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आपके शहर की हवा कितनी सुरक्षित? पंजाब के AQI ने बढ़ाई अलर्ट!

पंजाब पंजाब में मौसम इन दिनों साफ है, लेकिन उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते रातें ठंडी होने लगी हैं। वहीं, राज्य के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। बीते 24 घंटों में अधिकतम तापमान में करीब 0.5 डिग्री की हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 0.7 डिग्री गिरा है। राज्य के वायु प्रदूषण स्तर में खास सुधार नहीं देखा गया। स्थिति स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जा रही है। वायु गुणवत्ता जांच केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के केवल अमृतसर और बठिंडा में AQI 100 से नीचे रहा, जिससे वहां की हवा अपेक्षाकृत बेहतर रही। इसके विपरीत, रूपनगर में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जहां अधिकतम AQI 500 दर्ज किया गया। अन्य शहरों की हवा मध्यम श्रेणी (येलो जोन) में रही।  जालंधर:  एवरेज 135, अधिकतम-247 खन्ना:   एवरेज 151, अधिकतम-245 लुधियाना:  एवरेज-110, अधिकतम-120 मंडी गोबिंदगढ़:  एवरेज-185, अधिकतम-224 अमृतसर:  एवरेज-63, अधिकतम-59 पटियाला:  एवरेज-109, अधिकतम-120 रूपनगर:  एवरेज-101, अधिकतम-500 बठिंडा:  एवरेज-88, अधिकतम-127 इसके अलावा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर से 16 अक्टूबर 2025 तक राज्य में पराली जलाने के केवल 188 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही अगर हम गर्मी की बात करें तो बठिंडा  राज्य का सबसे गर्म शहर बना हुआ है और गुरदासपुर सबसे ठंडा इलाका बना हुआ है। लेकिन मौसम साफ होने के बावजूद प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। 

पर्यटन प्रेमियों के लिए खुशखबरी: झारखंड में टाइगर सफारी की तैयारी शुरू

रांची झारखंड अपनी पहली ‘टाइगर सफारी' परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है और यह राज्य के वन्यजीव पर्यटन तथा वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रस्तावित ‘टाइगर सफारी' परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति की शुक्रवार शाम रांची स्थित अपने सरकारी आवास में समीक्षा की। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पलामू बाघ अभयारण्य के बाहर स्थित लातेहार जिले के पुटुवागढ़ क्षेत्र में विकसित करने का प्रस्ताव है।  

कारोबारी पर हमला, रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई—6 गिरफ्तार

रांची  झारखंड के रांची के पुंदाग इलाके में सीमेंट-छड़ कारोबारी राधेश्याम साहू पर हुए फायरिंग मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर 6 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इनमें से दो रांची के बिल्डर और जमीन कारोबारी बताए जा रहे हैं। पुलिस हिरासत में लिए लोगों से पूछताछ कर रही है और हमलावरों को पकड़ने के लिए आसपास के जिलों में तलाशी अभियान भी चला रही है। पीड़ित कारोबारी राधेश्याम साहू के बेटे सज्जन कुमार ने नगड़ी थाना में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनकी शिकायत में दो नामजद अभियुक्त पुरुषोत्तम कुमार और शशि शेखर हैं। सज्जन के अनुसार, उनके पिता का इन दोनों के साथ ढाई एकड़ जमीन को लेकर लंबा विवाद चल रहा था, जो अब न्यायालय में लंबित है। यह विवाद इस हिंसक घटना की वजह बताया जा रहा है। सज्जन कुमार ने पुलिस को बताया कि करीब दो महीने पहले पटना निवासी शशि शेखर ने उनके पिता को धमकी दी थी कि यदि यह मामला जल्दी सुलझाया नहीं गया तो उनकी जान को खतरा रहेगा। फायरिंग के समय राधेश्याम साहू के स्टाफ सदस्य संजय सिन्हा, नागेन्द्र दुबे और सोमरा उरांव भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने घटना का तुरंत पुलिस को सूचना दी। रांची पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले के खुलासे के लिए कई टीमें बना कर हमलावरों की खोज में जुटी हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आसपास के जिलों में भी पुलिस दल भेजे गए हैं, ताकि अपराधियों को पकड़कर न्याय दिलाया जा सके।  

