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गणेश उत्सव में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम, युवाओं का राष्ट्रप्रेम देख भावुक हुए CM यादव

युवाओं का राष्ट्रप्रेम काबिले-तारीफ, गणेश उत्सव में दिखा ऑपरेशन सिंदूर का जज़्बा: CM डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव गणेश उत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के गुलमोहर कॉलोनी में शिवाजी फाउंडेशन और श्रीगणेश उत्सव समिति के गणेश चतुर्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुलमोहर गणेश उत्सव समिति द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर केंद्रित प्रदर्शनी और झांकी देखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना सराहनीय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने आपरेशन सिंदूर के माध्यम से पड़ोसी शत्रु ही नहीं बल्कि विश्व को भारत की शक्ति से परिचित करवाया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पगड़ी और पुष्प मालाओं से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री और समिति के संरक्षक नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा अर्चना कर आरती की। युवाओं ने गजानन विघ्नहर्ता गणेशजी की आराधना और समूह नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, करमा दलों को सम्मानित कर किया प्रोत्साहित

रायपुर : संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय करमा तिहार के रंग में डूबा मुख्यमंत्री निवास मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, करमा दलों को सम्मानित कर किया प्रोत्साहित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है। संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं। संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा। संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राम कुमार टोप्पो, विधायक आशाराम नेताम, विधायक प्रबोध मिंज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम राम सेवक सिंह पैकरा, केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुमोना सेन, सभापति जिला पंचायत धमतरी टीकाराम कंवर, प्रदेश अध्यक्ष कंवर समाज हरवंश सिंह मिरी, अध्यक्ष कंवर समाज रायपुर महानगर मनोहर सिंह पैकरा सहित कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

