samacharsecretary.com

CM मोहन यादव का तोहफा: 7832 टॉपर्स को स्कूटी सहित पुरस्कार, बच्चों में खुशी की लहर

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूली बच्चों के लिए 11 सितंबर का दिन बेहद खास रहा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7832 बच्चों को स्कूटी गिफ्ट में दी. इसके साथ ही सीएम डॉ. यादव ने सेनिटेशन-हाइजीन योजना के तहत 20 लाख से ज्यादा बच्चियों को 61.12 करोड़ से ज्यादा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत 20 हजार से ज्यादा बच्चियों को 7 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की. इतना ही नहीं उन्होंने एक बच्ची की स्कूटी पर पीछे बैठकर स्कूटी राइड का आनंद भी उठाया. इसके बाद प्रदेश के मुखिया ने बच्चों को गाड़ी सावधानी से चलाने, लाइसेंस बनवाने और नंबर प्लेट लगवाने की सलाह भी दी. दूसरी ओर, स्कूटी पाकर बच्चों के चेहरे खिल गए.उन्होंने इस गिफ्ट के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद दिया. इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बच्चों के लिए बेहतर भविष्य के अवसर बन रहे हैं. प्रदेश के विद्यार्थियों को स्कूटी, लैपटॉप, साइकिल, कॉपी-किताबें सहित अनेक सौगातें मिल रही हैं. आज स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से 12वीं बोर्ड परीक्षा में स्कूल के टॉपर रहे 7832 बच्चों को स्कूटी दी गई है. वर्तमान में विश्व में भारत का समय चल रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए संकल्पित हैं. भारतीयों ने हर मुश्किल परिस्थिति में अपनी क्षमता के माध्यम से दुनिया में पहचान बनाई है. बदलते दौर में भारत सरकार नई तकनीक को प्रोत्साहित कर रही है. दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है. दुनिया का बड़े से बड़ा मंच प्रधानमंत्री मोदी की गैर-मौजूदगी से सूना महसूस करता है. पड़ोसी देश पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि काश, मोदी हमारे देश के भी प्रधानमंत्री होते. आज भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी हर स्थिति में वैज्ञानिकों के साथ हैं. मध्यप्रदेश में हो रहे बड़े काम सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कभी सरकारी स्कूलों की स्थिति बहुत दयनीय थी. इनमें बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता था. अब शहर-शहर में सांदीपनि विद्यालय की स्थापना हो रही है. कांग्रेस की सरकार ने बच्चों को कभी पेन तक नहीं दिया. कांग्रेस के लोग शर्म करें कि इजरायल और जापान हमारे साथ आजाद हुए. लेकिन, आज दोनों देश कहां पहुंच गए? शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर कार्य हुआ. राज्य सरकार मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षेत्र को विस्तार देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. सिंचाई का क्षेत्र 52 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. विश्व का पहला नदी जोड़ो अभियान केन बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड की धरती पर शुरू हुई है. इसकी आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी. नौकरी करने वाले नहीं, देने वाले बनें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1923 में आईसीएस की परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था. लेकिन, उन्होंने नौकरी नहीं की. वे अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब देकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़े. आज भारत में लोकतंत्र की खूबसूरती ये है कि कोई भी व्यक्ति देश और राज्य का सर्वोच्च पद प्राप्त कर सकता है. मैं भी प्रधानमंत्री मोदी की तरह गरीब परिवार और मुश्किल वक्त से निकला हूं. सरकार बच्चों को इस स्कूटी पर बैठ कर आगे बढ़ते देखना चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले 15 साल में 1300 करोड़ राशि से 5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए. लगभग 3000 करोड़ राशि से 1 करोड़ से अधिक साइकिलें वितरित की गईं. वहीं, 250 करोड़ राशि से 23 हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्कूटी दी जा चुकी है.   सीएम ने कहा कि बदलते दौर में प्रदेश के युवा नौकरी करने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें, इसके लिए राज्य सरकार औद्योगीकरण का अभियान चला रही है. प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को धार आ रहे हैं. जहां वे बदनावर में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास करेंगे. इससे पूर्व प्रधानमंत्री मोदी फरवरी 2025 में भोपाल आए थे. उस वक्त जीआईएस में प्रदेश को 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपए का बड़ा निवेश मिला था. बच्चों के लिए जश्न का दिन स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आज स्कूल शिक्षा विभाग के बच्चों के लिए जश्न का दिन है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव सदैव बच्चों का उत्साहवर्धन करते हैं. राज्यस्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों के छात्र और अधिकारी जुड़े हुए हैं. युवाओं के रोजगार के लिए मुख्यमंत्री निरंतर प्रयासरत हैं. प्रदेश में उद्योगों को विस्तार देने के लिए हर संभव कोशिश जारी है. खेल-सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बहुत तेज गति से कार्य कर रही है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य से ही अच्छे समाज का निर्माण किया जा सकता है. हाइजीन और स्टेशनरी के लिए भी मिली राशि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समग्र शिक्षा की सेनिटेशन-हाइजीन योजना अंतर्गत कक्षा 7वीं-12वीं की 20 लाख 37 हजार 439 बच्चियों को 61.12 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए. इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों की कक्षा सातवीं से 12वीं तक की बच्चियों को स्वास्थ्य स्वच्छता के लिए 300 रुपये की राशि हर साल दी जाती है. इसके अलावा सीएम डॉ. मोहन ने 20 हजार 100 बच्चियों के बैंक खातों में 7 करोड रुपये की राशि भी ट्रांसफर की. बता दें, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप (IV) योजना अंतर्गत हॉस्टल में रह रहीं बच्चियों को टी.एल.एम और स्टायपंड के लिए हर बच्ची को 3400 रुपये हर साल दिए जाते हैं.

