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शिवराज चौहान बोले: कमजोर तटबंध और अवैध खनन ने बनाई प्रलय जैसी स्थिति

पंजाब  पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार राज्य को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करेगी। पंजाब की स्थिति को "प्रलय" बताते हुए चौहान ने कहा कि वह किसानों, पशुधन और कृषि भूमि को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेंगे और केंद्र सरकार एक व्यापक राहत और पुनर्वास पैकेज लेकर आएगी। शिवराज चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी पंजाब की स्थिति को लेकर गहरी चिंता में हैं। उनके ही निर्देश पर मैंने कल पंजाब का दौरा किया। यहां प्रलय जैसी स्थिति है। फसलें नष्ट हो गई हैं। इस कठिन समय में केंद्र सरकार पंजाब की जनता और किसानों के साथ खड़ी है।” उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुनियोजित पुनर्विकास की जरूरत है। मंत्री ने कहा “पंजाब को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए हमें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।” चौहान ने चेतावनी दी कि पानी उतरने के बाद संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। उन्होंने कहा, “मरे हुए जानवरों का सही ढंग से निपटान करना होगा ताकि महामारी न फैले। खेतों में सिल्ट जमा हो गई है। अगली फसल बचाने के लिए हमें एक डी-सिल्टिंग योजना बनानी होगी।” उन्होंने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे, तब केंद्र ने सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदियों के किनारे तटबंध बनाए थे, ताकि संकट के समय फसलों और कृषि भूमि को बचाया जा सके। चौहान ने अमृतसर, पठानकोट और गुरदासपुर बेल्ट का दौरा करने के बाद कहा “अवैध खनन के कारण ये तटबंध कमजोर हो गए हैं और पानी गांवों में घुस आया है। भविष्य में संकट रोकने के लिए हमें इन तटबंधों को पुनः मजबूत करना होगा।” उन्होंने इस आपदा के समय पंजाब की सेवा भावना की सराहना भी की। चौहाने कहा, “मैंने पंजाब की सेवा भावना देखी। सामाजिक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर राहत, भोजन, कपड़े और दवाइयां बांट रहे हैं। मैं पंजाब की सेवा भावना को सलाम करता हूं। जरूरतमंद की सेवा ईश्वर की पूजा के समान है। पड़ोसी राज्य भी मदद के लिए आगे आए हैं। संकट के समय एकता की यह भावना ही हमें सभी मुश्किलों से उबरने की ताकत देती है।”

जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर  गोरखपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। शुक्रवार सुबह जनता दर्शन में उन्होंने समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए कहा, ‘घबराइए मत, आपकी समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित कराएंगे। सरकार सबकी समस्या दूर करने को संकल्पित है।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर और इत्मीनान से सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए। कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर उन्होंने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों को यह निर्देश भी दिए कि यदि किसी प्रकरण में पीड़ित को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ा है तो इसकी भी जांच कर जवाबदेही तय की जाए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी। इस दौरान उन्होंने अफसरों से कहा कि हर पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए जिससे उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

मॉनसून की मार: मुख्यमंत्री भजनलाल ने अधिकारियों को मैदान में भेजकर दिया सतर्क रहने का आदेश

जयपुर राजस्थान में इस बार मॉनसून की बारिश बहुत ज्यादा हुई है। अब तक सामान्य से 62 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है और बारिश का दौर लगातार जारी है। आज शुक्रवार 5 सितंबर को भी प्रदेश के 25 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार रात को ही अजमेर के बोराज तालाब की पाल टूटने से शहर में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भारी बारिश के चलते प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। जनजीवन प्रभावित होने पर विपक्ष ने सरकार पर तत्काल राहत नहीं देने का आरोप लगाते हुए सदन में मुद्दा उठाया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बाढ़ ने सभी विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अपने क्षेत्र में जाकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लें और रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजें। प्रभारी मंत्रियों को भी क्षेत्र में दौरा करने के निर्देश दिए हैं। तीन दिन फील्ड में रहेंगे विधायक और मंत्री इन दिनों विधानसभा का सत्र चल रहा है। इस दरमियान शुक्रवार 5 सितंबर से लेकर रविवार 7 सितंबर तक विधानसभा में अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अवकाश के दिनों में तीन दिन तक सभी प्रभारी मंत्री और विधायक अपने अपने क्षेत्र का दौरा करें। अतिवृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशीलता और तत्परता के साथ आमजन की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलभराव से उत्पन्न विषम परिस्थितियों के समाधान के लिए राज्य सरकार दीर्घकालिक योजना बनाकर काम करेगी ताकि स्थायी समाधान मिल सके। प्रभावी सचिवों को भी दो दिन तक क्षेत्र का दौरा कर आमजन की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।   विधानसभा में विधायकों से मिले सीएम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति पर विधानसभा में विधायकों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 1 जून से 1 सितम्बर तक औसत बारिश से 62 प्रतिशत से अधिक बारिश हुई है। ऐसे में सभी विधायक अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में जाएं तथा जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत-बचाव कार्यों को और अधिक गति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तात्कालिक राहत के साथ-साथ बारिश और बाढ़ से प्रतिवर्ष होने वाली समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार दीर्घकालिक योजनाएं बना रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आमजन की परेशानियों को प्रभावी रूप से दूर कर रही है। अधिकारियों से नियमित फीडबैक लेने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभारी मंत्री और सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्र में अधिकारियों और प्रशासन से नियमित रूप से फीडबैक लें। जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारियों के साथ नियमित बैठक करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विधायकों को प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों का मनोबल बढ़ाने, निचले इलाकों से लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन पैकेट, पीने का पानी, दवाइयों और कपड़ों के वितरण की सतत निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करवाएं। साथ ही कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन पर नजर रखें। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों की पर्याप्त तैनाती भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई सोनीपत की शिक्षिका सुनीता, राष्ट्रपति ने दी प्रशंसा