23 जिलों में बाढ़ से हाहाकार, नांगल-आनंदपुर साहिब में अलर्ट जारी, डूबे 1902 गांव

अमृतसर इन दिनों पूरा पंजाब इन दिनों बाढ़ से जूझ रहा है. इस प्राकृतिक आपदा में 43 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1.71 लाख हेक्टेयर में फैली फसलें बर्बाद हो गई हैं. 23 जिलों के 1902 गांव पानी में पूरी तरह से डूब गए हैं, जिससे 3,84,205 लोग प्रभावित हुए हैं. साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 20,972 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. पंजाब के राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन ने कहा कि अभूतपूर्व बाढ़ के कारण 23 जिलों के कुल 1,902 गांव प्रभावित हुए हैं, जिससे 3.84 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 20,972 लोगों को निकाला गया है. 24 घंटे में छह और लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही 14 जिलों में मृतकों की संख्या बढ़कर अब 43 हो गई है. 14 जिलों में 43 लोगों की मौत उन्होंने बताया कि मौतें होशियारपुर (7), पठानकोट (6), बरनाला और अमृतसर (5-5), लुधियाना और बठिंडा (4-4), मनसा (3), गुरदासपुर और एसएएस नगर (2-2), पटियाला, रुपनगर, संगरूर, फाजिल्का और फिरोजपुर (1-1) में दर्ज की गई हैं. पठानकोट में तीन लोग लापता हैं. बाढ़ से संबंधित आंकड़े 1 अगस्त से 4 सितंबर तक की अवधि के हैं. उन्होंने बताया कि 1.71 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचने की खबर है, जिसमें गुरदासपुर, अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, कपूरथला और मानसा सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं. इसी बीच AAP आदमी पार्टी के प्रमुख केजरीवाल ने केंद्र सरकार पंजाब की मदद करने की अपील की है. केजरीवाल ने बयान जारी कर कहा कि मैं केंद्र सरकार से विनती करना चाहूंगा कि इस भीषण स्थिति में जितनी हो सके पंजाब की मदद करें. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा अफगानिस्तान को मुहैया कराई मदद का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने अभी देखा कि केंद्र सराकर ने अफगानिस्तान में भूकंप आया तो वहां पर उन्होंने काफी मदद भेजी है. वो अच्छी बात है, दुनिया में कहीं भी कुछ हो तो हमें मदद करनी चाहिए, लेकिन पंजाब में इतना बड़ा संकट है तो पंजाब को भी केंद्र सरकार मदद करे. शिवराज सिंह ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा गुरुवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों अमृतसर, गुरदासपुर और कपूरथला का दौरा किया और लोगों को आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में केंद्र उनके साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि दो केंद्रीय दल स्थिति का आकलन करने के लिए पंजाब का दौरा कर रहे हैं और वे केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे. उन्होंने कहा, 'नुकसान साफ़ दिख रहा है. फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं और खेत जलमग्न हो गए हैं.' राज्यपाल ने कृषि मंत्री को सौंपी रिपोर्ट पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अमृतसर एयरपोर्ट पर शिवराज चौहान को बाढ़ की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें जानमाल, फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी दी गई. इसके अलावा अरविंद केजरीवाल ने भी कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और केंद्र से इस संकट में पंजाब की मदद करने की अपील की. इससे पहले दिन में केजरीवाल ने चंडीगढ़ स्थित अपने आधिकारिक आवास पर मान से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली. बुखार से पीड़ित मान बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान केजरीवाल के साथ नहीं जा सके. प्रभावित गांव में गजटेड अधिकारी तैनात मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक गांव में एक गजटेड अधिकारी को तैनात किया गया है. उनका कहना है कि इससे प्रभावित लोगों की समस्याएं आसानी से प्रशासन तक पहुंच सकेंगी, जिससे समस्या का समाधान तुरंत हो सके. राज्य सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी का आदेश दिया है. भाखड़ा बांध पर जलस्तर स्थिर इस बीच रूपनगर के उपायुक्त वरजीत सिंह वालिया ने नंगल और आनंदपुर साहिब के कई गांवों में सतलुज नदी के पास निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने या जिला प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविरों में जाने की अपील की है. उन्होंने बताया कि भाखड़ा बांध का जलस्तर स्थिर है. गुरुवार को बांध से लगभग 85,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इससे पहले दिन में डीसी ने कहा था कि बांध में जलस्तर 1,679 फीट तक पहुंच गया है, जबकि पानी का डिस्चार्ज लगभग 75,000 क्यूसेक है और इसे बढ़ाकर 80,000 से 85,000 क्यूसेक किया जा सकता है. पटियाला जिला प्रशासन ने भी घग्गर नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के मद्देनजर पटरान में घग्गर नदी के निकटवर्ती गांवों के निवासियों के लिए अलर्ट जारी किया है. आपको बता दें कि पंजाब दशकों में अपनी सबसे भीषण बाढ़ आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है. ये बाढ़ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद सतलुज, व्यास और रावी नदियों के साथ-साथ मौसमी नालों में आए उफान का नतीजा है. इसके अलावा पंजाब में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश ने लोगों की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है.

तेंदुए ने मचाई दहशत, स्कूल 13 सितंबर तक बंद रहेंगे

इटारसी मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में तेंदुओं की दहशत से लोग परेशान हैं। अलग-अलग जगहों पर तेंदुए रहवासी इलाकों में पहुंच रहे हैं। पथरौटा स्थित पॉवर ग्रिड परिसर में एक शावक की करंट लगने से मौत हो गई थी। उसके बाद से दो तेंदुए लगातार इलाके में मूवमेंट कर रहे हैं। जिसके कारण स्कूल प्रबंधन ने फैसला लेते हुए 4 से 13 सितंबर तक स्कूल बंद रखने का फैसला लिया है। दरअसल, तेंदुआ तवा बफर रेंज के धांसई में 3 दिनों से घुसकर ग्रामी मुर्गों को निशाना बना रहा है। ग्रामीण तेंदुए के डर से घर के बाहर निकलने में डर रहे हैं। तेंदुए के मूवमेंट पर टीम नजर रख रही है। इटारसी के पथरौटा मादा तेंदुआ दिखाई दे रही थी, लेकिन शावक की मौत के बाद से वह और आक्रमक हो गई है। जिसको देखते हुए स्कूल को 4 से 13 सितंबर ऑनलाइन क्लासेस चलेंगी। इधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वन विभाग का कहना है कि बारिश के कारण पिंजरा नहीं लग पाया है। एक पिंजरा हिरनचापड़ा में फंसा है और दूसरा नर्मदापुरम में है। जिसे जल्द से जल्द लाने का इंतजाम किया जा रहा है। 

