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सुशासन तिहार के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे। जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।        

400 से अधिक विद्यार्थी ले रहे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश को फ्युचर रेडी, प्रतिभा-संपन्न और प्रौद्योगिकी-संचालित राज्य बनाने के विजन को साकार करने की दिशा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सतत प्रयासरत है इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा 3 दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग (एआई/एमएल) प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क (एसएसआरजीएसपी), भोपाल में गुरुवार को किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2025 की परिकल्पना से प्रेरित यह पहल राज्य सरकार की उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में दक्ष बनाकर उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम अग्रणी वैश्विक औद्योगिक साझेदार के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें एलएनसीटी, बंसल, ओरिएंटल, आईईएस और एआईएसईसीटी सहित प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रतिभागियों को उभरती प्रौद्योगिकियों, उद्योगों की कार्यप्रणालियों और व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराया जा रहा है। एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश शर्मा ने कहा कि संस्थान उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल स्किल्स पार्क उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ एक अग्रणी कौशल विकास संस्थान के रूप में स्थापित हुआ है। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप निरंतर सीखने, नवाचार अपनाने और अपने कौशल को लगातार उन्नत करने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन साइबर सिक्योरिटी विषय पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। सत्रों में डेटा की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता, डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा, संवेदनशील सूचनाओं के संरक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जोखिमों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पहचान एवं अभिगम प्रबंधन (आईडेंटिटी एंड एक्सेस मैनेजमेंट), प्रमाणीकरण प्रणाली, पासवर्ड सुरक्षा और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और रैनसमवेयर जैसे साइबर खतरों के बारे में भी अवगत कराया गया। वास्तविक उदाहरणों और केस-स्टडी आधारित चर्चाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा चुनौतियों और उनके समाधान की व्यावहारिक समझ प्रदान की गई। इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार और साइबर सुरक्षा जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के आगामी सत्रों में साइबर सिक्योरिटी और एआई/एमएल से जुड़े उन्नत विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाते हुए मध्यप्रदेश में उद्योग-संलग्न कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।  

स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ एवं उनकी सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ फर्नीचर, उपकरण एवं मानव संसाधन (एचआर) की समय पर व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने ऐसे कार्यों के प्रस्ताव, जिनमें कार्यस्थल के अनुसार परिवर्तन अथवा कार्य में वृद्धि की आवश्यकता है, शीघ्र अग्रेषित करने के निर्देश दिए और कहा कि उनकी स्वीकृति के लिए प्राथमिकता से कार्यवाही की जाए। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के साथ ही फर्नीचर, उपकरणों एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं तथा मैन पावर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे संस्थानों के संचालन में किसी प्रकार की विलंब की स्थिति न बने। बैठक में बताया गया कि पीआईयू द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बीपीएचयू, सीसीएचबी, औषधालय सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के कुल 137 निर्माण कार्य वर्ष 2026-27 में किए जा रहे हैं। इनमें से 45 स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। जून माह के अंत तक 7 अतिरिक्त स्वास्थ्य संस्थानों का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। द्वितीय तिमाही में 28, तृतीय तिमाही में 33 तथा वित्तीय वर्ष के अंत तक 13 स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण कार्य पूर्ण होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में पीआईयू के अधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्री विजयवर्गीय ने प्रस्तावित अग्निशमन एवं कॉलोनी अधिनियम 2026 की समीक्षा की

