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मुख्यमंत्री ने शिव शांति आश्रम पहुंचकर किया नमन, अनुयायियों के प्रति जताई संवेदना

सीएम योगी ने किए संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन, अर्पित की श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री ने शिव शांति आश्रम पहुंचकर किया नमन, अनुयायियों के प्रति जताई संवेदना सीएम योगी बोले— सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु का निधन आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लखनऊ स्थित शिव शांति आश्रम पहुंचे और आश्रम के पीठाधीश्वर संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने संत शिरोमणि के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उपस्थित शोकाकुल श्रद्धालुओं के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री योगी ने इस अवसर पर संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के पार्थिव शरीर पर केसरिया अंग वस्त्र ओढ़ाया और उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। गौरतलब है कि संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी बुधवार को ब्रह्मलीन हो गए थे।  मुख्यमंत्री योगी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए बुधवार को ही अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा था,“सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु, पूज्य श्री शांति आश्रम के पीठाधीश्वर, संत शिरोमणि श्री सांईं चांडूराम साहिब जी का निधन अत्यंत दु:खद और आध्यात्मिक समाज की अपूरणीय क्षति है। मेरी संवेदनाएं उनके शोक संतप्त अनुयायियों के साथ हैं। भगवान झूलेलाल से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और अनुयायियों को यह दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!” मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। श्रद्धालुजन और अनुयायी संत शिरोमणि के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की बात करते दिखे।

अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार

दीपोत्सव 2025 दीपोत्सव से रोशन हुए कुम्हारों के घर, अयोध्या में युवाओं को मिल रहा रोजगार अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार 2017 के बाद बदला हाल : कभी हजारों में कमाने वाले अब दीपोत्सव में कमा रहे लाखों दीपोत्सव से अयोध्या के सैकड़ों कुम्हार परिवारों को मिला रोजगार इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ा उत्पादन, आधुनिकता और परंपरा का संगम योगी सरकार की पहल से मिट्टी के दीयों को मिली नई पहचान 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाकर अयोध्या रचेगी नया कीर्तिमान अयोध्या दीपोत्सव शुरू होने के बाद से अयोध्या के कुम्हार परिवारों के घरों में खुशहाली का उजाला फैल गया है। जो युवा कभी काम की तलाश में बाहर जाते थे, वे अब अपनी ही धरती पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योगी सरकार के प्रयासों से शुरू हुए दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या की अर्थव्यवस्था को बल दिया है बल्कि पारंपरिक मिट्टी कला को भी नई पहचान दी है। नौवें दीपोत्सव में इस बार 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी इस महाउत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं। जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि जबसे दीपोत्सव मनाया जा रहा है, तब से वे और उनका परिवार लगातार दीए बना रहे हैं। इस बार उन्हें दो लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की परंपरा शुरू कर हमारे जैसे परिवारों को रोजगार से जोड़ा है। अब हम आत्मनिर्भर हैं। आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादन क्षमता पुराने ढर्रे को छोड़कर अब कुम्हार आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन में तेजी आई है बल्कि दीयों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। जयसिंहपुर गांव के करीब 40 से अधिक कुम्हार परिवार दीपोत्सव के लिए दिन-रात मिट्टी के दीए बनाने में जुटे हैं। कभी हजारों में कमाते थे, अब बन रहे लखपति 2017 से पहले ये कुम्हार रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते थे। दीपोत्सव शुरू होने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां ये परिवार महीने में 20 से 25 हजार रुपये कमाते थे, वहीं अब दीपोत्सव के दौरान ही लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है। सोहावल की पिंकी प्रजापति बताती हैं कि इस बार उन्हें एक लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा, पहले दीपावली के समय दीए सस्ते बिकते थे, अब सरकार के आह्वान से बाजार में अच्छा रेट मिल रहा है। दीपोत्सव ने दी नई पहचान और बाजार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव में मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे स्थानीय कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिल रहे हैं। जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड, सोहावल और आसपास के गांवों में इस समय उत्सव जैसा माहौल है।  अयोध्या के स्थानीय निवासी रामभवन प्रजापति, गुड्डू प्रजापति, राजू प्रजापति, जगन्नाथ प्रजापति, राम भवन प्रजापति, सुनील प्रजापति और संतोष प्रजापति समेत यहां सैकड़ों की संख्या में पूरा परिवार मिट्टी गूंथने, आकार देने और दीयों को सुखाने-बेचने में जुटा है। जानिए, कब कितने दीप जले  वर्ष                जले दीप 2017             1.71 लाख 2018             3.01 लाख 2019             4.04 लाख 2020             6.06 लाख 2021             9.41 लाख 2022           15.76 लाख 2023           22.23 लाख 2024                25.12 लाख

ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक भागीदारी, दिखा विकास के प्रति उत्साह

विकसित यूपी @2047: 75 जिलों में जारी है जनसंवाद, अब तक मिले 41 लाख सुझाव  ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक भागीदारी, दिखा विकास के प्रति उत्साह  शिक्षा, कृषि और समाज कल्याण पर सबसे अधिक सुझाव प्राप्त – बलरामपुर के डॉ. अमित गौतम ने एआई व मशीन लर्निंग सेंटर की स्थापना का दिया सुझाव – फतेहपुर की अंकिता सिंह ने शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर दिया व्यावहारिक सुझाव – बांदा के धीरज कुमार ने पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया – प्रदेश की 40 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में हुई बैठकों और गोष्ठियों से बढ़ा जनसंपर्क – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प के अनुरूप विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की प्रक्रिया जारी लखनऊ उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047 : समृद्धि का शताब्दी पर्व महाभियान’ निरंतर गति पकड़ रहा है। इस जनसहभागिता आधारित अभियान के तहत अब तक लगभग 41 लाख फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों से सर्वाधिक सुझाव आए हैं। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों द्वारा व्यापक जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें छात्र, शिक्षक, उद्यमी, कृषक, स्वयंसेवी संगठन, श्रमिक संघ और मीडिया प्रतिनिधि ने बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। सभी वर्गों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य की दिशा पर अमूल्य सुझाव मिल रहे हैं। इन सुझावों में सर्वाधिक विषय कृषि, शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, उद्योग, आईटी एवं टेक्नोलॉजी, पर्यटन और सुरक्षा से संबंधित रहे। शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक भागीदारी दर्ज की गई। फतेहपुर की अंकिता सिंह ने आकांक्षी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया। उन्होंने अभ्युदय कोचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत अधिकारियों की अनिवार्य कक्षाओं की व्यवस्था और राजकीय विद्यालयों में महिला अधिकारियों के नियमित संवाद का सुझाव दिया। बलरामपुर के डॉ. अमित कुमार गौतम ने सुझाव दिया कि प्रदेश के हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना हो, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तकनीक का अधिकतम उपयोग हो सके। बांदा के धीरज कुमार ने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण पशु चिकित्सा केंद्रों की स्थापना, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही। महाभियान के तहत अब तक प्रदेश की 40 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों, 200 से अधिक नगर पालिकाओं, 15 नगर निगमों, 500 से अधिक नगर पंचायतों, 600 से अधिक क्षेत्र पंचायतों और 50 से अधिक जिला पंचायतों में बैठकों, सम्मेलनों और गोष्ठियों का सफल आयोजन किया गया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप, प्राप्त फीडबैक के आधार पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।    

8 करोड़ की ज़मीन खरीदी, जुर्माना घटाया ₹51 करोड़ से ₹4 हजार: नागार्जुन गौड़ा बोले – सरकार से ली अनुमति

