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ग्रामीण बिहार में बड़ी पहल: 704 नए पुलों का निर्माण कार्य जल्द शुरू, सख्त निर्देश जारी

पटना  बिहार के सभी गांवों को शहरों से जोड़ने और ग्रामीण स्तर पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ी पहल की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्यभर में कुल 704 नए पुलों का निर्माण कार्य 10 सितंबर से शुरू कर दिया जाएगा. इस योजना पर सरकार कुल 3,688 करोड़ रूपये की धनराशि खर्च कर रही है. जिससे राज्य के हजारों गांवों को स्थायी और सुरक्षित सड़क संपर्क मिल सकेगा. ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल बनाने वाले संवेदकों को स्पष्ट रूप से निर्देश जारी कर दिया है कि यदि 10 सितंबर से उन्होंने ग्रामीण सड़कों और पुलों का नरमन कार्य शुरू नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उनकी जमानत राशि जब्त करने के साथ-साथ उन्हें कालीसूची (ब्लैक लिस्टेड) कर दिया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सड़क संपर्क अभियान मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना योजना का उद्देश्य राज्य के उन ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सड़क संपर्कता स्थापित करना है, जहां आज भी बरसात, बाढ़ या पुराने जर्जर पुलों के कारण आवागमन बाधित हो जाता है. मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत न सिर्फ पुराने और जर्जर पुलों की जगह नए और मजबूत पुल बनाए जाएंगे, बल्कि उन मार्गों को पुलों से जोड़ा जाएगा, जहां आज भी मिसिंग ब्रिज की वजह से रास्ते अधूरे पड़े हैं. साथ ही, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त पुलों को फिर से खड़ा किया जा रहा है. राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में पुल तो पहले से बने हुए हैं लेकिन पहुंच पथ (एप्रोच रोड) का निर्माण नहीं हो सका है. अब वहां भी पुलों के अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो. राज्य के जिन जिलों में इन पुलों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, उसमें उत्तर बिहार के साथ-साथ दक्षिण बिहार के जिले भी शामिल हैं. सबसे अधिक पुलों का निर्माण पूर्वी चंपारण में किया जा रहा है. पूर्वी चंपारण में कुल 56 पुलों के निर्माण की मंजूरी दी गई है. इसी तरह, दरभंगा में 38, गया, सिवान और सीतामढ़ी में 30-30, सारण और वैशाली में 28-28, भागलपुर और गोपालगंज में 27-27, रोहतास और शेखपुरा में 26-26, नालंदा में 24, बेगूसराय में 20 और राजधानी पटना में 18 पुलों का निर्माण कराया जाएगा. जनता की मांग को मिली प्राथमिकता यह योजना खास इसलिए भी है, क्योंकि इसमें आम जनता की मांग को सरकार ने प्राथमिकता दी है. जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में आए प्रस्ताव और मुख्यमंत्री द्वारा की गई सार्वजनिक घोषणाएं, दोनों को इस योजना में शामिल किया गया है. यानी यह योजना सिर्फ विभागीय पहल नहीं बल्कि जनभागीदारी से बनी योजना है. बदलेंगे गांवों के हालात सरकार का मानना है कि यह योजना सिर्फ पुलों का निर्माण नहीं, बल्कि गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला है. किसानों को अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में आसानी होगी. बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा और आपात स्थिति में लोगों को इलाज के लिए शहरों के बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में आसानी होगी.  

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में हरियाणा में आयुष कॉलेजों की जांच शुरू

