samacharsecretary.com

अतिक्रमणकारियों पर चला बुलडोजर, शासकीय भूमि को कराया गया खाली

रायपुर  जल संसाधनों के संरक्षण तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले में हनोदा माइनर नहर क्षेत्र में विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जल संसाधन विभाग एवं नगर पालिक निगम रिसाली की संयुक्त टीम ने नहर क्षेत्र एवं विभागीय स्वामित्वाधीन शासकीय भूमि पर वर्षों से किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।         हनोदा माइनर नहर डी.पी.एस. स्कूल से वी.आई.पी. नगर तक नगर पालिक निगम रिसाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। यह नहर क्षेत्र जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नहरों एवं उनसे संबद्ध शासकीय भूमि का संरक्षण जनहित से जुड़ा विषय है। इन क्षेत्रों में किए गए अतिक्रमण न केवल शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आते हैं, बल्कि नहरों के अनुरक्षण, निरीक्षण एवं मरम्मत कार्यों में भी बाधा उत्पन्न करते हैं।         प्रशासन द्वारा कार्रवाई से पूर्व संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए संयुक्त दल ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।            अभियान के दौरान नगर पालिक निगम रिसाली एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्रवाई को सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया, जिससे नहर क्षेत्र को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जा सका।         कार्यपालन अभियंता  आशुतोष सारश्वत ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अधीन नहरों, जल संरचनाओं, अनुरक्षण मार्गों तथा शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र की सभी नहरों एवं शासकीय परिसंपत्तियों की सतत निगरानी की जा रही है और जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां बिना किसी भेदभाव के वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।      उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि एवं जल संरचनाएं सार्वजनिक संपत्ति हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। इन परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।             जल संसाधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नहरों, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें और इनके संरक्षण में प्रशासन का सहयोग करें। सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण से ही जनहित एवं विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित  पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं। भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओ पी चौधरी  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

