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राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की सख्ती: बीकानेर-जोधपुर विश्वविद्यालय के कुलगुरु को हटाया

जयपुर बीकानेर-जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। डॉ कुमार पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप साबित हुआ है। जांच में निधि का दुरुपयोग और अवैधानिक नियुक्तियां उजागर हुई हैं। डॉ. अरुण कुमार के विरुद्ध काफी समय से शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद उनकी जांच के लिए संभागीय आयुक्त, जोधपुर को निर्देशित किया गया था। संभागीय आयुक्त, जोधपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में डॉ. अरुण कुमार द्वारा के विरूद्ध  अधिनियम के प्रावधानों का कार्यान्वयन करने में जानबूझकर लोप करने, प्रदत्त शक्तियों का दुरूपयोग करने, विश्वविद्यालय को वित्तीय हानि पहुंचाने आदि के कृत्य प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये। किसी विश्वविद्यालय के कुलपति को कैसे बर्खास्त किया जा सकता है? किसी कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, कदाचार, या प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो कुलपति को नियमानुसार जांच करवाकर हटाया जा सकता है। शिकायतें छात्रों, कर्मचारियों, या अन्य हितधारकों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार, या राज्यपाल (जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं) को लिखित रूप में की जा सकती हैं और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में कदम बठाया जा सकता है।  शिकायत मिलने पर, राज्यपाल या विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के निर्देश पर प्रारंभिक जांच शुरू की जाती है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो एक औपचारिक जांच समिति गठित की जा सकती है। जांच समिति अपनी रिपोर्ट कुलाधिपति (राज्यपाल) को सौंपती है। यदि कुलपति दोषी पाए जाते हैं, तो समिति बर्खास्तगी या निलंबन की सिफारिश कर सकती है।

मुख्यमंत्री साय ने विदेश से फ़ोन कर बस्तर की बाढ़ का लिया अपडेट

राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी मुस्तैदी बरतने के निर्देश रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हुई अतिवृष्टि से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले और बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमन सिंह से दूरभाष पर चर्चा कर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति जानी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राजस्व सचिव श्रीमती कंगाले ने मुख्यमंत्री को बताया कि दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जिले में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा, दरभा और तोकापाल विकासखंडों में प्रशासन लगातार राहत कार्य संचालित कर रहा है। लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम  मांदर से 21 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीं, लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर और नाव की सहायता से ग्रामीणों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। बीते 24 घंटों में 68 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा जाए और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने संभाग के सभी कलेक्टरों को निचले इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क करने और सुरक्षित स्थानों पर शीघ्र पहुँचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने राहत कार्यों में जुटे प्रशासनिक अमले, एसडीआरएफ और पुलिस बल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार आम जनता की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैंने प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रहने और आवश्यकता अनुरूप प्रभावितों को सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

पंजाब बाढ़ अपडेट: हेलिकॉप्टर रेस्क्यू, 90 ट्रेनें प्रभावित, स्कूल 30 अगस्त तक बंद