छतरपुर के परिवारों की नेपाल से सुरक्षित वापसी के लिए CM मोहन ने किया एक्शन, हालात पर रखी नजर

भोपाल भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हालात इन दिनों खराब है । वहां पर सरकार के खिलाफ जनता ने मोर्चा खोल दिया और माहौल अराजक हो गया है । वहीं इसी बीच खबर ये है कि नेपाल में मध्यप्रदेश के छतरपुर के कुछ परिवार फंसे हुए है । इसको लेकर सीएम मोहन यादव गंभीर हो गए है। मुख्यमंत्री ने संवेदना दिखाते हुए मामले पर  संज्ञान लिया है। नेपाल में फंसे हुए छतरपुर के 4 परिवारों के सदस्यों की घर वापसी के लिए सीएम मोहन ने प्रतिबद्धता दिखाई हैऔर केंद्र सरकार के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम मोहन यादव ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि छतरपुर के कुछ परिवारों के सदस्य नेपाल में हैं। इनकी चिंता करते हुए मैंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। भारत सरकार के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी सकुशल भारत वापसी के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में हम सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ नागरिकों की हरसंभव मदद के लिए तत्पर हैं।   MP के 14 लोग नेपाल हिंसा में फंसे, PM मोदी से लगाई सुरक्षित निकालने की गुहार नेपाल में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत के हजारों लोग फंसे हुए और भारत के PM मोदी से सुरक्षित निकालने की गुहार लगा रहे हैं तो वह छतरपुर एमपी के भी 4 परिवार नेपाल में फंसे हुए हैं जिसमें बच्चों सहित 14 लोग शामिल है। छतरपुर के परिवार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित बाहर निकलवाने की गुहार लगाई है। नेपाल में लगातार हिंसा, विद्रोह बढ़ता जा रहा है और फंसे हुए लोगों में डर का माहौल भी बना हुआ है। हिंसा के दौरान भीषण आगजनी तोड़फोड़ के साथ कई लोगों के मरने की खबरें भी आ रही है। छतरपुर के ये लोग नेपाल में फंसे नेपाल घूमने गए छतरपुर के 4 परिवार हिंसा के बीच एक होटल में फंसे हुए हैं। जिसमें छतरपुर कोतवाली इलाके के गल्ला मंडी ने रहने बाले व्यापारी पप्पू मातेले पिता स्व.सुक्कू मातेले, ट्रांसपोर्ट कारोबारी निर्देश अग्रवाल, गुड्डू अग्रवाल पिता जयनारायण अग्रवाल गल्ला मंडी, एक कुशवाहा परिवार भी इसी ग्रुप के साथ मौजूद है जो नेपाल के काठमांडू में फंस चुके हैं और अब उन्हें लगातार डर सता रहा है। तो वहीं काठमांडू के होटल में फंसे छतरपुर के निर्देश अग्रवाल ने होटल की खिड़की से बाहर हो रही हिंसा आग जनी का वीडियो बनाकर भी भेजा है। इनमें आठ यात्री भोपाल के और इंदौर के निवासी यहां 98 यात्री फंसे हुए है। इसमें भोपाल से अनिल अग्रवाल, शुभा अग्रवाल, हेम कुमार गोयल, रजनी गोयल, संजय कुमार, सुबोध सिंह, अर्चना सिंह, सौम्या मिश्रा और इंदौर से विवेक जैन शामिल है। इसी प्रकार राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात सहित अलग-अलग स्थानों से भी यात्री साथ है। सभी यात्री एक दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं। इन यात्रियों का परमिट नेपाल होते हुए है। जहां यात्री रुके हैं। वहां से नेपाल बार्डर लगभग 25 किमी दूर है। ऐसे में यात्री चाहते हैं कि उन्हें उत्तराखंड बार्डर के रास्ते से निकाला जाए। यात्री सोशल मीडिया के जरिए भी सरकार से अपील कर रहे हैं। CM मोहन यादव ने किया ट्वीट उक्त मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी ट्वीट किया है, उन्होंने लिखा है कि- मेरे संज्ञान में आया है कि प्रदेश के छतरपुर के कुछ परिवारों के सदस्य नेपाल में हैं। इनकी चिंता करते हुए मैंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। भारत सरकार के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी सकुशल भारत वापसी के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में हम सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ नागरिकों की हरसंभव मदद के लिए तत्पर हैं। छतरपुर विधायक ने की वीडियो कॉलिंग पर बात मामले में छतरपुर विधायक ललिता यादव ने भी नेपाल में फंसे छतरपुर के लोगों/परिवारों से बात की और उनकी मदद का हर संभव का प्रयास करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि मामले की जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री को है, मैनें भी नेवाल में फंसे लोगों से बात की है, इससे पहले भी छतरपुर, प्रदेश और देश के लोग विदेशों में फंसे थे पर हमारी सरकार हमारे देश के प्रधानमंत्री उन्हें सकुशल वापस लाये ऐसे ही उन्हें वापिस लाया जायेगा, वे और उनके परिवार के लोग चिंता न करें सरकार हर संभव मदद और उन्हें लाने के प्रयास में लगी हुई है।

