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चिंतन शिविर से निकले विचार बन रहे सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा। दूसरे दिन आयोजित 'सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन' विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ  सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 'सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति' विषय पर लोकसभा सदस्य  शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 'अमृत प्रयास', 'बनयान रिवोल्यूशन' और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है। 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़' विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया। 'कृषि से समृद्धि' विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए।  चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया। दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

ग्रामीणों को अब 125 दिन रोजगार की गारंटी, बिहार को मिला ₹1,663.56 करोड़ का फंड

पटना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAMG) के तहत केंद्र सरकार ने बिहार के लिए 1,663.56 करोड़ रुपये की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी कर दी है। यह राशि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य को पूर्व में स्वीकृत 6,715.83 करोड़ रुपये के अंतरिम बजट का हिस्सा है। रविवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी जानकारी दी। तीन माह के ल‍िए है यह राश‍ि बैठक में बिहार ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से जारी यह राशि अगले तीन माह की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध कराई गई है। राज्य सरकार इसमें अपना अंश जोड़कर पंचायतों में विकास योजनाओं को गति देगी। इससे विभिन्न विकास कार्यों के साथ-साथ अकुशल श्रमिकों को समय पर रोजगार और मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि VB-G RAMG योजना में पूर्व की मनरेगा की तुलना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब पात्र अकुशल श्रमिकों को 100 दिन के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। बेरोजगारी भत्‍ते का भी है प्रावधान वहीं, यदि काम मांगने के बावजूद निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है। योजना के तहत पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के वित्तपोषण की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब विकास कार्यों पर होने वाले कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि केंद्र देगा। ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त निवेश से ग्राम पंचायतों में आधारभूत ढांचे का विकास तेज होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

रविवार को 10,167 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 67.3 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने दी प्रवेश परीक्षा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। योजना के प्रति बढ़ते आकर्षण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेशभर में पंजीकृत 10,167 अभ्यर्थियों में से 6,844 छात्र-छात्राओं ने रविवार को आयोजित प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया। यानी करीब 67.3 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज हुई, जो योजना के प्रति युवाओं के बढ़ते भरोसे और उत्साह को दर्शाती है। 18 मंडलों के 29 केंद्रों पर हुई परीक्षा समाज कल्याण विभाग की ओर से 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के 18 मंडलों के मंडलीय जनपदों में बनाए गए 29 परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को विभिन्न आवासीय कोचिंग सेंटरों में प्रवेश दिया जाएगा। नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ होंगी, जबकि शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा। 865 अभ्यर्थियों को मिलेगी निशुल्क आवासीय सुविधा प्रदेश के सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित छात्र-छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इनमें 25 प्रतिशत सीटें ऐसे अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं, जिन्होंने लेटरल एंट्री के तहत प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। चयनित छात्रों को रहने, खाने, पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। गरीब और मेधावी युवाओं के लिए बनी बड़ी राहत योगी सरकार की यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। निजी कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये खर्च होने के कारण कई मेधावी छात्र तैयारी से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल गरीब और होनहार युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचाने का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ेगी वंचित वर्ग की भागीदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभा के सपनों में बाधा न बने। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर मार्गदर्शन मिलने से अब वंचित वर्ग के युवाओं की प्रशासनिक सेवाओं में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इससे समाज में सकारात्मक बदलाव को भी नई दिशा मिलेगी। योजना का उद्देश्य प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे यूपीएससी और यूपीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें। संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग

महिलाओं को मिलेगा ज्यादा लाभ: नई वस्त्र नीति में ₹6,000 तक रोजगार सब्सिडी का प्रावधान