खंडवा मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पदस्थ IAS अफसर नागार्जुन बी गौड़ा एक बार फिर चर्चा में हैं. हरदा के रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद जाट ने एक बार फिर अफसर पर आरोपों लगाए हैं. इस बार आरोप लगाए हैं कि आईएएस अधिकारी ने रिश्वत के रुपयों से राजधानी भोपाल में 8 करोड़ की बेशकीमती 4 एकड़ जमीन खरीदी है. उधर आईएएस अधिकारी नागार्जुन बी गौड़ा ने कहा कि शासकीय सेवा में रहते हुए कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो सरकार की अनुमति से ली है. आरटीआई एक्टिविस्ट आनंद जाट ने आईएएस अधिकारी नागार्जुन गौड़ा पर रिश्वत के रुपयों से जमीन खरीदने का आरोप लगाया है. पत्रकारों से बात करते हुए आनंद जाट ने बताया जिस जमीन को खरीदा है, उसका बाजार मूल्य 2 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है. मतलब 4 एकड़ जमीन की कीमत 8 करोड़ रुपए हुई.  आनंद जाट ने इसके साथ ही एक बार फिर से 51 करोड़ के जुर्माने को 4 हजार करने पर सवाल उठाए और कुछ खामियां भी बताईं. आनंद का कहना है कि इस मामले में अब ईओडब्ल्यू में जाकर शिकायत की जाएगी. भोपाल की जिस जमीन को आईएएस अफसर ने खरीदा है, उस जमीन के दस्तावेजों की पड़ताल aajtak ने भी की. जिसमें पाया कि उक्त जमीन भोपाल के फंदा ब्लॉक के फतेहपुर डोबरा गांव में है. इस 4 एकड़ जमीन की सरकारी गाइडलाइन से कीमत 94 लाख 76 हजार रुपए है.  यह जमीन IAS अफसर नागार्जुन गौड़ा और भोपाल निवासी रोहित शर्मा ने मिलकर 90 लाख रुपए में खरीदी है. नागार्जुन गौड़ा के हिस्से में 2 एकड़ जमीन रहेगी. रजिस्ट्री में लिखे अमाउंट के अनुसार उन्होंने 45 लाख में 2 एकड़ जमीन खरीदी है. हालांकि, यह सब जानते हैं कि जमीन की शासकीय दर और बाजार की दर में अंतर रहता है. IAS अफसर ने आरोपों को नकारा उधर, खंडवा जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन गौड़ा ने aajtak से फोन कॉल पर कहा कि जब शासकीय सेवक प्रॉपर्टी की खरीदी करते हैं, तो शासन से अनुमति लेकर ही खरीदते हैं. उन्होंने भी अनुमति लेकर ही खरीदी की है. ₹51 करोड़ जुर्माने को ₹4 हजार करने का विवाद यह जमीन खरीदी (मार्च 2024 में) हरदा जिले में सड़क बनाने वाली कंपनी पाथ इंडिया को अवैध खनन मामले में क्लीन चिट देने के आदेश के चार माह बाद हुई है. बता दें कि कंपनी को पहले ₹51.67 करोड़ का जुर्माना नोटिस जारी हुआ था, जिसे IAS गौड़ा ने घटाकर मात्र ₹4032 कर दिया था.  आनंद जाट के आरोप RTI एक्टिविस्ट आनंद जाट ने इस मामले को उठाते हुए गौड़ा पर ₹10 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. उनका आरोप है कि आदेश देते समय कंपनी के वकील का पक्ष माना गया, लेकिन अमले के प्रतिवेदन को नजरअंदाज किया गया. आरोप है कि खनन की सही माप के लिए दोबारा जांच नहीं करवाई गई और सामान्य नाप वाला मीटर तहसीलदार के पास उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई, जिससे शासन को ₹51 करोड़ का नुकसान हुआ.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि

रायपुर : बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियां जोरों पर, अब तक 3.09 लाख खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं समय के पहले सुनिश्चित करने के निर्देश बस्तर ओलंपिक की ख्याति पूरे देश में, यह मात्र क्षेत्रीय आयोजन नहीं –  अरुण साव रायपुर बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारियों की बैठक लेकर इसकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विकासखंड स्तरीय आयोजनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल मैदानों की उपलब्धता, उनकी मैपिंग, भोजन, यातायात, आवास, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायकों एवं रेफरियों की व्यवस्था के साथ ही सभी मूलभूत जरूरतों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार और संचालक मती तनूजा सलाम भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थीं। बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में भागीदारी के लिए अब तक तीन लाख नौ हजार से अधिक खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें कांकेर जिले के 42 हजार 228, कोंडागांव के 43 हजार 333, दंतेवाड़ा के 44 हजार 395, नारायणपुर के 46 हजार 074, बस्तर के 52 हजार 312, बीजापुर के 40 हजार 437 तथा सुकमा जिले के 40 हजार 830 प्रतिभागी शामिल हैं। विगत 22 सितम्बर से बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन की शुरूआत की गई थी। खिलाड़ियों के पंजीयन का काम आगामी 20 अक्टूबूर तक जारी रहेगा। बस्तर ओलंपिक का विकासखंड स्तर पर आयोजन 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक, जिला स्तरीय आयोजन 5 नवम्बर से 15 नवम्बर तक तथा संभाग स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 30 नवम्बर तक किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बैठक में बस्तर ओलंपिक की पंजीयन प्रक्रिया एवं व्यापक प्रचार-प्रसार की समीक्षा की। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार-प्रसार की योजनाओं—जैसे दीवार लेखन, मशाल यात्रा, पोस्टर, बैनर, पैंपलेट वितरण, हाट-बाज़ारों में प्रचार इत्यादि की जानकारी ली। उन्होंने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।  साव ने प्रत्येक विकासखण्ड में पंजीयन की स्थिति की समीक्षा कर जिन क्षेत्रों में पंजीयन कम हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिलाओं की तुलना में पुरुष प्रतिभागियों के कम पंजीयन को देखते हुए जिला खेल अधिकारियों को पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।  साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैल चुकी है। अतः इसे राष्ट्रीय महत्व का आयोजन मानते हुए विकासखंड से लेकर संभाग स्तर तक उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ आयोजित किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के निर्णायकों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत के रूप में आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक होने वाले विकासखंड स्तरीय आयोजनों के लिए सभी जिलों को समय पूर्व संपूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  साव ने फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल जैसे खेलों में पंजीयन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने तथा खेल विभाग से प्राप्त बजट के अतिरिक्त जिला कलेक्टरों के सहयोग से सीएसआर निधि से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक मती रश्मि ठाकुर तथा खेल अधिकारी  गिरीश शुक्ला भी बैठक में मौजूद थे। 11 खेलों की स्पर्धाएं होंगी, नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे अपना दमखम विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर एक महीने से भी अधिक समय तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे। 

AIMIM का बड़ा दांव, बिहार में ASP और मौर्य की पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने नया गठबंधन बना लिया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बुधवार को किशनगंज में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी घोषणा की. उन्होंने बताया कि मजलिस ने आजाद समाज पार्टी और स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है, ताकि 'सांप्रदायिक ताकतों को रोका जा सके'. अख्तरुल ईमान ने कहा कि AIMIM बिहार में 35 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं, आजाद समाज पार्टी 25 सीटों पर और स्वामी प्रसाद मौर्य की अपनी जनता पार्टी 4 सीटों पर मैदान में उतरेगी. ईमान ने दावा किया कि तीनों पार्टियां मजबूती से चुनावी मैदान में उतरेंगी और जनता के बीच एक नया विकल्प पेश करेंगी. उन्होंने कहा, हमारी असली लड़ाई सत्ता हासिल करने की नहीं, बल्कि देश में इंसाफ कायम करने की है. ईमान ने यह भी बताया कि उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो चुके हैं और उनका ऐलान देर शाम तक कर दिया जाएगा. इस ऐलान के साथ ही बिहार की सियासत में एक नया मोर्चा बन गया है. ओवैसी की पार्टी पहले से ही सीमांचल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है. किशनगंज, कटिहार और अररिया जैसे जिलों में AIMIM का असर पहले भी देखा जा चुका है. ओवैसी ने किया आरजेडी पर हमला गठबंधन के ऐलान से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने आरजेडी की लीडरशिप पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि आरजेडी की मौजूदा नेतृत्व नादान है और उसमें दूरदर्शिता की कमी है. ओवैसी ने कहा, आरजेडी समझ रही है कि अपनी ताकत पर सबकुछ कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा. मजलिस हमेशा हवाओं को सूंघकर आने वाले सैलाब का अंदाजा लगा लेती है. ओवैसी ने चेतावनी देते हुए कहा, हम देख रहे हैं कि तूफान आने वाला है, लेकिन ये लोग पानी से भीगने के बाद कहेंगे कि सैलाब आ गया. बहुत देर हो जाएगी. अगर बराबरी की बात करेंगे तभी बीजेपी और मोदी को रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पहले भी विपक्षी एकता की बात की थी, लेकिन इन लोगों ने हमारी बात को नहीं माना. ओवैसी ने यह भी कहा कि जब चुनाव परिणाम आएंगे, तब सबको एहसास होगा कि AIMIM ने सही मायने में कोशिश की थी.

