्रत्याशा में दो वर्ष की वृद्धि हुई है। 2013 और 2020 के बीच, चीन वायु प्रदूषण में कुल वैश्विक कमी के लगभग तीन-चौथाई के लिए जिम्मेदार था। इसके विपरीत, बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान सहित दक्षिण एशियाई देशों में 2000 के बाद से कण प्रदूषण में ¨चताजनक वृद्धि देखी गई है।  

IPS प्रमोशन पर लगी ब्रेक: MP में पहली बार डीपीसी निरस्त, पांच अधिकारियों को निराशा

भोपाल राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए 12 सितंबर को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्रवाई निरस्त कर दी गई है। प्रदेश में पहली बार है जब इसे निरस्त किया गया है। इसमें पांच अधिकारियों को पदोन्नत किया जाना था। बताया जा रहा है कि 1997 बैच के अधिकारी अमृत मीणा के जाति प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेजों में कुछ उलझन के चलते छानबीन की जा रही है। साथ ही एक अन्य दावेदार की विभागीय जांच भी चल रही है। मामले पर कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं डीपीसी की कार्रवाई रद होने की इन्हें ही मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, कोई भी अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की उपस्थिति में भोपाल में ही डीपीसी हुई थी, जिसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला सम्मिलित हुए थे। सामान्यत: 15 से 20 दिन में पदोन्नति की अधिसूचना जारी कर दी जाती है, पर डेढ़ माह बाद इसे रद कर दिया गया है।   डीपीसी में 15 लोगों के नामों पर विचार किया गया डीपीसी में 1997 और 1998 बैच के 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया था। इसमें सीताराम सस्त्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर वर्मा का नाम शामिल था। अगले वर्ष यानी 2025 में सात अधिकारियों की पदोन्नति राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस में होनी है, पर वर्ष 2024 की डीपीसी में देरी के चलते वर्ष 2025 में भी देरी होगी। 

मध्यप्रदेश पुलिस एक्शन मोड में: 80% बाइक सवार बिना हेलमेट, शुरू हुआ बड़ा अभियान

भोपाल प्रदेश में प्रतिवर्ष छह से सात हजार दोपहिया वाहन चालक और सवारी की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो रही है। इसका बड़ा कारण यह है कि लगभग 80 प्रतिशत वाहन चालक हेलमेट नहीं पहन रहे हैं। इस कारण अब पुलिस प्रदेश भर में अभियान चलाकर हेलमेट नहीं लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करेगी। छह नवंबर (गुरुवार) से इसके लिए विशेष अभियान की शुरुआत हो रही है जो लगातार चलेगा। दोपहिया वाहन पर सवार दूसरी सवारी के लिए भी हेलमेट लगाना अनिवार्य होगा। मौतों के आंकड़े इस अभियान में सबसे अधिक सख्ती भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में की जाएगी। कारण, इन जिलों में सड़क हादसे और मौतों की संख्या अधिक है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 14,791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। जिसमें इंदौर शहर में 2425, ग्रामीण में 290, भोपाल शहर में 945 और ग्रामीण में 235, उज्जैन में 1536, जबलपुर में 2035 और ग्वालियर में 1049 लोगों की मौत हुई। यानी इन पांच जिलों में 8,515 लोगों की मौत हुई जो कुल मौतों का 58 प्रतिशत है।   यही कारण है कि इन जिलों में अभियान के अंतर्गत बहुत अधिक सख्ती की जानी है। DIG, पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (PTRI) टीके विद्यार्थी ने बताया कि हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीछे बैठी सवारी को भी हेलमेट पहनने के लिए समझाइश देंगे। सभी जिलों में हर दिन की कार्रवाई की जानकारी एकत्र की जाएगी। यह अभियान लगातार चलेगा।