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने मंत्रालय में प्रस्तावित मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 और मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 के प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा की। मंत्री  विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन दोनों विधेयकों में आज की बैठक में दिए गए सुझावों के अनुसार आवश्यक संशोधन कर इन्हें अगले सप्ताह पुनः प्रस्तुत किया जाए। भारत सरकार के 'मॉडल एक्ट' के अनुरूप हों नियम मंत्री  विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026 में भारत सरकार के 'मॉडल एक्ट' के नियमों के अनुसार परिवर्तन किए जाएं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मध्यप्रदेश में बड़ी इमारतें, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रीज आएंगी, जिसके अनुरूप हमारे पास अत्याधुनिक उपकरण (well equipment), बेहतर तकनीक (well technology) और प्रशिक्षित मानव संसाधन होना चाहिए, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति में विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों की योग्यता का निर्धारण और एग्जिट प्लान का प्रदर्शन अनिवार्य मंत्री  विजयवर्गीय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि फायर सेफ्टी ऑफिसर और अन्य तकनीकी व्यक्तियों की शैक्षणिक योग्यता व अनुभव का स्पष्ट निर्धारण किया जाए तथा अन्य राज्यों के नियमों का भी अध्ययन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बिल्डिंगों में एग्जिट प्लान और पाइपलाइन का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 'फायर टैक्स' लेने के सुझाव पर भी चर्चा की गई। वर्तमान संसाधनों की समीक्षा एवं आगामी प्रशिक्षण की आवश्यकता मंत्री  विजयवर्गीय ने वर्तमान में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद में उपलब्ध फायर स्टेशन, फायर ब्रिगेड और कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन के लिए विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था करवाई जाए, जिससे अमला किसी भी आपात स्थिति में कार्य करने में पूरी तरह सक्षम हो। कॉलोनी अधिनियम : अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई और आमजन की सुविधा का ध्यान बैठक में मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 के प्रस्तावित प्रारूप का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इसमें कॉलोनी रजिस्ट्रीकरण, विकास अनुज्ञा, नियमों के उल्लंघन और अनधिकृत, अविकसित व अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई से जुड़े नियमों पर चर्चा की गई। मंत्री  विजयवर्गीय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित किया जाए, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी भी स्थिति में आम जनता को कोई परेशानी उत्पन्न न हो। मंत्रालय में समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार दुबे, नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे, अपर आयुक्त  कैलाश वानखेड़े सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

योगी सरकार के हरित उत्तर प्रदेश विजन को मिलेगा नया आयाम, बायोप्लास्टिक अपनाने की बड़ी पहल का होगा शुभारंभ

लखनऊ  पर्यावरण संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी और हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को लखनऊ छावनी स्थित दिलकुशा लॉन में आयोजित होने वाले "बायोयुग ग्रीन कमांड-2026" में पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में बायोप्लास्टिक को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने की पहल का शुभारंभ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उत्तर प्रदेश को देश का एथेनॉल हब बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही योगी सरकार अब गन्ना आधारित उद्योगों से निकलने वाले नवाचारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रही है। प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन, जैव ऊर्जा और हरित उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों के बीच बायोप्लास्टिक का यह अभियान सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत की अग्रणी इंटीग्रेटेड शुगर एवं एथेनॉल कंपनियों में शामिल बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) और लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, रक्षा क्षेत्र, शोध संस्थानों और पर्यावरण विशेषज्ञों का संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में बायोप्लास्टिक को बड़े पैमाने पर अपनाने की रणनीति, उत्पादन क्षमता, निवेश अवसरों और बाजार विस्तार पर विस्तृत चर्चा होगी। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण दो उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएं होंगी। पहली चर्चा "मैंडेट टू मार्केट : अनलॉकिंग द बायोप्लास्टिक्स वैल्यू चेन इन उत्तर प्रदेश" विषय पर केंद्रित होगी, जिसमें राज्य में बायोप्लास्टिक उद्योग के विकास, निवेश संभावनाओं और सरकारी सहयोग पर विमर्श किया जाएगा। वहीं दूसरी चर्चा "फ्रॉम मेस मिशन : बायोप्लास्टिक्स फॉर डिफेंस" में रक्षा क्षेत्र में बायोप्लास्टिक के उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय लाभों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भीखमपुरा में निर्माणाधीन पीएम आवासों का किया निरीक्षण

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित ग्राम भीखमपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने सपेरा बस्ती में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय ने वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवनयापन कर रहे सवरा (सपेरा) जनजाति के परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने निर्माणाधीन आवासों का अवलोकन करते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास और जनकल्याण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत आवासों और अन्य निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से कच्चे घरों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। हितग्राहियों ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रहने की उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री  साय ने दिव्यांग हितग्राही रमाबाई सिदार को बैसाखी प्रदान कर उनकी सहायता की तथा बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री की सहजता और अपनत्व से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में 68 परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, सीसी रोड तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 25 आवास, वर्ष 2025-26 में 14 आवास तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 14 आवास स्वीकृत किए गए हैं। वहीं 10 अन्य पात्र परिवारों को आवास प्लस 2.0 सर्वे में शामिल किया गया है। कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कदम का पौधा तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने बरगद का पौधा रोपित किया। परिसर में कुल पांच पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