रांची झारखंड सरकार की नई वस्त्र नीति 2026 (टेक्स्टाइल पॉलिसी) का ड्राफ्ट इंटरनेट पर साझा करते हुए उद्योग विभाग ने सभी स्टेक होल्डर्स से आपत्तियां तलब की हैं। यह नीति हाल के महीनों में चर्चा का विषय रही है। ज्ञात हो कि झारखंड की पिछली वस्त्र नीति सितंबर 2023 में समाप्त हो गई थी, और तब से राज्य में कोई नई औपचारिक नीति लागू नहीं थी। नई वस्त्र नीति 2026 का मसौदा अब तैयार कर लिया गया है और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह नीति 8-9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हितधारक परामर्श में सार्वजनिक चर्चा के लिए रखी जाएगी। यह नीति विशेष रूप से संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, जो अब तक औद्योगिक गतिविधियों से दूर रहा है। इस क्षेत्र में निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन और राहत देने की योजना है। रोजगार सृजन पर जोर नीति का मुख्य उद्देश्य 20,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए। नीति में महिला कर्मचारियों के लिए पुरुषों की तुलना में ₹1,000 अधिक मासिक सब्सिडी का प्रावधान है। नए केंद्रों की तलाश में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय पारंपरिक केंद्रों (सूरत, तिरुपुर) से हटकर नए राज्यों में विनिर्माण को बढ़ावा देना चाहता है। इसके लिए छत्तीसगढ़, केरल और झारखंड के साथ बातचीत चल रही है। विभिन्न प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत अधिक निवेश आकर्षित करना इस पहल का उद्देश्य है। इसके साथ ही नए वस्त्र केंद्रों का विकास करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना पीएलआई योजना का प्रमुख उद्देश्य है। नीति की विशेषताएं     पूंजी सब्सिडी : कुल लागत के हिसाब से 20 प्रतिशत (₹50 करोड़ तक), SC/ST/महिलाओं को 5% अतिरिक्त लाभ     ब्याज सब्सिडी 7% प्रति वर्ष या 50% (₹3करोड़ तक), 5 वर्षों के लिए     स्टेट जीएसटी प्रतिपूर्ति पहले 7 वर्षों के लिए 100%, अगले 3 वर्षों के लिए 40%     रोजगार सब्सिडी पुरुषों के लिए पांच हजार रुपये प्रति माह और महिलाओं के लिए छह हजार रुपये मासिक

प्रदेश में झमाझम बारिश के आसार, 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, 43 जिलों में येलो चेतावनी जारी