सोनीपत हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली टीचर सुनीता ढुल को शुक्रवार को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक मिला है। शिक्षक दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम सुनीता धुल को सम्मानित किया गया है। सुनीता हरियाणा की इकलौती टीचर हैं, जिन्हें इस बार नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया. सोनीपत के गांव नसीरपुर की सुनीता ढुल वर्तमान में मुरथल अड्डे पर स्थिति पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाती हैं। पढ़ाने के साथ-साथ सुनीता ढुल एक कुशल मास्टर ट्रेनर भी हैं। वे रेडक्रॉस में राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करते हुए अब तक करीब 14 हजार बच्चों को फर्स्ट एड और जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वे पिछले डेढ़ साल से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में बच्चों से पौधे लगवाती हैं। जानिये…कैसे पिता की सोच ने बदली बेटी की राह ​सुनीता ढुल का सफर आसान नहीं रहा। पिता आर्मी राज सिंह दहिया में थे। फिर बिजली निगम में काम करने लगे। सुनीता तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। उस दौर में लड़कियों की पढ़ाई को खास महत्व नहीं दिया जाता था। खासकर ग्रामीण इलाकों में। पिता ने जब बेटियों को पढ़ाना शुरू किया तो लोग ताने देते-“बेटियों को क्यों पढ़ा रहे हो, आखिरकार इन्हें दूसरे घर जाना है।” पिता ने कभी समाज की परवाह नहीं की। उनका जवाब हमेशा यही होता – “बेटी भी पढ़-लिखकर बदलाव की सोच के साथ काम करेगी।” यही सोच सुनीता की सबसे बड़ी ताकत बनी। मां रोज सुबह 3 बजे उठतीं, ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए जगा सकें मां सुखदेई रोज सुबह 3 बजे उठ जातीं और बच्चों को 4 बजे पढ़ाई के लिए जगातीं। उस समय गांव की कम ही बेटियां स्कूल जाती थीं, लेकिन मां-बाप की लगन ने सुनीता और उनकी बहनों को शिक्षा के उजाले तक पहुंचाया। शिक्षा के प्रति उनकी लगन बचपन से ही थी। गांव से कॉलेज का आना-जाना 14 किलोमीटर दूर था। सुनीता साइकिल चलाकर जाती थीं। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। बीएड एंट्रेंस की थर्ड टॉपर बनीं साल 1996 में सुनीता बीएड एंट्रेंस टेस्ट में तीसरी टॉपर रहीं। सरकारी नौकरी से पहले उन्होंने 1996 से 2013 तक निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षिका और प्रिंसिपल के रूप में भी सेवाएं दीं। 2014 में उन्हें गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, समालखा में नौकरी मिली। फिलहाल वे पीएम श्री स्कूल, मुरथल अड्डा में सामाजिक विज्ञान पढ़ाती हैं। ​बतौर टीचर 5 बातों पर जोर दिया 1. ​टाइम टेबल का महत्व: सुनीता ने विद्यार्थियों को टाइम टेबल का पालन करना सिखाया, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से कर सकें। 2. ​स्टूडेंट कमेटी का गठन: साल 2017 में उन्होंने एक स्टूडेंट कमेटी बनाई। हर महीने होने वाली मीटिंग में वे बच्चों से यह राय लेती थीं कि उनका स्कूल कैसा होना चाहिए। बच्चों को स्कूल से जुड़ाव महसूस हुआ और उनकी संख्या 275 से बढ़कर 450 हो गई।​ 3. व्यावहारिक ज्ञान पर जोर: साल 2014 से वे बच्चों के लिए प्रदर्शनियां लगाती आ रही हैं। वे समय-समय पर बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाती हैं। ताकि किताबी ज्ञान के अलावा बाहरी दुनिया की जानकारी मिले। 