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गुडिया लौट आओ नाटक की भव्य प्रस्तुति

भोपाल   स्थानीय रविन्द्र भवन सभागार में यूनाइटेड अवेयरनेस मिशन के तत्वावधान में भोपाल शहर के दसवी एवं बारहवी कक्ष के मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान मैं एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के  नागरिको ने शिरकत की जिस में मुख्य अतिथि MLA मध्य विधान जनाब आरिफ़ मसूद साहब एवं पूर्व पार्षद जनाब शावर मंसूरी साहब शिरकत की इस कार्यक्रम में "दिशा वल्फेयर एवं कल्चरल सोसायटी समिति द्वारा नाटक" गुडिया लौट आओ" का मंचन किया गया ! उक्त नाटक में यह संदेश देने का प्रयास दिया गया कि हमारे बच्चों और  नौ जवाने को अपने माता पिता वं बुजुर्गों की दी हुई सीख को अपनाने की जरूरत है। एक गलत कदम आपका भविष्य तबाह कर सकता है। कुदरत ने हमे जो जीवन प्रदान दिया है वह अनमोल है इसलिए इस जीवन मैं हमारे लक्ष्य एसे होने चाहिये कि हम परिवार, समाज एवं देश का भविष्य संवार सके! उक्त नाटक के निर्देशक शकील चाँद लेखक उमर असलम, मंच पर  एस.एम अली , नाएमा अली काज़मी, फ़िरोज़, नोया नूर अंसारी मंच परे मंच व्यवस्थापक फीरोज, संगीत एवं मंच सज्जा जावेद खान, लाइट शावेज़ सिकंदर इस पर स्तुति को भव्यता प्रदान की गई ।

राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी

मोहला : छत्तीसगढ़ में खाद की कोई कमी नहीं डीएपी की कमी को पूरा करने एनपीके, एसएसपी और नैनो डीएपी का भरपूर स्टॉक राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी           मोहला राज्य में रासायनिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।         राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है।         चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है।         कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमश: 25 हजार 266 मेट्रिक टन एवं 71 हजार 363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी।            यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी।         कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।         मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

भारतीय एमएसएमई उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, डीपी वर्ल्ड और जाफजा अधिकारियों से महत्वपूर्ण बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘भारत मार्ट’ को बताया वैश्विक व्यापार का प्रवेशद्वार मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और निर्यात का हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम भारतीय एमएसएमई उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, डीपी वर्ल्ड और जाफजा अधिकारियों से महत्वपूर्ण बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई यात्रा के तीसरे दिन डीपी वर्ल्ड और जेबेल अली फ्री ज़ोन (JAFZA) के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर “भारत मार्ट” परियोजना और उससे जुड़ी लॉजिस्टिक्स संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत मार्ट को “वैश्विक व्यापार का प्रवेशद्वार” बताते हुए कहा कि यह आधुनिक व्यापार केंद्र भारतीय उत्पादों, विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, कृषि और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों की मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप जैसे बाजारों तक सीधी पहुँच उपलब्ध कराएगा। भारत मार्ट 2026 में परिचालन में आएगा और ‘लोकल से ग्लोबल’ की नीति को नई दिशा देगा। “भारत मार्ट” भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंधों का प्रतीक भारत मार्ट, जेबेल अली फ्री ज़ोन (JAFZA), दुबई में लगभग 2.7 मिलियन वर्ग फुट में विकसित किया जा रहा एक बहुआयामी अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र है। इसकी आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम द्वारा फरवरी 2024 में संयुक्त रूप से रखी गई थी। यह केंद्र डीपी वर्ल्ड द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसमें 1500 से अधिक शोरूम, अत्याधुनिक गोदाम और कार्यालय सुविधाएं शामिल होंगी। यह परियोजना भारतीय एमएसएमई को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए तैयार की जा रही है, जिससे वे अपनी गुणवत्ता युक्त वस्तुओं का निर्यात आसानी से कर सकें। भारत मार्ट, वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाने वाला एक मजबूत स्तंभ बनेगा। मध्यप्रदेश से भारत मार्ट तक निर्बाध लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी बैठक में विशेष रूप से मध्यप्रदेश में डीपी वर्ल्ड द्वारा प्रस्तावित रेल टर्मिनल और उज्जैन–नागदा रूट को भारत मार्ट तक निर्बाध माल आपूर्ति का एक निर्णायक माध्यम बताया गया। यह लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी भारत से दुबई तक तेज़, किफायती और सुगम माल परिवहन सुनिश्चित करेगी, जिससे राज्य के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “हमारी सरकार इस यात्रा को केवल व्यापार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के आर्थिक भविष्य की नींव मान रही है। भारत मार्ट के ज़रिये हमारा प्रदेश वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एक मज़बूत कड़ी बनेगा।” डीपी वर्ल्ड: भारत और मध्यप्रदेश के लिए संभावनाओं से भरा साझेदार डीपी वर्ल्ड, दुबई स्थित एक अग्रणी वैश्विक लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला समाधान प्रदाता है, जो 78 से अधिक देशों में 100 से अधिक टर्मिनलों और पोर्ट्स का संचालन करता है। प्रति वर्ष 70 मिलियन TEU कंटेनर हैंडल करने वाली यह कंपनी विश्व की सबसे बड़ी पोर्ट ऑपरेटरों में गिनी जाती है। भारत में संचालन डीपी वर्ल्ड भारत के मुंबई, मुंद्रा, कोचीन, चेन्नई और विशाखापत्तनम जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर छह टर्मिनलों का संचालन करती है। साथ ही यह कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट सेवाओं का भी प्रबंधन करती है। म.प्र. में ड्राय पोर्ट के विकास में दिखाई रूचि डीपी वर्ल्ड ने मध्यप्रदेश में इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP), कृषि-लॉजिस्टिक्स हब और ड्राय पोर्ट के विकास में गहरी रुचि दिखाई है। यह राज्य की लॉजिस्टिक्स और निर्यात नीति के अनुरूप है, और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से दीर्घकालिक अधोसंरचना विकास को मजबूती देने वाला कदम है।  

