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यूनेस्को साइट में आता मौजूदा परिसर, हाईकोर्ट शिफ्ट को लेकर मंथन जारी

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने को लेकर अब अंतिम निर्णय बार एसोसिएशन (PHHCBA) के हाथ में होगा। हाईकोर्ट के मौजूदा परिसर के विस्तार या इसे नए स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला मतदान से तय किया जाएगा। वर्तमान में हाईकोर्ट चंडीगढ़ के सेक्टर-1 में स्थित है, जो सुखना झील के कैचमेंट एरिया और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट "कैपिटल कॉम्प्लेक्स" का हिस्सा है। यही कारण है कि इसके विस्तार की संभावना लगभग खत्म हो गई है और लंबे समय से नए विकल्प तलाशे जा रहे थे। इसी क्रम में 20 अगस्त को PHHCBA की कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से हाईकोर्ट को चंडीगढ़ के सरणगपुर गांव में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया। 25 वर्षों तक जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा प्रस्ताव के मुताबिक, सरणगपुर में हाईकोर्ट का नया परिसर बनाने के लिए 48.865 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जिनमें से 15 एकड़ जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। यहां करीब 42 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल का नया भवन तैयार किया जाएगा, जो आने वाले 20 से 25 वर्षों तक जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा। एसोसिएशन का कहना है कि सरणगपुर बेहतर विकल्प है क्योंकि यहां मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है, पीजीआई की ओर से फ्लाईओवर, चौड़ी सड़कें और मोहाली व एयरपोर्ट तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। साथ ही चारों दिशाओं से एंट्री-एग्जिट की सुविधा और बिना ट्रैफिक जाम के आवागमन की संभावना इसे और उपयुक्त बनाती है। एक और विकल्प पर भी चल रहा विचार मौजूदा परिसर में ही विस्तार करने की योजना को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसके तहत बार रूम के सामने नए कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा सकता है। इसमें दो मंजिला अंडरग्राउंड पार्किंग और ऊपर तीन मंजिलें होंगी। इससे करीब 16 नए कोर्टरूम जुड़ जाएंगे। इस योजना की लागत लगभग 200 करोड़ आंकी गई है। हालांकि यह निर्माण कार्य यूनेस्को से मंजूरी मिलने पर ही संभव होगा। एसोसिएशन का कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ साल लगेगा और इसके बाद निर्माण में पांच साल से अधिक का समय लग सकता है। इस दौरान परिसर में भीड़, पार्किंग की समस्या, धूल और आवाजाही में दिक्कतें बढ़ जाएंगी। अदालत की सख्त टिप्पणी 22 अगस्त को चीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट को शिफ्ट करने जैसा महत्वपूर्ण फैसला केवल कार्यकारिणी समिति नहीं ले सकती। इसे एसोसिएशन की जनरल बॉडी के समक्ष रखा जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक जनरल बॉडी इस प्रस्ताव को पारित नहीं करती, इसे मान्यता नहीं दी जाएगी। बार एसोसिएशन का रुख PHHCBA ने बार सदस्यों के लिए जारी नोटिस में कहा है कि मौजूदा परिसर में विस्तार का विकल्प लंबा समय लेगा और फिर भी हाईकोर्ट की जरूरतों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाएगा। जबकि सरणगपुर में नया परिसर एक स्थायी समाधान होगा और सुविधाओं से भरपूर होगा। एसोसिएशन ने कहा कि दोनों ही योजनाओं में 5 से 7 साल का समय लग सकता है, लेकिन सरणगपुर का विकल्प भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा। अब अंतिम फैसला वकीलों के वोट से अब हाईकोर्ट को शिफ्ट करने या नहीं करने का फैसला बार एसोसिएशन के सदस्य वकीलों के मतदान से तय होगा। मतदान की तारीख और प्रक्रिया जल्द घोषित की जाएगी। PHHCBA सचिव गगनदीप जम्मू ने कहा कि “यह फैसला ऐतिहासिक और भविष्य को प्रभावित करने वाला है। इसलिए सभी सदस्य अपने मूल्यवान वोट जरूर डालें।” अभी जरूरत के अनुसार छोटी है हाईकोर्ट वर्तमान में हाईकोर्ट की स्वीकृत क्षमता 85 कोर्टरूम की है, लेकिन फिलहाल केवल 69 कोर्टरूम ही कार्यशील हैं। बढ़ते मामलों और न्यायिक ढांचे की जरूरतों को देखते हुए हाईकोर्ट के विस्तार या स्थानांतरण पर यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

