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बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से

रायपुर बस्तर क्षेत्र के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने बस्तर ओलंपिक के तीसरे संस्करण के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे। तीन चरणों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक के विकासखंड स्तरीय आयोजन नवम्बर में होंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बस्तर संभाग के आयुक्त और सभी जिलों के कलेक्टरों को बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। बस्तर ओलंपिक में जूनियर वर्ग में 14 से 17 वर्ष आयु के बालक-बालिकाएं तथा सीनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे। नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों एवं पुनर्वासित सदस्यों की प्रतिभागिता सीधे संभाग स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी। 1 से 30 अक्टूबर तक होगा पंजीयन बस्तर ओलंपिक के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए 1 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक पंजीयन किए जाएंगे। नवम्बर और दिसम्बर में विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर इनके चरणबद्ध आयोजन होंगे। विकासखंड स्तर की प्रतियोगिताएं 1 नवम्बर से 13 नवम्बर तक, जिला स्तर की प्रतियोगिताएं 16 नवम्बर से 25 नवम्बर तक तथा संभाग स्तर की प्रतियोगिताएं 7 दिसम्बर से 11 दिसम्बर तक प्रस्तावित हैं।  बस्तर ओलंपिक के अंतर्गत एथलेटिक्स में 100 मीटर, 200 मीटर एवं 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो और 4×100 मीटर रिले रेस शामिल हैं। तीरंदाजी (30 मीटर एवं 50 मीटर), बैडमिंटन, फुटबॉल, कराते, कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल की भी स्पर्धाएं होंगी। हॉकी एवं वेटलिफ्टिंग का आयोजन सीधे जिला स्तर पर किया जाएगा। वहीं सीनियर महिला वर्ग के लिए रस्साकसी को प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है।  बस्तर ओलंपिक के पिछले दो संस्करण रहे काफी सफल बस्तर के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को पहचान कर खिलाड़ी के रूप में तैयार करने वर्ष 2024 में राज्य शासन द्वारा बस्तर ओलंपिक के पहले संस्करण का आयोजन किया गया था। पहले संस्करण में एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भागीदारी की थी। वहीं वर्ष 2025 में आयोजित दूसरे संस्करण में 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था। बस्तर के युवाओं को प्रेरित करने पहले संस्करण में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले 13 और दूसरे संस्करण के 18 खिलाड़ियों को यूथ आइकॉन के रूप में चिन्हित किया गया था।

‘लाल टोपी वालों के कारनामे भूली नहीं है यूपी की जनता’, अखिलेश पर अनिल राजभर का तीखा हमला

लखनऊ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हरे और लाल रंग को लेकर दिए बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच की सपा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने उस दौरान ‘लाल रंग के असर’ को खूब देखा और महसूस किया है। अनिल राजभर ने कहा कि लाल टोपी पहनकर समाजवादी पार्टी के लोग गरीबों की जमीन पर कब्जा किया करते थे और मां-बहनों की इज्जत-आबरू पर हाथ डालने की कोशिश करते थे। उन्होंने कहा कि लाल टोपी देखकर व्यापारी अपना शटर बंद कर देते थे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग रंग बदलने में माहिर हैं। सत्ता में रहते हैं तो लाल टोपी पहनकर जनता का शोषण करते हैं और सरकार से बाहर आते ही उन्हें क्रांति दिखाई देने लगती है। पुरानी पेंशन के मुद्दे पर भी अखिलेश को घेरा पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर अनिल राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि पुरानी पेंशन छीनी किसने थी। उन्होंने 28 मार्च 2005 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और इसी सरकार ने ‘नई पेंशन’ को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया था। उन्होंने कहा कि जनता इस बात को नहीं भूली है और समाजवादी पार्टी की ‘चाल और चलन’ को अच्छी तरह जानती है। जयंत चौधरी के मुद्दे पर भी अखिलेश पर हमला अखिलेश यादव के जयंत चौधरी पर निशाना साधने को लेकर भी अनिल राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी डर रही है और पार्टी के मुखिया को नींद नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को जो सबका अपमान करने का शौक है, वह उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगा। अनिल राजभर ने चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि देश की राजनीति में चौधरी साहब और उनके परिवार का सम्मान किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि चौधरी साहब के परिवार का जो अपमान किया गया है, उसका सबक प्रदेश के किसान, गरीब, पिछड़े और दलित समाजवादी पार्टी को सिखाएंगे। पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह पर भी पलटवार अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों को समाजवाद पढ़ने की सलाह दिए जाने पर भी अनिल राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कैमरों के सामने असहज हो जाते हैं और किसी की जाति, चैनल या घर के बारे में पूछने लगते हैं। अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया को किसी पर भरोसा नहीं है और किसी का अपमान करने में उन्हें एक-एक क्षण की भी देरी नहीं लगती।