राहुल-प्रियंका की जोड़ी उतरेगी बिहार रण में, कांग्रेस ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की सूची

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव प्रचार का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को बिहार चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के लिए अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें शामिल हैं। इनके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री समेत विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भी बिहार में प्रचार की कमान संभालेंगे। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी इसमें जगह दी गई है। इनके अलावा कन्हैया कुमार, अखिलेश प्रसाद सिंह, रंजीता रंजन, राजेश राम, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, कृष्णा अल्लावरु के भी नाम हैं। ये हैं स्टार प्रचारक केसी वेणुगोपाल, सुखविंदर सिंह सुखु, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, अधीर रंजन चौधरी, मीरा कुमार, सचिन पायलट, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सैयद नासिर हुसैन, चरणजीत सिंह चन्नी, गौरव गगोई, तारिक अनवर, मोहम्मद जावेद, मनोज राम, अलका लांबा, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, शकील अहमद, जीतू पटवारी, सुखदेव भगत, राजेश कुमार राम, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, अजय राय, जिग्नेश मेवानी, अनिल जयहिंद, राजेंद्र पाल गौतम, फुरकान अंसारी, उदय भानु चिब, सुबोध कांत सहाय का नाम भी स्टार प्रचारकों में है। बिहार में दो चरणों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। 6 नवंबर को पहले चरण जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होंगे। इसमें महागठबंधन के किस पार्टी के कितने उम्मीदार मैदान में उतरेंगे इस पर क्लियर पिक्चर अभी तक नहीं आई है। कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष है। दरअसल महागठबंध में सीट का पेंच अभी तक फंसा है। शनिवार को पटना में कांग्रेस पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद बिहार में कांग्रेस की ताकत बढ़ी है। इसके मद्देनचह पार्टी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। लेकिन आरजेडी कांग्रेस की मांग पर सहज और सहमत नहीं है। वैशाली की दो सीटों पर कांग्रेस और राजद ने अपने उम्मीदवारों को टिकट देकर नामांकन भी करवा दिया है।  