4. ​तकनीक का उपयोग: कोविड-19 महामारी के दौरान जब ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी, सुनीता द्वारा बनाई गई 12वीं कक्षा की भूगोल विषय की वीडियो पूरे हरियाणा में हरियाणा सरकार के एजुसेट चैनल पर चलाई गईं। 5. ​सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास: वे स्कूल में विभिन्न भारतीय पर्वों का आयोजन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं भी कराती हैं। ताकि बच्चों में सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके। सख्त टीचर के रूप में पहचान को बदला​ शुरुआती दिनों में एक सख्त टीचर के रूप में पहचान बनाने वाली सुनीता ने बाद में अपनी शिक्षण शैली में बदलाव किया। उन्होंने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया और बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। वे बच्चों की समस्याओं को सुनकर उन्हें सुलझाने की कोशिश करती हैं।​सुनीता कहती हैं-शिक्षा सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। सुनीता कहती हैं-पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा, यह सोच जरूरी सुनीता के बेटे अध्ययन ऑस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं। बेटी वंशिका अशोका यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं। मां सुखदेई 96 वर्ष की आयु में आज भी उनकी प्रेरणा हैं। पति पवन ढुल भी हौसला बढ़ाते हैं। सुनीता कहती हैं-“पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा। उनकी सोच और मां का समर्पण ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। यही सोच-समर्पण जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सिर्फ उनका सम्मान नहीं है, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो कहती है कि शिक्षा ही समाज में असली बदलाव की चाबी है।” National Teachers award 2025 List 1-सुनीता – सोनीपत 2-शशि पॉल – हिमाचल प्रदेश 3-नरिंदर सिंह – लुधियाना 4-अवधेश कुमार झा – उत्तर पश्चिम दिल्ली 5-मंजूबाला – चम्पावत 6-परवीन कुमारी – चंडीगढ़ 7-नीलम यादव – खैरथल तिजारा 8-भाविनीबेन दिनेशभाई देसाई – दमन 9-विलास रामनाथ सातारकर – उत्तरी गोवा 10-हितेश कुमार प्रवीणचंद्र भुंडिया – राजकोट National Teachers award 2025 List 11-हिरेनकुमार हसमुखभाई शर्मा – गांधीपुरा खेड़ा 12-शीला पटेल – दमोह 13-भेरूलाल ओसारा – आगर मालवा 14-डॉ. प्रज्ञा सिंह – दुर्ग 15-कुलदीप गुप्ता – राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिंद्राह 16-राम लाल सिंह यादव – भदोही 17-मधुरिमा तिवारी – मिर्जापुर 18-कुमारी निधि – किशनगंज 19-दिलीप कुमार – सुपौल 20-सोनिया विकास कपूर – मुंबई 21-कंधन कुमारेसन – एबरडीन 22-संतोष कुमार चौरसिया – कोरबा 23-डॉ. प्रमोद कुमार – नालंदा 24-तरुण कुमार दाश – कोरापुट 25-बसंत कुमार राणा – मल्कानगिरी 26-तनुश्री दास – मेदिनीपुर पश्चिम 27-नांग एकथानी मौंगलांग – पापुम पारे 28-पेलेनो पेटेनिलहु – कोहिमा 29-कोइजाम मचासन – इम्फाल पश्चिम 30-कर्मा टेम्पो एथेनपा – मंगन 31-डॉ. हेइपोर यूनी बैंग – पूर्वी जयंतिया हिल्स 32-बिदिशा मजूमदार – गोमती 33-देबजीत घोष – डिब्रूगढ़ 34-श्वेता शर्मा – देवघर 35-डॉ. शेख मोहम्मद वाकियोद्दीन शेख हामिदोद्दीन – नांदेड़ 36-डॉ. संदीपन गुरुनाथ जगदाले – लातूर 37-इब्राहिम एस – मूला एंड्रोथ 38-मधुरिमा आचार्य – कोलकाता 39-मदबाथुला थिरुमाला श्रीदेवी – विशाखापत्तनम 40-मरम पवित्रा – सूर्यापेट 41-रेवती परमेश्वरन – चेन्नई 42-विजयलक्ष्मी वी – तिरुपूर 43-किशोरकुमार एम.एस. – तिरुवनंतपुरम 44-डॉ. वी रेक्स उर्फ राधाकृष्णन … Read more