भोपाल  प्रदेश में मानसून की जोरदार वर्षा हो रही है। रविवार को राजधानी भोपाल सहित अधिकांश जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की वर्षा हुई। शाम करीब साढ़े चार बजे राजधानी भोपाल में अचानक घने काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसे हालात बन गए। दृश्यता कम होने के कारण वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर आवाजाही करना पड़ा। यही हाल सीहोर और ग्वालियर का रहा, जहां घने काले बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। उसके बाद झमाझम वर्षा हुई। छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट, भोपाल समेत 43 में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने प्रदेश के बैतूल, अलीराजपुर, देवास, अनूपपुर, दमोह और सागर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं विदिशा, रायसेन, भोपाल समेत 43 जिलों को येलो अलर्ट में रखा है। केंद्र के अनुसार प्रदेश में अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं है। छिंदवाड़ा में ढाई इंच (67 मिलीमीटर) बरसात हुई। हरदा में झमाझम वर्षा के कारण फसलें बह गईं और विदिशा–गुना में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। पांढुर्णा जिले के सीतापार के पगड़ी गांव में बिजली गिरने से 48 वर्षीय सुलोचना तड़ाम की मौत हो गई। मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के पूर्वी इलाके अभी तप रहे हैं। वहां का अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री से लेकर 39.0 डिग्री तक रिकॉर्ड किए गए। वहीं पश्चिमी इलाकों में लगातार वर्षा की वजह से रविवार को दिन के तापमान में 4.7 डिग्री तक गिरावट हुई। यहां पारा 27.0 डिग्री से लेकर 36.2 डिग्री तक रहे। केंद्र के अनुसार अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना जताई गई है। हरदा में बाढ़ से किसानों की मेहनत पर पानी हरदा जिले में एक दिन पहले हुई भारी वर्षा के बाद नदी–नाले उफान पर आ गए। इससे खेतों में बोई गई मक्का, सोयाबीन और उड़द की अंकुरित फसलें मिट्टी सहित बह गईं। किसानों का कहना है कि कई खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे दोबारा बोवनी की चिंता बढ़ गई है। विदिशा और गुना में जलभराव की परेशानी विदिशा की सौराई स्थित राजीव आवास कॉलोनी में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वर्षा के समय जलभराव और कीचड़ की समस्या बनी हुई है। यहां नाले पर बनी पुलिया नीची होने से वर्षा के बाद रास्ता बंद हो जाता है और करीब 300 परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ती है। गुना के वार्ड–दो के रहवासी भी चिंतित हैं। दरअसल नदी की सफाई का वादा किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। वर्षा शुरू होने के बाद लोगों को फिर बाढ़ का खतरा सताने लगा है। शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा (फैक्ट फाइल) शहर मिलीमीटर छिंदवाड़ा 67.0 सिवनी 22.0 श्योपुर 20.0 उज्जैन 19.0 टीकमगढ़ 15.0 ग्वालियर 10.0 मंडला 8.0 रीवा 7.0 सागर 6.0 गुना 5.0 सीधी 5.0 जबलपुर 3.0 बालाघाट जिले के मलाजखंड 3.0 नरसिंहपुर 2.0 इंदौर 1.0 राजगढ़ 1.0 दतिया 0.8 प्रदेश के चार बड़े शहरों के तापमान शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान भोपाल 32.2 25.4 इंदौर 30.9 22.8 ग्वालियर 37.7 28.3 जबलपुर 34.0 24.4 (नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है)  

कर्मचारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू, 31 जुलाई तक जारी होंगे पदोन्नति आदेश

भोपाल  राज्य शासन से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश मिलने के बाद निगम प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों से पात्र कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जा रही है और सूची तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि शासन ने 31 जुलाई तक प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया है, लेकिन प्रयास है कि निर्धारित समय-सीमा से पहले ही आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश हाल ही में यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश में पदोन्नति पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों, विभागाध्यक्षों और अन्य कार्यालयों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विधानसभा सचिवालय ने दो जुलाई को 12 अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति के आदेश भी जारी कर दिए। डीपीसी की तैयारी वहीं, भोपाल नगर निगम में फिलहाल विभागवार पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिसके बाद विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।    शासन के निर्देशों के अनुसार सभी पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति दी जाएगी। अलग-अलग विभागों से जानकारी एकत्र कर सूची तैयार की जा रही है। शासन ने 31 जुलाई तक का समय निर्धारित किया है और इस समय-सीमा के भीतर ही पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।- वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त, नगर निगम  