नीम करोली बाबा सर्किट तथा बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट का होगा विकास

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। पर्यटन विकास को केवल आधारभूत संरचना निर्माण तक सीमित न रखते हुए उसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। गुरुवार को पर्यटन विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को नई गति देने में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन विकास के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, खानपान, संस्कृति और सेवा क्षेत्र को भी व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े ज्ञान भारतम् मिशन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण और डिजिटलीकरण केवल अभिलेखीकरण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है। बैठक में अब तक 13 लाख 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण की प्रगति की जानकारी दी गई। पर्यटन नीति-2022 में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को निवेश, नवाचार और अनुभव आधारित पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनाया जाए। बैठक में नीम करोली बाबा सर्किट तथा बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट के रूप में नए क्षेत्रों के विकास पर चर्चा हुई। साथ ही ‘परंपरा’ विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन तथा वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन नीति ऐसी हो जो निवेश आकर्षित करे, रोजगार बढ़ाए और पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करे। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में नव लोकार्पित ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ और निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना राष्ट्रभक्ति, सैन्य गौरव और भारत की समुद्री विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि इसका संचालन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि निर्माणाधीन आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय में भारतीय नौसेना के गौरवशाली इतिहास, समुद्री शक्ति, नौसैनिक अभियानों, आईएनएस गोमती की यात्रा, नौवहन परंपरा और भारत की समुद्री विरासत को आधुनिक तकनीक, इंटरैक्टिव गैलरियों, सिम्युलेटर, युवा कैडेट एरीना तथा विविध अनुभवात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना युवाओं में राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को और सशक्त करेगी। आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रनायकों की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रीय दायित्व है। संग्रहालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, स्वराज्य स्थापना, आगरा आगमन, औरंगजेब के दरबार में उनके अदम्य साहस, आगरा से ऐतिहासिक प्रस्थान, राज्याभिषेक, सैन्य नेतृत्व, हिंदवी स्वराज्य, किलों के विकास तथा सुशासन की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार में अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका, तीर्थस्थलों के संरक्षण, प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों, ब्रज की संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। नैमिषारण्य के समग्र विकास की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है। इसके विकास में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि समग्र मास्टर प्लान के अंतर्गत वेद विज्ञान केंद्र, वेदारण्यम वेलनेस एवं वैदिक थीम पार्क, राजघाट रिवरफ्रंट, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, देवदेवेश्वर एवं रुद्रावत मंदिर परिसर, नैमिष हाट, तीर्थयात्री आवास, इंटरप्रिटेशन सेंटर तथा आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। यह भी बताया गया कि इंटरप्रिटेशन सेंटर में वेदों की जन्मस्थली के रूप में नैमिषारण्य की अवधारणा, प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, दशावतार विजुअलाइजेशन तथा पारंपरिक ग्राम्य जीवन के अनुभव को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कार्ययोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसकी विकास योजना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। बैठक में त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र के विकास पर भी चर्चा हुई। यह भी बताया गया कि वर्ष 2050 तक संभावित श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के शक्तिपीठों के निकट माता सती की पौराणिक कथा का प्रभावी एवं आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए तथा इसके लिए निजी क्षेत्र के सहयोग की संभावनाओं का भी उपयोग किया जाए। बैठक में चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। संरक्षण कार्यों में मूल स्वरूप, ऐतिहासिक प्रामाणिकता और स्थापत्य विशेषताओं को अक्षुण्ण रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन धरोहरों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

