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बिहार के स्कूलों में बदला परीक्षा पैटर्न, दो घंटे में पेपर पूरा करना बच्चों के लिए चुनौती

पटना जिले के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में मंगलवार से कक्षा एक से आठवीं तक की अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा शुरू हो गई। इस बार परीक्षा के प्रश्नपत्र के पैटर्न में बदलाव किया गया है। खासकर कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों को नए पैटर्न में पहले की तुलना में अधिक लिखना पड़ रहा है। शिक्षकों के अनुसार बदले हुए प्रश्नपत्र और सीमित समय के कारण बच्चों पर परीक्षा के दौरान समय का दबाव बढ़ गया है। 50 अंकों की परीक्षा में बदला सवालों का पैटर्न कक्षा तीन से आठवीं तक की परीक्षा कुल 50 अंकों की हो रही है। प्रधान शिक्षकों के अनुसार पहले 10 अंकों के 10 प्रश्न पूछे जाते थे। इस बार प्रश्नपत्र में पांच-पांच अंकों के तीन प्रश्नों के साथ 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। इससे बच्चों को उत्तर लिखने में पहले की अपेक्षा ज्यादा समय लग रहा है। बोर्ड पर सवाल लिखने में भी लग रहा समय विभिन्न स्कूलों के प्रधान शिक्षकों ने बताया कि प्रश्नपत्र की छपाई के बजाय बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा ली जा रही है। शिक्षक को परीक्षा के दौरान लगातार सवाल लिखने और फिर उन्हें मिटाने पड़ते हैं। दूसरी ओर बच्चों को बोर्ड पर लिखे सवाल देखकर उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका में हल करना होता है। इससे परीक्षा का समय प्रभावित होने की बात शिक्षक बता रहे हैं। दो घंटे की परीक्षा, समय को लेकर दबाव परीक्षा के लिए बच्चों को कुल दो घंटे का समय दिया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड पर प्रश्न लिखने में लगने वाला समय भी इसी अवधि में शामिल हो जाता है। ऐसे में बच्चों को प्रश्न पढ़ने, समझने और उत्तर लिखने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिल रहा है। शास्त्री नगर के प्रधानाचार्य मधुरेंद्र कुमार मधुप ने बताया कि इस बार बच्चों के लिए परीक्षा लंबी हो गई है और परीक्षा के दौरान समय का दबाव बना रहता है। कक्षा एक-दो की मौखिक, तीन से आठवीं की लिखित परीक्षा कन्या मध्य विद्यालय लोहिया नगर के प्रधान शिक्षक सुबोध कुमार ओझा के अनुसार पहले दिन कक्षा एक से आठवीं तक हिंदी, उर्दू और बंगला की परीक्षा हुई। वहीं कक्षा पांचवीं से आठवीं तक विज्ञान की परीक्षा भी ली गई। कक्षा एक और दो के बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई, जबकि कक्षा तीन से आठवीं तक के बच्चों ने लिखित परीक्षा दी। 19 सितंबर तक चलेगी अर्द्धवार्षिक परीक्षा अर्द्धवार्षिक सह-मूल्यांकन परीक्षा 19 सितंबर तक चलेगी। 16 सितंबर को कक्षा एक से आठवीं तक अंग्रेजी तथा कक्षा तीन से आठवीं तक पर्यावरण अध्ययन एवं सामाजिक विज्ञान की परीक्षा निर्धारित है। परीक्षा शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देश के अनुसार कराई जा रही है। 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न भी शामिल इस बार प्रश्नपत्र के बदले पैटर्न में 15 अंकों के अति लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल किए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार प्रश्नों का पैटर्न बदलने और बोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा कराने के कारण दो घंटे की अवधि में बच्चों को पूरा प्रश्नपत्र हल करने में परेशानी हो रही है।  

जशपुर में जगमगाएंगे 5 लाख से ज्यादा ‘आशीर्वाद के दीप’, सेवा संकल्प अभियान का आगाज