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने प्रदेश में आयुष (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी) से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की जांच और निरीक्षण के लिए नई कमेटी गठित की गई है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार के अनुसार, कोई भी नया आयुष शैक्षणिक संस्थान शुरू करने से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) या एसेंशियल सर्टिफिकेट (ईसी) लेना जरूरी होगा। इसके लिए गठित कमेटी स्थल का निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। जिलों के लिए बनने वाली यह कमेटी एडीसी की अगुवाई में बनेगी। संबंधित जिले के आयुर्वेदिक अधिकारी इस कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी व कंवीनर होंगे।   इसी तरह से संबंधित एरिया के तहसीलदार, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग, शहरी निकाय/टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रतिनिधि तथा पीडब्ल्यूडी या पंचायत विभाग के एक्सईएन/एसडीओ तथा आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी, सोवा-रिग्पा, होम्योपैथिक और योग एवं नेचुरोपैथी के विषय विशेषज्ञ को बतौर सदस्य कमेटी में शामिल किया जाएगा। कॉलेज की श्रेणी के अनुसार 3-3 विषय विशेषज्ञ समिति में शामिल होंगे। नये कोर्स के साथ सीटें भी बढ़ेंगी अगर किसी मौजूदा आयुष संस्थान में सीटें बढ़ानी हों या नए कोर्स शुरू करने हों और भवन व भूमि का विस्तार न किया गया हो, तो केवल तकनीकी विशेषज्ञ ही निरीक्षण करेंगे। लेकिन यदि भूमि और भवन का विस्तार किया गया है, तो पूरी समिति निरीक्षण करेगी। अगर किसी आयुष संस्थान के खिलाफ शिकायत आती है तो मामले की जांच आयुष महानिदेशक द्वारा गठित कमेटी करेगी। जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसमें शामिल किया जा सकेगा। सुधीर राजपाल ने कहा कि इस कदम का मकसद प्रदेश में चल रहे आयुष शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। साथ ही, केंद्रीय नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुसार सीट वृद्धि और कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया को लागू करना है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी: सीएम डॉ. यादव ने अनुभवी अधिकारियों से मांगा मार्गदर्शन

सिंहस्थ 2028 की तैयारी: सीएम डॉ. यादव ने अनुभवी अधिकारियों से मांगा मार्गदर्शन सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर सीएम डॉ. यादव की बड़ी घोषणा, वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव होगा शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन है। इसके लिए उज्जैन में पिछले दो सिंहस्थ वर्ष 2004 और 2016 के दौरान पदस्थ रहे वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अनुभव का लाभ भी लिया जाए। इलाहाबाद में सम्पन्न महाकुंभ की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है कि सिंहस्थ : 2028 श्रद्धालुओं की दृष्टि से सुविधाजनक, दुर्घटनाविहीन, आवास, आवागमन, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के साथ श्रेष्ठ आपदा प्रबंधन का भी उदाहरण बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाओं के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के प्रबंधों पर गत मंगलवार को भी विस्तृत बैठक हुई है। बैठक और संवाद का सिलसिला निरंतर चलेगा। प्रत्येक व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए विभागों को दायित्व दिए गए हैं। तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के संबंधित विभागों से भी आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न रेल मंडल प्रबंधकों ने उनसे भेंट कर सिंहस्थ के लिए रेल सुविधाओं की उपलब्धता और विस्तार के संबंध में अवगत करवाया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्मित होने वाले घाटों और उनके निकट विभिन्न सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। सरलता और सुगमता से स्नान सम्पन्न हो सकें, इस दृष्टि से सभी जरूरी प्रबंध किए जाएंगे। पर्यटन विभाग और निजी क्षेत्र द्वारा होटलों की व्यवस्था, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए रहवास व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश     सिंहस्थ से जुड़े कार्यों की सतत् समीक्षा की जाए। विभागवार बैठकें भी हों।     अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।     सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक का प्राथमिकता से उपयोग हो।     विभिन्न देवस्थानों के परिसरों के विकास कार्य भी प्रारंभ किया जाए।     अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं और मार्गदर्शन लेने का कार्य भी किया जाए।     भीड़ नियंत्रण में एआई के उपयोग के लिए आवश्यक अध्ययन किया जाए।     अन्य देशों में सिंहस्थ केन्द्रित सांस्कृतिक गतिविधियों की रूपरेखा को अंतिम रूप दें।