मतदाताओं को बड़ी राहत, SIR पूरा होने वाले राज्यों में फॉर्म-6 से हटाई गई अतिरिक्त घोषणा

रांची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के आखिरी दिन बुधवार यानी 30 सितंबर 2026 को झारखंड के लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है. निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन मतदाता नामांकन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है. इसके बाद नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. यह बदलाव उन राज्यों में लागू किया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब नहीं देनी होगी माता-पिता की पुरानी जानकारी SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि वे या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी पहले के किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं. यदि परिवार का कोई सदस्य पुरानी मतदाता सूची में दर्ज था, तो उससे जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने का विकल्प था. फॉर्म-6 से यह हिस्सा हटने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाएगी. गैर-SIR अवधि में सिर्फ वैधानिक फॉर्म-6 निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लागू रहने वाली आवश्यकता थी. SIR पूरा होने के बाद गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी नए मतदाता अब निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे. ईसीआईनेट और CEO पोर्टल से भी हटाया गया विकल्प SIR पूरी कर चुके राज्यों में ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के अलावा संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है. वहीं जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा ईसीआईनेट पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी. इसका मतलब है कि यह बदलाव सभी राज्यों में एक साथ लागू नहीं हुआ है, बल्कि SIR की स्थिति के आधार पर व्यवस्था अलग रखी गई है. 26 सितंबर की बैठक के बाद आया फैसला फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सदस्यता वाले पूर्ण निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद आया. बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा SIR के लिए थी. गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर उठे थे सवाल फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने का मुद्दा विवाद में रहा था. निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता. निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी. संधू ने घोषणा को बताया था अनधिकृत ईसीआईनेट पर ऑनलाइन फॉर्म-6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की थी. हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयानों में कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी गई थी. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा था कि बिहार में SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिरिक्त घोषणा को बरकरार रखा था. आयोग के मुताबिक, इसलिए इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकता के रूप में लागू किया गया था. अब SIR पूरी कर चुके राज्यों में इसे हटाने के फैसले से सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और SIR प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है. चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी चर्चा यह फैसला ऐसे समय आया है जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने की बात भी कही थी. आयोग ने कहा, SIR के आदेश सर्वसम्मत थे हालांकि 26 सितंबर के अपने बयान में निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी. ऐसे में फॉर्म-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने का ताजा फैसला आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद लागू व्यवस्था के रूप में सामने आया है. SIR पूरी कर चुके राज्यों में अब मतदाता नामांकन के लिए सामान्य वैधानिक फॉर्म-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा.