विधायक से टकराव के बाद भिंड कलेक्टर को क्षत्रिय समाज का साथ, मंच से उठाई तलवार

भिंड एमपी में भिंड कलेक्टर और विधायक के बीच चल रहे विवाद के बीच अब हालात दिलचस्प मोड़ ले रहे हैं। जहां एक ओर जिले के कुछ लोग कलेक्टर का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थन में भी लोग खुलकर सामने आने लगे हैं। क्षत्रिय समाज और सर्व समाज के प्रतिनिधि कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान उन्हें तलवार भेंट की गई है। कलेक्टर ने भी ऑफिस में चमचमाती तलवार लहराई है। क्षत्रिय समाज ने कलेक्टर को किया सम्मानित कलेक्टर के चैंबर में पहुंचकर समाज के लोगों ने पहले उन्हें फूल मालाएं पहनाईं, उसके बाद पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। इसके साथ ही मंत्रोच्चारण के बीच उन्हें तलवार भेंट की गई। बताया जाता है कि कलेक्टर ने अपने चैंबर में ही इस तलवार को म्यांन (खोल) से बाहर निकाला, औपचारिक रूप से हाथ में लिया और फिर वापस म्यांन में रख दिया। शक्ति प्रदर्शन है यह कलेक्टर द्वारा तलवार निकालना कुछ लोगों के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब कलेक्टर और स्थानीय विधायक के बीच विवाद गहराया हुआ है। इस विवाद के बाद जिले में प्रशासन और राजनीति के बीच टकराव का माहौल बन गया है। विधायक और कलेक्टर दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद से जिले में सियासी हलचल तेज है। इस सम्मान समारोह में मौजूद क्षत्रिय समाज के पदाधिकारी और अधिवक्ता अशोक सिंह भदौरिया ने कहा कि कलेक्टर साहब ने जो काम किया, जो निर्णय लिए, वह जनहित में थे। समाज हमेशा उनके साथ खड़ा है। तलवार सम्मान का प्रतीक है, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं। हालांकि, जिले के कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग राय रख रहे हैं। विरोध करने वाले कुछ लोगों का मानना है कि अधिकारी को राजनीतिक मामलों में संयमित रहना चाहिए और ऐसी गतिविधियां प्रशासन की निष्पक्ष छवि पर सवाल खड़े कर सकती हैं। दो धड़ों में बंट रहा जिला कुल मिलाकर, विधायक-कलेक्टर विवाद के बीच भिंड में माहौल दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। एक पक्ष जहां कलेक्टर को गलत ठहरा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष उनके सम्मान में आगे आकर समर्थन दे रहा है। तलवार भेंट और पगड़ी पहनाने जैसी परंपरागत रस्मों के बीच प्रशासन और राजनीति के टकराव ने जिले में हलचल बढ़ा दी है। यह हुआ था विवाद गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भिंड कलेक्टर के आवास के बाहर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान कलेक्टर के साथ उनकी नोकझोंक हो गई थी। विधायक ने कलेक्टर पर मुक्का तान दिया था। साथ ही विधायक ने भी उन्हें उंगली दिखाई थी। वीडियो वायरल होने के बाद भिंड कलेक्टर ने पुलिस में शिकायत भी दी है। इसके बाद विधायक ने भी शिकायत की थी।

दंतेवाड़ा-नारायणपुर सीमा पर मुठभेड़, कई नक्सली ढेर होने की खबर

नारायणपुर- दंतेवाड़ा नारायणपुर और दंतेवाड़ा सीमा पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच जबर्दस्त मुठभेड़ चल रही है. STF, DRG कोबरा और नारायणपुर की टीम के जॉइंट ऑपरेशन में कई नक्सलियों के मारे जाने और घायल होने की खबर हे. यह मुठभेड़ नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर पूर्व बस्तर इलाके में चल रही है. दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय ने सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन की पुष्टि की है उन्होंने बताया कि मुठभेड़ नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर चल रही है, जिसमें कई नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है और कई नक्सली मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिली है. गौरतलब है छ्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन के तहत केंद्र और राज्य की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च, 2026 की तारीख मुकर्रर की है. सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन से नक्सली हलकान है और लगातार सरेंडर कर रहे हैं.