पंजाब की राजनीति में नई हलचल, कांग्रेस के संपर्क में कैप्टन अमरिंदर; BJP से नाराजगी की चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे संपर्क में हैं। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और हमारे वरिष्ठ साथी हैं। गौरतलब है कि कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि हुड्‌डा ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी के वाहक बनें। वहीं, हुड्डा के इस दावे पर पंजाब भाजपा ने भी रिएक्शन दिया है। पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त माने जाते हैं। इस वजह से कयास लगने लगे हैं कि कहीं हुड्‌डा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की कोशिश तो नहीं कर रहे। कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा इसलिए तेज हुई कि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। वहीं इस मामले में पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियेवाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। भाजपा में पूछ नहीं होने से नाराज हैं कैप्टन कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा को इसलिए भी बल मिला है क्योंकि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। कैप्टन का कहना है कि कांग्रेस में पंजाब को लेकर उनसे पूछा जाता था, लेकिन भाजपा सीधे ऊपर से फैसले लेती है। मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। इस मामले में भाजपा ने उन से कोई राय नहीं ली गई थी। कैप्टन की BJP से नाराजगी की वजहें:-     प्रधान बनाने से पहले राय नहीं ली: कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब BJP का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। कैप्टन ने कहा था कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ढिल्लों सक्रिय जरूर थे, लेकिन जमीन (फील्ड) पर उनका प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जैसा होना चाहिए था। इस मामले में भाजपा ने मुझसे कोई राय नहीं ली।     कांग्रेस सलाह लेती, BJP में फैसला ऊपर से: कांग्रेस और भाजपा की कार्य नीति की तुलना करते हुए कैप्टन ने कहा कि मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। यहां बस फैसला ऊपर से आता है, किसी से पूछा नहीं जाता।     गठबंधन की बात नहीं मान रही भाजपा: कैप्टन अमरिंदर पंजाब में चुनाव को लेकर अकाली दल से गठबंधन के पक्ष में हैं। वह खुलकर इसकी पैरवी करते हैं। इसके उलट भाजपा के नेता बार-बार कह रहे हैं कि हम सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे।     भाजपा में बड़े नेताओं से मुलाकात में दिक्कत: कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक फैमिली की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, BJP में ये सिस्टम नहीं है।     भाजपा ने संवेदना तक व्यक्त नहीं की: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था- मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन ने कहा था, कांग्रेस को मिस करता हूं कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक परिवार की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, भाजपा में ये सिस्टम नहीं है। मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन आए तो कांग्रेस को क्या फायदा? पंजाब कांग्रेस में अभी नेतृत्व को लेकर कलह चल रही है। मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी, नेता विपक्ष प्रताप बाजवा समेत कई नेताओं के गुट बने हुए हैं। कांग्रेस हाईकमान चुनाव से पहले पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की भी सोच रहा है। ऐसे में अगर कैप्टन की वापसी होगी, तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कैप्टन के अधीन ये सारे नेता पहले भी काम कर चुके हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति का दिग्गज चेहरा हैं। 2002 हो या फिर 2017, वे अपने चेहरे के बूते ही कांग्रेस को सत्ता में लाए। यह बात कांग्रेस के भीतर उनके विरोधी भी मानते हैं। पंजाब के गांवों में कैप्टन के आक्रामक रुख को पसंद किया जाता है। वहीं, सामुदायिक सौहार्द के लिए वे शहरी तबके की पहली पसंद हैं। इसके अलावा कांग्रेस में रहते कैप्टन की सियासी पकड़ भी मजबूत थी। 