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योगी सरकार का बड़ा अभियान, प्रदेशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का हो रहा निरीक्षण

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार व्यापक प्रयास कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार द्वारा संचालित "स्टेट रिव्यू मिशन" के तहत प्रदेश भर में स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण और समीक्षा अभियान चलाया जा रहा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत  अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर नागरिक को उसके घर के पास गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी के तहत अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष द्वारा 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत की गई। मिशन के तहत प्रदेश के सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता की गहन समीक्षा की जा रही है। मंडल स्तर पर संचालित अभियान में स्वास्थ्य इकाइयों का स्थल निरीक्षण, व्यवस्थाओं का मूल्यांकन तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पिछले छह माह के दौरान 18 मंडलों के सभी 75 जिलों और 826 विकास खंडों में संचालित स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण किया गया।  राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश की कुल 33,044 चिकित्सा इकाइयों में से 16,249 चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जो कुल इकाइयों का लगभग 49 प्रतिशत है। निरीक्षण कार्य 901 मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारियों तथा 43 राज्य स्तरीय अधिकारियों की दो सदस्यीय टीमों द्वारा किया गया। इन टीमों ने प्रदेश के 93 जिला अस्पतालों, 861 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 2,825 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 12,405 स्वास्थ्य उपकेंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 50 विशेष चिकित्सालयों तथा 15 मेडिकल कॉलेजों का स्थलीय मूल्यांकन किया। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित 2,661 मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का भी निरीक्षण किया गया। इन स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कुछ मंडलों में निरीक्षण के दूसरे चरण का कार्य भी जारी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।  उन्होंने बताया कि स्टेट रिव्यू मिशन के तहत निरीक्षण के लिए राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई। इसके माध्यम से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधनों की स्थिति, एंबुलेंस सेवाओं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सुविधाओं तथा रिकॉर्ड प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया। साथ ही रोगियों से फीडबैक लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता का भी आकलन किया गया।   निगरानी और समीक्षा से स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ी कार्यक्षमता  स्टेट रिव्यू मिशन के दौरान किए गए गहन निरीक्षण, आकस्मिक जांच और लगातार समीक्षा का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार दर्ज किया गया है और चिकित्सा संस्थानों में सेवा गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के नए मानक स्थापित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सतत निगरानी और समीक्षा से न केवल स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ रही है, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी मजबूत हुआ है। प्रदेश सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को जनकेंद्रित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास पर विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और पर्यावरणविदों ने किया मंथन

भोपाल  ‘मेनस्ट्रीमिंग-एलआईएफईः पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ शहरी आवासों का निर्माण’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया। सोसायटी ऑफ नेचर हीलर्स, कंजर्वेटर्स एंड लोकल टूरिज्म डेवलपमेंट (एसएनएचसी इंडिया) तथा मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से किया। एपको (एनवाइरनमेंटल प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन) में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के प्रमुख वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, शहरी योजनाकार, नीति विशेषज्ञ और जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठन शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल विकास और टिकाऊ शहरी नियोजन को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि शहरों के विकास मॉडल में प्रकृति और स्थानीय पारिस्थितिकी को केंद्र में रखना समय की आवश्यकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के सीईएमडीई के प्रो. डॉ. फैयाज़ ए. खुसरो ने कहा कि दिल्ली सहित देश के अनेक शहरों में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट शहरी नियोजन के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने स्थानीय पारिस्थितिकीय समाधानों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक मती अनुराधा शंकर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। तकनीकी सत्रों में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट बेंगलुरु के  जगदीश कृष्णस्वामी, डॉ. चंद्रशेखर एम. बिरादर, वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. गौतम तालुकदार तथा अन्य विशेषज्ञों ने शहरी तापमान वृद्धि, हरित क्षेत्रों की कमी, जैव विविधता संरक्षण और शहरी नियोजन में प्रकृति-आधारित समाधानों की आवश्यकता पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने शहरों में देशी वृक्षारोपण, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और वार्ड स्तर पर जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने की आवश्यकता जताई। दूसरे तकनीकी सत्र में नदियों, आर्द्र भूमियों और शहरी जल प्रणालियों के संरक्षण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भूजल दोहन, रेत खनन और नदी संरक्षण की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शहरी विकास योजनाओं में जल संसाधनों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। ‘सस्टेनेबल सिटी —गवर्नेंस, प्लानिंग एंड कम्युनिटी’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने शहरी नियोजन में जैव विविधता संरक्षण, पक्षी-अनुकूल भवन निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और समावेशी विकास मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन के दूसरे दिन, 31 मई को प्रतिभागियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और टिकाऊ विकास के भारतीय दृष्टिकोण पर चर्चा की। यह भ्रमण सम्मेलन के उद्देश्यों को व्यवहारिक संदर्भ प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। सम्मेलन में यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास मॉडल अपनाकर ही संभव है। विशेषज्ञों ने पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने और शहरी विकास के केंद्र में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी को स्थान देने का आह्वान किया।

भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड को सौंपा गया गुणवत्ता परीक्षण का जिम्मा, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और समयबद्ध परियोजनाओं पर जोर

लखनऊ औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने औद्योगिक क्षेत्रों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने गाजियाबाद के सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड से विकास कार्यों का विस्तृत गुणवत्ता परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण कार्यों के सैंपल और गुणवत्ता परीक्षण उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाने का फैसला लिया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कविनगर, स्वदेशी औद्योगिक क्षेत्र, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, साउथ साइड जीटी रोड, लोहामंडी, मेरठ रोड साइट-3 और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए थर्ड पार्टी ऑडिट व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, लंबित विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न पर होगी कार्रवाई निरीक्षण और उद्यमियों के साथ हुई बैठक के दौरान ट्रक पार्किंग, पार्कों के विकास, टेस्ट लैब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और एक्सपो सेंटर जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति दोहराते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए पारदर्शी, जवाबदेह और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना यूपीसीडा और योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अथॉरिटी को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर प्रदेश में रिकॉर्ड निवेश प्रस्तावों और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे के बीच योगी सरकार गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि निवेश आकर्षित करने के लिए केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित की जा रही सड़कों, नालियों, पार्किंग, कॉमन सुविधाओं और अन्य आधारभूत ढांचों की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यही नहीं, यूपी को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार औद्योगिक अवसंरचना को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेशक अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए यूपीसीडा को भी अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।

मद्यनिषेध विभाग के माध्यम से गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंचा जागरूकता संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे प्रयासों को लगातार गति मिल रही है। योगी सरकार ने नशे के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जागरूकता को सबसे प्रभावी हथियार बनाते हुए व्यापक अभियान संचालित किया है। मद्यनिषेध विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर में युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों के बीच नशा विरोधी कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया, जिससे लाखों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचा। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल नशे की रोकथाम तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराकर उन्हें स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में निबंध, भाषण, पोस्टर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 1352 प्रतियोगिताओं में शामिल हुए हजारों छात्र-छात्राएं मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कुल 1352 प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 5404 छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। क्योंकि युवाओं को सही दिशा में प्रेरित कर नशे के खिलाफ मजबूत सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाए गए, जहां खेलकूद प्रतियोगिताओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। इन कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिली। प्रदेशभर में 1767 संगोष्ठियां, 356 प्रदर्शनियों का आयोजन योगी सरकार के निर्देश पर मद्यनिषेध विभाग ने राज्य स्तर से लेकर जनपद स्तर तक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। वर्ष भर में 40 राज्य स्तरीय और 1727 जनपद स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें शिक्षकों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्माचार्यों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। इसके साथ ही प्रदेशभर में 356 प्रदर्शनियों की स्थापना कर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और उसके सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। मेलों, त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय पर्वों पर विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। योगी सरकार में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जागरूकता को मिली नई ताकत यूपी के जनसामान्य तक सरल और प्रभावी तरीके से संदेश पहुंचाने के लिए विभाग ने 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए। नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, जादू, गीत, कव्वाली और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।