AAP का बड़ा ऐलान: बाढ़ में मारे गए व्यक्ति के परिवार को नौकरी का भरोसा

पंजाब  पंजाब में आई बाढ़ ने कई परिवारों की ज़िंदगी छीन ली. किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने पिता, तो किसी ने घर का अकेला सहारा. लेकिन इस संकट की घड़ी में एक पहल ऐसी हुई है जिसने लोगों को सिर्फ राहत नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद दी है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने एलान किया है कि बाढ़ में जान गंवाने वाले हर परिवार से एक सदस्य को LPU यूनिवर्सिटी में स्थायी नौकरी दी जाएगी. यह कोई औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक जीवन की नई शुरुआत का भरोसा है. CM मान की सरकार के कार्यों की सराहना आम आदमी पार्टी सांसद अशोक मित्तल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की खुले दिल से सराहना की. खासतौर पर 196 राहत कैंपों की स्थापना और 20,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालने जैसे कदम की भरपूर प्रशंसा की. मित्तल ने यह साफ किया कि LPU की टीम हर परिवार से खुद संपर्क करेगी, लेकिन जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है, वो खुद सामने आएं ताकि मदद तुरंत मिल सके. संकट के समय स्थायी समाधान की जरूरत यह कहानी सिर्फ एक नेता के एलान की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो संकट के समय स्थायी समाधान, स्थानीय रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी की बात करती है. जब देश के कई हिस्सों में लोग सिर्फ बयानबाज़ी में लगे हैं, पंजाब में एक सांसद अपने संसाधन और संस्थान को आम लोगों के लिए खोल रहे हैं. इस पहल से न सिर्फ 43 परिवारों को सहारा मिलेगा, बल्कि पूरे पंजाब को एक संदेश जाएगा कि आम आदमी पार्टी सिर्फ चुनावी वादे नहीं, ज़मीन से जुड़ी राहत और रोज़गार की सच्ची राजनीति करती है.  

सिस्टम बंद, अधिकारी खुश: हरियाणा में अब बड़े बदलाव आने वाले हैं

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और बिल प्रक्रिया और अनुमोदन से सम्बन्धित सभी कार्य केवल हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स (एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही किए जाएं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, ने इस सम्बन्ध में एक पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार, सरकार ने पाया है कि फाइलों का भौतिक रूप से आदान-प्रदान न केवल विलंब का कारण बनता है बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य को भी बाधित करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के विभिन्न नगर निगमों, नगर परिषदों तथा नगर पालिकाओं में तैनात खजाना एवं लेखा विभाग तथा स्थानीय लेखा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अब किसी भी प्रकार की भौतिक फाइल प्रक्रिया को बंद करें और सभी बिल संबंधी कार्यवाही, अनुमोदन तथा कार्यों की निगरानी केवल एचईडब्ल्यूपी पोर्टल के माध्यम से ही की जाए। पत्र में कहा गया है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।  

हफ्ते में एक दिन ट्रैफिक शांत, बिहार ने Sundays को बनाया ‘हॉर्न फ्री’

पटना  बिहार में ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने और शहरवासियों को शांत वातावरण मुहैया कराने के लिए परिवहन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसके तहत अब से प्रत्येक रविवार को राज्य में हॉर्न फ्री दिन के रूप में मनाया जाएगा। परिवहन विभाग ने ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए लिया फैसला परिवहन विभाग ने वाहन चालकों और नागरिकों से अपील की गई कि वे रविवार को अनावश्यक हॉर्न न बजाए और यातायात नियमों का पालन करें। इस नियम का शिद्दत से पालन कराने के लिए कहा गया है। आम लोगों से इसका पालन करने की अपील की गई है। विभाग के स्तर से जारी आदेश के अनुसार, अत्यधिक हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जो लोगों को मानसिक अशांति के साथ नींद में खलल, तनाव, उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न करता है। इस अभियान का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, अनावश्यक हॉर्न बजाने की आदत को खत्म करना, शहर में शांत और स्वस्थय वातावरण के साथ सुरक्षित यातायात संस्कृति को स्थापित करना है। 

राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा मिला पटना-पूर्णिया मार्ग को, प्रशासन ने साझा की जानकारी