योगी के दीपोत्सव ने नई ऊंचाई पर पहुंचाया भारत-रूस के संबंध

दीपोत्सव- 2025:अयोध्या में रूस के राम को समर्पित होगी मास्को की रामलीला योगी के दीपोत्सव ने नई ऊंचाई पर पहुंचाया भारत-रूस के संबंध रूस-भारतीय मैत्री संघ के द्वारा दीपोत्सव 2025 के दौरान किया जाएगा रामलीला का मंचन रूस के राम पद्मश्री गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की स्मृति को समर्पित होगी रामलीला 18-19 अक्टूबर को अयोध्या में रूस के साथ विभिन्न देशों के कलाकार प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करेंगे अयोध्या  राम की नगरी अयोध्या एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनने जा रही है। अयोध्या शोध संस्थान के आमंत्रण पर रूस-भारतीय मैत्री संघ के द्वारा दीपोत्सव 2025 के दौरान “दिशा रामलीला मॉस्को” अपनी विशेष नाट्य प्रस्तुति का मंचन करेगी। यह प्रस्तुति पद्मश्री गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की स्मृति को समर्पित होगी, जिन्हें स्नेहपूर्वक “रूस का राम” कहा जाता था। आयोजन 18-19 अक्टूबर को अयोध्या में होगा, जहां रूस के साथ विभिन्न देशों के कलाकार प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करेंगे।   1960 के दशक में रूस के प्रसिद्ध अभिनेता और रंगमंच निर्देशक गन्नादी पेचनिकोव ने भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला का मंचन शुरू किया था। भारत के प्रति उनके प्रेम और समर्पण के लिए उन्हें भारत सरकार ने बाल मित्र पदक और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। वे लगभग दो दशकों तक भारतीय संस्कृति के दूत के रूप में जाने गए। चार दशक बाद योगी सरकार में रूसी-भारतीय मैत्री संघ “दिशा” ने पेचनिकोव की स्मृति में “दिशा रामलीला” की परंपरा को पुनर्जीवित किया है। इसका पहला मंचन 4-6 नवंबर 2018 को अयोध्या में हुआ, दूसरा कुम्भ मेला 2019 प्रयागराज में और उसके बाद अयोध्या के दीपोत्सव में प्रस्तुत किया गया। इस वर्ष दीपोत्सव 2025 में यह मंचन फिर से रूस की ओर से सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करेगा। दीपोत्सव में भारत-रूस की मित्रता एक नई ऊँचाई पर पहुंचाया रूस-भारतीय मैत्री संघ “दिशा” के अध्यक्ष डॉ. रमेश्वर सिंह ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारत के रूस में राजदूत माननीय श्री विनय कुमार, रूस के भारत में राजदूत माननीय श्री डेनिस एवगेनियेविच अलीपोव, और जवाहरलाल नेहरू कल्चरल सेंटर (JNCC) मॉस्को की निदेशक श्रीमती मधुर कंकना रॉय के आभारी हैं। इन सभी के सहयोग से रामलीला की परंपरा फिर से जीवंत हुई है और भारत-रूस की मित्रता एक नई ऊँचाई पर पहुँची है।  उन्होंने कहा कि अयोध्या दीपोत्सव का यह आयोजन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच आत्मिक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है। “दिशा रामलीला मॉस्को” के मंच पर जब रूसी कलाकार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के रूप में संवाद करेंगे, तब वह अभिनय सीमाओं को पार कर दोनों देशों के साझा मूल्यों आस्था, आदर्श और मानवता को एक सूत्र में बाँध देगा। यह मंच केवल कला का नहीं, बल्कि संस्कृति, श्रद्धा और मित्रता का सेतु बनेगा जो भारत और रूस के संबंधों को नई आध्यात्मिक ऊँचाई देगा। गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव: रूस के राम 8 सितंबर 1926 को मॉस्को में जन्मे गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव वह कलाकार थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति को रूस की आत्मा में बसाया। रामायण पढ़ने के बाद उनमें भगवान श्रीराम के आदर्शों को मंच पर जीवंत करने की प्रेरणा जगी और उन्होंने स्वयं रामलीला में श्रीराम की भूमिका निभानी शुरू की। यह भूमिका उनके जीवन का ध्येय बन गई और वे “रूस के राम” कहलाए। 1947 में मॉस्को आर्ट थियेटर से स्नातक होने के बाद उन्होंने अभिनय और निर्देशन को अपना जीवन बना लिया। यर्शोफ थियेटर के माध्यम से उन्होंने बच्चों और कलाकारों को भारतीय मूल्यों से जोड़ा। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें “बाल सम्मान” और “पद्मश्री” से सम्मानित किया। 27 अप्रैल 2018 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका राम-स्वरूप आज भी जीवित है। उन्होंने कहा था, “अभिनय ही जीवन है और राम भारतीयता का प्रतीक।” सचमुच, गेनादी पेचनीकोव इस युग में भारत और रूस के सांस्कृतिक सेतु बनकर अमर हो गए।

राजस्थान ग्रेड-4 भर्ती परीक्षा 2025: उत्तर कुंजी जारी, जानें डाउनलोड प्रक्रिया

जयपुर राजस्थान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती परीक्षा 2025 की उत्तर कुंजी जारी कर दी गई है। इच्छुक परीक्षार्थी इसे राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। अब उम्मीदवार अपने उत्तर कुंजी के माध्यम से अपने संभावित अंकों की गणना कर सकेंगे और अपनी परीक्षा प्रदर्शन का अनुमान लगा सकते हैं। परीक्षा में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें सामान्य हिंदी, अंग्रेजी, राजस्थान सामान्य ज्ञान, गणित और बेसिक कंप्यूटर जैसे विषय शामिल थे। इस परीक्षा में गलत उत्तर पर 1/3 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू की गई है। यदि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर उम्मीदवार को आपत्ति है, तो वे आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं। Answer Key (A23Z) Date 19-09-2025 Answer Key (DS22) Date 19-09-2025 Answer Key (1XY2) Date 20-09-2025 Answer Key (DB29) Date 20-09-2025 Answer Key (56HH) Date 21-09-2025 Answer Key (JK1) Date 21-09-2025 19 सितंबर से हुई परीक्षा राजस्थान ग्रुप 4 भर्ती परीक्षा 19 से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित की गई थी। यह परीक्षा राज्य के 38 जिलों में तीन दिनों में कुल 6 शिफ्टों में ली गई। इस भर्ती के लिए कुल 24,71,066 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 21,17,198 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा में उपस्थित होने का प्रतिशत लगभग 85.86% रहा, जबकि 3,53,868 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। राजस्थान ग्रुप 4 भर्ती में 53,749 पदों पर चयन इस बार की चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा राज्य की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है। इसमें कुल 53,749 पदों को भरा जाएगा। परीक्षा के आयोजन के लिए प्रदेशभर में 38 जिलों में 1,300 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिनमें से सबसे अधिक 200 केंद्र जयपुर जिले में स्थापित किए गए।  