यात्रियों के लिए खुशखबरी, मऊ से उधना तक स्पेशल ट्रेन की शुरुआत, मिलेगा खास ठहराव

रतलाम  त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ को समायोजित करने के लिए रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के साथ मऊ से उधना के मध्य स्पेशल ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे चलेंगी। 05017 मऊ-उधना स्पेशल मऊ से 27 सितंबर से एक नवंबर तक चलेंगी। यह ट्रेन मऊ से प्रति शनिवार सुबह 5.30 बजे चलकर अगले दिन रविवार दोपहर 12 बजे उधना पहुंचेंगी। इस ट्रेन का नागदा तड़के 4.28 बजे तथा रतलाम 6.15 बजे आगमन होगा। इसी प्रकार 05018 उधना-मऊ स्पेशल उधना से 28 सितंबर से दो नवंबर तक प्रति रविवार को चलेंगी। यह ट्रेन उधना से प्रति रविवार दोपहर तीन बजे चलकर अगले दिन सोमवार रात 10.30 बजे मऊ रेलवे स्टेशन पहुंचेंगी। इस ट्रेन का रतलाम में रात 9.30 बजे तथा नागदा 10.40 बजे प्रति रविवार को आगमन होगा। यह ट्रेन सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर व सामान्य श्रेणी कोच के साथ चलेंगी। इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में बेलथरा रोड, सलेमपुर, भटनी, देवरिया सदर, गोरखपुर, खलिलाबाद, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, इदगाह, बयाना, गंगापुर सिटी, भवानी मंडी, शामगढ़, नागदा, रतलाम व वड़ोदरा रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया गया है। गौतमपुरा रोड स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का प्रायोगिक ठहराव यात्रियों की मांग व सुविधा को ध्यान में रखकर रेल मंडल के गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का ठहराव दिया जा रहा है। पांच सितंबर, को सांसद शंकर लालवानी अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर ट्रेन के ठहराव का शुभारंभ करेंगे। पांच सितंबर से जोधपुर से चलने वाली 14801 जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान रात 9.50/9.52 बजे होगा। इसी प्रकार छह सितंबर से इंदौर से चलने वाली 14802 इंदौर-जोधपुर एक्सप्रेस का गौतमपुरा रोड रेलवे स्टेशन पर आगमन/प्रस्थान सुबह 5.17/5.19 बजे होगा। रतलाम-नागदा खंड में ब्लाक के कारण तीन ट्रेनें निरस्त रेल मंडल के रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए शीघ्रता से कार्य जारी है। रतलाम-नागदा खंड में आटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग सिस्टम को कार्यान्वित करने के लिए छह सितंबर को प्रस्तावित ब्लाक के कारण मंडल की चार ट्रेनें प्रभावित होंगी। 59318 उज्जैन-नागदा पैसेंजर, 59346 नागदा-उज्जैन पैसेंजर, 59345 रतलाम-नागदा पैसेंजर निरस्त रहेंगी। नागदा से चलने वाली 19341 नागदा-बीना एक्सप्रेस उज्जैन से चलेंगी तथा नागदा से उज्जैन के मध्य निरस्त रहेंगी।