नई खोज: गेहूं का बीज, ग्लूटेन एलर्जी पीड़ितों के लिए सुरक्षित रोटी

नर्मदापुरम ग्लूटेन (प्रोटीन) एलर्जी के मरीजों के लिए गेहूं के आटे से बनी रोटियां खाना मुश्किल होता है। मध्य प्रदेश सरकार पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र की अखिल भारतीय गेहूं परियोजना में गेहूं का नया बीज तैयार करवा रही है। इसके आटे से रोटियां खाने से मरीजों को एलर्जी नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने इस पर शोध शुरू कर दिया है। तीन साल की फील्ड ट्रायल के बाद गेहूं की नई किस्म तैयार हो जाएगी। गेहूं में ग्लूटेन की मात्रा बहुत कम करने के लिए अनुसंधान केंद्र के वैज्ञनिकों ने देशभर से विभिन्न किस्मों के गेहूं के सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों को जबलुपर के फूड साइंस प्रयोगशाला में भेजा गया है। यहां सबसे कम ग्लूटेन वाली किस्मों को चिनिह्त किया जाएगा। इनकी स्क्रेनिंग कर वैज्ञानिक देखेंगे कि बीजों में ग्लूटेन प्रोटीन को और कम कैसे किया जाए। इस पर विभिन्न प्रकार के प्रयोग करेंगे। वैज्ञानिको की देखरेख में अनुसंधान केंद्र के खेतों में अलग-अलग वैरायटी को लगाया जाएगा।   यह देखा जाएगा कि हर साल बनाए गए बीज से कितना ग्लूटेन कम हुआ। इसका आंकलन भी होगा। तीन सालों तक यह शोध होने के बाद सबसे कम ग्लूटेन के गेहूं का बीज तैयार होगा। केंद्र इसे सरकार को देकर पेटेंट कराएगा। इसके बाद गेहूं बाजार से किसानों तक पहुंचेगा। अनुसंधान केंद्र के वैज्ञनिकों के मुताबिक लगभग 20 हजार लोगों में किसी एक को ग्लूटेन एलर्जी होती है। गेहूं में ग्लूटेन होता है। इसकी रोटी खाते ही मरीज के पेट की छोटी आंत में एलर्जी होने लगती है। इससे कई तरह की परेशानी सामने आती हैं। अभी तक नहीं हुआ ग्लूटेन पर कोई शोध वैज्ञानिकों के मुताबिक देश में ग्लूटेन एलर्जी के मरीजों की संख्या कम होने के कारण यह रिकार्ड नहीं की गई है। मरीजों के लिए कम ग्लूटेन के गेहूं को लेकर अभी तक प्रदेश और देश में कोई शोध नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश में पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र में पहली बार इस पर काम कर रहा है। तीन साल के फील्ड ट्रायल के बाद इसे तैयार किया जाएगा। और किसानों को उगाने के लिए दिया जाएगा। अनुसंधान केंद्र ने देश को दी 56 गेहूं की किस्म जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के प्रदेश में सागर, जबलपुर, पवारखेड़ा में तीन अनुसंधान केंद्र हैं। इसमें पवारखेड़ा का अनुसंधान केंद्र की स्थापना 1903 में की गई थी। केंद्र की अखिल भारतीय गेहूं परियोजना ने अभी तक देशभर में मिलने वाले 56 प्रकार के गेहूं की प्रजातियां विकसित कर किसानों को दी हैं। जिनका किसान उपयोग कर रहे हैं। गेहूं का नया बीज तैयार कर रहे केके मिश्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी अखिल भारतीय गेहूं परियोजना पवारखेड़ा नर्मदापुरम  ने बताया- ग्लूटेन के मरीजों के लिए गेहूं का नया बीज तैयार कर रहे हैं। इसमें ग्लूटेन की मात्रा सबसे कम होगी। इसको खाने से मरीज को एलर्जी नहीं होगी। विभिन्न किस्मों के गेहूं के सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए हैं। कम ग्लूटेन वाले किस्मों पर तीन साल तक फील्ड ट्रायल कर नया गेहूं का बीज बनाया जाएगा।