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की पहल पर भरदा में जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान

रायपुर दुर्ग जिले के ग्राम भरदा में विगत 26 सितंबर को अतिवृष्टि और जलभराव से उत्पन्न गंभीर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री  गजेंद्र यादव की त्वरित पहल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से भेंट के दौरान ग्रामीणों और किसानों द्वारा की गई मांग पर संज्ञान लेते हुए, जिला प्रशासन ने 12.87 लाख रूपए की लागत से पक्की निकासी नाली निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।     आवंटन कुल 12.87 लाख रूपए के इस निर्माण कार्य में 2.56 लाख रूपए मजदूरी मद के लिए और 10.31 लाख रूपए सामग्री मद के लिए आवंटित किए गए हैं। यह कार्य वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत कराया जाएगा। यह निकासी नाली पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनाई जाएगी, जिससे बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव से स्थायी रूप से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाएं   जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत विकास कार्यों को स्थानीय मूलभूत आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत मांग करने वाले पात्र ग्रामीणों को 15 दिवस के भीतर 300 रूपए प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। नाली निर्माण की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के तत्काल सर्वेक्षण के निर्देशों पर ग्रामवासियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक नशामुक्ति पदयात्रा में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा में शामिल हुए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ मुख्यमंत्री  साय ने पदयात्रा कर नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया। पदयात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री  साय ने लाल चौक स्थित लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नशामुक्त और स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। नशा केवल किसी एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। युवा स्वस्थ होंगे, शिक्षित और कुशल होंगे तथा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो प्रदेश तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, खेल और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग अपने परिवार, समाज और प्रदेश की प्रगति में करे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। महात्मा गांधी ने संयम, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया था। ऐसे में नशामुक्ति का यह अभियान उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सेवा को सर्वोपरि रखा है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी शासन की यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के विभिन्न कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रदेशभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही युवाओं को सेवा और राष्ट्र निर्माण के भाव से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गुजरात के वडनगर से निकले बाइक राइडर्स का रायपुर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस यात्रा में बस्तर के युवा भी उत्साहपूर्वक सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा, जिसके कारण वहां विकास की गति बाधित हुई। आज क्षेत्र में शांति और विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार तथा रोजगार के अवसरों के विस्तार पर तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने के लिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर सहित आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए द्वार खुलेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो नशे से दूर रहकर अपने सामर्थ्य, परिश्रम और नवाचार से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने विधायक  पुरंदर मिश्रा द्वारा विगत 27 वर्षों से नशामुक्ति, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसे सामाजिक विषयों को लेकर पदयात्रा आयोजित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आता है। जब कोई अभियान समाज का अभियान बन जाता है, तभी उसके स्थायी और व्यापक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि इन पदयात्राओं से प्रेरित होकर अब तक हजारों लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह भी अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा और विशेष रूप से युवाओं को स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवाओं से आह्वान किया कि वे नशामुक्ति के संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समाज तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ युवा, एक स्वस्थ परिवार और एक जागरूक समाज मिलकर ही स्वस्थ, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  गौरीशंकर वास, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मती मोना सेन, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मती ममता साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं एवं आमजन उपस्थित थे।

समय, समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलना ही महापुरुषों का गुण: सीएम योगी