2014 में जब पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी, तब भाजपा ने अमृतसर से अपने बड़े नेता अरुण जेटली को लोकसभा चुनाव लड़ने भेजा। कैप्टन वहां उनसे भिड़ने चले गए। कैप्टन को प्रचार के लिए एक महीने का ही वक्त मिला था, लेकिन जेटली हारकर दिल्ली लौटे। ऐसे वक्त में जब भाजपा के कई नेता मोदी के नाम पर जीत गए, कैप्टन ने दिखाया कि पंजाब की राजनीति में उनसे बड़ा सूरमा कोई नहीं है। इसके अलावा पंजाब में बादल परिवार की सत्ता उखाड़ने का काम कैप्टन अमरिंदर ने ही किया है। सांसद पहले ही कह चुके- कैप्टन का वेलकम गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी के हक में हैं। वह चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर कह चुके हैं कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में आएं तो उनका वेलकम है। कैप्टन ने खुद कांग्रेस में … Read more

इंदौर और भोपाल मेट्रो रेल परियोजनाओं के हुए दो तिहाई कार्य पूरे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल संचालन के प्रथम चरण के कार्य पूर्ण होने के बाद परियोजना के आगामी चरणों के कार्य समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। सघन आबादी के क्षेत्रों और कामकाजी नागरिकों की सुगम आवाजाही के लिए मेट्रो रेल व्यवस्था एक वरदान है। प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र इंदौर में मेट्रो रेल यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग का आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। दोनों नगरों की मेट्रो रेल परियोजना के सभी चरणों के सम्पूर्ण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। समग्र प्रगति की दृष्टि से दोनों परियोजनाओं के दो तिहाई कार्य पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल और इंदौर के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। नगरीय विकास और आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। विद्यार्थियों की अध्ययन यात्रा से भी जोड़ें मेट्रो परियोजना को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी बन रहे हैं। प्रमुख धार्मिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, पुरातात्विक धरोहर स्थलों और टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्य की सैर के लिए विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों के लिए प्रबंध होने से मेट्रो रेल का उपयोग बढ़ेगा। इन प्रयासों में पर्यटन विभाग सहित मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।  भोपाल मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना में फेज़-1 में सुभाष नगर से एम्स तक दिसम्बर 2025 से संचालन हो रहा है। इस ट्रेक पर 7.1 किलोमीटर क्षेत्र में 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए गए हैं। फेज़-2 में सुभाष नगर से करोंद चौराहा तक 9.64 से किलोमीटर सेक्शन में कार्य हो रहा है, जो जून 2028 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। इस सेक्शन में 6 एलिवेटेड और दो भूमिगत स्टेशन होंगे। इसी तरह फेज़-3 में भदभदा चौराहा से रत्नागिरी चौराहे तक 14.16 लम्बाई के सेक्शन में कार्य हो रहा है। इस सेक्शन में 13 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह कार्य भी आने वाले 2 वर्ष में पूर्ण होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना बैठक में बताया गया कि इंदौर मेट्रो रेल परियोजना में फेज-1 के रीच वन में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर 3 तक 5.26 किलोमीटर के सेक्शन का शुभारंभ मई 20 25 में हो चुका है। फेज-1 के रीच-2 में सुपर कॉरिडोर 3 से मालवीय नगर चौराहे तक 11.43 किलोमीटर के सेक्शन के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। फेज-2 के अंतर्गत रीच-1 में शहीद बगीचा से खजराना चौराहा तक 1.77 किलोमीटर सेक्शन के कार्य और फेज-2 के ही रीच-2 के एयर पोर्ट से गांधी नगर तक 1.5 किलोमीटर सेक्शन के कार्य जून 2028 तक पूर्ण होंगे। फेज-3 में खजराना चौराहा से एयरपोर्ट के 11.59 किलोमीटर लम्बाई के सेक्शन के कार्य होंगे। बैठक में नगरों में भविष्य में क्रियान्वित किए जाने वाले फ्लाई ओवर निर्माण, मेट्रो रेल और सड़क निर्माण के कार्यों के संबंध में भी चर्चा हुई।  

ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष तकनीकी नवाचार से सशक्त हो रहा पर्यावरण संरक्षण ड्रोन निगरानी, स्मार्ट मॉनिटरिंग और हरित विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल विज्ञान, तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से आकार ले रहा है स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य प्रकृति का संरक्षण: वर्तमान की आवश्यकता, भविष्य की जिम्मेदारी रायपुर, धरती केवल हमारे रहने का स्थान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। स्वच्छ हवा, निर्मल जल, हरे-भरे वन और समृद्ध जैव विविधता ही मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी अंततः मानव जीवन के लिए ही खतरा बन सकती है। इसलिए आज आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जो समृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखे।          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इसी संतुलित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा रही है। राज्य में पर्यावरणीय शासन को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण में तकनीकी क्रांति:  ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली          21वीं सदी में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सुशासन और संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपकरण बन चुकी है। पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम इसी परिवर्तन का प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन था, जहाँ प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान में समय लगता था, वहाँ अब अत्याधुनिक सेंसरों से लैस ड्रोन कुछ ही मिनटों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। ड्रोन तकनीक के माध्यम से-           ड्रोन तकनीक के माध्यम से PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की निगरानी, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे गैसीय प्रदूषकों का विश्लेषण, औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऊँचाई पर निगरानी, नदियों एवं जलाशयों की जल गुणवत्ता का परीक्षण, अवैध अपशिष्ट निस्तारण की पहचान तथा प्रदूषण प्रभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की सटीक मैपिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण स्रोतों की शीघ्र पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है। स्मार्ट पर्यावरणीय शासन की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़            पर्यावरणीय चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना समय की मांग है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ तकनीक आधारित पर्यावरणीय शासन को प्राथमिकता दी है। 24 घंटे वायु गुणवत्ता पर निगरानी           राज्य में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) का विस्तार किया जा रहा है। यह प्रणाली चौबीसों घंटे वायु की गुणवत्ता का विश्लेषण कर वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव हो रहा है तथा नागरिकों को भी वायु गुणवत्ता संबंधी जानकारी प्राप्त हो रही है। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण को मिली नई मजबूती           औद्योगिक विकास राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार है, लेकिन यह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लागू किया गया है। यह प्रणाली उद्योगों के उत्सर्जन की निरंतर निगरानी करती है और किसी भी मानक उल्लंघन की स्थिति में तत्काल जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है। GPS ट्रैकिंग से खतरनाक अपशिष्टों पर नियंत्रण          औद्योगिक अपशिष्टों का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने खतरनाक अपशिष्टों के परिवहन एवं निपटान की निगरानी के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था से अपशिष्ट के उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे अवैध डंपिंग और पर्यावरणीय क्षति की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। अत्याधुनिक पर्यावरण प्रयोगशालाएँ : वैज्ञानिक निर्णयों का आधार          सटीक आंकड़े और वैज्ञानिक विश्लेषण किसी भी प्रभावी पर्यावरणीय नीति की आधारशिला होते हैं। राज्य में स्थापित अत्याधुनिक केंद्रीय पर्यावरण प्रयोगशाला वायु, जल, मिट्टी और अपशिष्ट नमूनों का उच्च स्तरीय परीक्षण कर रही है। इसके अतिरिक्त मोबाइल पर्यावरण प्रयोगशालाएँ भी आकस्मिक निरीक्षण और त्वरित परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से प्रदूषण की घटनाओं का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सकती है। पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों के बीच संतुलन         प्रदेश सरकार ने पर्यावरणीय मानकों से समझौता किए बिना उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया है।स्थापना अनुमति (CTE) और संचालन अनुमति (CTO) की प्रक्रियाओं को समयबद्ध एवं डिजिटल बनाया गया है। अनेक श्रेणियों में स्व-प्रमाणन आधारित नवीनीकरण की सुविधा प्रदान कर उद्योगों को राहत दी गई है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। जनभागीदारी: हरित भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति           पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। यह तब सफल होगा जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी को समझे और निभाए। इसी उद्देश्य से राज्य में ईको-क्लब कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता कार्यक्रम तथा जैव विविधता संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना का विकास भविष्य के हरित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। भविष्य की दृष्टि 2030ः हरित विकास का रोडमैप            आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय शासन पूरी तरह डेटा-आधारित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित होगा। "भविष्य की दृष्टि 2030" के अंतर्गत राज्य में स्मार्ट मॉनिटरिंग, डिजिटल पर्यावरणीय प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण की उन्नत प्रणालियाँ तथा जनसहभागिता आधारित संरक्षण मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। यह दृष्टिकोण केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और उच्च जीवन गुणवत्ता … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने एसएलबीसी के बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से की राशि के लिए ऋण देने की प्रक्रिया का सरलीकरण करें, जिससे हितग्राही आवास शीघ्रता से बना सकें। मुख्य सचिव ने नगरीय-प्रशासन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत जिन हितग्राहियों को आवास स्वीकृत हुए हैं, उनके लिए एक विशेष शिविर लगाकर बैंकर्स से ऋण दिलवाये। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केन्द्रांश एवं राज्यांश की राशि हितग्राहियों को दी जाती है।           मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के अंतर्गत परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक भागीदारी में किफायती आवास निर्माण के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में भारत सरकार के एमआईएस पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की प्रविष्टी में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई।            बैठक में अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु भौतिक प्रगति अनुसार केन्द्रांश राशि एक लाख 50 हजार रूपए तथा अनिवार्य राज्यांश की राशि एक लाख रूपए दी जाती है। हितग्राही द्वारा निर्धारित समयावधि में आवास पूर्ण करते हुए गृह प्रवेश करने पर राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति आवास 32 हजार 850 रूपए पृथक से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जायेगी। प्रति आवास डीपीआर और पीएमसी शुल्क की राशि 6 हजार 150 रूपए राज्य शासन द्वारा दिया जाता है।           अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण घटक अंतर्गत 10 हजार 549 हितग्राही हेतु नवीन आवास निर्माण के लिए केन्द्रांश राशि 158 करोड़ 23 लाख 50 हजार रूपए तथा राज्यांश 146 करोड़ 63 लाख 11 हजार रूपए एवं हितग्राही अंशदान राशि 105 करोड़ 49 लाख शामिल करते हुए 144 नगरीय निकायों में 410 करोड़ 35 लाख 61 हजार रूपए की लागत की 114 परियोजनाओं को स्वीकृत करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश अवनीश कुमार शरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुईफ्फत आरा सहित वित्त, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, गृह निर्माण मंडल, हुडको एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक शामिल हुए।