नए 4-लेन हाईवे के लिए 14 गांवों से होगी जमीन की खरीद, गुजरात-एमपी जोड़ेगा कनेक्टिविटी

धार एमपी में 70 किलोमीटर का नेशनल हाईवे अभी उज्जैन से बदनावर के नागेश्वर धाम तक बना है। अब दूसरे चरण का कार्य बदनावर से टिमरवानी तक 80 किमी का काम शुरू होने वाला है। यह मार्ग भी 552 डी के अंतर्गत ही आएगा तथा इसका निर्माण भी नेशनल हाईवे द्वारा किया जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं अक्टूबर माह में इस रोड़ का कार्य शुरू हो जाएगा। 1900 करोड़ी की लागत से बन रहा यह नेशनल हाईवे गुजरात से जुड़ेगा तथा इसके बनने से उज्जैन से टिमरवानी की दूरी भी कम हो जाएगी व आवागमन भी सुगम हो होगा। इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले किया जाएगा। ताकि गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका फायदा मिल सके तथा भैंसोला में बन रहा पीएम मेगा टेक्सटाईल पार्क भी इस रोड़ से जुड जाए।   14 गांव की जमीन होगी अधिग्रहित फोरलेन निर्माण के लिए बदनावर तहसील के पश्चिम क्षेत्र की करीब 14 गांवों की भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके निर्माण के लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करेंगे। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इससे संबंधित गांवों के किसानों में भी हलचल तेज हो गई है। यह फोरलेन उज्जैन से सीधा दिल्ली मुंबई एट लेन एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ जाएगा।   जीतू पटवारी के वाहन पर पथराव, बाल-बाल बचे, गाड़ी के कांच फूटे तहसीलदार सुरेश नागर के मुताबिक, बदनावर से टिमरवानी तक फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदनावर तहसील के 14 गांवों की भूमि से यह फोरलेन निकलेगा। इसके लिए ग्राम व भूमि प्रस्तावित है। संबंधित गांवो के हल्का पटवारी व राजस्व अमले को भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा फायदा अभी तक मालवांचल से गुजरात जाने के लिए इंदौर-अहमदाबाद मार्ग ही प्रमुख है। अब इस मार्ग के फोरलेन बनाए जाने से यातायात इस पर अधिक डायवर्ट होगा। इससे समय की बचत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनावर के लोग भी गुजरात इसी मार्ग से होकर जाते हैं। भैंसोला में बड़ा पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, जबकि छायन में कपड़ा कारखाना शुरू हो चुका है। इसी तरह दोतरिया में भी एक फैक्टरी की नींव रखी जा चुकी है। इन उद्योगों के लिए आवागमन में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा।

तीन चरणों में होंगे बिहार विधानसभा चुनाव, चुनाव शेड्यूल अक्टूबर में जारी होने की उम्मीद