महापुरुषों का अपमान: हजारीबाग में प्रतिमा तोड़ने से मचा बवाल

हजारीबाग हजारीबाग में महापुरुषों का अपमान थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर की चौक चौराहा पर स्थापित किए गए महापुरुषों की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले मंगलवार की रात पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने स्वतंत्रता सेनानी सिदो कान्हू की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था। जिससे आदिवासी समाज आंदोलन हो उठा था। सड़क जामकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि बुधवार की रात बदमाशों ने सदर प्रखंड मुख्यालय के सामने शहीद नीलांबर पीतांबर की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। अराजक तत्वों ने नीलांबर पीतांबर प्रतिमा को गिराने का बहुत प्रयास किया, लेकिन 26 जुलाई की रात पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय और सिदो कान्हू की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद हाल के दिनों में नवनिर्माण मे मजबूती के कारण बदमाश सफल नहीं हो पाए। तब उनके हाथ के तीर धनुष को क्षतिग्रस्त कर चलते बने। जैसे ही सदर पुलिस को इस घटना की जानकारी मिली। पुलिस के होश फाख्ता हो गए। प्रतिमा तोड़ने के रोकने के प्रयास असफल हो गए। सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए तो वह खराब निकले। मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन के अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। किसी भी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सदर अंचल अधिकारी और सदर थाना की पुलिस घटनास्थल पर जमी रही। शहर में स्थापित प्रतिमाओ को देखभाल करने वाला कोई नहीं महापुरुषों या देश के शहीदों के प्यार और सम्मान में लोग क्या-क्या नहीं करते हैं। उनके नाम पर संस्थाएं, मेमोरियल सड़क के नाम रखे जाते हैं। चौक चौराहा पर प्रतिमा स्थापित कर दी जाती है। शहर के दर्जनों स्थान में जोश खरोश के साथ बस स्टैंड के पास झारखंड के वीर बिरसा, झील पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, इंद्रपुरी चौक पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, सर्किट हाउस के पास महाराणा प्रताप, पोस्ट ऑफिस चौक के पास वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। जैसे ही उनके प्रशंसकों का जोश ठंडा हो गया और अब वह स्थापित प्रतिमाएं को कुव्यवस्था की शिकार हो रही है। जिन लोगों ने प्रतिमा स्थापित करने के लिए जोश ओ खरोश दिखाया था। यह प्रतिमाएं उनके लिए वह अतीत बन गया है। वहां साफ सुथरा और देखभाल करने की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है। इन महापुरुषों के मूर्तियों के ऊपर शेड भी नहीं है। जिसके कारण धूप हो या बरसात, सालों पर प्रतिमाएं प्रकृति की मार झेलती रहती है। शेड नहीं रहने से पक्षियों के बीट इन प्रतिमाओं को खराब कर रहे हैं। उसमें यूरिक एसिड व अन्य रासायनिक यौगिक होते हैं। जो अम्लीय होते हैं जिस प्रतिमा का रंग उड़ रहा है। उसमें दाग लग रहा है। प्रतिमा का क्षरण भी हो रहा है। अब उनके प्रशंसकों प्रशासन और राजनेताओं का ध्यान इस और नहीं जाता है। जब आयोजन होता है। वहां साफ सुथरा कर माला पहना दी जाती है। लेकिन विडंबना है कि इन प्रतिमाओं के उचित प्रबंधन की ओर ध्यान नहीं जाता है। दोषियों को चिह्नित कर कठोर कार्रवाई की जाए : कांग्रेस झारखंड की धरती के महान क्रांतिकारी शहीद निलांबर–पीतांबर भोगता की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का असामाजिक तत्वों का प्रयास अब जिले की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। गुरुवार को पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने इस घटना को इतिहास और बलिदान की विरासत पर हमला बताते हुए गहरी नाराज़गी जताई। सूचना मिलते ही मुन्ना मौके पर पहुँचे और प्रतिमा की स्थिति का निरीक्षण किया। प्रतिमा में लगे धनुष को आंशिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया गया था। उन्होंने तुरंत ही जिला उपायुक्त और पुलिस कप्तान से फोन पर बातचीत कर विस्तृत जानकारी साझा की और दोषियों को शीघ्र चिन्हित कर कठोर कार्रवाई की मांग की। महापुरुषों की प्रतिमा की सुरक्षा पुलिस के लिए बनी चुनौती जानकारी मिलते ही हेल्पिंग ट्रस्ट इंडिया हजारीबाग के अध्यक्ष शाहिद हुसैन अपने समर्थकों के साथ नीलांबर पीतांबर चौक पहुंचे। उन्होंने महापुरुषों की प्रतिमा लगातार तोड़े जाने पर चिंता जताते जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन चलाने की बात कही। वही महापुरुषों की प्रतिमा को सुरक्षा प्रदान करना पुलिस के लिए भी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने कोर्रा थाना प्रभारी से इस संबंध में बात की तो उन्होंने वहां पर सीसीटीवी कैमरे खराब रहने की बात कही उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम में जहां से पूरे जिले मे कानून-व्यवस्था को नियंत्रित किया जाता है। वहां अव्यवस्था की स्थिति है। सीसीटीवी मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए कई टीवी खराब पड़े हैं। शहर में मात्र 48 सीसीटीवी कैमरे चालू हैं। जबकि दर्जनों खराब पड़े है। इसके कारण शहर में अपराध बढ़ रहे हैं।  