हेमंत सोरेन को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें? जमीन घोटाले में 8 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

रांची. ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना निर्णय आठ जून को सुनाएगी। मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए हेमंत सोरेन ने पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वह इस मामले में निर्दोष है। उनके खिलाफ लगे सभी आरोप निराधार हैं। मामले में हेमंत सोरेन सहित 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोप तय किया जाना है। समय / वर्ष     घटनाक्रम वर्ष 2024     बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025     हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026     ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026     विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत इस डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय के इस फैसले के बाद केस में आगे क्या होगा- यदि डिस्चार्ज याचिका स्वीकार होती है: अगर अदालत हेमंत सोरेन की दलीलें मान लेती है, तो उन्हें इस मामले से बरी किया जा सकता है (यानी उन पर ट्रायल नहीं चलेगा)। यदि डिस्चार्ज याचिका खारिज होती है: अगर अदालत याचिका खारिज कर देती है, तो अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत हेमंत सोरेन और अन्य सभी 18 आरोपितों पर कोर्ट में औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame of Charges) किए जाएंगे और नियमित ट्रायल शुरू होगा। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।

यादों को गहनों में संजोने का नया ट्रेंड, पंजाब में DNA ज्वेलरी की बढ़ी मांग

जालंधर. पंजाब में अब रिश्तों और यादों को सहेजने का तरीका बदल रहा है। सोने-चांदी की पारंपरिक ज्वेलरी की जगह अब लोग डीएनए ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस ज्वेलरी में अपनों के खून, बाल या दूध के नमूने को ब्लू रेजिन में प्रिजर्व कर लाकेट, अंगूठी और ब्रेसलेट तैयार किए जा रहे हैं। जालंधर के सर्राफा बाजार के ज्वेलर्स की मानें तो बीते 6-8 महीनों में डीएनए ज्वेलरी के आर्डर में व्यापक स्तर पर इजाफा हुआ है। नवजात के जन्म, शादी की सालगिरह, माता-पिता की याद या किसी अपने के बिछड़ने पर लोग भावनात्मक जुड़ाव के लिए ऐसी ज्वेलरी बनवा रहे हैं। एक ग्राहक ने तो अपने दिवंगत पिता के खून की बूंद को लाकेट में हमेशा के लिए सहेज लिया है। फिलहाल जालंधर के अलावा लुधियाना और अमृतसर में भी कुछ चुनिंदा ज्वेलर्स ने यह काम शुरू किया है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में डीएनए ज्वेलरी की मांग और बढ़ेगी। ऐसे तैयार होती है डीएनए ज्वेलरी स्वर्णकार संघ जालंधर के अध्यक्ष दीपक निश्चल ने बताया कि ग्राहक से खून का नमूना लिया जाता है। खून को जमने से बचाने के लिए खास ईडीटीए ट्यूब में रसायनों से ट्रीट किया जाता है। इसके बाद ब्लू रेजिन में उस नमूने को डालकर हाई टेम्प्रेचर पर प्रिजर्व किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है और नमूना खराब नहीं होता। तैयार जेम को सोने या चांदी की बेस ज्वेलरी में फिट कर दिया जाता है। एक लाकेट तैयार करने में 7 से 10 दिन का समय लगता है। कीमत 8 हजार रुपये से शुरू होकर डिजाइन के हिसाब से तय की है। युवाओं में भारी क्रेज सराफा बाजार के कारोबारी केशव ज्वेलर्स के मालिक वरुण चोपड़ा का कहना है कि पहले लोग फोटो फ्रेम या टैटू से यादों को सहेजते थे, लेकिन अब डीएनए ज्वेलरी नया ट्रेंड बन गया है। खासकर 25 से 40 साल के युवा वर्ग में इसे लेकर क्रेज देखा जा रहा है। कई एनआरआई परिवार भी विदेश से फोन कर आर्डर बुक करवा रहे हैं। डा. मुनीष मेहता के मुताबिक रेजिन में प्रिजर्व करने के बाद डीएनए का नमूना दशकों तक सुरक्षित रहता है। हालांकि ज्वेलर्स को नमूना लेते समय हाइजीन और मेडिकल प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है। लिहाजा, स्वास्थ्य संबंधी नियमों की पालना करने के बाद इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