उज्जैन :उच्च सुरक्षा के बीच बेगम बाग में बुलडोजर कार्रवाई, 11 अवैध निर्माण ध्वस्त

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग क्षेत्र में 11 अवैध बिल्डिंगों पर बुलडोजर चला है। यह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है जो कि महाकाल मंदिर की पहुंच मार्ग पर है। कार्रवाई महाकाल मंदिर के नीलकंठ द्वार के पास हो रही है। यह प्रॉपर्टी उज्जैन विकास प्राधिकरण की है, जिसे 30 वर्ष की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था। बावजूद इसके यहां धर्म विशेष के लोगों ने नियम विरुद्ध इसका व्यावसायिक उपयोग किया। लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ वहीं, लीज समाप्ति के बाद भी इसका नवीनीकरण नहीं हो सका है। जब उज्जैन विकास प्राधिकरण ने नोटिस दिए तो संबंधित लोग न्यायालय पहुंच गए। लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अवैध अतिक्रमण पर अब यह कार्रवाई की जा रही है। सुबह नौ बजे से कार्रवाई शुरू सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई में किसी प्रकार का कोई विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। दरअसल यहां पिछले 3 माह के भीतर इसी प्रकार 13 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया था, तब जरूर विरोध हुआ था। आज कार्रवाई शांतिपूर्ण चल रही है। यहां 100 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए है। जिनमें सीएसपी, टीआई व जवान मौजूद है। वहीं, करीब 100 की संख्या में प्रशासन का भी अमला भी मौजूद है। जिसमे विकास प्राधिकरण सीईओ, नगर निगम उपायुक्त, तहसीलदार, पटवारी और निगमकर्मी शामिल है। महाकाल मंदिर के पास है एरिया जिस जगह कार्रवाई चल रही है, यह महाकाल मंदिर के पास है। मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। इसलिए एक ओर से रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण का है इलाका दरअसल, पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में करीब 30 भूखंड आवासीय तौर पर 30 साल की लीज पर दिए थे। भूखंड धारकों ने इन भूखंडों का उपयोग आवासीय तौर पर करने की बजाए पूरी तरह व्यावसायिक तौर पर कर लिया। जो कि नियम विरुद्ध था। इसके साथ ही वर्ष 2014-15 में लीज भी समाप्त हो गई । जिसे नवीनीकरण भी नहीं कराया गया। भूखंडों को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लगातार नोटिस दिए। वर्ष 2023-24 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों की लीज समाप्त कर दी । जिसको लेकर भूखंड धारक न्यायालय पहुंचे जहां उन्हें स्टे मिल गया। इन भूखंडों का अलग-अलग न्यायालय में मामला विचाराधीन रहा। न्यायालय का स्टे हटते ही तोड़ने की कार्यवाही शुरू कर दी गई । यहां पूर्व में भी तीन चरणों मे करीब तीन माह के भीतर 13 बिल्डिंगों को हटाया गया था। बड़े-बड़े हैं प्लॉट खास बात तो यह है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने यहां 30 भूखंड आवंटित किए थे। जिनमें प्रत्येक की साइज करीब 2400 स्क्वायर फीट थी। भूखंड धारकों ने इनके अलग-अलग टुकड़े कर करीब 65 बिल्डिंग बना ली। आज दिनांक तक 65 में से 24 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया है। शेष 41 बिल्डिंगों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा। आज जिन 11 बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जा रही है न्यायालय ने इनका स्टे खारिज कर दिया था । इसके बाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया था, जिनकी समय सीमा समाप्त हो गई। भवन मालिकों से बातचीत की गई और उन्हें न्यायालय प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वतः अपनी बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दी। इसलिए यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। इनलोगों के हैं मकान आज जिन 11 बिल्डिंग को जमीदोंज किया जा रहा है उनकी विस्तृत जानकारी यह है कि इसका भूखंड क्रमांक 15, 18, 29, 59 और 65 है। इन 5 भूखंडों पर 11 बिल्डिंग बना ली गई थी। जो कि वर्तमान में शेर बानो नागौरी, मोहम्मद अकरम, शहीदुर रहमान, सरफराज, मुबारिक, मोहम्मद तौसीब, अब्दुल लतीफ, सैय्यद कमर अली, मोहम्मद सिद्दीकी कुरेशी, नासिर अली, मोहम्मद सलीम के नाम पर है। उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप कुमार सोनी ने बताया कि माननीय न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है । भूखंड धारक को भूखंड आवासीय तौर पर दिए गए थे जिसे उन्होंने व्यावसायिक उपयोग किया। इसके अलावा लीज समाप्त होने के बाद लीज नवीनीकरण भी नहीं हो सका है। इसलिए यह कार्रवाई की गई।