बिहार में जातीय गणित गर्माया: कांग्रेस ने उतारे 19 सवर्ण, RJD ने यादवों पर जताया भरोसा

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए से मुकाबले के लिए महागठबंधन ने अपने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की कोशिश की है। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस की अब तक की घोषित कैंडिडेट लिस्ट में में इसके प्रयास दिखते हैं। दोनों दलों ने अपने परंपरागत वोटरों के साथ ही सर्वसमाज का भी पूरा ख्याल रखा है। उधर, वामदलों ने भी अपने-अपने आधार वोट बैंक को तवज्जो दी है। कांग्रेस ने 8 भूमिार मेत 19 सवर्णों को टिकट दिया है। वहीं, राजद ने आधे से ज्यादा उम्मीदवार यादव समाज से उतारे हैं। बिहार में सवर्ण, दलित और मुसलमान कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं। अपनी खोयी जमीन वापस लाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस पार्टी ने सवर्ण, मुसलमान तथा दलित समाज से आने वाले नेताओं पर भरोसा जताया है। सवर्णों को खुले मन से टिकट देने के साथ ही इस बार पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को भी तरजीह दी है। कांग्रेस पांच मुस्लिमों को मैदान में उतारा है। वहीं, राजद ने अपने जनाधार वोट मुस्लिम और यादव का पूरा ख्याल रखा है। पार्टी ने 51 सीटों में से 28 यादवों को चुनावी मैदान में उतारा है। 6 मुस्लिमों को भी टिकट दिया गया है। वामदल और वीआईपी ने भी समीकरण साधकर टिकट दिए हैं। महागठबंधन इस बार अति पिछड़ा वर्ग को साधने में जुटा है। टिकट बंटवारे में इसकी झलक दिख रही है। बिहार में करीब 36 फीसदी आबादी वाले ईबीसी वर्ग को एनडीए खासकर नीतीश कुमार की जदयू का वोट बैंक माना जाता है। महागठबंधन शुरू से ही इस वोट बैंक में सेंध लगाने की फिराक में है। राहुल गांधी ने पटना, राजगीर सहित कई जगहों पर इस वर्ग के साथ संवाद भी किया है। यही कारण है कि कांग्रेस के अलावा राजद, वीआईपी और वाम दलों ने भी अति पिछड़ा वर्ग को टिकट देकर उन्हें भी तरजीह दी है। हालांकि, अभी महागठबंधन में 40 फीसदी सीटों पर प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा बाकी है। कांग्रेस ने अभी तक 50 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है। इनमें सवर्णों की बात करें तो पार्टी ने सबसे अधिक 8 भूमिहार उतारे हैं। इसके अलावा 6 ब्राह्मण और 5 राजपूतों को टिकट दिया है। यानी कुल 19 सवर्ण को टिकट दिया है। वहीं, पिछड़ा वर्ग से 10 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। इनमें चार यादव, एक कुर्मी, एक गोस्वामी, एक कुशवाहा और तीन वैश्य हैं। 6 अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को टिकट दिया है, जबकि 5 मुस्लिमों को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस ने अनुसूचित जाति की 9 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारे हैं। एक अनुसूचित जनजाति को टिकट दिया है। पिछले चुनाव को देखें तो कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। तब पार्टी के सबसे अधिक 34 पर सवर्ण उम्मीदवार थे। 10 मुस्लिम और 13 सीटों पर दलितों को टिकट दिया था। 10 पिछड़ा वर्ग और तीन अति पिछड़ा वर्ग को जगह दी थी। वामदलों ने ओबीसी को सर्वाधिक 15 टिकट दिए लेफ्ट पार्टियों ने 29 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें सर्वाधिक 15 सीटों पर टिकट पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को दी गई है। सीपीआई माले ने 19, सीपीआई ने 6 और सीपीएम ने 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। ये तीनों दल इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। वाम दलों ने अति पिछड़ा वर्ग को एक, दलित को आठ, अल्पसंख्यक समाज के दो उम्मीदवारों को पार्टी सिंबल सौंपा है। सवर्ण समाज में भूमिहार से दो और राजपूत से एक उम्मीदवार बनाया है। सुपौल स्थित पिपरा विधानसभा सीट भाकपा माले के कोटे में आया है, इस सीट पर दूसरे चरण में चुनाव होना है। इस सीट के लिए अबतक प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। वर्ष 2020 चुनाव में वामदलों की 29 सीटों में से चार पर अगड़ी जाति के प्रत्याशी थे। तीन मुस्लिम, तीन यादव और शेष दलित और अति पिछड़ा समुदाय के थे।  