रायपुर : सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जशपुर में जगमगाएंगे 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप 17 सितंबर को शाम 7 बजे रणजीता स्टेडियम, गौरव पथ, महाराजा चौक, दिलीप सिंह जूदेव प्रतिमा एवं बिरसा मुंडा चौक सहित जिलेभर में होगा दीप प्रज्वलन अमृत सरोवरों, प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन हितग्राहियों, बिहान समूहों और शासकीय संस्थानों में भी प्रज्वलित होंगे दीप रायपुर सेवा, सुशासन और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जशपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के तहत जिले में विभिन्न जनकल्याणकारी एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। अभियान के प्रथम दिवस 17 सितंबर को शाम 7 बजे जिले में 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है।     सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों रणजीता स्टेडियम, गौरव पथ, महाराजा चौक, दिलीप सिंह जूदेव प्रतिमा चौक और बिरसा मुंडा चौक सहित सभी विकासखंडों, नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जिलेवासी सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के संकल्प के साथ अभियान से जुड़ेंगे।     अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए जिले के सभी अमृत सरोवरों, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों, महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों, बिहान समूह की महिलाओं सहित शासकीय कार्यालयों एवं विभिन्न संस्थाओं में भी दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों से अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्वलित कर अभियान में सहभागी बनने की अपील की गई है।     कलेक्टर रोहित व्यास ने सभी विभागों को बेहतर आपसी समन्वय के साथ अभियान के लिए निर्धारित कैलेंडर के अनुरूप कार्यक्रमों का प्रभावी आयोजन एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान जनभागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसकी सभी पहलों की समयबद्ध तैयारी करते हुए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।     कलेक्टर ने अभियान के तहत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों एवं आयोजित गतिविधियों की फोटो और वीडियो सहित जानकारी निर्धारित गूगल ड्राइव में नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए, ताकि अभियान की गतिविधियों का समुचित दस्तावेजीकरण एवं संधारण किया जा सके।     जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि 17 सितंबर को शाम 7 बजे अपने घरों, ग्रामों, कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान में सहभागी बनें और जनभागीदारी के इस अभियान को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

जीपीएम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, 17 को रक्तदान और 20 सितंबर को लगेगा मेगा स्वास्थ्य शिविर।

रायपुर,  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पहलें आयोजित की जा रही हैं। अभियान के तहत 17 सितंबर को पेंड्रा में रक्तदान शिविर तथा 20 सितंबर को जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित होगा। इन आयोजनों के माध्यम से जिलेवासियों को रक्तदान जैसे जीवनदायी कार्य से जुड़ने के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 17 सितंबर को पेंड्रा में रक्तदान शिविर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को दोपहर 3 बजे से मल्टीपरपज हायर सेकेंडरी स्कूल, पेंड्रा में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर के माध्यम से नागरिकों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा। रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों से इस मानवीय पहल में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की गई है। शिविर के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था, सामग्री, उपकरण तथा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 20 सितंबर को जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर अभियान के अगले चरण में 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जिलेवासियों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं जांच की सुविधा प्रदान की जाएगी। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का प्रमुख उद्देश्य जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित अधिक से अधिक नागरिकों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। शिविर में एक ही स्थान पर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने और आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराने की सुविधा मिलेगी। हृदय, किडनी, मेडिसिन और नेत्र रोग विशेषज्ञ देंगे परामर्श मेगा स्वास्थ्य शिविर में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हृदय रोग, किडनी रोग, मेडिसिन एवं नेत्र रोग सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित जांच और चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जाएगा। मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उन्हें आगे की जांच, उपचार तथा आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं के संबंध में उचित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता से ऐसे मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी विशिष्ट स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता है। शिविर के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने और समय पर उचित उपचार की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। परिवार सहित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार के सदस्यों, बुजुर्गों एवं बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए मेगा स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित हों और विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श एवं जांच का लाभ उठाएं। नियमित एवं समय पर स्वास्थ्य जांच से कई गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान में मदद मिल सकती है, जिससे समय पर उपचार शुरू करने में सुविधा होती है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ये दोनों आयोजन जिले में सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और जनभागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित अभियान में स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। रक्तदान के माध्यम से जहां नागरिक जरूरतमंदों के जीवन बचाने में योगदान दे सकेंगे, वहीं मेगा स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं लोगों के और करीब पहुंचेंगी।

बच्चों की जांच के लिए आंगनवाड़ी-स्कूलों में स्क्रीनिंग कैंप लगाने के निर्देश: राज्यपाल पटेल

आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालयों में स्क्रीनिंग कैम्प लगाए : राज्यपाल पटेल रोगों की जागरूकता प्रयासों में विद्यार्थियों को जोड़े राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल की स्क्रीनिंग में बच्चों की जाँच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय और आंगनवाड़ी केन्द्रों में कैम्प लगाकर स्क्रीनिंग का कार्य किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को लोकभवन में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल ने बैठक उपरांत जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पी.एम. जनमन योजना की समीक्षा की। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जन प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की है कि सांसद, विधायक से सम्पर्क कर उनके क्षेत्र में सिकल एवं क्षय रोग उन्मूलन अभियान के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त करने का प्रयास करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण घटक है। जरूरी है कि जागरूकता प्रयासों में युवाओं को सहयोगी बनाया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में छात्रों के बीच जाने और उन्हें सिकल मित्र बनने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग 6 माह में पूरी तरह से ठीक हो सकता है। आवश्यकता रोगी द्वारा नियमित रूप से औषधि का सेवन किया जाए। उन्होंने रोगियों के औषधि सेवन की मॉनिटरिंग की जरूरत भी बताई। राज्यपाल पटेल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रकाशनों का लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में कुल एक करोड़ 34 लाख की सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से 92 प्रतिशत को जेनेटिक कार्ड का वितरण किया जा चुका है। सिकल मित्र पहल के अंतर्गत 4,825 मित्र बनाएं गए। उनकी संख्या को बढ़ाने के बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की टी.बी. रोग मुक्त रोगियों की दर 89 प्रतिशत हो गई है। मृत्यु दर में भी कमी आयी है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विभाग द्वारा 30 हजार से अधिक सिकल सेल रोगियों को डोर-टू-डोर जाकर दवा का वितरण किया जा रहा है। सिकल सेल प्रभावित व्यक्तियों से भी सम्पर्क किया जाता है। उन्होंने कहा कि सिकल मित्र बनाने के लिए महाविद्यालयों के छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्यों को प्रेरित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसका प्रारंभ सिकल सेल प्रभावित जिलों बड़वानी, धार और अनूपपुर से किया जाएगा। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।   राज्यपाल ने जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा की राज्यपाल पटेल ने जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पीएम जनमन योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। बच्चों के विकास और कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट हो। अधिकारी क्षेत्र भ्रमण कर कार्यों की नियमित निगरानी करें। उन्होंने पी.एम. जनमन योजना के विभिन्न घटकों की जानकारी प्राप्त की। उनको हितग्राही मूलक योजनाओं की शत प्रतिशत उपलब्धि की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 17 विभागों की 25 योजनाओं की अद्यतन स्थिति के विषय में भी जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।  

57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों को बड़ी राहत, ₹6 हजार से बढ़कर ₹9 हजार हुआ मानदेय

लखनऊ Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है।  पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई।  6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं।  सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा।  प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी।  आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है।  पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी।  बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई।  पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला? – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा कई दिनों से दे रहे थे धरना :  राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज … Read more

‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ की तैयारी, 7 अक्टूबर से गांव-गांव पहुंचाया जाएगा विकसित भारत का संदेश

7 अक्टूबर को निकलेगी ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ गांव-गांव पहुंचेगा विकसित भारत का संकल्प भोपाल  विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार की उपलब्धियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा–विकसित भारत का संकल्प’ का आयोजन 7 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। यात्रा जिले के कस्बों, गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए विधानसभा तथा वहां से जिला मुख्यालय पहुंचेगी, जहां इसका भव्य समापन होगा। गांव-गांव पहुंचेगी यात्रा जिले की प्रत्येक विधानसभा से एक सेवा ज्योति कलश यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा का मार्ग इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि वह विधानसभा क्षेत्र के अधिक से अधिक कस्बों और गांवों से होकर गुजरे और आमजन को इससे जोड़ा जा सके। यात्रा में कलश एवं कृत्रिम मशाल प्रमुख आकर्षण होंगे। साथ ही एक प्रचार वाहन के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों से होते हुए यात्रा विधानसभा मुख्यालय पहुंचेगी, जहां स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सभी यात्राएं जिला मुख्यालय पहुंचकर एक बड़े आयोजन में शामिल होंगी। जिला मुख्यालय पर होगा भव्य समापन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जिला मुख्यालय पर यात्रा के समापन अवसर पर वर्चुअल संबोधन होगा। इस कार्यक्रम में जिले के केंद्रीय मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री और सांसद शामिल होंगे। साथ ही विधायक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। समापन कार्यक्रम में जिले की विकास यात्रा और सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। उपस्थित जनसमूह को जिला विकास पुस्तिका भी वितरित की जाएगी। यात्रा के लिए रूट, कलश, प्रचार वाहन, सुरक्षा, यातायात एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएंगी। ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ का उद्देश्य केवल एक यात्रा निकालना नहीं, बल्कि गांव-गांव तक विकास का संदेश पहुंचाते हुए आमजन को ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ना है। 