फ्लाईओवर विवाद में नया खुलासा, HC में रिपोर्ट से सामने आया ब्रिज का 119 डिग्री ढलान

भोपाल  हाईकोर्ट में भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र स्थित फ्लाईओवर ब्रिज को लेकर महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की गई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) के प्रोफेसर ने जांच रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिज का मोड़ 90 डिग्री नहीं, बल्कि 118 से 119 डिग्री के बीच है। याचिकाकर्ता मेसर्स पुनीत चड्ढा की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी कंपनी को बिना सुनवाई का अवसर दिए सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया। याचिका में कहा गया कि फ्लाईओवर निर्माण का ठेका 2021-22 में कंपनी को मिला था और कार्य सरकारी एजेंसी द्वारा जारी जीएडी (जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग) के आधार पर किया गया। बाद में 2023 और 2024 में जीएडी में संशोधन भी किया गया। गौरतलब है कि ब्रिज में 90 डिग्री का मोड़ होने की खबरें सामने आने के बाद सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने पाया कि मोड़ वाले हिस्से के नीचे से रेलवे ट्रैक गुजरता है और राज्य सरकार तथा रेलवे विभाग के बीच समन्वय की कमी रही। साथ ही, ब्रिज के खंभे भी निर्धारित दूरी पर नहीं लगाए गए थे। हाईकोर्ट ने प्रोफेसर को ब्रिज की तकनीकी जांच का जिम्मा सौंपा था और इसके लिए याचिकाकर्ता को एक लाख रुपये फीस देने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता का दावा सही पाया जाता है तो वह फीस की राशि वसूलने का हकदार होगा। साथ ही, फिलहाल कंपनी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने रिपोर्ट के आधार पर कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई को निरस्त करने के लिए समय मांगा। युगलपीठ ने यह आग्रह स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा और प्रवीण दुबे ने पैरवी की। 