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चल रहे महाभियान ने बनाया व्यापक जनसंपर्क व संवाद का रिकॉर्ड

‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: अब तक प्राप्त हुए लगभग 45 लाख फीडबैक सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चल रहे महाभियान ने बनाया व्यापक जनसंपर्क व संवाद का रिकॉर्ड पोर्टल पर अब तक लगभग 35 लाख सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 10 लाख सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए फीडबैक देने में शीर्ष पांच जनपदों में जौनपुर, संभल, प्रतापगढ़, बिजनौर और गोरखपुर शामिल महाराजगंज के शैलेश कुमार मद्धेशिया ने धार्मिक स्थलों के विकास हेतु पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग की बागपत के मोहन कुमार ने हर ग्राम पंचायत में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया अम्बेडकरनगर के संदीप कुमार ने स्मार्ट खेती, तकनीकी नवाचार की आवश्यकता बताई लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर में जनता से सीधे संवाद और विकास के रोडमैप पर फीडबैक जुटाने का अभियान निरंतर जारी है। 17 अक्टूबर, 2025 तक जनता की राय एवं सुझाव एकत्र करने के लिए बनाए गए पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक लगभग 45 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 35 लाख सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 10 लाख सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें करीब 22 लाख सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, करीब 21 लाख सुझाव 31 से 60 वर्ष आयु वर्ग से तथा 2 लाख से ज्यादा सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। कृषि क्षेत्र से सर्वाधिक फीडबैक विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों में कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक 11 लाख सुझाव मिले हैं, इसके अलावा पशुधन एवं डेयरी से 1.70 लाख, इंडस्ट्री से 1.53 लाख, आईटी व टेक से 1.27 लाख, पर्यटन से 1.02 लाख, ग्रामीण विकास से 9.13 लाख, इन्फ्रास्ट्रक्चर से 39 हजार, समाज कल्याण से 3.33 लाख, नगरीय एवं स्वास्थ्य से 3.15 लाख, शिक्षा क्षेत्र से 11 लाख तथा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर 82 हजार से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए हैं।जनपदवार फीडबैक के अनुसार शीर्ष पांच जनपदों में जौनपुर, संभल, प्रतापगढ़, बिजनौर और गोरखपुर शामिल हैं।  धार्मिक स्थलों के विकास से लेकर स्किल डेवलपमेंट तक मिले सुझाव जनभागीदारी से मिले इन सुझावों में नागरिकों ने अपने क्षेत्रों के विकास के लिए कई ठोस प्रस्ताव दिए हैं। महाराजगंज के शैलेश कुमार मद्धेशिया ने जिले के धार्मिक स्थलों (लेहड़ा मंदिर, इटहिया शिव मंदिर, चौक बाजार गोरखनाथ मंदिर, सोनौली बॉर्डर और सोहागीबरवा वन्य क्षेत्र) के विकास हेतु पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग की। बागपत के मोहन कुमार ने हर ग्राम पंचायत में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने, “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को प्रदेशव्यापी रूप देने, विधवा महिलाओं व बेरोज़गार युवाओं को होम-बेस्ड वर्क से जोड़ने और ग्राम पंचायतों में पारदर्शी ई-गवर्नेंस लागू करने के सुझाव दिए। वहीं अम्बेडकरनगर के संदीप कुमार ने कृषि सुधारों पर बल देते हुए स्मार्ट खेती, तकनीकी नवाचार, किसानों को वित्तीय सहायता और कृषि उत्पादों के विपणन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। जनसहभागिता के लिए व्यापक आयोजन महाभियान के तहत जनजागरूकता व संवाद के लिए प्रदेशभर में व्यापक आयोजन भी किए गए हैं। अब तक 15 नगर निगमों, 212 नगर पालिकाओं, 528 नगर पंचायतों, 56 जिला पंचायतों, 713 क्षेत्र पंचायतों तथा 42,666 ग्राम पंचायतों में बैठकों, सम्मेलनों और गोष्ठियों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद व सहभागिता को और अधिक सशक्त किया गया है।