प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी

माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री आईएमए गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड बैंक का सीएम योगी ने किया उद्घाटन साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री   प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही सरकार : सीएम योगी गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। पर, अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है। सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।   कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान, डॉक्टर होते थे उनके शिकार मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है। बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए। आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना की सीएम ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा। गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने … Read more

PM मोदी के जन्मदिन पर उज्जैन में भव्य दीपोत्सव, 7 लाख दीपों से सजेगा शहर

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हो रहे 'सेवा से संकल्प अभियान' के तहत एमपी के उज्जैन में गुरुवार शाम 7 बजे भव्य दीपेंसव 'आशीर्वाद का दिया' आयोजित होगा। शिप्रा के घाटों और श्री महाकाल लोक में 25 लाख से अधिक दीपक एक साथ प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। आयोजन के जरिए उज्जैन एक बार फिर सर्वाधिक दीप प्रज्वलित करने का विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा भी कर सकता है। इसके साथ ही कार्तिक मेला ग्राउंड में करीब सात लाख दीपों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकृति बनाने की तैयारी है। जनभागीदारी से होने वाले आयोजन में करीब 25 हजार वॉलेंटियर्स की तैनाती की जा रही है। दीप प्रज्वलन के लिए करीब 45 हजार लीटर खाद्य तेल और एक हजार किलो कपूर की व्यवस्था की गई है। कपूर का उपयोग रुई की बत्ती में किया जाएगा, ताकि दीपक आसानी से प्रज्वलित हो सकें। इसके अलावा 53 हजार मोमबत्तियां और 10 हजार माचिस की व्यवस्था भी की गई है। 7 सेक्टर, 250 सब-सेक्टर में बंटा क्षेत्र दीपोत्सव के लिए शिप्रा किनारे के क्षेत्र को सात सेक्टर और 250 सब-सेक्टर में बांटा गया है। इनमें 11 हजार से अधिक ब्लॉक बनाए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक में 225 दीपक लगाए जाएंगे। मंगलवार तक 15 लाख से अधिक दीपक बॉक्स में पैक किए जा चुके थे और इन्हें ट्रैक्टरों के जरिए घाटों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया। अतिरिक्त दीपकों के बॉक्स भी तैयार किए जा रहे है, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके। सात सेक्टरों में केदारेश्वर घाट से दत्त अखाड़ा होते हुए गुरु नानक घाट, सुनहरी घाट से रामघाट होते हुए नरसिंह घाट ब्रिज, नरसिंह घाट ब्रिज से कर्कराज मंदिर, माली कैफे से भूखी माता, भूखी माता से लालपुल, लालपुल से गऊघाट और कर्कराज मंदिर से लालपुल तक का क्षेत्र शामिल है।  13 हजार फाइबर शीट मंगाई बारिश से बचाव के लिए फाइबर शीट-बारिश की संभावना को देखते हुए प्रत्येक ब्लॉक को ढंकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए करीब 13 हजार फाइबर शीट मंगाई गई है। बारिश होने पर वॉलेंटियर्स की मदद से दीपों वाले ब्लॉकों को शीट से ढंका जाएगा। बुधवार से ब्लॉकों में दीपक जमाने का काम शुरू किया जाएगा। अयोध्या के रिकॉर्ड को चुनौती-उज्जैन इस आयोजन के जरिए दीप प्रज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। वर्तमान रिकॉर्ड अयोध्या के नाम है, जहां 26 लाख 17 हजार 215 दीपक एक साथ प्रज्वलित किए गए थे। उज्जैन भी 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित कर इस रिकॉर्ड को चुनौती देने की तैयारी में है। इससे पहले 2023 में महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 18 लाख 82 हजार 229 दीप प्रज्वलित किए गए थे। आज होगा ट्रायल कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को समन्वय, अनुशासन और समयबद्धता के साथ काम करने के निर्देश दिए। बुधवार दोपहर 12 बजे दीपोत्सव का ट्रायल होगा। इसमें दीप प्रज्वलन सहित अन्य व्यवस्थाओं का परीक्षण कर कमियां दूर की जाएंगी। 