अमृतसर  पंजाब में हो रही मूसलाधार बारिश और उसके कारण उत्पन्न बाढ़ जैसे हालात के चलते राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 27 से 30 अगस्त तक बंद रखा जाएगा. यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. राज्य में बाढ़ प्रभावित सात जिलों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इन जिलों के करीब 130 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और यहां तीन से दस फीट तक पानी भर गया है। ऐसे हालात राज्य के सभी तीन बांधों रणजीत सागर, पौंग और नंगल से लगातार पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही वर्षा के कारण बने हैं। मौसम विभाग की और से राज्य के कई जिलों में आगामी दिनों में भारी वर्षा का रेड तो कही येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग विज्ञान चंडीगढ़ ने कल सुबह 8:30 बजे तक 5 जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, बरनाला, संगरूर और मनसा में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। उधर, 7 जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। रणजीत सागर डैम और भाखड़ा डैम से लगातार पानी छोड़े जाने से रावी, सतलुज और ब्यास नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। तरनतारन और फिरोजपुर में हरिके हेडवर्क्स से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। ब्यास नदी पर बने चक्की रेलवे पुल के नीचे से मिट्‌टी धंसने से पठानकोट-जालंधर रेलवे रूट बंद कर दिया गया है। इससे 90 ट्रेनें प्रभावित हुईं। कुछ को पठानकोट-अमृतसर-जालंधर रूट से रवाना किया जा रहा है। पठानकोट के कजला गांव से 6 लोग ध्रुव हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किए गए। रावी नदी में आई बाढ़ के कारण लोग फंस गए थे, जिन्हें NDRF लगातार बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। बाद में सेना बुलानी पड़ी।     मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “राज्य में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है. ऐसे में सभी प्राथमिक, माध्यमिक और सीनियर सेकेंडरी स्कूल 27 अगस्त से 30 अगस्त तक बंद रहेंगे.” कई ज़िलों में जलभराव, जीवन अस्त-व्यस्त भारी बारिश के कारण पंजाब के प्रमुख बांधों — भाखड़ा, पौंग और रंजीत सागर — में जलस्तर खतरे के निशान तक पहुँच गया है. नतीजतन, सतलुज, व्यास और रावी नदियों में हजारों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे पठानकोट, कपूरथला, मोगा, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोज़पुर, अमृतसर और होशियारपुर जैसे ज़िले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. मुख्यमंत्री ने किया ट्वीट (X (पूर्व में ट्विटर)) सैकड़ों गांवों में पानी भर चुका है, फसलें डूब गई हैं और सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है. कई जगहों पर स्कूल भवनों में भी पानी भर गया है, जिससे विद्यार्थियों के लिए स्कूल पहुँचना मुश्किल हो गया है. सरकार ने गिरदावरी और मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू की मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में विशेष गिरदावरी कराई जाएगी, जिसके अंतर्गत किसानों और आम नागरिकों को हुई फसल और संपत्ति की क्षति का आकलन कर मुआवज़ा दिया जाएगा. प्रशासन हाई अलर्ट पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. भारी बारिश ने पंजाब में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. ऐसे में स्कूल बंद करने का निर्णय आवश्यक और समयानुकूल प्रतीत होता है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. बारिश से जुड़े बड़े अपडेट्स..     सतलुज का जलस्तर बढ़ गया है। फिरोजपुर के कई गांवों से लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है।     रणजीत सागर डैम से छोड़े गए पानी की वजह से रावी उफान पर है, जिससे पठानकोट व गुरदासपुर में हालात बिगड़ गए।     गुरदासपुर में मकोड़ा पत्तन के 7 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया। प्रशासन ने गुरदासपुर के लिए स्पेशल हेल्पलाइन नंबर जारी किए।     सुल्तानपुर लोधी में धुसी बांध टूट गया। पिछले 11 घंटों से किसान उस बांध को टूटने से बचाने में लगे थे।     बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मोगा में 31 अगस्त को होने वाली रैली को स्थगित कर दिया है।     अमृतसर में तीन मंजिला तीन इमारतें एक साथ गिर गईं। बिल्डिंग लंबे समय से खाली थी। जिसके चलते जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है।     होशियारपुर के भंगी चो में पानी चढ़ गया है। लोगों को हिदायत है कि उसे पार करने की कोशिश ना करें।     बरनाला धनौली में नाले का किनारा टूटने से खेतों में पानी आ गया है। इससे आस-पास के गांवों में खतरा मंडराने लगा है।

हाहाकार: राजस्थान की नदियों में बह गए 15 लोग, बचाव कार्य चल रहा, 10 लोग डूबने की आशंका