झारखंड में ITI नामांकन प्रक्रिया शुरू, 10 से 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प मिलेगा

 रांची  राज्य के सरकारी, गैर सरकारी तथा पीपीपी मोड पर संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकन के लिए अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन में न्यूनतम 10 और अधिकतम 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प दे सकेंगे। संस्थानों की शत-प्रतिशत सीटें भरने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि अभ्यर्थियों के पास पर्याप्त विकल्प हो। श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया सोमवार को शुरू होगी। 25 जून तक ऑनलाइन आवेदन होगा, जबकि नामांकन के लिए 29 जून को पहली मेधा सूची प्रकाशित होगी। इसी आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अलावा झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम-आइटीआइ, गोला, रामगढ़ में भी नामांकन होगा। अधिकतम आयु 40 वर्ष कुछ ट्रेड में नामांकन के लिए आवश्यक योग्यता 10वीं तथा कुछ ट्रेड के लिए आठवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। नामांकन के लिए एक अगस्त 2026 को न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। बता दें कि राज्य के आइटीआई में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाती है। नामांकन के लिए मेधा सूची अर्हता कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर तैयार की जाती है। सभी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाती है। नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया www.iti.jharkhand.gov.in पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। बताते चलें कि राज्य के कई औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कई सीटें रिक्त रह जाती है। संस्थानों की अधिक से अधिक सीटें भर सकें, इसके लिए कई चरणों की काउंसिलिंग आयोजित की जाती है। इसके बाद भी सीटें रिक्त रह जाती हैं। इससे निपटने के लिए ही अधिक विकल्प भरने की व्यवस्था की गई है।

नए सिलेबस के बीच किताबों का संकट, यूपी के हजारों स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित

लखनऊ  नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अप्रैल से हो चुकी है और प्रदेश के हजारों सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 9वीं के छात्रों को अब तक सभी जरूरी किताबें नहीं मिल सकी हैं। सीबीएसई की ओर से इस बार सिलेबस में बदलाव किया गया, लेकिन एनसीईआरटी समय से नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा पाया। इसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश में करीब 4500 सीबीएसई स्कूल हैं। अनुमान के अनुसार कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या चार से छह लाख के बीच है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जिन्हें अभी तक पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। कई स्कूलों में सिर्फ कुछ विषयों की किताबें पहुंची हैं, जबकि गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी मुख्य विषयों की पुस्तकें अब भी कम हैं। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में छात्रों को अवकाश के दौरान पढ़ाई और होमवर्क पूरा करने में परेशानी हो रही है। अभिभावक खोज रहे किताबें कई अभिभावक बाजार और आनलाइन माध्यमों से किताबें खोज रहे हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त स्टाक नहीं मिल रहा। कुछ स्कूल फिलहाल पीडीएफ नोट्स और फोटोकापी के सहारे पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सिलेबस बदलने के कारण पुरानी किताबों से पढ़ाना भी आसान नहीं है। इससे पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है और बच्चों की बुनियादी तैयारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर बोर्ड पैटर्न की तैयारी शुरू करने वाले छात्रों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अभिभावकों ने मांग की है कि एनसीईआरटी और संबंधित एजेंसियां जल्द पुस्तकें उपलब्ध कराएं, ताकि नए सत्र की पढ़ाई व्यवस्थित तरीके से शुरू हो सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा धावक अनिमेष कुजूर की ऐतिहासिक उपलब्धि और मल्हार की सांस्कृतिक धरोहर का किया उल्लेख