17 सितंबर को दोपहर 1 बजे सेक्टर व सब-सेक्टर अधिकारी और वॉलेंटियर्स अपनी टीमों के साथ निर्धारित घाटों पर पहुंचेंगे। सभी वॉलेंटियर्स को आईडी दिए जाएंगे।    हर गांव को 500 दीप जलाने का जिम्मा, फोटो-रील भी अपलोड करने होंगे र पंचायत में कम से कम 500 दीपक जलाने का लक्ष्य दिया है। साथ ही इनकी रील और फोटो वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। जनपद पंचायत के आदेश में कलेक्टर के आदेश (बकायदा क्रमांक) का जिक्र है। वहीं जिले में इस अभियान के तहत करीब 5 लाख दीप जलाने की तैयारी है। पंधाना जनपद पंचायत सीईओ शुभम निमामे ने कहा कि शासन के आदेश अनुसार निचले स्तर पर आदेश जारी किए हैं। जनपद पंचायत स्तर पर कलेक्टर कार्यालय से निर्देश आए थे। 17 सितंबर को शाम 7 बजे होगा दीप प्रज्ज्वलन जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय से 15 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को शाम 7 बजे ग्राम पंचायत मुख्यालय, गांवों के प्रमुख स्थानों और शासकीय परिसरों में दीप जलाए जाएंगे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, ग्राम कोटवार और एएनएम का सहयोग भी लिया जाएगा। इन जगहों पर जलाए जाएंगे दीप दीप प्रज्ज्वलन के लिए पीएम आवास योजना की कॉलोनियां और मोहल्ले, अमृत सरोवर, जल संरचनाएं, नवनिर्मित पुल-बांध, जन-औषधि केंद्र, आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल, एक्स-रे केंद्र, स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा मंदिर, घाट, आध्यात्मिक केंद्र, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाएं, पर्यटन और आध्यात्म से जुड़े प्रमुख स्थल, नगरीय व ग्रामीण विकास की परियोजनाएं तथा जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इन वर्गों को भी कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य दिया आदेश में अलग-अलग वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसमें राशन कार्डधारी, युवा विद्यार्थी, किसान, व्यापारी, लघु उद्यमी, स्टार्टअप, पशुपालक, मधुमक्खी पालक परिवार, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जनजातीय व वनवासी परिवार शामिल हैं। इसके साथ महिला स्व-सहायता समूह, लाड़ली बहना योजना के हितग्राही, पीएम आवास योजना और स्वामित्व योजना के लाभार्थी, पथ विक्रेता, पारंपरिक कारीगर, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक और दिव्यांगजन को भी जोड़ा जाएगा। फोटो-वीडियो और रील पोर्टल पर करनी होगी अपलोड कार्यक्रम के दौरान फोटो, वीडियो और रील तैयार कर निर्धारित वेबसाइट www.modiat25.in पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गांवों में होने वाले कार्यक्रम का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा। आयोजन के दौरान ग्रामीणों को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का ऑडियो संदेश भी सुनाया जाएगा। इसमें दीप प्रज्ज्वलन की अपील की गई है। सीईओ ने मैदानी अमले को समय पर उपस्थित रहकर कार्यक्रम का समन्वय और आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिले के 27 प्रमुख स्थलों पर भी जलेंगे दीप पंचायतों के अलावा जिले के 27 प्रमुख आइकॉनिक स्थलों पर भी विशेष दीप प्रज्ज्वलन होगा। इनमें धार्मिक, ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व के स्थान शामिल हैं। नगरीय क्षेत्र में भी हर वार्ड में कार्यक्रम कराने की तैयारी है। इसके लिए कर्मचारियों की वार्डवार ड्यूटी लगाई जाएगी। मंदिर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, घाट, बाजार, पीएम आवास की कॉलोनियां, … Read more