कपड़ा उद्योग में बड़ा निवेश: कोलकाता से आए 14,600 करोड़ के प्रस्ताव, पीएम मित्रा पार्क बनेगा गेम-चेंजर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कोलकाता के जे.डब्ल्यू. मैरियट होटल में आयोजित इन्वेस्ट इन एमपी इंटरैक्टिव सेशन में उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान प्रदेश को 14,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं, स्थिरता और निवेशक-हितैषी माहौल के साथ आदर्श निवेश स्थल है।  सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकृत सात पीएम मित्रा पार्कों में पहला भूमिपूजन 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के धार जिले में होने जा रहा है। यह पार्क प्रदेश को टेक्सटाइल सेक्टर में वैश्विक पहचान दिलाएगा। 2,158 एकड़ में विकसित होने वाले इस पार्क में लगभग 3 लाख रोजगार अवसर (1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष) पैदा होंगे। इसमें अत्याधुनिक अधोसंरचना, ग्रीन एनर्जी और प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। मध्य प्रदेश निवेशकों का भरोसेमंद साथी  डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से कहा कि मध्य प्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, बेहतर कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचा और औद्योगिक शांति इसे निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता राज्य को विशेष पहचान देती है। पीएम मित्रा पार्क से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भागीदारी है। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में प्रदेश हर संभव योगदान देगा। रुइया ग्रुप  4,000 करोड़ का निवेश करेगा रुइया ग्रुप के सीएमडी पवन कुमार रुइया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देश के सबसे शिक्षित और दूरदर्शी नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश आज औद्योगिक प्रगति का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने एलान किया कि रुइया ग्रुप प्रदेश में अपने निवेश का विस्तार करेगा, जिससे रोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह, श्याम मेटालिक्स के चेयरमैन पुष्कर अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में कृषि, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश करने की घोषणा की। प्रताप ग्रुप के हर्ष अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की नीतियां और अधोसंरचना इसे देश में सबसे आकर्षक निवेश स्थल बनाती हैं। निवेशक-हितैषी नीतियां और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने सेशन में कहा कि मध्यप्रदेश में 1 लाख एकड़ से अधिक का इंडस्ट्रियल लैंड बैंक, सस्ती बिजली (4.50/यूनिट), मजबूत हवाई और रेल कनेक्टिविटी और सुरक्षित श्रम वातावरण उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कॉपर, मैंगनीज और डायमंड का सबसे बड़ा उत्पादक है, साथ ही सीमेंट उत्पादन में अग्रणी है। नर्मदापुरम के पास औद्योगिक क्षेत्र को 880 एकड़ तक विस्तारित किया गया है। सरकार ग्रीन इंडस्ट्रीज़ को 100% छूट और एक्सपोर्ट यूनिट्स को 50% प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दे रही है। सांस्कृतिक जुड़ाव और निवेश का नया उत्साह सीएम डॉ. यादव ने कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों की धरती है, जिन्होंने देश को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और बौद्धिक केंद्र से संवाद करना मध्यप्रदेश में निवेश को नई ऊर्जा और गति देगा। सेशन में मुख्यमंत्री ने 12 से अधिक उद्योगपतियों से अलग-अलग मुलाकात की। कुल 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इस संवाद में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में निवेश अवसरों, नीतियों और अधोसंरचना पर आधारित शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई। पीएम मित्रा पार्क से रोजगार और औद्योगिक प्रगति धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्रा पार्क 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित होगा। इसमें CETP, सोलर प्लांट, महिला कर्मचारियों के लिए आवास, प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स, SCADA नियंत्रित यूटिलिटीज़ जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। यह परियोजना प्रदेश को वैश्विक वस्त्र महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगी। 

हाईकोर्ट की सख्ती: इंदौर हॉस्पिटल में चूहा कांड के बाद पेस्ट कंट्रोल कंपनी का एग्रीमेंट होगा खत्म