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और आमजनों के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व किसी राज्य की उपलब्धियों और प्रतिभाओं का उल्लेख करता है, तो वह केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं होता, बल्कि करोड़ों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, परिश्रम और पहचान को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलती है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ आज देश के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों, प्रतिभाओं और प्रेरक जीवन यात्राओं को राष्ट्रीय पहचान देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को जिस आत्मीयता और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया, वह देश के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाला है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों खिलाड़ियों से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह केवल रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और विश्वस्तरीय सोच की कहानी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यात्रा विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि जशपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर सैनिक स्कूल अंबिकापुर से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवा ने सीमित परिस्थितियों में अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से परिपूर्ण है और उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री और अनिमेष कुजूर के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी की सोच विशेष रूप से प्रेरक है। प्रधानमंत्री से बातचीत में अनिमेष ने बताया कि किस प्रकार कोविड काल के दौरान खेल के प्रति रुचि बढ़ी, साथियों के प्रोत्साहन से एथलेटिक्स में प्रवेश हुआ और कठिन चुनौतियों तथा संदेहों के बावजूद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना सकते हैं और भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह आत्मविश्वास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में खेल भावना का अत्यंत प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा केवल एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश का मान बढ़ाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कही गई यह बात कि "एक-दूसरे को चुनौती भी देना है, आगे निकलने का प्रयास भी करना है और साथ ही एक-दूसरे की मदद के लिए भी खड़े रहना है” वास्तव में भारत की नई खेल संस्कृति की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी सोच के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्हार की यह खोज केवल पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान-विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से ऐसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, तो इससे विरासत संरक्षण के प्रति समाज में नई जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित होती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ एपिसोड इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नया भारत अपनी प्रतिभा, परिश्रम, खेल भावना, संस्कृति और विरासत – सभी को समान सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर जशपुर का युवा खिलाड़ी देश को नई गति देने का सपना देख रहा है और दूसरी ओर मल्हार की धरोहर भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह दोहरी उपलब्धि पूरे प्रदेश में आत्मगौरव, प्रेरणा और नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन  … Read more

प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ राज्यपाल ने सुनी किसानों के साथ

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वैज्ञानिक आधुनिक कृषि तकनीक का व्यवहारिक अनुभव किसानों को दें। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा आस-पास के क्षेत्रों के किसानों को केंद्र में आमंत्रित किया जाना चाहिए। यहाँ किसानों को उनके सामर्थ्य और आवश्यकता के अनुरूप उपयोगी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाए। उन्हें कृषि यंत्रों का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाए, ताकि किसान इनका स्वयं उपयोग करने में सक्षम हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ 'मन की बात' केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, हमारे पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। राज्यपाल  पटेल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के पूर्व किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल के साथ किसानों, कृषि वैज्ञानिकों के साथ ‘मन की बात’ के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम का आयोजन रविवार को केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के सभागार में किया गया था। इस अवसर पर संचालक कृषि कल्याण  उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे। मन की बात राष्ट्र की सामूहिक चेतना राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से देश के सुदूर कोनों के गुमनाम नायकों की उपलब्धियों को बताते हैं, जिनके एकल प्रयासों ने समाज में बड़े बदलाव किए हैं। यह कार्यक्रम हमें सिखाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, क्योंकि जब पूरा देश एक दिशा में सोचता है और सामूहिक चेतना के साथ काम करता है, तो बड़े से बड़ा बदलाव आसानी से हो जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के लिये हैं किसान कल्याण सर्वोपरि राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कृषि वैज्ञानिकों को बदलते परिवेश में खेती पर होने वाले मौसम के प्रकोप को सहने और फसलों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ाने में किसानों की सहायता करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महिला किसानों की उपस्थिति पर हर्ष व्यक्त किया। बताया कि वर्तमान में केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों के केंद्र में किसान कल्याण सर्वोपरि है। सरकार किसानों के चहुंमुखी विकास और उनकी आय बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाने को तत्पर रहती है। मोदी जी के नेतृत्व में खेती को लाभकारी बनाने के लिए अनेक कार्य किए गए हैं, नई योजनाएं बनी हैं। उन्नत कृषि के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश में 3 करोड़ 'ड्रोन दीदी' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि में महिलाओं की भागीदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कृषि कल्याण वर्ष के माध्यम से आधुनिक खेती के विकास के द्वारा किसानों की आमदनी को बढ़ाने प्रयासों की सराहना की। गुजरात के कृषि मेलों की पहल का किया स्मरण राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अपने गृह राज्य गुजरात का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे गुजरात के नवसारी के रहने वाले हैं, जहाँ एक प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय स्थित है। उन्होंने याद दिलाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2007 में ऐतिहासिक 'कृषि मेलों' की शुरुआत कराई थी। इस अभिनव पहल के तहत उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को 'लैब से फील्ड' भेजने की शुरुआत की, ताकि वैज्ञानिक सीधे किसानों से जुड़ सकें। राज्यपाल ने बताया कि इन कृषि मेलों के माध्यम से ही गुजरात में रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में वर्मी कंपोस्ट केंचुआ खाद के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला, जिससे जैविक खेती की नींव मजबूत हुई। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के महान कृषि वैज्ञानिक, स्वर्गीय डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जी ने स्वयं गुजरात में एक माह तक प्रवास कर इन कृषि मेलों के सकारात्मक प्रभावों और उनके दूरगामी परिणामों का अध्ययन किया था। अनुसंधान केन्द्र का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के पूर्व केंद्र में विकसित किए गए आधुनिक उपकरण आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीक का अवलोकन किया। कृषि वैज्ञानिकों का उत्साह वर्धन किया और कहा कि कृषक उपयोगी यंत्रों और तकनीक के विकास को देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई है। केंद्र के निदेशक  सी.आर. मेहता ने स्वागत उद्बोधन में संस्थान की उपलब्धियां और नवाचार की जानकारी दी। आभार प्रदर्शन केंद्र के परियोजना समन्वयक  के.एन. अग्रवाल ने किया। मन की बात के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आई.सी.ए.आर. गान का प्रस्तुत किया गया। अनुसूचित जाति उप योजना के तहत किसानों को उन्नत कृषि किट प्रदान किए गए।  