जयपुर  राजस्थान में चितौड़गढ़ और जालोर जिले में एक साथ दो बड़े हादसे हो गए हैं. यहां बनास और सूकड़ी नदी में 15 लोग बह गए हैं. इनमें से पांच लोगों को बच गए हैं. लेकिन 10 लोग अभी लापता हैं. उनके नदियों डूब जाने की आशंका है. नदियों में समाए इन लोगों की तलाश के लिए दोनों ही जगह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. लेकिन लापता लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. पुलिस प्रशासन रेस्क्यू टीमों के साथ वहां डेरा जमाए हुए बैठा है. दोनों ही घटनास्थलों पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा है. लापता हुए लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रखा है. जानकारी के अनुसार पहला हादसा मंगलवार देर शाम को जालोर के सायला थाना इलाके में हुआ. हाल ही में हुई जोरदार बारिश के कारण इलाके के आसाणा गांव के पास से गुजर रही सुकड़ी नदी में पानी का बहाव जोरों पर था. उस समय कुछ लोगों को नदी किनारे एक बोलेरो खड़ी दिखाई दी. इस गाड़ी के पास छह जोड़ी चप्पल और जूते पड़े हुए थे. इस पर लोगों को आशंका हुई तो उन्होंने पुलिस प्रशासन को सूचना दी. सूचना पर वह एसडीएम, तहसीलदार और थाना पुलिस मौके पर पहुंची. ग्रामीणों ने आशंका जताई कि जीप सवार लोग संभवतया नहाने के लिए नदी में उतरे थे लेकिन वापस नहीं निकल पाए. 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए दिखे थे जीप काफी समय से खड़ी हुई और कोई इसे लेने नहीं आया. प्रशासन ने जब इसकी जांच पड़ताल की तो पता चला कि एक ग्रामीण ने 5-6 लोगों को नदी में उतरते हुए भी देखा था. जांच में सामने आया कि आसाणा गांव के 6 लोग लापता हैं. इस पर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया. उसके बाद रात साढ़े आठ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. यह ऑपरेशन मंगलवार को रातभर चला. लेकिन किसी का कोई भी सुराग नहीं लग पाया है. ऑपरेशन अभी चल रहा है. बनास नदी में बह गई कार दूसरा हादसा मंगलवार आधी रात को चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी इलाके में बनास नदी में हुआ. वहां एक वेगन आर कार बनास नदी में बह गई. इस कार में 9 लोग सवार थे. उनमें से पांच लोग तो जैसे-तैसे करके बाहर आ गए लेकिन चार लोग नदी में बह गए. नदी में बहने वालो में दो बच्चे और दो महिला शामिल बताई जा रही है. यह हादसा उपरेड़ा सेमी मार्ग पर बहने वाली पुलिया पर हुआ. यहां भी हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा. उसने गोताखोरों की मदद से लापता हुए चार लोगों को ढूंढ़ने का प्रयास किया. लेकिन उनका बुधवार को सुबह तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. सवाई भोज कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे लोग बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण मातृकुण्डिया बांध के गेट खोले जाने से बनास नदी में उफान आया हुआ था. उसकी उफान में यह कार बह गई. कार सवार लोग भीलवाड़ा से भूपाल सागर के काना खेड़ी जा रहे थे. काना खेड़ा गांव का यह भीलवाड़ा के सवाई भोज में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने गया हुआ था. वहां से आधी रात को वापस अपने गांव लौट रहे थे. उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं लग पाया कि पुलिया पर पानी कितना है और उन्होंने उस पर कार को चढ़ा दिया. बहरहाल यहां भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.

