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मंत्री रामविचार नेताम आनंद जिले के प्रसिद्ध अमूल प्रोसेसिंग प्लांट का किया अवलोकन

रायपुर छत्तीसगढ़ के पशुधन एवं मछली पालन मंत्री  रामविचार नेताम गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित “राइजिंग एग्री समिट” में शामिल हुए। उन्होंने आनंद जिले के प्रसिद्ध अमूल प्रोसेसिंग प्लांट के डेयरी प्रबंधन, आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीकों और मूल्य संवर्धन की प्रक्रियाओं का अवलोकन भी किया। गुजरात में आयोजित इस समिट में देश-विदेश के विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया। मंत्री  नेताम ने कहा कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर ही इस यात्रा से प्राप्त अनुभवों को राज्य की नीतियों और योजनाओं में शामिल कर किसानों और पशुपालकों के लिए नए अवसर सृजित किए जाएंगे। मंत्री  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सभी प्रकार के किसानों के उन्नति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने समिट में बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार समर्थन मूल्य के साथ-साथ कृषि उन्नति योजना लाकर किसानों के समृद्धि के लिए काम कर रही है, वहीं भूमिहीन मजदूर किसानों के लिए भी वार्षिक सहायता का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार कृषि विकास के कार्यों के साथ ही पशुपालक और मत्स्य किसानों की सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिए हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाले जनजातीय परिवारों को दुधारु गाय दिए जा रहे हैं। इससे वनांचल में रहने वाले जनजातियों को अतिरिक्त आमदनी हो रही जिससे, उनके जीवन में बदलाव देखने को मिल रहा है।  मंत्री  नेताम ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ में डेयरी और पशुधन क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए लिए गए फैसलों व बनाए गए नीतियों सहित संचालित योजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उनके साथ पशुधन विकास विभाग के निदेशक  चंद्रकांत वर्मा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

सरकार की नई गाइडलाइन: राशन कार्ड धारक जल्द निपटाएं यह प्रक्रिया, नहीं तो होगी दिक्कत

बरनाला  पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों को राशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चल रही ई-के.वाई.सी. प्रक्रिया में जिला बरनाला ने सराहनीय प्रगति दर्ज की है। डिप्टी कमिश्नर बरनाला टी. बैनिथ ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 89.30 प्रतिशत लाभार्थियों की ई-के.वाई.सी. सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। डी.सी. ने बताया कि जिले में कुल 71,427 परिवारों के 2,74,095 लाभार्थी राशन योजना के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से अब तक 2,44,773 सदस्यों की ई-के.वाई.सी. पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 29,322 लाभार्थियों की ई-के.वाई.सी. की प्रक्रिया जारी है। डिप्टी कमिश्नर ने आगे कहा कि ई-के.वाई.सी. के साथ-साथ लाभार्थियों का सर्वे भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और पात्र लोगों को ही सरकारी योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय के अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ई-के.वाई.सी. और सर्वे कार्य में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। डी.सी. टी. बैनिथ ने लोगों से अपील की कि वे प्रशासन का सहयोग करते हुए शीघ्र अपनी ई-के.वाई.सी. पूरी करवाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना गरीब और वंचित वर्ग तक आसानी से राशन पहुंचाने के लिए बनाई गई है, इसलिए इसमें देरी करने से लाभार्थी खुद ही नुकसान उठा सकते हैं। इस दौरान जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक रूपप्रीत संधू ने जानकारी दी कि जो लाभार्थी अब तक ई-के.वाई.सी. नहीं करवा पाए हैं, वे 30 सितम्बर 2025 तक इसे अनिवार्य रूप से पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि लाभार्थी अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता या सीधे जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय से सम्पर्क कर ई-के.वाई.सी. करवा सकते हैं। संधू ने यह भी कहा कि यह कार्य बहुत सरल है और इसके लिए लाभार्थी को आधार कार्ड, राशन कार्ड और आवश्यक पहचान दस्तावेज उपलब्ध करवाने होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो परिवार समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगे, उनके राशन वितरण में बाधा आ सकती है।