CG में रहने वाले अवैध बांग्लादेशियों को भेजा जा रहा बांग्लादेश, पुलिस प्लेन से बॉर्डर तक ले जाएगी

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को देश से बाहर निकालने की कार्रवाई तेज हो गई है। रायपुर पुलिस आज 30 बांग्लादेशी नागरिकों को देश की सीमा तक लेकर जाएगी। रायपुर एयर से गुवाहाटी एयरपोर्ट में छोड़ा जाएगा ।वहां उन्हें बीएसएफ के सुपुर्द किया जाएगा, जो आगे की प्रक्रिया पूरी कर बांग्लादेश भेजेगी। इन बांग्लादेशी नागरिकों को प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर और रायगढ़ जिलों से पकड़ा गया था। सभी लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कर यहां वर्षों से रह रहे थे। इनकी धरपकड़ के बाद अब इन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है। इस विशेष अभियान का नेतृत्व रायपुर के सीएसपी राजेश देवांगन कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में गठित पुलिस टीम इन बांग्लादेशियों को लेकर आज सीमा क्षेत्र के लिए रवाना होगी। सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इस तरह के मामलों पर निगरानी रख रही हैं और आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं।  जानकारी के मुताबिक, घुसपैठियों को रायपुर पुलिस BSF के सौंपेगी, फिर असम से बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF के जरिए डिपोर्ट प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह सारी प्रकिया आज ही पूरी होगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, घुसपैठियों के संदर्भ में एक एसटीएफ (विशेष कार्य बल) का गठन किया गया है। एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। जहां भी घुसपैठी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रायपुर-दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ से पकड़े गए लोगों किया गया डिपोर्ट इस डिपोर्ट प्रक्रिया में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ जिलों से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों को गुवाहाटी ले जाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि, यह छत्तीसगढ़ राज्य की पहली औपचारिक डिपोर्ट कार्रवाई है, जो केंद्र सरकार की मंजूरी से की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे राज्य में हुई छापेमारी और पहचान के बाद 30 लोगों को अभी तक पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक होने के तौर पर चिन्हित किया है. जिन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई शुरू की जा रही है. जानकारी के अनुसार इन सभी लोगों को रायपुर पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले करेगी. उसके बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स उन्हें बांग्लादेश को सौंप देंगे. रायपुर में पुलिस सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जो भी बांग्लादेशी अभी तक डीटेन किए गए हैं. उन सभी लोगों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है. जानकारी के अनुसार उन्हें आज बांग्लादेश के लिए भेजा जाएगा. सभी लोगों को हवाई जहाज के माध्यम से बॉर्डर तक ले जाया जाएगा. उसके बाद उन्हें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले कर दिया जाएगा.  भारत से बात करते हुए रायपुर पश्चिम के ASP दौलत राम पोर्ते ने बताया कि जो भी बांग्लादेशी पकड़े गए हैं, उनको बांग्लादेश भेजना है. जो भी सरकार के नियम निर्देश हैं, उसके तहत यह कार्रवाई की जा रही है. जो भी बांग्लादेशी अब तक पकड़े गए हैं, उन सभी लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन सभी लोगों को किस समय बांग्लादेश के लिए रायपुर से भेजा जाएगा.  