श्रीराम मंदिर के लिए जीवन समर्पित किया गोरक्षपीठ के पूज्य संतों ने: मुख्यमंत्री राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन समय, समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलना ही महापुरुषों का गुण: सीएम योगी जिसका गुणगान करें, उसके अनुरूप बनने का प्रयास भी करें, स्थिरता ही जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र: मुख्यमंत्री विसंगति को अपने अंदर समाहित कर लोक कल्याण का आदर्श स्थापित करना ही शिवत्व: सीएम योगी गोरखपुर,   गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ जी उपस्थित रहे तो गुलामी का ढांचा हटाने के लिए श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का नेतृत्व महंत अवेद्यनाथ जी ने किया। गोरक्षपीठ के दोनों पूज्य संतों ने संत समाज को एकजुट करने के साथ ही श्रीराम मंदिर, समाज व राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। समय, समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलना ही महापुरुषों का गुण होता है। सीएम योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन बुधवार (आश्विन कृष्ण चतुर्थी) को अपने पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन दोनों महंतकी पुण्यस्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र है, स्थिरता। स्थिरता का भाव हमें आगे बढ़ाने का माध्यम होता है। जब हम दोनों पूज्य संतों ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के जीवन चरित्र को पढ़ते हैं तो हम सबको ऐसी ही प्रेरणा मिलती है। शिवभक्त हैं तो सम-विषम परिस्थितियों में समान रहें भगवान शिव और शिवभक्ति के महात्म्य को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जिसका गुणगान करते हैं, हमें उसके अनुरूप बनने का प्रयास भी करना होता है। यदि हम शिवभक्त हैं तो भगवान शंकर की तरह सम-विषम परिस्थितियों में एक समान व निश्छल भी रहना चाहिए। हमें विसंगतियों के बीच लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है। भगवान शिव ने विषम परिस्थितियों में कंठ में विष धारण किया और इसीलिए वह नीलकंठ कहे जाते हैं। समाज की विसंगति को अपने अंदर समाहित कर समाज और लोक कल्याण के लिए आदर्श स्थापित करना ही शिवत्व है।  महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों का विस्तार हैं महंत अवेद्यनाथ के जीवन संकल्प मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के जीवन संकल्प गुरु परंपरा में महंत दिग्विजयनाथ जी के आदर्शों व मूल्यों का विस्तार हैं। समाज में जब विसंगतियां आती हैं तो उसका परिमार्जन करने का सामर्थ्य हिंदू समाज रखता है। यही भाव हमें ब्रह्मलीन महंतद्वय के जीवन में भी देखने को मिलता है। महंत दिग्विजयनाथ जी हिंदू समाज की ताकत को प्रबल वेग से बढ़ाने के पक्षधर थे तो महंत अवेद्यनाथ जी ने इसके लिए हिंदू समाज को एकजुट करने का अहर्निश कार्य किया। उनके द्वारा प्रारंभ किया गया सहभोज अभियान हिंदू समाज की बिखरी ताकत को एकसूत्र में पिरोने के लिए था।  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार किया महंत जी ने सीएम योगी ने कहा कि स्वतंत्र भारत में शिक्षा गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए, यह महंत दिग्विजयनाथ जी का विचार था। महंत अवेद्यनाथ जी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ इसके विस्तार और विस्तार से स्वावलंबन से जोड़ने का भी कार्य किया। उन्होंने एजुकेशन को स्किलिंग के साथ जोड़ने का भी काम किया। शिक्षा और कौशल विकास के लिए उन्होंने अनेक संस्थाओं की स्थापना की। शिक्षा के संग खेल को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने स्कालरशिप की भी व्यवस्था की। छात्रों को रहने की बेहतर व्यवस्था देने के लिए महंत जी ने प्रताप आश्रम और अन्य छात्रावासों की व्यवस्था की।  राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध कराती है गोरक्षपीठ: बालकनाथ श्रद्धांजलि समारोह में मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर (रोहतक) के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक महंत बालकनाथ ने महंतद्वय को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दोनों पूज्य संतों ने गोरक्षपीठ का नेतृत्व करते हुए सनातन संस्कृति की पहचान को मजबूत किया। गोरक्षपीठ सभी लोगों को राष्ट्र के प्रति कर्तव्य बोध कराती है। इस पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की ख्याति देश-दुनिया में फैल रही है। योगी जी, बिना भेदभाव जन-कल्याण व विकास के लिए दिन-रात कार्य करते हैं।   दिव्यदर्शी व दूरदर्शी संत थे महंत अवेद्यनाथ: डॉ. रामकमलाचार्य इस अवसर पर श्रीरामजानकी मंदिर वाराणसी से पधारे जगद्गुरू रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज दिव्यदर्शी व दूरदर्शी संत थे। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में उनकी भूमिका युगों-युगों तक स्मरित की जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि वह अपने कार्यों के बल पर दिग्विजयी यात्रा जारी रखते हुए तीसरी बार भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। गोरक्षा व राष्ट्रीय संस्कृति के संरक्षण में गोरक्षपीठ की अग्रणी भूमिका: विद्या चैतन्य नैमिषारण्य से पधारे स्वामी विद्या चैतन्य जी महाराज ने कहा कि गोरक्षा, सनातन धर्म, राष्ट्रीय संस्कृति के संरक्षण के लिए गोरक्षपीठ सदैव अग्रणी भूमिका निभाती रही है। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ, अपने पूर्ववर्ती ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी और ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी के संकल्पों को आगे बढ़ा रहे हैं। नीमच, मध्य प्रदेश से आए महंत योगी लालनाथ जी महाराज ने ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रसंत अवेद्यनाथ जी ने रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ की कमान उस कालखंड में संभाली, जब कोई अन्य इसके लिए तैयार नहीं था। हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजूदास ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के जीवन का मिशन था। आज अयोध्या में न केवल मंदिर बन गया है, बल्कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का वैभव पूरे विश्व में गुंजायमान है। श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीयता और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी का योगदान अनिर्वचनीय है।  लोक कल्याण को समर्पित रहा ब्रह्मलीन महंतद्वय का जीवन: महापौर कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ब्रह्मलीन … Read more