रास्ता भटकने से बड़ा हादसा: पांच लोगों की बची जान, चार लापता

चित्तौड़गढ़   क्या ये गलती गूगल मैप की है? क्योंकि यदि रास्ता सही बताया गया होता तो शायद वैन में सवार लोग घटना का शिकार न होते। बता दें, चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात को एक बड़ा हादसा हुआ है। पुलिया पार करने के दौरान वैन नदी में गिर गई। इसमें वैन में सवार चार लोग तो बह गए जबकि पांच लोगों को पुलिस एवं ग्रामीणों की सहायता से बचा लिया। बहे लोगों की मौके पर तलाश जारी है। वैन में सवार लोगों को गूगल मैप से रास्ता देखना भारी पड़ गया। गूगल मैप इन्हें तीन साल से बंद पड़ी पुलिया पर ले गया, जिससे वैन गड्ढे में उतर गई तथा बाद में बनास नदी में बह गई। गूगल मैप ने बंद रास्ते पर पहुंचा दिया जानकारी में सामने आया कि चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर थाना क्षेत्र के कानाखेड़ा में रहने वाले एक परिवार के 9 सदस्य मंगलवार को भीलवाड़ा जिले में सवाईभोज दर्शन के लिए गया था। वापसी में यह लोग भीलवाड़ा में रुके। फिर अपने घर लौट रहे थे। इसके लिए इन्होंने गूगल मैप की सहायता ली थी। इस दौरान बनास नदी पर सोमी-उपरेडा पुलिया पर यह गूगल मैप की सहायता से पहुंच गए। यह पुलिया काफी समय से बंद पड़ी थी और ऊपर से पानी भी बह रहा था। चालक ने वैन को पुलिया पर उतार दी। इसमें एक गढ़ा था जिसमें वैन फस गई। बाद में तेज बहाव में बह गई। किसी तरह वैन में सवार लोगों ने सहायता मांगी। ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए वहीं, मामले की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। पुलिस को भी सूचना दी गई। इस पर पुलिस एवं प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों से नाव मंगवाकर  पांच लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। वहीं चार लोग पानी में भर गए, जिसमें दो छोटे बच्चे भी हैं। ऐसे में बहे लोगों की तलाश के लिए सिविल डिफेंस की टीम को मौके पर बुलाया गया। देर रात करीब सवा तीन बजे सिविल डिफेंस की टीम भी मौके पर पहुंच गई। लेकिन अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू अभियान शुरू नहीं किया गया। मौके पर राशमी एसडीएम के अलावा गंगरार डिप्टी प्रभु लाल, राशमी थानाधिकारी देवेंद्र देवल मय जाब्ता के मौके पर पहुंचे थे। चार तलाश जारी, टिकी नजरें इस हादसे में वैन में सवार सभी नौ लोग आपस में रिश्तेदार होकर गाडरी समाज के हैं। इनमें से मदनलाल (25) पुत्र देवीलाल, हितेश (16) पुत्र सोहन, लीला (18) पत्नी देवीलाल, काव्यांश (9 माह) पुत्र मदन तथा आयांश (9 माह) पुत्र देवीलाल को ग्रामीणों व पुलिस ने बचा लिया। वहीं हादसे में चंदा (21) पत्नी हेमराज, ममता (25) पत्नी मदन, खुशी (4) पुत्री मदन तथा रूत्वी (6) पुत्री हेमराज बह गए। ऐसे में इन चारों की तलाश जारी है। बंद रास्ते पर ले गया मैप जानकारी में सामने आया कि मातृकुंडिया बांध में पानी की आवक हुई थी। ऐसे में प्रशासन ने अलर्ट किया था। मंगलवार रात 10 बजे सायरन बजा कर बांध के गेट खोले गए थे। वहीं प्रशासन ने बनास नदी पुलिया पर आने वाले रास्तों पर जो नीचे है, वहां पत्थर अथवा जेसीबी लगा कर बंद किए थे। यह परिवार कहीं बाहर रहता है तथा अभी गांव आया हुआ था। इन्हें जानकारी नहीं थी कि तीन साल से सोमी-उपरेडा पुलिया बंद हैं। ये पहले वैन को सांखली मार्ग पर ले गए तो पुलिया के आगे जेसीबी खड़ी थी। इस पर ये गूगल मैप की सहायता से सोमी-उपरेडा मार्ग स्थित पुलिया पर आ गए। रिश्तेदारों ने किया था मना, फिर भी नहीं माने पुलिस ने बचाए गए परिवार के सदस्यों से पूरी जानकारी ली। इसमें हितेश ने बताया कि मंगलवार सुबह 9.30 बजे घर से रवाना होकर वे गंगापुर होते हुवे सवाई भोज दर्शन करने गए थे। वहां से देमाली दर्शन किए तथा भीलवाड़ा आए, जहां रिश्तेदार के यहां खाना खाया। रिश्तेदार ने रात ज्यादा होने का हवाला देते हुए रुकने की कहा था। लेकिन हितेश के साथ शामिल उसकी एक भाभी ने देवता का कारण बताते हुए रात रुकने से मना कर दिया था।

करतारपुर साहिब पर आफत: रावी नदी के उफान से बाढ़ का खतरा

पंजाब  सागर बांध से रावी नदी में अत्यधिक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ आ गई है। इस बाढ़ से करतारपुर साहिब गुरुद्वारा परिसर में पानी भर गया है। यह गुरुद्वारा सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का अंतिम विश्राम स्थल है। गुरुद्वारे में 5 से 7 फीट तक पानी भर गया है, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब सुरक्षित हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित यह गुरुद्वारा, करतारपुर कॉरिडोर खुलने के बाद पहली बार बाढ़ से प्रभावित हुआ है। कॉरिडोर वर्तमान में भारत की ओर से बंद है। लंगर हॉल, परिक्रमा, सरोवर और सराय में पानी जानकारी के मुताबिक, रावी नदी का जल स्तर बढ़ने से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लंगर हॉल, परिक्रमा, सरोवर और सराय में पानी भर गया है। गुरु ग्रंथ साहिब को दूसरी मंजिल पर सुरक्षित रखा गया है, और अन्य धार्मिक पुस्तकें भी सुरक्षित हैं। बाढ़ के कारण जीरो लाइन क्षेत्र भी पानी में डूब गया है। रावी नदी का पानी धुसी बांध के ऊपर से बह रहा है, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया है। बांध में एक दरार भी आ गई है, जिससे डेरा बाबा नानक शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौरतलब है कि गुरुद्वारा भारत-पाकिस्तान सीमा से 4 किलोमीटर दूर है। 2023 में भी डूबी थी जीरो लाइन उल्लेखनीय है कि जुलाई 2023 में रावी नदी में बाढ़ आई थी, जब जीरो लाइन डूब गई थी और कॉरिडोर पांच दिनों तक बंद रहा था। हालांकि, तब स्थिति इतनी गंभीर नहीं थी। इस बार गुरुद्वारा परिसर में भी पानी भर गया है। गुरुद्वारा प्रबंधन ने बताया कि पवित्र स्वरूप गुरु ग्रंथ साहिब शुरू से ही गुरुद्वारे की दूसरी मंजिल पर सम्मानपूर्वक स्थापित है, इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कॉरिडोर बंद बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती पर नवंबर 2019 में खोला गया था। इसका उद्देश्य भारतीय श्रद्धालुओं को बिना वीजा के गुरुद्वारा दर्शन की सुविधा प्रदान करना था। इसे 'दक्षिण एशिया में शांति का गलियारा' भी कहा जाता है। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के गुरुद्वारे को पंजाब के डेरा बाबा नानक से जोड़ता है। इस कॉरिडोर से तीर्थयात्रियों का आखिरी जत्था 7 मई को गया था। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसके बाद कॉरिडोर को बंद कर दिया गया।  