लंबे समय से एक ही जगह तैनात 80 पुलिसकर्मी बदले गए, जांजगीर-चांपा में तबादला सूची जारी

जांजगीर-चांपा. जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के अनुसार कुल 80 प्रधान आरक्षक एवं आरक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। स्थानांतरण आदेश के तहत ऐसे पुलिस कर्मचारियों का प्राथमिकता से तबादला किया गया है, जो तीन वर्ष अथवा उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ थे। इस कदम का उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता, दक्षता एवं प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है। यातायात शाखा के कर्मचारियों की थानों में हुई पदस्थापना पुलिस अधीक्षक ने यातायात शाखा में पदस्थ कर्मचारियों को विभिन्न थानों में पदस्थ किया है। इससे थाना स्तर पर पुलिस बल की उपलब्धता बढ़ेगी तथा कानून- व्यवस्था संबंधी कार्यों में और अधिक मजबूती आएगी। वहीं थाना चौकी में पदस्थ कर्मचारियों को यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है। करही में पुलिस सहायता के लिए अलग से व्यवस्था ग्राम करही में 05 जून को पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम करही में पृथक रूप से पुलिस कर्मचारियों की पदस्थापना की गई है। इससे क्षेत्र के नागरिकों को त्वरित पुलिस सहायता एवं सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

वैश्विक निवेश हब बनने की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम इंदौर में 6 जून को होगा भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम 2026 लैटिन अमेरिका एवं 15कैरिबियन देशों के राजनयिक और प्रतिनिधि होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार वैश्विक निवेशकों, उद्योग जगत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के लिए आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में निवेश, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई गति देने के उद्देश्य से 6 जून को इंदौर में भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन (LAC) व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 की बैठक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में राज्य सरकार के सहयोग से ग्लोबल इंडिया बिज़नेस फोरम (GIBF) द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम का आयोजन मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के सहयोग से रेडिसन ब्लू, इंदौर में होगा। फोरम में लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें विभिन्न देशों के राजदूत, एक उच्चायुक्त और एक महावाणिज्यदूत शामिल होंगे। इनके साथ निवेशक, निर्यातक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, व्यापार आयुक्त, एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और वरिष्ठ शासकीय अधिकारी सहित 350 से अधिक प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे। चार प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडल भी इसमें सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा निवेश संवर्धन और वैश्विक सहभागिता को लेकर किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों, बेहतर अधोसंरचना, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशक हितैषी वातावरण के माध्यम से नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी दिशा में यह फोरम भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण साबित होगा। मध्यप्रदेश का निर्यात प्रदर्शन भी लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य से लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र को लगभग 4,186 करोड़ रूपये का निर्यात दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक है। इस निर्यात में फार्मा क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ब्राज़ील, मैक्सिको और चिली, राज्य के प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और वैश्विक साझेदारियों को लेकर फोरम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में भारत एलएसी विशेष संस्करण का विमोचन भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं और औद्योगिक अवसरों पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा निवेश प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही व्यापार एवं निवेश के अवसरों, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग तथा सेवा क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर केंद्रित पैनल होंगे। विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित चर्चा में औषधि, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल रहेंगे, जबकि सेवा क्षेत्र की चर्चा में सूचना-प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फिनटेक तथा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। फोरम में उद्योगों और निवेशकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देने के लिए बी2बी और बी2जी बैठकों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यापारिक अवसरों और निवेश साझेदारियों को गति मिलेगी। भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 मध्यप्रदेश की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति, निवेश आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।