नशामुक्ति को लेकर बड़ा अभियान, 2-8 अक्टूबर तक स्कूलों से ग्राम सभाओं तक चलेगा जागरूकता सप्ताह

गांधी जयंती से प्रदेशभर में मनाया जाएगा ‘मद्य निषेध सप्ताह’ 2 से 8 अक्टूबर तक होंगी जन-जागरूकता गतिविधियां, नशामुक्ति के लिए दिलाई जाएगी ऑनलाइन शपथ विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्राम सभाओं से लेकर महिला स्व-सहायता समूहों तक होगी सहभागिता भोपाल  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश में 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक “मद्य निषेध सप्ताह” मनाया जाएगा। सप्ताह के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति रैली, नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, ग्राम सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऑनलाइन शपथ सहित विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग आयुक्त के.जी. तिवारी ने सभी कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा विभागीय संयुक्त एवं उप संचालकों को सप्ताह के आयोजन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रमों में विभाग से मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थाओं, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक संस्थाओं तथा नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्य कर रहे संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। मद्य निषेध सप्ताह का प्रमुख उद्देश्य समाज में बढ़ती मद्यपान की प्रवृत्ति तथा नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों एवं दुष्परिणामों के प्रति युवाओं, विद्यार्थियों और नागरिकों को जागरूक करना है। सप्ताह के दौरान स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों सहित विभिन्न वर्गों को “नशा न करेंगे, न करने देंगे” की शपथ भी दिलाई जाएगी। 2 अक्टूबर : नशामुक्ति रैली और प्रदर्शनी सप्ताह के पहले दिन महात्मा गांधी जयंती पर नशामुक्ति के लिए जन-जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी और नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जाएगा। नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देने के लिए नशामुक्ति पर आधारित पोस्टर, फोटो और चित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। कार्यक्रमों में शामिल नागरिकों को नशा नहीं करने की ऑनलाइन शपथ दिलाई जाएगी। 3 अक्टूबर : शैक्षणिक प्रतियोगिताएं और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर दूसरे दिन स्थानीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में नशामुक्ति विषय पर विभिन्न प्रतियोगिताएं, संवाद तथा संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आवासीय नशामुक्ति केंद्रों में नशा पीड़ित व्यक्तियों के लिए विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों में नशा पीड़ितों की एचआईवी-एड्स, टीबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जांच में पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। 4 अक्टूबर : ग्राम सभाओं में नशामुक्त गांव का संकल्प तीसरे दिन ग्राम सभाओं में गांवों को नशामुक्त बनाने के संबंध में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। पारित प्रस्तावों का पालन सुनिश्चित करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति संबंधी साहित्य, पोस्टर, पेम्फलेट और अन्य प्रचार सामग्री का वितरण किया जाएगा। ग्राम सभाओं में उपस्थित ग्रामीणों को नशामुक्ति की ऑनलाइन शपथ भी दिलाई जाएगी। 5 अक्टूबर : सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता चौथे दिन ग्राम और नगरीय स्तर पर स्थानीय व्हाट्सऐप समूह बनाए जाएंगे। इन समूहों के माध्यम से नशामुक्ति के संदेश, जागरूकता सामग्री और लघु फिल्में नागरिकों तक पहुंचाई जाएंगी। सोशल मीडिया के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 6 अक्टूबर : महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी पांचवें दिन महिला स्व-सहायता समूहों और शौर्या दलों द्वारा स्थानीय स्तर पर नशामुक्ति संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान चलाया जाएगा। महिलाओं को परिवार और समाज में नशे के कारण होने वाले आर्थिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। महिला समूह समुदाय को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। 7 अक्टूबर : स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन शपथ छठवें दिन ग्राम एवं नगरीय क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान के लिए तैयार किए गए स्थानीय मास्टर वॉलंटियर और “नशामुक्ति मित्र” स्कूलों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन नशामुक्ति शपथ दिलाएंगे। युवाओं को नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार और परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया जाएगा। 8 अक्टूबर : जिला मुख्यालयों पर समापन समारोह मद्य निषेध सप्ताह के अंतिम दिन सभी जिला मुख्यालयों पर जिलास्तरीय समापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें नशामुक्ति पर आधारित नाटक, नृत्य, संगीत और अन्य कलात्मक प्रस्तुतियां होंगी। सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। ऑनलाइन पोर्टल पर दिलाई जाएगी शपथ सप्ताह के प्रत्येक दिन आयोजित कार्यक्रमों में शामिल विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और नागरिकों को भारत सरकार के नशामुक्त भारत अभियान के ऑनलाइन पोर्टल पर ई-प्लेज के माध्यम से नशा नहीं करने की शपथ दिलाई जाएगी। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रमों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, महिला एवं बाल विकास, पुलिस तथा जनसम्पर्क विभाग सहित संबंधित संस्थाओं का सहयोग लिया जाए। जिलों को आयोजित गतिविधियों का प्रतिवेदन फोटोग्राफ सहित सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।  