UP Rise 2026: पेट्रो वाटर ने जीता Build for UP Pitch Finale, Neuro Grip-Agri Nova उपविजेता

एमआईईटी मेरठ में यूपीराइज 2026 का आयोजन, युवाओं ने दिखाए नवाचार और उद्यमिता के आइडिया बिल्ड फॉर यूपी पिच फिनाले में पेट्रो वाटर विजेता, न्यूरो ग्रिप और एग्री नोवा रहे उपविजेता 12 छात्र टीमों ने स्थानीय समस्याओं के समाधान पर आधारित आइडिया विशेषज्ञों के सामने किए प्रस्तुत टाइम्स नेटवर्क और जूम के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में करीब 1,650 लोगों ने कराया पंजीकरण लखनऊ  योगी सरकार के कैंपस इनोवेशन और करियर ड्राइव से जुड़े यूपीराइज 2026 कार्यक्रम का आयोजन मेरठ के एमआईईटी में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नवाचार, उद्यमिता, करियर विकल्पों और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक सोच से जोड़ना रहा। कार्यक्रम टाइम्स नेटवर्क और जूम के सहयोग से प्रस्तुत किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया और बिल्ड फॉर यूपी पिच फिनाले में 12 छात्र टीमों ने अपने आइडिया प्रस्तुत किए। स्टार्टअप और उद्यमिता से जोड़ रहा यूपीराइज 2026 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल, रोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यूपीराइज 2026 का विश्वविद्यालय दौरा कैंपस स्तर पर युवाओं को अपने विचार प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने का मंच उपलब्ध करा रहा है। इससे पहले यह अभियान कानपुर, आगरा, लखनऊ, रायबरेली, मथुरा, बरेली और सहारनपुर समेत विभिन्न शहरों में पहुंच चुका है। बिल्ड फॉर यूपी पिच फिनाले में पेट्रो वाटर विजेता एमआईईटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पंजीकरण और एक्टिवेशन जोन में छात्रों की बढ़-चढ़ कर भागीदारी रही। सीएम-युवा योजना जागरूकता स्टॉल, स्कोरकार्ड गतिविधि और शक्ति जोन की स्टिकी-नोट दीवार ने छात्रों को कार्यक्रम से जोड़े रखा। इसके बाद सभागार में बिल्ड फॉर यूपी पिच फिनाले आयोजित किया गया। 12 टीमों ने स्थानीय समस्याओं पर आधारित अपने समाधान और विचार निर्णायकों के सामने प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन विशेषज्ञ सलाहकारों के पैनल ने लाइव किया और समापन पर विजेता टीम को मंच पर 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। बिल्ड फॉर यूपी में पेट्रो वाटर विजेता रहा। न्यूरो ग्रिप रनर अप-1 और एग्री नोवा रनर अप-2 रहा है। मेंटर्स के मार्गदर्शन में छात्रों ने सीखे गुर कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रदेश मंत्री महामेधा नागर मुख्य अतिथि रहीं। कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी और युवा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर भी फोकस रहा। मेंटर पैनल में स्केलेबल कंज्यूमर इंटरनेट प्रोडक्ट्स और इनोवेशन के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले हर्षित देसाई, डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन विशेषज्ञ जयराज जाधव तथा कंटेंट स्ट्रेटजी और फॉर्मेट क्रिएशन के क्षेत्र में कार्यरत क्रिएटिव प्रोड्यूसर बिपाशा सारंगी शामिल रहीं। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से छात्रों को प्रोडक्ट डेवलपमेंट, डिजिटल बिजनेस और क्रिएटिव स्टोरीटेलिंग के अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला। डिजिटल माध्यम से 2 लाख तक पहुंचा कार्यक्रम कार्यक्रम में करीब 1,650 लोगों ने पंजीकरण कराया और उपस्थित हुए। डिजिटल माध्यम से करीब दो लाख तथा ऑफलाइन माध्यम से करीब आठ हजार लोगों तक कार्यक्रम की पहुंच रही। कैंपस एंबेसडर सलोनी शर्मा, आदर्श शुक्ला और आस्था चौहान ने छात्र सहभागिता बढ़ाने में सहयोग किया। कार्यक्रम में यूपीआरआईएसई की मानक ब्रांडिंग और प्रोडक्शन व्यवस्था भी दिखाई दी। पंजीकरण एवं मीडिया बैकड्रॉप, ऑक्टोनॉर्म एक्टिवेशन जोन, स्टैंडी, बैनर और साइनेज के जरिए पूरे परिसर में एक समान प्रस्तुति तैयार की गई।