राजस्व महा–अभियान : नौ दिनों में हुआ 35.36 फीसदी जमाबंदी पंजी की प्रति का वितरण

शिविर में आए आवेदनों में अररिया, खगड़िया, सुपौल हैं अग्रणी जमाबंदी पंजी के वितरण में वैशाली, अरवल और कैमूर अग्रणी जिलों में शामिल पटना, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान (16 अगस्त से 20 सितम्बर 2025) के तहत राज्य के ग्रामीण परिवारों को जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध कराने तथा पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर आवेदन लेने का कार्य सभी जिले में तीव्र गति से चल रहा है। 19 अगस्त से 24 अगस्त की अवधि में सभी 38 जिलों में 1584 शिविर लगाए गए। शिविर में कुल 50 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें जमाबंदी में सुधार के आवेदनों की संख्या सर्वाधिक 38340 है। ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन करने के आवेदनों की संख्या 7246, उत्तराधिकार नामांतरण के आवेदनों की संख्या 1465 एवं बंटवारा नामांतरण के आवेदनों की संख्या 1368 है। पिछले छह दिन में सर्वाधिक आवेदन अररिया में आए हैं। यहां आवेदनों की संख्या 5654 है। दूसरे नंबर पर खगड़िया है। यहां आवेदनों की संख्या 3131 है। तीसरे नंबर पर सुपौल है। यहां आवेदनों की संख्या 2754 है। इनके अतिरिक्त अन्य जिलों में भी अच्छी संख्या में आवेदन आए हैं। 16 अगस्त से 24 अगस्त की अवधि में सभी 38 जिलों में टीमों द्वारा 35.36 प्रतिशत जमाबंदी पंजी की प्रति का सफलतापूर्वक वितरण किया गया है। राज्य में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़ 60 लाख के करीब है। इसके मुकाबले एक करोड़ 27 लाख 26 हजार से अधिक जमाबंदी की प्रति का वितरण सभी जिलों में किया गया है। इस अवधि में कई जिलों ने वितरण में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। वैशाली (73.54%), अरवल (61.98%) और कैमूर (61.58%) जमाबंदी पंजी के वितरण के मामले में शीर्ष तीन स्थानों पर हैं। इनके अलावा गोपालगंज (61.14%), खगड़िया (60.26%), सीतामढ़ी(59.26%), जहानाबाद (57.12%), अररिया (51.50%), शेखपुरा (51.43%) तथा पूर्णिया (50.69%) ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसी क्रम में मधुबनी (46.45%), बक्सर (45.94%), भोजपुर (43.92%), मुजफ्फरपुर (41.76%), किशनगंज (39.81%), शिवहर (35.69%), सिवान (35.41%), दरभंगा (33.67%), मधेपुरा (32.91%) और नालंदा (32.38%) भी शीर्ष 20 जिलों में शामिल रहे हैं। पटना, बेगूसराय, गया, कटिहार, सहरसा, समस्तीपुर, सारण समेत अन्य जिलों में भी जमाबंदी की प्रति वितरण की स्थिति संतोषजनक है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का लक्ष्य है कि 15 सितम्बर तक राज्य के सभी पात्र परिवारों को उनसे संबंधित जमाबंदी पंजी की प्रति उपलब्ध करा दी जाए। इसके लिए अंचल के माइक्रो प्लान के हिसाब से कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए सभी जिलों में मौजा स्तर पर निर्धारित टीम पहुंच रही है और जमाबंदी की प्रति, आवेदन प्रपत्र और पंफलेट उपलब्ध करा रही है। रैयत उपलब्ध कराई गई जमाबंदी पंजी की प्रति के हिसाब से आवेदन पंचायत में लगने वाले शिविर में जमा करेंगे। शिविर का आयोजन 20 सितंबर तक होगा। शिविर में आवेदन जमा करते मोबाइल पर ओटीपी आयेगा और आवेदन रजिस्टर्ड हो जाएगा। इसके उपरांत आवेदन पर हो रही कार्रवाई की सूचना मिलती रहेगी। बताते चलें कि राजस्व महा–अभियान के दौरान जमाबंदी की गलतियों में सुधार, छूटी हुई जमाबंदी को ऑनलाइन करना, उत्तराधिकार नामांतरण और बंटवारा नामांतरण का कार्य किया जा रहा है।