पटना बिहार की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे को केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा प्रदान कर दिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा अधिसूचना जारी कर इस एक्सप्रेसवे को नेशनल एक्सप्रेसवे-9 (NE-9) घोषित किया गया है। यह बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे होगा जो पूरी तरह से राज्य की सीमाओं के भीतर निर्मित होगा। मंत्री नितिन नवीन ने दिया केंद्र को धन्यवाद पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे का राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 के रूप में अधिसूचित होना बिहार के लिए गर्व का क्षण है। इस परियोजना की घोषणा के बाद से कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और राज्य सरकार इसे समय पर पूरा करने के लिए केंद्र सरकार को हर आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है तथा आगे भी करती रहेगी।' बिहार को मिला नया एक्सप्रेस वे बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीना के मुताबिक 'यह परियोजना राज्य की सड़क संरचना को नई दिशा देगी। इसके शुरू हो जाने से पटना से पूर्णिया की यात्रा केवल 3 घंटे में पूरी होगी और सीमांचल क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का दर्जा मिलना निस्संदेह बिहार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।' अब पटना से पूर्णिया जाइए फुर्र से आपको बता दें कि 250 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे एनएच-22 के मीरनगर अरेजी (हाजीपुर) से शुरू होकर नरहरपुर, हरलोचनपुर, बाजिदपुर, सरौंजा, रसना, परोरा और फतेहपुर से गुजरते हुए पूर्णिया जिले के हंसदाह में एनएच-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) से जुड़ेगा ।परियोजना में 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास शामिल होंगे।साथ ही समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा जिला मुख्यालयों को जोड़ने के लिए अलग से संपर्क मार्ग भी बनाया जाएगा। आगे बताया बताया गया कि परियोजना के लिए 6 जिलों के 29 प्रखंडों के 250 से अधिक गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

IGRS रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के जिलों का जलवा, बलरामपुर और श्रावस्ती टॉप पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की निगरानी के लिए एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) की अगस्त की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में बलरामपुर और श्रावस्ती ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया, दोनों जिलों ने 140 में से 137 अंक प्राप्त किए। शाहजहांपुर 134 अंकों के साथ दूसरे और हमीरपुर 132 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता और शिकायत निवारण में इन जिलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है। बलरामपुर के जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, जिले में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। जन शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाता है और संतुष्टिपूर्ण फीडबैक के बाद ही मामले को बंद माना जाता है। इस दृष्टिकोण ने बलरामपुर को IGRS रैंकिंग में शीर्ष स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता रहेगी। टॉप-10 सूची में कौन-कौन जिला श्रावस्ती के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि IGRS रिपोर्ट प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन के आधार पर जिलों का मूल्यांकन करती है। श्रावस्ती ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के दम पर यह स्थान हासिल किया। जिला पिछले कई महीनों से IGRS और सीएम डैशबोर्ड की टॉप-5 सूची में बना हुआ है। टॉप-10 में पीलीभीत (चौथा), सोनभद्र (पांचवां), बरेली, अमेठी, हाथरस, औरैया और चंदौली भी शामिल हैं। कैसे तय होती है जिलों की रैंकिंग IGRS प्रणाली के तहत हर महीने 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की समीक्षा विभिन्न मानकों पर की जाती है, जिसके आधार पर जिलों की रैंकिंग तय होती है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है। बलरामपुर और श्रावस्ती की इस उपलब्धि ने अन्य जिलों के लिए एक मिसाल कायम की है। योगी सरकार की यह पहल जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण और विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पीडीएस में हितग्राहियों की समीक्षा, मोहन सरकार ने बड़ी जमीन वालों को चेताया