दिनेश प्रताप सिंह का पलटवार-‘अखिलेश यादव ने लाल रंग को भय का प्रतीक बना दिया’

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लाल-हरे रंग वाले बयान पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में रंगों का महत्व जरूर है, लेकिन राजनीति और जनसेवा में रंग नहीं, बल्कि जनता की सेवा मायने रखती है। उन्होंने कहा कि कोई सफेद, हरा या लाल कपड़ा पहनकर अथवा भगवा झंडा लेकर भी जनता की सेवा कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि जनता की बेहतर सेवा कौन कर रहा है। हालाँकि अखिलेश यादव ने लाल रंग को भय का प्रतिक बना दिया है।  दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर आधारित है और पार्टी के लिए हर भारतीय नागरिक समान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी भावना के साथ काम कर रहे हैं। मंत्री ने दावा किया कि देश सुरक्षित है, देशवासियों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है और देश का सम्मान सुरक्षित है। मंत्री ने कहा की प्रदेश में पहले क्या होता था यह जानते है और आज योगी आदित्यनाथ की सरकार लोग अमन चैन से सर उठाकर जी रहे है। रैलियों की अनुमति के आरोपों पर भी पलटवार अखिलेश यादव की ओर से राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं मिलने के आरोपों पर दिनेश प्रताप सिंह ने इसे मिथ्या आरोप बताया। उन्होंने रायबरेली का उदाहरण देते हुए कहा कि अखिलेश यादव वहां बैठक करने आए थे और उन्हें न किसी ने रोका और न ही किसी ने पूछा। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम का न होना संबंधित दल के अपने कारण हो सकते हैं, लेकिन इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है।  PDA पर बोले-‘डिवाइड एंड रूल’ की राजनीति कर रहे अखिलेश दिनेश प्रताप सिंह ने PDA की राजनीति पर सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘डिवाइड एंड रूल’ यानी ‘बांटो और राज करो’ की नीति लोकतंत्र और समाज सेवा के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ हिस्से को ‘हमारे’ और कुछ को ‘हमारे नहीं’ बताकर राजनीति करना उसी सोच को दर्शाता है। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव इसी तरह समाज को हिस्सों में बांटकर राजनीति कर रहे हैं। इसके विपरीत भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के आधार पर सभी की सेवा और सम्मान की बात करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा समाज को बांटकर सत्ता हासिल करने के बजाय सभी की सेवा के जरिए जनता का समर्थन हासिल करने में विश्वास रखती है।