क्यों उठाया गया ये कदम ? राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान पिछले कुछ सालों में इंटेलिजेंस इनपुट और स्थानीय शिकायतों के आधार पर की गई थी। रायपुर समेत कई जिलों में ऐसे नागरिकों को पकड़ा गया था जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। भारत-बांग्लादेश की बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात है। बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है, इसलिए केंद्र सरकार ने उन्हें ही जिम्मेदारी दी है। साथ ही बांग्लादेश दूतावास से भी चर्चा चल रही है। उन्हें इस संबंध में जानकारी भी भेजी गई है। जिन पर केस, उनको बाद में भेजा जाएगा बताया जा रहा है कि जिनके खिलाफ केस दर्ज है। उन्हें मामले की सुनवाई पूरी होने तक यहीं रहना होगा। कोर्ट के फैसले के बाद ही उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा। रायपुर में 6 बांग्लादेशियों के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें तीन भाई, एक दंपती और उसकी नाबालिग बेटी शामिल हैं। दुर्ग में भी 7 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज है। राजनांदगांव में चोरी के मामले में बांग्लादेशी बंद है, जबकि रायपुर में 10 बांग्लादेशियों पर केस दर्ज नहीं किया है। उन्हें प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए जेल में रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेख आधुनिकीकरण एवं नक्शा परियोजना की समीक्षा हेतु तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) तथा नक्शा परियोजना के कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग (DOLR) के वरिष्ठ अधिकारियों का तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस क्रम में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी एवं संयुक्त सचिव श्री कुणाल सत्यार्थी ने आज न्यू सर्किट हाऊस नवा रायपुर में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) तथा ‘नक्शा परियोजना’ की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में राजस्व विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत,महानिरीक्षक पंजीयन श्री पुष्पेंद्र मीणा,भू संचालक श्री विनीत नन्दनवार, भूमि संसाधन विभाग के डॉ. एम.के.स्टॅलिन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।      बैठक के दौरान केंद्रीय सचिव भूमि संसाधन श्री मनोज जोशी  विभागीय अधिकारियों के साथ भू-अभिलेख के संधारण, सर्वे आदि की प्रगति की विस्तृत समीक्षा एवं परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय के लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के लिए अनावश्यक तिथि बढ़ाये जाने की परंपरा को रोका जाए। जिओरिफ्रेंसिंग के कार्य को पूर्ण कर किसानों के हित मे उपयोग करें। इसके लिए ध्यान रखें कि भूमि के क्षेत्र और सीमा में वेरिएशन कम से कम हो। जमीन से संबंधित प्रकरणों को निराकृत करने के लिए विशेष राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। राज्य में भूमि सर्वे या रिसर्वे के कार्याे को क्षेत्रानुसार अलग-अलग वेंडरों को दिया जाय ताकि काम समय पर पूरा हो। उन्होंने कहा कि राज्य में भूमि सर्वे या रिसर्वे के काम को प्रशासन द्वारा कुछ गांव को मॉडल के रूप में लेकर भी किया जा सकता है। इसी तरह जमीन दस्तावेजों के साथ भू-स्वामियों के बारे में यथा आधार कार्ड,मोबाइल नंबर आदि की सम्पूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखा जाए। इस जानकारी का उपयोग भू-स्वामियों के लिए जमीन के उपयोग,बैंक ऋण या खरीदी-बिक्री आदि में हो सकेगा।इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और नक्शा परियोजना की प्रगति को गति देना तथा सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।     गौरतलब है कि केंद्रीय राजस्व सचिव 14  से 16 जुलाई 2025 तक राज्य के दौरे में हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे का उद्देश्य राज्य में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, पारदर्शिता तथा अद्यतन भू-अभिलेखों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है ताकि आमजन को समयबद्ध एवं सुगम सेवाएं प्राप्त हो सकें। छत्तीसगढ़ शासन एवं संबंधित विभागों द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह समीक्षा बैठक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