महतारी वंदन योजना से बदल रही हैं छत्तीसगढ़ की महिलाओं की जिंदगी

रायपुर : हर महीने एक हजार रुपए बन रहा आत्मनिर्भरता का आधार महतारी वंदन योजना से बदल रही हैं छत्तीसगढ़ की महिलाओं की जिंदगी रायपुर में हर महीने 1000 रुपए से संवर रहा आत्मनिर्भरता का सपना रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना आज महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की नई राह बना रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित यह योजना नारी सम्मान और गरिमा का प्रतीक बन चुकी है। रायगढ़ जिले में अब तक 3 लाख 15 हजार 78 महिलाओं के खातों में 523 करोड़ 47 लाख रुपए से अधिक की राशि अंतरण की जा चुकी है। दीपावली से पहले जारी 20वीं किस्त के तहत 25 करोड़ 38 लाख 75 हजार रुपए की राशि भी महिलाओं को मिली है। हर माह मिलने वाले एक हजार रुपए ने महिलाओं को आर्थिक मजबूती दी है। ग्राम आमापाली की मती पुष्पा महंत बताती हैं कि योजना से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च संभालना आसान हुआ है। मती मुस्तरी बेगम और मती दुरपति बरेठ कहती हैं कि यह योजना उनके जीवन में स्थिरता और आत्मनिर्भरता का आधार बनी है।राज्य की कई महिलाएं अब इस राशि को बीज पूंजी बनाकर छोटे व्यवसाय जैसे सिलाई-सेंटर, किराना दुकान और हस्तशिल्प कार्य शुरू कर रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार और सशक्त समाज की नींव है।महतारी वंदन योजना आज छत्तीसगढ़ की महिलाओं के आत्मविश्वास और सम्मान की नई पहचान बन गई है।महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया आधार दिया है। यह योजना नारी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