मोरपाल सुमन बीजेपी का चेहरा, पर अंता उपचुनाव की असली कमान वसुंधरा राजे के हाथ में

जयपुर/बारां राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी भले ही मोरपाल सुमन है लेकिन असल में अब यह चुनाव वसुंधरा राजे का है। इस उपचुनाव के नतीजे राजस्थान की राजनीति में राजे की वापसी की राह तय करेंगे। उपचुनाव भले ही छोटा है लेकिन इसके नतीजे बहुत दूर तक असर करेंगे। बीजेपी ने शुक्रवार को बारां पंचायत समिति के प्रधान मौरपाल सुमन को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद देर शाम स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी, जिसमें जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, राधामोहन दास अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के  अलावा केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, अर्जुनराम मेघवाल, भागीरथ चौधरी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी का नाम शामिल हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि सुमन का टिकट राजे के कहने पर फाइनल किया गया है ऐसे में अब यह चुनाव वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। वसुंधरा राजे टिकट ऐलान के साथ फील्ड में पूरी तरह सक्रिय भी हो गई हैं। हालांकि मुकाबला त्रिकोणीय है। कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया 5 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और 3 में उन्हें जीत मिली है। नरेश मीणा भी निर्दलीय के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं  सुमन का यह पहला विधानसभा चुनाव है। हालांकि सुमन स्थानीय और लो प्रोफाइल नेता माने जाते हैं, लेकिन क्षेत्र के जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने उन्हें एक सोची-समझी रणनीति के तहत मैदान में उतारा है। अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे सुमन को झालावाड़ विधायक और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का 'सियासी आर्शिवाद' प्राप्त है। कांग्रेस ने इस सीट से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है, जबकि नरेश मीना निर्दलीय रूप में चुनावी रण में उतरेंगे। ऐसे में अंता में त्रिकोणीय मुकाबला तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा टिकट की दौड़ में पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी भी शामिल थे। सैनी और सुमन  दौनों ही माली समुदाय से आते हैं। पार्टी रणनीतिकारों ने जातीय समीकरण और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता को ध्यान में रखते हुए सुमन को तरजीह दी। बताया जा रहा है कि प्रभुलाल सैनी को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का समर्थन नहीं मिल पाया, और क्षेत्र में बाहरी छवि होने के कारण उनकी दावेदारी कमजोर हो गई। दूसरी ओर, सुमन वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं। सुमन वर्तमान में बारां जिले के संयुक्त माली महासंघ के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी तिसाया-लसड़िया पंचायत की सरपंच हैं, जिससे क्षेत्र में उनका सामाजिक जुड़ाव और प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह उपचुनाव भाजपा विधायक कंवरलाल मीना की सदस्यता रद्द होने के चलते हो रहा है। मीना को 20 साल पुराने एक मामले में SDM को पिस्तौल दिखाने का दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद मई में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, सीट खाली होने के छह माह के भीतर उपचुनाव कराया जाना अनिवार्य है। 1 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,27,563 मतदाता हैं—1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिलाएं और चार तीसरे लिंग से संबंधित मतदाता। पिछले ड्राफ्ट की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 1,336 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में सरकार बनने के बाद से भाजपा ने अब तक सात उपचुनावों में से पांच पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी है। भाजपा ने खींवसर, डोली-उनियारा, झुंझुनूं, रामगढ़ और सलूंबर सीटों पर कब्जा जमाया है, वहीं कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) को इन उपचुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अंता का यह उपचुनाव विधानसभा में बहुमत को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन इसे सरकार के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा यह सीट जीतने में सफल होती है, तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों को जनता का समर्थन माना जाएगा। वहीं, हार की स्थिति में विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल सकता है। निर्वाचन कार्यक्रम इस प्रकार है:     गजट अधिसूचना जारी: 13 अक्टूबर     नामांकन की आखिरी तारीख: 21 अक्टूबर     नामांकन पत्रों की जांच: 23 अक्टूबर     नाम वापसी की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर     मतदान की तिथि: 11 नवंबर     मतगणना: 14 नवंबर