वर्ष 2012 से 2017 तक भर्ती प्रक्रिया रही ठप, योगी सरकार ने मिशन मोड में पूरी की चयन प्रक्रिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे भर्ती संकट को समाप्त कर व्यवस्था परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पूर्व में वर्ष 2012 से 2017 तक माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप रही, जिसके कारण विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हो गए और शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिर गई।  वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद स्थिति तेजी से बदली। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए पारदर्शिता, सुशासन और मेरिट को केंद्र में रखा, जिसका परिणाम 33,401 पदों पर सफल चयन के रूप में सामने आया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से वर्ष 2022 तक प्रधानाचार्यों के 783, प्रवक्ता के 5,321 तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 27,297 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। इस प्रकार कुल 33,401 पदों पर भर्ती कर माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नया संबल प्रदान किया गया। नीति स्पष्ट, नीयत साफ और नतीजे सामने माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया की यह सफलता योगी सरकार की नीति, नीयत और नतीजों का स्पष्ट उदाहरण है। सरकार की नीति विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की रही, नीयत पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही, जबकि इसका नतीजा हजारों रिक्त पदों पर भर्ती के रूप में सामने आया। जहां पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चयन प्रक्रिया ठहराव का शिकार रही, वहीं योगी सरकार ने लंबित प्रक्रियाओं को गति देकर यह साबित किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक क्रियान्वयन से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है। माध्यमिक शिक्षा में 33 हजार से अधिक पदों पर भर्ती केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को गति मिली, युवाओं को अवसर मिला और विद्यालयों को शिक्षक मिले।  योगी सरकार ने दूर की विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा था। योगी सरकार ने इस चुनौती को शिक्षा सुधार के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए रिक्त पदों को भरने की दिशा में ठोस कदम उठाए। परिणामस्वरूप लंबे समय से लंबित चयन प्रक्रियाओं को गति मिली और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। बड़ी संख्या में टीजीटी, प्रवक्ता और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति से विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिली है। विद्यालयों में शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां भी महत्वपूर्ण साबित हुईं हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक वातावरण दोनों बेहतर हुए हैं। शिक्षा सुधारों को मिला मजबूत आधार प्रदेश में ऑपरेशन अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली जैसी पहल के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाई है। पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को नई गति मिली है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार और मजबूत हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों का स्वर्णिम कार्यकाल अभिनंदन योग्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के 12 वर्षों के स्वर्णिम कार्यकाल के लिए उनका अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्ग दर्शन में मध्यप्रदेश भी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद यहां सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन हमारी सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखा और पिछले दो साल में ही प्रदेश को 7 नए मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। मध्यप्रदेश में शाजापुर जिले की अपनी एक अलग पहचान रही है। शुजालपुर के सुंदरसी का संबंध पुराने समय में सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ता है। शुजालपुर शाजापुर जिले की सबसे सक्षम और संपन्न तहसील है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शुजालपुर में आयोजित कॉलेज चलो अभियान और प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के शुभांरभ के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा आयुष चिकित्सालय का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 388 करोड़ रुपये की लागत से 43 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। इसके साथ ही 70 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चिकित्सालय और 14 करोड़ 37 लाख की लागत से 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 4 सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 122 करोड़ रुपये की लागत से माँ शारदा सांदीपनि विद्यालय, महाराणा प्रताप सांदीपनि विद्यालय, मिहिर भोज सांदीपनि विद्यालय और राजा भोज सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में 14 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 4 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण संपन्न हुआ। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुरू से ही मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश था, लेकिन प्रदेश में 2002-03 तक केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित थी। गांवों में किसानों को बिजली नहीं मिलती थी, पानी-बिजली-सड़क, हर व्यवस्था में गढ्ढे थे। हमारी सरकार ने सिंचाई का रकबा बढ़ाया है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम भी दिलवाया है। इसी वर्ष किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा गया। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। हम किसान कल्याण वर्ष की घोषणाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जा चुका हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से प्रदेश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। राज्य के प्रत्येक गरीब, किसान, युवा और महिला सहित सभी वर्गों के जरूरतमंदों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आज देशभर में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया हैं। यह गर्व का विषय है। आज उज्जैन से लेकर अयोध्या और धार की भोजशाला तक जयकारे गूंज रहे हैं। हमारी सरकार न्यायालय के निर्णय को लागू कराने की प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गंगा प्रवाहमान है। नए मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज खुल रहे हैं। आगामी ढाई साल में प्रदेश के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि शुजालपुर शिक्षा की स्थली रही है। आज यहां से शाजापुर जिले को स्कूल शिक्षा और आयुष की बड़ी सौगात मिल रही है। शाजापुर को 4 नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया गया है। इनके नाम हमारे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रदेश में पिछले ढाई साल में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद 11 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जैन में आरंभ होगा शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय मंत्री  परमार ने कहा कि एक शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय उज्जैन में खोला जाएगा। नागरिकों के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। युवाओं को कृषि की पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। बच्चों को स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, जिसका परिणाम इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिला है। मंत्री  परमार ने शुजालपुर में सड़कों के चौड़ीकरण की आवश्यकता बताई तथा अन्य स्थानीय अपेक्षाओं से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया। मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर को मिलेगा सांसद  महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास के उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन मार्ग का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर और शुजालपुर के आसपास के क्षेत्र को भी मिलेगा। कार्यक्रम में शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, विधायक  घनश्याम चंद्रवंशी तथा  अरुण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिसोदिया तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। शुजालपुर के लिये मुख्यमंत्री ने की घोषणाएँ              पुलिस चौकी शुजालपुर से व्हाया भीलखेड़ी, मेहरखेड़ी, कालापीपल का 2 लाइन रोड              शाजापुर बायपास – आष्टा रोड से पचोर रोड – शुजालपुर बायपास              अकोदिया में कॉलेज              गौलाना में बायपास रोड              गौलाना को नगर पंचायत बनायेंगे              शुजालपुर में सुरक्षा कर्मियो के लिए पुलिस आवास              शुजालपुर थाना मण्डी में बल के लिये विभिन्न श्रेणी के 50 बल वृद्धि करने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर में शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से निकलते हुए आम जनता से मिलने के लिए डेढ़ किमी लंबा रोड शो किया। इस अवसर पर अनेक सामाजिक संस्थाओं के द्वारा 50 से अधिक मंचों से मुख्यमंत्री का पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री … Read more