प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऑस्कर नॉमिनेशन ने बढ़ाया प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल और आस पास के क्षेत्रों में की गई फिल्म ‘होमबाउंड’ की पूरी शूटिंग वर्ष 2024 में फिल्म लापता लेडीज पहुंची थी ऑस्कर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। वैश्विक स्तर पर सराही गई फिल्म 'लापता लेडीज' के बाद, अब राज्य में शूट हुई फीचर फिल्म 'होमबाउंड' को 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चयनित किया गया है। गतवर्ष फिल्म लापता लेडीज को भी ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर फिल्म की पूरी टीम को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश में शूट हुई फिल्म होमबाउंड को ऑस्कर के लिए चुना गया है। यह न केवल फिल्म जगत के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक अभूतपूर्व गौरव का क्षण है। मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन नीति-2025 ने सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रिया और अनुमतियों को कम एवं सरल कर फिल्मांकन को आसान बनाया है। साथ ही आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए हैं। होमबाउंड का मध्यप्रदेश में फिल्माया जाना और उसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा है। यह सफलता हमारे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के उन सभी युवा फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को पंख देना चाहते हैं। फिल्म होमबाउंड का चयन भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो मध्यप्रदेश की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि होमबाउंड ऑस्कर में भी शानदार सफलता हासिल करेगी और भारत के साथ मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेगी। फिल्म होमबाउंड की पूरी शूटिंगवर्ष 2024 में एक बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के भोपाल और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक, सांस्कृतिक और शहरी परिवेश में शूट किया गया है। फिल्म की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा राज्य की फिल्म अनुकूल नीतियों और फिल्म की कहानी के अनुसार उपयुक्त लोकेशनों की सफलता का प्रमाण है। गौरतलब है कि होमबाउंड फिल्म, धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है। मध्यप्रदेश में शूट होने वाली यह उनकी 5वीं फिल्म है। फिल्म के निर्माता करण जौहर हैं। निर्देशक  नीरज घेवान हैं। इससे पहले उनके निर्देशन में बनी “मसान” फिल्म को भी दर्शकों ने खूब सराहा था। 'होमबाउंड' में कलाकार ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं।   नई टूरिज्म पॉलिसी ने फिल्मांकन किया आसान मध्यप्रदेश की नई फिल्म टूरिज्म पॉलिसी ने निर्माता–निर्देशकों का काम आसान किया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं सब्सिडी से निर्माता–निर्देशकों को प्रोत्साहन मिला है। मध्यप्रदेश की फिल्म टूरिज्म पॉलिसी के बाद प्रदेश में 350 से अधिक फिल्में और वेबसीरीज शूट हो चुकी हैं। अब तक 12 हिंदी फिल्में, 1 तेलुगु फिल्म और 6 वेब सीरीज को 24 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय अनुदान दिया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।  

करियर का मौका: एमपी में नई ट्रेनिंग कोर्स से मिलेगा रोजगार, एलएंडटी और आरजीपीवी का समझौता

भोपाल  देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी लाखों युवा बेरोजगार हैं। ये युवा प्रतिभावान होने के साथ ही उच्च शिक्षित भी हैं पर उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही। दरअसल रोजगार परक कोर्स नहीं किए जाने के कारण ये दिक्कत आती है। प्राइवेट कंपनियों और उद्योगपतियों का कहना है कि युवा उच्च शिक्षा जरूर लेते हैं पर उनमें उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव पाया जाता है। एमपी में अब यह दिक्कत दूर करने की पहल की गई है। प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से निकलनेवाले युवाओं और उद्योगों, कंपनियों के लिए जरूरी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिए अहम करार किया गया है। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में एलएंडटी द्वारा विकसित स्पेशल कोर्स लांच किए जा रहे हैं। कोर्स पूरा करने पर स्टूडेंट को सर्टिफिकेट मिलेंगे जोकि युवाओं को तुरंत नौकरी दिला सकेंगे। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयीन कोर्स को उद्योगों, कंपनियों की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में हर साल 50 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल की जरूरत को देखते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। पायलट प्रोेजेक्ट के रूप में इन्हें आरजीपीवी के माध्यम से लांच किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।  

जल्द शुरू होगा सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण, मिट्टी जांच का काम हुआ पूरा