भूख के खिलाफ बिहार ने जीती बड़ी जंग! हर महीने दो करोड़ से ज्‍यादा परिवारों को मुफ्त राशन

अब गरीबों की थाली नहीं रहेगी खाली! पारदर्शिता से समय पर पहुंचा अनाज पटना, बिहार ने भूख के खिलाफ जंग लगभग जीत ली है। इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और बिहार सरकार की पहल बड़ा सहारा बनी है।नतीजा ये है कि प्रदेश के 2.06 करोड़ से अधिक परिवारों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। दरअसल, ऐसा इसलिए संभव हो सका है कि बिहार सरकार ने इसे मिशन की तरह लिया। बताते चलें कि राशन वितरण में प्रणाली में लगातार गड़बड़ियों की शिकायत मिल रही थी। जिसे सरकार ने सुधार लिया है। करोड़ों परिवारों को हर महीने अनाज अब ई-पीओएस मशीन के जरिए अनाज का वितरण किया जा रहा है। जिसका नतीजा है कि हर परिवार के प्रति सुरक्षा देने का संकल्प पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत बिहार में हर महीने औसतन 4.25 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। PHH परिवारों (1.83 करोड़) को प्रति सदस्य 5 किलो अनाज (1 किलो गेहूं और 4 किलो चावल) मिलता है। वहीं, AAY परिवारों (22.81 लाख) को प्रति परिवार 35 किलो अनाज (7 किलो गेहूं और 28 किलो चावल) दिया जा रहा है। गरीबों के लिए यह योजना न सिर्फ राहत है बल्कि जीवन जीने की गारंटी बन गई है। ई-पीओएस मशीन से खत्म हुई धांधली बताते चलें, पहले राशन वितरण में गड़बड़ियों की शिकायतें आम थीं, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सभी जनवितरण केंद्रों पर ई-पीओएस मशीन लगाने से पूरा सिस्टम पारदर्शी हो गया है। लाभुक का नाम, पहचान, अनाज की मात्रा और वितरण की तारीख, सब कुछ रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जाता है। इससे चोरी-छुपे गड़बड़ी की गुंजाइश ही नहीं रहती है। भूख के खिलाफ सबसे बड़ी जंग "हर घर अन्न–हर थाली में पोषण" यह सिर्फ नारा नहीं बल्कि बिहार सरकार का संकल्‍प है। गरीब परिवारों की जिंदगी में बदलाव लाने का निश्‍चय है। जिसे बिहार सरकार और नीतीश कुमार गंभीरतापूर्वक पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। अब बच्चों की थाली से खाना गायब नहीं होता और बुजुर्गों को भूखा सोने पर मजबूर नहीं होना होता है। बिहार में यह योजना भूख के खिलाफ सबसे बड़ी जंग बन चुकी है और गरीब परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत इस वर्ष मिलेगा 60 फीसदी का अनुदान

वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए कृषि विभाग ने मांगा है आवेदन पटना, बिहार सरकार किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए 'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के पहले वर्ष अर्थात 2025-26 में ड्रैगन फ्रूट की खेती पर सरकार ने 60 फीसदी का अनुदान देने की घोषणा की है।       इस योजना के तहत, प्रति हेक्टेयर ड्रैगन फ्रूट की खेती की लागत 6.75 लाख है। जिसपर कुल 40 प्रतिशत अर्थात 2.70 लाख प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा। यह अनुदान दो चरणों में दिया जाएगा। 2025-26 में मिलने वाले अनुदान का 60 प्रतिशत, यानी 1.62 लाख और 2026-27 में शेष 40 प्रतिशत अनुदान, यानी 1.08 लाख रुपए दिए जाएंगे। 22 जिलों के लिए है यह योजना राज्य के 22 जिलों के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इन 22 जिलों में अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, गयाजी, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, और सीवान शामिल हैं। उच्च मूल्य वाली फसल है ड्रैगन फ्रूट ड्रैगन फ्रूट एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जो कम पानी में भी उगाई जा सकती है। बाजार में इसकी अच्छी मांग भी है। किसान एक बार इस फसल को लगाने के बाद लंबे समय तक लाभ कमा सकते हैं। इस तरह से यह योजना किसानों को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ कमाने में मदद करेगी। 'ड्रैगन फ्रूट विकास योजना' बिहार के किसानों के लिए अवसर कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करेगी, बल्कि राज्य की कृषि विविधता को भी बढ़ावा देगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान कृषि विभाग की वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर अपना आवेदन दे सकते हैं। विशेष जानकारी के लिए संबंधित जिले के जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