CM नीतीश के करीबी मंत्री श्रवण कुमार पर हमला, हमलावर फरार

पटना पटना से इस वक्त एक बड़ी खबर है। सड़क हादसे के पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे बिहार सरकार के मंत्री और विधायकों पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया है। गौरलतब है कि शनिवार सुबह पटना के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिकिरियावां हाल्ट के पास ट्रक और ऑटो की टक्कर में 9 लोगों की मौत हो गई थी। सभी मृतक नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र के मलावां गांव के रहने वाले थे। बुधवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और हिलसा विधायक कृष्ण मुरारी उर्फ प्रेम मुखिया पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और वापस लौटने लगे। इसी दौरान ग्रामीणों ने उनसे आग्रह किया कि वे थोड़ी देर और गांव में रुकें। लेकिन मंत्री ने कहा कि वे सभी परिवारों से मिल चुके हैं और आगे का कार्यक्रम उन्हें अटेंड करना है। इस पर भीड़ गुस्से में आ गई। आक्रोशित लोगों ने अचानक लाठी-डंडे निकाल लिए ग्रामीणों का आरोप था कि हादसे के दिन विधायक के कहने पर ही उन्होंने सड़क जाम हटाया था, लेकिन आज तक उन्हें सही मुआवजा नहीं मिला। आक्रोशित लोगों ने अचानक लाठी-डंडे निकाल लिए और मंत्री व विधायक पर हमला कर दिया। हालात बिगड़ने पर दोनों नेता गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर भागकर किसी तरह अपनी जान बचा पाए। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराने में जुट गया।

हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए, लेकिन अपनी रक्षा करेंगे: राजनाथ सिंह