फॉरेस्ट क्लीयरेंस में अटकी 5 खदानें, हेमंत सरकार ने लीज रद्द कर दोबारा नीलामी के दिए निर्देश

रांची आठ से 10 वर्ष पूर्व नीलाम हुई सोना खदान समेत पांच खदानों का लीज आवंटन राज्य सरकार ने रद्द कर दिया है. इनमें दो सोना खदान, एक लौह अयस्क खदान व दो ग्रेफाइट की खदान शामिल हैं. इन खदानों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने से उत्पादन ही शुरू नहीं हो पाया. अब सीएम हेमंत सोरेन ने इन खदानों की दोबारा नीलामी करने का निर्देश दिया है. इनकी नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित एमएसटीसी के प्लेटफॉर्म से हुई थी. अब एमएसटीसी प्लेटफॉर्म पर ही खदानों का लीज आवंटन रद्द करने संबंधी अधिसूचना भी जारी की गयी है. यह अधिसूचना खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी ने जारी की है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार के इस फैसले को वह माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देंगे. क्योंकि उनकी वजह से देर नहीं हुई, बल्कि सरकारी प्रक्रिया, एनओसी व फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी वजह बनी है. फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण अटका मामला बताया गया कि 69.240 हेक्टेयर की परासी सोना खदान की नीलामी 1.11.2017 को करायी गयी थी. जिसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था. कंपनी को 2.1.2021 तक खदान से उत्पादन आरंभ करना था. लेकिन अवधि समाप्त होने पर भी इससे उत्पादन शुरू नहीं हो सका. इसकी वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलना बतायी गयी. लंबी अवधि बीतने पर राज्य सरकार ने आवंटन रद्द कर दिया. इसी तरह 272.651 हेक्टेयर के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एक बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक की नीलामी 26.10.2016 को हुई थी. जिसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था. लेकिन तय अवधि में खदान का संचालन नहीं हो सका. यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की वजह बनी. सारंडा संरक्षित जोन में आता है भनगांव आयरन ओर ब्लॉक  भनगांव आयरन ओर ब्लॉक झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी ब्लॉक (सारंडा वन प्रभाग) में स्थित लौह अयस्क खदान क्षेत्र है. 2018 में झारखंड सरकार द्वारा आयोजित ई-नीलामी के माध्यम से यह ब्लॉक साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को आवंटित हुआ था. साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू ग्रुप के स्वामित्व वाली खनन कंपनी है. इसे फॉरेस्ट क्लीयरेंस व अन्य एनओसी नहीं मिल सकी है. इन खदानों का रद्द हुआ एलओआइ कोल ब्लॉक                                                कंपनी                                                                      नीलामी का वर्ष पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक,                             पश्चिम सिंहभूम    मैथन इस्पात लिमिटेड                    26.10.2016 परासी गोल्ड एंड एसोसिएटेड मिनरल्स,      तमाड़  रांची-रुंगटा माइंस लिमिटेड                               01.11.2017 भननगांव आयरन ओर ब्लॉक                    पश्चिम सिंहभूम-साउथ वेस्ट माइंडिंग लिमिटेड               28.06.2018 डुलसुलमा ग्रेफाइट ब्लॉक                           पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                               1. 03.2019 लेसलीगंज ग्रेफाइट ब्लॉक                         पलामू टीम जियो रिसोर्सेज प्रा. लि.                                  01.08.2018