नकली सर्टिफिकेट रैकेट का भंडाफोड़: बिहार पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

पटना बिहार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक नकली दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो लोगों को भी गिरफ्तार किया है। साथ ही फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट आवासीय प्रमाण पत्र और मार्कशीट बरामद किए हैं।   मिली जानकारी के अनुसार, मामला लखीसराय थाना क्षेत्र के थाना चौक के पास स्थित किंग फोटो दुकान का है। पुलिस ने लखीसराय थाना क्षेत्र से सौरभ कुमार को धरा, फिर उसकी निशानदेही पर सूर्यगड़ा थाना क्षेत्र से रोहित कुमार को भी पकड़ा। एसपी अजय कुमार ने बताया पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस को सूचना मिली थी उक्त दुकान में नकली दस्तावेज बनाने का काम किया जा रहा है। गिरोह के तार झारखंड से जुड़े हुए हैं। पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि झारखंड के गोड्डा सदर अस्पताल से जारी जन्म प्रमाण पत्रों में हेरा-फेरी करते और जाली मुहर का इस्तेमाल करके नकली बर्थ सर्टिफिकेट तैयार करते थे। इसके अलावा जाली आवासीय प्रमाण पत्र और मार्कशीट भी तैयार करते थे।   210 नकली जन्म प्रमाण पत्र सहित कई जाली दस्तावेज बरामद पुलिस ने बताया कि तलाशी के दौरान 210 नकली जन्म प्रमाण पत्र, 12 आवासीय प्रमाण पत्र और 15 फर्जी मार्कशीट भी पुलिस ने बरामद किए हैं। साथ ही उनके पास से लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन, फिंगर स्कैनर और आई स्कैनर जैसी इलेक्ट्रॉनिक मशीनें जब्त की गई। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे खी कार्रवाई में जुट गई है।

डॉ. रमन सिंह ने पीएम मोदी को नवीन विधानसभा भवन लोकार्पण के लिए किया आमंत्रित, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी होंगे शामिल

1 नवंबर राज्योत्सव के दिन प्रस्तावित है नई विधानसभा का लोकार्पण, नया रायपुर में नवनिर्मित ब्रह्मकुमारी शांति शिखर के नए भवन के लोकार्पण पर भी प्रधानमंत्री ने दी स्वीकृति नई दिल्ली, आज छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान संसद भवन में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को 1 नवम्बर 2025 को प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवा रायपुर (अटल नगर) स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन में प्रवेश करने की जानकारी दी। डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी जी को इस ऐतिहासिक अवसर पर नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण उनके कर-कमलों से करने हेतु सादर आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली क्षण प्रदेश की जनता और सभी विधानसभा सदस्यों के लिए स्मरणीय होगा। साथ ही, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी सौजन्य भेंट की और उन्हें नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करने हेतु आमंत्रित किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानसभा अध्यक्ष का आमंत्रण स्वीकार किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से चर्चा करते हुए कहा कि नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी बहनों का नया भवन बन कर तैयार है, जिसके लोकार्पण समारोह में ब्रह्मकुमारी बहनें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करना चाहती है। डॉ. रमन सिंह के इस आग्रह को प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर ब्रह्मकुमारी संस्थान के नवीन भवन लोकार्पण के लिए भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है। आपको बता दे कि, छत्तीसगढ़ प्रदेश अपने गठन के 25 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण न केवल प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपराओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि यह क्षण छत्तीसगढ़ की प्रगति और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

लाड़ली बहनों का लाभ रुका, मध्यप्रदेश में 1500 रुपए की बढ़ी राशि क्यों नहीं मिली?