पर्यावरण दिवस से योग दिवस तक डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां लेकर जनता के बीच जाएंगे मंत्रिगण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा तथा केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले जनभागीदारी आधारित कार्यक्रमों की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसेवा, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं के हित और जनकल्याण से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम का क्रियान्वयन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसहभागिता के साथ सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विश्व पर्यावरण दिवस से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन न होकर जनभागीदारी और जनजागरण का व्यापक अभियान बनें। उन्होंने कहा कि 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत न्यूनतम 05 करोड़ पौधों का रोपण किया जाए। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व के सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक बने। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता, जियो टैगिंग तथा उनके संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जाए तथा इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 05 से 21 जून तक की अवधि विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रभारी मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में समाज के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अभियंताओं, उद्योगपतियों, अधिवक्ताओं, युवा उद्यमियों तथा स्टार्टअप इनोवेटरों के साथ संवाद स्थापित किया जाए। विगत वर्षों में देश और प्रदेश में हुए सकारात्मक परिवर्तनों, सुशासन, आधारभूत संरचना, निवेश, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में प्राप्त उपलब्धियों पर चर्चा की जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों के सुझावों और अपेक्षाओं को भी गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने कहा कि यह संवाद विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में जनसहभागिता को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अवधि में स्वच्छता को विशेष जनअभियान के रूप में संचालित किया जाए तथा अधिकारीगण स्वयं इसमें सहभागी बनकर समाज को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि 14 से 16 जून तक विकास खंड स्तर पर आयोजित होने वाले जनकल्याण शिविरों एवं स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से पात्र लेकिन वंचित लाभार्थियों को सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही प्रत्येक जनपद की विशिष्ट पहचान, उपलब्धियों और आधारभूत संरचना विकास को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के माध्यम से प्रबुद्ध नागरिकों और विषय विशेषज्ञों को जोड़ते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर सार्थक विमर्श किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपालों का आयोजन कर जनसमस्याओं के समाधान, योजनाओं की समीक्षा तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था की जाए। नामित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और चुनौतियों को निकटता से समझकर त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के महानिदेशक ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 08, 09 एवं 10 जून को प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा में लगभग 29 लाख अभ्यर्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है। उन्होंने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भर्ती परीक्षा की शुचिता, निष्पक्षता और गोपनीयता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न होने पाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की सहभागिता को देखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप यातायात प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक असुविधा न हो। उन्होंने परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट एवं केंद्र व्यवस्थापकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने 06 जून को परीक्षा आयोजन का पूर्वाभ्यास कराने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाने अथवा भ्रामक एवं असत्य सूचनाएं प्रसारित करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी गतिविधियों की सतत और गहन निगरानी की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परीक्षा प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी अभ्यर्थी को अनावश्यक कठिनाई या परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा न रहना पड़े तथा परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए परिवहन विभाग द्वारा रियायती किराये पर अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए। साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी संवेदनशीलता के साथ व्यवस्थाओं की निगरानी करें और अभ्यर्थियों को सुगम, सुरक्षित एवं सकारात्मक परीक्षा वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि परीक्षा देने वाले प्रत्येक युवा के मन में व्यवस्था के प्रति संतोष और विश्वास का भाव उत्पन्न हो, यह सभी संबंधित अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है। जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके। महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई है और लाखों परिवारों के जीवन में खुशहाली तथा आर्थिक स्थिरता का नया अध्याय जुड़ा है।

डॉ. व्यास ने पुरातत्व क्षेत्र में किए गए कार्य की जानकारी दी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मोहन से वर्ष 2012 में पद्म से सम्मानित शास्त्रीय गायक  उमाकांत गुंदेचा और वर्ष 2026 के लिए पुरातत्व विज्ञान क्षेत्र में पद्म से सम्मानित डॉ. नारायण व्यास ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट के दौरान डॉ. व्यास ने बताया कि उन्होंने पद्म डॉ. विष्णु धर वाकणकर के साथ भोपाल के निकट रायसेन जिले के प्रख्यात शैल चित्रकला स्थल भीमबैठका से संबंधित अनुसंधान के अलावा गुजरात में अहमदाबाद के पास रानी की वाव की ऐतिहासिक बावड़ी से संबंधित अनुसंधान में भी योगदान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुरातत्व क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों से संबंधित प्रकाशन भी भेंट किए। इस वर्ष प्राप्त पद्म सम्मान और प्रशस्त्रि-पत्र से भी अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुंदेचा से शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियों पर भी चर्चा की।