इंदौर एमवाय अस्पताल में हुए चूहा कांड में जांच में देरी और ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ बुधवार को स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की। हाईकोर्ट ने राज्य शासन से 15 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।  न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जे.के. पिल्लई की युगल पीठ ने इस गंभीर मामले को नवजातों के मौलिक अधिकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अस्पताल की सफाई और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी निभा रही निजी कंपनी एजाइल सिक्योरिटी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उसी की लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। ऐसे में जनहित याचिका दर्ज होने के बाद, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) की ओर से एजाइल कंपनी को हटाने के निर्देश जारी किए गए। साथ ही पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. बृजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया, जबकि प्रभारी एचओडी डॉ. मनोज जोशी को सस्पेंड कर दिया गया है। स्टेटस रिपोर्ट में हाई कोर्ट ने मांगे ये जवाब     सरकार यह बताए कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?     वर्तमान स्थिति क्या है?     इस पूरे प्रकरण में अब तक किन-किन जिम्मेदारों पर क्या-क्या कार्रवाई की गई है? चार सदस्यीय जांच समिति ने सौंपी थी रिपोर्ट 3 सितंबर को गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर प्रमुख सचिव संदीप यादव ने एचएलएल इंफ्राटेक सर्विसेज (HITES) को एजाइल सिक्योरिटी का अनुबंध रद्द करने के निर्देश दिए। एजाइल को अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मामले को शुरू से दबाने की कोशिश मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू से ही तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह दावा किया कि नवजातों की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई है, न कि चूहों के काटने से। बताया गया कि बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे। धार निवासी एक दंपती के नवजात की मौत को लेकर भी गलत जानकारी दी गई। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को भी गलत फीडबैक देकर गुमराह किया गया कि पोस्टमॉर्टम हो गया है और रिपोर्ट में चूहे के काटने का जिक्र नहीं है। इसी आधार पर दोनों अधिकारियों ने मीडिया को गलत जानकारी दी। खुलासे से सामने आया सच मामले की सच्चाई सामने तब आई जब 'दैनिक भास्कर' ने डिजिटल सबूत जुटाकर सीएमओ रूम में वीडियो के जरिए से यह स्पष्ट किया कि नवजात का पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं था। इसके बाद 6 सितंबर को परिजनों के आने पर पोस्टमॉर्टम कराया गया। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परिजन देर रात शव लेकर गांव पहुंचे और पैकिंग खोलने पर देखा कि चूहे उसके एक हाथ की चार उंगलियां पूरी तरह खा चुके थे। एजाइल पर पहले सिर्फ मामूली जुर्माना लगाया शुरुआत में एजाइल सिक्योरिटी पर केवल 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई। जबकि कंपनी शुरू से ही सवालों के घेरे में थी, इसके बावजूद उसका एमओयू रद्द नहीं किया गया और संवेदनशील जिम्मेदारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, जिम्मेदार एजेंसी बचाई गई पूर्व में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दो नर्सिंग ऑफिसरों को सस्पेंड किया था, जबकि नर्सिंग सुपरिटेंडेंट जोसेफ को हटाया गया और छह अन्य को शोकॉज नोटिस जारी किए गए। इन कर्मचारियों में नाराजगी थी कि मुख्य जिम्मेदारी एजाइल की थी, लेकिन उसे बचाते हुए निचले स्तर के स्टाफ को निशाना बनाया गया। इसके बाद डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के रूप में नियुक्त किया गया। मामले में कांग्रेस और जयस शुरू से ही विरोध कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि डीन और सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड किया जाए और एजाइल कंपनी पर कठोर कार्रवाई हो। सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने 11 सितंबर को स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर 15 दिन की छुट्टी मांगी और बुधवार को उन्हें अवकाश पर भेजते हुए डॉ. बसंत निंगवाल को कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया। हालांकि चर्चाएं हैं कि उन्हें छुट्टी के नाम पर हटाया गया है। इसके साथ ही डॉ. मनोज जोशी (प्रभारी एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी) को सस्पेंड कर दिया गया है। अब तक हुई नई कार्रवाई     डॉ. बृजेश कुमार लाहोटी को एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी के पद से हटाया गया।     डॉ. अशोक कुमार लाढा को विभाग का प्रभार सौंपा गया।     डॉ. बसंत निंगवाल को प्रभारी सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया।     डॉ. सुमित सिंह को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई।     डॉ. रामू ठाकुर को एचओडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग बनाया गया। पेस्ट कंट्रोल पर निगरानी के लिए बनी पांच सदस्यीय समिति इस मामले बुधवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कॉलेज के अधीन संचालित सभी अस्पतालों और विभागों में पेस्ट कंट्रोल कार्यों की मॉनिटरिंग और समस्याओं के समय-समय पर निराकरण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल सदस्य:     डॉ. शैनल कोठारी     डॉ. राजीव लोहोकारे     डॉ. योगिता दीक्षित     डॉ. प्रियंका कियावत     डॉ. पंकज पाराशर देवास की नवजात की मौत पर परिवार को 5 लाख रु. की सहायता उधर, देवास की नवजात बच्ची (रेहाना की बेटी) की चूहों के कुतरने से हुई मौत के मामले में भी प्रशासन ने आर्थिक सहायता दी है। बुधवार को जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा अपने कार्यकर्ताओं और मृत नवजात के परिजनों के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा से मिले और आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि इससे पहले धार के नवजात के परिवार को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी। उसी तर्ज पर देवास की बच्ची के परिवार को भी सहायता दी जाए। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम रोशन राय ने सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। परिवार को 2 लाख रु. रेडक्रॉस सोसायटी से और 3 लाख रु. अस्पताल प्रशासन की ओर से चेक के जरिए दिए गए।

औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती पर नियंत्रण, एमपी सरकार ने तय की नई सीमा

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती के कारण कोई व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अब एक माह में अधिकतम पांच बार या फिर पांच घंटे ही बिजली कटौती की जा सकेगी। इसको लेकर मध्य प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग ने औद्योगिक क्षेत्र और 11 केवी फीडर में बिजली कटौती की संख्या व घंटे के मानक तय किए हैं। इसमें संभाग मुख्यालय, जिला मुख्यालय और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मापदंड हैं। संभाग मुख्यालय और जिला मुख्यालयों में महीने में 25 बार और अधिकतम 15 घंटे तक कटौती तय की गई है। तय मानकों के अनुसार वर्ष 2026-27 तक यह प्रयास किए जा रहे हैं कि बड़े शहरों में उपभोक्ताओं को सालभर में 90 बार ही कटौती की समस्या से रूबरू होना पड़े, वह भी सिर्फ 60 घंटे से ज्यादा नहीं। बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय किए बता दें कि आयोग ने वर्ष 2012 में पहली बार वितरण प्रदर्शन मानक तय किए थे। इसमें वर्ष 2021 में संशोधन किया गया था। अब एक बार फिर आयोग ने बिजली कटौती के मानक नए सिरे से तय कर दिए हैं, जिसका पालन करने के निर्देश बिजली कंपनियों को दिए हैं। बिजली कंपनियों को तय मानकों को पूरा करने के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की भी अनुशंसा की गई है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि बिजली कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें, तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग करें, ताकि तय मानकों को हासिल किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर पूंजीगत व्यय प्रस्ताव आयोग के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएं। एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए ऐसा रहेगा रोडमैप प्रदेश के एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए आयोग ने तीन साल का रोडमैप तय किया है। इसके मुताबिक वर्ष 2024-25 के लिए अधिकतम बिजली कटौती 120 बार और 90 घंटे तय है। इसे साल 2025-26 तक साल में अधिकतम 90 बार और 60 घंटे तक समिति करने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि बिजली कंपनियों को प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफान या फिर ऐसे कारण जिनके लिए आयोग की अनुमति लेना पड़े और वितरण व्यवस्था फेल हो जाए, में इन निर्धारित मानकों से छूट दी गई है।

कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई: फर्जी रजिस्ट्री मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस रद्द

शहडोल शहडोल। संभागीय मुख्यालय के सुहागपुर उप पंजीयन के द्वारा अपनी सेवानिवृत्ति की आखिरी दिन 28 अगस्त को गलत तरीके से की गई रजिस्ट्री की जांच मामले में पांच सर्विस प्रोवाइडर के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच के दौरान 250 से अधिक ऐसी रजिस्ट्री मिली है जो बिना अनुमति या गलत तरीके से कराई गई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कार्रवाई की है और अभी मामले की आगे जांच भीचल रही है। 28 अगस्त को ही इस मामले की कलेक्टर की यहां शिकायत की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उप पंजीयक ने पैसे लेकर गलत तरीके से बिना अनुमति रजिस्ट्री की है। उसके बाद कलेक्टर ने एक जांच टीम का गठन किया था और उसकी पहली रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की शुरुआत की गई है।जिले में भू माफियाओं और अवैध रजिस्ट्री कराने वाले सर्विस प्रोवाइडरों पर जिला प्रशासन ने पहली बार कार्रवाई की है। सर्विस प्रोवाइडर्स की मिलीभगत उजागर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. केदार सिंह ने ज़मीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा, प्रतिबंधित भूमि की खरीद-बिक्री और मृत व्यक्तियों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा कर रजिस्ट्री कराने जैसे घोटालों में संलिप्त पाए गए ई-पंजीयन सर्विस प्रोवाइडरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 10 सितंबर को देर शाम को की गई है। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिले में राजस्व प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने, पावर आफ अटार्नी निरस्त होने, प्रतिबंधित भूमि या मृतक की जमीन बेचने जैसी अवैधानिक रजिस्ट्रियों के गंभीर प्रमाण सामने आए हैं। इन घोटालों में कई बार ग्राम पंचायतों, दलालों और सर्विस प्रोवाइडरों की मिलीभगत भी उजागर हुई है। इन सर्विस प्रोवाइडरों पर कार्रवाई मोहम्मद सैफ अंसारी पर कार्रवाई की गई है। इसके ऊपर आरोप है कि मृतक भोलानाथ अहिरवार की जगह समान शक्ल के व्यक्ति को खड़ा कर दस्तावेज तैयार कराकर रजिस्ट्री कराई है। अभिषेक कुमार गुप्ता ने ग्राम हड़हा, तहसील बुढ़ार की खसरा नंबर 42 से 58 तक की रजिस्ट्री उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद रजिस्ट्री करा दिया। साथ ही, ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की जमीनों की रजिस्ट्री कलेक्टर की अनुमति और पावर ऑफ निरस्त होने के बावजूद रजिस्ट्री कराया। गंगा सागर सिंह ने ग्राम बुढ़ार और ग्राम कंचनपुर की प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन कराया। प्रीति शुक्ला ने ग्राम सोहागपुर वार्ड नं. 17 में मुख्तियारनामा न होने के बावजूद विक्रय पत्र तैयार कर रजिस्ट्री करा दिया। स्वरूप सरकार ने ग्राम वासिन वीरान पचगांव (विशिष्ट ग्राम) की भूमि का अवैधानिक पंजीयन कराया है। जमीन हड़पने की साजिश कलेक्टर डॉ. सिंह ने इन पांचो पर कार्रवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि इस तरह की घटनाएं न केवल मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और अन्य कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि ये किसानों और भोली-भाली जनता की जमीन हड़पने की साजिश का हिस्सा हैं। इसलिए लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले सभी सर्विस प्रोवाइडर निलंबित किए जाते हैं और इनके विरुद्ध आगे कड़ी कार्रवाई भी प्रस्तावित है। शहडोल जिले में लगातार ऐसे आवेदन प्राप्त हो रहे थे, जिनमें विक्रेताओं की सहमति के बिना जमीन बेचे जाने, प्रतिबंधित भूमि के पंजीयन और मृतक के नाम पर रजिस्ट्री होने की शिकायतें दर्ज की गई। जांच में इनकी पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने फर्जीवाड़े पर काला कदम उठाया है।

संजय पाठक के वकील का बड़ा कदम, केस से खुद को किया अलग और सोशल मीडिया पर दी जानकारी