पत्थर में बसी कला: गायखुरी रंगोली ने बना दी मिसाल

बालाघाट  जिला मुख्यालय स्थित गायखुरी की रंगोली एक समय पहले बहुत प्रसिद्ध हुआ करती थी। मगर यह रंगोली समय के साथ कहां लुप्त हो गई इसका पता ही नहीं चला। शहर के वार्ड नंबर 33 गायखुरी घाट के पत्थरों से बनाई जाने वाली रंगोली अब इतिहास की बात बनकर रह गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि करीब 30 से 35 वर्ष पहले तक गायखुरी घाट में मिलने वाले पत्थरों की पिसाई कर रंगोली बनाई जाती थी। अब बदलते समय के साथ बंद कर दी गई। रंगोली बनाने से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता था और दीपावली का खर्चा भी निकल आता था। लेकिन समय के साथ अब यह काम बंद हो चुका है। बाहर से आने वाली रेडिमेट रंगोली ने मार्केट में अपनी जगह बना ली है। गायखुरी घाट के पत्थर से बनाई जाने वाली रंगोली अब इतिहास बन कर रह गई है। ऐसे बनती थी प्राकृतिक रंगोली जानकारी के अनुसार पहले जागपुर घाट से लेकर गायखुरी घाट तक केवल रंगोली बनाने का कार्य ही होता था। रंगोली के पत्थर को सब्बल से तोडकऱ उसके छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते थे, फिर रोड में बिछा दिया जाता था। पत्थर चुरा होने पर उसे छानकर प्राकृतिक रंग मिलाए जाते थे। या फिर पत्थर को घर ले जाकर उसे कूटते थे, छानने के बाद उसमें प्राकृतिक रंग मिलाकर रंगोली तैयार की जाती थी। आज भी यहां का पत्थर काफी चमकीला है। यदि रंगोली बनाने का कार्य फिर शुरू किया जाए तो पूरे जिले में यही की रंगोली को लोग पसंद करेंगे। बाजार में आसानी से रंगोली उपलब्ध होने के चलते इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। दूसरे राज्यों में भी थी मांग गायखुरी घाट की रंगोली की मांग बालाघाट जिले ही नहीं बल्कि सिवनी, छग और महाराष्ट्र राज्य के अन्य जिलों में भी भारी मात्रा में रहती थी। गायखुरी घाट से चमकीले पत्थर को खोदकर निकाला जाता था। पिसाई कर उसे मार्केट में बेचने के लिए उपलब्ध कराया जाता था। एक जमाने में गायखुरी की रंगोली इतनी फेमस हो गई थी कि इसकी डिमांड बढऩे के साथ ही यहां से पत्थर निकाल कर उसे तिरोड़ी, केवलारी और तिरोड़ा की मील में पाउडर बनाने के लिए भेजा जाता था। पाउडर बनने के बाद उसमें तरह-तरह के प्राकृतिक रंग मिलाए जाते थे और रंगोली तैयार कर उसकी सप्लाई बाहर राज्यों तक में में होती थी। लेकिन अब इस घाट में रंगोली बनाने की प्रथा समाप्त हो चुकी है। केवलारी की खदानों ने ली जगह बताया गया कि गायखुरी घाट के पत्थरों की जगह केवलारी क्षेत्र की खदानों से निकलने वाले चमकीले पत्थरों में ले ली है। बताया जा रहा है कि केवलारी क्षेत्र की खदानों से निकलने वाले पत्थर गायखुरी से निकलने वाले पत्थरों से ज्यादा चमकीले हैं। जिससे गायखुरी के पत्थरों की मांग लगातार घटने लगी। वर्तमान में यह पूर्ण तरह से बंद हो गई है।   रेडीमेड रंगोली ने बनाई पकड़ स्थानीय बुजुर्गो के अनुसार धीरे-धीरे दूसरे राज्यों की केमिकल युक्त रेडीमेड रंगोली ने अपनी पकड़ बना ली। बाजार में रंगोली आसानी से उपलब्ध होने से लोगों ने भी यह कार्य छोड़ दिया और गायखुरी के पत्थर से रंगोली बनाने की प्रथा धीरे-धीरे लुप्त होते गई। मांग कम होने से लोगों ने यह व्यापार बंद कर दिया और आज गायखुरी घाट की रंगोली वाली दास्तान लोगों की जुबान में महज एक किस्सा बनकर रह गई है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कॉस्मेटिक, केमिकल के इस दौर में आज भी लोग उस प्राकृतिक रंगोली को याद करते हैं। जो रंगोली बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रही है, उस रंगोली में घातक केमिकल, रंग, रेत और डीजल का उपयोग धड़ल्लेसे किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चिकित्सक भी केमिकल वाली रंगोली से बचने की सलाह देते हैं। लेकिन बाजार में आसानी से मिलने के कारण लोग इस रंगोली का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। अब स्वयं खरीद रहे रंगोली गायखुरी घाट का पत्थर इतना अधिक चमकीला था कि उसमें चमक पैदा करने रेत या केमिकल मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर रंगोली बनाई जाती थी। इस व्यवसाय को लगभग पूरा गांव करता था। लेकिन अब जो लोग उस समय रंगोली बनाते थे। वे आज खुद रंगोली खरीद कर अपना आंगन सजा रहे हैं।