महू  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए लेकिन अपनी जमीन की रक्षा के लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। जब हम आगे की ओर देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि भारत के सामने चुनौतियां बड़ीं हैं. उन्होंने कहा- देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों द्वारा ही नहीं की जाती, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाले वैज्ञानिकों, हथियार प्रणाली बनाने वाले उद्योगपतियों और अगली पीढ़ी को युद्ध के लिए तैयार करने वाले शिक्षकों द्वारा भी की जाती है। राजनाथ ने यह बात महू में आयोजित रण संवाद 2025 के दूसरे दिन बुधवार को कही। उन्होंने कहा- हमें अपनी एकता, अपनी स्पष्ट नीयत और पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस देश को आगे ले जाना है। इसी आत्मविश्वास के साथ हम 2047 की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। रणनीति को मजबूत करेगा रण संवाद रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा- मैं कहना चाहूंगा कि आज का 'रण संवाद' सिर्फ विचारों का आदान-प्रदान नहीं है बल्कि सुरक्षा, नीति-निर्माण और तीनों सेनाओं के विभिन्न पहलुओं को समझने का एक अवसर है। यहां होने वाली चर्चाएं हमें यह सोचने का अवसर देंगी कि हम भारत को कैसे और अधिक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सकते हैं। ये न केवल रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगी बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाने में भी मददगार साबित होंगी। युद्ध का स्वरूप बदल रहा है आधुनिक दौर में युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैल चुके हैं। सैटेलाइट सिस्टम, एंटी-सैटेलाइट हथियार और स्पेस कमांड सेंटर अब शक्ति के नए साधन बन गए हैं। आज साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित निगरानी युद्ध की नई दिशा तय कर रहे हैं। नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर की चुनौती आज के समय में युद्ध का कोई तयशुदा स्वरूप नहीं है। यह युग नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर का है। ऐसे में हमें अपनी रणनीति को लचीला और समयानुकूल बनाना होगा। किसी निश्चित युद्ध नीति पर आंख मूंदकर भरोसा करना अब संभव नहीं है। संवाद है भारत की परंपरा वैश्विक माहौल में संवाद की कमी ही टकराव और शत्रुता का बड़ा कारण बनती है। युद्धकाल में भी संवाद के रास्ते खुले रखना जरूरी है। भारतीय परंपरा में युद्ध और संवाद हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। युद्ध से पहले संवाद हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। रणनीतिक-कूटनीतिक दृष्टिकोण को नई दिशा मिलेगी रण संवाद केवल अकादमिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की सामरिक और कूटनीतिक सोच को परिष्कृत करने वाला मंच है। यहां से निकलने वाले विचार भविष्य में भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगे और दीर्घकालिक कूटनीति को दिशा देंगे। लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह शाही ने कहा कि रण संवाद यानी युद्ध पर संवाद, एक प्लेटफॉर्म है। जिसका उद्देश्य युद्ध कला और युद्ध संचालन की ट्रेनिंग है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि जो लोग युद्ध की योजना बनाते हैं, प्रशिक्षण देते हैं और उसको अंजाम देते हैं, उन्हें युद्ध के प्रमाणों की सामूहिक जिम्मेदारी उठानी है। ये सेमिनार ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां यूनिफॉर्म लर्नर, स्कॉलर्स, टेक्नोलॉजिस्ट, पॉलिसी मेकर, इंडस्ट्री और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर विचार विमर्श करते हैं। इस साल के सेमिनार का थीम है- इम्पैक्ट ऑफ टेक्नोलॉजी ऑफ वॉर फेयर। दो सब थीम भी हैं। एक- इमरजिंग टैक्नोलॉजी इन्टरेक्ट ऑफ फ्यूचर वॉर…दूसरी- जिस पर आज चर्चा हो रही है रिफॉर्म इन ट्रेनिंग कैटेलाइज टेक्नोलॉजिकल एंड डेवलपमेंट। इसमें ट्रेनिंग इनिशिएटिव ऑफ सिस्टम, इनडिकेटर एक्सरसाइजेज एंड टेक्नोलॉजी पर विचार-विमर्श करेंगे। पहले दिन सीडीएस ने कहा था- ऑपरेशन सिंदूर जारी है रण संवाद 2025 के पहले दिन मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा था- भले ही भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन हम शांतिवादी नहीं हैं। दुश्मन गलतफहमी में न रहे। देश की सेनाएं युद्ध के लिए हमेशा तैयार हैं। सीडीएस चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई सबक सीखे। उनमें से ज्यादातर पर अमल चल रहा है।