घग्गर-मारकंडा के उफान से हरियाणा के गांव जलमग्न, ट्रेनों का संचालन रद्द

हिसार  हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और चरखी दादरी जिलों में लगातार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। ड्रेन और नहरों के टूटने से कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, फसलें डूब गई हैं और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। हिसार में ड्रेन टूटने से भारी नुकसान हिसार जिले में घिराय, पातन और भिवानी रोहिल्ला के पास घग्गर ड्रेन के टूटने से करीब 300 एकड़ क्षेत्र में जलभराव हो गया। जिले में अब तक 61 हजार एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। 28 गांवों की बाहरी बस्तियों और ढाणियों में पानी भरा हुआ है, जबकि 34 स्कूलों के परिसर में जलभराव की स्थिति है। रामगढ़ में जलभराव से नाराज ग्रामीणों ने हिसार-सिवानी रोड पर जाम लगाकर विरोध जताया। फतेहाबाद में मजदूर की मौत फतेहाबाद के भट्टूकलां में गांव रामसरा के पास हिसार मल्टीपर्पज चैनल ड्रेन टूटने से 700 एकड़ फसलें डूब गईं। करीब 15 ढाणियों में भी पानी भर गया। बचाव कार्य के दौरान ढिंगसरा गांव के मजदूर निगेह सिंह (42) की हार्टअटैक से मौत हो गई। भूना में बाढ़ जैसे हालात हैं, जहां दहमान गांव के 300 घरों में पानी घुस गया और 15 परिवारों को दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी। खंचाजी मोहल्ला में एक मकान की छत और पुरानी तहसील चौक व गांव गाजूवाला में दीवारें गिर गईं। सिरसा में घग्गर नदी खतरे के निशान से ऊपर सिरसा के गांव चामल के पास ढाणी सुखचैन और मल्लेवाला में घग्गर नदी के तटबंध में दरारें आ गईं। चोपटा क्षेत्र में पांच घंटे की बारिश से कई गांवों में जलभराव हो गया। घग्गर नदी का जलस्तर 18,600 क्यूसेक से बढ़कर 21,000 क्यूसेक हो गया, जो खतरे के निशान को पार कर चुका है। शक्करमंदोरी और दड़बा कलां के स्कूलों में पानी भर गया, जबकि लुदेसर का शहीद स्मारक भी जलमग्न हो गया। चरखी दादरी में 7600 एकड़ फसल प्रभावित चरखी दादरी के 15 गांवों में जलभराव से 7600 एकड़ फसलें प्रभावित हुई हैं। गांव चांग और सागवान में आबादी क्षेत्र में पानी भरने से लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। बुधवार को गांव अचीना के पास बास माइनर टूटने से छह एकड़ फसल जलमग्न हो गई। गांव कलिंगा में तीन नाबालिग लड़कियों की मौत के बाद प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के जरिए मुनादी कराकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।फतेहाबाद में भी घग्गर का जलस्तर बढ़ा फतेहाबाद में घग्गर नदी का जलस्तर 14,700 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्कूलों में अवकाश हिसार और सिरसा में 6 सितंबर तक स्कूल बंद रहेंगे। फतेहाबाद के रतिया, भूना, टोहाना और जाखल खंडों में भी स्कूल 6 सितंबर तक बंद रहेंगे। प्रशासन और स्थानीय टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन बारिश और जलभराव ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंबाला के 144 गांव जलमग्न, करंट लगने से एक शख्स की मौत, चार घरों की छत गिरी बारिश और नदियों के उफान ने अंबाला के अधिकांश क्षेत्रों को प्रभावित किया है। बुधवार रात्रि को घग्गर, टांगरी और मारकंडा नदी में अत्यधिक पानी आने से अंबाला के 146 से अधिक गांव जलमग्न हो गए। हालात इतने खराब हुए कि कालपी ओवरब्रिज के पास टूटे तार के कारण करंट लगने से एक युवक की मौत हो गई, वहीं जिले में चार घरों की छत गिर गईं। हालांकि घर की छत गिरने से लोग बाल-बाल बच गए, इनमें तीन घर बराड़ा में तो एक घर अंबाला छावनी के मोहड़ा में स्थित है, इसके साथ ही साहा में गंदे पानी की सप्लाई से साहा के बिहटा गांव निवासी 14 वर्षीय नैन्सी की मौत हो गई। बच्ची को दो दिन से उल्टी व दस्त हो रहे थे। दूसरी तरफ अंबाला के इंडस्ट्रियल एरिया में 9 फुट तक पानी भर गया, जिसमें 175 से अधिक लोग फंस गए। जिन्हें रेस्क्यू करने का अभियान एसडीआरएफ ने सुबह चार बजे से ही शुरू कर दिया था, इसमें से 150 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, इसके साथ ही अंबाला साहा राजमार्ग, अंबाला-यमुनानगर राजमार्ग पर टांगरी व मारकंडा नदी का पानी आ गया जिससे एक तरफ का ही मार्ग चला। चंडीगढ़ दिल्ली राजमार्ग को भी हिसार बाईपास से डायवर्ट किया गया। वोडाफोन का नेटवर्क ठप होने से बचाया छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन का प्रदेशस्तरीय कार्यालय है। यहीं से प्रदेश में नेटवर्क तकनीक को संचालित किया जाता है। बुधवार रात्रि को टांगरी का पानी क्षेत्र में आने से यह कार्यालय भी डूब गया। यहां कर्मचारी भी फंस गए। उन्होंने प्रशासन से मदद मांगी तो वीरवार सुबह प्रशासन ने एसडीआरएफ को भेजकर कुछ कर्मचारियों को निकाला तो वहीं कुछ कर्मचारियों को खाने का सामान भी पहुंचाया, इसके साथ ही डीजल की सप्लाई भी की गई ताकि जेनरेटर चलते रहे। सबसे अधिक अंबाला छावनी का हुआ नुकसान इस आपदा में सबसे अधिक नुकसान अंबाला छावनी और साहा क्षेत्र को हुआ है, इसके बाद अंबाला सिटी के ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार उप-तहसील साहा के सभी गांवों में पानी भर गया है। इसके अलावा, कुछ आवासीय क्षेत्रों जैसे विकास विहार, अग्रसेन नगर, कीर्ति नगर, शंकर पार्क, गणेश विहार, और सत्संग विहार के साथ-साथ टांगरी बांध से सटे क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या रही। हलका धन्यौरा और ठरवा माजरी के गांवों में टांगरी नदी का पानी खेतों में घुस गया। खोजकीपुर, प्रधान, नगल, सरसाहेड़ी, सलरेहड़ी, माजरी, धन्यौरा, मोहड़ा, बब्याल, और बाड़ा गांवों के खेतों में भी पानी भर गया है, इसके अलावा, टैगोर गार्डन, पूजा विहार, प्रभु प्रेम आश्रम, ईस्ट सोनिया कॉलोनी, कमल कॉलोनी, करधान, और अर्जुन नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव रहा। अंबाला शहर में ये क्षेत्र रहे प्रभावित शहर के कई रिहायशी इलाकों में पानी घरों में घुस गया, इनमें भानोखेड़ी, सोंतली, मलौर, सपेरा, केसरी, गोला, गगनेहरी, पपलोथा, महताबगढ़, अलापुर, लांडा, हलदरी, राजौली, हेमा माजरा, मुलाना, बुधियों, शेरपुर, और सुलखनी शामिल हैं। इन्को चौक अंडरपास, मनमोहन नगर, कपड़ा मार्केट, और टीवी अस्पताल रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर भी जलभराव रहा। बराड़ा और मुलाना में ये क्षेत्र डूबे बराड़ा और मुलाना तहसील के खेतों में जलभराव की समस्या है। सैहला, सरदाहेड़ी, डुलियानी, गगनपुर, होली, मुलाना, घेलड़ी, हेमामाजरा, उगाला, … Read more