कचरा फैलाने वालों पर सख्ती, 7.63 करोड़ का जुर्माना; हरियाणा सरकार की नई कार्ययोजना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने 31 मार्च 2027 तक पूरे प्रदेश को लीगेसी वेस्ट (बरसों से एक स्थान पर जमा कूड़ा) मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार के अनुसार राज्य के 75 लीगेसी वेस्ट डंपसाइट्स में से 60 का वैज्ञानिक बायो-माइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष 15 डंपसाइट्स को निर्धारित समय सीमा तक पूरी तरह समाप्त अथवा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों, नालों, जल स्रोतों और खाली भूखंडों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया सख्त की जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर एक जनहित याचिका पर हरियाणा सरकार ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के माध्यम से विस्तृत शपथपत्र दाखिल किया है। इसमें पूरे प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई कार्रवाई और समयबद्ध कार्ययोजना का ब्योरा दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। सरकार के अनुसार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब तक 7.63 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा वसूला जा चुका है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 3,486 चालान किए गए। सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों, नालों, जल स्रोतों और खाली भूखंडों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ अभियान तेज होगा। हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल के मुताबिक, कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब अलग-अलग नगर निकायों की बजाय जिला स्तर पर सिंगल ई-टेंडर माडल लागू करने की योजना है। प्रदेश के 87 शहरी निकायों के लिए कचरा प्रसंस्करण स्थलों की पहचान की जा चुकी है। प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए 23 निर्माता, 61 आयातक और 21 ब्रांड मालिकों सहित कुल 105 कंपनियों को एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (इपीआर) के दायरे में लाया गया है। इन कंपनियों को अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे के संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी निभानी होगी। राज्य में 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान हरियाणा सरकार ने शपथपत्र में यह भी बताया कि प्रदेशभर में 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 5,356 का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा 217 स्वयं सहायता समूहों को कचरा प्रबंधन से जोड़ा गया है तथा 1,515 वार्ड समितियों का गठन किया गया है। घर-घर सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। रेवाड़ी के प्रकाश यादव ने दायर की थी जनहित याचिका राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में यह मामला रेवाड़ी जिले के गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की जनहित याचिका के बाद सामने आया। हरियाणा सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र के साथ अब पूरे प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना पर अमल की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद की जा सकती है।  

किसानों को नहीं होगी डीएपी की कमी, छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त

रायपुर मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।    वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी। यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है। इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

परिवहन विभाग की ईवी नीति का असर, प्रदेश में अब तक 96 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार के विजन के तहत परिवहन विभाग द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रय सब्सिडी योजना प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से हजारों उपभोक्ताओं को आर्थिक सहायता मिलने के साथ ही प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। इसके तहत योगी सरकार ने 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में वितरित किए।   उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि खाड़ी देशों में गंभीर हालात और तेल संकट के बीच ईवी वाहनों की तरफ रुख करना ही बेहतर है। वहीं प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) क्रय सब्सिडी योजना इस दिशा में शानदार सहयोग दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और बेहतर पर्यावरण से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा। प्रदेश सरकार ने इसी विजन के साथ 210 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी का भुगतान कर नया कीर्तिमान बनाया है। 43 हजार से अधिक लाभार्थियों को मिली सब्सिडी परिवहन विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक 96,778 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें से 43,218 लाभार्थियों को अंतिम रूप से ईवी क्रय सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना का लाभ बड़ी संख्या में आम नागरिकों तक पहुंचा है और लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं। तीन वर्षों में 210 करोड़ रुपये की सब्सिडी योजना शुरू होने के बाद पहले लगभग तीन वर्षों के दौरान योगी सरकार ने रिकॉर्ड 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में वितरित किए हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं की शुरुआती लागत कम हुई है। परिवहन विभाग ने योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण एवं आवेदनों का लाइव काउंटर भी उपलब्ध कराया है। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को मिला सबसे अधिक लाभ ईवी क्रय सब्सिडी योजना के अंतर्गत सबसे अधिक लाभ दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को मिला है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 61,417 दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। कम कीमत, कम संचालन लागत और दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त होने के कारण इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिलों की मांग तेजी से बढ़ी है। योजना की मूल संरचना में भी दोपहिया वाहनों को विशेष महत्व देते हुए 2 लाख दोपहिया वाहनों तक सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सभी श्रेणियों के वाहनों को प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार ने केवल दोपहिया वाहनों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि 25 हजार चारपहिया, 400 ई-बस और 1,000 ई-गुड्स कैरियर वाहनों को भी सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया। इससे निजी उपयोग के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और माल परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने की दिशा में ठोस पहल हुई है। पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और परिवहन खर्च में आ रही कमी इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने, वायु प्रदूषण घटाने और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही आम नागरिकों के परिवहन खर्च में भी कमी आ रही है। यही कारण है कि प्रदेश में ईवी अपनाने की गति लगातार बढ़ रही है।

पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

रायपुर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया। डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्म, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया। राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।