जिले में अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा

 जिले में अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा सर्वाधिक वर्षा पिथौरा तहसील में 416.0 मिलीमीटर आज 11.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज महासमुंद  महासमुंद जिले में चालू मानसून के दौरान 01 जून 2025 से अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सर्वाधिक औसत वर्षा पिथौरा तहसील में 416.0 मिलीमीटर, सरायपाली में 406.4 मिलीमीटर, बसना में 345.2 मिलीमीटर, महासमुंद में 323.0 मिलीमीटर, बागबाहरा में 312.9 मिलीमीटर और सबसे कम वर्षा 274.8 मिलीमीटर कोमाखान तहसील में दर्ज की गई। आज 15 जुलाई को 11.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। जिले के तहसीलवार वर्षा में बसना तहसील में 21.6 मिलीमीटर, सरायपाली में 19.8 मिलीमीटर, पिथौरा में 16.1 मिलीमीटर, महासमुंद में 5.1 मिलीमीटर, कोमाखान में 2.5 मिलीमीटर एवं बागबाहरा तहसील में 1.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

पीएम सूर्यघर योजना बनी आमजन के लिए वरदान: स्वाति यादव का बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के जीवन में बदलाव ला रही है। इसी योजना का लाभ उठाते हुए जिले के अंतर्गत आने वाले चौकी विकासखंड के ग्राम मेटेपार निवासी श्रीमती स्वाति यादव ने अपने घर की छत पर सोलन पैनल लगाकर अपने घर को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना लिया है। उन्होंने अपने मकान की छत पर 2 किलोवॉट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित करवाया है, जिससे अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। पूर्व में श्रीमती यादव ने बताया कि हर माह 3000 रूपए से 3200 रूपए तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। लेकिन अब, इस योजना की बदौलत उन्हें पूरी राशि बचत के रूप में मिल रही है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है। इस योजना के तहत उन्हें 78,000 रूपए की अनुदान राशि (सब्सिडी) शासन द्वारा प्रदान की गई, जिससे सोलर पैनल लगवाना उनके लिए आसान और किफायती हो गया। श्रीमती यादव ने बताया, यह योजना न केवल हमारे घर की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरी कर रही है, बल्कि यह पर्यावरण के संरक्षण में भी मददगार साबित हो रही है। हमारे घर का बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती यादव ने कहा कि यह योजना जनसामान्य के लिए अत्यंत उपयोगी है और इसका लाभ हर परिवार को उठाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्तयोजना का उद्देश्य घर-घर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है और प्रदूषण मुक्त रखना है। जिससे देशवासी बिजली संकट से राहत पाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। जिले में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर साफ़ देखे जा रहे हैं।