मुख्य सचिव बर्णवाल से मिलीं बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा

भोपाल  मुख्य सचिव  अशोक वर्णवाल से मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बुधवार को भेंट कर प्रदेश में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, उनकी शिकायतों के त्वरित निराकरण और विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। डॉ. शर्मा ने मुख्य सचिव के समक्ष विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, बालिका गरिमा सूचकांक, स्पॉन्सरशिप तथा बाल संरक्षण से संबंधित विषयों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की गरिमा, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय जरूरी है। बैठक में आयोग द्वारा प्रदेश स्तर पर बच्चों की शिकायतों के निराकरण के लिए शिविर आयोजित करने के संबंध में भी चर्चा हुई। ऐसे शिविरों के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनकर उनके त्वरित समाधान की दिशा में कार्रवाई किए जाने पर विचार किया गया। आयोग की अध्यक्ष ने बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर शासन और आयोग के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर भी चर्चा की। बैठक में बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अनुकूल वातावरण विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।  

NCR में डीजल ऑटो पर सख्ती, अलवर के 583 ऑटो 31 दिसंबर तक होंगे बाहर

अलवर एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन वाहनों के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इसी के तहत अलवर में भी डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। प्रादेशिक परिवहन कार्यालय, अलवर के क्षेत्राधिकार में वर्तमान में 583 डीजल ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं। इन सभी वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक प्रचलन से बाहर करना अनिवार्य है। परिवहन विभाग की ओर से डीजल ऑटो रिक्शा के वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें तय समय सीमा से पहले अपने वाहन को स्वच्छ ईंधन विकल्प में बदलने या अपग्रेड करने के लिए कहा जा रहा है। वाहन मालिक डीजल ऑटो को सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन में बदल सकते हैं। एनसीआर क्षेत्र में नए डीजल ऑटो रिक्शा के पंजीयन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। 1 जनवरी 2023 से एनसीआर में नए डीजल ऑटो का पंजीयन प्रतिबंधित है। अब पुराने डीजल ऑटो को भी 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह हटाना होगा। इसके बाद 1 जनवरी 2027 से एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ईंधन से चलने वाले ऑटो रिक्शा के संचालन की अनुमति होगी। ऐसे में अलवर में चल रहे 583 डीजल ऑटो रिक्शा के मालिकों को आने वाले समय में अपने वाहन बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने होंगे। मंडी मोड़ पर ऑटो चालकों को दी जानकारी परिवहन कार्यालय की ओर से मंडी मोड़ स्टैंड, अलवर पर ऑटो रिक्शा संचालकों को नियमों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने ऑटो चालकों को बताया कि 31 दिसंबर 2026 तक डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा को कार्यालय के क्षेत्राधिकार से बाहर करना होगा। ऑटो संचालकों को यह भी समझाया गया कि तय समय सीमा के बाद डीजल ऑटो चलाने पर विभाग की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग अब पंजीकृत डीजल ऑटो मालिकों तक नियमों की जानकारी पहुंचाने में जुटा है। प्रदूषण कम करने के लिए नियम एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के वाहनों को स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने की योजना के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। डीजल ऑटो की जगह सीएनजी और इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा मिलने से परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य है। अलवर एनसीआर का हिस्सा होने के कारण यहां भी इन नियमों को लागू किया जा रहा है। अब डीजल ऑटो मालिकों के पास 31 दिसंबर 2026 तक अपने वाहन को बदलने या स्वच्छ ईंधन विकल्प अपनाने का समय है। 1 जनवरी 2027 के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजल ऑटो के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।