खजराना गणेश का भव्य श्रृंगार, सीहोर में 10 दिवसीय मेला और उज्जैन में भोग

उज्जैन/सीहोर/इंदौर  प्रदेश भर में आज से 10 दिवसीय गणेश उत्सव शुरू हो गया है। इस बार चित्रा नक्षत्र, भाद्रपद चतुर्थी और बुधवार के खास संयोग में गणेश जी विराजमान होंगे।उज्जैन का चिंतामण गणेश मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां एक साथ तीन स्वरूप चिंतामन, इच्छामन और सिद्धि विनायक के दर्शन होते हैं। भगवान को एक लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया। इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में भगवान का 5 किलो सोने के आभूषणों से श्रृंगार किया गया है। आभूषणों की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए है। सीहोर के विक्रमादित्य कालीन चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर में उल्टा स्वास्तिक बनाकर मनोकामना मांगते हैं। ग्वालियर के अर्जी वाले गणेश जी को राजस्थान से आए मोटी बूंदी के लड्‌डू का ही भोग लगता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर हम आपको प्रदेश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों से रूबरू कराएंगे। बताएंगे कि क्या रहेगा आरती का समय, कब मंदिर खुलेंगे और कब बंद होंगे पट। विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर आस्था का जन सैलाब उमड़ा. मंदिर प्रशासन के मुताबिक इस बार गणेश चतुर्थी के पहले दिन 5 लाख से ज्यादा भक्त खजराना गणेश के दर्शन कर सकते हैं. पहला दिन 24 घंटे मंदिर का पट भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा.  खजराना गणेश का गणेश चतुर्थी के पहले दिन 5 करोड़ के गहनों से होगा मनमोहक श्रृंगार किया गया. प्रशासन का दावा है कि 5 लाख श्रद्धालु बुधवार को खजराना गणेश के दर्शन कर सकते हैं. विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर का लगभग 300 साल पुराना इतिहास है. बिग बी अमिताभ बच्चन, अभिनेत्री सारा अली खान, क्रिकेटर रोहित शर्मा हर साल खजराना गणेश के दर्शन के लिए इंदौर आते हैं. वृंदावन के फूलों से खजराना गणेश के गर्भ ग्रह को सजाया गया है. पूरा मंदिर विदेशी फूलों से डेकोरेट किया गया है. सुबह से मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है. 24 घंटे गर्भ गृह का पट खजराना गणेश के दर्शन के लिए भक्तों के लिए आज खुले रहेंगे.  खजराना गणेश मंदिर, खजराना गणेश मंदिर इंदौर, खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश, खजराना गणेश मंदिर के दर्शन, खजराना गणेश मंदिर कहां है, गणेश चतुर्थी  देश के अमीर मंदिरों में से एक है इंदौर का खजराना गणेश मंदिर. लगभग 5 करोड़ रुपये के सोने और हीरे से बना मुकुट खजराना गणेश के सिर पर है. खजाना गणेश का गर्भ गृह चांदी से चमक रहा है.  सोने हीरे और नवरत्न से खजराना गणेश का मनमोहक श्रृंगार किया गया है. बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के देवता भगवान गणेश का दर्शन करने के लिए इंदौर में आस्था का जनसैलाब उमड़ रड़ा. सुबह से ही खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की लगी लंबी-लंबी कतार देखने को मिल रही है. रात 12 बजे से खजराना गणेश मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए. खजराना गणेश मंदिर का निर्माण होलकर वंश की महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने 1735 में करवाया था. उन्होंने औरंगजेब के हमलों से बचाने के लिए कुएं में छिपाकर रखी गई मूर्ति को बावड़ी से बाहर निकालकर मंदिर स्थापित करवाया था. यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है. यहां बुधवार और रविवार को भक्तों की भारी भीड़ रहती है. मंदिर का प्रबंधन भट्ट परिवार करता है, जिसने मूर्ति की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.एक कथा के अनुसार औरंगजेब के आक्रमण के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को तत्कालीन पुजारियों को एक कुएं में सुरक्षित छिपा दिया गया था. फिलहाल जो अब बावड़ी बन चुका हैं और आज भी खजराना गणेश मंदिर के परिसर में हैं. कहते हैं कि पंडित मंगल भट्ट को सपने में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और मूर्ति को कुएं से निकालकर उसे स्थापित करने का आदेश दिया था.  