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी और लोकप्रिय लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा अपडेट आया है। सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि एमपी की 10 हजार से ज्यादा लाड़ली बहनों को योजना से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद साफ हो गया है कि इन महिलाओं को अगले महीने यानी सितंबर महीने में आने वाली 28वीं किस्त से 1250 रुपए का लाभ नहीं मिलेगा। बता दें कि लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई थी। इस योजना को शुरू हुए दो साल और कुछ महीने का समय ही हुआ है, लेकिन इन दो साल चंद महीनों में अब तक कुल 3.92 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटाए जा चुके हैं। यानी दिवाली की भाईदूज से मिलने वाली बढ़ी हुई राशि के 1500 रुपए के लाभ से भी ये वंचित हो गई हैं।  1390 महिलाओं की राशि रोकी, स्पष्ट नहीं कारण योजना के तहत जून महीने तक 2,76,439 महिलाओं के खाते में राशि आती रही लेकिन जुलाई में केवल 2,75,178 महिलाओं के खाते में राशि आईं। इस तरह 1261 महिलाएं योजना के लाभ से वंचित हो गई। इन महिलाओं की शिकायत पर विभागीय अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर जांच पड़ताल कर महिला एवं बाल विकास संचालनालय भोपाल के आयुक्त को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। शासन स्तर पर इस मामले में जांच चल ही रही थी कि अगस्त महीने में 129 और महिलाओं की राशि रूक गई। इस तरह से अगस्त महीने में जून की तुलना में 1390 महिलाओं को योजना की राशि नहीं मिली। जिन महिलाओं की राशि रोकी गई है उनकी ओर से लगातार शिकायतें जारी हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शासन स्तर से मौखिक रूप में बताया गया कि महिलाओं ने पेंशन योजना के तहत राशि प्राप्त की है। इस कारण उनकी बहना योजना की राशि नहीं आई। यह बात और है कि अभी संचालनालय से लिखित रूप में कोई भी कारण स्पष्ट नहीं किया गया है और न ही पोर्टल में कारण दर्ज हुआ है। जबकि महिलाओं के अपात्र होने पर कारण पोर्टल पर ही स्पष्ट हो जाता है। पोर्टल पर पात्रों की सूची में शामिल इसके अलावा योजना की लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि उनकी ओर से पेंशन योजना का लाभ नहीं लिया गया है। पेंशन का लाभ लिया जाता तो पोर्टल पर अपात्र घोषित कर दिया जाता, लेकिन पोर्टल पर वह पात्रों की सूची में शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ विनीता लोढ़ा बताती हैं कि जुलाई और अगस्त में कई महिलाओं की राशि नहीं आई है। इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही कारण स्पष्ट होगा। जो महिलाएं पात्र होंगी, उन्हें हर हाल में योजना का लाभ दिया जाएगा। लाड़ली बहना योजना से क्यों काटे जा रहे नाम -सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग वजहों से लाखों बहनों को योजना से बाहर किया गया है। इनमें बड़ा कारण पात्र महिलाओं का 60 वर्ष से अधिक आयु का होना है। इस बड़े कारण से इस महीने- 10,963 महिलाएं योजना के लाभ के लिए अपात्र घोषित की गई हैं। इन्हें अगस्त के बाद लाड़ली बहना योजना की राशि नहीं मिलेगी। -अपात्र पाई गई महिलाओं की संख्या 690 है। -इनमें लाभ का परित्याग करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इनकी संख्या 890 है। -इनमें से 646 लाभार्थी महिलाएं ऐसी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। -कुछ कारणों से समग्र पोर्टल से हटाई गई महिलाओं की संख्या 426 है। -आधार से समग्र डि-लिंक महिलाओं की संख्या 505 है। -यानी दो ही चंद महीनों में ही 3,92,912 महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ यदि आप एमपीकी रहने वाली हैं, योजना से जुड़ी हैं या आवेदन करने का विचार कर रही हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका नाम भी इस योजना से कभी भी काटा जा सकता है। लेकिन कब कटेगा नाम… -जब आप 60 वर्ष से अधिक आयु की हो गई हों। -अविवाहित महिलाओं ने भी यदि अपना नाम योजना से जुड़वा लिया है, या वह जुड़ने के बारे में सोच रही हैं, तो उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। ये योजना केवल विवाहित, विधवा, परित्यक्ता महिलाओं को ही दिया जा रहा है। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक है। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार का कोई सदस्य पूर्व सांसद/विधायक रह चुका हो। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार में कोई सदस्य सरकारी सेवा या पद पर हो, उन्हें इस योजना का पात्र नहीं माना गया है। सूची से हट जाए नाम तो क्या करें? -नजदीकी CSC सेंटर या पंचायत कार्यालय से जानकारी लें। -60 साल से कम उम्र होने के बावजूद नाम कटने पर आपत्ति दर्ज कराएं। -सुनिश्चित करें कि आपका आधार और समग्र पोर्टल सही तरीके से लिंक हो। -विभागीय हेल्पलाइन पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं। समग्र पोर्टल से जुड़ी बड़ी समस्या डाटा में यह भी सामने आया है कि कई महिलाएं 'आधार से समग्र डि-लिंक होने के कारण सूची से बाहर हो रही हैं। यदि आधार और समग्र ID का कनेक्शन टूट जाता है तो सिस्टम लाभार्थी की पहचान सत्यापित नहीं कर पाता। ऐसे में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) अटक जाता है और महिला को अपात्र मान लिया जाता है।