ग्वालियर ग्वालियर से आगरा के बीच 4613 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने मृदा परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। गत अप्रैल माह में कंपनी को ठेका मिल गया था और उसे छह माह का समय संसाधन जुटाने के साथ ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दिया गया था। अब कंपनी अक्टूबर माह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने तीन बेस कैंप तैयार करेगी और तीन ही स्थानों से एक्सप्रेस वे के निर्माण की शुरूआत की जाएगी। फोरलेन हाईवे का होगा निर्माण हालांकि निर्माण कार्य नवंबर माह से शुरू होगा और 30 माह के अंदर कंपनी को यह काम पूरा करना होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के साथ ही कंपनी द्वारा वर्तमान फोरलेन हाईवे के पुनर्निर्माण का कार्य भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली जीआर इंफ्रा कंपनी को अक्टूबर तक का समय निर्माण कार्य के लिए दिया गया है। इस बीच कंपनी ने आगरा, धौलपुर, मुरैना जिलों में साइल टेस्टिंग (मृदा परीक्षण) का काम पूरा कर लिया है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने पर कोई अड़चन ना आए। इसके अलावा अलाइनमेंट ठीक रहे और सारे पुल-पुलियों का काम बेहतर तरीके से हो सके, इसके लिए कंपनी द्वारा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ काम की शुरूआत की जाएगी। इसके लिए कंपनी द्वारा तीन बेस ऑफिस भी तैयार किए जाएंगे। काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी वर्तमान में धौलपुर में एक बेस ऑफिस का काम लगभग अंतिम चरण में है। यहां जमीन पर बाउंड्रीवॉल तैयार कर ली गई है और अंदर अस्थायी कैंप कार्यालय बनाया जाएगा। इसके अलावा भूमि के अधिग्रहण के बदले मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी होने को है। भूमि अधिग्रहण पूरा हो जाने के बाद एनएचएआइ को पजेशन दिया जाएगा। सरकारी रिकार्ड में भी एनएचएआइ के नाम पर एंट्री की प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में अक्टूबर तक कंपनी को जमीन भी एनएचएआइ उपलब्ध करा पाएगा। एनएचएआइ के अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने बेस ऑफिस बनाने शुरू कर दिए हैं और काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी। ग्वालियर व मुरैना में भी बनेंगे कार्यालय कंपनी को नए एक्सप्रेस वे के साथ ही वर्तमान हाईवे की मरम्मत का भी काम करना है। ये हाईवे निरावली रायरू तक आता है। इसके अलावा नए एक्सप्रेस वे का अलाइनमेंट भी सुसेरा गांव के पास होगा। ऐसे में कंपनी द्वारा ग्वालियर व मुरैना में भी कार्यालय बनाए जाएंगे ताकि एक ही स्थान से दोनों प्रोजेक्टों की निगरानी व संचालन में दिक्कत ना आए।  31 पुल तैयार होंगे, छह फ्लाइओवर व एक आरओबी बनेगा इस पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत 31 पुल तैयार किए जाएंगे। इसमें आठ बड़े पुल और 23 छोटे पुल शामिल हैं। इसके अलावा 192 कलवर्ट यानी पुलिया भी तैयार की जाएंगी। इसके अलावा छह फ्लाइओवर और एक रेल ओवरब्रिज भी तैयार किया जाएगा। ये ओवरब्रिज जाजऊ स्टेशन के पास बनाया जाएगा। इसके अलावा चंबल नदी पर 300 मीटर लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जाएगा। इस ब्रिज का कोई भी पिलर नदी में खड़ा नहीं किया जाएगा, बल्कि नदी के किनारों पर पिलर तैयार होंगे। नदी के ऊपर पूरा पुल झूलता रहेगा। ये है प्रोजेक्ट ग्वालियर से आगरा के बीच 88.400 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस वे का एनएच नंबर 719डी रखा गया है। एक्सप्रेस वे बनने के बाद आगरा से ग्वालियर पहुंचने में एक से सवा घंटा लगेगा। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका जीआर इंफ्रा कंपनी को दिया गया है।  

नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम

आरजीपीवी-एलएंडटी एजूटेक की साझेदारी से तैयार होंगे इंडस्ट्री-रेडी इंजीनियर्स नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से तैयार होने वाले मानव संसाधन और उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिये निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अब तकनीकी कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण में नवाचार की दृष्टि से एलएंडटी द्वारा विकसित विशेष पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियंरिंग संस्थानों में लाँच किये जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक-ईकोसिस्टम सशक्त बनेगा। साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे टियर-2 शहर नवाचार के नए केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत वर्षों में प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल को आवश्यक मानते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष रूप से विकसित पायलट पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से लाँच किये गये हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये है। एलएंडटी एजुटेक तकनीकी और शैक्षणिक सामग्री तथा ट्रेनर-सपोर्ट प्रदान करेगी, आरजीपीवी अकादमिक समन्वय एवं विद्यार्थी चयन में भूमिका निभाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय व तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा। एलएंडटी एजूटेक आरजीपीवी में दो पायलट कोर्स आरम्भ करेगी जो पांचवें सेमेस्टर से पढ़ाये जाएंगे। इनमें ‘डेटा हैंडलिंग के लिए पायथन’ और फ्रंट-एंड यूआई/यूएक्स शामिल हैं। एलएंडटी एजूटेक के पायलट पाठ्यक्रम के प्रारम्भिक बैच में 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पाठ्यक्रम में 75 घंटे का संरचित कार्यक्रम शामिल होगा। विद्यार्थियों को ‘ऑनलाइन कंटेंट + लाइव एक्सपर्ट सेशंस + प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग + वर्चुअल लैब’ से प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक अनुभव बढ़ाया जायेगा। प्रारंभिक बैच में आरजीपीवी में चयनित विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंडस्ट्री-इंटर्नशिप मॅचमेकिंग, एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन मॉड्यूल और राज्यस्तरीय रोलआउट टाइमलाइन। एमपीएसईडीसी द्वारा नियमित प्रगति रिपोर्ट और परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर उपयुक्त निर्णय लिए जा सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक पायलट पाठ्यक्रम है, परिणाम सकारात्मक आने पर इसे प्रदेश के दूसरे टेक्निकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मूल्यांकन में परियोजना-आधारित आकलन, ऑनलाइन टेस्ट, प्रशिक्षक-आधारित फीडबैक और वर्चुअल लैब प्रोजेक्ट की प्रस्तुति शामिल की जायेगी। पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर एलएंडटी एजूटेक तथा आरजीपीवी के सम्मिलित मानदंडों के अनुरूप ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएँगे।    

धार्मिक स्थलों की यात्रा आसान: पंजाब से स्पेशल ट्रेन की शुरुआत

पंजाब  धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वालों के लिए एक बेहद ही खास खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRCTC) ने धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है।  दरअसल, IRCTC ने चार ज्योतिर्लिंग और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी यात्रा की शुरूआत की है। भारत गौरव ट्रेन यात्रा 25 अक्तूबर से शुरू होगी जोकि अमृतसर रेलवे स्टेशन से रवानी होगी। इसका सफर कुल 9 दिन और 8 रातों का होगा। श्रद्धालुओं के लिए खुशी बात ये है कि इस धार्मिक यात्रा के दौरान चार ज्योतिर्लिंग उज्जैन महाकालेश्वर, द्वारका नागेश्वर व द्वारकाधीश मंदिर, इंदौर औंकारेश्वर, वेरावल सोमनाथ और केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दर्शन कर सकेंगे। कौन से स्टेशनों पर होगा ठहराव मिली जानकारी के अनुसार भारत गौराव पर्यटक ट्रेन अमृतसर से रवाना होकर जालंधर, लुधियाना, चंडीगढ़, दिल्ली और रेवाड़ी से होते हुए धार्मिक स्थलों पर पहुंचेगी। 25 से यात्रा शुरू होकर 2 नवंबर को यात्रा फिर अमृतसर स्टेशन पर समाप्त होगी। कितना आएगा खर्चा जानकारी के अनुसार इस ट्रेन 640 स्लीपर क्लास सीट, 70 सीटें 3 एसी स्टैंडर्ड, 52 सीटें 2 एसी कम्फर्ट उपलब्ध है। वहीं रही बात किराए की तो इसमें सफर करने वाले यात्रियों को स्लीपर क्लास सीट के लिए 19,555 रुपए, 3 एसी स्टैंडर्ट के लिए 27,815 और 2 एसी कम्फर्ट के लिए 39,410 रुपए टिकट प्रति व्यक्ति खर्च करने होगे। सबसे बड़ी बात ये है कि, अब तक 300 से अधिक टिकटे बिक भी चुकी हैं। अगर आप भी इस यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो जल्दी से टिकट बुल कर लें।

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से हर घर में पहुंचेगी सूरज की रोशनी, बिजली बनेगी, ज़िंदगी बदलेगी