सुशासन एक्सप्रेस रथ घर-घर पहुंच रही शासन की सेवाएं- मुख्यमंत्री

रायपुर : विष्णु के सुशासन में ग्रामीणों की समस्याओं का हो रहा त्वरित निराकरण सुशासन एक्सप्रेस रथ घर-घर पहुंच रही शासन की सेवाएं- मुख्यमंत्री  रायपुर जिला प्रशासन द्वारा सुशासन को लेकर की जा रही अभिनव पहल रायपुर रायपुर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देश में आम जनता को शासन की योजनाओं और सेवाओं को घर के समीप पहुंचाने की दिशा में “सुशासन एक्सप्रेस” नाम से एक अभिनव और अनुकरणीय पहल शुरू की गई है, जो जनसमस्याओं के त्वरित निदान मॉडल के रूप में स्थापित हुई है। इसका शुभारंभ 29 मई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के तहत ग्राम भैंसा में आयोजित समाधान शिविर में किया था। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई इस पहल के माध्यम से हजारों ग्रामीणों को शासन की दो दर्जन से अधिक सेवाओं का लाभ सहजता से मिलने लगा है।  ग्रामीणों ने कहा अब घर के समीप ही मिल रही है सुविधा ग्राम पंचायत संकरी के युवा उत्तम साहू के लिए खुशी का क्षण था जब घर बैठे ही उन्हें लर्निंग लाइसेंस मिल गई, जो उनके गांव में आए सुशासन रथ से मिली। उत्तम कहते हैं कि उनके घर में अन्य सदस्यों ने लाइसेंस बनाया तो गांव के बाहर जाना पड़ा था और समय भी लगा था, अब कुछ दिन पहले गांव में कोटवार ने हांका लगाया तो सुशासन रथ आने की जानकारी मिली। मैंने वहां जा कर आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी हुई और मुझे लाइसेंस मिल गया। सांकरा के रहने वाले राजेश कुमार यादव भी बड़े प्रफुल्लित हैं  कि उनका राशन कार्ड बन गया, इसके लिए बार-बार पंचायत कार्यालय में जाना नहीं पड़ा  उन्होंने सुशासन रथ में आवेदन दिया, प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशन कार्ड बन गया। उत्तम और राजेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहते हैं कि अब जिला प्रशासन रायपुर द्वारा उनके घर के समीप ही शासकीय सेवाएं मिल रही हैं जिसके लिए उन्हें अलग से समय निकाल कर जाना पड़ता था, कई बार कागजात अपूर्ण होने पर दुबारा भी जाना पड़ता था।  67 हजार से अधिक आवेदनों का त्वरित निराकरण सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक कुल 75,864 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 67,788 आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जा चुका है। शेष लंबित आवेदनों की कार्यवाही भी प्राथमिकता से की जा रही है। सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक जरूरतमंद 15,741 आवेदकों को आय प्रमाण पत्र, 5741 को जाति प्रमाण पत्र, 4273 को निवास प्रमाण पत्र, 7536 को आयुष्मान भारत कार्ड, 6014 को राशन कार्ड, 8269 को ड्राइविंग लाइसेंस, 1306 को किसान क्रेडिट कार्ड, 2051 को नरेगा जॉब कार्ड, 577 को जन्म प्रमाण पत्र, 50 को मृत्यु प्रमाण पत्र, 4093 श्रमिकों को श्रम कार्ड, 5070 लोगों को आधार कार्ड, 883 को किसान किताब, 814 पात्र आवेदकों को पेंशन, 1346 एचएसआरपी का लाभ देेने के साथ ही महिला एवं बाल विकास, पुलिस, आवास सहित अन्य योजनाओं से भी बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हो रहे हैं।  गांव में ही लग रहा ‘वन-स्टॉप कैंप किसी भी गांव में सुशासन एक्सप्रेस पहुंचने से तीन दिन पहले सूचना जारी की जाती है। मौके पर पटवारी, पंचायत सचिव, स्वास्थ्य टीम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आधार व आयुष्मान कार्ड बनाने वाले कर्मचारी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहते हैं। इस तरह गांव में ही छोटा ‘वन-स्टॉप शिविर’ तैयार हो जाता है। प्रथम चरण- पूर्ण, अब सुशासन एक्सप्रेस दूसरे चरण में  प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार-2025 के सकारात्मक परिणाम को देखते हुए जिला प्रशासन रायपुर ने इसी तर्ज पर सुशासन एक्सप्रेस की शुरूआत की, जिसका उद्देश्य शासकीय अमले का एक साथ गांवों में पहुंचकर उनकी समस्याओं और आवेदनों का तत्परता से निराकरण करना है। सुशासन एक्सप्रेस के प्रथम चरण की शुरूआत अभनपुर, आरंग, धरसींवा और तिल्दा विकासखण्ड के गांवों से हुई। उक्त चारों विकासखण्डों की 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में तथा नगर पंचायत आरंग के 17 वार्डों में सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से समस्याओं और आवेदनों का तत्परता से निराकरण किया गया। प्रथम चरण की सफलता के बाद अब जिला प्रशासन ने इसका दूसरा चरण भी प्रारंभ कर दिया है, जिसमें अभनपुर, धरसींवा एवं तिल्दा विकासखंड के ग्रामीण इलाके शामिल है, जहां सुशासन एक्सप्रेस निर्धारित तिथियों में पहुंच रही है। सुशासन एक्सप्रेस के साथ गांव-गांव में पहुंचकर विभिन्न विभागों का मैदानी अमला लोगों की समस्याओं और आवेदनों का निराकरण कर रहा है।  नाम मात्र खर्च में बड़ा बदलाव कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने बताया कि जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन एक्सप्रेस संचालित करने के आइडिया को मूर्तरूप देने के लिए कंडम हो चुकी चार एंबुलेंस को जिला प्रशासन द्वारा मरम्मत कराकर इन्हें सुशासन एक्सप्रेस में परिवर्तित किया गया। नाम मात्र खर्च में तैयार किए गए इन मोबाइल सेवा वैन ने ग्रामीण अंचलों में सुशासन की नई राह प्रशस्त की है। रायपुर जिले की सुशासन एक्सप्रेस की सफलता वास्तव में शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति, नवाचार और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति पहुंचाने की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल है।