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग अक्टूबर के महीने में विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है। बिहार चुनाव के लिए वोटिंग नवंबर में संभावित है। विधानसभा चुनाव को तीन चरणों में आयोजित किया जा सकता है। नवंबर 2025 में ही चुनाव के नतीजे घोषित होंगे और नई सरकार का गठन होगा। क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार में चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि नवंबर 2025 के पहले एवं दूसरे सप्ताह में 3 चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया जा सकता है। दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए चुनाव की तारीखें तय की जाएंगी। फिलहाल निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारी में जुटा है। करीब 22 साल बाद बिहार में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराया जा रहा है। इसके तहत घर-घर सर्वे का काम जुलाई महीने में पूरा कर लिया गया। अगस्त महीने में एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर इस पर दावा और आपत्तियां मांगी गई थीं। आयोग अब इनके निपटारों में जुटा हुआ है। 30 सितंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। उसी के आधार पर विधानसभा चुनाव होंगे। अक्टूबर में आ सकता है चुनावी शेड्यूल माना जा रहा है कि फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद निर्वाचन आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में हो सकती है। चुनाव शेड्यूल जारी होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लग जाएगी। अक्टूबर महीने में ही दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं, उस दौरान वोटिंग कराए जाने की संभावना नहीं है। 28 अक्टूबर को उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के बाद छठ महापर्व का समापन होगा। इसके बाद ही विधानसभा चुनाव का मतदान संभव है। पिछली बार भी तीन चरणों में हुई थी वोटिंग 2020 में भी 3 चरणों में विधानसभा चुनाव कराए गए थे। पहले चरण में 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को मतदान हुआ था। दूसरे चरण में 94 सीटों पर 3 नवंबर को और 78 सीटों पर 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी। 10 नवंबर को मतगणना के बाद चुनाव का रिजल्ट घोषित हुआ था।  

नवजातों को कुतरा चूहे ने, MY अस्पताल में खराब हालतों पर सवाल खड़े

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के एमवाय अस्पताल (महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय) के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती दो नवजात शिशुओं की मौत से हड़कंच मच गया है। एक तरफ परिजन ने नवजातों की मौत का कारण चूहों का काटना बताया है, जबकि अस्पताल प्रशासन इसे गंभीर बीमारियों और संक्रमण का नतीजा बता रहा है। मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और कहा है कि सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं बता दें कि यह पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल की तरफ से ऐसी लापरवाही देखने को मिली है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने गलतियों से सबक नहीं सीखा। चार साल पहले, यानी मई 2021 में एमवाय अस्पताल की पहली मंजिल पर नवजात शिशु नर्सरी में भर्ती एक नवजात के पैर का अंगूठा और एड़ी को चूहों ने कुतर दिया था।   इससे शिशु की जान खतरे में आ गई। इसके बाद नवजात के घरवालों ने हंगामा भी किया था। शिशु प्री-मेच्योर था और उसका वजन 1.4 किग्रा था। देखरेख के लिए उसे नर्सरी में वार्मर पर रखा गया था। बच्चे की मां दूध पिलाने पहुंची थी, तब मामले का खुलासा हुआ था। जीतू पटवारी ने उठाए सवाल मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजातों की मौत के मामले में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने जमकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के 22 साल का यह असली चेहरा है। एमवाय में चूहों की हरकत यह पहली बार नहीं हुई। नवजातों को चूहों ने नहीं, भ्रष्टाचारी प्रशासन ने क्षति पहुंचाई है। जितना दोषी वह चूहा है, उससे ज्यादा दोषी यह तंत्र और व्यवस्था है।' वहीं राहुल गांधी ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना रूह कंपाने वाली है। उन्होंने कहा कि एक मां की गोद से उसका बच्चा छिन गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी नहीं निभाई।   अस्पताल प्रशासन ने लिया एक्शन नवजातों की मौत के बाद लापरवाही बरतने वाली नर्स श्वेता चौहान और आकांशा बेंजामिन को सस्पेंड कर दिया गया है, साथ ही नर्सिंग सुप्रीडेंट मारग्रेट जोसेफ को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा प्रभारी एचओडी डा. मनोज जोशी, आईसीयू इंचार्ज नर्स प्रवीणा सिंह, कलावती भलावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले में डॉ. एसबी बंसल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी भी बनाई है।