रायपुर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से हमेशा के लिए राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।  देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल आने जाने के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार है, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है।  रंजीत कुमार जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं।  हर महीने आने वाला बिजली बिल, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों के बीच बिजली बिल अक्सर उनके बजट को बिगाड़ देते थे। यही कारण था कि जब प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाने का निश्चय किया। दो माह पहले आवेदन करके उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। जिसकी कुल लागत लगभग 2 लाख 10 हजार रुपए रही, 78 हजार रुपए केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही मिल चुकी है। शेष राशि में उन्होंने सस्ती व आसान दर पर लोन लेकर तथा कुछ नकद भुगतान देकर किया। सिर्फ कुछ हफ्तों में ही यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनके घर का बिजली बिल हर महीने एक हजारों रुपए तक पहुँच जाया करता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र 130 रुपए आ रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण की भी बड़ी मित्र है। सौर ऊर्जा से न केवल कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहाँ कोयला आधारित बिजली उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान है। परिवारों को बिजली बिल से मुक्तिमिल रही है, घरों में रोशनी और उपकरणों का संचालन संभव हो रहा है, लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।  कुमार और उनके परिवार ने बताया “अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सौर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं।  आज उनका घर न केवल रोशन है बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आदर्श भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अब तक बिजली का स्थाई उपाय ढूंढ रहें थे। पीएम सूर्यघर योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।

8589 पदों पर पुलिस भर्ती: परीक्षा से पहले होगी कड़ी जांच, टैटू वाले candidates रखें सतर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में 2022 में पटवारी भर्ती परीक्षा और 2023 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बड़े सवाल उठे थे. एक बार फिर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 8589 पदों पर पुलिस भर्ती कराई जा रही है. पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से बड़ा सबक लेते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस बार खास सर्तकता बरत रहा है. गड़बडी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा. मुन्नाभाईयों पर नकेल कसने के लिए इस बार सिर्फ आधार वेरिफिकेशन और थंप इंप्रेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि एआई तकनीक से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान भी किया जाएगा. उधर फिजिकल के लिए भी पुलिस मुख्यालय नियम तैयार कर रहा है. इस बार शरीर पर टैटू बनवाने वालों को भर्ती प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है. अब सिर्फ फिंगर प्रिंट से नहीं चलेगा काम मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट मिलान से ही काम नहीं चलेगा. इसके अलावा कई सुरक्षा फीचर्स का उपाए इस बार किया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा से सबक लेकर यह किया गया है. 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा में मुन्नाभाई फिल्म की तर्ज पर भर्ती में फर्जीवाड़ा किया गया था. अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठाकर एग्जाम पास किया था. इस परीक्षा में शामिल होने वाले एग्जाम सेंटर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के थंब इंप्रेशन का मिलान किया गया था, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने सांठगांठ कर आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट ही अपडेट करा लिए और अपने स्थान पर मुन्नाभाई को परीक्षा केन्द्र में पहुंचा दिया. हालांकि जब ज्वाइनिंग का मौका आया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. 2022 में हुई पटवारी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. इसमें मेरिटी लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले थे. दो परीक्षाओं के बाद यह लिया निर्णय मध्य प्रदेश में अब हो रही 8589 पदों पर भर्ती को लेकर एमपी कर्मचारी चयन मंडल ने 3 बड़े बदलाव किए हैं, ताकि मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सके. पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट मिलान से काम नहीं चलेगा. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों का आधार कार्ड में लगाए गए फोटो से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान किया जाएगा. इसके लिए सभी सेंटर पर फेस रिकग्नीशन कैमरे लगाए जाएंगे. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले सभी अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट का मिलान तो होगा ही, साथ ही अभ्यर्थियों की आंखों की पुतली के पैटर्न का भी मिलान करेगा, ताकि यदि कोई फिंगर प्रिंट चैंज भी करा ले, तो आंखों की पुतली से उसे पकड़ा जा सके. इस बार परीक्षा सेंटर बनाने में भी विशेष सर्तकता बरती जा रही है. इस बार 11 प्रमुख शहरों में ही परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में ही ऑनलाइन परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. पूर्व में विवादित हो चुके शहरों में परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के संचालक साकेत मालवीय कहते हैं कि "परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए इस बार आंखों की पुतली की स्कैनिंग और एआई के उपयोग जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं." टैटू बनवाने से बचें अभ्यर्थी उधर पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. इसमें अभ्यर्थियों का मेडिकल टेस्ट और फिजिकल टेस्ट भी होगा. इसमें ऐसे उम्मीदवारों को परेशानी आ सकती है, जिनके शरीर पर किसी तरह के फैशनेबल टैटू बने होंगे. आमतौर पर नवरात्री में गरबा जैसे आयोजन में हिस्सा लेने के पहले युवा शरीर पर आकर्षक टैटू बनवा लेते हैं. पुलिस भर्ती में सिलेक्शन में ऐसे टैटू परेशानी बन सकते हैं. एडीजी चयन एवं भर्ती शाहिद अबसार कहते हैं कि "सेना में आमतौर पर नियम होता है कि शरीर पर किसी तरह का टैटू आदि नहीं होना चाहिए, जो उनके शिष्टाचार के नियम को तोड़े. मध्य प्रदेश पुलिस में भी शिष्टाचार का विशेष ध्यान रखा जाता है. पुलिस भर्ती को लेकर शासन स्तर से इसको लेकर नियम आए तो ऐसे अभ्यर्थियों को समस्या हो सकती है."