रायपुर : प्रदेश में अब तक 378.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 378.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 598.8 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 189.2 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा में 292.0 मि.मी., सूरजपुर में 483.6 मि.मी., जशपुर में 507.2 मि.मी., कोरिया में 416.5 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 382.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर जिले में 362.1 मि.मी., बलौदाबाजार में 365.4 मि.मी., गरियाबंद में 323.1 मि.मी., महासमुंद में 346.3 मि.मी. और धमतरी में 323.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर में 398.7 मि.मी., मुंगेली में 266.1 मि.मी., रायगढ़ मंे 526.9 सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 387.6 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 510.6 मि.मी., सक्ती में 450.1 मि.मी., कोरबा में 471.9 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 394.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। दुर्ग जिले में 311.3 मि.मी., कबीरधाम में 274.2 मि.मी., राजनांदगांव में 303.0 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 488.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 251.5 मि.मी., बालोद में 381.4 मि.मी. और बस्तर जिले में 442.5 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। कोंडागांव में 265.4 मि.मी., कांकेर में 367.0 मि.मी., नारायणपुर में 315.7 मि.मी., दंतेवाड़ा में 400.1 मि.मी., सुकमा में 233.7 मि.मी. और बीजापुर में 452.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व युवा कौशल दिवस पर दीं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों विशेष रूप से युवाओं को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वर्ष 2025 की थीम एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) और डिजिटल कौशल से युवा सशक्तिकरण' है। वर्तमान समय में एआई देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं को असीमित अवसर मिलें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार तकनीकी-व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को गति प्रदान कर रही है और प्रदेश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

रेत खनन में सुधार की पहल: शासन की पहली प्राथमिकता पर्यावरण और पारदर्शिता

रायपुर : रेत खनन में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और अवैध उत्खनन पर सख्ती शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता छत्तीसगढ़ में पारदर्शी, वैज्ञानिक और जनहितैषी खनिज नीति के तहत रेत खनन व्यवस्था को मिल रहा नया स्वरूप रेत खनन में सुधार की पहल: शासन की पहली प्राथमिकता पर्यावरण और पारदर्शिता रायपुर राज्य में रेत खनन नीति को अधिक पारदर्शी, संगठित, पर्यावरण-संवेदनशील और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से व्यापक कदम उठाए गए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के शासन काल के दौरान राज्य में संचालित रेत खदानों की संख्या 300 से घटकर लगभग 100-150 रह गई थी, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। वर्तमान सरकार द्वारा खनिज नीति में सुधार कर रेत खनन की व्यवस्था को संगठित, नियंत्रित और जनहितकारी बनाया गया है। पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में तीव्रता राज्य में पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया को गति देने के लिए भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर तीन राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण समितियों का गठन किया गया है। पूर्व में केवल एक समिति कार्यरत थी। इस निर्णय से लंबित प्रकरणों के शीघ्र निपटारे की प्रक्रिया सुगम हुई है। वैध खदानों की संख्या में वृद्धि वर्तमान में 119 रेत खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ विधिवत संचालित हैं, जबकि 94 अन्य खदानों की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही, आगामी 1 से 1.5 वर्षों में 300 से अधिक नई खदानों को स्वीकृति दिए जाने की योजना है, जिससे रेत की आपूर्ति सुलभ बनी रहेगी और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी। IIT रुड़की की रिपोर्ट: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खनन प्रमुख नदियों पर खनन के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर IIT रुड़की से कराए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि विधिवत और नियंत्रित रेत खनन से नदियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह रिपोर्ट राज्य की वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित खनिज नीति को समर्थन प्रदान करती है। अवैध खनन पर सख्त कार्यवाही वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक 6,331 अवैध खनन प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से ₹18.02 करोड़ की वसूली, 184 मशीनों की जब्ती, 56 एफआईआर तथा 57 न्यायालयीन परिवाद दायर किए गए। जिला एवं राज्य स्तरीय टास्क फोर्सों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी सम्मिलित हैं। विवादों पर त्वरित कार्यवाही राजनांदगांव और बलरामपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में रेत से संबंधित विवादों एवं घटनाओं पर त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही की गई है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी में राहत 15 मार्च 2024 को लिए गए निर्णय के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रेत पर रॉयल्टी से छूट प्रदान की गई है। इस निर्णय से गरीबों और जरूरतमंदों को प्रत्यक्ष राहत मिली है। भविष्य की नीति: पारदर्शिता और संतुलन छत्तीसगढ़ शासन की नीति स्पष्ट है — खनिज संसाधनों के दोहन को जनहित, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित करना। संगठित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तैयार की गई यह नई रेत खनन नीति राज्य के समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए सशक्त आधार बनेगी।