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा द्वारा विधायक संजय पाठक द्वारा फोन किए जाने के बाद खुद को उस मामले से अलग किए जाने के बाद नया मोड आया है। अब पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने भी खुद को केस से अलग कर लिया है। उन्होंने साफ किया है कि मैंने कोर्ट को लिखा है कि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स, जिन दो कंपनियों के केस की मैं पैरवी कर रहा था, उनके किसी रिलेटिव ने जस्टिस मिश्रा को कॉल किया। इस बात का जस्टिस मिश्रा ने एक सितंबर के आदेश में जिक्र किया। इसकी वजह से मैं ये केस छोड़ रहा हूं और मैंने इस बारे में अपने क्लाइंट को बता दिया है। अधिवक्ता सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि जिन दो कंपनियों की वो पैरवी कर रहे थे, उसमें विधायक संजय पाठक का कितना शेयर है। उनका संजय पाठक से सीधा सरोकार नहीं है। वो कई सारी कंपनियों के केस लड़ते हैं, ऐसे में हर केस के क्लाइंट का किससे क्या रिलेशन है, इस बात की जांच नहीं करेंगे।  

अजीबोगरीब बीमारी: राजगढ़ में महिला का पेट नहीं भरता, हर दिन खाती है 70 तक रोटियां

राजगढ़ मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक महिला को खाने की अजीब बीमारी हो गई है. सुबह से रात तक 60 से 70 रोटियां खाने के बावजूद महिला कमजोरी ही महसूस करती रहती है. महिला की बीमारी ने उसके ससुराल और मायकेवालों को भी परेशानी में डाल दिया है. ससुराल वालों ने राजस्थान के कोटा, झालावाड़, इंदौर, भोपाल, राजगढ़ और ब्यावरा में इलाज करवाया, फिर मायके वालों ने कोटा और राजगढ़-ब्यावरा में उपचार करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. महिला आज भी रोजाना 60 से 70 रोटियां खा रही है. राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे के पास नेवज गांव की रहने वाली मंजू सौंधिया (28) पहले स्वस्थ थी. तीन साल पहले उसे यह अजीब बीमारी हुई. मंजू के दो बच्चे हैं. पहले वह घर-परिवार के काम करती थी, लेकिन इस बीमारी ने उसका जीना मुश्किल कर दिया. मंजू की दिनचर्या ऐसी है कि वह हर पल रोटी खाती और पानी पीती है. कुछ देर बाद फिर रोटी खाने लगती है.  डॉ. कोमल दांगी ने बताया कि छह महीने पहले मंजू उनके पास आई थी. उसे घबराहट थी, इसलिए उसे भर्ती कर उपचार किया गया. बाद में वह दोबारा आई और कमजोरी की शिकायत की. उसे मल्टीविटामिन दवाएं दी गईं.  डॉक्टर बोले- साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है  डॉ. दांगी ने बताया कि यह साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है, जिसमें मंजू को लगता है कि उसने खाना नहीं खाया. वह मन को शांत करने के लिए बार-बार रोटी खाती और पानी पीती है. मनोचिकित्सक बोले- कोई मानिसक बीमारी नहीं डॉ. दांगी ने मंजू को भोपाल के मनोचिकित्सक आरएन साहू के पास जाने की सलाह दी. लेकिन जब मनोचिकित्सक को दिखाया गया तो उन्होंने कहा कि कोई मानसिक बीमारी नहीं है. परिवार अब मदद की उम्मीद में इंतजार कर रहा है. रोटी खाने की आदत छुड़ाएं  बताया गया कि अन्य दवाएं लेने पर मंजू को लूज मोशन की समस्या होती है, इसलिए वह दवाएं नहीं ले पा रही. डॉ. दांगी ने परिवार को सलाह दी कि मंजू की रोटी खाने की आदत छुड़ाएं और उसे खिचड़ी, फल या अन्य खाद्य पदार्थ दें ताकि उसकी मानसिक आदत में सुधार हो. पहले मंजू को टाइफाइड हुआ था मंजू के भाई चंदरसिंह सौंधिया ने बताया कि मंजू का विवाह सिंगापुरा के राधेश्याम सौंधिया से हुआ था. उसके 6 वर्ष की बेटी और 4 वर्ष का बेटा है. बच्चे ससुराल में हैं और मंजू मायके-ससुराल आती-जाती रहती है. पहले उसे टाइफाइड हुआ था, जिससे वह ठीक हो गई, लेकिन तीन साल से यह अजीब रोटी खाने की बीमारी उसे सता रही है. कभी वह 20-30 तो कभी 60-70 रोटियां खा लेती है. आर्थिक स्थिति खराब परिजन ने बताया कि ससुराल और मायके वालों ने इलाज करवाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. इलाज में आर्थिक स्थिति खराब हो गई और अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली. अब इलाज के लिए पैसे भी नहीं बचे.