भोपाल मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत 5.32 करोड़ हितग्राही हैं। इसमें 71 लाख किसान भी शामिल हैं। किस किसान के पास कितनी भूमि है, इसका पता लगाने के लिए राजस्व विभाग के डेटा से मिलान कराया जा रहा है। इसके आधार पर राज्य सरकार निर्णय लेगी कि किसे पीडीएस प्रणाली में रखना है और किसे नहीं। बड़े क्षेत्र वाले किसान पीडीएस की सूची से बाहर किए जा सकते हैं। भारत सरकार ने प्रदेश को 75 लाख पीडीएस के हितग्राहियों की सूची भेजी है। इसमें वे हितग्राही भी हैं, जिनकी वार्षिक आय छह लाख से अधिक है, कंपनी में संचालक हैं या फिर जीएसटी के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वाले किसानों को भी शामिल किया है। यद्यपि, इनके बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन राज्यों से कहा गया है कि वे अपने स्तर से नीति निर्धारित कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि राजस्व विभाग के डेटा से यह जानकारी निकाली जा रही है कि किस किसान के पास कितनी भूमि है। ऐसे किसान, जिनके पास पांच एकड़ से अधिक भूमि है, उनके संबंध में आगे चलकर निर्णय लिया जा सकता है। 16 हजार नाम सरकार ने पहले ही हटा दिए उधर, जिलों में कराई जांच के बाद अपात्र हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। छह लाख से अधिक वार्षिक आय वाले 1.57 हितग्राही चिन्हित किए गए थे। इनमें से 16 हजार के नाम सरकार पहले ही हटा चुकी है और भारत सरकार के निर्देश के बाद अब तक 1,909 नाम हटाए गए हैं। इसी तरह कंपनी में संचालक होने के बाद निश्शुल्क मिलने वाला राशन लेने वाले 18 हजार हितग्राहियों में 1,100 के नाम पहले हटाए गए हैं और अब 106 को सूची से बाहर किया है। जीएसटी देने वाले 1,381 हितग्राहियों में से 139 और 1.51 डुप्लीकेट श्रेणी के हितग्राहियों में से 20 हजार के नाम हटा दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों में अपात्रों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और जैसे-जैसे यह काम पूरा होता जा रहा है, वैसे-वैसे नाम काटे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पहले ई-केवाईसी कराकर लगभग 20 लाख अपात्रों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।

धन संपन्न मंत्रियों की झलक: हरियाणा के 12 मंत्री करोड़पति, 3 नाम देश के शीर्ष अरबपतियों में

पानीपत देश की 27 राज्य विधानसभाओं, 3 केंद्रशासित प्रदेशों व केंद्रीय मंत्रिपरिषद से विश्लेषण किए गए 643 मंत्रियों में से 36 अरबपति हैं। इनमें हरियाणा से 3 मंत्री शामिल हैं। चुनावी शपथपत्र के अनुसार, हरियाणा से सबसे अमीर तोशाम से विधायक व महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी हैं। उनकी संपत्ति 134.56 करोड़ है। गुरुग्राम से सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत (121.54 करोड़) दूसरे, फरीदाबाद से विधायक व राजस्व एवं आपदा मंत्री विपुल गोयल (101.81 करोड़) तीसरे स्थान पर हैं। प्रदेश के 14 में से 12. मंत्री करोड़पति हैं। किसी मंत्री पर केस नहीं है। यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) की रिपोर्ट में हुआ है। देखें आकड़े मंत्री संपत्ति देनवरी श्रुति चौधरी 134.56 करोड़ 13.37 करोड़ राव इंदीत  121.54 करोड़ 13 करोड़ आरती राव 101.81 करोड़ 5.28 करोड़ विपुल गोयल 68.27 करोड़ 2.55करोड़ कृष्णपाल गुर्जर  62.58 करोड़ 3.98 करोड़ राय नरबीर  58.79 करोड़ शून्य महीपाल ढांडा 14.29 करोड़ 1.60 करोड़ राजेश नागर 12.11करोड़ 34.82 लाख रणबीर मंगवा 11.62 करोड़ 52.53 लाख अरविंद शर्मा 6.90 करोड़ 3.56 करोड़ नायाब सिंह 5.80 करोड़  74 लाख कृष्णलाल 5.30 करोड़ 22 लाख कृष्णबेदी 4.80 करोड़ 2.28 लाख गौरव गौतम 4.50 करोड़ शून्य अनिल विज 1.49 करोड़ शून्य श्याम सिंह राणा 1.16 करोड़ शून्य