बालाघाट में बढ़ा बाघ का आतंक, लगातार हमलों से ग्रामीण सहमे

बालाघाट/ कटंगी  वन परिक्षेत्र कटंगी के कन्हड़गांव सर्किल अंतर्गत अंबेझरी-देवरी सड़क मार्ग पर गुरुवार की शाम साढ़े चार से पांच बजे के बीच बाघ ने एक किसान पर हमला कर दिया। उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में भर्ती किया गया। जहां से हालत नाजुक देख जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां रात्रि साढ़े 11 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। इस परिक्षेत्र में बाघ के हमले से आठ माह के भीतर यह पांचवीं मौत है। घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित है। जानकारी के अनुसार, ग्राम अंबेझरी निवासी किसान सेवकराम पिता रामाजी गौपाले 61 वर्ष रोजाना की तरह खेत में बैल और मवेशी चराने के लिए गया था। जिन्हें चराने के बाद उन्हें लेकर घर लौट रहा था। तभी वह अंबेझरी-देवरी सड़क पहुंचा था कि उस पर बाघ ने पीछे से हमला कर घायल कर दिया। इस हमले को देख अन्य किसानों ने शोर मचाया तो बाघ जंगल के अंदर भाग गया। किसान किसी तरह से घर पहुंचा और स्वजनों को जानकारी दी गई। घटना में सेवकराम के गर्दन, चेहरे पर गंभीर चोटें आई थी। 21 दिन पूर्व में दूसरा हमला बाघ के हमले से 21 दिन पूर्व 14 अगस्त को ग्राम अंबेझरी निवासी विठ्ठल आसटकर अपने घर की गाय व भैंस चराने जंगल के पास गया था। उस समय बाघ ने हमला कर घायल कर दिया था। ऐसे में अब बाघ और मानव के बीच बढ़ते द्वंद को लेकर लोग भयभीत नजर आ रहे है। इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि खेत किनारे जंगल में फेंसिंग लगाई जाए। ताकि बाघ का प्रवेश सड़क व खेतों में आने से रूक सके। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लगातार बाघ के लोग निवाले बनते जाएंगे और घायल होते रहेंगे। आठ माह के भीतर बाघ ने पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। मृतक के परिजनों को दिलाया जाएगा मुआवजा     ग्राम अंबेझरी निवासी सेवकराम गौपाले का खेत जंगल से सौ मीटर दूरी पर है। वह अपने बैल सहित अन्य मवेशी को चराने के बाद शाम को घर लौट रहा था कि बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल को कटंगी से बालाघाट रेफर कर दिया गया था। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के स्वजनों को विभाग की तरफ से आठ लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया जाएगा। जिसकी कार्यवाही डीएफओ कार्यालय से होगी।– बाबूलाल चढार, वन परिक्षेत्र अधिकारी कटंगी।