देशभर के हजारों समाजसेवी एकजुट होंगे AMP National NGO Conference 2025 में, आयोजन लखनऊ में

देशभर के 1000 से ज़्यादा समाजसेवी जुड़ेंगे AMP National NGO Conference 2025 में, लखनऊ में होगा आयोजन शिक्षा, रोज़गार और समाजिक विकास के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय मंच लखनऊ आज इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की गई, जिसमें आने वाले AMP National NGO Conference 2025 की घोषणा की गई। यह कॉन्फ़्रेंस 15 और 16 नवंबर 2025 को इसी स्थान पर आयोजित होगी। यह कार्यक्रम Association of Muslim Professionals (AMP) और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।  राष्ट्रीय स्तर पर NGOs को जोड़ने का प्रयास मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, चेयरमैन, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया और कॉन्फ़्रेंस रिसेप्शन कमेटी के प्रमुख ने कहा: “यह एक ऐतिहासिक पहल है जो देशभर के NGOs और समाजसेवियों को एक मंच पर लाएगी। इस कॉन्फ़्रेंस में शिक्षा और समाजिक विकास को तेज़ करने के तरीकों पर चर्चा होगी। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेज़बानी पर गर्व है।” शिक्षा, आर्थिक विकास और सशक्तिकरण पर ज़ोर जनाब आमिर इदरीसी, प्रेसिडेंट, AMP ने कहा: “इस कॉन्फ़्रेंस का उद्देश्य देश के 130 अल्पसंख्यक ज़िलों में मिलजुल कर विकास का एक रोडमैप बनाना है। AMP पिछले 17 सालों से शिक्षा, रोज़गार और सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम कर रही है। अब हम चाहते हैं कि इन प्रयासों को देशभर के NGOs के साथ मिलकर और आगे बढ़ाया जाए।”  देशभर में तैयारी और जागरूकता अभियान डॉ. अब्दुल अहद, डायरेक्टर, पल्स हॉस्पिटल लखनऊ और कॉन्फ़्रेंस ऑर्गनाइजिंग कमेटी के प्रमुख ने बताया: “हमारी टीम देश के कई शहरों में जाकर NGOs, समाजसेवियों और युवाओं से मिल रही है ताकि उन्हें इस कॉन्फ़्रेंस के बारे में बताया जा सके। हमें बहुत अच्छा और उत्साहजनक सहयोग मिल रहा है। यह साझा प्रयास समाज के विकास के लिए मज़बूत बुनियाद रखेगा।” उन्होंने आगे सभी NGOs, स्कूल मालिकों, शिक्षकों, समाजसेवियों और युवा नेताओं से अपील की कि वे इस नेशनल NGO कॉन्फ़्रेंस में शामिल हों और शिक्षा व समाजिक सुधार के इस अभियान का हिस्सा बनें। “यह केवल एक कॉन्फ़्रेंस नहीं, बल्कि समाज की बेहतरी के लिए मिलकर कदम बढ़ाने का अवसर है,” उन्होंने कहा।  मुख्य विषय और उद्देश्य मुजतबा ख़ान, प्रेसिडेंट, परवाज़ फ़ाउंडेशन और ऑर्गनाइजिंग कमेटी के सदस्य ने बताया: “कॉन्फ़्रेंस में शिक्षा सुधार, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक विकास, NGO की क्षमता निर्माण और AMP के 25 साल के रोडमैप पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य है – एक-दूसरे के अनुभवों को साझा करना और समाज की बेहतरी के लिए सामूहिक दिशा तय करना।” यह दो दिन की कॉन्फ़्रेंस विभिन्न सत्रों, विशेषज्ञ पैनलों और क्षेत्रीय बैठकों के रूप में होगी, जिसमें देशभर से शिक्षाविद, नीति-निर्माता और NGOs के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जो लोग इस कॉन्फ़्रेंस में भाग लेना चाहते हैं या अधिक जानकारी चाहते हैं, वे ngoconnect@ampindia.org पर मेल भेज सकते हैं और विषय (subject) में “National NGO Conference” लिखें।