इतिहास रचते हुए बलौदाबाजार के युवाओं ने की बाइक से चारधाम यात्रा, कहा – हर किसी को करनी चाहिए ऐसी सफर

बलौदाबाजार  कभी केवल आस्था का केंद्र समझी जाने वाली चारधाम यात्रा अब साहस और रोमांच का प्रतीक भी बन रही है. बलौदाबाजार नगर के दो युवाओं ने साहस और आस्था का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है. नगर के शालीन साहू और हरि पटेल ने बाइक से 16 दिनों में करीब 4400 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर उत्तराखंड स्थित चार धाम – केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए. इससे पहले भी ये दोनों युवा अपनी साहसिक यात्राओं के लिए जाने जाते रहे हैं. वे उत्तरप्रदेश के प्रयाग कुंभ, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और आंध्रप्रदेश के श्री शैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की लंबी यात्राएं बाइक से पूरी कर चुके हैं. सोनपुरी मंदिर से शुरू हुई यात्रा: दोनों युवाओं ने अपनी यात्रा 2 सितम्बर को बलौदाबाजार के सोनपुरी स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर से आशीर्वाद लेकर शुरू की. रास्ते में छत्तीसगढ़ के मुंगेली, पंडरिया, मध्यप्रदेश के शहडोल और कटनी होते हुए उत्तरप्रदेश के कई शहरों को पार किया. इसके बाद हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे और वहां से उत्तराखंड के सोन प्रयाग तक बाइक से सफर किया. केदारनाथ की यात्रा उन्होंने पैदल पूरी की, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए करीब 22 किलोमीटर दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती है. बाकी धामों के दर्शन बाइक से ही किए. बलौदाबाजार के युवाओं ने रचा इतिहास  16 दिन, 4400 किलोमीटर और रोज 200 से 250 किलोमीटर का सफर: इस यात्रा में दोनों युवाओं ने करीब 16 दिन में 4400 किलोमीटर की दूरी तय की. रोजाना लगभग 200 से 250 किलोमीटर बाइक चलाकर वे आगे बढ़ते थे. सुबह 8 बजे यात्रा शुरू होती, दोपहर में भोजन और विश्राम के लिए रुकते और शाम तक शिविर डालकर विश्राम करते. यात्रा के दौरान उनके पास स्वयं का टेंट और भोजन बनाने का सामान और बाकी जरूरत के सामान थे. वे जहां रुकते, वहीं टेंट लगाकर रात बिताते और खुद ही भोजन तैयार करते. बाइक से 4400 किलोमीटर का सफर "चलचित्र देखने जैसी नहीं, उसका हिस्सा बनने जैसी होती है यात्रा": यात्रा के अनुभव साझा करते हुए शालीन साहू ने कहा,"जब हम किसी यात्रा पर बाइक से निकलते हैं तो वह सिर्फ देखने भर की चीज नहीं रहती, बल्कि हम खुद उस यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. उसका रोमांच और आनंद बिल्कुल अलग होता है. चारधाम यात्रा का सबसे खास अनुभव यह है कि यहां आप एक साथ भारत के सभी मौसम – गर्मी, सर्दी और बरसात का एहसास कर पाते हैं." बाइक से चारधाम यात्रा  युवाओं के लिए संदेश: शालीन साहू ने युवाओं से आह्वान किया कि भारत जैसे आध्यात्मिक देश में ऐसी साहसिक यात्राएं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यात्रा सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि आत्म अनुशासन, साहस और धैर्य सिखाती है. युवाओं को इस तरह की यात्राओं के लिए आगे आना चाहिए.