शादी के बाद खुशखबरी! कन्यादान विवाह योजना से नवयुगल को मिलेंगे 49 हजार रुपए

भोपाल  मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में शामिल नवयुगल जोड़ों को शादी के बाद से राशि का इंतजार था, जो अब खत्म होता नजर आ रहा है। सरकार द्वारा बजट आवंटित करने से हितग्राहियों को भी चेक प्रदान किए जा रहे हैं। जिले में अलग-अलग जगह शिविरों लगाकर हितग्राहियों को चेक दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 30 अप्रेल को उमरबन में जिला प्रशासन द्वारा सामूहिक विवाह का आयोजन किया था, जिसमें रिकॉर्ड दो हजार जोड़े शामिल हुए थे। शासन की योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 49 हजार की राशि प्रदान की जाना थी। लेकिन बजट नहीं होने से यह राशि अभी तक नहीं मिली थी। जारी हो गया बजट जिला पंचायत सीईओ अभिषेक चौधरी ने बताया कि अब शासन से बजट जारी हो चुका है। जिले में 25 अगस्त यानी आज शिविरों के माध्यम से चेक प्रदान किए गए। इसकी शुरुआत मनावर और धरमपुरी से हो रही है। दोनों ही जगह पर केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा हितग्राहियों को चेक दिया। इसी प्रकार 26 अगस्त को गंधवानी और कुक्षी, 29 अगस्त को बदनावर और 30 अगस्त को सरदारपुर में शिविर का आयोजन किया जाएगा।

मधुबनी में JDU महासचिव का दावा – NDA की आंधी में विपक्ष होगा धराशायी

मधुबनी।  जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा सोमवार को मधुबनी के लौकहा पहुंचे, जहां उन्होंने एनडीए गठबंधन द्वारा आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यकर्ताओं के जोश और उत्साह के बीच मनीष वर्मा ने एनडीए की एकजुटता को प्रदेश की ताक़त बताया और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। “NDA की मुट्ठी का प्रहार, विपक्ष चित” मनीष वर्मा ने कहा कि एनडीए के पांचों दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। “जब पांचों उंगलियां मिलती हैं तो मुट्ठी बनती है और उसका प्रहार विपक्ष को चित कर देता है।” उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश में एनडीए की आंधी चल रही है। मैथिली भाषा और नीतीश, अटल की ऐतिहासिक पहल लौकही की ऐतिहासिक धरती का ज़िक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इसी जगह से नीतीश कुमार ने जनता की मांग पर अटल बिहारी वाजपेयी से मैथिली को संवैधानिक भाषा का दर्जा देने की गुहार लगाई थी। “नीतीश जी की पहल और अटल जी के फैसले से 2003 में मैथिली को संविधान की मान्यता मिली थी।” “राजद की पति-पत्नी सरकार ने बिहार को बदनाम किया” राजद पर हमला बोलते हुए मनीष वर्मा ने कहा कि लालू-राबड़ी की सरकार ने बिहार को बदनाम किया था। वहीं नीतीश कुमार ने सत्ता संभालते ही अपराधियों को जेल भेजा और शांति कायम की। “विकास की नींव शांति है और नीतीश जी ने बिहार में वही स्थापित किया।” शिक्षा और विकास पर ज़ोर उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की है। आज हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खुल चुका है और “बच्चे महज 10 रुपए शुल्क में इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं।” शिक्षा विभाग का बजट बढ़कर 77 हज़ार करोड़ रुपए पहुंच गया है। सड़क, बिजली और शिक्षा के बाद अब अगले पांच साल में बिहार औद्योगिक विकास की नई ऊँचाई पर पहुंचेगा। तेजस्वी और PK पर करारा हमला तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए वर्मा ने कहा – “एक तरफ नीतीश जी हैं जो दिन-रात बिहार के विकास के लिए काम कर रहे हैं, और दूसरी तरफ वो लोग हैं जिनके माता-पिता ने बिहार को गड्ढे में डाल दिया था।”  प्रशांत किशोर को उन्होंने ‘कनफुकवा’ बताते हुए कहा – “गांधी का पोस्टर लगाकर ज्ञानी बनने वाले, बताओ कितना पैसा लिया है शराब कंपनियों से? क्या उसी पैसे से जन सुराज कैंपेन चला रहे हो? भाड़े के लोग लाकर लोकतंत्र का हरण करना चाहते हो? इस कार्यक्रम में मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा, नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा, सांसद लवली आनंद, सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, पूर्व राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।