पत्रकारिता में निष्पक्षता ही लोकतंत्र की ताकत : मुख्यमंत्री का बयान

निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की असली ताकत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा आयुध अपडेट्स पत्रिका के कार्यक्रम से जुड़े भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की असली ताकत है। प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को जनमाध्यमों में स्थान मिल रहा है। हमारे पत्रकार बंधुओं ने ही पूरे राष्ट्र और विश्व को अवगत करवाया है कि मध्यप्रदेश के चंदेरी और रायसेन जैसे स्थान प्राचीन काल में जोहर के साक्षी रहे हैं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के ट्ंटया भील  और भीमानायक जैसे जनजातीय नायकों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लोककल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम नागरिकों तक आसानी से पहुंचती है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम रीवा से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा भोपाल में मासिक पत्रिका आयुध अपडेट्स के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुध अपडेट्स को इस समारोह के आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पत्रिका द्वारा प्रदेश की सांस्कृतिक परम्पराओं और विकास से जुड़ी समाचार कथाओं की प्रस्तुति प्रशंसनीय है। मध्यप्रदेश की धरती पंडित माखनलाल चतुर्वेदी से लेकर डॉ. वेद प्रताप वैदिक तक अनेक प्रख्यात कलमकारों के कृतित्व की साक्षी रही है। भारत रत्न स्व. अटल जी भी मूलत: पत्रकार और कवि थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्कारों को आत्मसात कर अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज नई तकनीक और सोशल मीडिया का चलन अधिक है। लेकिन पत्रकारिता के इस स्वरूप के समक्ष चुनौतियां भी अनेक हैं। तेज गति के मान से डिजिटल मीडिया का अपना प्रभाव है। कुछ ही पल में लाखों लोगों तक संदेश पहुंच जाता है। लेकिन मुद्रत माध्यमों की धरोहर दीर्घ अवधि तक बनी रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों को अधिमान्यता, बीमा योजनाओं के साथ ही वृद्ध पत्रकारों को सम्मान निधि के रूप में दी जा रही सुविधाओं की भी जानकारी दी। इस अवसर पर अनेक सामाजिक कार्यकर्ता  हेमंत मुक्ति बोध ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अनेक प्रबुद्धजन और मीडियाकर्मी उपस्थित थे।      

जेपी गंगा पथ एक्सटेंशन: दीघा-कोईलवर के बीच जनवरी से शुरू होगा काम, बढ़ेगी कई इलाकों की कनेक्टिविटी

पटना बिहार की राजधानी पटना के दीघा से कोईलवर तक जेपी गंगा पथ के निर्माण कार्य की शुरुआत जनवरी 2026 से की जाएगी। यह प्रोजेक्ट न केवल पटना को सोन नदी के पार क्षेत्रों से जोड़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली की यात्रा को भी आसान बनाएगा। इस नए गंगा पथ के निर्माण का आम लोगों को सीधा फायदा होगा। जेपी गंगा पथ कुल 5500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा। इसकी कुल लंबाई 35.65 किमी है. इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण हम मॉडल पर किया जा रहा है। इसका गंगा पथ का निर्माण कार्य 4 वर्षों में पूरा किया जाएगा। निर्माण के बाद अगले 15 वर्षों तक इसके रखरखाव का जिम्मा एजेंसी का होगा। निर्माण में क्या होगा खास?     18 किमी एलिवेटेड (उपरिगामी) रोड     17.65 किमी ग्राउंड लेवल रोड     सड़क दीघा से शुरू होकर शेरपुर होते हुए कोईलवर के पास सोन नदी पर बने नए पुल से जुड़ेगी। ऐसे होगा फंडिंग का बंटवारा कुल 5500 करोड़ रुपए की लागत में से 60% (₹3300 करोड़) निर्माण एजेंसी वहन करेगी। वहीं 40% (₹2200 करोड़) राशि राज्य सरकार देगी।  15 वर्षों तक एजेंसी को इसका भुगतान ब्याज सहित किया जाएगा। रखरखाव की राशि अलग से सरकार द्वारा दी जाएगी इन जगहों से होगी कनेक्टिविटी     दानापुर, शाहपुर बाजार जैसे प्रमुख इलाकों से डायरेक्ट लिंक     दीघा सेतु, शेरपुर-दिघवारा सेतु, कोईलवर सेतु, बक्सर सेतु, जनेश्वर मिश्र सेतु और आरा-छपरा सेतु से बेहतर संपर्क     पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के ज़रिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक आसान सफर लोगों को क्या होगा फायदा?     पटना से बक्सर तक गाड़ियां 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगी     जाम-मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा     दिल्ली, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया और गोरखपुर जैसे शहरों तक यात्रा होगी आसान     व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा कनेक्टिविटी     इस नए रूट से बड़े सेतु और पुलों से जुड़ाव होगा, जैसे –     दीघा सेतु, शेरपुर-दिघवारा सेतु     कोईलवर सेतु, आरा-छपरा सेतु     जनेश्वर मिश्र सेतु, बक्सर सेतु     साथ ही दानापुर, शाहपुर बाजार आदि महत्वपूर्ण स्थान भी इस मार्ग से जुड़े होंगे