जमकर बरसात जारी: इंदौर में अगले तीन दिन भी गिरेगी बारिश

इंदौर इंदौर में देर रात से शुरू हुआ बारिश का दौर अभी तक जारी है। इस महीने में लगातार तेज बारिश का यह पहला दौर है, जब शहर पूरी तरह पानी से तरबतर हो गया है। बारिश की वजह से कई इलाकों में पानी भर गया है और कुछ जगह तो सड़के जलमग्न हो गई हैं। सड़कों पर जमा हुए पानी की वजह से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार इंदौर शहर में 24 घंटे के अंदर करीब 127 मिमी से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं इंदौर में सबसे ज्यादा बारिश देपालपुर इलाके में होना बताया जा रहा है। यहां करीब 170 मिमी बारिश हुई। पिछले महीने में हुई कम बारिश से शहर के लोग परेशान था, जिसे इस झड़ी ने पूरा कर दिया है।   बुधवार को शहर में बादल छाए और दोपहर में रिमझिम फुहारों के साथ हल्की बारिश रुक-रुककर हुई। शाम चार बजे बाद शहर में तेज बारिश हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में रात 8.30 बजे तक 22 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं रीगल क्षेत्र में रात 10 बजे तक 16 मिमी बारिश दर्ज की गई। भोपाल स्थित मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में आज मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में एक द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, गुना व दमोह से गुजर रही है। वहीं विदर्भ पर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इस वजह से अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। वहीं एक कम दबाव का क्षेत्र उड़ीसा और उससे लगे क्षेत्र झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ होते हुए मप्र की ओर आएगा। इसके प्रभाव से इंदौर में अगले दो से तीन तेज बौछारों से शहर तरबतर होगा। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य एक डिग्री सेल्सियस अधिक 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

फलों से भरी बगिया का तोहफा! ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना में महिलाओं को सब्सिडी सीधे खाते में

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए एक और अच्छी खबर है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा तो लाभार्थियों के खाते में आने ही वाला है। हालांकि वे मोहन यादव सरकार की एक और योजना का फायदा उठा सकती हैं। प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' से योजना चल रही है। इस योजना के तहत फलदार पेड़ लगाने के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। यह पैसा सीधे महिलाओं के खाते में भेजा जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में एक बगिया मां के नाम की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इस काम में मदद के लिए सरकार कंटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ सिंचाई के लिए 50000 लीटर का जल कुंड बनाने के लिए पैसा दिया जा रहा है। इस योजना से जुड़ने के लिए 15 सितंबर तक का समय है। 31,300 महिलाओं को किया जाएगा शामिल 'एक बगिया मां के नाम' योजना का शुरुआती लक्ष्य 31,300 महिलाओं को लाभ पहुंचाने का रखा गया है। हालांकि महिलाओं में इस योजना को लेकर इस कदर जोश है कि 40,406 महिलाओं ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। निजी भूमि पर बगिया बनाने की योजना 15 अगस्त से शुरू हुई है और 15 सितंबर तक चलेगी। इस योजना के तहत 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। अभी तक कितने आवेदन को मिली मंजूरी मोबाइल एप के जरिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है। इस एप को मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से तैयार किया गया है। अभी तक 10,162 महिलाओं को इस योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। मतलब इन महिलाओं के खाते में पैसा आने की राह खुल गई है। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार 1000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस योजना में सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10,162 गांवों में सर्वे कर 40,406 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत हर ब्लॉक से कम से कम 100 हितग्रहियों को चुना जाएगा। साल में दो बार महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। योजना के लिए पात्रता इस योजना के तहत चुनी गई महिलाओं को बगिया लगाने के लिए कम से कम 0.5 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। इससे ज्यादा या कम जमीन पर बाग लगाने वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। खंडवा जिला नंबर वन बगिया विकसित करने में वर्तमान में खंडवा जिला सबसे आगे है, जबकि सिंगरौली जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। आज 3 सितंबर तक खंडवा, सिंगरौली, बैतूल, देवास और आगर मालवा जिले टॉप-5 में शामिल थे। वहीं टॉप 5 ब्लॉक की बात करें तो खंडवा, चितरंगी, पंधाना, पुनासा और खालवा शामिल है। कब आएगी लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाले पैसों का इंतजार रहता है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि 10 सितंबर के बाद पैसा खाते में आ सकता है। इस महीने महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ही आएंगे।