पठानकोट के कई हिस्सों में बाढ़, पठानकोट-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना पुराना पुल चक्की नदी में बहा

चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में शनिवार रात से जारी भारी बारिश ने पंजाब के पठानकोट जिले में भारी तबाही मचा दी है। नदियों और खड्डों के उफान के कारण कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सबसे बड़ा नुकसान चक्की नदी में हुआ है, जहां पठानकोट-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना पुराना पुल बह गया है। इससे आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और प्रशासन ने एहतियातन नया पुल भी बंद कर दिया है। चक्की नदी बना सबसे बड़ा खतरा पठानकोट को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला रेलवे पुल भी चक्की नदी के तेज बहाव से खतरे में है। बहते पानी ने इसकी संरचना को प्रभावित किया है। प्रशासन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए चक्की नदी पर बने नए पुल को भी बंद कर दिया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग का यातायात एक तरफ से रोक दिया गया है। नदियां उफान पर, गांव डूबे भारी बारिश से उज्ज दरिया, रावी नदी और जलालिया दरिया का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। कई गांवों की सड़कें कट गई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूट गया है। कंडी क्षेत्र के धार कलां के पास फर्शी खड्ड में आई बाढ़ से लोग दहशत में हैं। वहीं, गांव कोठे मनवाल और खानपुर में खड्ड के तेज बहाव में दो मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। प्रशासन ने कराया इलाका खाली चक्की खड्ड का जलस्तर बढ़ने से वार्ड नंबर-12 के सैली कुलियां क्षेत्र को खाली करवाया गया है। उधर पठानकोट-चंबा-डल्हौजी नेशनल हाईवे पर पानी भर जाने से यातायात ठप हो गया है और लंबा जाम लग गया है। साथ ही, नेशनल हाईवे 154ए पर भूस्खलन और पठानकोट-जुगयाल क्षेत्र में लैंडस्लाइड से यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। डैम का जलस्तर बढ़ा, अलर्ट जारी रणजीत सागर डैम का जलस्तर 524.94 मीटर दर्ज किया गया है और यह खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। डैम प्रशासन ने कहा है कि अगर स्तर 525 मीटर तक पहुंचा तो फ्लड गेट खोले जा सकते हैं। लोगों को पहले ही सतर्क करने के लिए सायरन बजाए जा रहे हैं। इसी तरह पौंग बांध और भाखड़ा डैम में भी पानी का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है। फसलों को भारी नुकसान पठानकोट समेत सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ से किसानों की खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं। खेतों तक पानी पहुंचने से बड़े पैमाने पर कृषि नुकसान हुआ है। मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने पंजाब के सात जिलों-पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, रोपड़ और मोहाली में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ब्यास नदी का जलस्तर दो दिनों में 1,16,615 क्यूसेक से बढ़कर 1,74,000 क्यूसेक तक पहुंच गया है। एसडीएम बाबा बकाला साहिब अमनप्रीत सिंह ने लोगों को नदी किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी है। सरकार की सख्ती और राहत कार्य सरकार ने सभी नेताओं और जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के आदेश दिए हैं। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने फाजिल्का के बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया और लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। राहत एवं बचाव टीमें अलर्ट पर हैं और जरूरत पड़ते ही फ्लड गेट खोले जा सकते हैं।